पत्रकार को अरेस्ट कर बेनकाब हुई भोपाल पुलिस, कुलदीप को मिली जमानत, फंसाने वाला थाना प्रभारी लाइन अटैच

भोपाल पत्रकार पर कल पुलिस ने किया फर्जी एक्सीडेंट के झूठे केस में अड़ी बाजी का मामला दर्ज। कटारा हिल्स थाने में पत्रकार के खिलाफ हुआ झूठा मामला दर्ज थाने में पत्रकारों का धरना पत्रकारों के साथ भाजपा मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल में मौजूद। टीआई के सस्पेंड करने की मांग। TI के सस्पेंड होने तक थाने में धरना देने बैठे पत्रकार। पत्रकार कुलदीप सिंगोरिया  के खिलाफ दर्ज हुआ है झूठा मामला। पत्रकार कुलदीप सिंगोरिया के मामले में भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से बात की। तत्काल कार्यवाही की बात कही। मुख्यमंत्री के संज्ञान में मामला लाया। थाना प्रभारी के निलंबन नहीं होने तक पत्रकारों के साथ थाने में बैठे प्रदेश मीडिया प्रभारी श्री आशीष अग्रवाल। कटारा हिल्स थाने में एक पत्रकार के खिलाफ दर्ज की गई FIR अब तूल पकड़ चुकी है। पत्रकार संगठनों और मीडिया से जुड़े लोगों ने इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला करार देते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।   रॉयल प्रेस क्लब का विरोध प्रदर्शन   इस मामले में पत्रकारों का संगठन रॉयल प्रेस क्लब भी खुलकर विरोध में उतर आया है। क्लब के सदस्यों ने थाने की चौखट पर बैठकर प्रदर्शन किया और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।   भाजपा मीडिया प्रभारी ने बताया ‘दोषपूर्ण कार्यवाही’   इस मुद्दे पर भाजपा के मीडिया प्रभारी ने भी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस FIR को गलत करार देते हुए संबंधित थाना प्रभारी (TI) को निलंबित करने की मांग की है। उनका कहना है कि पत्रकारों पर इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पुलिस की कहानी में झोल है- एफआईआर में दावा किया गया कि एक्सीडेंट में कुलदीप सिंगोरिया की गाड़ी शामिल थी, लेकिन यह कार कुलदीप की नहीं थी बल्कि वह एक सफेद बोलेरो में बैठे थे। एक्सीडेंट जैसे मामूली केस में गैरजमानती धारा लगाना असामान्य है जो पुलिसिया कार्रवाई को संदिग्ध बनाता है। गिरफ्तारी के बाद कुलदीप को परिजनों से नहीं मिलने दिया गया और सीधा जेल भेज दिया गया। बिना किसी आधार फोन जब्त करना और शिकायतकर्ता द्वारा पहचान डिनाई करना कलेक्टर से रहा है विवाद – पत्रकार कुलदीप ने कुछ महीने पहले नर्मदापुरम कलेक्टर सोनिया मीणा पर कई आरोप लगाए थे। यह आरोप खाद के लिए परेशान किसानों पर लाठीचार्ज की खबर चलाई थी। जिसकी खुन्नस निकालने की एवज में पत्रकार कुलदीप को निशाना बनाया गया है। recent visitors 27

बीजेपी नेता का टूटा पैर तो अस्पताल को बना दिया पार्टी दफ्तर, बेड के पीछे पोस्टर लगाकर हुई मीटिंग

कानपुर पार्टी विद डिफरेंस के नेता गजब की स्टाइल में सियासत करते हैं और जब सत्ता हो तो अस्पताल का वार्ड भी पार्टी का कार्यालय बन जाता है। यह मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर से है, जहां कानपुर महानगर उत्तर में जिला अस्पताल के वार्ड में ही कार्यकर्ताओं की बैठक ले ली गई। कानपुर के भाजपा जिला अध्यक्ष कौन हैं? कानपुर भाजपा जिलाध्यक्ष अध्यक्ष अनिल दीक्षित ने अपने टूटे पैर के इलाज के दौरान अस्पताल में कार्यकर्ताओं की बैठक की। बैठक के दौरान अस्पताल के बेड के पीछे पार्टी का बैनर टांगा सामने और अगल-बगल वार्ड के कमरे की बेंच पर बेड पर कार्यकर्ताओं को बैठाया गया। 10 मिनट की इस बैठक में नेताजी बेड पर लेटे लेटे कार्यकर्ताओं में उत्साह भरते रहे। अब इसे आप समर्पण कहें या रुतबा या फिर राजनीतिक तमाशा जहां कैमरा भी बुलाया गया था। अस्पताल में क्यों हुई जिलाध्यक्ष की बैठक? कानपुर के आर्य नगर स्थित मेदांता अस्पताल के वार्ड में हुई इस बैठक में जिला अध्यक्ष अनिल दीक्षित ने सरकार के 8 साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रमों की चर्चा की और वहीं कार्यकर्ताओं में जिम्मेदारी भी बांटी। जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित ने बताया कि पार्टी की तरफ से 14 अप्रैल तक होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की सूची आई थी। यह उसी के संबंध में बैठक बुलाई गई थी।   निजी अस्पताल के वार्ड में ही पार्टी का झंडा बैनर लगाकर हुई इस बैठक में समर्पण की नेताजी को तारिफ भी मिल सकती है। क्योंकि नेताजी को अपनी चोट से ज्यादा खुशी इस बात पर है कि कार्यकर्ताओं का प्रेम इनको पैर में पेन महसूस ही नहीं होने दे रहा है। recent visitors 109

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कर्मचारियों की निलंबन अवधि को माना जाएगा ड्यूटी का हिस्सा, एक अहम फैसला सुनाया

बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूत करने वाला एक अहम फैसला सुनाया है। रायगढ़ वन मंडल में कार्यरत वनपाल दिनेश सिंह राजपूत की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने राज्य शासन के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें उसकी निलंबन अवधि को ड्यूटी का हिस्सा नहीं माना गया था और शत-प्रतिशत वेतन रिकवरी का निर्देश दिया गया था। न्यायमूर्ति बीडी गुरु ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए यह स्पष्ट किया कि निलंबन की अवधि को ड्यूटी के रूप में ही गिना जाएगा। उन्होंने निर्णय में यह भी उल्लेख किया कि इसी तरह की स्थिति वाले अन्य कर्मचारियों की निलंबन अवधि को ड्यूटी के रूप में मान्यता दी गई, लेकिन याचिकाकर्ता के मामले में भेदभाव किया गया। यह है मामला याचिकाकर्ता दिनेश सिंह 2 जनवरी 2015 से 2 जुलाई 2019 तक एतमानगर रेंज के पोंडी सब-रेंज के अंतर्गत कोंकणा बीट के अतिरिक्त प्रभार के साथ बीट गार्ड बरौदखर के पद पर कार्यरत थे। 2 जुलाई 2019 को उन्हें तथ्यों को छिपाने और गुमराह करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया था। बाद में 8 मई 2020 को मुख्य वन संरक्षक, बिलासपुर वन वृत्त ने उनका निलंबन निरस्त कर दिया। मगर, विभागीय जांच लंबित रहने के दौरान उन्हें कटघोरा रेंज कार्यालय में विशेष ड्यूटी पर नियुक्त कर दिया गया। याचिकाकर्ता को 312 दिनों यानी 10 माह 7 दिनों तक निलंबित रखा गया। विभागीय जांच में आंशिक दोषी पाए जाने के बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत उनके वेतन से 17,467 रुपये की वसूली और तीन वेतन वृद्धि रोकने का आदेश जारी किया गया था। याचिकाकर्ता का आरोप था कि अन्य कर्मचारियों पर भी समान आरोप लगे थे। मगर, उनके मामले में निलंबन अवधि को ड्यूटी का हिस्सा माना गया। हालांकि, याचकिकर्ता की निलंबन की अवधि को ड्यूटी का हिस्सा नहीं माना गया था।   निर्णय और उसका प्रभाव हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने इस मामले में राज्य शासन के आदेश को खारिज करते हुए निलंबन अवधि को ड्यूटी का हिस्सा मानने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि अन्य कर्मचारियों की निलंबन अवधि को ड्यूटी में जोड़ा गया है, तो याचिकाकर्ता के साथ भेदभाव क्यों किया गया। सुप्रीम कोर्ट के समानता के सिद्धांत का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि समान परिस्थितियों में सभी कर्मचारियों को समान अधिकार मिलना चाहिए। सरकारी सेवा में अनुशासन अनिवार्य: बर्खास्तगी सही वहीं, एक अन्य मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने जनजातीय कल्याण विभाग के दैनिक वेतनभोगी चौकीदार की सेवा समाप्ति को सही ठहराते हुए स्पष्ट किया कि सरकारी सेवा में अनुशासनहीनता को कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामला दुर्ग जिले के पोस्ट मैट्रिक आदिवासी छात्रावास में कार्यरत कार्य-भारित कर्मचारी (वर्क चार्ज कर्मचारी) दीपक जोशी से जुड़ा है। उसे अनुशासनहीनता और छात्रों के साथ दुर्व्यवहार के गंभीर आरोपों के चलते साल 2017 में बर्खास्त कर दिया गया था। याचिकाकर्ता दीपक जोशी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपनी बर्खास्तगी को चुनौती दी थी। उनका दावा था कि उन्हें विभागीय जांच प्रक्रिया में उचित अवसर नहीं दिया गया। इसके साथ ही उन्हें आरोपों का खंडन करने के लिए जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए गए। न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकलपीठ ने अपने निर्णय में कहा कि पर्याप्त अवसर मिलने के बावजूद याचिकाकर्ता ने अपनी सफाई नहीं दी। फैसले का क्या होगा असर फैसले से स्पष्ट हो गया है कि सरकारी सेवाओं में अनुशासनहीनता और कर्तव्यहीनता को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकारी कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों का पालन करें अन्यथा कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। फैसले ने सरकारी विभागों में अनुशासन और कार्य नैतिकता को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया है। recent visitors 35

खास दुकान से यूनिफॉर्म, कॉपी-किताब खरीदने को किया मजबूर, तो एमपी में स्कूल पर होगा एक्शन

uniforms and copy books from a particular shop action will be taken against the schoo भोपाल ! निजी स्कूलों ने शुल्क ढांचे (फीस स्ट्रक्चर) में मनमानी की या यूनिफॉर्म, कॉपी-किताब को किसी विशेष दुकान से खरीदने का दबाव बनाया तो उन पर कार्रवाई हो सकती है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया। स्कूलों को 31 मार्च तक अपना फीस स्ट्रक्चर और कोर्स की जानकारी सार्वजनिक करने को कहा गया है, ताकि पेरेंट्स को इसकी जानकारी हो जाए। भोपाल के अधिकांश निजी स्कूलों द्वारा किताबों की सूची और फीस की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसके साथ ही स्कूलों द्वारा निश्चित दुकानों से कॉपी-किताबें व यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव बनाया जाने लगा है। संयुक्त संचालक अरविंद चौरगड़े की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि नया शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले निजी स्कूल लेखक एवं प्रकाशक के नाम और मूल्य के साथ कक्षावार पुस्तकों की सूची विद्यालय में प्रदर्शित करें।ऐसी सूची मांगने पर उपलब्ध कराई जाए, ताकि विद्यार्थी या अभिभावक इनको खुले बाजार से भी खरीद सकें। प्रत्येक स्कूल प्रबंधक, प्राचार्य स्कूल में हर कक्षा की पाठ्यपुस्तकों और प्रकाशकों की जानकारी को डीईओ की वेबसाइट पर अनिवार्य अपलोड करें।किसी भी प्रकार की शिक्षण सामग्री पर स्कूल का नाम अंकित नहीं होना चाहिए। स्कूल के सूचना पटल पर यह भी अंकित किया जाए कि अभिभावक किसी दुकान विशेष से खरीदने के लिए बाध्य नहीं हैं। डीईओ पर निगरानी की जिम्मेदारीआदेश में जिला शिक्षा अधिकारी को निगरानी और आदेश लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है। कहा गया है कि डीईओ सुनिश्चित करें कि जिले के सीबीएसई, आईसीएसई, एमपी बोर्ड समेत सभी प्री प्राइमरी से लेकर 12वीं तक स्कूल में संचालित की जाने वाली किताबों, कॉपियों व यूनिफॉर्म की सूची 31 मार्च तक विद्यालय के सूचना पटल पर लग जाएं। एनसीईआरटी की पुस्तकें अनिवार्यआदेश में स्कूल शिक्षा विभाग ने पहली से 12वीं तक की कक्षाओं में एनसीईआरटी की पुस्तकें अनिवार्य कर दिया है। कहा गया है कि इस आदेश का कड़ाई से पालन किया जाए, नहीं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। recent visitors 156

राजनांदगांव में पारा 37° पार, 4 दिन बढ़ेगी गर्मी, अगले तीन-चार दिनों में तापमान में वृद्धि होने से गर्मी बढ़ेगी

रायपुर वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर कम होने के बाद छत्तीसगढ़ में तापमान बढ़ने लगा है। पिछले दो दिनों से दुर्ग संभाग सबसे गर्म बना हुआ है। राजनांदगांव में पारा 37 डिग्री के पार पहुंच गया है। 4 जिलों रायपुर, जगदलपुर, दुर्ग में पारा 35 डिग्री के पार है। आज (मंगलवार) से मौसम साफ होने लगेगा। अगले तीन-चार दिनों में तापमान में वृद्धि होने से गर्मी बढ़ेगी। प्रदेश में मौसम में आया बदलाव अब खत्म होने वाला है। छत्तीसगढ़ के आसपास बने सिस्टम धीरे-धीरे कमजोर हो रहे हैं। पिछले 24 घंटे में जशपुर नगर में 53.6 मिमी बारिश हुई है। रायपुर में दिन का पारा 36 डिग्री सोमवार को आसमान में हल्के बादल रहे उसके बावजूद दिन का तापमान 36 डिग्री के करीब रहा। यह सामान्य से 1.2 डिग्री कम था। दो दिन पहले तक तापमान तीन डिग्री तक कम था। सोमवार को रात का तापमान 23.4 डिग्री रहा। ये जो सामान्य से 1.2 डिग्री अधिक था। मौसम विभाग का कहना है कि अगले तीन-चार दिन दिन का तापमान दो से तीन डिग्री तक बढ़ेगा। आज रायपुर में अधिकतम तापमान 37 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है। बिलासपुर में पारा 35 डिग्री के करीब यहां दिन का तापमान 34.7 डिग्री के करीब रहा। यह सामान्य से 3.1 डिग्री कम था। न्यूनतम तापमान 21.7 डिग्री रहा, जो औसत से 1.3 डिग्री अधिक था। गौरेला पेंड्रा मरवाही में अधिकतम तापमान 33. 4 डिग्री रहा, जो सामान्य से करीब 1 डिग्री कम रहा। न्यूनतम तापमान 16 डिग्री रहा। जो नॉर्मल से करीब 3.2 डिग्री कम था। राजनांदगांव में सबसे ज्यादा गर्मी दुर्ग संभाग के जिलों में इन दोनों तापमान सामान्य से अधिक है। सोमवार को राजनांदगांव जिले में सबसे अधिक 37.5 डिग्री तापमान रहा। वहीं दुर्ग जिले में दिन का टेम्प्रेचर 35.6 डिग्री रहा। दोनों जिले में रात का तापमान 20 डिग्री रहा। सरगुजा में पारा सामान्य से कम यहां सोमवार को दिन का तापमान समान्य से कम रहा। अंबिकापुर में अधिकतम तापमान 31.7 डिग्री रहा जो सामान्य से 2.6 डिग्री कम था। वहीं रात का तापमान 15.5 डिग्री रिकॉर्ड किया गया जो नॉर्मल से 2.4 डिग्री कम था। बस्तर में आज से बदलेगा मौसम बस्तर संभाग के जिलों में आज मौसम साफ रहेगा। सोमवार को जगदलपुर में अधिकतम तापमान 35.2 डिग्री रहा। यह सामान्य से 1.3 डिग्री कम था। रात का तापमान 21.9 डिग्री दर्ज किया गया। जो सामान्य से 1.6 डिग्री अधिक रहा। recent visitors 53

15 दिनों में 13 हजार राशन दुकानों की जांच मुश्किल, CG में चावल घोटाला छुपाने को कर रहे लेटलतीफी

रायपुर प्रदेश की 13 हजार राशन दुकानों में ऑनलाइन स्टॉक और गोदाम में रखे स्टॉक में अंतर की जांच अब तक शुरू नहीं हो पाई है। यह स्थिति तब है जब बचत स्टॉक के सत्यापन और डेटा एंट्री 10 अप्रैल, 2025 तक पूरा की जानी है। राशन दुकानों की जांच दल में खाद्य विभाग के साथ गृह विभाग और सहकारिता के सदस्यों को रखा जाएगा। इसके लिए 13 फरवरी को आदेश जारी किया गया था। यह सत्यापन एक मार्च 2025 की स्थिति में किया जाना है। इस तरह 13 हजार राशन दुकानों की जांच 15 दिनों में किया जाना मुश्किल है। लेटेस्ट और ट्रेंडिंग स्टोरीज जांच में देरी का फायदा गड़बड़ी करने वाले राशन दुकान संचालक उठा रहे हैं। बता दें कि राजधानी की अधिकांश राशन दुकानों में वास्तविक स्टॉक में गड़बड़ी है। इसलिए जांच को अटकाया जा रहा है। महिला समितियों ने कलेक्टर से की शिकायत सोमवार को कई महिला समितियों ने कलेक्टर से मिलकर फर्जी अध्यक्ष का वीडियो दिखाकर जांच की मांग की है। वीडियो में संघ का फर्जी अध्यक्ष महिलाओं को धमका कर खुद राशन दुकान चालने का दवाब बना रहा है। मामले में कलेक्टर ने खाद्य नियंत्रक को जांच करने के लिए कहा है। महिलाओं ने बताया कि फर्जी अध्यक्ष पूर्व विधायक के नाम से दुकानों पर कार्रवाई करवाने की धमकी देकर खुद दुकानें हथिया लेता था। इसके बाद दुकानों से लाखों की चावल की हेराफेरी करता था। इसके बाद खाद्य अधिकारियों से मिलकर दुकानें निलंबित करकर अपनी संस्था में जुड़वाता है।   फिर हुई करोड़ों के चावल घोटाले की शिकायत खमतराई राशन दुकान में एपीएल घोटला और बिना स्टॉक के वितरण दिखाने वाले राशन दुकान संचालक के खिलाफ दो साल पहले की गई शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। अब फिर से मामले की शिकायत ईओडब्लू में की गई है।   recent visitors 36

माध्यमिक शिक्षा मंडल में भी अब CBSE मॉडल की तरह होंगी बोर्ड परीक्षाएं, अधिसूचना जारी

भोपाल मध्य प्रदेश में अब शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सीबीएसई (CBSE) की तरह, अब एमपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा साल में दो बार होगी। यह नई व्यवस्था 2024-25 सत्र से शुरू होगी। पहली परीक्षा फरवरी-मार्च में होगी और दूसरी परीक्षा जुलाई-अगस्त में होगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस बदलाव के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल 1965 में अमेंडमेंट कर नोटिफिकेशन जारी की है। राजपत्र के अनुसार ऐसे छात्रों को जो द्वितीय परीक्षा में बैठने वाले हों, द्वितीय परीक्षा का रिजल्ट आने तक अगली उच्चतर कक्षा में अस्थायी प्रवेश ले सकेंगे। ऐसे छात्र जो मंडल की प्रथम परीक्षा के परिणाम में एक या एक से अधिक विषयों में अनुपस्थित एवं अनुत्तीर्ण रहे है, वह द्वितीय परीक्षा में सम्मलित हो सकेंगे। किसी विषय में उत्तीर्ण भी अंक सुधार सकेंगे। एक से ज्यादा विषय में श्रेणी सुधार संभव ● प्रथम परीक्षा में उत्तीर्ण रहे छात्र एक या एक से अधिक विषयों की द्वितीय परीक्षा में सम्मलित होने के पात्र होंगे। ● प्रायोगिक विषयों में कोई छात्र प्रथम परीक्षा की प्रयोगिक व आंतरिक परीक्षा में केवल अनुत्तीर्ण भाग में सम्मलित होने के लिए पात्र होगा। ● द्वितीय परीक्षा में सम्मलित होने के लिए छात्र को निर्धारित शुल्क के साथ परीक्षा आवेदन पत्र भरना अनिवार्य होगा, पर द्वितीय परीक्षा के दौरान छात्र द्वारा प्रथम परीक्षा में लिए गए विषय में परिवर्तन की अनुमति नहीं दी जाएगी। विद्यार्थियों के लिए नई प्रक्रिया द्वितीय परीक्षा (Second Exam) में शामिल होने के लिए विद्यार्थियों को एप्लीकेशन लेटर भरना अनिवार्य होगा। लेकिन, परीक्षा के समय विषय में कोई बदलाव की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, जिन छात्रों ने पहले परीक्षा में एक या एक से अधिक विषयों में एब्सेंट या फेल्ड पाया हो, वे अब द्वितीय परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। कैसे तैयार होगा वार्षिक परिणाम? दोनों परीक्षाओं में प्राप्त अंकों के आधार पर छात्रों का वार्षिक परिणाम तय किया जाएगा। द्वितीय परीक्षा में केवल वही छात्र शामिल हो सकेंगे, जिन्होंने पहली परीक्षा दी हो। छात्र अंक सुधार या फेल हुए विषयों में दोबारा परीक्षा दे सकेंगे। अस्थायी प्रवेश और अन्य नियम द्वितीय परीक्षा देने वाले छात्र अगली कक्षा में अस्थायी प्रवेश ले सकेंगे, लेकिन अंतिम परिणाम आने तक उनकी उपस्थिति प्रोविजनल होगी। प्रायोगिक विषयों में केवल अनुत्तीर्ण भाग की ही दोबारा परीक्षा दी जा सकेगी। छात्र परीक्षा शुल्क भरकर ही द्वितीय परीक्षा के लिए आवेदन कर सकेंगे। पहली परीक्षा में चुने गए विषय बदलने की अनुमति नहीं होगी। CBSE की तर्ज पर MP बोर्ड का कदम इससे पहले, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल (CBSE) ने भी अगले सत्र से 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित करने का फैसला किया था। MP बोर्ड ने भी इसी मॉडल को अपनाया है। हर साल MP बोर्ड की परीक्षाओं में लगभग 18 लाख छात्र शामिल होते हैं। पूरक परीक्षा की जगह द्वितीय परीक्षा पहले बोर्ड की मुख्य परीक्षा के बाद जुलाई में पूरक परीक्षा होती थी, लेकिन अब इसकी जगह द्वितीय परीक्षा ली जाएगी। इससे छात्रों को अधिक मौका मिलेगा और रिजल्ट की प्रक्रिया भी पहले से बेहतर होगी। इस नई व्यवस्था पर 15 दिनों के भीतर सुझाव या आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। उसके बाद इसे अंतिम रूप देकर लागू कर दिया जाएगा। दोनों परीक्षाओं के आधार पर तैयार होगा रिजल्ट     द्वितीय परीक्षा में वही विद्यार्थी शामिल होंगे, जिन्होंने पहली परीक्षा दी है। इसके बाद बोर्ड की पहली परीक्षा और दूसरी परीक्षा में प्राप्त अंक के आधार पर वार्षिक परीक्षा का परिणाम तैयार किया जाएगा।     उल्लेखनीय है कि हाल ही में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल (सीबीएसई) ने भी अगले शैक्षणिक सत्र से दो बार 10वीं और 12वीं की परीक्षा कराने का निर्णय लिया था। इसी तर्ज पर मप्र बोर्ड भी आगे बढ़ा है।     मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं व 12वीं परीक्षा में हर साल करीब 18 लाख विद्यार्थी शामिल होते हैं। बोर्ड की अभी तक एक ही परीक्षा फरवरी या मार्च में होती थी। मुख्य परीक्षा के रिजल्ट के बाद जुलाई में पूरक परीक्षा आयोजित की जाती थी, जिसे अब नई व्यवस्था में नहीं कराने का निर्णय लिया गया है। अब ऐसी रहेगी व्यवस्था द्वितीय परीक्षा में बैठने वाले विद्यार्थी पूर्ण परीक्षा परिणाम घोषित होने तक माध्यमिक शिक्षा मंडल या महाविद्यालय द्वारा संबद्धता प्राप्त संस्था के प्रधानाचार्यों से अनुमति प्राप्त कर अगली कक्षा में अस्थायी प्रवेश ले सकेंगे। ऐसे विद्यार्थियों के लिए, जो मंडल की प्रथम परीक्षा के परीक्षा परिणाम में एक या एक से अधिक विषयों में अनुपस्थित अथवा अनुत्तीर्ण रहे हों, द्वितीय परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। ऐसे अभ्यर्थी, जो किसी विषय में उत्तीर्ण हो गए हों, वे भी अंक सुधार के लिए द्वितीय परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। प्रथम परीक्षा में उत्तीर्ण रहे विद्यार्थी भी एक या एक से अधिक विषयों में द्वितीय परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। प्रायोगिक विषयों में कोई विद्यार्थी प्रथम परीक्षा की प्रायोगिक/आंतरिक परीक्षा के केवल अनुत्तीर्ण भाग में शामिल होने के लिए पात्र होगा। द्वितीय परीक्षा में शामिल होने के लिए विद्यार्थी को आवेदन-पत्र भरना अनिवार्य होगा, लेकिन द्वितीय परीक्षा के दौरान विद्यार्थी द्वारा प्रथम परीक्षा में लिए गए विषय में परिवर्तन की अनुमति नहीं होगी। recent visitors 27