मध्यप्रदेश शासन वन विभाग द्वारा राष्ट्रीय उद्यान-जू में अनुभूति कार्यक्रम का आयोजन

भोपाल मध्यप्रदेश शासन वन विभाग द्वारा अनुभूति कार्यक्रम 2024-25 के अंतर्गत स्कूली विद्यार्थियों को वन, वन्यप्राणी एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति अनुभूति कराकर उनके संरक्षण हेतु जागरूक करना एवं सहभागिता हेतु प्रेरित करने के साथ-साथ वन विभाग एवं विभागीय कार्यों, उत्तरदायित्वों एवं चुनौतियों से विद्यार्थियों को अवगत कराने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड के समन्वय से "मैं भी बाघ" और "हम हैं बदलाव" थीम पर आयोजित प्रशिक्षण सह जागरूकता शिविर वत्त विहार राष्ट्रीय उद्यान में आज 19 दिसम्बर को आयोजित किया गया, जिसमें शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ उच्चतर माध्यमिक विद्यलाय भोपाल के दृष्टि बाधित 15, श्रवण बाधित 83, बौद्धिक विकलांग 11 एवं मूकबधिर 6 विद्यार्थियों सहित कुल 115 विद्यार्थियों एवं 7 शिक्षकों ने भाग लिया। अनुभूति कार्यक्रम के मास्टर ट्रेनर के रूप में डॉ. एस.आर. वाघमारे, सेवा निवृत उप वन संरक्षक एवं डॉ. एस.आर. वाघमारे, सेवा निवृत उप वन संरक्षक उपस्थित रहे। साथ ही श्री विजय नंदवंशी बायोलॉजिस्ट भी उपस्थित रहे। इस दौरान संचालक वन विहार श्री मीना अवधेशकुमार शिवकुमार, सहायक संचालक वन विहार श्री एस.के. सिन्हा एवं अन्य अधिकारी कर्मचारी भी उपस्थित रहे। शिविर में सम्मिलित हुये प्रत्येक बच्चे को अनुभूति बुक, अनुभूति बैग, केप, वन विहार के ब्रोशर के साथ-साथ जलीय पक्षी, स्थलीय पक्षी, तितली प्रजाति, गिद्ध कुंजी के ब्रोशर भी प्रदान किये गये। कार्यक्रम की शुरूआत दिव्यांग बच्चों द्वारा राष्ट्रगान से की गई। विद्यार्थियों को मास्टर ट्रेनर एवं नवीन प्रेरकों द्वारा पक्षी दर्शन, वन्यप्राणी दर्शन, प्रकृति पथ भ्रमण, स्थल पर विद्यमान वानिकी गतिविधियों एवं फूड चैन की जानकारी प्रदान की गई। साथ ही फूड वेब, फूड चेन सम्बंधित खेल, खेलकर जानकारी प्राप्त की। वन, वन्यप्राणी व पर्यावरण से संबंधित रोचक गतिविधियों कराई गई एवं जानकारी प्रदान कर उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया गया। इसी प्रकार दृष्टि दिव्यांग बच्चों ने चिड़ियों और वन्यप्राणियों की आवाज सुनकर उनकी पहचान की तथा शाकाहारी वन्यप्राणियों के सींग, एंटलर एवं वन्यप्राणियों के मॉडल को छूकर उन्हें समझा। कार्यक्रम के अंत में दिव्यांग बच्चों द्वारा एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर संचालक वन विहार श्री मीना अवधेश कुमार शिवकुमार द्वारा शिविर में सम्मिलित बच्चों को शपथ दिलाई गई एवं पुरस्कार तथा प्रमाण-पत्र वितरण किये गये। अनुभूति कार्यक्रम के अंतर्गत आगामी शिविर 26 दिसम्बर 2024 को वन विहार में आयोजित किया जावेगा।   recent visitors 67

जान बचाने के लिए 14 करोड़ की जरूरत, इलाज का खर्च उठाने की मांग, सुप्रीम कोर्ट में 11 महीने की बच्ची की गुहार

नई दिल्ली भावुक याचिका दायर की गई है, जिसमें 11 महीने की एक बच्ची के इलाज के लिए 14 करोड़ रुपये की आवश्यकता की बात की गई है। बच्ची स्पाइनल मस्क्युलर अट्रोफी (SMA) नामक एक दुर्लभ और खतरनाक बीमारी से जूझ रही है, जो अगर समय रहते इलाज न किया जाए तो 24 महीने की उम्र तक जानलेवा हो सकती है। इस बीमारी में बच्चों की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे सांस लेने में परेशानी होती है और शरीर के अन्य अंगों का कार्य प्रभावित होता है। इस गंभीर स्थिति में बच्ची को बचाने के लिए उसकी मां ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। स्पाइनल मस्क्युलर अट्रोफी (SMA) क्या है? स्पाइनल मस्क्युलर अट्रोफी (SMA) एक जीन से संबंधित बीमारी है, जिसमें मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली तंत्रिका कोशिकाओं में कमी आ जाती है। इससे मांसपेशियों की ताकत घटने लगती है और धीरे-धीरे मांसपेशियां कार्य करना बंद कर देती हैं। SMA के विभिन्न प्रकार होते हैं, जिनमें से सबसे गंभीर प्रकार में बच्चे की मौत 2 साल की उम्र से पहले हो सकती है। इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में **ज़ोलजेंस्मा** नामक एक इंजेक्शन को इस बीमारी के इलाज के लिए मंजूरी दी गई है, जो बेहद महंगा है और इसका असर बच्चे की स्थिति को स्थिर करने और मांसपेशियों को फिर से सक्रिय करने में मदद करता है। क्या है याचिका में मांग? याचिका में बच्ची की मां ने सुप्रीम कोर्ट से यह अपील की है कि उनकी बच्ची को इलाज के लिए ज़ोलजेंस्मा इंजेक्शन की तत्काल आवश्यकता है, जिसकी कीमत 14 करोड़ 20 लाख रुपये है। दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने इस इंजेक्शन के लिए यही राशि निर्धारित की है, जो एक सामान्य परिवार के लिए जुटाना नामुमकिन है। याचिका में बताया गया है कि इस इंजेक्शन के बिना बच्ची की जान को गंभीर खतरा है, और समय की कमी के कारण किसी प्रकार की देरी से उसकी जान जा सकती है। क्या कहती है बच्ची के परिवार की स्थिति? याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि बच्ची के पिता भारतीय वायुसेना में एक नॉन-कमीशंड अधिकारी हैं। वायुसेना में सैनिकों और उनके आश्रितों के इलाज के लिए एक प्रावधान है, लेकिन दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए दी जाने वाली वित्तीय सहायता में इस बीमारी का इलाज शामिल नहीं है। इस कारण से बच्ची के परिवार को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। सैनिकों के बीच क्राउड फंडिंग (आपसी चंदे से राशि जुटाने) के लिए उच्च अधिकारियों ने अनुमति देने से मना कर दिया। याचिकाकर्ता ने उदाहरण देते हुए बताया कि बीकानेर में एक अन्य बच्चे के इलाज के लिए, जो इसी बीमारी से पीड़ित था, उसके शिक्षक पिता ने विभाग से कर्मचारियों के वेतन से कुछ राशि काटने की अनुमति ली थी, ताकि इलाज के लिए आवश्यक राशि जुटाई जा सके। लेकिन वायुसेना के अधिकारियों ने इस तरह की पहल को अस्वीकार कर दिया और सैनिकों को किसी प्रकार का संदेश भेजने की अनुमति भी नहीं दी। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से क्या राहत मांगी? याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वह केंद्र सरकार को आदेश दे कि वह बच्ची के इलाज का खर्च उठाए। साथ ही, उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि कोर्ट रक्षा मंत्रालय और वायुसेना प्रमुख को निर्देश दे कि वे सैनिकों को क्राउड फंडिंग के लिए संदेश भेजने की अनुमति दें, ताकि बच्ची का इलाज संभव हो सके। याचिकाकर्ता ने यह भी अपील की है कि केंद्र सरकार ज़ोलजेंस्मा इंजेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए, ताकि इलाज में कोई देरी न हो। याचिका में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून की नज़र में समानता) और अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का हवाला भी दिया गया है, जिसमें यह कहा गया है कि अगर समय रहते इलाज नहीं किया गया, तो बच्ची की जान को खतरा हो सकता है, और उसे इस दुर्लभ बीमारी से बचाने के लिए त्वरित कदम उठाए जाने चाहिए। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह आग्रह किया है कि वह इस मामले में तुरंत दखल दे और बच्ची को जीवन बचाने का अधिकार दिलवाए। सुप्रीम कोर्ट का संभावित कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर त्वरित सुनवाई की आवश्यकता जताई और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है कि वह इस गंभीर स्थिति में बच्ची के इलाज के लिए कैसे मदद करेगा। इस मामले में अदालत का निर्णय बेहद महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह न केवल एक बच्चे की जिंदगी से जुड़ा है, बल्कि यह देश के स्वास्थ्य और अधिकारों के बुनियादी सिद्धांतों को भी चुनौती देता है। भारत में दुर्लभ बीमारियों का इलाज और उसकी लागत इस मामले से एक बार फिर यह तथ्य सामने आया है कि भारत में दुर्लभ बीमारियों का इलाज अत्यधिक महंगा है, और सरकारी योजनाओं के तहत ऐसी बीमारियों के इलाज के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान नहीं किया गया है। ज़ोलजेंस्मा इंजेक्शन की कीमत इतनी अधिक है कि इसे एक सामान्य परिवार के लिए वहन करना संभव नहीं है। यह मुद्दा यह भी उजागर करता है कि सरकारी संस्थाओं और स्वास्थ्य मंत्रालयों को इस तरह की गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए कुछ ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। साथ ही, यह भी साबित करता है कि ऐसे मामलों में क्राउड फंडिंग जैसी मदद से इलाज के खर्च को पूरा करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन सरकारी समर्थन का अभाव महसूस किया जा रहा है।  recent visitors 53

प्रदेश में जनजातीय विकास के लिये सामाजिक, आर्थिक प्रगति की लिखी जा रही नई इबारत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में जनजातीय विकास के लिये सामाजिक और आर्थिक प्रगति की नई इबारत लिखी जा रही है। प्रदेश सरकार द्वारा जनजातीय वर्ग के उत्थान के लिए चलाई जा रही योजनाओं और कार्यक्रमों से राज्य में जनजातीय समुदाय के सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और आर्थिक जीवन में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार के सतत् प्रयासों से यहाँ के जनजातीय समुदाय अब प्रगति की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह विकास न केवल राज्य के लिए बल्कि देश के लिए भी एक प्रेरणा है। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) के जरिए प्रदेश की तीन विशेष पिछड़े जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के समग्र विकास एवं कल्याण के लिए अभूतपूर्व काम हो रहा है। मध्यप्रदेश पीएम जन-मन के क्रियान्वयन में देश में अव्वल स्थान पर है। ड्रॉप-आउट में कमी और रोजगार में वृद्धि राज्य में शिक्षा संबंधी प्रोत्साहन योजनाओं के प्रभाव से जनजातीय विद्यार्थियों की साक्षरता दर 51 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। उच्च शिक्षा के लिए शत-प्रतिशत छात्रवृत्ति मिलने से छात्रों के ड्रॉप-आउट में उल्लेखनीय कमी आई है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के शिक्षण संस्थानों में जनजातीय छात्रों की भागीदारी में वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही सरकार के प्रयासों से अब युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हो रहे हैं। स्वरोजगार और ऋण योजनाओं का लाभ सरकार द्वारा चलाई जा रही स्वरोजगार और आर्थिक कल्याण योजनाओं से जनजातीय हितग्राहियों को बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराए गए हैं। इससे वे विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर बेहतर जीवन यापन कर रहे हैं, माध्यम से वे अपने रोजगार सफलतापूर्वक चला रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है। वन अधिकार अधिनियम से मिला भूमि का अधिकार वन अधिकार अधिनियम-2006 के प्रभावी क्रियान्वयन से लगभग 2 लाख 75 हजार जनजातीय परिवारों को उनकी जमीनों पर अधिकार प्रदान किया गया है। इससे उन्हें अपनी भूमि पर खेती करने और जीवन स्तर को सुधारने का मौका मिला है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सम्मान जनजातीय अनुसंधान और विकास संस्थान द्वारा स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले जनजातीय सेनानियों की वीर गाथाओं को संरक्षित करने के लिए म्यूजियम बनाए गए हैं। यह पहल न केवल उनके बलिदान को सम्मानित करती है, बल्कि युवा पीढ़ी को प्रेरित भी करती है। साहूकारों से मिली आजादी मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति साहूकार विनियम 1972 को 2021 में संशोधित कर लागू किया गया, जिससे जनजातीय समुदाय को गैरकानूनी साहूकारों के शोषण से मुक्ति मिली है। आधुनिक सुविधाओं का विस्तार जनजातीय क्षेत्रों में कृषि, सिंचाई, विद्युत, सड़क, और संचार सुविधाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, जिससे इन क्षेत्रों का विकास तीव्र गति से हो रहा है।   recent visitors 102

बालासोर से सांसद प्रताप सारंगी और फर्रुखाबाद से सांसद मुकेश राजपूत को चोटें आई हैं, पीएम ने पूछा हाल-चाल

नई दिल्ली संसद भवन के बाहर हुई धक्का-मुक्की में भाजपा के दो सांसद घायल हुए हैं। बालासोर से सांसद प्रताप सारंगी और फर्रुखाबाद से सांसद मुकेश राजपूत को चोटें आई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों सांसदों को फोन करके उनसे हाल-चाल पूछा है। बता दें कि प्रताप सारंगी ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने एक अन्य सांसद को धक्का मारा। इसके बाद वह सांसद प्रताप सारंगी के ऊपर गिर पड़े। इससे प्रताप सारंगी के माथे पर गहरी चोटें लगी हैं। बाद में पता चला कि सांसद मुकेश राजपूत को भी चोट लगी है। दोनों सांसद फिलहाल आईसीयू में भर्ती हैं। इस बीच भाजपा ने कांग्रेस और राहुल गांधी के ऊपर हमला बोला है। भाजपा इस मामले में कानूनी रास्ता भी देख रही है। वहीं, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने संवाददाताओं से बातचीत में कहाकि राहुल गांधी मारपीट करने के लिए बीच में घुसे थे। उनका व्यवहार मानो गुंडे का व्यवहार था, यह देश गुंडे को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने हमारे एक बुजुर्ग सांसद को धक्का देकर गिरा दिया। गौरतलब है कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने बाबासाहेब आंबेडकर पर टिप्पणी को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ संसद परिसर में प्रदर्शन किया। वहीं भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों ने मुख्य विपक्षी दल पर संविधान निर्माता के अपमान का आरोप लगाते हुए विरोध जताया। सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच कथित तौर धक्का-मुक्की भी हुई। भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने धक्का-मुक्की की जिसमें उसके सांसद प्रताप सारंगी के सिर पर चोट लग गई। दूसरी तरफ, राहुल गांधी ने दावा किया कि भाजपा सांसदों ने उन्हें संसद भवन में जाने से रोका और धक्का-मुक्की की। राहुल गांधी ने कहाकि मैं अंदर जाने की कोशिश कर रहा था। भाजपा के सांसद मुझे रोकने की कोशिश कर रहे थे, मुझे धमका रहे थे। अक्सर सफेद रंग टी-शर्ट पहनने वाले राहुल गांधी गुरुवार को नीले रंग की टी-शर्ट पहनकर संसद पहुंचे। उन्होंने कहा कि मुख्य मुद्दा यह है कि संविधान और बाबासाहेब की स्मृति का अपमान हुआ है। recent visitors 85

भाजपा ने आतिशी का आरक्षण पर एक पुराना बयान निकालकर बड़ा पलटवार किया, चुनाव में आंबेडकर पर घमासान

नई दिल्ली दिल्ली में विधानसभा चुनाव से पहले बाबा साहब भीमराव आंबेडकर को लेकर घमासान छिड़ गया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर आंबेडकर के अपमान का आरोप लगाकर आम आदमी पार्टी (आप) और इसके मुखिया अरविंद केजरीवाल बेहद आक्रामक हैं। इस बीच भाजपा ने दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी का आरक्षण पर एक बुराना बयान निकालकर बड़ा पलटवार किया है। भाजपा ने 10 साल पुराने बयान की याद दिलाकर 'आप' पर आरक्षण और दलित विरोधी होने का आरोप लगाया है। दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आतिशी के पुराने ट्वीट के स्क्रीनशॉट को साझा करते हुए एक्स पर लिखा, 'आम आदमी पार्टी ने हमेशा से आरक्षण के खिलाफ अपनी मानसिकता को जाहिर किया है। मुख्यमंत्री आतिशी का यह ट्वीट इसका सबसे बड़ा प्रमाण है, जिसमें उन्होंने आरक्षण का खुलकर विरोध किया था। यह साफ दर्शाता है कि 'आम आदमी' का झूठा मुखौटा पहनने वाली AAP वास्तव में दलितों, पिछड़ों और वंचितों के हक के खिलाफ काम करती रही है।' भाजपा के और भी नेता और कार्यकर्ता आतिशी का पुराना बयान दिखाकर 'आप' से सवाल दाग रहे हैं। भाजपा इसके साथ हैशटैग 'आप अगेंस्ट रिजर्वेशन' का इस्तेमाल कर रही है। आतिशी का पुराना बयान भाजपा आतिशी के जिस बयान को सामने आई है वह 4 अप्रैल 2014 का है। तब #askatishiaap के जरिए आतिशी एक्स (तब ट्विटर) पर सोशल मीडिया यूजर्स के सवालों का जवाब दे रही थीं। सुधांशु नाम के एक एक्स यूजर ने आतिशी से पूछा, 'नौकरी और उच्च शिक्षा में आरक्षण को लेकर आम आदमी पार्टी की राय क्या है?' इसके जवाब में आतिशी ने जवाब दिया, 'जिन लोगों को आरक्षण का लाभ मिल चुका है, उनकी अगली पीढ़ी को कतार में सबसे पीछे रखना चाहिए।' recent visitors 73

डीआरएम देवाशीष त्रिपाठी ने भोपाल रेलवे स्टेशन के फ़ूड स्टॉल्स का निरीक्षण किया, पाया गया कि स्टॉल्स में खराब खाना परोसा जा रहा

भोपाल भारत में ज्यादातर लोग यात्रा के लिए ट्रेन का सहारा लेते हैं. यातायात का ये साधन सस्ता होने के साथ ही साथ आरामदायक भी होता है. चाहे कम दूरी हो या ज्यादा, रेलवे हर तरह की ट्रेन यात्रियों की सुविधा के लिए चलाता है. रेलवे यात्रियों को यात्रा के दौरान असुविधा ना हो, इसके लिए कैटरिंग का भी इंतजाम किया जाता है. रेलवे स्टेशनों पर वाजिब दाम में नाश्ता, खाना मुहैय्या करवाने के लिए स्टॉल मौजूद है. इन स्टॉल के लिए रेलवे टेंडर निकालता है, जिसे पाने के बाद लोग रेलवे स्टेशन पर दुकान लगाते हैं. यहां यात्रियों को नाश्ता, खाना और स्नैक्स आदि मिल जाता है. इसके अलावा ट्रेवल के दौरान जरुरी चीजें भी मिलती है. लेकिन पिछले कुछ महीनों से भोपाल रेलवे स्टेशन के इन स्टॉल्स में बासी और सड़े खाने की शिकायत मिल रही थी. इसके बाद डीआरएम ने अचानक ही स्टेशन का औचक निरीक्षण किया. छापेमारी से मचा हड़कंप डीआरएम देवाशीष त्रिपाठी ने भोपाल रेलवे स्टेशन के फ़ूड स्टॉल्स का निरीक्षण किया. इसमें पाया गया कि स्टॉल्स में खराब खाना परोसा जा रहा था. स्टॉल्स से बासी नाश्ता, एक्सपायर चिप्स और गंदगी के बीच स्टोर किया गया खाना बरामद किया गया. इसे ही यात्रियों को बेचा जा रहा था. इनके सेवन से कई बीमारियां होने की आशंका थी. बरामद की ऐसी चीजें इस निरीक्षण में टीम ने स्टॉल्स से बासी पोहा, सड़ा उपमा, समोसा, ढोकला, बिरयानी, ऑमलेट, कचोरी आदि बरामद किया. कई दिनों पहले बने इन फ़ूड आइटम्स को गर्म कर बेचा जा रहा था. टीम ने सभी बरामद खाद्य पदार्थों को अपनी निगरानी में नष्ट करवाया. साथ ही स्टॉल संचालकों को आगे से ऐसा ना करने की वार्निंग दी. बता दें कि पिछले कुछ समय से भोपाल रेलवे स्टेशन पर कई यात्रियों ने स्टॉल संचालक द्वारा बासी खाना देने की शिकायत की थी. उसी पर ये कार्यवाई की गई. recent visitors 114

छपरा – एलएलटी, अयोध्या कैंट तुलसी एक्सप्रेस सहित 12 ट्रेनों के रूट डायवर्ट

भोपाल  उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के बाराबंकी-अयोध्या कैंट-जफराबाद खंड पर कार्य किया जा रहा है। ऐसे में अयोध्या कैंट स्टेशन पर यार्ड रिमाडलिंग कार्य के चलते भोपाल मंडल से गुजरने वाली कुछ ट्रेनों को मार्ग परिवर्तित किया गया है। ट्रेन 15023 गोरखपुर – यशवंतपुर एक्सप्रेस 24, 31 दिसंबर एवं सात जनवरी को एवं ट्रेन 15024 यशवंतपुर – गोरखपुर एक्सप्रेस 19, 26 दिसंबर एवं दो जनवरी को अपने प्रारंभिक स्टेशन से प्रस्थान करने वाली ट्रेन परिवर्तित मार्ग से होकर जाएगी। यह ट्रेन दोनों दिशाओं में पूर्व मार्ग के बजाय गोरखपुर-गोंडा-बाराबंकी होकर जाएगी। छपरा-एलएलटी एक्सप्रेस ट्रेन 15101 छपरा – एलएलटी एक्सप्रेस 24 एवं 31 दिसंबर को एवं ट्रेन 15102 एलएलटी – छपरा एक्सप्रेस 19 एवं 26 दिसंबर को अपने प्रारंभिक स्टेशन से प्रस्थान करने वाली ट्रेन परिवर्तित मार्ग से होकर जाएगी। यह गाड़ी दोनों दिशाओं में पूर्व मार्ग के बजाय छपरा-गोरखपुर-गोंडा- बाराबंकी-ऐशबाग-कानपुर सेंट्रल होकर जाएगी। एलटीटी-अयोध्या कैंट तुलसी एक्सप्रेस ट्रेन 22129 एलटीटी-अयोध्या कैंट तुलसी एक्सप्रेस 22, 24, 29, 31 दिसंबर एवं पांच जनवरी को एवं ट्रेन 22130 अयोध्या कैंट – एलटीटी एक्स. 23, 25, 30 दिसंबर तथा एक एवं छह जनवरी को सुल्तानपुर स्टेशन से प्रारंभ और समाप्त होगी। एलटीटी- अयोध्या कैंट एक्सप्रेस ट्रेन 22183 एलटीटी- अयोध्या कैंट एक्सप्रेस 18, 21, 25, 28 दिसंबर एवं एक व चार जनवरी को एवं ट्रेन 22184 अयोध्या कैंट – एलटीटी एक्सप्रेस 19, 22, 26, 29 दिसंबर तथा दो व पांच जनवरी को सुल्तानपुर स्टेशन से प्रारंभ और समाप्त होगी। ट्रेन 22103 एलटीटी -अयोध्या कैंट एक्सप्रेस 23, 30 दिसंबर एवं छह जनवरी को एवं ट्रेन 22104 अयोध्या कैंट – एलटीटी एक्सप्रेस 24, 31, दिसंबर एवं सात जनवरी को अपने प्रारंभिक स्टेशन से प्रस्थान करने वाली ट्रेन परिवर्तित मार्ग से होकर जाएगी। यह गाड़ी दोनों दिशाओं में जफराबाद-जौनपुर सिटी-सुल्तानपुर होकर जाएगी। recent visitors 71