मध्यप्रदेश में सड़कों का नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा, बजट में लोक निर्माण कार्य के लिए 2500 करोड़ रुपए का बजट में प्रावधान

भोपाल  मध्यप्रदेश में सड़कों का नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है। बड़े स्तर पर चल रही सड़क परियोजनाओं का उद्देश्य केवल सड़कों और राजमार्गों का निर्माण ही नहीं, बल्कि राज्य के हर नागरिक के जीवन को सरल और समृद्ध बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे है। केन्द्र द्वारा लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं से मध्यप्रदेश में स्थायी आधारभूत संरचना विकसित होगी।  आज मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने अपना दूसरा पूर्ण बजट पेश किया है। विधानसभा में उप मुख्यमंत्री और प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा बजट पेश किया गया। इस बजट में लोक निर्माण कार्य के लिए 2500 करोड़ रुपए का बजट में प्रावधान मिला है। जिसके तहत एमपी के गांव-शहर और तहसीलों में सड़कों का निर्माण किया जाएगा। कितना मिला बजट -ग्रामीण सड़कों एवं अन्य जिला मार्गों का निर्माण/उन्नयन के अंतर्गत 2500 करोड़ रुपए का प्रावधान -म.प्र. सड़क विकास निगम (एन.डी.बी.) के अंतर्गत 1450 करोड़ रुपए का प्रावधान -मध्यप्रदेश सड़क विकास कार्यक्रम (ए.डी.बी.) के अंतर्गत 1315 करोड़ रुपए का प्रावधान -केन्द्रीय सड़क निधि के अंतर्गत 1150 करोड़ रुपए का प्रावधान -वृहद पुलों का निर्माण के अंतर्गत 1000 करोड़ रुपए का प्रावधान -सड़कों का सुदृढ़ीकरण के अंतर्गत 1000 करोड़ रुपए का प्रावधान -अनुरक्षण और मरम्मत – साधारण मरम्मत के अंतर्गत 836 करोड़ रुपए का प्रावधान -एन्यूटी के अंतर्गत 825 करोड़ रुपए का प्रावधान -सड़क एवं सेतु हेतु संधारण कार्य के अंतर्गत 525 करोड़ रुपए का प्रावधान -मुख्य जिला मार्गो तथा अन्य का नवीनीकरण, उन्नतीकरण एवं डामरीकरण के अंतर्गत 500 करोड़ रुपए का प्रावधान संभागीय कार्यालय स्थापना के अंतर्गत 350 करोड़ रुपए का प्रावधान -नवीन ग्रामीण एवं अन्य जिला मार्गों का निर्माण/उन्नयन के अंतर्गत 350 करोड़ रुपए का प्रावधान -म.प्र. सड़क विकास निगम के माध्यम से सड़कों का निर्माण के अंतर्गत 200 करोड़ रुपए का प्रावधान -एफ टाईप एवं उससे नीचे की श्रेणी के शासकीय आवासों का अनुरक्षण के अंतर्गत 200 करोड़ रुपए का प्रावधान -मुख्य जिला मार्गों का निर्माण/उन्नयन के अंतर्गत 200 करोड़ रुपए का प्रावधान -एन.डी.बी. से वित्त पोषण (पुल निर्माण) के अंतर्गत 150 करोड़ का प्रावधान recent visitors 60

आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया कि प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1 लाख 52 हजार रुपये हो गई है जो प्रदेश की विकास को दर्शाती

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने विधानसभा में अगले वित्तीय वर्ष के लिए बजट पेश किया (MP Budget 2025), इससे पहले कल वित्त मंत्री ने मध्य प्रदेश का आर्थिक सवेक्षण प्रस्तुत किया था जिसमें प्रदेश और सरकार की स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया कि प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय अब बढ़कर 1 लाख 52 हजार रुपये हो गई है जो प्रदेश की विकास को दर्शाती है। मध्य प्रदेश सरकार ने आज बजट पेश करने से पूर्व कैबिनेट की बैठक की जिसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि हमारी सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण जारी किया जिसमें प्रति व्यक्ति आय के बारे में जानकारी दी गई। प्रति व्यक्ति आय का बढ़ना अर्थात प्रदेश की विकास की गति का बढ़ना : कैलाश उन्होंने सरकार की नीतियों की तारीफ करते हुए कहा  कि 2003 तक प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय मात्र 20 हजार रुपये थी जो अब बढ़कर 1 लाख 42 हजार रुपये से ज्यादा हो गई है आय में वृद्धि होने प्रदेश के विकास की गति को दर्शाता है और इसी गति से हमारा बजट भी है ये विकास का बजट है इसमें सभी पहलुओं को छुआ है। चंबल के बीहड़ की जमीन का सदुपयोग होगा कैबिनेट के फैसलों की चर्चा करते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि आज कई बिन्दुओं पर चर्चा हुई है इसमें चंबल के बारे में महत्वपूर्व फैसला लिया गया है, उन्होंने कहा पहले चंबल का बीहड़ डकैतों के नाम से विख्यात था लेकिन डाकू खत्म हो चुके हैं,अब उस जमीन का सदुपयोग होगा। चंबल में खुलेगा हॉर्टिकल्चर कॉलेज उन्होंने कहा अब चंबल के बीहड़ क्षेत्र में नदी जोड़ो अभियान के अंतर्गत पानी आने वाला है जिससे सिंचाई होगी इसके साथ ही झांसी यूनिवर्सिटी से सम्बद्धता लेकर सरकार हॉर्टिकल्चर कॉलेज भी खोलने जा रही है।  कैबिनेट मंत्री ने बताया कि इसमें केंद्र सरकार की तरफ से 1000 करोड़ रुपये की राशि दी जाएगी, कॉलेज का लाभ सिर्फ चंबल ही नहीं मध्य प्रदेश को होगा।   recent visitors 45

मध्य प्रदेश में होली, ईद त्योहारों को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने एक बार फिर अभियान शुरू कर दिया

भोपाल  मध्य प्रदेश में होली, ईद सहित अन्य त्योहारों को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) ने एक बार फिर अभियान शुरू कर दिया है. इस अभियान में मिठाई और डेयरी संचालकों पर विशेष नजर रखी जा रही है. राज्य के अलग-अलग शहरों में खाद्य सुरक्षा विभाग ने सैंपल लेकर उन्हें जांच के लिए लैब भेजा है. ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने बताया कि खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है. खाद्य सुरक्षा विभाग को नमूने लेने और जांच के लिए प्रयोगशाला भेजने के निर्देश दिए गए हैं. ग्वालियर के खाद्य सुरक्षा अधिकारी बृजेश शिरोमणि ने बताया कि मोर बाजार में पाठक मावा भंडार, बालाजी डेयरी प्रोडक्ट, पाल मावा भंडार, सदगुरु मावा भंडार का निरीक्षण किया गया और इन फर्मों से मावे के नमूने लिए गए. इसके साथ ही शानौ शौकत शिंदे की छावनी का निरीक्षण कर रसगुल्ले के नमूने भी लिए गए. उज्जैन में भी कड़ी कार्रवाई उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने बताया कि उज्जैन में भी खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लक्ष्मी बेकरी, जैन लस्सी, गोल्डन डेयरी फार्म, लादू रामनिवास मावा भंडार, खंडेलवाल मावा भंडार, आशीष मावा भंडार, न्यू सुंदर डेयरी सहित अन्य प्रतिष्ठानों के दूध से बने उत्पादों के नमूने लिए गए हैं. यह कार्रवाई इसी तरह से आगे भी जारी रहेगी. इसके अलावा, खाद्य सुरक्षा टीम ने होटल और मिठाई की दुकानों का भी निरीक्षण कर रहे हैं ताकि त्योहारी के इस सीजन में मिलावट को रोका जा सके. बालाघाट में भी छापेमारी बालाघाट में खाद्य सुरक्षा अधिकारी योगेश डोंगरे के नेतृत्व में प्रमुख मिठाई दुकानों की जांच की गई और सैंपल लिए गए. योगेश डोंगरे ने बताया कि सरकार के निर्देश पर यह अभियान लगातार जारी रहेगा. प्रशासन का कहना है कि अगर कोई दुकानदार मिलावटी उत्पाद बेचते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. recent visitors 49

राजस्थान की जनता का विश्वास उनकी सरकार पर बना रहेगा और सभी योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा: भजनलाल शर्मा

जयपुर राजस्थान विधानसभा के सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विकास और सुशासन की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने सदन में ग्रीन बजट पेश किए जाने को एक ऐतिहासिक कदम बताया, जो राज्य की सतत विकास यात्रा में मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सिटीजन फर्स्ट' दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए बजट तैयार किया गया है। इसमें गरीब, युवा, अन्नदाता और ज्ञान को केंद्र में रखकर नीतिगत फैसले लिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बजट प्रदेश के कल्याणकारी योजनाओं को मजबूती देने वाला है और समुचित संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा। मुख्यमंत्री ने विपक्ष के रुख पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब वित्त मंत्री ने सरकार का दूसरा बजट प्रस्तुत किया, तब प्रतिपक्ष के चेहरों पर असमंजस और उतार-चढ़ाव स्पष्ट दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष अगर प्रदेश के आमजन की खुशहाली की परवाह करता है, तो उसे बजट का सकारात्मक रूप से स्वागत करना चाहिए था। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राजस्थान की आर्थिक स्थिति लगातार सशक्त हो रही है और वर्ष 2025-26 तक राज्य की जीएसडीपी 19,89,835 करोड़ रुपये (230 बिलियन डॉलर) तक पहुंचने का अनुमान है। इसी प्रकार, 2028-29 तक जीएसडीपी 35,02,629 करोड़ रुपये (350 बिलियन डॉलर) तक पहुंचने की उम्मीद है। प्रदेश के विकास को लेकर किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान की जनता का विश्वास उनकी सरकार पर बना रहेगा और सभी योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। उन्होंने विधानसभा में सभी माननीय सदस्यों को संविधान क्लब के क्रियाशील होने पर शुभकामनाएं भी दीं। हरित विकास की ओर बढ़ता राजस्थान मुख्यमंत्री ने सदन में यह भी कहा कि पहली बार राज्य में ग्रीन बजट प्रस्तुत किया गया है, जो पर्यावरण-संवेदनशील योजनाओं को प्राथमिकता देगा। इससे प्रदेश में हरित ऊर्जा, जल संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा। सरकार के इन सकारात्मक कदमों से स्पष्ट है कि राजस्थान तेजी से आर्थिक और सामाजिक विकास की ओर अग्रसर है और आने वाले वर्षों में देश के अग्रणी राज्यों में शुमार होगा। 2030 तक आर्थिक लक्ष्य प्राप्त करने को प्रतिबद्ध राजस्थान सरकार, निवेश को बढ़ावा देने पर जोर राजस्थान सरकार अपने कुशल वित्तीय प्रबंधन और डबल इंजन की नीति के तहत 2030 तक निर्धारित आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के प्रति पूर्ण रूप से आश्वस्त है। वर्तमान आर्थिक वृद्धि दर के आधार पर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि राज्य तय समय सीमा से पहले ही अपने विकास लक्ष्यों को हासिल कर लेगा। मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि सरकार की नीतियों का उद्देश्य केवल आर्थिक प्रगति ही नहीं, बल्कि हर क्षेत्र में समग्र विकास को सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाया गया है, जिससे उद्योगों को आवश्यक अनुमतियां और सेवाएं सुगमता से प्राप्त हो सकें। निवेश और कंप्यूटर इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा राजस्थान सरकार ने कंप्यूटर इकोसिस्टम और आधुनिक तकनीक में निवेश को लेकर उद्यमियों को आमंत्रित किया है। इस पहल के तहत विभिन्न देशों के उद्योगों के प्रतिनिधियों और देश के अन्य राज्यों के उद्यमियों ने भी भाग लिया। सरकार ने छह महीने का विशेष ‘ग्रोथ एक्सीलेरेशन प्रोग्राम’ चलाया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। सरकार के प्रयासों से विभिन्न क्षेत्रों में 35 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश संभव हो पाया है। इससे प्रदेश में न केवल आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, बल्कि रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सतत विकास के लिए सरकार हर संभव कदम उठा रही है और निवेश को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए नई योजनाएं भी लाई जा रही हैं। इसके साथ ही, प्रशासनिक सुधारों और नई औद्योगिक नीतियों के जरिये राजस्थान को एक मजबूत औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। नवाचार और आर्थिक समृद्धि की ओर बढ़ता राजस्थान राज्य सरकार का ध्यान केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह नवाचार, टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप्स को भी बढ़ावा दे रही है। सरकार की डिजिटल और टेक्नोलॉजी ड्रिवन नीतियां राजस्थान को देश के अग्रणी औद्योगिक हब के रूप में स्थापित करने में सहायक होंगी। प्रदेश की विकास यात्रा को देखते हुए यह स्पष्ट है कि राजस्थान सरकार अपनी योजनाओं को समय से पहले पूरा करने में सफल होगी और 2030 तक राज्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। recent visitors 71

भारत की खुदरा महंगाई फरवरी 2025 में घटकर 3.61 प्रतिशत हो गई, जो जनवरी में 4.31 प्रतिशत थी, आम जनता को बड़ी राहत

नई दिल्ली होली से पहले महंगाई के मोर्चे पर आम जनता को बड़ी राहत मिली है. बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) पर आधारित भारत की खुदरा महंगाई फरवरी 2025 में घटकर 3.61 प्रतिशत हो गई, जो जनवरी में 4.31 प्रतिशत थी. ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी धीमी हो गई थी. इसी के साथ खुदरा महंगाई फरवरी में घटकर 7 महीने के निचले स्तर पर आ गई जो रिजर्व बैंक के लक्ष्य 4 फीसदी से भी कम है. आरबीआई 2-6 फीसदी का टॉलरेंस बैंड बनाए रखता है. इसी पहले 45 अर्थशास्त्रियों के रॉयटर्स पोल ने पहले फरवरी में मुद्रास्फीति 3.98 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था. इस बीच, भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि जनवरी 2025 में साल-दर-साल 5 प्रतिशत हो गई, जबकि दिसंबर 2024 में यह 3.2 प्रतिशत थी. अपनी सबसे हालिया मौद्रिक नीति बैठक में, रिज़र्व बैंक ने वित्तीय वर्ष 2024-25 (FY25) के लिए अपने सीपीआई मुद्रास्फीति पूर्वानुमान को 4.8 प्रतिशत पर बनाए रखा, अंतिम तिमाही (Q4FY25) में 4.4 प्रतिशत की मामूली गिरावट की आशंका जताई. FY26 के लिए, मुद्रास्फीति तिमाही अनुमान के साथ 4.2 प्रतिशत होने का अनुमान है. recent visitors 69

ई-पैक्स प्रशिक्षण सह संवेदीकरण कार्यक्रम पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला

भोपाल सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा है कि सहकारिता का संकल्प नए आयाम स्थापित करेगा। सहकारिता के माध्यम से ही समृद्धि स्थापित होगी। जरूरत है मेहनत, लगन और पारदर्शिता की। मंत्री सारंग ने कहा कि नवाचार से किये गये कार्य के जरिये व्यक्ति नई ऊंचाईयों को पा सकता है। मंत्री सारंग बुधवार को अपेक्स बैंक परिसर स्थित समन्वय भवन में पैक्स कम्प्यूटराईजेशन योजनांतर्गत ई-पैक्स प्रशिक्षण सह संवेदीकरण कार्यक्रम पर राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने सहकारिता विभाग में 25 अनुकम्पा नियुक्ति पाने वालों को नियुक्ति आदेश भी प्रदान किये। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णबाल भी उपस्थित थे। ब्रांडिंग और दृढ़ता के साथ काम करने की भावना स्थापित करें मंत्री सारंग ने कहा कि सहकारिता में ब्रांडिंग और दृढ़ता के साथ काम करने की भावना स्थापित हो। नित नये नवाचार के जरिये अपनी पहचान बनाएं। उन्होंने कहा पूरी दुनिया में उदाहरण है जिन्होंने काम किया लोग उन्हें ही याद रखते है। इसलिये स्वयं अपने व्यक्तित्व निर्माण के साथ उत्कृष्ट कार्य करें, जिससे उन्हें आगे बढ़ने के अवसर मिले और लोग उन्हें याद रखे। पैक्स कम्प्यूटराइजेशन में मध्यप्रदेश प्रथम मंत्री सारंग ने कहा की सीखने की कोई उम्र नहीं होती। सीखने की चाहत सफल बनाती है। सहकारिता के माध्यम से ही अर्थ-व्यवस्था का उन्नयन किया जा सकता है। उन्होंने खुशी जाहिर की कि पैक्स कम्प्यूटराइजेशन में मध्यप्रदेश प्रथम स्थान पर रहा है। कम्प्यूटराइजेशन की इस बड़ी मुहिम में पारदर्शिता के साथ हमारा प्रयास सफल रहा। सीपीपीपी मॉडल की सराहना मंत्री सारंग ने बताया कि मध्यप्रदेश का नया सीपीपीपी (को-ऑपरेटिव पब्लिक पा्रयवेट पारटरशिप) मॉडल की ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में सराहना हुई। यही नहीं राज्य सरकार ने सहकारिता के क्षेत्र में 2500 करोड़ के एम.ओ.यू. भी किये। मंत्री सारंग ने सहकारिता विभाग में अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त करने वालों को भी जिम्मेदारी के साथ दिये गये काम को सम्पादित करने को कहा। उन्होंने युवाओं से आहवान किया कि पारदर्शिता, निपुणता और व्यावसायिकता के साथ काम करें। इस मौके पर उन्होंने एक मार्गदर्शिका का विमोचन भी किया। अपेक्स बैंक प्रबंध संचालक मनोज गुप्ता ने स्वागत भाषण दिया। आयुक्त सह पंजीयक मनोज पुष्प, पी.एस. तिवारी और बी.एस. शुक्ला उपस्थित रहे। अनुकंपा नियुक्ति पाने वालों को नियुक्ति पत्र मंत्री सारंग ने इंदौर की कु. प्रेरणा सोनी, टीकमगढ़ की श्रीमती तरूणा झाम और श्रीमती ऊषा सेन, नरसिंहपुर की कु. पूर्णिमा गहलोद, शाजापुर की कुमारी सौम्या मालवीय, महाराष्ट्र वर्धा की कु. योगिता सतपाल, सतना की श्रीमती शुभांगी श्रीवास्तव और श्रीमती सुभद्रा सिंह, जबलपुर की कु. कंचन दाहिया और श्रीमती भावना तिवारी, रतलाम की सुनेहा सोलंकी, सागर के ओजस्वा यादव और अमित जाटव, बालाघाट के विजय राज सोनवे, रीवा के संजय रत्नाकर, सीहोर मुकेश कुमार और दीपेश सिसोदिया, विदिशा के विनोद रायकवार, बैतूल के हेमंत प्रधान, मुरैना के अक्षय चौहान, रीवा के देशराज वर्मा, भोपाल के शुभम पांचाल, श्योपुर के जयकुमार रेगर, सिवनी के आशीष कोरी और सीधी के राजेश कुमार पटले को नियुक्ति पत्र प्रदान किये।   recent visitors 61

विज्ञापनों पर असम सरकार ने खर्च किए 370 करोड़ रुपए , मंत्री ने विधानसभा में दी जानकारी

असम असम में भाजपा की सरकार ने पिछले 4 सालों में विज्ञापनों पर भारी खर्च किया है। राज्य के सूचना और जनसंपर्क मंत्री, पीयूष हजारिका ने बुधवार को विधानसभा में जानकारी दी कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार ने पिछले 4 वित्तीय वर्षों में विज्ञापनों पर 370 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए हैं। हजारिका ने बताया कि 2016 से 2021 तक असम के मुख्यमंत्री रहे सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 2016-17 से लेकर पांच वित्तीय वर्षों में विज्ञापनों पर कुल 125.6 करोड़ रुपए खर्च किए थे। सरकार के कार्यकाल के दौरान, विज्ञापनों पर खर्च में लगातार वृद्धि हुई है। 2020-21 में सोनोवाल सरकार ने विज्ञापनों पर 30.24 करोड़ रुपए खर्च किए थे, जबकि 2021-22 में जब हिमंत बिस्वा सरमा ने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली, तो यह खर्च बढ़कर 72.83 करोड़ रुपए हो गया। इसके बाद, सरमा सरकार के तहत हर साल विज्ञापनों पर खर्च बढ़ता ही गया। 2022-23 में यह खर्च 78.85 करोड़ रुपए तक पहुंच गया और 2023-24 में यह बढ़कर 160.92 करोड़ रुपए हो गया। इसी तरह, वित्त वर्ष 2024-25 में अब तक विज्ञापनों के लिए 59.72 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इसके अलावा, मंत्री हजारिका ने यह भी बताया कि 2015-16 में, जब असम में तरुण गोगोई की सरकार थी, तो विज्ञापनों पर 18.58 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। इसके बाद जब बीजेपी की सरकार आई और सर्बानंद सोनोवाल ने मुख्यमंत्री का पद संभाला, तो अगले साल ही विज्ञापनों पर खर्च बढ़कर 26.88 करोड़ रुपए हो गया।   recent visitors 50