महाकुंभ के कारण एमपी-यूपी सीमा पर यातायात कंट्रोल किया, चाकघाट पर वाहनों की आवाजाही पर रोक, लगा लंबा जाम

रीवा महाकुंभ को लेकर एक बार फिर उत्तर प्रदेश वह मध्य प्रदेश के सीमा चाकघाट पर वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई गई है। कल सुबह से जहां धीमी गज से वाहनों को रवाना किया जा रहा था वही सुबह 9 बजे तक वाहनों के पहिए थम गए हैं। इसके कारण तकरीबन 5 किलोमीटर का लंबा जाम अब तक लग चुका है। श्रद्धालुओं तथा महाकुंभ में जाने वाले लोगों को किसी प्रकार की दिक्कत ना हो इसके लिए जिला प्रशासन एक बार फिर जिले के चार स्थानों पर मिशन हाईवे 39 पर आने वाले वाहनों को रोकने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह ने कहा है कि श्रद्धालुओं को जलपान एवं भोजन की व्यवस्था भी की जा रही है। श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की दिक्कत ना हो इसके लिए उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला डीआईजी साकेत पांडे से बात की है।   recent visitors 65

हमास तीन इजरायली बंधकों को रिहा करेगा, इजरायल की जेल से छूटेंगे फिलिस्तीनी कैदी, युद्धविराम के तहत बंधकों-कैदियों की बदली

तेल अवीव: गाजा पट्टी में लागू युद्धविराम की शर्तों के तहत फिलिस्तानी गुट हमास शनिवार को तीन इजरायली बंधकों को रिहा करेगा। हमास ने इन तीनों इजरायली नागरिकों के नाम जारी कर दिए हैं। हमास इस बार तीन पुरुष बंधकों को छोड़ने जा रहा है। इसके बदले में इजरायल अपनी जेलों में बंद 183 फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा। संघर्ष विराम के प्रभावी होने के बाद यह पांचवी बार है, जब इजराइल की जेल में बंद फलस्तीनियों को रिहा किया जाएगा और हमास इजराइली बंधकों को रिहा करेगा। हमास ने शनिवार को 52 वर्षीय एली शरबी, 56 वर्षीय ओहाद बेन अमी और 34 वर्षीय लेवी को रिहा कनरे का फैसला लिया है। इन तीनों को 7 अक्टूबर, 2023 को हमास के नेतृत्व वाले इजरायल पर हमले के दौरान अगवा कर लिया गया था। इसी हमले के बाद इजरायल ने गाजा में हमले शुरू कर दिए थे और युद्ध छिड़ गया था। बीते महीने, 19 जनवरी को दोनों पक्ष युद्धविराम पर सहमत हुए हैं। युद्धविराम के बाद अब तक 18 इजरायली बंधकों और 550 से ज्यादा फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा किया जा चुका है। उम्रकैद के 18 लोगों को छोड़ेगा इजरायल एपी की रिपोर्ट के अनुसार, हमास ने शरबी और बेन अमी को किबुत्ज बेरी से बंधक बना लिया गया था। यह इलाका हमास के हमले में सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था। वहीं लेवी को नोवा संगीत समारोह से अगवा किया गया था। हमले के बाद लेवी एक कमरे में छिपे हुए थे, जिसका दरवाजा तोड़कर हमास लड़ाके घुस गए थे और उनको बंधक बनाकर गाजा ले आए थे। इजरायल की से शनिवार को रिहा किए जाने वाले 183 फिलिस्तीनी कैदियों में 18 लोग ऐसे हैं, जिन्हें घातक हमलों के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। वहीं 54 लोग लंबी अवधि की सजा काट रहे हैं। इन 183 लोगों में 111 फिलिस्तीनी गाजा से हैं, जिन्हें 7 अक्टूबर के हमले के बाद हिरासत में लिया गया था। ये सभी पुरुष हैं और 20 से 61 साल की उम्र के हैं। गाजा में हमास और इजरायल के बीच फिलहाल युद्धविराम समझौता चल रहा है। युद्धविराम का ये चरण मार्च की शुरुआत तक चलेगा। युद्धविराम समझौते के इस चरण के तहत 33 इजरायली बंधकों और 1900 फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा किया जाना है। इजरायल का कहना है कि 33 बंधकों में से आठ की मौत हो चुकी है। recent visitors 79

अलास्का में लापता विमान हुआ दुर्घटनाग्रस्त, प्लेन में सवार सभी 10 यात्रियों की हुई मौत

अलास्का अमेरिका के अलास्का में लापता विमान के बारे में अपडेट सामने आई है जहां पर यह 10 यात्रियों को ले जा रहा छोटा विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। इस हादसे में सभी यात्रियों की मौत होने की खबर मिली है। बताया जा रहा है कि, पश्चिमी अलास्का में एक छोटा यात्री विमान बर्फ से ढंके समुद्र में मिला है। अमेरिकी तट रक्षक बल के प्रवक्ता माइक सालेर्नो ने बताया कि विमान की अंतिम लोकेशन पर बचावकर्मी उसकी तलाश में जुटे थी तभी उनकी नजर विमान के मलबे पर पड़ी। पड़ताल के लिए दो तैराकों को समुद्र में उतारा गया। अलास्का के अधिकारी ने दी जानकारी यहां पर अलास्का के नागरिक सुरक्षा विभाग के अनुसार ‘बेरिंग एयर’ के विमान ने बृहस्पतिवार दोपहर को उनालाक्लीट से उड़ान भरी थी और यह नोम जा रहा था। ‘बेरिंग एयर’ के संचालन निदेशक डेविड ओल्सन ने बताया कि ‘सेसना कारवां’ ने अपराह्न दो बजकर 37 मिनट पर उनालाक्लीट से उड़ान भरी थी और एक घंटे से भी कम समय बाद उसका संपर्क टूट गया। ‘नेशनल वेदर सर्विस’ के अनुसार उस समय हल्का हिमपात हो रहा था और कोहरा छाया हुआ था, साथ ही तापमान शून्य से नीचे 8.3 डिग्री सेल्सियस था। प्लेन के अंदर जाना हुआ मुश्किल आपको बताते चलें कि, USCG ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस दुर्घटना को लेकर एक पोस्ट किया है. इस पोस्ट में USCG ने कहा, “प्लेन में सवार 10 लोगों में 3 के शव प्लेन में पाए गए हैं. वहीं, बाकी 7 लोगों के शव प्लेन के अंदर होने की संभावना है. लेकिन दुर्घटनाग्रस्त प्लेन की हालत के कारण प्लेन के अंदर जा पाना फिलहाल अभी मुश्किल है।”हम इस दुर्घटना में पीड़ितों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करते है। 6 फरवरी को गायब हुआ था विमान आपको बताते चलें कि, अमेरिकी विमान सेना 208B ग्रैंड कैरवैन ने अलास्का के उनालकलीट शहर के स्थानीय समय के मुताबिक गुरुवार (6 फरवरी) को दोपहर 2:37 बजे नोम जाने के लिए उड़ान भरा था और उड़ान भरने के 39 मिनट के बाद रडार से गायब हो गया था. यह विमान बीयरिंग एयर द्वारा ऑपरेट की जाती थी, इसमें 9 यात्री और 1 पायलट सवार थे। recent visitors 66

देश की राजधानी दिल्ली पर जिस पार्टी ने सबसे ज्यादा राज किया, आज उसे जनता ने किया पहचानने से इनकार!

नई दिल्ली  देश की राजधानी दिल्ली पर जिस पार्टी ने सबसे ज्यादा राज किया, आज उसे दिल्ली की जनता ने शायद पूरी तरह भुला दिया है। दिल्ली में 15 साल तक लगातार सरकार चलाने वाली कांग्रेस पार्टी इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 से गायब हो गई है। पूरा मुकाबला आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच ही सिमट कर रह गया है। अभी तक के रुझानों में दिल्ली की 70 सीटों में से एक पर भी खाता खुलता नहीं दिख रहा है। वोट प्रतिशत की भी बात करें, तो कांग्रेस बहुत ही बुरी स्थिति में दिख रही है। सुबह 10.30 बजे तक के रुझानों में कांग्रेस को महज 6.86 फीसदी वोट ही मिले हैं। मौजूदा रुझानों में 69 में से बीजेपी 41 तो आम आदमी पार्टी 28 सीटों पर आगे चल रही है। अगर इस बार भी कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिलती है तो यह लगातार तीसरा मौका होगा, जब कांग्रेस को दिल्ली ने पूरी तरह से नकार दिया। 2020 में भी नहीं खुला था खाता दिल्ली में हुए पिछले विधानसभा चुनाव 2020 में भी कांग्रेस का बुरा हाल था। पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी। उसका वोट प्रतिशत भी महज 4.26 फीसदी ही रहा था। 2015 में भी कांग्रेस ने सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। वोट शेयर भी 9.7 फीसदी ही रहा था। आम आदमी पार्टी के उदय ने किया बंटाधार 2013 में आम आदमी पार्टी के उदय ने अगर किसी को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है तो वो कांग्रेस ही है। इस चुनाव से पहले 1998 से लगातार कांग्रेस की सरकार दिल्ली में थी। मगर 2013 में जनता ने अपना नया नेता चुन लिया। एक नई पार्टी ने चमत्कार कर दिया। 2008 के चुनावों में 40 फीसदी से ज्यादा वोट शेयर लेकर सरकार बनाने वाली कांग्रेस 2013 में 25 फीसदी से भी कम वोट शेयर पर आ गिरी। पार्टी का वोट शेयर 24.25 फीसदी ही रहा और सीटें भी 43 से घटकर महज 8 ही रह गई। इसके बाद से तो पार्टी को एक सीट मिलना भी दूभर हो गया। लोकसभा चुनाव का नहीं मिला फायदा कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में देशभर में अच्छा प्रदर्शन किया था। पार्टी ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी थी। हालांकि दिल्ली की सातों सीटों पर उसे हार ही मिली थी। लेकिन 18 फीसदी जनता ने राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस पर भरोसा जताया था। मगर इसका फायदा कांग्रेस को दिल्ली के विधानसभा चुनावों में नहीं मिला। recent visitors 88

राजस्थान के मायरे ने फिर चौंकाया, बहन के भरा 3 करोड़ का मायरा

नागौर  राजस्थान में एक बार फिर मायरा चर्चा का विषय बन गया है। यहां नागौर के साडोकण गांव के तीन भाइयों ने अपनी बहन के बच्चों की शादी में जो किया, उसे जानकर हर कोई हैरान है। उन्होंने मायरे यानी भात में 1 करोड़ 51 लाख रुपये नकद, 25 तोला सोना, 5 किलो चांदी और नागौर शहर में 2 प्लॉट दिए हैं। 7 फरवरी, 2025 को हुई इस कार्यक्रम में बहन के लिए भाईयों ने दिल खोल के मायरा भरा। बता दें कि राजस्थान में बहन के बच्चों की शादी में भाई की ओर से मायरा यानी (तोहफे) देने की परंपरा है। नागौर में यह परंपरा अक्सर करोड़ों के मायरे के रूप में देखने को मिलती है। इससे पहले भी नागौर में 2 करोड़ और 8 करोड़ के मायरे की खबरें सामने आ चुकी हैं। भांजे और भांजी की शादी में करोड़ों का मायरा यह मायरा इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि तीनों भाइयों ने मिलकर अपनी बहन बीरज्या देवी के बच्चों, भांजे और भांजी की शादी में 1 करोड़ 51 लाख रुपये नकद दिए। इसके अलावा 25 तोला सोना, 5 किलो चांदी और नागौर शहर में 2 प्लॉट भी मायरे में शामिल थे। यह शादी फरदोद गांव में हुई थी। यहां बीरज्या देवी के पति मदनलाल रहते हैं। भाइयों के नाम हरनिवास खोजा, दयाल खोजा और हरचंद खोजा हैं। जानिए क्या है मायरे की परंपरा राजस्थान में बहन के बच्चों की शादी में भाई की ओर से मायरा देने की परंपरा काफी पुरानी है। यह परंपरा रियासतकाल से चली आ रही है। आमतौर पर बेटी के पिता या भाई अपनी बहन के बच्चों की शादी में कपड़े और कुछ पैसे मायरे के रूप में देते हैं। मायरे को भात भी कहा जाता है। लेकिन नागौर जिले में यह परंपरा थोड़ी अलग है। यहां अक्सर करोड़ों के मायरे देखने को मिलते हैं, जो लोगों को हैरान करते हैं। कुछ समय पहले ही नागौर में एक टीचर ने 2 करोड़ रुपये का मायरा दिया था। उससे पहले एक और भाई ने 8 करोड़ रुपये का मायरा दिया था। अब यह नया मामला सामने आया है, जिसमें 1 करोड़ 51 लाख रुपये का मायरा दिया गया है। रामबक्स के दोहिते और दोहिती की आज शादी थी। इनका आज मायरा था। मायरे की रीत-रिवाज नागौर में जायल के खिंयाला का रियासत काल से ही प्रसिद्ध था। रामबक्स अपने परिवार, रिश्तेदारों और मिलने वालों के साथ बेटी के घर दो हजार लोगों के साथ पहुंचे। तीनों भाइयों ने मिलकर अपनी बहन बिराजया को चुनरी ओढ़ाई और मायरे की शुरुआत की। मायरे में एक करोड़ 51 लाख रुपये नकद, 30 तोला सोना, पांच किलो चांदी और दो प्लॉट नागौर शहर में बहन के नाम किए। इस दौरान महेंद्र चौधरी (पूर्व राजस्थान सरकार के उप मुख्य सचेतक) सुनीता चौधरी (पूर्व जिला प्रमुख) और रिद्धकरण लामरोड़ (पूर्व प्रधान जायल) सहित हजारों लोग मौजूद रहे। नागौर का मायरा सदियों से प्रसिद्ध नागौर में जायल के जाटों का मायरा सदियों से प्रसिद्ध है। मारवाड़ में इस मायरे को कॉफी सम्मान की नजर से देखा जाता है। गूगल साम्राज्य के दौरान जायल के खियाला और जायल के जाटों ने मिलकर लिछमा गुजरी को अपनी धर्म की बहन मानकर भर गए थे। मायरा आज भी जब शादी होती है और उस समय मायरा आता है तो महिलाएं लोकगीत में भी गाती हैं। कहा जाता है कि खियाला के जाट धर्माराम और गोपालराम दोनों मुगल साम्राज्य में बादशाह के लिए टैक्स कलेक्शन का काम करते थे और टैक्स कलेक्शन कर टैक्स को जमा करवाने के लिए वह दिल्ली दरबार जा रहे थे। जब दोनों भाई दिल्ली टैक्स कलेक्शन दिल्ली दरबार में जमा करवाने जा रहे थे। इसी दौरान बीच रास्ते में शादी के दिन लिछमा गुजरी नामक एक महिला बिलखती हुई रोती हुई नजर आई। जब उन्होंने कारण पूछा तो लिछमा गुजरी ने बताया कि उसके घर पर शादी है, बेटों की और उसके कोई भाई नहीं हैं, जिसके कारण उसके बच्चों की शादी में अब मायरा कौन लेकर आएगा। तब उन्होंने धर्माराम और गोपाल रामजाट ने ढांढस बांधते हुए कहा कि वह तुम्हारे भाई हैं और तुम चलो घर हम करेंगे मायरा। उस दौरान दोनों जाटों ने अपनी बहन लिछमा गुजरी के लिए टैक्स कलेक्शन के सारे रुपये से मायरा भर दिया। दूसरी तरफ बादशाह नाराज हो गए, वह समय पर नहीं पहुंचे थे। जब वह पहुंचे तब सारी बात बादशाह के सामने रखी तो उन्होंने सजा देने के बजाय उनको माफ कर दिया। कब हुई मायरे की शुरुआत मायरे की शुरुआत 600 साल पूर्व नरसी भगत ने शुरू की थी। नरसी भगत का जन्म गुजरात के जूनागढ़ में 600 साल पहले हुआ था, उस समय हुमायूं का शासन काल था। नरसी भगत जो कि जन्म से ही गूंगे और बहरे थे। वह अपनी दादी के पास ही रहते थे, उनके एक भाई भाभी भी थे। भाभी का स्वभाव कड़क था, लेकिन नरसी भगत जो कि एक संत प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। इसी प्रवृत्ति के चलते उनको आवाज और उनका वीरप्पन ठीक हो गया। नरसी जी के मां बाप एक महामारी के शिकार हो गए, नरसी भगत की शादी हुई थी और पत्नी भी भगवान के प्यारी हो गई। नरसी जी की दूसरी शादी भी करवाई, कुछ दिन बीतने पर नरसी जी के घर पर एक लड़की का जन्म हुआ और उसका नाम नानीबाई रखा नरसी बाई नरसी भगत ने अपनी बेटी की शादी अंजार नगर में करवा दी। दूसरी तरफ नरसी जी की भाभी ने उनको घर से निकाल दिया, नरसी भगवान श्री कृष्ण के अटूट भगत हैं। वह उन्हीं की भक्ति में लीन हो गए, भगवान शंकर की कृपा से उन्होंने ठाकुर जी के भी दर्शन कर लिए। उसके बाद तो नरसी जी ने सांसारिक मोहेबी त्याग दिया और संत बन गए उधर नरसी भाई ने पुत्री को जन्म दिया और पुत्री विवाह लाइक हो गई। किंतु नरसी को कोई खबर नहीं थी, लड़की के विवाह पर ननिहाल की तरफ से भात भरने की रसम के चलते नरसी जी को नरसी के पास देने के कुछ नहीं थे, नरसी जी के पास खुद की टूटी-फूटी बैलगाड़ी और बूढ़े 220 हैं। नरसी जी ने अपने कुटुम के भाई लोगों … Read more

दिल्ली चुनाव में अरविंद केजरीवाल की आप पार्टी की हार के ये बड़े 5 फैक्टर

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 27 सालों का सूखा खत्म करते हुए सत्ता की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। भाजपा ने सीटों पर बढ़त बनाकर रुझानों में बहुमत हासिल कर लिया है। 2013 में अन्ना हजारे के 'क्रांतिपथ' से निकलकर राजनीति की राह में बढ़ने वाले अरविंद केजरीवाल को पहली राजनीतिक हार मिली है। मुफ्त बिजली, पानी, बस सफर जैसी स्कीमों के बाद उनकी हार ने काफी कुछ साफ कर दिया है। मुस्लिम बहुल इलाके हों, गांधी नगर जैसे कारोबारी क्षेत्र हों या फिर पूर्वी दिल्ली का पटपड़गंज हो, सभी जगहों पर आम आदमी पार्टी को करारा झटका लगा है तो साफ है कि अलग-अलग वर्गों में उसने अपने जनाधार को खोया है। इसकी पर्याप्त वजहें हैं, जो चुनाव के दौरान ही साफ थीं, लेकिन अरविंद केजरीवाल अपने नाम पर चुनाव में जीत दिलाने की कोशिश में थे।   दिल्ली की सड़कों की बदहाली अरविंद केजरीवाल एक तरफ रेवड़ियां बांटने के लगातार ऐलान करते रहे तो भाजपा ने सड़क, पानी जैसे मुद्दों को नहीं छोड़ा। बुराड़ी से संगम विहार तक और पटपड़गंज से उत्तम नगर तक अलग-अलग इलाकों में टूटी सड़कों को भाजपा दिखाती रही। भाजपा का कहना था कि कहीं जल बोर्ड ने सड़कें उखाड़ तो दीं, लेकिन उन्हें सही नहीं किया। वहीं तमाम इलाकों में 10 साल में एक बार भी सड़क नहीं बनी। खराब सड़कों की रिपेयरिंग तक नहीं हो सकी। यहां तक कि अरविंद केजरीवाल ने भी सड़कों की बदहाली को स्वीकार किया था और उनका कहना था कि हम इस मोर्चे पर काम नहीं कर सके। पानी के टैंकर और पलूशन का भी असर दिल्ली के कई इलाकों में टैंकर माफिया के सक्रिय होने और गर्मी के मौसम में हर साल पानी की किल्लत की खबरें आती रही हैं। एक तरफ फ्री बिजली और पानी देने के वादे तो कहीं पानी की ही किल्लत होने से दिक्कतें आईं। माना जा रहा है कि जनता ने पानी की परेशानी के नाम पर भी वोट दिया। एक तरफ भाजपा ने फ्री वाली स्कीमों को जारी रखने का वादा किया तो वहीं सुधार की भी बात कही। माना जा रहा है कि दिल्ली के लोगों ने पानी और सड़क के नाम पर भाजपा को मौका देने का फैसला लिया है। मुस्लिम वोटों का बंटवारा, दिल्ली दंगों ने बदला माहौल ओखला से लेकर मुस्तफाबाद तक में भाजपा ने बढ़त कायम की है। यहां असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने वोट काटे हैं तो वहीं कांग्रेस को भी मुस्लिमों का वोट मिला है। इस बार मुस्लिमों के बीच आम आदमी पार्टी के लिए एकतरफा वोटिंग नहीं हुई। माना जा रहा है कि इसके चलते भाजपा को सीधे बढ़त मिली है। कई मुस्लिम बहुल इलाकों में लोगों ने इस बात की शिकायत की कि 2020 के दंगों में अरविंद केजरीवाल ने साथ नहीं दिया। इसके अलावा कोरोना काल में मुस्लिमों को बदनाम किया गया। ऐसे में मुस्लिम वोटों का AAP के पक्ष में एकजुट न रहना उसके लिए झटके के तौर पर सामने आया है। 8वां वेतन आयोग, पेंशन और टैक्स राहत के ऐलान से भाजपा के साथ सरकारी कर्मी? आरके पुरम जैसी सीट पर भाजपा आगे है। यह सीट सरकारी कर्मचारिचों के बहुलता वाली मानी जाती है। ऐसे में कहा जा रहा है कि सरकारी कर्मचारियों ने भाजपा को समर्थन किया है। यूनिफाइड पेंशन स्कीम और फिर 8वां वेतन आयोग घोषित करके भाजपा ने दिल्ली चुनाव में सरकारी कर्मचारियों को लुभा लिया। यही नहीं 1 फरवरी को ही आए बजट में 12 लाख रुपये तक ही कमाने वालों की आय को टैक्स फ्री कर दिया गया है। माना जा रहा है कि इसका फायदा पार्टी को चुनाव में मिला है। आरएसएस ने संभाला मोर्चा, एकजुटता से लड़ा संगठन भाजपा ने लोकसभा चुनाव में दिल्ली में सातों सीटें पाई थीं। लेकिन कुछ राज्यों में झटका लगा था तो आरएसएस के साथ तालमेल को लेकर सवाल उठा था। इस बार भाजपा और आरएसएस के बीच बेहतर तालमेल दिखा। यही नहीं संघ के लोगों को बूथ मैनेजमेंट की जिम्मेदारी दी गई। इस तरह भाजपा और संघ के आनुषांगिक संगठनों में अच्छा समन्वय दिखा। माना जा रहा है कि इसका असर ग्राउंड पर दिखा और अब नतीजा सामने है। recent visitors 89

बेटे जीत की शादी पर गौतम अदाणी के 10 हजार करोड़ रुपये के दान की जमकर हो रही है तारीफ

अहमदाबाद बेटे जीत अदाणी की शादी के मौके पर अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी द्वारा किए गए महादान की अब हर तरफ जमकर तारीफ हो रही है. खास बात ये है कि गौतम अदाणी ने अपने बेटे की शादी बेहद ही सादगी भरे अंदाज में और पारंपरिक तरीके से की, लेकिन इस शादी के मौके को और यादगार बनाने के लिए उन्होंने 10 हजार करोड़ रुपये दान करने का ऐलान किया. गौतम अदाणी की तरफ से किया गया ये दान उनके परमार्थ के विचार "सेवा साधना है, सेवा प्रार्थना है और सेवा ही परमात्मा है" पर आधारित है. उनके इस दान का बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य , शिक्षा और कौशल विकास के इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर खर्च किया जाएगा. गौतम अदाणी के इस महादान की तारीफ इंडिया टीवी के प्रधान संपादक रजत शर्मा ने भी की है.     अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी के छोटे बेटे जीत अदाणी की शादी दिवा शाह के साथ शुक्रवार को अहमदाबाद में संपन्न हुई. यह शादी बेहद ही सादगी और पारंपरिक तरीके से संपन्न हुई. गौतम अदाणी ने इस मौके को और यादगार बनाने के लिए समाज सेवा के तौर पर 10,000 करोड़ रुपये दान करने का ऐलान। जीत और दिवा की शादी की तस्‍वीरें अपने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म पर शेयर करते हुए गौतम अडानी ने कहा कि परमपिता परमेश्वर के आशीर्वाद से जीत और दिवा आज विवाह के पवित्र बंधन में बंध गए. यह शादी आज अहमदाबाद में प्रियजनों के बीच पारंपरिक रीति रिवाजों और शुभ मंगल भाव के साथ संपन्न हुआ. यह एक छोटा और अत्यंत निजी समारोह था, इसलिए हम चाह कर भी सभी शुभचिंतकों को आमंत्रित नहीं कर सके, जिसके लिए मैं क्षमाप्रार्थी हूं. मैं आप सभी से बेटी दिवा और जीत के लिए स्नेह और आशीष का हृदय से आकांक्षी हूं. दिव्‍यांगों को 10-10 लाख की मदद गौतम अडानी के छोटे बेटे जीत अडानी और दिवा शाह ने शादी (Jeet-Diva Wedding) से पहले 'मंगल संकल्‍प' लिया. जिसके तहत 500 दिव्यांग बहनों की शादी के लिए 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी. गौतम अडानी ने जानकारी शेयर करते हुए कहा था कि जीत और दीवा ने हर साल 500 दिव्यांग बहनों की शादी के लिए 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है. एक पिता के रूप में उनके द्वारा की जाने वाली इस मंगल सेवा से मैं बहुत संतुष्ट हूं. मुझे पूरा विश्वास है कि इस प्रयास से अनेक दिव्यांग बेटियों और उनके परिवारों का जीवन सुख, शांति और सम्मान के साथ आगे बढ़ेगा. मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि वह जीत और दीवा को सेवा के इस पथ पर आगे बढ़ते रहने का आशीर्वाद और शक्ति प्रदान करें. प्री-वेडिंग की झूमते दिखे थे जीत-दिवा जीत अडानी और दिवा शाह के प्री-वेडिंग सेलिब्रेशन (Jeet-Diva Pre Wedding Celebration) का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें फेमस सिंगर दलेर मेहंदी के बेटे गुरदीप मेहंदी के साथ जीत-दिवा झूमते हुए दिखाई दिए. गुरदीप के साथ दूल्‍हा-दूल्‍हन ढोल की बीट्स पर पंजाबी भांगड़े पर डांस करते हुए भी नजर आए थे. recent visitors 78