मध्य प्रदेश में गंभीर अपराधों की विवेचना कर शीघ्र निपटान के लिए जिलों को चार श्रेणियों में बांट दिया, दिए निर्देश

भोपाल मध्य प्रदेश में गंभीर अपराधों की सूची के साथ पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाना ने गंभीर अपराधों की विवेचना कर शीघ्र निपटान के लिए जिलों को चार श्रेणियों में बांट दिया है। इसके साथ ही सभी जिलों को अपराधों के निराकरण के लिए वार्षिक लक्ष्य भी दिया गया है। पुलिस मुख्यालय की सीआइडी शाखा के माध्यम से डीजीपी ने सभी जिलों के पुलिस प्रमुखों से गंभीर, सनसनीखेज और जघन्य अपराधों को चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं। विभिन्न श्रेणियों में शामिल जिले और वार्षिक लक्ष्य ए-श्रेणी के जिलों में इंदौर शहर, भोपाल शहर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, देवास, धार, उज्जैन,रतलाम, रीवा है। इनके लिए 40 गंभीर अपराध का लक्ष्य रखा गया है। – बी- श्रेणी के जिलों में बैतूल, खरगोन, रायसेन, नरसिंहपुर, शिवपुरी, छतरपुर, सिंगरौली, सीहोर, झाबुआ, छिंदवाड़ा, विदिशा, मुरैना, खंडवा, बड़वानी, इंदौर देहात, राजगढ़, सतना, सीधी, भिंड, सिवनी, गुना, शहडोल, मंदसौर, अशोकनगर, पन्ना, बालाघाट, नर्मदापुरम, दतिया, टीकमगढ़, दमोह, शाजापुर, कटनी हैं। इनके लिए 20 गंभीर अपराध का लक्ष्य। – सी- श्रेणी के जिलों में आलीराजपुर, श्योपुर, हरदा, अनूपपुर, डिंडौरी, नीमच, मऊगंज, उमरिया, आगर-मालवा, मैहर, भोपाल देहात, बुरहानपुर हैं। इनके लिए 15 गंभीर अपराध। – डी-श्रेणी के जिलों में निवाड़ी, पांढुर्णा, रेल भोपाल, रेल जबलपुर, रेल इंदौर के लिए पांच गंभीर अपराध का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। गंभीर एवं सनसनीखेज अपराधों में ये शामिल हत्या के वीभत्स प्रकरण जैसे जिंदा जला देना, दिनदहाड़े सार्वजनिक स्थल पर गोली, चाकू, तलवार या अन्य हथियार से निहत्थे व्यक्ति की हत्या कर देना, सामूहिक हत्याकांड। – संगठित अपराध एवं गंभीर श्रेणी के आर्थिक अपराध। – हत्या के साथ डकैती, बैंक, सराफा एवं सार्वजनिक स्थल पर दिनदहाड़े डकैती। – सामूहिक बलात्कार/नाबालिग के साथ दुष्कृत्य। – आतंकवादी कृत्य। – अपहरण के साथ हत्या। – पुरातात्विक महत्व की मूर्तियों की चोरी जिनसे जनसामान्य की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हों। – अन्य ऐसे आपराधिक प्रकरण जिनसे जनता में भय/दहशत या असुरक्षा की भावना पैदा होती हो। – तेजाब से हमलों के प्रकरण। – 12 वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं के साथ बलात्कार और नाबालिग बालिकाओं के साथ सामूहिक बलात्कार की हुई सभी आपराधिक घटनाएं। – नक्सलियों द्वारा घटित अपराध। – बड़े स्तर के सफेदपोश अपराध जैसे बड़े एवं महत्वपूर्ण बैंक धोखाधड़ी, मनी लांडरिंग, बड़े साइबर फ्राड आदि। – बड़े पैमाने पर मिलावटी खाद्य पदार्थ निर्माण करने वाली फैक्ट्री (जैसे नकली दूध, मावा, तेल, घी, मिठाई, नमकीन, मसाला आदि) के विरुद्ध पंजीबद्ध किए गए महत्वपूर्ण आपराधिक प्रकरण। – साइबर क्राइम एवं एनडीपीसी एक्ट के बड़े स्तर के महत्वपूर्ण प्रकरण जिसका समाज पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। – वन्यजीवों से संबंधित महत्वपूर्ण एवं गंभीर अपराध।   recent visitors 30

पंजाब नेशनल बैंक ने ग्राहकों से RBI के दिशा-निर्देशों के अनुरूप 10 अप्रैल तक KYC डिटेल अपडेट करने की अपील की है

मुंबई अगर आप पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के ग्राहक हैं तो आपके लिए काम की खबर है। पंजाब नेशनल बैंक ने ग्राहकों से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप 10 अप्रैल, 2025 तक अपने नो योर कस्टमर (KYC) डिटेल अपडेट करने की अपील की है। बता दें कि यह 31 मार्च, 2025 तक KYC अपडेट होने वाले खातों पर लागू होता है। ऐसे में KYC अपडेट न करने पर खाता बंद भी हो सकता है। बैंक ने कहा कि ग्राहक सहायता के लिए निकटतम PNB ब्रांच में जा सकते हैं या फिर आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं। क्यों जरूरी है केवाईसी? बता दें कि केवाईसी एक अनिवार्य प्रोसेस है जो बैंकों को अपने ग्राहकों की पहचान वेरिफिकेशन करने में मदद करती है। इससे मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय घोटालों जैसी धोखाधड़ी गतिविधियों को रोका जा सकता है। RBI के दिशा-निर्देशों के अनुसार, बैंकों को खाते की सुरक्षा और विनियामक अनुपालन बनाए रखने के लिए समय-समय पर KYC डिटेल अपडेट करना चाहिए। केवाईसी को अपडेट करने की जरूरत किसे है? बता दें कि केवाईसी अपडेट की यह आवश्यकता केवल उन ग्राहकों पर लागू होती है जिनके खाते 31 मार्च, 2025 तक रिन्यूअल के लिए हैं। प्रभावित ग्राहकों को यह पुष्टि करने के लिए अपने एसएमएस, ईमेल या आधिकारिक पीएनबी अधिसूचनाओं की जांच करनी चाहिए कि उन्हें अपने विवरण अपडेट करने की आवश्यकता है या नहीं।   पंजाब नेशनल बैंक में KYC कैसे अपडेट करें? PNB ग्राहकों को अपने KYC डिटेल अपडेट करने के लिए कई सुविधाजनक तरीके प्रदान करता है- – किसी भी PNB शाखा में जाएं। जरूरी डॉक्यूमेंट पर्सनली जमा करें। – PNB ONE या इंटरनेट बैंकिंग सेवाओं (IBS) का उपयोग करें। पात्र ग्राहकों के लिए, KYC अपडेट ऑनलाइन किए जा सकते हैं। – रजिस्टर्ड ईमेल या पोस्ट के जरिए भेजें। ग्राहक अपने KYC डॉक्यूमेंट ईमेल या डाक सेवाओं के माध्यम से अपनी आधार ब्रांच में जमा कर सकते हैं।   recent visitors 40

केंद्रीय कर्मचारियों का इंतजार खत्म, आगामी एक अप्रैल से सरकार की एकीकृत पेंशन योजना लागू होने वाली है

मुंबई केंद्रीय कर्मचारियों के लिए नया फाइनेंशियल ईयर काफी खास होने वाला है। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आगामी एक अप्रैल से सरकार की एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) लागू होने वाली है। इस योजना के लागू होने के साथ केंद्रीय कर्मचारियों के पास पेंशन के लिए एक नया विकल्प होगा। आइए डिटेल जान लेते हैं। एकीकृत पेंशन योजना के बारे में इस योजना के तहत सेवानिवृत्ति से पहले के 12 महीनों में मिले औसत बेसिक सैलरी की 50 प्रतिशत राशि को सुनिश्चित पेंशन के तौर पर देने का प्रावधान है। बीते दिनों पेंशन कोष नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की थी। यह अधिसूचनो राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत आने वाले केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए सरकार द्वारा 24 जनवरी, 2025 को जारी यूपीएस अधिसूचना का अनुसरण करती है। पीएफआरडीए के मुताबिक यूपीएस से संबंधित नियम एक अप्रैल, 2025 से लागू हो जाएंगे। एक अप्रैल से लागू ये नियम एक अप्रैल, 2025 तक सेवा में मौजूदा केंद्र सरकार के एनपीएस में आने वाले कर्मचारी और केंद्र सरकार की सेवाओं में अप्रैल, 2025 को या उसके बाद भर्ती होने वाले कर्मचारियों समेत केंद्र सरकार के कर्मचारियों के नामांकन को सक्षम करते हैं। केंद्र सरकार के कर्मचारियों की इन सभी श्रेणियों के लिए नामांकन और दावा फॉर्म एक अप्रैल, 2025 से प्रोटीन सीआरए की वेबसाइट पर ऑनलाइन उपलब्ध होंगे। कर्मचारियों के पास फॉर्म को भौतिक रूप से जमा करने का विकल्प भी है। क्या है अधिसूचना में अधिसूचना के मुताबिक, कर्मचारी को सेवा से हटाए जाने या बर्खास्त किए जाने या इस्तीफे के मामले में यूपीएस या सुनिश्चित भुगतान विकल्प उपलब्ध नहीं होगा। अधिसूचना में कहा गया है कि पूर्ण सुनिश्चित भुगतान की दर 25 वर्षों की न्यूनतम योग्यता सेवा के अधीन और सेवानिवृत्ति से तुरंत पहले 12 मासिक औसत मूल वेतन का 50 प्रतिशत होगी। अधिसूचना से 23 लाख सरकारी कर्मचारियों को यूपीएस और एनपीएस के बीच चयन करने का विकल्प मिलेगा। एनपीएस एक जनवरी, 2004 को लागू हुआ था। पुरानी पेंशन योजना से कैसे अलग बता दें कि जनवरी, 2004 से पहले प्रभावी पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के तहत कर्मचारियों को उनके कार्यकाल के अंतिम मूल वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलता था। ओपीएस के उलट यूपीएस अंशदायी प्रकृति की है। इसमें कर्मचारियों को अपने मूल वेतन और महंगाई भत्ते का 10 प्रतिशत योगदान करना होगा, जबकि नियोक्ता (केंद्र सरकार) का योगदान 18.5 प्रतिशत होगा। हालांकि, अंतिम भुगतान उस कोष पर मिलने वाले बाजार रिटर्न पर निर्भर करता है, जिसे ज्यादातर सरकारी बॉन्ड में निवेश किया जाता है।   recent visitors 41

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स के नए रिजीम को लेकर कई ऐलान किए थे, जो एक अप्रैल से लागू होने वाले हैं

नई दिल्ली आगामी एक अप्रैल से नए फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत होने वाली है। इस फाइनेंशियल ईयर में कई ऐसे बदलाव होने वाले हैं जिसका फायदा मिडिल क्लास को फायदा मिलेगा। इनमें से एक फैसला इनकम टैक्स से जुड़ा है। दरअसल, बीते एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स के नए रिजीम को लेकर कई ऐलान किए थे, जो एक अप्रैल से लागू होने वाले हैं। आइए सिलसिलेवार जान लेते हैं। 12 लाख रुपये तक की छूट निर्मला सीतारमण ने नौकरीपेशा और मिडिल क्लास को बड़ी राहत देते हुए 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय को पूरी तरह से इनकम टैक्स से छूट देने की घोषणा की। इनकम टैक्स छूट नई कर व्यवस्था का विकल्प चुनने वाले टैक्सपेयर्स को मिलेगी। वेतनभोगी करदाताओं के लिए 75,000 रुपये की स्टैंडर्ड कटौती के साथ अब 12.75 लाख रुपये तक कोई टैक्स नहीं लगेगा। उन्होंने टैक्स स्लैब में भी बदलाव किया है। इससे 25 लाख रुपये तक सालाना कमाने वालों को टैक्स में 1.1 लाख रुपये की बचत होगी। कितने लोगों को होगा फायदा इनकम टैक्स छूट लिमिट को सात लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये करने से एक करोड़ लोगों को कोई टैक्स नहीं देना होगा। टैक्स स्लैब में बदलाव से 6.3 करोड़ लोगों यानी 80 प्रतिशत से अधिक टैक्सपेयर्स को लाभ होगा। इसके साथ ही वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज पर कर छूट सीमा को मौजूदा 50,000 रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये किया गया है। नए इनकम टैक्स का स्लैब नई कर व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपये से अधिक सालाना आय होने पर चार लाख रुपये तक की इनकम टैक्स फ्री होगी। इसके बाद चार से आठ लाख रुपये की आय पर पांच प्रतिशत, आठ से 12 लाख रुपये तक की आय पर 10 प्रतिशत और 12 से 16 लाख रुपये तक की आय पर 15 प्रतिशत कर लगेगा। वहीं, 16 से 20 लाख रुपये के बीच की आय पर 20 प्रतिशत, 20-24 लाख रुपये की आय पर 25 प्रतिशत और 24 लाख रुपये से अधिक की आय पर 30 प्रतिशत टैक्स लगेगा। – अपडेटेड इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने वाले व्यक्तियों के लिए समय सीमा को भी बढ़ाकर चार साल करने का प्रस्ताव रखा गया है। अपडेटेड आईटीआर को वे टैक्सपेयर दाखिल करते हैं जो निर्धारित समय पर अपनी सही आय की जानकारी नहीं दे पाए थे। फिलहाल ऐसे रिटर्न संबंधित कर आकलन वर्ष के दो साल के भीतर दाखिल किए जा सकते हैं। लगभग 90 लाख टैक्सपेयर्स ने अतिरिक्त टैक्स का भुगतान करके स्वेच्छा से अपने आय विवरण को अपडेटेड किया है। recent visitors 40

भिंड के करीब 45 किलोमीटर लंबे पांच बायपास बनाए जाएंगे, नए बायपास से इन ग्रामीण क्षेत्रों को फायदा पहुंचेगा

 भिंड मध्य प्रदेश से गुजरने वाले बड़े ग्वालियर-इटावा नेशनल हाइवे पर लगातार सड़क दुर्घटनाओं बढ़ रही। इसी को देखते हुए भिंड के पास प्रशासन ने लगभग 45 किलोमीटर लंबे पांच बायपास बनाने का निर्णय लिया है। इसे अंतिम रूप देने के लिए भिंड कलेक्ट्रेट में जनप्रतिनिधियों के साथ अनुमोदन बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह, हेमंत कटारे, केशव देशाई और कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव की उपस्थिति रही। जिला पंचायत अध्यक्ष कामना सिंह भदौरिया, अपर कलेक्टर एलके पांडेय, नपा अध्यक्ष वर्षा वाल्मीक और विधायक प्रतिनिधि अरविंद बघेल सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। बायपास के निर्माण का प्रारूप बायपास का निर्माण रेत, गिट्टी की खदानों, रेलवे लाइनों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। एलईडी स्क्रीन पर बायपास का पूरा नक्शा दिखाकर जनप्रतिनिधियों से अनुमोदन मांगा गया। हालांकि, अटेर विधायक हेमंत कटारे ने आपत्ति जताई कि उनके क्षेत्र की उपेक्षा की गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि रेत और गिट्टी की खदानें नेशनल हाइवे की बाईं ओर स्थित हैं और दूसरी तरफ रेलवे लाइनें हैं। ऐसे में अंडरपास और आरओबी बनाने से समय और लागत में बढ़ोतरी होती है। निर्माण के चरण और लागत सूत्रों के अनुसार, बायपास का निर्माण दो चरणों में किया जा सकता है। पहले चरण में 1500 करोड़ रुपये की लागत से हाईब्रिड एन्युटी मोड के तहत काम किया जाएगा। दूसरे चरण में 2500 करोड़ रुपये की लागत सामान्य प्रक्रिया के तहत होगी। कुल मिलाकर इस परियोजना पर चार हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा। कहां बनेगा कितना लंबा बायपास     भिण्ड:18 किमी     मेहगांव: 10 किमी     गोहद: 5.5 किमी     मालनपुर: 8.0 किमी     फूप: 3.0 किमी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया इन बायपासों के निर्माण के लिए लगभग 400 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। परियोजना का प्रस्ताव पहले भोपाल, फिर दिल्ली भेजा जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। जनप्रतिनिधियों की उम्मीद जनप्रतिनिधियों का मानना है कि इन बायपासों के बनने से न केवल दुर्घटनाओं में कमी आएगी बल्कि आवागमन भी सुगम होगा। क्षेत्र में आर्थिक और सामाजिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। recent visitors 51

जबलपुर में अत्याधुनिक क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण किया जाएगा

जबलपुर  नगर सरकार खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों को बड़ा तोहफा देने जा रही है। भेड़ाघाट मार्ग पर तेवर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम बनेगा। इसके लिए जगह चिन्हित कर ली गई है। महापौर जगत बहादुर सिंह ‘अन्नू’ ने तीसरी बार नगर निगम का बजट पेश करते हुए बताया कि अत्याधुनिक क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही 15 करोड़ की लागत से भंवरताल में अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्वीमिंग पूल का नए सिरे से निर्माण होगा। नगर सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए 17 अरब 97 करोड़ रुपए आय व 17 अरब 96 करोड़ रुपए व्यय और आठ लाख से ज्यादा की बचत का बजट पेश किया। बजट में एक हजार करोड़ से अमृत-2 योजना के तहत सीवर लाइन बिछाने और दो लाख घरों को इससे जोड़ने का प्रावधान रखा गया है। अमृत-2 के तहत हर घर नर्मदा जल पहुंचाने के लिए तीन सौ करोड़ से ज्यादा की लागत से नया जलापूर्ति नेटवर्क तैयार किया जाएगा। नगर सरकार ने लगातार तीसरे साल बजट में किसी प्रकार का कर नहीं बढ़ाया है। वर्ष 2024-25 में 1537 करोड़ का बजट पेश किया गया था। नगर निगम के बजट में कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों की घोषणा की गई है. श्रीनाथ की तलैय्या में नर्मदा प्रसादम चौपाटी का निर्माण होगा. शहर में 100 इलेक्ट्रिक एसी बसों का संचालन शुरू किया जाएगा. मध्यप्रदेश शासन ने इसके लिए एजेंसियों की नियुक्ति कर दी है. छात्र-छात्राओं, दिव्यांगों व वरिष्ठ नागरिकों को मेट्रो बस में रियायती दर पर यात्रा की सुविधा मिलेगी. नगर निगम सीमा में 8 बड़े तालाबों का जीर्णोद्धार व सौंदर्यीकरण 12.50 करोड़ रुपए की लागत से शुरू हो चुका है. 10 और प्रमुख तालाबों का विकास एनजीओ के माध्यम से कराया जाएगा. नगर में विगत अनेक वर्षों से खिलाडिय़ों और खेल प्रेमियों के द्वारा एक अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम की मांग की जाती रही है. जिसके चलते इस संबंध में इस वर्ष रीडेंसिफिकेशन से अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम के अलावा 50 नवीन स्कूल भवनों का निर्माण, नवीन नगर निगम सदन एवं बिल्डिंग का निर्माण, अन्तर्राष्ट्रीय स्वीमिंगपूल का निर्माण लगभग 15 करोड़ की लागत से कराया जाएगा. इनकी डीपीआर कन्सल्टेंट के माध्यम से तैयार हो चुकी है. साथ ही नगर के 10 श्मशान घाटों-कब्रिस्तानों का भी जीर्णोद्धार कार्य लगभग 15 करोड़ की लागत से कराया जाएगा. वर्ष 2024-25 में 48 नए लघु उद्यानों का निर्माण होगा. अब तक 65 करोड़ 30 लाख की लागत से कुल 120 लघु उद्यान बनाए गए हैं. शहर के प्रवेश द्वारों के मार्गों को हरा-भरा बनाया जाएगा. एक लाख बीजारोपण का कार्य पूरा हो चुका है और इस वर्ष भी जारी रहेगा. जून से सितम्बर के बीच 11 लाख पौधों का होगा रोपण- पर्यावरण संरक्षण के लिए जून से सितंबर 2025 तक एक लाख व अक्टूबर 2025 में 11 लाख पौधों का रोपण किया जाएगा. इस अभियान में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी. आवारा कुत्तों की लैप्रोस्कोपिक पद्धति से नसबंदी की जाएगी. संविदा सफाई संरक्षकों का वेतन 100 प्रतिशत- निगम में कार्यरत संविदा सफाई संरक्षकों को 100 प्रतिशत वेतन भुगतान किए जाने का प्रावधान किया गया है. जिससे 425 परिवारों को 9250 रुपए से 21000 रुपए तक वेतन वृद्धि हुई है. यह कार्य करने वाला भी नगर निगम जबलपुर मध्यप्रदेश का प्रथम नगरीय निकाय है. ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़े कदम महापौर अन्नू ने बजट प्रस्तुत करते हुए कहा कि शहर ग्रीन एनर्जी की ओर कदम बढ़ा रहा है। शहर को बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सोलर प्लांट स्थापित करने के लिए सोलर एनर्जी प्लांट स्थापित करने के लिए कंसल्टेंट एजेंसी की नियुक्ति की जा चुकी है।   recent visitors 32

दिल्ली जल बोर्ड में 11 लाख कंज्यूमर्स के 5700 करोड़ रुपये पानी का बिल लंबे समय से है बकाया

नई दिल्ली  जिस तरह से दिल्ली में बिजली सप्लाई करने वाली कंपनियां बिजली बिल बकाया होने पर ऑफिस में बैठे-बैठे ही किसी भी कंज्यूमर्स की बिजली मीटर से सप्लाई डिस्कनेक्ट कर देती हैं, जल बोर्ड भी बकाया बिलों की वसूली के लिए कुछ ऐसा ही तकनीकी मैनेजमेंट सिस्टम डिवेलप करने का प्लान बना रहा है। जल बोर्ड अफसरों का कहना है कि करीब 11 लाख ऐसे कंज्यूमर्स हैं, जिनका का करीब 5700 करोड़ रुपये पानी का बिल लंबे समय से बकाया है। मीटर न लगाने वालों की पहचान की जाएगी जल बोर्ड अफसरों के अनुसार जल बोर्ड को घाटे से उबारने के लिए रोजाना सीनियर अफसरों के साथ बैठकें चल रही हैं। इस दौरान यह बात सामने आई कि दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या तो 52 लाख से भी अधिक है, लेकिन पानी उपभोक्ताओं की संख्या बिजली उपभोक्ताओं की तुलना में करीब आधी है। अधिकारियों ने कहा कि बिजली कंपनियों ने जिन लोगों को कनेक्शन दिया है, उनसे डेटा लेकर प्रत्येक घरों का सर्वे किया जाए। ताकि यह पता चल सके कि पानी के उपभोक्ताओं की वास्तविक संख्या कितनी है। उसी के हिसाब से फिर बिलिंग प्रोसेस शुरु किया जाए। ऐसे में जल बोर्ड के रेवेन्यू काफी बढ़ सकता है। कनेक्शन काटने के लिए स्कॉडा सिस्टम जल बोर्ड अफसरों के अनुसार दिल्ली में पानी उपभोक्ताओं की कुल संख्या करीब 28.26 लाख है। इसमें से 11 लाख के आसपास ऐसे उपभोक्ता है, जिन्हें अपने पानी के बिलों पर आपत्ति हैं और लंबे समय से बिल का भुगतान नहीं कर रहे हैं और लगातार उनका पानी का बिल बढ़ता जा रहा है। ऐसे उपभोक्ताओं का एरियर के रूप में करीब 5700 करोड़ रुपये बकाया है। भविष्य में पानी के बकाया बिलों का समय पर भुगतान के लिए पाइप लाइनों के वॉल्व पर स्कॉडा सिस्टम लगाने की बात की जा रही है, ताकि किसी भी उपभोक्ता का पानी का बिल अधिक समय से बकाया है, तो उसका कनेक्शन जल बोर्ड अधिकारी ऑफिस में बैठे ही काट दे। सबसे पहले कमर्शल और बल्क वॉटर कंस्यूमर पर एक्शन स्काडा सिस्टम पूरी तरह से डिवेलप होने के बाद सबसे पहले इस कैटिगरी में कमर्शल कंस्यूमर्स और बल्क वॉटर कंस्यूमर्स को शामिल किया जाएगा। दिल्ली में कमर्शल कंस्यूमर्स की संख्या 82 हजार से अधिक है। बल्क कंस्यूमर्स 4300-4500 हैं। यह प्रयोग सफल होने के बाद दूसरे कैटिगरी के पानी उपभोक्ताओं को इस सिस्टम के तहत शामिल किया जाएगा।   recent visitors 47