मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जगन्नाथ मंदिर में किया दर्शन-पूजन, प्रदेश की खुशहाली की कामना की

पुरी दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता शनिवार को अपने कैबिनेट मंत्री प्रवेश वर्मा और बीजेपी सांसद संबित पात्रा के साथ ओडिशा के पुरी पहुंचीं। उन्होंने पुरी धाम में भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और बलराम जी के दर्शन किए। दर्शन के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री का दायित्व संभालने के बाद पहली बार पुरी धाम आने और प्रभु के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने भगवान जगन्नाथ के चरणों में प्रार्थना की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश और दिल्ली प्रगति के पथ पर निरंतर आगे बढ़ते रहें। मुख्यमंत्री ने दर्शन के बाद आभार व्यक्त करते हुए कहा, "भगवान के आशीर्वाद से दिल्ली सरकार को ‘विकसित दिल्ली’ के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ाने का अवसर मिला है।" 1 अप्रैल को मनाए जाने वाले ओडिशा दिवस के संदर्भ में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, "इस बार दिल्ली सरकार पहली बार ओडिशा दिवस को धूमधाम से मनाएगी। दिल्ली में भी एक अप्रैल को उत्कल दिवस का आयोजन होगा। दिल्ली में अलग-अलग प्रांतों से लोग अपने सपने लेकर आते हैं। ओडिशा से आए हजारों लोग दिल्ली को गति देने में योगदान दे रहे हैं। वे दिल्ली का अभिन्न हिस्सा हैं और उनके सुख-दुख में सरकार उनके साथ खड़ी है। उनकी समृद्धि और भविष्य के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।" इस मौके पर उन्होंने ओडिशा के सभी नागरिकों और दिल्ली में बसे ओडिशा के परिवारों को ‘उत्कल दिवस’ की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने घोषणा की कि दिल्ली सरकार पहली बार ‘उत्कल दिवस’ को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाएगी। इस आयोजन का उद्देश्य ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देना और दिल्ली की सांस्कृतिक विविधता को और मजबूत करना है। सीएम गुप्ता ने कहा, "मैं प्रत्येक ओडिशावासी और दिल्ली में रह रहे ओड़िया भाई-बहनों को उत्कल दिवस की बधाई देती हूं। भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद बना रहे और देश प्रगति की राह पर चलता रहे।" रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली, देश की राजधानी होने के नाते, विभिन्न राज्यों से आए लाखों लोगों के सपनों का केंद्र है। हजारों परिवार जो ओडिशा से आए हैं, वे दिल्ली की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। दिल्ली सरकार ओडिशा के लोगों की समृद्धि, सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।" इस यात्रा और घोषणा के साथ दिल्ली सरकार ने ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देने और दोनों क्षेत्रों के बीच संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। recent visitors 59

भारत के तेजी से बढ़ते लग्जरी रियल एस्टेट मार्केट के प्रमाण के रूप में अल्ट्रा-लग्जरी आवासीय बिक्री में तेज उछाल आया

मुंबई भारत का अल्ट्रा-लग्जरी होम मार्केट तेजी से बढ़ रहा है और पिछले तीन वर्षों में 100 करोड़ रुपये या इससे अधिक कीमत के 49 घर 7,500 करोड़ रुपये में बिके। यह जानकारी शनिवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई। भारत के तेजी से बढ़ते लग्जरी रियल एस्टेट मार्केट के प्रमाण के रूप में अल्ट्रा-लग्जरी आवासीय बिक्री में तेज उछाल आया है। अब बंगलों की तुलना में अपार्टमेंट अल्ट्रा-लग्जरी सेगमेंट पर हावी हो गए हैं। जेएलएल की रिपोर्ट के अनुसार, इस गति में कमी आने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं, क्योंकि 2025 के पहले दो महीनों में पहले ही चार अल्ट्रा-लग्जरी घरों की बिक्री हो चुकी है, जिनकी कुल कीमत 850 करोड़ रुपये है। जेएलएल के मुख्य अर्थशास्त्री और अनुसंधान प्रमुख तथा आरईआईएस भारत, डॉ. सामंतक दास ने कहा, "हमारे विश्लेषण के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में कुल सौदों में 100 करोड़ रुपये और उससे अधिक कीमत वाले अपार्टमेंट की 65 प्रतिशत और बंगलों की हिस्सेदारी शेष 35 प्रतिशत थी।" दास ने बताया कि हालांकि, इस मूल्य सीमा से ऊपर भी कुछ संपत्तियों का लेन-देन हुआ और उनकी कीमत 200-500 करोड़ रुपये के बीच थी। हालांकि, कई भारतीय शहरों में प्रीमियम आवासीय संपत्तियों की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन इन विशेष संपत्तियों के लिए उपयुक्त घर खरीदार प्रोफाइल की बात करें तो मुंबई और दिल्ली-एनसीआर सबसे आगे हैं। जेएलएल के वरिष्ठ प्रबंध निदेशक (चेन्नई और कोयंबटूर) और भारत में आवासीय सेवाओं के प्रमुख शिव कृष्णन ने कहा, "100 करोड़ रुपये और उससे अधिक मूल्य वर्ग के घर खरीदारों में बड़े व्यापारिक समूह, अभिनेता और नए स्टार्टअप के संस्थापक शामिल हैं।" पिछले तीन वर्षों में बेचे गए इन 49 घरों में से मुंबई में 69 प्रतिशत हिस्सा था, जिसके बाद दिल्ली एनसीआर का स्थान था। मुंबई में, मालाबार हिल और वर्ली में इन लेन-देन का बड़ा हिस्सा हावी था। दिल्ली-एनसीआर में, ऐसे सौदे केवल लुटियंस बंगला जोन (एलबीजेड) तक ही सीमित नहीं थे। कृष्णन ने कहा कि गुरुग्राम में गोल्फ कोर्स रोड पर कई हाई-राइज अपार्टमेंट सौदे भी दर्ज किए गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले तीन वर्षों में 100 करोड़ रुपये और उससे अधिक मूल्य वर्ग में बेचे गए सभी अपार्टमेंट में से अधिकांश 10,000-16,000 वर्ग फुट (सुपर बिल्ट-अप एरिया) के आकार की रेंज में थे। recent visitors 56

भारत इस मुश्किल घड़ी में म्यांमार के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है, PM मोदी ने वरिष्ठ जनरल से की बात

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को म्यांमार के वरिष्ठ जनरल महामहिम मिन आंग ह्लाइंग से बात की। उन्होंने कहा कि भारत इस मुश्किल घड़ी में म्यांमार के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है। एक्स पर एक पोस्ट में मोदी ने कहा, "म्यांमार के वरिष्ठ जनरल महामहिम मिन आंग ह्लाइंग से बात की। विनाशकारी भूकंप में हुई मौतों पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। एक करीबी दोस्त और पड़ोसी के रूप में, भारत इस मुश्किल घड़ी में म्यांमार के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है। ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत आपदा राहत सामग्री, मानवीय सहायता, खोज और बचाव दल को प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से भेजा जा रहा है।" म्यांमार और पड़ोसी थाईलैंड में शुक्रवार को उच्च तीव्रता वाला भूकंप आया, जिससे इमारतें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे नष्ट हो गए। म्यांमार में कम से कम 1,002 लोगों की मौत हुई। भारत ने शनिवार को म्यांमार को 15 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक पोस्ट में कहा कि ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के हिस्से के रूप में, भारत ने शुक्रवार के भीषण भूकंप से प्रभावित म्यांमार के लोगों की सहायता के लिए पहले प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में काम किया। टेंट, कंबल, स्लीपिंग बैग, भोजन के पैकेट, स्वच्छता किट, जनरेटर और जरूरी दवाओं सहित 15 टन राहत सामग्री की हमारी पहली खेप यांगून पहुंच गई है।” इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को विनाशकारी भूकंप पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने एक्स पर लिखा, "म्यांमार और थाईलैंड में भूकंप के बाद की स्थिति से चिंतित हूं। सभी की सुरक्षा और खुशहाली के लिए प्रार्थना करता हूं। भारत हर संभव सहायता देने के लिए तैयार है। इस संबंध में, हमने अपने अधिकारियों से तैयार रहने को कहा है। साथ ही विदेश मंत्रालय से म्यांमार और थाईलैंड की सरकारों के साथ संपर्क में रहने को कहा है।" म्यांमार में शुक्रवार दोपहर को 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, सागाइंग के पास आए इस भूकंप के बाद 2.8 से 7.5 तीव्रता के 12 झटके महसूस किए गए, जिससे प्रभावित इलाकों में हालात और खराब हो गए। म्यांमार के राज्य प्रशासन परिषद की सूचना टीम ने जानकारी दी है कि भूकंप में 1,002 लोग मारे गए, 2,376 लोग घायल हुए और 30 लोग अब भी लापता हैं। म्यांमार के नेता वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय समुदायों से मानवीय सहायता की अपील की है। recent visitors 58

1 साल में सोने की कीमत 50 बार ऑल टाइम हाई पर पहुंची, 12 साल में सोने की कीमत में तेजी का सबसे लंबा दौर

नई दिल्ली  सोने की कीमत नए रेकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई। पिछले 12 महीने में सोने की कीमत 50 बार ऑल टाइम हाई पर पहुंच चुकी है। पिछले 12 साल में यह इसमें तेजी का सबसे लंबा दौर है। साथ ही यह सोने के इतिहास में तेजी का तीसरा सबसे लंबा दौर है। इससे पहले 1970 के दशक में महंगाई, आर्थिक विकास में ठहराव और बेरोजगारी के कारण सोने की कीमत कई महीनों तक चढ़ी थी। उस दौरान सोने की कीमत में लगातार चार साल तक तेजी आई थी। इस बार सोने की कीमत पिछले एक साल में 39 फीसदी और इस साल 16 फीसदी चढ़ चुकी हैं। यह लगातार तीसरे साल पॉजिटिव परफॉरमेंस की तरफ बढ़ रहा है। सोने की कीमत में तेजी के कई कारण हैं। लोगों को डर है कि अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ लगाने से दुनिया में व्यापार युद्ध गहरा हो सकता है। यही वजह है कि निवेशक सोने को सुरक्षित मानकर इसमें पैसा लगा रहे हैं। सोने को हमेशा से ही आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता के खिलाफ एक बचाव के रूप में देखा जाता है। जब ब्याज दरें कम होती हैं, तो सोने की कीमत बढ़ने लगती है। जानकारों का कहना है कि लगातार अनिश्चितता लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण सोने की मांग बढ़ रही है। इसका मतलब है कि लोग सोने को इसलिए खरीद रहे हैं क्योंकि उन्हें लग रहा है कि दुनिया में कुछ गड़बड़ होने वाली है। कहां तक जा सकती है कीमत ICICI Bank Global Markets की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2025 की दूसरी तिमाही में सोने की कीमत 96,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकती हैं। वैश्विक स्तर पर सोने की कीमत दिसंबर तक $3,200 से $3,400 प्रति औंस तक जा सकती है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में  सोने की कीमत 1,100 रुपये के उछाल के साथ 92,150 रुपये प्रति 10 ग्राम की नई ऊंचाई पर पहुंच गई। पिछले कारोबारी सत्र में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 91,050 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। चांदी की कीमतों में 1,300 रुपये की तेजी आई और यह बृहस्पतिवार के बंद स्तर 1,01,700 रुपये प्रति किलोग्राम के मुकाबले 1,03,000 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड उच्च स्तर के करीब पहुंच गई। recent visitors 53

1 अप्रैल से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और जेवर में प्रॉपर्टी की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी हो सकती है, 70% तक का इजाफा

नई दिल्ली अगर आप नोएडा, ग्रेटर नोएडा और जेवर में प्रॉपर्टी खरीदने का सोच रहे हैं, तो इस समय को एक अच्छा अवसर माना जा सकता है। बढ़ती कीमतों के साथ-साथ इन शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी में भी लगातार सुधार हो रहा है। लेकिन इस बीच आपको यह जानकर हैरानी होगी कि  नोएडा, ग्रेटर नोएडा और जेवर में 1 अप्रैल से प्रॉपर्टी की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 में यहां की प्रॉपर्टी की कीमतें 20% से लेकर 70% तक बढ़ने की संभावना है, जो कि लगभग 9 सालों के बाद हो रही इस तरह की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। यह बढ़ोत्तरी मुख्यतः बढ़ती हुई डिमांड और जमीन के बाजार में निरंतर हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण हो सकती है। बता दें कि यह 9 साल बाद इतनी बड़ी बढ़ोतरी हो रही है।   नोएडा में हाई-राइज अपार्टमेंट की कीमतें लगभग 20% तक बढ़ने की संभावना है, जबकि ग्रेटर नोएडा में यह बढ़ोत्तरी 30% तक हो सकती है। इसके अलावा, नोएडा में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के खुलने से भी प्रॉपर्टी की कीमतों में 70% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। ANAROCK रिसर्च रिपोर्ट ANAROCK रिसर्च के अनुसार, 2019 से लेकर अब तक नोएडा की आवासीय प्रॉपर्टी की कीमतों में लगभग 92% की बढ़ोतरी देखी गई है। ग्रेटर नोएडा में यह बढ़ोतरी 97% तक पहुंच चुकी है। 2019 में प्रति वर्ग फीट ₹4,795 से शुरू होकर अब ये कीमतें ₹9,200 प्रति वर्ग फीट तक पहुंच गई हैं। ग्रेटर नोएडा में भी यही ट्रेंड देखा गया है, जहां कीमतें ₹3,340 से ₹6,600 प्रति वर्ग फीट तक बढ़ गई हैं।   recent visitors 51

विश्वविद्यालय में कुलपति को कुलगुरु कहना प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति की पुनस्थापना की दिशा में एक कदम है: राज्यपाल

जयपुर राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने  कहा कि परंपरा के साथ आधुनिक ज्ञान की दृष्टि से ही भारत विश्व गुरु बनेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में कुलपति को कुलगुरु कहना प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति की पुनस्थापना की दिशा में एक कदम है। प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति परिपूर्ण थी। उन्होंने नई शिक्षा पद्धति को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह विद्यार्थियों के विकास से जुड़ी है। राज्यपाल श्री बागडे शनिवार को महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह में संबोधित कर रहे थे।  इसमें वर्ष 2023 एवं 2024 के स्वर्ण पदकों का वितरण किया गया। साथ ही विद्या वाचस्पति उपाधि धारकों को भी उपाधियां वितरित हुई। राज्यपाल ने कहा कि भारत की समृद्ध वैज्ञानिक परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि महर्षि भारद्वाज के द्वारा वर्णित विमान विज्ञान के आधार पर 1895 में श्री शिवकर बापूजी तलपे ने हमारे यहां विमान उड़ाया था। उन्होंने श्री चिरंजिलाल वर्मा से संस्कृत ग्रंथों की शिक्षा ग्रहण की थी। इसके बाद ही 1903 में राइट बंधुओं ने विमान बनाया। इसी प्रकार गुरुत्वाकर्षण के बारे में न्यूटन से बहुत ही पहले कॉपरनिकस और उससे भी पहले भास्कराचार्य ने गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत दिया था। उन्होंने कहा कि विनोबा भावे ने आजादी के तत्काल पश्चात् शिक्षा पद्धति में बदलाव की आवश्यकता बताई थी। लॉर्ड मैकाले ने भारत को गुलाम बनाने के लिए जो शिक्षा पद्धति चलाई वह अभी तक चल रही है। नई शिक्षा पद्धति भारत के समाज, नागरिक और संस्कृति के अनुसार है। नई शिक्षा नीति से निकले हुए विद्यार्थियों के माध्यम से समाज को आगामी कुछ समय में ही परिणाम मिलने लगेंगे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में इस प्रकार के पाठ्यक्रम तैयार होने चाहिए जिससे समाज में रोजगार का सृजन हो सके। ज्ञान की विभिन्न शाखाओं का अध्ययन कर युवा उद्यमी बनने चाहिए। इससे देश के विकास में उनका योगदान सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा मनुष्य का निर्माण करने वाली हो। महर्षि दयानंद सरस्वती मानव मूल्यों के साक्षात उदाहरण रहे है। उन्होंने कहा कि देश के 400 कुलगुरुओं तथा 1000 से अधिक शिक्षाविदों ने दो वर्षों तक गहन चर्चा के उपरांत नई नीति को बनाया है। यह शिक्षा पद्धति विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता में वृद्धि करने में कारगर सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि अर्जित विद्या का व्यवहारिक उपयोग समाज हित में और राष्ट्रहित में किया जाना चाहिए। शिक्षा एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है। इसीलिए प्राध्यापकों और अध्यापकों को नई पुस्तकें पढ़ने के साथ ही नई विद्या भी प्राप्त करनी चाहिए। विद्यार्थी को भी पाठ्य पुस्तकों के अतिरिक्त अन्य पुस्तकें को भी पढ़ने में अपना समय देना चाहिए। इससे उनकी बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होगी। विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि दीक्षांत समारोह माता-पिता, परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति दायित्वों के स्मरण का दिन होता है। शिक्षा जीवन पर्यंत चलने वाली एक प्रक्रिया है। आज के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और डिजिटल युग में हमें विश्व के साथ-साथ चलना होगा। बढ़ती तकनीक में आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने समाज को बहुत प्रभावित किया है। सोशल मीडिया और सार्वजनिक जीवन पर इसके दुष्परिणाम देखे जा सकते हैं। नई पीढ़ी को इन दुष्प्रभावों से बचाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति ने चार आश्रमों और चार पुरुषार्थों के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था दी है। नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला के शिक्षा केंद्रों, मैत्रेई, गार्गी, अपाला, घोषा, विश्ववारा जैसी विदुषियों और वराह मिहिर, आर्यभट्ट, चरक, सुश्रुत, आश्वघोष, चाणक्य एवं समर्थ गुरु रामदास जैसे शिक्षकों के कारण भारत विश्व गुरु रहा है। विद्यार्थियों को छत्रपति संभाजी महाराज और महाराणा सांगा जैसे पूर्वजों के पद चिह्नों का अनुकरण करना चाहिए। क्रूर आक्रांताओं को सम्मान देने वाले लोग इस भारत और भारत की संस्कृति के नहीं हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं में राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पण और त्याग होना आवश्यक है। सबके मन में राष्ट्र प्रथम का स्थाई भाव होना चाहिए। स्वराज, स्वधर्म, स्वदेशी और स्वभाषा को साथ लेकर शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी समाज की विकृतियों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। शिक्षा के क्षेत्र में भारत अपना प्राचीन गौरव पुनः प्राप्त करने के लिए प्रयास कर रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने राजस्थान के विश्वविद्यालय के कुलपतियों को अब कुलगुरु के नाम से जाना जाएगा। यह उनके सम्मान में एक बहुत बड़ा क्रांतिकारी परिवर्तन होगा। नई शिक्षा नीति शिक्षा की सार्थकता और सदुपयोग के लिए महत्वपूर्ण होगी। अनुशासनात्मक, बहुविषयक और बहुआयामी दृष्टिकोण के द्वारा विद्यार्थियों में मूल्य, मान्यताएं और संवेदनाएं विकसित की जानी चाहिए। नई शिक्षा नीति में आधुनिक ज्ञान से जुड़े विषयों के महत्व को प्रतिपादित करने के साथ ही प्राचीन भारतीय संस्कृति, वैदिक ज्ञान और सनातन जीवन मूल्यों को भी महत्व दिया गया है। युवाओं को शिक्षा के क्षेत्र में पाश्चात्य नरेटिव से बचना होगा। महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. मंजू बाघमार ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थी की जीवन यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है।  recent visitors 46

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा- फिटनेस केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि हमारे जीवन की प्राथमिकता होनी चाहिए

जयपुर मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि फिटनेस केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि हमारे जीवन की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमने फिट राजस्थान अभियान शुरू करने का संकल्प लिया था, ‘रन फॉर फिट राजस्थान’ इसी संकल्प का प्रतीक है। श्री शर्मा ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का मानना है कि देश में युवा, महिला, किसान और मजदूर सशक्त होंगे तो देश-प्रदेश भी सशक्त होंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा राजस्थान दिवस महोत्सव के तहत महिला, किसान, अन्त्योदय, युवा एवं सुशासन को समर्पित कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। श्री शर्मा ने राजस्थान दिवस समारोह के तहत कार्यक्रमों की श्रृंखला में शनिवार को अमर जवान ज्योति पर आयोजित रन फॉर फिट राजस्थान दौड़ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा स्वयं भी दौड़ में शामिल होकर प्रदेशवासियों को स्वस्थ रहने का संदेश दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर खिलाड़ी को पर्याप्त अवसर उपलब्ध करवाने तथा उनकी प्रतिभा को निखारने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए हमने वर्ष 2024-25 में 1614 खिलाड़ियों को 34 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं को नकद पुरस्कार के साथ भूखंड आवंटन, सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता और रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। स्पोर्ट्स लाइफ इंश्योरेंस स्कीम से खिलाड़ियों को सुरक्षा कवच भी दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मिशन ओलंपिक-2028 के तहत 50 प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण दिया जाएगा और जयपुर में 20 करोड़ की लागत से “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्पोर्ट्स“ की स्थापना की जाएगी। हर साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर मनाया जाएगा राजस्थान दिवस श्री शर्मा ने कहा कि सात चरणों में हुए राजस्थान के एकीकरण की यात्रा में चौथे चरण में वृहद् राजस्थान की स्थापना एक महत्वपूर्ण पड़ाव था, जिसकी यादों को चिरस्थायी बनाए रखने के लिए हर साल राजस्थान दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि वृहद् राजस्थान की स्थापना संवत 2006 की चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रेवती नक्षत्र इंद्रयोग में हुई थी, जिसे राजस्थान के एकीकरण में अहम भूमिका निभाने वाले लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल जी ने विशेष महत्व दिया था। उनकी और समस्त प्रदेशवासियों की भावना को सम्मान देते हुए राज्य सरकार ने अब हर साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर ही राजस्थान दिवस मनाने का निर्णय लिया है। राजस्थान का खेलकूद के क्षेत्र में गौरवपूर्ण इतिहास मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान का खेलकूद के क्षेत्र में गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। कई खेलों में हमारे खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रदेश की पताका लहराई है। पेरिस ओलंपिक में अनंतजीत सिंह व महेश्वरी चौहान ने निशानेबाजी में हिस्सा लिया। पेरिस पैरालंपिक में अवनी लेखरा ने स्वर्ण, सुंदर सिंह गुर्जर और मोना अग्रवाल ने कांस्य पदक जीतकर प्रदेश को गर्व का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेलों में हमारे खिलाड़ियों ने 43 पदक हासिल किए। ये उपलब्धियां हमारे युवाओं की प्रतिभा का प्रमाण हैं। इस अवसर पर युवा मामले एवं खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि जीवन में फिटनेस का बहुत महत्व है। स्वस्थ नागरिक से ही स्वस्थ समाज का निर्माण होता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपनी योजनाओं और निर्णयों के माध्यम से प्रदेश में खेल और खिलाड़ियों को निरन्तर प्रोत्साहित कर रही है।   इस दौरान मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड में संपन्न राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया तथा 9 खिलाड़ियों को जमीन आवंटन के पट्टे वितरित किए। कार्यक्रम में संसदीय कार्य मंत्री श्री जोगाराम पटेल, प्रमुख शासन सचिव राजस्व श्री दिनेश कुमार, शासन सचिव खेल एवं युवा मामले श्री नीरज के. पवन, 61 सब एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल रोहित मेहरोत्रा सहित विभिन्न खिलाड़ी, स्कूली छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे। recent visitors 57