महाकुंभ में भगदड़ के बाद सरकार अलर्ट… दो सीनियर IAS अफसरों को किया तैनात

प्रयागराज हाल ही में महाकुंभ में मची भगदड़ के बाद यूपी सरकार ने भीड़ नियंत्रण और सुचारू व्यवस्था के लिए दो सीनियर आईएएस अधिकारियों की तैनाती की है. दोनों आईएएस अफसरों ने साल 2019 के अर्धकुंभ में जिम्मेदारी संभाली थी. सरकार ने आगामी बसंत पंचमी (अमृत स्नान) के सफल आयोजन को लेकर इन अधिकारियों को नियुक्त किया है. 3 फरवरी को होने वाले इस प्रमुख स्नान पर भारी भीड़ जुटने की संभावना है. महाकुंभ मेला में भगदड़ के एक दिन बाद गुरुवार को भारी भीड़ पहुंची. करीब दो करोड़ लोगों ने संगम स्नान किया. कुंभ में अब तक करीब 30 करोड़ लोग स्नान कर चुके हैं. वहीं डीजीपी प्रशांत कुमार और मुख्य सचिव मनोज सिंह भी घटनास्थल पर पहुंचे और हादसे की वजहों को जाना. न्यायिक आयोग की टीम भी यहां पहुंची. सरकार ने मौनी अमावस्या पर हादसे से सबक लेते हुए अमृत स्नान के दिन VIP मूवमेंट पर रोक लगा दी है. बाहरी वाहन भी कुंभ मेला क्षेत्र में नहीं आ पाएंगे. एजेंसी के अनुसार, सरकार ने सीनियर IAS अधिकारी अशीष गोयल और भानु चंद्र गोस्वामी को प्रयागराज भेजा है, जो अर्धकुंभ 2019 के दौरान प्रशासनिक टीम का हिस्सा थे. ये दोनों अधिकारी क्राउड मैनेजमेंट और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय के साथ महाकुंभ की जिम्मेदारी संभालेंगे. इनकी नियुक्ति मेले के मुख्य अधिकारी विजय किरण आनंद के साथ की गई है. ये अधिकारी अब महाकुंभ के दौरान सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था देखेंगे. पुलिस महानिरीक्षक केपी सिंह ने कहा कि अमृत स्नान जैसे बड़े आयोजनों का सुचारू संचालन सुनिश्चित होगा. महाकुंभ के दौरान कानून-व्यवस्था की मजबूती के लिए सरकार ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भी तैनाती की है. इसके तहत चार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और तीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को जिम्मेदारी दी गई है. इनमें देवरिया के वर्तमान एसपी दीपेंद्र नाथ चौधरी, भ्रष्टाचार निरोधक विभाग के लक्ष्मीनिवास मिश्रा, प्रशासनिक अधिकारी राजधारी चौरसिया और कानपुर नगर के डीसीपी श्रवण कुमार सिंह प्रमुख रूप से शामिल हैं. इनके अलावा, तीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षकों को क्राउड मैनेजमेंट और सुरक्षा रणनीति को बेहतर बनाने के लिए विशेष जिम्मेदारी दी गई है. इनमें कानून-व्यवस्था के अतिरिक्त महानिदेशक के स्टाफ अधिकारी विकास चंद्र त्रिपाठी, बस्ती में तैनात ओमप्रकाश सिंह और श्रावस्ती के प्रवीण कुमार यादव प्रमुख हैं. सुरक्षा और व्यवस्था में उठाए गए कदम महाकुंभ में लाखों की संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं, जिसे देखते हुए ये व्यवस्थाएं की जा रही हैं. प्रमुख घाटों और संगम क्षेत्र में भीड़ नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था की जा रही है. भीड़ की आवाजाही को सुव्यवस्थित करने के लिए नए रास्ते बनाए जा रहे हैं. इमरजेंसी रिस्पॉस सिस्टम को मजबूत किया गया है, ताकि किसी भी स्थिति में तत्काल कार्रवाई हो सके. विभिन्न एजेंसियों के बीच सुरक्षा समन्वय मजबूत किया गया है. भीड़ की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. अत्यधिक भीड़भाड़ से बचने के लिए मजबूत बैरिकेडिंग और एंट्री कंट्रोल के उपाय किए गए हैं. प्रमुख स्थानों पर पुलिस गश्त को बढ़ाया गया है. महाकुंभ 13 जनवरी से 26 फरवरी तक चलेगा. अब तक 30 करोड़ से अधिक श्रद्धालु महाकुंभ में शामिल हो चुके हैं. अनुमान लगाया जा रहा है कि यह संख्या 45 करोड़ तक पहुंच सकती है. बता दें कि बुधवार तड़के संगम नोज क्षेत्र में मची भगदड़ में 30 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी और 60 लोग घायल हुए थे. ये लोग मौनी अमावस्या पर गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदी के संगम में स्नान के लिए पहुंचे थे.   recent visitors 62

बस्तर संभाग में लगातार नक्सलियों द्वारा किये जा रहे आत्मसमर्पण पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुरक्षाबल के जवानों को दी बधाई

रायपुर हमारी नीति स्पष्ट है – बोली का जवाब बोली से और गोली का जवाब गोली से। जो भी नक्सली आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए हमारी सरकार द्वारा बेहतर जीवन और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। जो हिंसा का रास्ता छोड़ गणतंत्र का मार्ग अपनाते हैं, उनका स्वागत है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर संभाग के अलग-अलग जिलों में लगातार नक्सलियों द्वारा किये जा रहे आत्मसमर्पण पर सुरक्षाबल के जवानों को बधाई देते हुए, उनके अदम्य साहस को नमन करते हुए कहा कि – आज कांकेर जिले में 7 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिन पर कुल 32 लाख रुपए का इनाम घोषित था। इससे पहले नारायणपुर जिले के 27 एवं सुकमा जिले के 52 लाख के ईनामी 9 नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। यह हमारी सरकार की प्रभावी आत्मसमर्पण नीति और नक्सलवाद के सफाए के लिए लगातार चलाए जा रहे अभियानों का प्रत्यक्ष परिणाम है। सीएम साय ने कहा कि अब तक 941 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि 1,112 नक्सलियों को हमारे सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार किया है। नक्सली मुठभेड़ों में 265 नक्सलियों का खात्मा हुआ है। नक्सलवाद की खोखली विचारधारा से त्रस्त होकर और बेहतर जीवन की उम्मीद में नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं। यह इस बात का संकेत है कि नक्सलवाद अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मैं अपने बस्तर दौरे के दौरान अक्सर आत्मसमर्पित नक्सलियों से मिलता हूं। उनसे बातचीत में यह साफ झलकता है कि खोखली माओवादी विचारधारा को छोड़कर वे आज बेहतर जीवन जी रहे हैं और खुश हैं। घोर नक्सल प्रभावित जिलों के चिन्हित ग्रामों में नक्सल आधार को खत्म करने के लिए शासकीय योजनाओं के माध्यम से बुनियादी ढांचे और मूलभूत आवश्यकताओं का विकास कर रही है। विष्णु देव साय ने कहा कि आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल पीड़ित परिवारों के लिए  15 हजार प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं। तय समय-सीमा के भीतर माओवाद के आतंक का अंत होगा। बस्तर में जल्द ही अमन, चैन और शांति का माहौल स्थापित होगा। recent visitors 65

सरकार की कमाई और खर्च का विवरण सिर्फ सदन के पटल पर रखा जा सकता है : मनीष तिवारी

 नई दिल्ली संसद में केंद्रीय बजट पेश होने से कुछ घंटे पहले ही कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने बजट प्रक्रिया की आलोचना की. उन्होंने इसे एक 'अकाउंटिंग एक्सरसाइज' बताया. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर एक पोस्ट में मनीष तिवारी ने इसे 'राष्ट्रपति के अभिभाषण की तरह यूजलेस' बताया. मनीष तिवारी ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'बजट क्या है… यह एक अकाउंटिंग एक्सरसाइज से ज्यादा कुछ नहीं है. सरकार ने कितना कमाया और कितना खर्च किया. पिछले कुछ वर्षों में यह वित्त मंत्री के लिए एक वार्षिक भव्य अनुष्ठान बन गया है.' उन्होंने लिखा, 'यह प्रेसिडेंट एड्रेस की तरह ही एक यूजलेस रिचुअल है. सरकार की कमाई और खर्च का विवरण सिर्फ सदन के पटल पर रखा जा सकता है.' 'राष्ट्रपति को अपने मन की बात कहने देना चाहिए' इससे पहले शुक्रवार को उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण की आलोचना करते हुए एक पोस्ट में लिखा, 'दुर्भाग्यवश, राष्ट्रपति का अभिभाषण सरकार की कथित उपलब्धियों की लंबी-चौड़ी सूची को दोहराने से अधिक कुछ नहीं है. राष्ट्रपति को इस वार्षिक शर्मिंदगी से बचना चाहिए. भारत के माननीय राष्ट्रपति को अपने मन की बात कहने की अनुमति दी जानी चाहिए.'   11 बजे बजट पेश करेंगी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज देश का आम बजट पेश होने वाला है और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार आठवां बजट पेश करने वाली हैं. सुबह 11 बजे Budget 2025 डॉक्युमेंट संसद के पटल पर रखा जाएगा. शुक्रवार को बजट सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा है कि ये ऐतिहासिक बजट होगा. वहीं दूसरी ओर आम से लेकर खास को इससे खासी उम्मीदें हैं.   recent visitors 58

वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की नवीन पदस्थापना

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने एक बार फिर आईएएस अधिकारियों की नवीन पदस्थापना की है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार वरिष्ठ आईएएस अधिकारी जेएन कांसोटिया (1989) को गृह विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के अनुसार जेएन कांसोटिया (1989) महानिदेशक, आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, मध्यप्रदेश भोपाल को अपर मुख्य सचिव गृह विभाग में भेजा गया है। वहीं अनिरूद्ध मुकर्जी (1993), आवासीय आयुक्त, मध्यप्रदेश भवन, नई दिल्ली तथा प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश राज्य परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी, भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) की नवीन पदस्थापना अध्यक्ष राजस्व मण्डल, मध्यप्रदेश ग्वालियर तथा अपर मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश शासन, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश राज्य परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी, भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) के पद पर की गई है। सचिन सिन्हा (1995), प्रशासकीय सदस्य, राजस्व मण्डल, मध्यप्रदेश, ग्वालियर तथा अध्यक्ष, राजस्व मण्डल, मध्यप्रदेश, ग्वालियर (अतिरिक्त प्रभार) की नवीन पदस्थापना वि.क.अ. सह-महानिदेशक, आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, मध्यप्रदेश भोपाल में की गई है। इसके अलावा श्रीमती रश्मि अरूण शमी (1994) प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग तथा विशेष आयुक्त (समन्वय), मध्यप्रदश भवन, नई दिल्ली तथा प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, महिला एवं बाल विकास विभाग (अतिरिक्त प्रभार) को अपने वर्तमान कर्त्तव्यों के साथ-साथ अस्थाई रूप से आगामी आदेश तक आवासीय आयुक्त, मध्यप्रदेश भवन, नई दिल्ली का प्रभार अतिरिक्त रूप से सौंपा गया है।   recent visitors 64

स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह ने वृद्धजन एवं दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण किये वितरित

भोपाल स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि राज्य और केन्द्र सरकार वृद्धजनों और दिव्यांगजनों के स्वास्थ्य का ख्याल रख रही है। उन्होंने कहा कि नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा विधानसभा क्षेत्र में कौंडिया से कामती तक 100 करोड़ रुपये लागत का बायपास रोड मंजूर हो चुका है। इसी के साथ गाडरवारा में रेलवे फाटक पर फ्लाई-ओवर बनाया जा रहा है, इससे नगर का यातायात सुगम होगा। स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह शुक्रवार को गाडरवारा और ग्राम सालीचौका में वृद्धजन और दिव्यांगजनों को उपकरण वितरित करने के बाद नागरिकों को संबोधित कर रहे थे। गाडरवारा और सालीचौका के कार्यक्रमों में 396 वृद्धजनों और दिव्यांगजनों को 595 सहायक उपकरण वितरित किये गये। मंत्री सिंह ने कहा कि दिव्यांगजनों के प्रति जन-सामान्य में मदद का भाव होना चाहिये। उन्होंने कहा कि निर्धन वर्ग का परिवार अपनी बेटी का विवाह सरलता से कर सके, इसके लिये जिले में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किये जाएंगे। पात्र हितग्राहियों को 55 हजार रुपये की राशि दी जायेगी। मंत्री सिंह ने योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया। शिविर में दिव्यांगजनों को ट्रायसिकल, व्हील-चेयर, वॉकिंग-स्टिक, ब्रेल किट, श्रवण यंत्र सहित अन्य उपकरण वितरित किये गये।   recent visitors 47

हमीदिया अस्पताल को मिलेंगे 3 करोड़ 45 लाख रुपये लागत के अत्याधुनिक गैस्ट्रोएंटरोलॉजी उपकरण

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने अभूतपूर्व प्रगति की है। गांधी मेडिकल कॉलेज और हमीदिया अस्पताल में अत्याधुनिक गैस्ट्रोएंटरोलॉजी उपकरणों की स्थापना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारा लक्ष्य है कि शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों को अत्याधुनिक उपकरणों और उन्नत चिकित्सा सेवाओं से सुसज्जित किया जाए। राज्य के प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवा प्राप्त हो सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि राज्य सरकार मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों को भी ऐसे उन्नत उपकरणों से लैस करने की योजना पर कार्य कर रही है। उन्होंने चिकित्सकों से इन सुविधाओं का उपयोग कर राज्य के नागरिकों को श्रेष्ठ चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के निर्देश दिये हैं। गांधी मेडिकल कॉलेज और हमीदिया अस्पताल में 3 करोड़ 45 लाख रुपये लागत के अत्याधुनिक गैस्ट्रोएंटरोलॉजी उपकरणों की स्थापना की स्वीकृति दी गयी है। इनमें एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EUS), एसोफेजियल मैनोमेट्री, पीएच मैट्री और ब्रीथ एनालाइज़र जैसी तकनीकें शामिल हैं। यह उन्नत सुविधाएँ किसी भी सरकारी अस्पताल में पहली बार उपलब्ध कराई गई हैं। इन नवीन उपकरणों की मदद से पाचन तंत्र की गंभीर बीमारियों की सटीक और त्वरित पहचान संभव हो सकेगी। अब मध्य प्रदेश के मरीजों को उन्नत और सटीक गैस्ट्रोएंटरोलॉजी उपचार के लिए अन्य राज्यों या निजी अस्पतालों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी। उपकरणों का विवरण     एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EUS): पेट और आंतों की गहराई से जांच कर कैंसर, पैंक्रियास की बीमारियों और अन्य गंभीर समस्याओं का जल्द पता लगाने में मदद करता है।     एसोफेजियल मैनोमेट्री: निगलने में होने वाली समस्याओं के सही निदान में सहायक।     पीएच मैट्री: एसिडिटी और रिफ्लक्स से जुड़ी बीमारियों के सटीक निदान के लिए उपयोगी।     ब्रीथ एनालाइज़र: एक दर्द-रहित जांच जो आंतों में बैक्टीरिया की अधिकता और लैक्टोज असहिष्णुता जैसी समस्याओं का पता लगाने में मदद करता है।   recent visitors 41

जीसीसी नीति लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बना मध्यप्रदेश, तकनीकी उत्कृष्टता का केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने भारत की पहली समर्पित ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) नीति 2025 लागू की है। इससे राज्य नवाचार और तकनीकी उत्कृष्टता का केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर हो गया है। यह नीति भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे टियर-2 शहरों को वैश्विक परिचालन केंद्रों के रूप में विकसित करने का मार्ग प्रशस्त करेगी, जिससे भारत में विस्तार की चाह रखने वाले व्यवसायों को प्रतिस्पर्धी लाभ मिलेगा। आईटी, आईटीईएस और ईएसडीएम इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी-2023 की सफलता को आगे बढ़ाते हुए यह नई नीति मध्यप्रदेश को एक सशक्त जीसीसी ईको सिस्टम प्रदान करने और राज्य को भारत के तकनीकी विकास में अग्रणी बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। हाल ही में इस नीति को कैबिनेट की स्वीकृति मिल चुकी है, जो इसके रणनीतिक महत्व और प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाती है। भारत पहले से ही वैश्विक जीसीसी परिदृश्य में अग्रणी है, जहां इसका 50% से अधिक बाजार हिस्सेदारी है और 2023 में यह सेक्टर 46 अरब डॉलर का था, जो 2030 तक 110 अरब डॉलर से अधिक होने की संभावना है। वर्तमान में भारत में 1,600 से अधिक जीसीसी परिचालन में हैं, जहां 19 लाख से अधिक पेशेवर कार्यरत हैं और 2030 तक यह संख्या 45 लाख तक पहुंचने की उम्मीद है। मध्यप्रदेश के लिए यह क्षेत्र में प्रवेश करने का उपयुक्त समय है, जिससे वह 2030 तक अनुमानित 2,400 से अधिक जीसीसी केंद्रों में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी प्राप्त कर सकेगा। जीसीसी नीति के तहत प्रमुख फोकस सेक्टर मध्यप्रदेश की जीसीसी नीति में पारंपरिक परिचालन के लिए लेवल-1 जीसीसी और उच्च-मूल्य नवाचार के लिए एडवांस जीसीसी को लक्षित किया गया है। नीति आईटी/आईटीईएस, ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल्स, जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम और अन्य तकनीकी क्षेत्रों पर केंद्रित है। राज्य में 5 विशेष आर्थिक क्षेत्र और 15 से अधिक आईटी पार्क हैं, जो उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और अन्य क्षेत्रों के लिए समर्पित उत्कृष्टता केंद्रों से सुसज्जित हैं। मध्यप्रदेश की स्वच्छतम शहरों में पूरे वर्ष कम वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) दर्ज किया जाता है, जिससे श्रेष्ठ जीवनशैली और कार्य-जीवन संतुलन सुनिश्चित होता है। यहां कम यात्रा समय और किफायती जीवनयापन के कारण पेशेवरों और व्यवसायों के लिए यह आदर्श स्थान बनता जा रहा है। स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य की कुल स्थापित क्षमता का 27% नवकरणीय ऊर्जा स्रोतों से आता है और ओपन एक्सेस नीतियों के तहत उद्योगों को इसका अधिकतम लाभ मिल रहा है। मध्यप्रदेश में निवेश और व्यवसायों की स्थापना को सरल बनाने के लिए "नो क्वेरी पोर्टल" के माध्यम से सिंगल विंडो क्लियरेंस की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। निवेशकों को मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के माध्यम से व्यापक सहायता प्रदान की जाती है। मध्यप्रदेश में व्यवसाय संचालन की लागत मेट्रो शहरों की तुलना में काफी कम है, जहां कार्यालय स्थान पर 50% तक की बचत, संचालन लागत में 55% तक की कमी और रहने की लागत 60% तक कम है, जिससे यह कंपनियों और पेशेवरों के लिए एक आकर्षक स्थान बनता जा रहा है। राज्य की नई नीति के तहत कंपनियों को विभिन्न प्रोत्साहन दिए जाएंगे, जिसमें 40% पूंजीगत सब्सिडी (अधिकतम 30 करोड़ रुपये तक), किराया सहायता और पेरोल सब्सिडी शामिल हैं। इसके अलावा, अपस्किलिंग व री-स्किलिंग के लिए प्रतिपूर्ति, मार्केटिंग सहायता, पेटेंट फाइलिंग और आर एण्ड डी खर्चों पर अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्यप्रदेश की यह नीति सिर्फ एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि भविष्य का वादा, सतत विकास का रोडमैप और तकनीकी क्रांति में अग्रणी बनने का संकल्प है। जीसीसी नीति-2025 के माध्यम से राज्य भारत के तकनीकी नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी प्रमुख भूमिका सुनिश्चित कर रहा है। recent visitors 52