आवास को लेकर 15 मार्च से शुरू होगा सर्वे, जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाएगी आपका घर

जम्मू शहर में रहने वाले गरीब लोगों का घर बनाने का सपना साकार होने जा रहा है। सरकार ऐसे लोगों की सूची तैयार करने जा रही है जिनके पास जमीन तो है लेकिन गरीबी के कारण घर नहीं बना पा रहे। आवास एवं शहरी विकास विभाग 15 मार्च से इसके लिए सर्वे शुरू करने जा रहा है। 3 से 9 लाख रुपये वार्षिक आमदनी वाले ऐसे परिवारों को सूचीबद्ध कर प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी)- 2.0 के तहत घर बनाने का मौका दिया जाएगा। विभाग मार्च महीने में इस सर्वे को पूरा करेगा जिसमें विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की तैनाती रहेगी। इतना ही नहीं लोग ऑनलाइन भी आवेदन कर सकेंगे। जांच-पड़ताल के बाद योग्य आवेदक को योजना का लाभ मिल पाएगा। पीएम योजना के तहत मिलेगा पक्का मकान प्रधानमंत्री आवास योजना- शहरी 2.0 योजना का उद्देश्य सभी के लिए आवास के दृष्टिकोण के साथ देश भर के सभी पात्र शहरी परिवारों को हर मौसम के अनुकूल पक्के घर उपलब्ध कराना है। आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय शहरी क्षेत्रों में पात्र परिवारों को बीएलसी, एएचपी,आईएसएस कार्यक्रम के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए योजना को लागू करता है। पिछले वर्ष करीब 350 लाख रुपये की राशि जारी की गई थी। सरकार ने जम्मू शहर के सुंजवां क्षेत्र में इस योजना के तहत 336 फ्लैट्स भी बनाए थे जिन्हें पिछले वर्ष आवंटित किया गया। यह है कार्यक्रम 1. लाभार्थी के नेतृत्व में निर्माण (बीएलसी): योजना का बीएलसी कार्यक्षेत्र 3 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले ईडब्ल्यूएस श्रेणियों से संबंधित व्यक्तिगत पात्र परिवारों को 2.5 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान करेगा, ताकि वे अपनी उपलब्ध भूमि पर 45 वर्गमीटर तक के नए पक्के घर (एक हर मौसम के अनुकूल आवास इकाई) का निर्माण कर सकें। 2. भागीदारी में किफायती आवास (एएचपी): भागीदारी में किफायती आवास (एएचपी) कार्यक्षेत्र ईडब्ल्यूएस लाभार्थियों को पक्का घर खरीदने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। इस वर्टिकल के अंतर्गत 30-45 वर्गमीटर कार्पेट एरिया वाले किफायती मकानों का निर्माण सार्वजनिक/निजी एजेंसियों द्वारा किया जाएगा तथा उन्हें ईडब्ल्यूएस श्रेणी के पात्र लाभार्थियों को आवंटन के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। एएचपी परियोजनाओं में ईडब्ल्यूएस लाभार्थी को संपत्ति के खरीद मूल्य पर केंद्रीय और राज्य एजेंसियों द्वारा ईडब्ल्यूएस (वार्षिक आय 3 लाख रुपये तक) फ्लैट के लिए 2.5 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। 3. ब्याज सब्सिडी योजना (आईएसएस): पीएमएवाई-यू 2.0 की ब्याज सब्सिडी योजना (आईएसएस) के तहत, ईडब्ल्यूएस/एलआईजी और एमआईजी के पात्र लाभार्थियों को घरों की खरीद/पुनर्खरीद/निर्माण के लिए 01.09.2024 या उसके बाद स्वीकृत और वितरित किए गए गृह ऋण पर सब्सिडी प्रदान की जाएगी। योजना के अंतर्गत ईडब्ल्यूएस/एलआईजी/एमआईजी लाभार्थी के रूप में पहचान के लिए व्यक्तिगत ऋण आवेदक को आय का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। क्या है पीएमएवाई-यू 2.0 प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 (पीएमएवाई-यू 2.0) का उद्देश्य पात्र परिवारों, लाभार्थियों को शहरी क्षेत्रों में किफायती मकानों के निर्माण, खरीद या किराये पर लेने के लिए केंद्रीय सहायता प्रदान करना है। लाभ प्राप्त करने के लिए पात्रता मानदंड शहरी क्षेत्रों में रहने वाले ईडब्ल्यूएस/एलआईजी/एमआईजी वर्ग के परिवार, जिनके पास अपने या अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम पर कोई पक्का मकान नहीं है, वे पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत मकान खरीदने/निर्माण करने या किराये पर लेने के लिए पात्र हैं। यह रहेगी व्यवस्था ईडब्ल्यूएस परिवारों को 3 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवारों के रूप में परिभाषित किया गया है। एलआईजी परिवारों को 3 लाख रुपये से 6 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवारों के रूप में परिभाषित किया गया है। एमआईजी परिवारों को 6 लाख रुपये से 9 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवारों के रूप में परिभाषित किया गया है। कैसे कर सकते हैं आवेदन -योजना के तहत निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले लाभार्थी पीएमएवाई-यू 2.0 के एकीकृत वेब पोर्टल, सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) के माध्यम से या वे जिस संबंधित शहरी स्थानीय निकाय/नगर पालिका में रह रहे हैं, वहां जाकर निर्धारित प्रारूप में आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। दस्तावेज चाहिए लाभार्थी को अपने आधार कार्ड की प्रति, बैंक खाते का विवरण, निर्धारित प्रारूप के अनुसार पात्रता मानदंड को पूरा करने का वचन, बीएलसी के मामले में भूमि स्वामित्व दस्तावेज। recent visitors 76

अगले दो से तीन दिनों में मौसम फिर से करवट ले सकता है, इन तीन राज्‍यों में भारी बारिश की संभावना

नई दिल्ली देश के कुछ राज्‍यों में अब गर्मी का असर शुरू हो गया है। हालांकि अभी भी मध्‍य और उत्‍तर भारत में रात के समय ठंड का अहसास कायम है। इधर, मौसम के जानकारों के अनुमान जताया है कि अगले दो से तीन दिनों में मौसम फिर से करवट ले सकता है। इसके चलते कुछ राज्‍यों में तेज बारिश भी देखने को मिल सकती है। आइये जानते हैं देश भर के मौसम का हाल। इन राज्‍यों में बदलेगा मौसम स्‍कायमेट वेदर का अनुमान है कि अगले 24 घंटों के दौरान लद्दाख, जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी के साथ अगले 2-3 दिनों के दौरान कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग का अनुमान है कि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव में जम्मू क्षेत्र और हिमाचल प्रदेश में 27 फरवरी, 2025 को गरज के साथ आंधी-तूफान और बहुत भारी वर्षा/बर्फबारी होने के संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव में जम्मू क्षेत्र में 26 फरवरी, 2025 को गरज के साथ आंधी-तूफान और बहुत भारी वर्षा/बर्फबारी होने के संभावना है। अगले 24 घंटों के दौरान, सिक्किम, असम और अरुणाचल प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। जम्मू कश्मीर और उत्तर-पश्चिम राजस्थान के कुछ इलाकों में हल्की बारिश संभव है। दिल्‍ली में आज और कल पारा और बढ़ने तथा उसके बाद गिरने की संभावना है बारिश और बौछारों के कारण तापमान में गिरावट की संभावना है, हालांकि हल्की और छिटपुट बारिश होगी। इस मौसम में राजधानी में सर्दियों की बारिश की बहुत कमी है। अगले 3 दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत में न्यूनतम तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक वृद्धि और उसके बाद 2-4 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक गिरावट की संभावना है। अगले 4-5 दिनों के दौरान मध्य भारत में न्यूनतम तापमान में 2-4 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक वृद्धि की संभावना है। अगले 3 दिनों के दौरान पूर्वी भारत में न्यूनतम तापमान में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं होने की संभावना है और उसके बाद 2-3 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक वृद्धि की संभावना है। अगले 4-5 दिनों के दौरान आंतरिक महाराष्ट्र में न्यूनतम तापमान में 2-4 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक वृद्धि की संभावना है। अगले 4-5 दिनों के दौरान भारत के बाकी हिस्सों में न्यूनतम तापमान में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं होने की संभावना है। अधिकतम तापमान अगले 24 घंटों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान में लगभग 2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने की संभावना है, उसके बाद 4-6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट होगी। अगले 4-5 दिनों के दौरान मध्य भारत में अधिकतम तापमान में 2-4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने की संभावना है। अगले 3 दिनों के दौरान पूर्वी भारत में अधिकतम तापमान में कोई महत्वपूर्ण बदलाव होने की संभावना नहीं है और उसके बाद 2-3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने की संभावना है। अगले 4-5 दिनों के दौरान भारत के बाकी हिस्सों में अधिकतम तापमान में कोई महत्वपूर्ण बदलाव होने की संभावना नहीं है।   दिल्‍ली में बढ़ रहा है तापमान दिल्ली में पिछले तीन दिनों से दिन के तापमान में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। सफदरजंग स्थित बेस स्टेशन पर अधिकतम तापमान 27.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग 2 डिग्री सेल्सियस अधिक है। शनिवार और रविवार को दिन का तापमान क्रमशः 24.7 डिग्री सेल्सियस और 26.7 डिग्री सेल्सियस रहा। शहर में 21.5 मिमी के मासिक औसत के मुकाबले केवल 1.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है। इससे पहले, जनवरी का महीना भी निराशाजनक रहा था, जिसमें औसत 19.2 मिमी के मुकाबले मासिक कुल 6.5 मिमी बारिश हुई थी। आगामी बारिश भी पर्याप्त नहीं होगी और इसमें बस कुछ मिलीमीटर की वृद्धि हो सकती है। यह ‘टच एंड गो’ स्थिति है, और बारिश राष्ट्रीय राजधानी के बाहरी इलाकों में ही रह सकती है।   recent visitors 72

देश में सौ दिवसीय गहन टीबी-मुक्त भारत अभियान की शुरुआत, 5 लाख से अधिक टीबी रोगी चिन्हित

नईदिल्ली देश में सौ दिवसीय गहन टीबी-मुक्त भारत अभियान की शुरुआत के बाद से इसने उल्लेखनीय प्रगति की है। 455 रोकथाम वाले जिलों में 3.5 लाख से अधिक टीबी रोगियों की संख्‍या दर्ज की गई है और 10 करोड़ से अधिक कमजोर व्यक्तियों की जांच की गई है। यह त्वरित मामले का पता लगाने के प्रयासों, निदान में देरी को कम करने, दवा प्रतिरोधी मामलों की जल्द पहचान करने और उपचार के परिणामों में सुधार के परिणामस्वरूप हुआ है। 7 दिसंबर, 2024 को हुई 100-दिवसीय गहन टीबी-मुक्त भारत अभियान की शुरुआत केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा द्वारा 7 दिसंबर, 2024 को 100-दिवसीय गहन टीबी-मुक्त भारत अभियान की शुरुआत के बाद से, पूरे भारत में 5.1 लाख से अधिक रोगियों की संख्‍या दर्ज की गई है। टीबी की शुरुआती पहचान के लिए एक नई रणनीति तैयार की गई स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय के अनुसार टीबी के बढ़ते उच्च जोखिम वाले लोगों के लिए जांच उपकरण के रूप में एक्स-रे की पेशकश करके टीबी की शुरुआती पहचान के लिए एक नई रणनीति तैयार की गई थी। अल्ट्रापोर्टेबल हैंड-हेल्ड एक्स-रे के उपयोग और घर-घर जाकर एकत्र सेटिंग्स में पहुंचने के तीव्र प्रयासों के साथ, मधुमेह, धूम्रपान करने वालों, शराब पीने वालों, एचआईवी से पीड़ित लोगों, अतीत में टीबी से पीड़ित लोगों, वृद्ध लोगों, टीबी रोगियों के घरेलू संपर्कों जैसे जोखिम समूहों की पहचान करना और एक्स-रे के साथ लक्षणहीन और लक्षण वाले दोनों की जांच करना और उसके बाद न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्टिंग (एनएएटी) का उपयोग करके पुष्टि करना कई लक्षणहीन टीबी रोगियों की पहचान कर चुका है। अभियान ने उल्लेखनीय प्रगति की है आज तक, अभियान ने उल्लेखनीय प्रगति की है। 455 रोकथाम वाले जिलों में 3.5 लाख से अधिक टीबी रोगियों की संख्‍या दर्ज की गई है और 10 करोड़ से अधिक कमजोर व्यक्तियों की जांच की गई है। यह त्वरित मामले का पता लगाने के प्रयासों, निदान में देरी को कम करने, दवा प्रतिरोधी मामलों की जल्द पहचान करने और उपचार के परिणामों में सुधार के परिणामस्वरूप हुआ है। पहचाने गए लोगों में से, 2.4 लाख रोगियों की संख्‍या सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में दर्ज की गई है जबकि 1.1 लाख की पहचान निजी स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से की गई है। इसके अतिरिक्त, 10 लाख से अधिक निक्षय शिविर आयोजित किए गए हैं और टीबी सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए 836 निक्षय वाहन तैनात किए गए हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सबसे दूरदराज के क्षेत्रों को भी कवर किया जा सके। छाती के एक्स-रे का उपयोग करके 38 लाख से अधिक लोगों की जांच की गई है जिसमें एक बड़ी आबादी शामिल है जिसमें टीबी के सामान्य लक्षण या कोई लक्षण नहीं दिखाई दिए। साथ ही, अभियान पूर्ण उपचार सुनिश्चित करने, तत्काल देखभाल की आवश्यकता वाले रोगियों, अस्पताल में भर्ती, कुपोषित टीबी रोगियों की पहचान करने के लिए अलग टीबी देखभाल को बढ़ाने और कमजोर आबादी के लिए निवारक टीबी उपचार प्रदान करने के लिए काम कर रहा है। वहीं, अभियान के शुभारंभ के बाद से, 2.4 लाख से अधिक निक्षय मित्र पंजीकृत हो चुके हैं और 2.3 लाख से अधिक खाद्य टोकरियाँ वितरित की जा चुकी हैं।   recent visitors 72

सीएम मोहन यादव ने कहा- जीआईएस में जो-जो व्यापार करने आना चाहते हैं, वो सब लोग आ रहे हैं, रिस्पॉन्स अच्छा मिला है

भोपाल केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मंगलवार को मध्य प्रदेश के भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत की। वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी जीआईएस को लेकर बयान दिया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 को लेकर मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि जीआईएस मतलब ही यह है कि ग्लोबल लेवल पर जो-जो व्यापार करने आना चाहते हैं, वो सब लोग आ रहे हैं। उसका रिस्पॉन्स अच्छा और उम्मीद से ज्यादा मिल रहा है। पूरी सफलता के साथ समिट संपन्न होगा। प्रदेश की बेहतरी और युवाओं के रोजगार के लिए, आर्थिक रूप से प्रदेश को समर्थ बनाने के लिए ये बहुत जरूरी था और ये हमने किया है। जीआईएस सफल होना परमात्मा के हाथ में है। हम लोग प्रयास कर रहे हैं। रिस्पॉन्स अच्छा मिला है। वहीं, केंद्रीय मंत्री शेखावत ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, ऐसे समिट के माध्यम से अपने प्रदेशों में निवेश आमंत्रित और आकर्षित करने को लेकर देश के सभी राज्यों में प्रतिस्पर्धा का माहौल है। मध्य प्रदेश ने विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को आमंत्रित करने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित किया है। राज्य में पर्यटन क्षेत्र की संभावनाओं को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने पर्यटन क्षेत्र में निवेश के लिए विभिन्न प्रोत्साहनों की घोषणा की है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 मध्य प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभाएगा। मध्य प्रदेश में हमें बहुत सुनहरा भविष्य पर्यटन के दृष्टिकोण से आने वाले समय में देखने को मिलेगा। बता दें कि भोपाल में सोमवार को शुरू ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के पहले दिन राज्य सरकार और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के बीच एक लाख करोड़ रुपये का करार हुआ था। राजधानी के मानव संग्रहालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो दिवसीय समिट का उद्घाटन किया था। पहले दिन मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विभिन्न निवेशकों से संवाद किया था। वहीं, सीएम मोहन यादव एवं लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की उपस्थिति में राज्य सरकार और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के बीच एक लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इससे लगभग 4010 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजनाओं का निर्माण एवं विकास किया जाएगा। recent visitors 90

इजरायल-अमेरिका कर सकते है परमाणु ठिकानों पर हमला, ईरान पर मंडराया युद्ध का साया, हाई अलर्ट जारी

तेहरान ईरान ने अपने परमाणु स्थलों पर अमेरिका और इजरायल के संभावित हमले की आशंका के बीच ‘हाई अलर्ट’ जारी किया है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी अधिकारियों को संदेह है कि दोनों देश मिलकर उसके परमाणु कार्यक्रम को निशाना बना सकते हैं। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ईरान के परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर नजर रखे हुए है। ईरानी सरकार ने अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करने के संकेत दिए हैं, हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति मध्य पूर्व में नई अस्थिरता पैदा कर सकती है। ईरान ने परमाणु स्थलों की सुरक्षा बढ़ाई, संभावित हमले की आशंका ब्रिटेन के अखबार द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने इन महत्वपूर्ण स्थलों पर अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणाली तैनात की है और सुरक्षा को मजबूत किया है। इससे पहले अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने बाइडेन और फिर ट्रंप प्रशासन को इस साल ईरानी परमाणु ठिकानों पर इजरायल के संभावित हमले की चेतावनी दी थी। इजरायल के हमले और ईरान की प्रतिक्रिया ईरान लंबे समय से अपने परमाणु स्थलों को सुरक्षित कर रहा था, लेकिन पिछले एक साल में इसने सुरक्षा उपायों को और तेज कर दिया, खासतौर पर तब से जब इजरायल ने ईरान पर पहली बार हमला किया था। अमेरिकी मीडिया आउटलेट 'Axios' के अनुसार, इजरायल ने पारचिन सैन्य परिसर पर हवाई हमले किए थे, जहां ईरान कथित रूप से परमाणु हथियारों से जुड़ा रिसर्च कर रहा था। इस हमले में "Taleghan 2" सुविधा को नष्ट कर दिया गया था। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है, "ईरान हर रात संभावित हमले का इंतजार कर रहा है और सतर्क है, यहां तक कि उन ठिकानों पर भी जो सार्वजनिक रूप से ज्ञात नहीं हैं।" ट्रंप की वापसी और ईरान पर फिर से दबाव डोनाल्ड ट्रंप के जनवरी 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में दोबारा शपथ लेने के बाद, उन्होंने ईरान के खिलाफ "अधिकतम दबाव" नीति को बहाल कर दिया है। यह वही नीति है जो उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में अपनाई थी। इस नीति के तहत, अमेरिका ने 2015 के परमाणु समझौते से एकतरफा रूप से खुद को अलग कर लिया था और ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। अमेरिका का आरोप है कि ईरान गुप्त रूप से परमाणु हथियार विकसित कर रहा है, जिसे उसने लगातार खारिज किया है। हालांकि, ट्रंप ने हाल ही में ईरान के साथ एक नया समझौता करने की बात कही, लेकिन ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने 15 फरवरी को स्पष्ट कर दिया कि, "अमेरिका से बातचीत करके कोई समस्या हल नहीं होगी।" इजरायल ने दी "अंतिम प्रहार" की धमकी खामेनेई के बयान के एक दिन बाद, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उनका देश अमेरिका के सहयोग से ईरान के खिलाफ "अंतिम प्रहार" करेगा। नेतन्याहू ने कहा, "पिछले 16 महीनों में, इजरायल ने ईरान के आतंकवादी नेटवर्क पर कड़ा प्रहार किया है। राष्ट्रपति ट्रंप के मजबूत नेतृत्व में और अमेरिका के अटूट समर्थन के साथ, मुझे कोई संदेह नहीं कि हम इस कार्य को पूरा करेंगे।" गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इजरायल ने गाजा में ईरान समर्थित हमास से युद्ध छेड़ दिया था। इसके अलावा, उसने लेबनान में हिज्बुल्लाह, यमन और इराक में ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों से भी संघर्ष किया है। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल वॉल्ट्ज ने पिछले सप्ताह कहा कि, "ईरान एक तानाशाही शासन है, जिसे परमाणु हथियारों का नियंत्रण नहीं दिया जा सकता। सभी विकल्प खुले हैं।" रिपोर्ट में कहा गया है कि इजरायली हमलों से ईरान की वायु रक्षा प्रणाली कमजोर हो गई है, और भले ही उसने अतिरिक्त लॉन्चर तैनात किए हैं, लेकिन वह अब भी बड़े हमलों के प्रति संवेदनशील है। ईरान की रक्षा प्रणाली मुख्य रूप से घरेलू रूप से विकसित तकनीकों और रूसी S-300 मिसाइलों पर निर्भर है, जो इजरायली हथियारों के सामने अपर्याप्त साबित हो सकती हैं। इसे देखते हुए, ईरान ने रूस से S-400 मिसाइलों की आपूर्ति तेजी से करने की मांग की है। इसके अलावा, ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की एयरोस्पेस फोर्स के प्रमुख जनरल अमीर अली हाजीजादेह ने कहा है कि ईरान एक नई बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रणाली विकसित कर रहा है, ताकि इज़राइल से बढ़ते खतरे का सामना किया जा सके। recent visitors 85

भ्रष्ट केजरीवाल सरकार की शराब नीति के चलते 2,002.68 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ: वीरेंद्र सचदेवा

नई दिल्ली दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने मंगलवार को मीडिया को संबोधित करते हुए दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी (आप) पर शराब घोटाले में संलिप्तता का आरोप लगाया। सचदेवा ने कहा कि दिल्ली विधानसभा में प्रस्तुत सीएजी रिपोर्ट से स्पष्ट है कि भ्रष्ट केजरीवाल सरकार की शराब नीति के चलते 2,002.68 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। सचदेवा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल की सरकार ने इस रिपोर्ट को टेबल करने से बार-बार बचने की कोशिश की। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शराब घोटाले की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया है और अब सब कुछ सामने आ रहा है। ये भ्रष्टाचारियों के कार्य हैं, जिनका पर्दाफाश हो चुका है। उन्होंने कहा कि वह पहले से ही आरोप लगाते रहे हैं कि अगर दिल्ली में कोई शराब का दलाल है तो वह अरविंद केजरीवाल हैं। इस रिपोर्ट में साफ तौर पर यह साबित हो रहा है कि कैसे दिल्ली सरकार को 2002.68 करोड़ रुपये का रेवेन्यू लॉस हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि रेवेन्यू लॉस तो एक हिस्सा है, असल में भ्रष्टाचार और लूट तो और भी ज्यादा है, जो इन लोगों ने की है। सचदेवा ने आगे कहा कि रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि शराब की दुकानों के लिए गलत नियम बनाए गए थे और पूरे क्षेत्र में कानून का उल्लंघन किया गया। दिल्ली विधानसभा में प्रस्तुत सीएजी रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया कि दिल्ली की आप-दा सरकार की 'शराब नीति' अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की महाभ्रष्ट जुगलबंदी का परिणाम थी। इन्होंने एकाधिकार को बढ़ावा दिया, कुछ ही कंपनियों को शराब आपूर्ति का पूरा नियंत्रण मिला। इंडोस्पिरिट, महादेव लिकर और ब्रिंडको ने 71 फीसदी सप्लाई पर कब्जा जमाया। उन्होंने आगे कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार में कैबिनेट प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया। बिना कैबिनेट और एलजी की मंजूरी के शराब नीति में बड़े बदलाव किए गए। शराब की अवैध दुकानें खोली गईं, रिहायशी इलाकों में एमसीडी-डीडीए की ब‍िना मंजूरी के ठेके खोल दिए गए, एमसीडी ने 4 अवैध दुकानें सील कीं। सचदेवा ने कहा कि कोरोना महामारी की आड़ में शराब व्यापारियों को छूट दी गई, जिसका परिणाम यह हुआ कि सरकार को 144 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। यह पैसा सीधे तौर पर मनीष सिसोदिया, अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की जेब में जा रहा था। सरकारी विभागों में जमा किए गए डिपॉजिट का लाभ इन नेताओं ने उठाया, इससे सरकार को 27 करोड़ रुपये का और नुकसान हुआ। recent visitors 65

सीएम योगी ने कहा- राज्यपाल के खिलाफ विपक्ष का व्यवहार किसी भी आदर्श लोकतंत्र को स्वीकार नहीं होगा

लखनऊ उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के छठे दिन मंगलवार को विधान परिषद में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर अपने संबोधन में सीएम योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ के आयोजन पर किए जा रहे दुष्प्रचार और राज्यपाल के अभिभाषण पर किए गए व्यवहार पर विपक्ष को आइना दिखाया। सीएम योगी ने कहा कि राज्यपाल के खिलाफ विपक्ष का व्यवहार किसी भी आदर्श लोकतंत्र को स्वीकार नहीं होगा। सीएम योगी ने सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट को पढ़ते हुए कहा कि महाकुंभ में सभी को अपनी दृष्टि के अनुरूप चीजें देखने को मिली है। महाकुंभ दुनिया में अब तक हुए सभी आयोजनों के रिकॉर्ड को तोड़ रहा है। प्रयागराज महाकुंभ ने प्रदेश में नए पंच तीर्थ को जोड़ा है, जिसके माध्यम से श्रद्धालु अयोध्या, काशी, गोरखपुर, मथुरा दर्शन करने के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल एक संवैधानिक पद है और अपने संवैधानिक उत्तरदायित्वों का निर्वहन करने के लिए ही वर्ष की शुरुआत में पहले सत्र में उनके द्वारा दोनों सदनों को एक साथ संबोधित किया जाता है। लोकतंत्र संवाद पर आधारित होता है, यह आवश्यक नहीं कि सभी लोग एक-दूसरे से सहमत हों, लेकिन मर्यादा और शालीनता का पालन करना सभी की जिम्मेदारी है। राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद के प्रति जिस प्रकार की अशोभनीय भाषा और नारेबाजी का प्रयोग किया गया, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने हमें जो लोकतांत्रिक व्यवस्था दी है, उसका सम्मान करना सभी दलों का कर्तव्य है। समाजवादी पार्टी का यह आचरण लोकतंत्र और संविधान, दोनों के विरुद्ध है। एक आदर्श लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे व्यवहार को स्वीकार नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री योगी ने विधान परिषद में विपक्ष के रवैये पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जब पूरा विश्व प्रयागराज के महाकुंभ की भव्यता और दिव्यता का साक्षी बन रहा है, तब विपक्ष सिर्फ आलोचना में व्यस्त है। यह कोई साधारण आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सनातन परंपरा, आस्था और संस्कृति का वह महोत्सव है, जिसने देश की प्रतिष्ठा को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि अब तक 64 करोड़ श्रद्धालु इस दिव्य आयोजन में शामिल हो चुके हैं, जो विश्व के किसी भी धार्मिक आयोजन में शामिल होने वाले लोगों की संख्या से कहीं अधिक है। उत्तर प्रदेश आज एक नए युग की ओर बढ़ रहा है, जहां अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन, गोरखपुर और प्रयागराज तीर्थाटन के नए केंद्र बन चुके हैं। प्रयागराज महाकुंभ ने इन धार्मिक स्थलों को पंच तीर्थ के रूप में जोड़ दिया है। सीएम योगी ने कहा कि महान कार्यों के प्रति समाज का रवैया तीन चरणों से गुजरता है- उपहास, विरोध और अंततः स्वीकृति। यही हाल राम मंदिर निर्माण और महाकुंभ आयोजन के दौरान भी देखने को मिला। पहले विपक्ष ने तंज कसे, फिर विरोध किया, लेकिन अंततः वे भी इसी आस्था में समर्पित हो गए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वयं संगम में स्नान कर आए और नेता प्रतिपक्ष ने खुद को पहले सनातनी बताया, बाद में समाजवादी। यह उनकी स्वीकृति का प्रमाण है। सीएम योगी ने महाकुंभ की तुलना दुनिया के अन्य धार्मिक आयोजनों से करते हुए कहा कि मक्का में हज के दौरान 1.4 करोड़, वेटिकन सिटी में सालभर में 80 लाख, जबकि अयोध्या धाम में मात्र 52 दिनों में 16 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे। इसी तरह, काशी, मथुरा-वृंदावन और अन्य तीर्थों में भी करोड़ों श्रद्धालु पहुंचे, जिससे यह साबित हुआ कि भारत की सनातन परंपरा केवल धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं, बल्कि विश्व संस्कृति की आधारशिला है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ लोग हर बार महाकुंभ को बदनाम करने की कोशिश करते हैं, लेकिन इस आयोजन ने हर नकारात्मक प्रचार को ध्वस्त कर दिया। वामपंथी और समाजवादी महाकुंभ को बदनाम करने में जुटे रहे, लेकिन करोड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर उनकी नकारात्मकता को नकार दिया। सनातन संस्कृति की ताकत दुनिया ने देखी। करोड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर सनातन विरोधियों को करारा जवाब दिया। यह वही नया उत्तर प्रदेश है, जिसने आध्यात्मिक पर्यटन को एक नई दिशा दी है और अब पूरी दुनिया सनातन संस्कृति की इस अद्भुत शक्ति का लोहा मान रही है। मुख्यमंत्री योगी ने गंगाजल की शुद्धता पर सवाल उठाने वालों को कड़ा जवाब दिया। उन्होंने बताया कि प्रयागराज में वैज्ञानिक डॉ. अजय शुक्ला की लैब और उत्तर प्रदेश व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, गंगाजल स्नान योग्य ही नहीं, बल्कि अल्कलाइन वाटर जितना शुद्ध भी है। वैज्ञानिक परीक्षणों से यह साबित हुआ है कि गंगाजल में स्वयं को शुद्ध बनाए रखने की प्राकृतिक क्षमता है, जो इसे अन्य नदियों से अलग बनाती है। 17 जनवरी को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में संगम क्षेत्र में क्लोरोफॉर्म की मात्रा निर्धारित मानकों के भीतर पाई गई। संगम तट पर इसकी मात्रा 780 एमपीएन प्रति 100 मिलीलीटर थी, जबकि वाराणसी की ओर जाने वाले घाटों पर यह 280 तक थी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, जल की शुद्धता के तीन प्रमुख मानक- बीओडी (बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड), सीओडी (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) और फीकल कॉलीफॉर्म-संगम क्षेत्र में पूरी तरह संतुलित पाए गए।   recent visitors 78