गाजा में जनता का विरोध, युद्ध शुरू होने के बाद से हमास के खिलाफ सबसे बड़ा प्रदर्शन

गाजा इजराइल के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से उत्तरी गाजा में फिलिस्तीनियों ने ही सबसे बड़ा हमास विरोधी विरोध प्रदर्शन किया है. इसमें शामिल होने लिए सैकड़ों फिलिस्तीनी सड़कों पर उतरे. उन्होंने युद्ध को समाप्त करने की मांग की और मांग की कि हमास सत्ता से हट जाए. ये प्रदर्शन गाजा पट्टी के उत्तरी हिस्से में बेत लाहिया में हुए. इजरायली सेना द्वारा लगभग दो महीने के संघर्ष विराम के बाद गाजा पर अपनी गहन बमबारी फिर से शुरू करने के एक हफ्ते बाद भीड़ इकट्ठा हुई थी। मंगलवार, 25 मार्च की देर रात सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो और तस्वीरों में सैकड़ों प्रदर्शनकारी, जिनमें ज्यादातर पुरुष थे, "बाहर, बाहर, बाहर, हमास बाहर" और "हमास आतंकवादियों" के नारे लगाते हुए दिखाई दिए. उनके हाथों में प्ले कार्ड थे जिनपर "युद्ध बंद करो" और "हम शांति से रहना चाहते हैं" जैसे नारे लिखे हुए थे. सवाल यह है कि आखिर फिलिस्तीन में आम लोग अब हमास के खिलाफ क्यों सड़कों पर उतर रहे हैं. जानकारों का कहना है कि आम इंसान जंग से आजीज आ चुके हैं. कुछ ये भी कह रहे हैं कि यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी का भी असर हो सकता है जिसमें उन्होंने हमास-इजरायल जंग को खत्म करने के लिए फिलिस्तीनियों को कहीं और बसाने की बात कही थी. खैर इसका कारण जो भी, लेकिन आम फिलिस्तीनियों का सड़क पर उतरना गाजा और पूरे मध्य पूर्व में शांति की आहट का संकेत देता है. बुधवार को ज्यादातर प्रदर्शन गाजा के उत्तरी हिस्से में हुए. लोग 17 महीने से चल रही इजराइल के साथ जंग को खत्म करने की मांग कर रहे थे, जिसने गाजा में जिंदगी को बहुत मुश्किल बना दिया है. लेकिन प्रदर्शनकारियों ने हमास की भी खुलकर आलोचना की, जिसका अब भी गाजा पर कब्जा है. बेत लाहिया कस्बे में करीब 3,000 लोग जमा हुए. वहां मंगलवार को भी ऐसा ही प्रदर्शन हुआ था. जनता हमास का पतन चाहती है… जैसे नारे लगाए गए. गाजा शहर के शिजैया इलाके में भी दर्जनों लोगों ने “बाहर, बाहर, हमास बाहर जाओ” के नारे लगाए. ‘हमारे बच्चे मारे गए’ न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक अबेद रदवान नाम के एक शख्स ने कहा, “हमारे बच्चे मारे गए, हमारे घर तबाह हो गए.” उन्होंने बेत लाहिया के प्रदर्शन में हिस्सा लिया था और कहा कि यह युद्ध, हमास, फिलिस्तीनी गुटों, इजराइल और दुनिया की चुप्पी के खिलाफ था. अम्मार हसन, जिन्होंने मंगलवार को प्रदर्शन में हिस्सा लिया, ने बताया कि यह शुरू में युद्ध के खिलाफ छोटा प्रदर्शन था, लेकिन बाद में 2,000 से ज्यादा लोग जुट गए और हमास के खिलाफ नारे लगाने लगे. उन्होंने कहा, “हम सिर्फ हमास को प्रभावित कर सकते हैं. प्रदर्शन से इजराइल रुकेगा नहीं, लेकिन हमास पर असर पड़ सकता है.” हमास ने पहले प्रदर्शनों को हिंसा से रोका था, लेकिन इस बार कोई साफ हस्तक्षेप नहीं दिखा. शायद इसलिए कि इजराइल के साथ जंग फिर शुरू होने के बाद हमास कमजोर दिखाई दे रहा है. हमास के वरिष्ठ नेता बासेम नईम ने फेसबुक पर कहा कि लोगों को प्रदर्शन का हक है, लेकिन उनका ध्यान “अपराधी हमलावर” इजराइल पर होना चाहिए. बेत लाहिया के परिवारों के बुजुर्गों ने इजराइल के नए हमले और गाजा में सभी आपूर्तियों पर सख्त रोक के खिलाफ प्रदर्शनों का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि समुदाय इजराइल के खिलाफ सशस्त्र प्रतिरोध का पूरा समर्थन करता है. बेत हनून के मोहम्मद अबू साकर ने कहा, “यह प्रदर्शन राजनीति के बारे में नहीं था, यह लोगों की जिंदगी के बारे में था. हम हत्या और विस्थापन रोकना चाहते हैं. हम इजराइल को नहीं रोक सकते, लेकिन हमास से रियायतें मांग सकते हैं.” दो दिन से लगातार प्रदर्शन जबालिया में भी मंगलवार को ऐसा ही प्रदर्शन हुआ. एक प्रदर्शनकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि वे इसलिए शामिल हुए क्योंकि “सबने हमें नाकाम किया.” उन्होंने इजराइल, हमास, पश्चिमी समर्थित फिलिस्तीनी प्राधिकरण और अरब मध्यस्थों के खिलाफ नारे लगाए. वहां हमास की सुरक्षा बल नहीं दिखे, लेकिन समर्थकों और विरोधियों के बीच झड़पें हुईं. बाद में उन्हें प्रदर्शन में शामिल होने का पछतावा हुआ, क्योंकि इजराइली मीडिया ने हमास विरोध पर जोर दिया. इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने फिलिस्तीनियों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की. उन्होंने कहा, “हमास को गाजा से हटाओ और बंधकों को तुरंत रिहा करो. यही जंग रोकने का तरीका है.” यह प्रदर्शन इजराइल के हमास के साथ संघर्षविराम खत्म करने और सैकड़ों लोगों को मारने वाले हमलों के एक हफ्ते बाद शुरू हुए. इस महीने की शुरुआत में इजराइल ने गाजा में भोजन, ईंधन, दवा और मानवीय सहायता रोक दी. 7 अक्टूबर, 2023 को हमास के हमले, जिसमें 1,200 लोग मारे गए और 251 बंधक बनाए गए, के बाद यह जंग शुरू हुई थी. इजराइल के जवाबी हमलों में 50,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. recent visitors 72

PM मोदी ने अपने पत्र में शेख मुजीबुर्रहमान की विरासत को मिटाने की कोशिश की का किया जिक्र

नई दिल्ली भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की राह देख रहे बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस को एक खास चिट्ठी मिली है. ये चिट्ठी प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश के स्वतंत्रता दिवस पर लिखी है. बांग्लादेश अपना स्वतंत्रता दिवस 26 मार्च को मनाता है. यह दिन 1971 में उस ऐतिहासिक क्षण को बताता है, जब भारत की सैन्य सहायता के बदौलत बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान से अलग होकर एक स्वतंत्र देश बना था. पीएम मोदी ने इस चिट्ठी में इतिहास का जिक्र किया और 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम की अटूट भावना को भारत-बांग्लादेश के मजबूत संबंधों की नींव बताया, और सूक्ष्म रूप से बांग्लादेश को उसकी स्थापना में भारत की भूमिका की याद दिलाई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पत्र में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का जिक्र उस समय किया है जब भारत के इस पड़ोसी देश में बंग बंधु शेख मुजीबुर्रहमान की विरासत को मिटाने की कोशिश की जा रही है. बांग्लादेश में पिछले साल 5 अगस्त को कथित क्रांति के बाद शेख हसीना को सत्ता से हटाने के बाद शेख मुजीबुर्रहमान से जुड़े प्रतीकों, चिह्नों पर हमले हुए हैं. बांग्लादेश स्थित भारतीय उच्चायोग द्वारा साझा किये गए संदेश में PM मोदी ने बांग्लादेश के लोगों को शुभकामनाएं देते हुए लिखा है, "यह दिन हमारे साझा इतिहास और बलिदान का प्रमाण है, जिसने हमारी द्विपक्षीय साझेदारी की नींव रखी है." दोनों देशों के बीच गहरे संबंधों को स्वीकार करते हुए उन्होंने आगे कहा, "बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम की भावना हमारे संबंधों के लिए मार्गदर्शक बनी हुई है, जो कई क्षेत्रों में फली-फूली है और हमारे लोगों को ठोस लाभ पहुंचा रही है. हम शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए अपनी साझा आकांक्षाओं और एक-दूसरे के हितों और चिंताओं के प्रति पारस्परिक संवेदनशीलता के आधार पर इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं." गौरतलब है कि 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान भारत ने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के लोगों को सैन्य, राजनयिक और मानवीय सहायता प्रदान की. भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ युद्ध लड़ा, जिसके परिणामस्वरूप 16 दिसंबर 1971 को ढाका में पाकिस्तान की हार हुई और बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र बन गया. बता दें कि यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है, वहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के राजनीतिक वापसी की चर्चा जोर पकड़ रही है. 1971 के मुक्ति संग्राम का जिक्र कर पीएम मोदी ने बांग्लादेश को संदेश दिया है कि बांग्लादेश के निर्माण में भारत का रोल दोनों देशों के बीच रिश्तों का रेफरेंस प्वाइंट है. गौरतलब है कि शेख हसीना की सत्ता से विदाई के बाद बांग्लादेश के नए शासन ने भारत से टकराव वाला रुख अपनाया है. लेकिन भारत पर कई चीजों के लिए निर्भर रहने वाला बांग्लादेश अब घुटनों पर आ रहा है. बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की इच्छा जताई है और इस बाबत भारत को अपना संदेश भेजा है. चर्चाएं हैं कि बैंकॉक में 3-4 अप्रैल को होने वाले बिमस्टेक शिखर सम्मेलन के दौरान यूनुस प्रधानमंत्री मोदी से मिल सकते हैं. लेकिन पीएम मोदी मोहम्मद यूनुस से मिलेंगे या नहीं इस मुद्दे पर नई दिल्ली ने अबतक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.   विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पहले एक संसदीय समिति को बताया था कि बांग्लादेश के अनुरोध पर विचार किया जा रहा है. सरकारी सूत्रों ने  बताया कि कार्यक्रम के दौरान मोदी की द्विपक्षीय बैठकों की घोषणा बाद में की जाएगी. बता दें कि शेख हसीना के जाने के बाद बांग्लादेश बॉर्डर पर भारत की ओर से किए जा रहे बाड़ेबंदी, बांग्लादेश में हिन्दुओं की सुरक्षा समेत अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर ढाका का व्यवहार लीक से हटकर और भारत की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा है. इसलिए भारत बांग्लादेश के साथ रिश्तों को आगे ले जाने पर सतर्क रहा है.  recent visitors 48

नरसिंहपुर में टीबी मुक्त ग्राम पंचायत सम्मान समारोह में शामिल हुए मंत्री पटेल

भोपाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के मुख्य आतिथ्य में टीबी मुक्त ग्राम पंचायत सम्मान समारोह कार्यक्रम पीजी कॉलेज नरसिंहपुर के आॉडिटोरियम में हुआ। मंत्री पटेल ने वर्ष 2024 के लिए जिले की टीबी मुक्त 161 ग्राम पंचायतों को प्रमाण पत्र एवं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की प्रतिमा प्रदान कर सम्मानित किया। मंत्री पटेल ने कहा कि जिले की अन्य ग्राम पंचायतों को भी टीबी रोग मुक्त पंचायत बनाने के लिये लगातार प्रयास करें। टीबी की बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए आमजन में जागरूकता लाना बहुत जरूरी है। इसके लिए ग्राम पंचायतों के सरपंच महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकते हैं। टीबी रोग किन कारणों से होता है और इनसे कैसे बचाव करें? यह जानकारी लोगों तक पहुंचना जरूरी है। टीबी रोग के प्रति ग्रामीणों में जागरूकता रहेगी, तो पंचायत स्वतः टीबी रोग मुक्त हो जाएगी। मंत्री पटेल ने कहा कि टीबी का समय पर पता चल जाये और इसका पूरा उपचार हो जाए तो, यह पूरी तरह से रोकथाम और उपचार योग्य रोग है। इसमें घबराने वाली बात नहीं है। टीबी को छुपाएं नहीं और न कोई भी व्यक्ति इसे बताने में संकोच न करे। सरकार इस बीमारी की रोकथाम और उपचार के लिए निःशुल्क सुविधा प्रदान करती है। उन्होंने समाज में इस बीमारी से संबंधित भ्रम की जानकारी देते हुए कहा कि लोग इस बीमारी को कलंक के रूप में देखते हैं। इसे छूने से फैलने वाली बीमारी समझा जाता है। इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति को परिवार से दूर रखते है। हमें इन सभी भ्रम को दूर करना होगा। यह हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है। मंत्री पटेल ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को ज्यादा दिनों तक खांसी हो तो जांच अवश्य करायें। अब 60 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों को टीबी की वैक्सीन लगायी जा रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधि और आमजन भी इसमें अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करें। टीबी मरीजों के उपचार, स्वास्थ्य और पोषण की व्यवस्था के साथ जन-जागरुकता के लिए व्यापक प्रचार- प्रचार किया जाना सुनिश्चित किया जाए। मंत्री पटेल ने मंच से निर्देश देते हुए कहा कि ज़िले की जो पंचायतें चिन्हित की गई है, वहाँ वैक्सीनेशन कैंप किए जाने की जानकारी पूर्व से ही दी जाये। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती ज्योति नीलेश काकोड़िया, विधायक महेन्द्र नागेश, पं. रामस्नेही पाठक, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष महंत प्रीतमपुरी गोस्वामी, जनप्रतिनिधि, कलेक्टर श्रीमती शीतला पटले, पुलिस अधीक्षक श्रीमती मृगाखी डेका, सीईओ जिला पंचायत दलीप कुमार, सीएमएचओ डॉ एस एस ठाकुर, डॉ. विनय ठाकुर, समस्त बीएमओ, स्वास्थ्य विभाग, पुरस्कार प्राप्त करने वाली ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव, अधिकारी- कर्मचारी और गणमान्य नागरिक मौजूद थे।   recent visitors 47

दूरसंचार कंपनियां भविष्य में नियमित रूप से टैरिफ बढ़ाने की योजना बना रही, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

नई दिल्ली भारत में दूरसंचार सेवाओं की कीमतें आने वाले समय में और बढ़ सकती हैं। दूरसंचार कंपनियां भविष्य में नियमित रूप से टैरिफ बढ़ाने की योजना बना रही हैं ताकि वे अपने राजस्व में सुधार कर सकें। कंपनियां पहले भी टैरिफ में वृद्धि कर चुकी हैं जैसे दिसंबर 2019 नवंबर 2021 और जुलाई 2024 में। राजस्व वृद्धि की योजना रिपोर्ट के अनुसार दूरसंचार कंपनियां प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व (एआरपीयू) को बढ़ाने के लिए कीमतों में वृद्धि करेंगी। इसका मतलब है कि उपभोक्ता प्रीमियम प्लान की ओर रुख करेंगे जिससे कंपनियों के राजस्व में वृद्धि होगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय दूरसंचार क्षेत्र वर्तमान में एक महत्वपूर्ण चरण से गुजर रहा है जहां प्रतिस्पर्धा कम हो गई है और कंपनियां अब अधिक बार टैरिफ बढ़ाने की योजना बना रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार उद्योग में निवेश और ग्राहकों के डाटा खपत को देखते हुए रिटर्न अभी भी कम है इसलिए कंपनियां आने वाले वर्षों में अधिक बार टैरिफ बढ़ाएंगी। कंपनियों का राजस्व हुआ दोगुना रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले पांच सालों में दूरसंचार कंपनियों का राजस्व लगभग दोगुना हो गया है। उनकी लाभप्रदता में भी सुधार हो रहा है परिचालन लागत स्थिर हो रही है और मार्जिन मजबूत हो रहे हैं। 5जी सेवाओं के आने के बाद कंपनियों ने अपने पूंजीगत खर्च में कमी की है जिससे वित्त वर्ष 2025-26 और 2026-27 में मुक्त नकदी प्रवाह में बढ़ोतरी हो सकती है। 2जी ग्राहकों की संख्या में गिरावट रिपोर्ट के अनुसार 4जी और 5जी सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ भारत में 2जी ग्राहकों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। अगले पांच से छह वर्षों में 2जी ग्राहकों की संख्या नगण्य हो सकती है। वर्तमान में 25 करोड़ ग्राहक 2जी सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं और इनमें से वोडाफोन आइडिया के पास 40 प्रतिशत 2जी ग्राहक हैं जबकि एयरटेल के पास 23 प्रतिशत 2जी ग्राहक हैं। महंगे डाटा प्लान की ओर रुझान दूरसंचार ग्राहक अब 2जी से 4जी सेवाओं की ओर बढ़ रहे हैं और पोस्टपेड ग्राहकों की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। इसके कारण प्रति उपयोगकर्ता समग्र राजस्व में सुधार हो रहा है। इसके अलावा डाटा की खपत भी बढ़ रही है और ग्राहक अब अधिक कीमत वाले डाटा प्लान चुन रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय रोमिंग और ओटीटी सब्सक्रिप्शन जैसी सेवाओं की मांग में भी वृद्धि हो रही है। स्टारलिंक के लिए चुनौतीपूर्ण होगा भारत में विस्तार एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक अब भारत में अपनी सेवाओं का विस्तार करना चाहती है। एयरटेल और रिलायंस जियो के साथ समझौता करने के बाद स्टारलिंक वोडाफोन आइडिया से भी बातचीत कर रही है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टारलिंक को भारत में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। भारत में नियामकीय बाधाएं, उच्च आयात कर और सस्ते ब्रॉडबैंड सेवाओं के कारण स्टारलिंक के लिए कीमतों का सही निर्धारण करना मुश्किल हो सकता है। उपग्रह संचार क्षेत्र का विस्तार भारत का उपग्रह संचार क्षेत्र भी तेजी से बढ़ रहा है। सरकार की पहल जैसे कि दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास निधि योजना और दूरसंचार अधिनियम-2023 ने इस क्षेत्र को बढ़ावा दिया है। ओपन एफडीआई नीतियां, क्वांटम सैटेलाइट तकनीक में प्रगति और वीसैट नेटवर्क का विस्तार इस क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। इस प्रकार भारत का दूरसंचार क्षेत्र भविष्य में और अधिक महंगा हो सकता है लेकिन इसके साथ ही इसमें कई नई तकनीकी और व्यापारिक पहल भी सामने आ सकती हैं।   recent visitors 63

इंदौर में ‘आधार कार्ड’ में नाम, एड्रेस, फोटो बदलवाना आसान, खुले 150 से अधिक आधार सेंटर

 इंदौर अगर आपको आधार कार्ड से जुड़ा कोई भी काम कराना है तो ये खबर आपके काम की है। एमपी के इंदौर शहर में बीते कई दिनों से आधार कार्ड में नाम, फोटो और पता चेंज कराने वाले लोगों की लंबी लाइनें लग रही थी। जानकारी के मुताबिक रोज करीब 50 हजार से ज्यादा लोग पहुंच रहे थे। शहर के कई सेंटरों में भीड़ एकत्रित हो रही थी। जिसके कारण कई लोग अपना काम नहीं करा पा रहे थे, उन्हें घर वापस लौटना पड़ रहा था। बनाए गए 155 सेंटर इस अव्यवस्था के देखते हुए कलेक्टर आशीष सिंह ने इसकी मॉनीटरिंग बढ़ा दी है। अब शहर के करीब 155 सेंटर पर आधार कार्ड से जुड़े काम किए जा रहे है। अगर आप भी अपने आधार कार्ड में कोई चेंज कराना चाहते है तो अपने नजदीकी सेंटर पर जा सकते हैं। ये सेंटर्स बैंक व अस्पतालों में भी बनाए गए हैं। बढ़ाई गई मशीनों की संख्या आधार सेंटर्स की मॉनिटरिंग करने के लिए पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन और जिला ई-गर्वनेंस अधिकारी अतुल दुबे भी लगे हुए हैं। सर्विस प्रोवाइडर को भी कहा गया है कि वे उपभोक्ताओं के परेशानियों का हल तुरंत करें। साथ सेंटर्स पर मशीनों की संख्या को भी बढ़ा दिया गया है। जानिए कहां-कहां पर करा सकतें हैं करेक्शन -खेल प्रशाल, रेसकोर्स रोड (यहां चार सेंटर हैं) -सिटी यूनियन बैंक द मेग्नेट न्यू पलासिया -धन ट्राइडेंट पीयू-4, विजय नगर -फड़नीस कॉम्प्लेक्स एमजी रोड -एमपीजीबी निपानिया -आरबीएल बैंक लि. ग्राउंड फ्लोर बिजनेस सेंटर आरएनटी मार्ग -यूबीआई स्कीम-78 -यूको बैंक एचआईजी मेन रोड -यूको बैंक विजय नगर -यूनियन बैंक ऑफ इंडिया नर्सिंग बाजार -यूटीआई इंफ्रास्ट्रक्चर सेकंड फ्लोर सिटी सेंटर -बीएसएनएल एक्सचेंज तिलक पथ -सीएससी आधार डेमोग्राफिक अपडेट सेंटर विजय नगर -बैंक बीसीयूसीएल गुलजार कॉलोनी -श्रीसांई साइबर कैफे मेन रोड गणेश नगर -7 विराट नगर मूसाखेड़ी -2-अयोध्यापुरी कॉलोनी, प्रेस कॉम्प्लेक्स वैभव इंटरप्राइजेस-57 चाणक्य कॉम्प्लेक्स , सुंदरम कॉम्प्लेक्स भंवरकुआं, श्रीराम नगर पालदा, श्री सांई ऑनलाइन परदेशीपुरा -क्लॉथ मार्केट पोस्ट ऑफिस जीपीओ -जीएनसी आड़ा बाजार गुरु नानक चौक, वल्लभ नगर, मनोरमागंज -आधार पंजीयन केंद्र सेंट्रल म्यूजियम, शा. पीसी सेठी हॉस्पिटल, नगर निगम जोन 12 , जोन 18, जोन 11 , जोन, 9 कनाड़िया रोड पर संचार नगर आदि। recent visitors 40

राज्यपाल मंगुभाई पटेल सुबह 10:30 बजे कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे

भोपाल राजभवन में “कर्मयोगी बनें” विषय पर 28 मार्च 2025 को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल सुबह 10:30 बजे कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी कार्यशाला में शामिल होंगे। राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव के. सी. गुप्ता ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य प्राचीन ज्ञान और आधुनिक नेतृत्व-विधाओं के साथ संयोजित कर उपयोग करने का प्रशिक्षण देना है। साथ ही शैक्षणिक संस्थानों में कर्मयोग के सिद्धांतों के समावेश, विकास और सेवा का वातावरण बना कर सकारात्मक बदलाव लाना है। कार्यशाला में मध्यप्रदेश के सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के कुलगुरू एवं कुलसचिव, पी.एम. एक्सीलेंस और स्वशासी कॉलेज के प्राचार्य सहित विभिन्न संकायों के प्राध्यापक शामिल होंगे। तकनीकी सत्र “शैक्षणिक नेतृत्व और शिक्षा में कर्मयोग” विषय पर दोपहर 12 बजे से 1:30 बजे तक होगा। इस सत्र के मुख्य वक्ता मानव संसाधन क्षमता निर्माण आयोग और केन्द्र सरकार के 'मिशन कर्मयोगी' के सदस्य प्रो. बालासुब्रमण्यम, ग्लोबल कन्वर्टर यूनाइटेड कॉन्शसनेस के संयोजक डॉ. विक्रांत सिंह तोमर, आई.आई.टी. कानपुर बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष प्रो. के. राधाकृष्णन और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली की कुलपति प्रो. शांतिधुलीपुडी पंडित होंगे। “एक कर्मयोगी शिक्षाविद्-चुनौतियां और उसके समाधान” विषय पर चर्चा एवं संवाद सत्र का आयोजन दोपहर 2:30 बजे से शाम 4 बजे तक होगा।   recent visitors 53

उत्तर प्रदेश में शराब की दुकानों पर ‘एक के साथ एक फ्री’ ऑफर मामले में आतिशी ने हमला बोलते हुए कई सवाल खड़े किए

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (आप) की वरिष्ठ नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य में शराब की दुकानों पर ‘एक के साथ एक फ्री’ ऑफर दिया जा रहा है, जिससे भारी भीड़ उमड़ रही है और शराब की दुकानों पर मारामारी हो रही है। आतिशी ने भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कई सवाल खड़े किए हैं। आतिशी ने पूछा कि क्या योगी सरकार इस योजना के जरिए उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों के लोगों को शराबी बनाना चाहती है? उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा ‘संस्कारी पार्टी’ होने का दावा करती है, लेकिन अब वह खुद ही शराब को बढ़ावा देने का काम कर रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद लिया है, या फिर इसमें भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की सहमति भी शामिल है? अगर भाजपा इस फैसले से सहमत नहीं है, तो पार्टी के नेता इसके विरोध में कब सड़कों पर उतरेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा जब दिल्ली में शराब नीति को लेकर आम आदमी पार्टी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाती है, तो अब उत्तर प्रदेश में शराब की एक के साथ एक फ्री बोतल देने को क्या कहा जाएगा? अगर भाजपा के अनुसार यह भ्रष्टाचार है, तो फिर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) सीएम ऑफिस पर कब छापा मारेगी? खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश आबकारी विभाग का वित्तीय वर्ष 31 मार्च को समाप्त हो रहा है और इसी के चलते कुछ चुनिंदा शराब की दुकानों पर यह ऑफर दिया गया है। बताया जा रहा है कि यह ऑफर हर दुकान पर उपलब्ध नहीं है, बल्कि कुछ ही ठेकों पर इसे लागू किया गया है। उत्तर प्रदेश आबकारी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह ऑफर केवल कुछ चुनिंदा दुकानों पर ही दिया गया है। यह वार्षिक लाइसेंस अवधि के समाप्त होने से पहले स्टॉक खत्म करने की रणनीति का एक हिस्सा है। एक्साइज डिपार्टमेंट का वार्षिक लाइसेंस 31 मार्च को समाप्त हो जाएगा, जिसके बाद यह ऑफर उपलब्ध नहीं रहेगा। recent visitors 77