एनआईए ने अदालत में अर्जी दाखिल कर तलब की फाइल्स, अब दिल्ली में चलेगा तहव्वुर राणा पर केस

नई दिल्ली 2008 में हुए मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा पर दिल्ली में केस चलाया जा सकता है। इस संभावना को बल इस वजह से मिल रहा है, क्योंकि दिल्ली की पटिलाया हाउस कोर्ट में मौजूद एनआईए अदालत ने मुंबई के ट्रायल कोर्ट से केस रिकॉर्ड तलब किया है। 26/11 हमले को लेकर दिल्ली और मुंबई में केस के रिकॉर्ड मौजूद थे, जिन्हें पहले मुंबई भेजा गया था। क्योंकि दोनों शहरों में इस पर सुनवाई हो रही थी। लेकिन हाल ही में एनआईए ने अदालत में अर्जी दाखिल कर मुंबई की निचली अदालत से केस रिकॉर्ड यहां तलब करने की अपील की थी। ट्रंप ने किया था प्रत्यर्पण का एलान डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका के राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालने के बाद पीएम मोदी दो दिवसीय अमेरिका दौरे पर गए थे। इस दौरान दोनों की मुलाकात के बीच तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण पर चर्चा हुई थी और तब ट्रंप ने एलान किया था कि प्रशासन ने तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है। तहव्वुर राणा पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक है, जिसे 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले का मास्टरमाइंड माना जाता है। वह पाकिस्तानी सेना में बतौर डॉक्टर काम कर चुका है। 2009 में एफबीआई ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। जनवरी 2025 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उसके प्रत्यर्पण की इजाजत दे दी थी। हेडली ने किया था खुलासा 26/11 हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक पाकिस्तानी-अमेरिकी डेविड कोलमैन हेडली ने खुलासा किया था कि उसने 2007 और 2008 के बीच पांच बार भारत की यात्रा की थी और हमलों के लिए मुंबई में संभावित लक्ष्यों की रेकी की थी।     राणा के खिलाफ गवाही देते हुए, हेडली ने कहा था कि उसने पांच साल के वीजा का उपयोग करके भारत का दौरा किया था, जिसे प्राप्त करने में उसके सह-साजिशकर्ता ने उसकी मदद की थी। हेडली ने यह भी खुलासा किया था कि राणा ने पहचान छिपाने के लिए एक इमीग्रेशन कंपनी स्थापित करने में उसकी सहायता की थी।     डोनाल्ड ट्रंप के एलान के बाद राणा ने अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पेटीशन फाइल की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। बताया जा रहा है कि उसने मानवीय आधार पर अंतिम अपील दायर की है, जिससे उसके प्रत्यर्पण में कुछ सप्ताह की देरी हो सकती है।   recent visitors 65

योगी आदित्यनाथ ने कहा- महाकुंभ को बदनाम करने के लिए विरोधियों ने दुष्प्रचार का कोई मौका नहीं छोड़ा, विपक्ष पर बरसे

महाकुंभ नगर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज महाकुंभ-2025 के समापन के बाद विपक्ष पर जमकर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि महाकुंभ को बदनाम करने के लिए विरोधियों ने दुष्प्रचार का कोई मौका नहीं छोड़ा। कोई काहिरा की तो कोई काठमांडू की घटना का वीडियो दिखाकर प्रयागराज को बदनाम करता रहा। सीएम योगी ने कहा कि आस्था का इतना विशाल समागम दुनिया के अंदर कभी नहीं हुआ। 66 करोड़ 30 लाख श्रद्धालु किसी आयोजन का हिस्सा बने और कोई अपहरण की घटना नहीं, कोई लूट की घटना नहीं, कोई छेड़छाड़, कोई दुष्कर्म की घटना नहीं, कोई भी ऐसी घटना नहीं, जिसके बारे में कोई सवाल उठा सके। दूरबीन लगाकर, माइक्रोस्कोप लगाकर भी ऐसी घटना को ढूंढा नहीं जा सकता। हालांकि, फिर भी विरोधियों ने दुष्प्रचार का कोई मौका नहीं छोड़ा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिनको आस्था का यह समागम अच्छा नहीं लगा, उन्होंने कोई मौका नहीं छोड़ा। मौनी अमावस्या के दिन 8 करोड़ श्रद्धालु यहां पर थे, हमारी प्राथमिकता थी कि इन श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्नान कर उनके गंतव्य की ओर प्रस्थान कराया जाए। लेकिन, विरोधी लगातार दुष्प्रचार कर रहे थे, बदनाम कर रहे थे। उनकी भाषा अपमानित करने वाली थी। कोई काहिरा की तो कोई काठमांडू की घटना का दृश्य दिखाकर प्रयागराज को बदनाम कर रहा था। पहले की सरकारों ने भारत की आस्था का सम्मान नहीं किया। उन्होंने महाकुंभ के माध्यम से अर्थव्यवस्था में आई मजबूती का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ ने आस्था और आर्थिकी का एक नया संदेश दिया। भगवान वेद व्यास ने 5,000 साल पहले ही कहा था कि मैं बाहें उठा करके चिल्ला-चिल्लाकर कह रहा हूं कि धर्म के मार्ग पर चलो, धर्म से ही अर्थ और कामनाओं की पूर्ति हो सकती है। प्रयागराजवासियों ने भगवान वेदव्यास की इस वाणी को सत्य साबित कर दिया। लाखों रोजगार मिले, उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था एक नया आयाम छूने के लिए उतावली दिखाई दे रही है। सीएम योगी ने कहा कि आज आस्था के साथ नई अर्थव्यवस्था का जो आधार बना है, वह अद्भुत है। यहां आने के लिए दुनिया चकित और लालायित है। केवल भारत ही नहीं, दुनिया के अंदर एक दर्जन देशों के मंत्री या राष्ट्राध्यक्ष भी इस आयोजन का हिस्सा बने और 74 देशों के एंबेसडर और हाई कमिश्नर भी यहां आए। पहली बार 80 से अधिक देशों के लोग इस आयोजन में भागीदार बने। जो आया, वह अभिभूत होकर गया। recent visitors 77

मोहन सिंह बिष्ट बने दिल्ली विधानसभा के डिप्टी स्पीकर, आतिशी को मिली नेता प्रतिपक्ष की मान्यता

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आतिशी को विपक्षी दल के नेता के रूप में मान्यता प्रदान की है। यह निर्णय विधानसभा सदस्य आतिशी, जो सदन में सरकार के विपक्ष में सर्वाधिक सदस्यों वाले दल की नेता हैं, को दिल्ली विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता देने के लिए लिया गया। इस संदर्भ में विधानसभा अध्यक्ष ने 2001 के 'विधानसभा नेता प्रतिपक्ष (वेतन एवं भत्ते) अधिनियम, 2001' की धारा-2 के तहत आतिशी को तत्काल प्रभाव से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दी। दिल्ली विधानसभा चुनाव-2025 में आम आदमी पार्टी (आप) को भारतीय जनता पार्टी से कड़ी शिकस्त मिली। इस हार के बाद आतिशी मुख्यमंत्री पद से हट गईं, लेकिन उनकी सैलरी और भत्तों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दिल्ली में मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष को समान वेतन और सुविधाएं मिलती हैं। इसका मतलब यह है कि भले ही अब आतिशी मार्लेना की मुख्यमंत्री की कुर्सी छिन गई हो, उनकी सैलरी, भत्तों और सुविधाओं में किसी तरह की कोई कटौती नहीं होगी। अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के बाद आतिशी को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया गया था। हालांकि, यह पहले से ही तय था कि विधानसभा चुनाव के बाद उन्हें यह कुर्सी छोड़नी होगी। चुनाव हारने के बाद आम आदमी पार्टी को विपक्ष में बैठना पड़ा और पार्टी ने आतिशी को नेता प्रतिपक्ष बना दिया। इसी वजह से उन्हें मुख्यमंत्री के समान वेतन और अन्य भत्ते मिलते रहेंगे। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया समेत तमाम दिग्गज नेताओं के हारने के बाद विधानसभा पहुंची आतिशी ही वह नेता थीं, जिसे आम आदमी पार्टी ने सर्वसम्मति से अपने दल का नेता चुना था।  दिल्ली की मुस्तफाबाद विधानसभा सीट से विधायक मोहन सिंह बिष्ट को डिप्टी स्पीकर चुना गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मोहन सिंह बिष्ट को डिप्टी स्पीकर बनाने का प्रस्ताव रखा था। मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने प्रस्ताव को समर्थन दिया था। वहीं, दिल्ली विधानसभा में वरिष्ठ नेता विजेंद्र गुप्ता स्पीकर हैं। करावल नगर से कई बार विधायक रह चुके हैं मोहन सिंह बिष्ट दिल्ली की सियासत में अनुभवी नेता माने जाते हैं। वह करावल नगर विधानसभा सीट से कई बार विधायक रह चुके हैं। हालांकि, इस बार वो मुस्तफाबाद सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) के आदिल अहमद खान को 17 हजार से अधिक वोट से शिकस्त दी थी। करावल नगर से कपिल मिश्रा को टिकट मिला करावल नगर सीट से मोहन सिंह बिष्ट ने पहली बार 1998 में चुनाव जीता था और 2015 तक इस सीट से विधायक रहे। 2015 के चुनाव में उन्हें कपिल मिश्रा के हाथों शिकस्त मिली थी। तब कपिल मिश्रा 'आप' के टिकट पर चुनाव लड़े थे। बाद में वो बीजेपी में शामिल हो गए। इसके बाद मोहन बिष्ट ने एक बार फिर 2020 में करावल नगर सीट से जीत दर्ज की, जबकि 2025 के चुनाव में उन्हें मुस्तफाबाद से टिकट मिला और यहां से चुनाव जीते। बीजेपी ने इस बार कपिल मिश्रा को करावल नगर से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने यहां बड़े अंतर से जीत दर्ज की और रेखा गुप्ता की सरकार में मंत्री बने। दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत बता दें कि 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 70 में से 48 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि आम आदमी पार्टी (आप) को 22 सीटें मिलीं। राष्ट्रीय राजधानी की सत्ता में बीजेपी 27 सालों के बाद वापसी की है। recent visitors 74

अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई है, तब भी वह अग्रिम जमानत के लिए अदालत जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि अग्रिम जमानत का प्रावधान जीएसटी और कस्टम कानूनों पर भी लागू होता है। यानी, अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई है, तब भी वह अग्रिम जमानत के लिए अदालत जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति एमएम सुंदरश और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने पिछले साल 16 मई को इस मामले में अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। फैसला सुनाते हुए, सीजेआई संजीव खन्ना ने कहा कि अग्रिम जमानत से जुड़े दंड प्रक्रिया संहिता और नए कानून 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' के प्रावधान, जीएसटी और कस्टम कानूनों पर भी लागू होंगे। इस फैसले के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति को जीएसटी या कस्टम कानून के तहत गिरफ्तारी का डर है, तो वह अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकता है, भले ही एफआईआर दर्ज न हुई हो।  इस मामले में विस्तृत फैसला आना अभी बाकी है। यह याचिका 2018 में राधिका अग्रवाल नाम की महिला तरफ से दायर की गई थी। recent visitors 65

श्रद्धलुओं ने बदली रामलला की दिनचर्या, 19 घंटे तक दे रहे हैं दर्शन; भोग और आरती का समय भी घटा

अयोध्या महाकुंभ शुरू होने के बाद अयोध्या में आ रही अप्रत्याशित भीड़ ने बालक राम की दिनचर्या बदल दी। मकर संक्राति से महाशिवरात्रि तक सवा करोड़ लोगों ने दर्शन किए।  महाकुंभ शुरू होने के बाद रिकॉर्ड संख्या में लोग अयोध्या पहुंच रहे हैं। इस बीच इतनी भीड़ आ जाएगी इसकी कल्पना मंदिर ट्रस्ट ने भी नहीं की थी।  पिछले एक माह से आ रही अप्रत्याशित भीड़ ने रामलला की दिनचर्या बदल दी है। मकर संक्रांति से महाशिवरात्रि तक रामलला के दरबार में सवा करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने हाजिरी लगाई है। अधिक से अधिक श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर सकें इसलिए मंदिर सुबह पांच बजे से रात 12 बजे तक खोला जा रहा है। रामलला प्रतिदिन 19 घंटे भक्तों को दर्शन दे रहे हैं। रामलला के दरबार में रोजाना साढ़े तीन से चार लाख श्रद्धालु हाजिरी लगा रहे हैं। ट्रस्ट की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार मकर संक्रांति 14 जनवरी से 26 फरवरी महाशिवरात्रि तक रामलला के दरबार में 1.26 करोड़ श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन किया है। राम मंदिर में निरंतर उमड़ रही भीड़ ने रामलला की पूरी दिनचर्या को प्रभावित कर रखा है। पुजारियों का कहना है कि रामलला की आरती, राग-भोग के दौरान भी मंदिर बंद नहीं हो पा रहा है। बताया गया कि इस समय रामलला को सुबह चार बजे ही जगाया जाता है। इसके बाद उनकी मंगला व श्रृंगार आरती होती है। सुबह पांच बजे से मंदिर दर्शन के लिए खोल दिया जाता है। श्रद्धालुओं में दर्शन की ललक इस कदर है कि रात दो बजे से दर्शनपथ पर श्रद्धालु जुटने लगते हैं। दोपहर की आरती के दौरान भी दर्शन चलता रहता है। केवल पांच से 10 मिनट के पर्दा लगाकर रामलला को भोग अर्पित किया जाता है। इस दौरान श्रद्धालु मंदिर में कतारबद्ध रहते हैं।   18 से 19 घंटे खुल रहा है मंदिर  पहले दोपहर भोग आरती के लिए मंदिर एक घंटे के लिए बंद किया जाता था। यही स्थिति संध्या आरती के दौरान भी रहती है। राममंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय भी श्रद्धालुओं की भीड़ को अप्रत्याशित बताते हैं। उनका कहना है कि रामलला को ठीक से विश्राम नहीं मिल पा रहा है, मंदिर 18 से 19 घंटे खोलना पड़ रहा है, यह स्थिति व्यवहारिक नहीं है। महाशिवरात्रि पर शिवमय हुई राम की नगरी सर्वार्थ सिद्धि व त्रिग्रही योग के दुर्लभ संयोग में महाशिवरात्रि पर रामनगरी ब्रह्ममुहूर्त से ही बमबम करने लगी। घाट से लेकर मठ-मंदिरों तक हर-हर महादेव की गूंज… शिवालयों में पूजन सामग्री से सजी थाली लेकर कतारबद्ध भक्त और श्रद्धालुओं से पटी अयोध्या। बुधवार को रामनगरी में यह दृश्य आस्था का चरम प्रदर्शित कर रहा था। रामधुन में लीन रहने वाली अयोध्या पूरी तरह से शिवमय नजर आई। प्रशासन के मुताबिक करीब पांच लाख भक्तों ने जलाभिषेक, पूजन किया। महाशिवरात्रि पर ब्रह्म मुहूर्त से शुरू हुई शिवालयों सहित अन्य मंदिरों में दर्शन-पूजन का सिलसिला दिन भर चलता रहा।  अधिकतर ने भोले के मंदिर पर दस्तक देने से पूर्व सरयू में स्नान किया। इसी के साथ ही आस्था का प्रवाह शिव मंदिरों की ओर निकल पड़ा। हालांकि रामपथ पर बैरिकेडिंग के चलते श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। नागेश्वरनाथ तक जाने के लिए श्रद्धालुओं को टेढ़ी बाजार के पीछे से होते हुए करीब चार किलोमीटर तक चलना पड़ा। क्षीरेश्वरनाथ पहुंचने के लिए यह दूरी बढ़कर पांच किलोमीटर हो गई। जैसे ही श्रद्धालु भोलेबाबा की चौखट पर पहुंचे और उनके कानों में हर-हर महादेव की गूंज पहुंची तो उनकी सारी थकान दूर होती नजर आई। क्षीरेश्वरनाथ मंदिर में राम मंदिर के दर्शनार्थी भी खूब उमड़े। दर्शनार्थियों ने रामलला के साथ भोलेबाबा की भी पूजा-अर्चना की। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे। सीसीटीवी से मेला क्षेत्र की निगरानी होती रही। मंडलायुक्त गौरव दयाल, आईजी प्रवीण कुमार, एसएसपी राजकरण नय्यर ने मेला क्षेत्र का भ्रमण कर व्यवस्थाओं को परखा। recent visitors 55

17 वर्षीय युवक चार पैरों के साथ जी रहा था, दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने सर्जरी कर दिया नया जीवन

नई दिल्ली अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के सर्जन एक अभूतपूर्व सर्जिकल केस में सफल रहे हैं। उन्होंने उन्नाव (उत्तर प्रदेश) के 17 वर्षीय युवक से उसके परजीवी जुड़वां भाई के अवशेषों को निकालने में सफलता हासिल की। इस युवक के शरीर में एक अविकसित जुड़वां भाई था, जिसकी एक जोड़ी पैर और अविकसित पुरुष जननांग युवक के धड़ से बाहर निकले हुए थे। यह जन्मजात समस्या थी, जिससे युवक को 17 वर्षों तक परेशानियों का सामना करना पड़ा था। जटिल सर्जरी युवक के शरीर में जुड़वां भाई के अविकसित अवशेष होने के कारण उसकी जीवनशैली में कई कठिनाइयां थीं। इसके कारण युवक को शारीरिक और मानसिक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता था और उसकी पढ़ाई भी आठवीं कक्षा में ही छूट गई थी। ऐसे मामलों में सर्जरी एक कठिन चुनौती होती है, क्योंकि इसमें नसों का जाल और अंगों को अलग करने की प्रक्रिया बहुत जटिल होती है। इस मामले में, एम्स के सर्जनों को छाती की दीवार, आंतों और किडनी के पास के टिशूज को अलग करना था। इस विशेष सर्जरी में युवक के अविकसित अंग न केवल बाहर निकले थे, बल्कि उनमें स्पर्श और दर्द का अहसास भी होता थाऔर समय के साथ यह अंग बढ़ते जा रहे थे। इनमें अविकसित पुरुष जननांग भी शामिल थे, जो युवक के लिए एक मानसिक चुनौती बन गए थे। सफल ऑपरेशन एम्स के डॉक्टरों की एक टीम ने इस जटिल ऑपरेशन को आठ फरवरी 2024 को सफलतापूर्वक पूरा किया। यह सर्जरी विशेष रूप से महत्वपूर्ण और दुर्लभ मानी जा रही है, क्योंकि दुनिया में इस तरह के केवल 40 मामले ही सामने आए हैं। इस प्रकार के ऑपरेशन में एक जुड़वां भाई विकसित हो जाता है, जबकि दूसरा अविकसित रहता है और शरीर में अलग तरह की जटिलताएं पैदा करता है। अब, युवक को एक नया जीवन मिला है और वह शारीरिक और मानसिक रूप से पहले से अधिक स्वतंत्र महसूस कर रहा है। उसे अब न केवल अपनी जिंदगी में एक नया मौका मिला है, बल्कि उसकी आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी हुई है।   recent visitors 69

अमेरिकी संघीय अदालत में दायर दस्तावेजों के अनुसार पन्नू ने याचिका की प्रति अजीत डोभाल को सौंपी

अमेरिका सिख कार्यकर्ता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की कथित साजिश से जुड़े मामले में एक नया खुलासा हुआ है। अमेरिकी संघीय अदालत में दायर दस्तावेजों के अनुसार, पन्नू ने अपनी याचिका की प्रति भारत के शीर्ष खुफिया अधिकारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को सौंप दी है। पन्नू की याचिका में आरोप लगाया गया है कि भारत सरकार, अजीत डोभाल और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने निखिल गुप्ता को पन्नू की हत्या के लिए हायर किया था। यह साजिश उस वक्त विफल हो गई जब गुप्ता द्वारा हायर किया गया शूटर असल में एक अंडरकवर अमेरिकी एजेंट निकला। याचिका में यह भी कहा गया कि यह "मर्डर फॉर हायर" साजिश भारत सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा थी, जिसमें सिख कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया। इनमें वे लोग शामिल हैं जो पंजाब में सिखों के आत्मनिर्णय के अधिकार की मांग कर रहे हैं, धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित उत्पीड़न की आलोचना कर रहे हैं और भारत में मानवाधिकार हनन के मामलों को उजागर कर रहे हैं। डोभाल को समन देने के लिए निजी जांचकर्ताओं की मदद अदालत में पेश किए गए नए दस्तावेजों के मुताबिक, पन्नू ने दो कानूनी एजेंसियों और एक निजी जांचकर्ता की मदद से अमेरिका में डोभाल के दौरे के दौरान उन्हें समन सौंपने की व्यवस्था की। अमेरिकी अदालत में दायर घोषणाओं के अनुसार, अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के अधिकारियों ने समन स्वीकार करने से इनकार कर दिया था, हालांकि इसे उस स्थान पर भी भिजवाया गया जहां डोभाल ठहरे हुए थे। इसके बावजूद, अमेरिकी अदालत के 12 फरवरी 2025 के आदेश के तहत, डोभाल को वैकल्पिक माध्यमों से समन जारी किया गया। दस्तावेजों में कहा गया है, "पन्नू सम्मानपूर्वक अदालत को सूचित करते हैं कि प्रतिवादी (डोभाल) को समन देने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।"   डोभाल को 21 दिनों के भीतर देना होगा जवाब अगर समन देने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तो अजीत डोभाल को 21 दिनों के भीतर अमेरिकी अदालत में पन्नू के मुकदमे का जवाब देना होगा। पन्नू ने आरोप लगाया, "प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर, डोभाल और उनके सहयोगियों ने अमेरिकी संप्रभुता का उल्लंघन करते हुए एक अमेरिकी नागरिक की हत्या की साजिश रची, सिर्फ इसलिए कि उसने अपने राजनीतिक विचार व्यक्त किए।" उन्होंने आगे कहा, "मुझे अमेरिकी न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा है और मुझे यकीन है कि सीमा-पार दमन (ट्रांसनेशनल रेप्रेशन) में शामिल अपराधियों को आपराधिक और दीवानी अदालत में न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।" पन्नू के वकील का बयान पन्नू के वकील मैथ्यू बोर्डन (BraunHagey & Borden, LLP) ने कहा, "हमने अजीत डोभाल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वह इस मामले में एक प्रमुख प्रतिवादी हैं और अब अपनी संलिप्तता को छिपा नहीं सकते। हम उनसे सबूत जुटाने और अपने मुवक्किल के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए तत्पर हैं।"   recent visitors 53