टीआईटी टेक्नोक्रेट्स ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की “ग्रेजुएशन सेरेमनी-2025” का हुआ आयोजन

स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक विश्व के भरण पोषण में सामर्थ्यवान बनेगा भारत : मंत्री परमार सभी की संकल्पशक्ति और सहभागिता से पुनः विश्वगुरु बनेगा भारत- मंत्री परमार टीआईटी टेक्नोक्रेट्स ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की "ग्रेजुएशन सेरेमनी-2025" का हुआ आयोजन भोपाल स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष@2047 तक भारत को विकसित भारत बनाने का संकल्प पूरे देश का संकल्प है। विश्वमंच पर पुनः सिरमौर बनाने के लिए, सभी को सहभागिता करने की आवश्यकता है! हम सभी को अपना योगदान देना होगा। भारत की गौरवशाली सभ्यता, विरासत, ज्ञान परम्परा एवं भाषाओं से प्रेरणा लेकर हम सभी को राष्ट्र के पुनर्निर्माण में सहभागिता करनी होगी। स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 में जब भारत विश्वगुरु भारत बनेगा, तब हमारा विकसित भारत ऊर्जा एवं खाद्यान्न में आत्मनिर्भर होकर विश्व के अन्य देशों के भरण पोषण में भी सामर्थ्यवान बनेगा। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने मंगलवार को भोपाल स्थित "टीआईटी टेक्नोक्रेट्स ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस" के सभागृह में आयोजित "ग्रेजुएशन सेरेमनी-2025" के अवसर पर कही। मंत्री परमार ने दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को उपाधि एवं मेडल प्रदान कर, उन्हें उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं भी प्रेषित की। परमार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए भारत की समृद्ध विरासत, ज्ञान परम्परा और संकल्पना के संदर्भ में प्रकाश डालते हुए अभिप्रेरित किया। मंत्री परमार ने कहा कि भारत अपनी ज्ञान परम्परा के आधार पर विश्वमंच पर सिरमौर था। भारत के पुरातन ज्ञान को पुनः विश्वमंच पर युगानुकुल परिप्रेक्ष्य में भारतीय दृष्टिकोण के साथ, प्रस्तुत करना होगा। इसके लिए हमें हमारे पूर्वजों की गौरवशाली ज्ञान परम्परा पर गर्व का भाव जागृत कर, उनके बनाए मार्ग पर चलने की आवश्यकता है। मंत्री परमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा में इंजीनियरिंग सहित समस्त विषयों में भारत का पुरातन ज्ञान विद्यमान है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने हमें हीन भावना से मुक्त होकर स्वाभिमान को जागृत करने का अवसर दिया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने शिक्षा में भारतीय दृष्टि के समावेश का अवसर दिया है। इसके परिप्रेक्ष्य में हर विद्या हर क्षेत्र में भारत केंद्रित शिक्षा का समावेश हो रहा है। हमारे पूर्वजों ने प्रकृति, जल स्त्रोतों एवं सूर्य सहित समस्त ऊर्जा स्रोतों के संरक्षण के भाव से, शोध एवं अनुसंधान के आधार पर कृतज्ञता व्यक्त करते हुए, वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ समाज में परम्परा के रूप में स्थापित की। कृतज्ञता ज्ञापित करना हमारी संस्कृति और सभ्यता है। हमारे पूर्वज सूर्य उपासक थे, प्राकृतिक ऊर्जा स्रोतों की उपयोगिता और महत्व को जानते थे। मंत्री परमार ने कहा कि स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष@2047 तक भारत, सौर ऊर्जा के माध्यम से ऊर्जा के क्षेत्र में आत्म निर्भर होकर, अन्य देशों की पूर्ति करने में समर्थ देश बनेगा। साथ ही वर्ष@2047 तक खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्म निर्भर होकर, अन्य देशों का भरण पोषण करने में भी सामर्थ्यवान देश बनेगा। हम सभी की सहभागिता से, अपने पूर्वजों के ज्ञान के आधार पर पुनः विश्वमंच पर सिरमौर राष्ट्र का पुनर्निर्माण होगा। इसके लिए हमें स्वाभिमान के साथ हर क्षेत्र में अपने परिश्रम और तप से आगे बढ़कर, विश्व मंच पर अपनी मातृभूमि का परचम लहराना होगा। हम सभी की संकल्पशक्ति और सहभागिता से भारत पुनः "विश्वगुरु" बनेगा।   recent visitors 52

ईडी ने राहुल-सोनिया गांधी और सैम पित्रोदा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया, 25 अप्रैल को सुनवाई

नई दिल्ली नेशनल हेराल्ड मामले में गांधी परिवार की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने इस मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी और ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दायर ईडी के आरोपपत्र में सुमन दुबे और अन्य के नाम भी शामिल हैं। अदालत ने मामले में संज्ञान पर बहस के लिए 25 अप्रैल की तारीख तय की है। इससे पहले ईडी ने इस मामले से जुड़ी संपत्तियों पर कब्जा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। राज्यसभा सांसद एवं दिग्गज कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे बदले की राजनीति बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "नेशनल हेराल्ड की संपत्ति जब्त करना कानून के शासन का मुखौटा पहनकर सरकार प्रायोजित अपराध है। सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करना प्रधानमंत्री और गृह मंत्री द्वारा बदले की राजनीति और धमकी के अलावा कुछ नहीं है। कांग्रेस और उसका नेतृत्व चुप नहीं रहेगा।" राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री एवं दिग्गज कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला बताया। उन्होंने 'एक्स' पर लिखा, "मोदी सरकार की एजेंसी ईडी द्वारा कांग्रेस पार्टी और नेशनल हेराल्ड की 661 करोड़ रुपए की संपत्तियों को कब्जे में लेने की कार्रवाई लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास है। भाजपा सरकार की मंशा है कि ऐसे प्रयासों से वह धीरे-धीरे कांग्रेस को आर्थिक रूप से अक्षम बना दे। लोकसभा चुनाव से पहले आयकर विभाग के जरिए कांग्रेस के बैंक खातों को सील कर ऐसा प्रयास किया गया था। पहले आईटी और अब ईडी की यह कार्रवाई निंदनीय है।" उन्होंने लिखा, "नेशनल हेराल्ड केस को अब पांच साल से भी अधिक का समय हो गया है। ईडी कांग्रेस के खिलाफ तो गैर-कानूनी रूप से कार्रवाई कर रही है, वहीं भाजपा को मिले इलेक्टोरल बॉन्ड्स में साफ तौर पर कंपनियों से अवैध वसूली के सबूत मिले, परंतु ईडी ने किसी भाजपा नेता को एक नोटिस तक नहीं दिया। इसी प्रकार रॉबर्ट वाड्रा को बार-बार पूछताछ के लिए बुलाकर मीडिया ट्रायल किया जा रहा है। कांग्रेस एक जन आंदोलन की पार्टी है। ऐसी कार्रवाइयों से भाजपा सरकार और ईडी हमारे मनोबल को नहीं तोड़ सकती।" उल्लेखनीय है कि नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र की स्थापना 1938 में जवाहरलाल नेहरू ने की थी। इस समाचार पत्र को एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) द्वारा प्रकाशित किया जाता था। वर्ष 2008 में वित्तीय संकट के बाद इसे बंद करना पड़ा, जहां से इस विवाद की शुरुआत हुई। साल 2010 में यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (वाईआईएल) नाम की कंपनी बनी, जिसमें सोनिया और राहुल गांधी की 38-38 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने साल 2012 में आरोप लगाया कि यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने एजेएल की 2,000 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तियों को मात्र 50 लाख रुपए में हासिल किया और उन्होंने धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया। मामला अदालत में भी गया और बाद में ईडी ने इसकी जांच शुरू की। recent visitors 49

वेस्टर्न बायपास बनने से साडा को मिलेगा लाभ, व्यापारिक गतिविधियां और बसाहट बढ़ेगी

ग्वालियर आगरा-इंदौर रूट पर रायरू निरावली से काउंटर मैग्नेट सिटी होते हुए शिवपुरी हाइवे के पनिहार तक 28.8 किलोमीटर में वेस्टर्न बायपास(Western Bypass) बनाने की तैयारी कर ली गई है। वेस्टर्न बायपास बनने से वाहन चालकों का 32 किलोमीटर का चक्कर और 40 मिनट का समय बचेगा। अभी यह 1.25 घंटे में तय होता है। साथ ही बायपास पर एक साथ 25 से 30 हजार वाहन गुजर सकेंगे। जमीन अधिग्रहित करने की अधिसूचना एनएचएआई(NHAI) ने बायपास के लिए जमीन का अधिग्रहण कर लिया है। 1347.6 करोड़ की लागत से तैयार होने जा रहे 28.8 किलोमीटर लंबे इस बायपास का कार्य हिजवेज कंपनी को दिया गया है। बायपास(Western Bypass) के लिए 15 गांव की 110 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करने की अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है। अक्टूबर से इसका कार्य शुरू हो जाएगा। कंपनी को यह कार्य दो साल में पूरा करना होगा। दो जिलों के 15 गांवों से होकर गुजरेगा बायपास ग्वालियर : बरौआ नूराबाद, निरावली, गजीपुरा, जिनावली, बिलपुरा, जिगसौली, कुलैथ, सोजना, परपटे का पुरा व तिघरा, पनिहार व रामपुर। मुरैना : बानमोर कलां, बानमोर खुर्द, जयपुर उर्फ नयागांव। दो फ्लाई ओवर व एक आरओबी भी बनेगा बानमोर से पनिहार तक बन रहे वेस्टर्न बायपास पर सात छोटे पुल, 18 अंडर पास, दो फ्लाई ओवर और एक आरओबी बनाया जाएगा। दोनों फ्लाई ओवर 60-60 मीटर के होंगे। यह लाई ओवर बानमोर और नूराबाद में बनाए जाएंगे। बायपास पर एकसाथ 25 से 30 हजार वाहन गुजर सकेंगे। यह होगा वाहन चालकों को फायदा वेस्टर्न बायपास बनने से आगरा-इंदौर रूट पर हर दिन गुजरने वाले 12 से 15 हजार छोटे-बड़े वाहन चालकों को फायदा मिलेगा। अभी तक वाहन चालकों को बेला की बाबड़ी से शिवपुरी लिंक रोड होकर सिकरौदा तिराहा होते हुए झांसी बायपास से रायरू अथवा बानमोर पहुंचने में लगभग 60 किलोमीटर का सफर करना होता है। वहीं वेस्टर्न बायपास के बनने से यह सफर 28.8 किमी में ही पूरा हो जाएगा। इससे वाहन चालकों को 32 किलोमीटर का चक्कर और 40 मिनट का समय बचेगा। साडा को मिलेगा लाभ: व्यापारिक गतिविधियां और बसाहट बढ़ेगी वेस्टर्न बायपास बनने से काउंटर मैग्नेट सिटी में बसाहट और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। क्योंकि बायपास का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा इसी एरिया से गुजर रहा है। इससे साडा और आसपास के क्षेत्रों में आवासीय व व्यवसायिक प्रोजेक्ट आएंगे और बसाहट के साथ ही व्यापारिक गतिविधियां बढेंगी। क्योंकि यहां पर लॉजिस्टिक पार्क, इंडस्ट्रीज, स्कूल, कॉलेज सहित अन्य संस्थानों के लिए भी जगह आरक्षित की जाएगी। ये संभावनाएं कुलैथ, जिगसौली, सोजना, पनिहार, जिनावली, गजीपुरा क्षेत्र में भी देखी जा रही हैं। साडा के दोनों ओर सर्विस रोड भी बनाई जा रही है। प्रोजेक्ट में यह तैयार     रायरू के निरावली से शुरू होगा बायपास, जो पनिहार तक बनाया जाएगा।     बायपास का लंबा हिस्सा सोन चिरैया अभयारण क्षेत्र से भी गुजरेगा। वाइल्ड लाइफ विभाग ने इस क्षेत्र में एनिमल अंडरपास व लाई ओवर बनाने पर ही एनओसी दी है।     वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट में एनिमल अंडरपास लाई ओवर (पशुओं की आवाजाही) के लिए अलग से रास्ते होंगे।     वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट में कुल 154 हेक्टेयर जमीन का उपयोग होगा, इसमें वाइल्ड लाइफ की 41 और वन विभाग की करीब तीन हेक्टेयर जमीन है। जबकि 15 गांव की 110 हेक्टेयर जमीन शामिल है।   recent visitors 32

ग्वालियर को भविष्य में जलसंकट का सामना नहीं करना पड़ेगा, प्रतिदिन 150 एमएलडी पानी मिलेगा

ग्वालियर  एमपी के ग्वालियर में चंबल नदी और कोतवाल बांध से ग्वालियर तक पानी लाने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू हो गया है। इससे ग्वालियर शहर की जनता को 30 वर्ष तक भरपूर मात्रा में पानी मिलेगा। भविष्य में जलसंकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।  नगर निगम ने 24 मार्च-2024 को चंबल से पानी लाने के लिए 458.68 करोड़ रुपए का ठेका इनविराड प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को दिया है और कंपनी ने कार्य शुरू कर दिया है। यह कार्य कंपनी को 24 महीने में पूरा करना है। चंबल से ग्वालियर को प्रतिदिन 150 एमएलडी पानी मिलेगा, जो शहर की बढ़ती आबादी की पानी की जरूरत को पूरा करेगा। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से 90 एमएलडी पानी रोज ● चंबल नदी का पानी मुरैना नगर निगम के इंटेकवेल के माध्यम से देवरी गांव में बन रहे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर आएगा। यहां से गुजर रही पाइप लाइन से निगम पानी संपवेल पर लेगा। ● देवरी गांव से चंबल का 90 मिलियन लीटर (एमएलडी) पानी प्रतिदिन भेजा जाएगा। कोतवाल बांध से 60 एमएलडी पानी के लिए लाइन डाली जाएगी, जो देवरी से आ रही लाइन से जुड़ेगी। यहां डाली जाएगी पाइप लाइन मुरैना : मुरैना शहर के अंदर 7.50 किमी के दायरे में डक्ट बनाकर पाइप लाइन डाली जा रही। यहां पूर्व में ही ड्राइंग व डिजाइन तैयार किए जा चुके हैं। नूराबाद : सर्विस रोड पर दो किमी खुदाई कर डक्ट बनाई जाएगी। बानमोर : बानमोर से गुजर रहे हाईवे के पास ही 3.50 किलोमीटर की खुदाई कर पाइप लाइन बिछाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। नोट : प्रोजेक्ट में 43 किमी लाइन। चंबल वाटर प्रोजेक्ट- कब क्या हुआ 06 अक्टूबर-2023 को महाराज बाड़ा पर तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान और 16 दिसंबर 2024 को सीएम डॉ. मोहन यादव ने जीवाजी विवि के कैंपस में भूमिपूजन किया। 24 दिसंबर-2024 के वर्क ऑर्डर जारी हुए। 06 फरवरी-2025 से कार्य शुरू हुआ। 24 महीने में प्रोजेक्ट का काम पूरा करना होगा। recent visitors 54

देश की एक-तिहाई आबादी के सामने तोंद बड़ी समस्या, बढ़ता पेट डायबिटीज, हार्ट डिज़ीज और कई गंभीर बीमारियों की घंटी

नई दिल्ली भारत में 'पॉट बेली' यानी  कटोरेनुमा तोंद को लोग बहुत सीरियस नहीं लेते. पुराने जमाने में बढ़ी तोंद को रईसी और खाते-पीते घर की निशानी मान लिया जाता था. लेकिन आज मेट्रो स‍िटीज में रह रहे परिवारों के सामने तोंद एक बड़ी समस्या बन चुका है. लैंसेट की नई स्टडी के मुताब‍िक आज भारत उस मुकाम पर खड़ा है, जहां पेट का मोटापा सिर्फ अच्छा द‍िखने की चिंता तक सीमित नहीं रह गया है. अब ये तोंद डायबिटीज, हार्ट डिज़ीज और कई गंभीर बीमारियों की घंटी है. The Lancet की ताजा स्टडी बताती है कि 2021 में भारत में 180 मिलियन लोग मोटापे से जूझ रहे थे और 2050 तक यह संख्या 450 मिलियन तक पहुंच सकती है. इसको आसान भाषा में कहें तो देश की एक-तिहाई आबादी के सामने तोंद बड़ी समस्या बनने वाली है. कैसे बढ़ रही तोंद की समस्या, देखें आंकड़े नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) के अनुसार भारत में 40% महिलाएं और 12% पुरुष abdominal obesity यानी पेट की चर्बी से प्रभावित हैं. वहीं 30 से 49 साल की महिलाओं में तो हर दो में से एक महिला इस स्थिति में है. भारतीय मानकों के अनुसार पुरुषों में 90cm (35 इंच) से ज्यादा और महिलाओं में 80cm (31 इंच) से ज्यादा कमर होना abdominal obesity की पहचान है. खास बात ये है कि ये समस्या शहरी आबादी में ज़्यादा पाई जा रही है. तोंद क्यों खतरनाक है? बेली फैट दिखने में चाहे जितना हल्का लगे लेकिन इसका असर शरीर के सबसे संवेदनशील सिस्टम्स पर होता है. जानिए- बढ़ी हुई तोंद का असर कैसे शरीर को बीमार कर रहा है. 1. इंसुलिन रेजिस्टेंस: पेट की चर्बी शरीर की इंसुलिन को पहचानने और इस्तेमाल करने की क्षमता को बिगाड़ती है. इससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है. 2. हार्ट डिजीज: चर्बी जब लीवर और पैंक्रियाज जैसे अंगों में जमती है तो मेटाबॉलिज्म गड़बड़ाता है और कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर बढ़ता है. 3. कमज़ोर जोड़ और थकान: हमारा भारी शरीर खासतौर पर पेट, घुटनों और पीठ पर दबाव बढ़ाता है. इससे शरीर में तमाम तरह के दर्द रहते हैं. South Asians के लिए ज्यादा अलार्मिंंग South Asians यानी हम भारतीय और हमारे दूसरे पड़ोसी देशों के लोग वेस्टर्न लोगों के मुकाबले कम BMI पर भी ज़्यादा फैट रखते हैं. यानी वो दिखने में पतले हो सकते हैं लेकिन अंदर से मोटे. इसे TOFI (Thin Outside, Fat Inside) भी कहा जाता है. नई गाइडलाइन में हैं मोटापे की दो स्टेज Indian Obesity Commission ने मोटापे की नई क्लासिफिकेशन दी है. इसमें स्टेज वन में ऐसे लोग आते हैं जिनका हाई BMI लेकिन बेली फैट नहीं है. न कोई बड़ी मेडिकल कंडीशन है. वहीं दूसरी स्टेज में पेट की चर्बी के साथ ही डायबिटीज या दिल की बीमारी जैसे लक्षण नजर आते हैं. ये हाई रिस्क ग्रुप है. वो 4 आदतें जो पेट बढ़ा रहीं – प्रोसेस्ड और इंस्टेंट फूड – दिनभर बैठकर काम करना – नींद की कमी और तनाव – फिजिकल एक्टिविटी में गिरावट क्या है समाधान डाइट कंट्रोल: तला-भुना, चीनी, मैदा कम करें और फाइबर, फल और सब्ज़ी ज़्यादा लें. एक्सरसाइज़: भारतीयों को 250–300 मिनट प्रति हफ्ते की एक्सरसाइज़ की ज़रूरत है (वेस्ट में ये 150 मिनट होती है). नए मेडिकेशन: सेमाग्लूटाइड, टिर्जेपाटाइड जैसे वजन घटाने वाली दवाएं अब मौजूद हैं. डॉक्टर की सलाह से ही इसे ले सकते हैं. Early detection: समय समय पर कमर की माप ज़रूर लें. अपने वजन को मॉनीटर करने से ज्यादा जरूरी ये है. 'बड़े पेट' से फैलती बीमारी, क्या कहते हैं एक्सपर्ट छत्रपति शाहू महाराज मेड‍िकल यून‍िवर्स‍िटी लखनऊ के मेड‍िस‍िन डिपार्टमेंट के वर‍िष्ठ प्रोफेसर और डायबिटीज रोग व‍िशेषज्ञ डॉ कौसर उस्मान कहते हैं कि तोंद सिर्फ एक फैट डिपॉजिट नहीं है, ये मेटाबॉलिक डिजीज का पहला लक्षण है. कई लोग नॉर्मल वज़न के बावजूद बीमार हो सकते हैं अगर उनकी कमर का घेरा ज़्यादा है. इसलिए बचपन से ही बच्चों को सही खानपान की आदत डालनी चाहिए. ये स‍िर्फ लुक्स की बात नहीं है, ये जिंदगी और मौत के बीच की डील है. समय रहते तोंद पर काबू नहीं पाया तो देश को डायबिटीज और हार्ट डिजीज की सुनामी झेलनी पड़ेगी.   recent visitors 58

चौरागढ़ महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी सौगात, नहीं चढ़नी पड़ेंगी 1360 सीढ़ियां, घंटों की यात्रा मिनटों में होगी पूरी

पचमढ़ी हिल स्टेशन पचमढ़ी के चौरागढ़ मंदिर जाने वाले लाखों श्रद्धालुओं का सफर जल्द आसान होने वाला है. चौरागढ़ के लिए घंटों की यात्रा मिनटों में पूरी करने के लिए 400 करोड़ की लागत से रोपवे बनाया जाएगा. रोपवे बनने से श्रद्धालुओं को 1360 सीढ़ियां पैदल चढ़नी नहीं पड़ेंगी. शिवरात्रि सहित आम दिनों में हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए चौरागढ़ आते हैं. खासतौर पर महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं. लेकिन ऊंची पहाड़ी चढ़ने के कारण कई भक्तों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है. नितिन गडकरी ने दी मंजूरी नर्मदापुरम-नरसिंहपुर क्षेत्र के सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने बताया "केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नर्मदापुरम जिले में पचमढ़ी के चौरागढ़ महादेव मंदिर जाने के लिए 400 करोड़ की लागत से रोपवे एवं वाहन पार्किंग को मंजूरी दे दी है. पर्यटन का विकास हमारी प्राथमिकता है." सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने रोपवे निर्माण के लिए स्वीकृति देने पर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का आभार जताया है. सांसद ने बताया कि इसके अलावा पिपरिया से सटे अनहोनी वन क्षेत्र को पिकनिक स्पॉट में बदलने की योजना पर भी काम किया जाएगा. इन विकास कार्यों से पचमढ़ी में पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी इससे मजबूती मिलेगी. शिवरात्रि पर आते हैं एक लाख से अधिक श्रद्धालु पचमढ़ी नगर से करीब 12 किमी दूर सतपुड़ा के घने जंगल के बीच चौरागढ़ पर्वत है. यहां शिवरात्रि पर 6 दिनों तक का विशाल मेला लगता है, जिसमें प्रतिदिन 50 से 80 हजार तक श्रद्धालु आते हैं. शिवरात्रि के दिन श्रद्धालुओं की संख्या 1 लाख पार कर जाती है. आम दिनों में भी बड़ी संख्या में लोग दर्शन करने आते हैं. त्रिशूल चढ़ाने का खास महत्व चौरागढ़ मंदिर में त्रिशूल चढ़ाने का खास महत्व है. मान्यता है कि चोरा बाबा की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ ने उन्हें दर्शन दिए थे. उस समय भगवान शिव अपना त्रिशूल इसी स्थान पर छोड़ कर चले गए थे. इसी मान्यता के तहत भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर त्रिशूल चढ़ाते हैं. एक किवदंती ये भी प्रचलित है कि भगवान महादेव ने भस्मासुर से बचने के लिए इसी पहाड़ी में शरण ली थी. लंबे समय से की जा रही थी मांग स्थानीय लोगों द्वारा लंबे समय से पचमढ़ी-चौरागढ़ रोपवे निर्माण की मांग की जा रही थी. करीब 10 वर्ष पूर्व रोपवे लगाने का सर्वे भी हुआ था लेकिन सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में रोपवे निर्माण की अनुमति नहीं मिलने से मामला ठंडा पड़ गया था. recent visitors 26

वंदे भारत ट्रेन के कोच भी ग्वालियर में बनी स्प्रिंग के सहारे पटरियों पर दौड़ने लगेंगे

 ग्वालियर  हाई स्पीड ट्रेन शताब्दी, राजधानी और गतिमान के बाद अब वंदे भारत एक्सप्रेस(Vande Bharat Express) की स्प्रिंग का निर्माण भी रेल स्प्रिंग कारखाना सिथौली(Sithauli) में किया जाएगा। इसके लिए इलाहाबाद मुख्यालय से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया है। उम्मीद है कि इस साल वंदे भारत ट्रेन के कोच भी ग्वालियर में बनी स्प्रिंग के सहारे पटरियों पर दौड़ने लगेंगे। देशभर में चलने वाली ट्रेनों के लिए स्प्रिंग का निर्माण करने वाले केवल दो कारखाने हैं, इनमें एक ग्वालियर के सिथौली में है और दूसरा आईसीएफ चैन्नई में है। सिथौली(Sithauli) के रेल स्प्रिंग कारखाने में वर्षों से आईसीएफ (इंटीग्रल) और एलएचबी (लिंके- हॉफमैन ब्रुश) कोच की स्प्रिंग का निर्माण किया जा रहा है। इंडियन रेलवे लगातार स्प्रिंग की मांग बढ़ाता जा रहा है, इससे इस साल कारखाने का टारगेट भी पहली बार एक लाख स्प्रिंग से ऊपर चला गया है। हर साल बढ़ रही स्प्रिंग की डिमांड रेल स्प्रिंग कारखाना सिथौली(Sithauli) की शुरूआत 1989 में हुई थी। इसके बाद 1990 में स्प्रिंग बनना शुरू हो गई थी।यहां मांग के हिसाब से स्प्रिंगों का निर्माण किया जाता है और हर साल इसकी संया में इजाफा होता जा रहा है। इस साल पहली बार टारगेट एक लाख को पार कर गया है। फैक्ट्री में सबसे ज्यादा एलएचबी कोच की स्प्रिंग बनाई जाती हैं। स्प्रिंग की संख्या बढ़ते ही तीन शिट में काम 45 लोगों को और मिला रोजगार 35 साल में पहली बार स्प्रिंग की संख्या बढ़ते ही दो की जगह तीन शिट में काम शुरू किया गया है। फैक्ट्री में 275 लोगों का स्टाफ है। तीसरी शिट शुरू होने से लगभग 45 लोगों को और रोजगार मिला है। यहां एक दिन में 450 से 500 स्प्रिंग बनाई जा रही हैं। जल्द ही हर दिन 600 स्प्रिंग बनाने की प्लानिंग की जा रही है। तीन हजार स्प्रिंग से शुरू हुआ था कारखाना सिथौली स्प्रिंग कारखाने में 1990 में स्प्रिंग का निर्माण शुरू हुआ था। पहले साल तीन हजार स्प्रिंग बनाई गईं। उसके बाद पांच हजार स्प्रिंग तैयार हुईं। मांग बढ़ते ही हर साल लक्ष्य बढ़ता गया और अब यह आंकड़ा एक लाख पार हो गया है। 50 मशीनों पर बनतीं स्प्रिंग स्प्रिंग कारखाने में करीब 50 मशीनें लगी हुई हैं। इन मशीनों पर एक बार में दो से तीन कर्मचारी डिमांड के हिसाब से काम करते हैं। काम बढऩे पर कर्मचारी इसे आपस में बांट लेते हैं। भविष्य में और भी मशीनें आने की संभावना हैं, जिससे काम और बढ़ेगा। सिथौली स्प्रिंग कारखाना में इस साल टारगेट एक लाख पार हो गया है। संभवत: इस साल से वंदे भारत की स्प्रिंग भी यहां बनाई जाएगी।– मनोज कुमार सिंह, पीआरओ झांसी मंडल recent visitors 51