लालकुआं से बांद्रा के लिए सुपरफास्ट ट्रेन को सीएम धामी ने दिखाई हरी झंडी

नैनीताल उत्तराखंड के लालकुआं से बांद्रा के लिए सुपरफास्ट रेलगाड़ी (ट्रेन) शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअली इस ट्रेन को सोमवार को हरी झण्डी दिखाई। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बाबा कैंची धाम के आशीर्वाद से आज लालकुंआ से बांद्रा के मध्य ट्रेन संचालन का सपना पूरा हुआ है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस ट्रेन के संचालन से रामपुर, मुदादाबाद, गाजियाबाद, हजरत निजामुदीन, मथुरा, सवाई माधोपुर, कोटा, वडोदरा सूरत के साथ ही उत्तराखंड की जनता लाभान्वित होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस रेल सेवा के शुरू होने से बाबा कैंची धाम, जागेश्वर के साथ ही अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा का एक बेहतर विकल्प मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम भारतीय रेल के स्वर्णिम युग की ओर आगे बढ़ रहे हैं। आत्मनिर्भरता और आधुनिकता के प्रतीक के रूप में वंदेभारत जैसी मेड इन इंडिया ट्रेन रेल नेटवर्क का हिस्सा बनी हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और केंद्र के सहयोग से ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल सेवा का सपना भी जल्द पूर्ण हो जयेगा। टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन पर भी सर्वे का कार्य पूर्ण हो चुका है। जल्द ही इसमें भी कार्य शुरू हो जायेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड से काशी, अयोध्या और अन्य प्रमुख शहरों के लिए रेल सेवा के विस्तार के प्रयास किये जायेंगे। पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री और सांसद अजय भट्ट ने कहा कि यहां के लोगों की यह बहुत पुरानी मांग थी। इस सेवा से पूरे कुमाऊं में पर्यटन और तीर्थाटन बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि अब सप्ताह में तीन रेल गाड़ियां रामनगर, हल्द्वानी और अब लालकुआं से मुम्बई के लिए जा रही हैं। यह रेल सेवा लालकुआं से सुबह 07:45 बजे प्रस्थान कर अगले दिन मंगलवार को प्रातः 08:30 बजे बान्द्रा टर्मिनल पहुंचेगी तथा उसी दिन (मंगलवार) को 11:00 बजे लालकुआं के लिए प्रस्थान कर अगले दिन बुधवार 13:15 बजे लालकुओं पहुंचेगी। इस अवसर पर विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट और रेलवे के डीआरएम श्रीमती रेखा यादव उपस्थित रहीं।   recent visitors 86

उज्जैन : कुख्यात कैदी इंदौर के अस्पताल से फरार, वजह जानकर दंग रह जाएंगे आप

इंदौर / उज्जैन उज्जैन की भैरवगढ़ जेल में बंद एक कैदी को तबीयत खराब होने पर पिछले दिनों इंदौर के संयोगितागंज थाना क्षेत्र स्थित सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां से मौका मिलते ही कैदी फरार हो गया। मामले में पुलिस आरोपी को तलाश कर रही है। संयोगितागंज थाना टीआई सतीश पटेल के मुताबिक इरफान लाला पिता सरवन खान (31) निवासी खुदीराम बोस मार्ग उज्जैन भादंवि की धारा 262 के तहत उज्जैन जेल में बंद है। अपहरण के आरोपी इरफान लाला को तबीयत खराब होने पर 4 अक्टूबर को सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तब से वह अस्पताल में ही वार्ड 201 में भर्ती था। देर रात को मौका पाकर वह हथकड़ी निकालकर पुलिस अभिरक्षा से भाग निकला। मामले मे पुलिस दो टीमें लगाकर आरोपी की सरगर्मी से तलाश कर रही है। आरोपी को मुंह के कैंसर की बीमारी थी। इलाज के लिए उसे भर्ती किया गया था। इंदौरी बदमाश ने उज्जैन मे की रंगदारी खाराकुंआ थाना क्षेत्र स्थित बड़ा सराफा बाजार में इंदौर के एक बदामश ने दुकानदार के साथ रंगदारी की। बदमाश ने शराब पीने के लिए दुकानदार से रुपए मां,गे नहीं देने पर दुकान का सामान उठाकर ले जाने लगा। पुलिस ने बदमाश के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर मामला जांच में लिया है। पुलिस ने बताया अभिषेक पिता रणछोड़ दास गुप्ता उम्र 35 वर्ष की कॉस्मेटिक सामान विक्रय की दुकान बड़ा सराफा में स्थित है। सुबह उसकी दुकान पर इंदौर के बिजासन टेकरी के समीप का रहने वाला दिनेश पिता मुन्नालाल पहुंचा और शराब पीने के लिए रुपए की मांग की। अभिषेक ने रुपए देने से इंकार किया तो दिनेश सामान उठाकर जाने लगा। उसे पकड़ा तो जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने दिनेश के खिलाफ केस दर्ज कर मामला जांच में लिया है। recent visitors 67

मदरसा विद्यार्थी के सरकारी स्कूलों में तबादले पर रोक, सरकार के फैसले पर SC की फिलहाल रोक

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने एनसीपीसीआर की सिफारिशों पर सोमवार को रोक लगा दी। मुख्य न्यायधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने NCPCR की सिफारिश पर कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। ऐसे में आरटीई का पालन नहीं करने वाले मदरसों को भी राज्य से मिलने वाली फंडिंग नहीं रुकेगी। इसके साथ ही कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया है और चार हफ्तों में जवाब देने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के छात्रों को सरकारी स्कूलों में ट्रांसफर करने के उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले पर भी रोक लगाई है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने दलील दी कि एनसीपीसीआर के पत्र और उत्तर प्रदेश व त्रिपुरा समेत कुछ राज्यों की कार्रवाइयों पर रोक लगाई जानी चाहिए। मुस्लिम संगठन ने उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा सरकारों के उस निर्देश को चुनौती दी है, जिसमें कहा गया कि गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के छात्रों को सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि इस वर्ष 7 जून और 25 जून को जारी एनसीपीसीआर के सिफारिश पर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इसके चलते किए गए राज्यों के आदेश भी स्थगित रहेंगे। न्यायालय ने मुस्लिम संस्था को उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा के अलावा अन्य राज्यों को भी अपनी याचिका में पक्षकार बनाने की अनुमति दी। NCPCR का क्या है इस मामले पर तर्क एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने बीते दिनों कहा था कि उन्होंने मदरसों को बंद करने के लिए कभी नहीं कहा। बल्कि, उन्होंने इन संस्थानों को सरकार की ओर से दी जाने वाली धनराशि पर रोक लगाने की सिफारिश की क्योंकि ये संस्थान गरीब मुस्लिम बच्चों को शिक्षा से वंचित कर रहे हैं। कानूनगो ने कहा कि गरीब पृष्ठभूमि के मुस्लिम बच्चों पर अक्सर धर्मनिरपेक्ष शिक्षा के बजाय धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए दबाव डाला जाता है। उन्होंने कहा कि वह सभी बच्चों के लिए शिक्षा के समान अवसरों की वकालत करते हैं। दरअसल, एनसीपीसीआर ने एक हालिया रिपोर्ट में मदरसों की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताई थी। इस आधार पर ऐक्शन लेने की मांग की गई। हालांकि, इस रिपोर्ट पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। सत्तारूढ़ भाजपा पर अल्पसंख्यक संस्थानों को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाने का आरोप लगाया गया। किसने दायर की थी याचिका उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा सरकार के आदेश के खिलाफ जमीयत उलमा-ए-हिंद ने याचिका दाखिल की थी। यूपी सरकार का आदेश एनसीपीसीआर की रिपोर्ट के आधार पर लिया था। इसमें आरटीई 2009 का पालन नहीं करने वाले मदरसों की मान्यता रद्द करने और सभी मदरसों की जांच करने को कहा गया था। सीजेआई की बेंच ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका पर गौर किया और राज्यों की कार्रवाई पर रोक लगा दी। कभी भी मदरसों को बंद करने की मांग नहीं की- एनसीपीसीआर  इंटरव्यू में एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कहा था कि उन्होंने कभी भी ऐसे मदरसों को बंद करने की मांग नहीं की थी, बल्कि उन्होंने सिफारिश की थी कि इन संस्थानों को दी जाने वाली सरकारी फंडिंग बंद कर दी जानी चाहिए, क्योंकि ये गरीब मुस्लिम बच्चों को शिक्षा से वंचित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गरीब पृष्ठभूमि के मुस्लिम बच्चों पर अक्सर धर्मनिरपेक्ष शिक्षा की बजाय धार्मिक शिक्षा लेने के लिए दबाव डाला जाता है। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि वह सभी बच्चों के लिए बराबरी की शिक्षा के अवसरों की वकालत करते हैं। recent visitors 67

हिज्बुल्लाह का नेता लीडर नईम कासिम मौत के डर से फरार, ईरान में छिपा बैठा

बेरुत बीते एक साल से हमास और हिजबुल्लाह से लड़ रही जंग में इजरायल बीते कुछ दिनों से आक्रामक है। उसने एक तरफ हिजबुल्लाह के टॉप कमांडर सैयद हसन नसरल्लाह को लेबनान के अंदर ही घुसकर मार गिराया तो वहीं हमास के पॉलिटिकल चीफ रहे इस्माइल हानियेह को तो तेहरान में मार डाला था। फिर बीते सप्ताह उसने हमास के नेता याह्य सिनवार को भी मार गिराया। इजरायल के इन हमलों का ऐसा खौफ है कि नसरल्लाह के बाद हिजबुल्लाह के टॉप कमांडर कहे जा रहे नईम कासिम ने लेबनान ही छोड़ दिया है। वह अब तक लेबनान में ही रहता था, लेकिन इजरायली हमले में मारे जाने के डर से भाग निकला है। यूएई स्थित Erem News की रिपोर्ट के मुताबिक नईम कासिम ने ईरान में शरण ली है। उसके ठिकाने के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है और वह पूरी तरह से अंडरग्राउंड है। वह एकदम सेफ लोकेशन में छिप कर रहा रहा है ताकि इजरायल के हाथों न मारा जाए। फिलहाल वह हिजबुल्लाह का डिप्टी सेक्रेटरी जनरल है और उसके सेकेंड इन कमांड कहा जाता है। ऐसे में उसका भागना बताता है कि हिजबुल्लाह किस तरह से इजरायल के डर में है। पेजर विस्फोट और फिर वॉकी-टॉकी धमाकों के बाद से डरे हिजबुल्लाह को अब तक इजरायल बड़ा नुकसान पहुंचा चुका है। ईरानी विदेश मंत्री के एयरक्राफ्ट से ही भागा नईम कासिम उसकी कई सरगनाओं को उसने ठिकाने लगा दिया है तो वहीं लगातार लेबनान में हमले कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नईम कासिम 5 अक्टूबर को ही बेरूत से निकल गया था। उसने इसके लिए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची के विमान का इस्तेमाल किया। इस विमान के जरिए वह लेबनान और सीरिया की यात्रा पर निकलते थे। इसी को उन्होंने हिजबुल्लाह कमांडर को मुहैया करा दिया। 27 सितंबर को नसरल्लाह के मारे जाने के बाद नईम कासिम ने तीन भाषण भी दिए थे। वह इजरायल पर खूब गरजा था, लेकिन अब उसके लगातार हमलों से खौफ में है। बता दें कि इजरायल हिजबुल्लाह के भी कई नेताओं को हमास की तरह ही मार चुका है। नसरल्लाह के मारे जाने के बाद कमान संभाली नईम कासिम को हिजबुल्लाह के संस्थापक सदस्यों में माना जाता है। नसरल्लाह के मारे जाने के उसे ही पब्लिक रोल में देखा जा रहा था। ऐसे में उसका डर से भागना इजरायल को बढ़त दिलाने वाला है। नईम कासिम बीते कई दशकों से इस्लामिक संगठनों का हिस्सा रहा है और फिर जब हिजबुल्लाह बना तो उसका संस्थापक सदस्य रहा। इजरायल उसके पीछे पड़ा है ताकि उसे मार गिराने के बाद हिजबुल्लाह की लीडरशिप को खत्म किया जा सके। recent visitors 113

अगले महीने स्पेन में होने वाले बिली जीन किंग कप के फाइनल्स में चोट की वजह से हिस्सा नहीं लेंगी: नाओमी ओसाका

टोक्यो चार बार की ग्रैंड स्लैम चैंपियन नाओमी ओसाका ने कहा है कि वह अगले महीने स्पेन में होने वाले बिली जीन किंग कप के फाइनल्स में चोट की वजह से हिस्सा नहीं लेंगी। ओसाका ने क्योडो न्यूज से कहा, “मैंने इस साल बहुत से टूर्नामेंट खेले हैं, इसलिए यह मेरे लिए एक बहुत मुश्किल फैसला था कि मैं इस टूर्नामेंट और बिली जीन किंग कप में हिस्सा नहीं लूंगी।” उन्होंने कहा, “मुझे इस टूर्नामेंट में खेलकर बहुत मजा आया और इसने मुझे एक खिलाड़ी के रूप में बेहतर बनने में मदद की।” अक्टूबर में, 58वीं रैंक की ओसाका ने चीन ओपन के दौरान कोको गॉफ के खिलाफ मैच में अपनी पीठ में चोट लगा ली थी और मैच से रिटायर हो गईं। इसके बाद, उन्होंने जापान के दो टूर्नामेंट्स से नाम वापस ले लिया, जिनमें सोमवार से शुरू होने वाला पैन पैसिफिक ओपन भी शामिल है। रविवार को 27 वर्षीय ओसाका ने बताया कि उनके पेट की मांसपेशियों को भी नुकसान पहुंचा है। ओसाका ने कहा, “मैंने सोचा था कि मेरी पीठ में सिर्फ खिंचाव आया है, लेकिन बीजिंग में एमआरआई कराने के बाद पता चला कि मेरी पीठ की एक डिस्क खिसक गई है और पेट की मांसपेशियों में भी चोट आई है।” उन्होंने यह भी कहा, “मैं लॉस एंजेलिस में इस टूर्नामेंट के लिए तैयारी कर रही थी, लेकिन जब मैंने फिर से एमआरआई करवाया, तो पता चला कि चोट अभी भी ठीक नहीं हुई है।” बिली जीन किंग कप का फाइनल 13 से 20 नवंबर के बीच मलागा, स्पेन में होगा। ओसाका ने अप्रैल में कज़ाखस्तान को हराकर जापान को फाइनल्स में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। यह 2020 के बाद उनका पहला बिली जीन किंग कप था। अब ओसाका प्रतिष्ठित फ्रेंच कोच पैट्रिक मूरतोग्लू के साथ काम कर रही हैं और वह जनवरी में होने वाले ऑस्ट्रेलियन ओपन की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करेंगी।   recent visitors 95

आरक्षण और निर्वाचन: आज भी देश में इंसान को इंसान की नज़र से देखने वाले कम है

आरक्षण और निर्वाचन: आज भी देश में इंसान को इंसान की नज़र से देखने वाले कम है भारत में आज आरक्षण और निर्वाचन दोनों विषयों पर निरंतर बहस जारी है साथ ही दोनों विषयों पर जनता संदेह करती ही रहती है। आज के समय में दोनों विषयों पर चर्चा और विश्वसनीयता बनाना सरकार का पहला कदम होना चाहिए। आरक्षण –देश में आरक्षण कमजोर और भेद भाव और पीढ़ी दर पीढ़ी अस्पर्शता का दंश झेल रहे अनु जाति जन जाति और पिछड़े वर्गों को सामाजिक,आर्थिक, राजनेतिक स्तर पर बराबरी पर लाने के लिए ये व्यवस्था भारतीय संविधान में अंकित किया गया जिससे देश में कमजोर अनु जाति, जन जाति वर्ग को सम्मानजनक जीवन मिल सकें। परंतु समय के साथ साथ इन वर्गों को समान अवसर जरुर मिले पर इसके साथ साथ उनके साथ अत्याचार, भेद भाव, और अन्याय भी बढ़ते गए। आज भी देश में इंसान को इंसान की नज़र से देखने वाले कम है।आज राजनीतिक रूप से भी उचित स्थान इन वर्गों को नहीं मिला। आरक्षण और वर्तमान भारत में 1950 मै जब आरक्षण विधेयक पारित हुआ तो उसके साथ ही अनु जाति जन जाति पिछड़ा वर्ग को शासकीय सेवाओं, राजनीतिक पार्टियों और निर्वाचन क्षेत्रों में ये व्यवस्था लागू हो गई। इसका मुख्य कारण ये रहा की इन वर्गों को देश में कभी समान अवसर नहीं मिले ना ही इन वर्गों का खान पान और रहवास अन्य वर्ग के समान सुखद नहीं रहा आज भी इन वर्गों की बस्तीया टोला, मढिया, हरिजन बस्ती हरिजन वार्ड, आदिवासी मुहल्ला, टीला, मलिन बस्तियों, और गरीब बस्तीयो, के विभिन्न नामों से पुकारी जाती है। इन वर्गों की आबादी में आज भी केवल चुनाव और मुख्य वजह पर ही सरकार की नज़र जाती हैं। परंतु समय के साथ इन वर्गों के अपने अधिकारों को लेकर जागरूकता की कमी के कारण इसका दुरुपयोग प्रारम्भ हो गया।बड़े ही शर्म की बात है की किसी भी वर्ग का व्यक्ति अनु जाति जन जाति वर्ग का प्रमाण पत्र बनवा कर विधायक, मंत्री, सरपंच, आदि बन जाता है जब तक ये जानकारी लगती है या न्यायलाय द्धारा फर्जी सिद्ध होता है जब तक वो कार्यकाल पूरा कर लेता है। अनेक व्यक्ती सामान्य वर्ग के अनु जाति, जन जाति वर्ग से विवाह देखा कर पति पत्नी के रुप में रहकर इस आरक्षण का लाभ उठा लेते हैं। वास्तविक स्वरूप में बहुत कम पात्र जरुरतमंद लोगों को आरक्षण का लाभ मिल पाता है।आरक्षण के वर्तमान समय में आरक्षण मै महिला वर्ग, दिव्यांगजन भी आरक्षित वर्ग से आउटसोर्स, संविदा, निजीकरण, ठेकेदारी प्रथा ने इन वर्गों को समान अवसर समान अधिकारो का हनन किया है। भारतीय जनता पार्टी नित सरकार द्वारा 10% EWS आरक्षण देकर वर्ष 2019 मै अनु जाति जन जाति वर्ग को, कही ना कहीं रोका गया है। अनु जाति जन जाति वर्ग पर लागू हित साधन अनु जाति जन जाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के आदेश पर भी जो घटना 2अप्रैल 2018 को प्रदर्शन देश भर में हुआ वो भी एक इस वर्ग को चिंता मत मै किए हैं।आज वर्ष 2024 मै भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनु जाति जन जाति वर्ग में आरक्षण मै उपवर्गीकरण भी इस वर्ग को आरक्षण से दूर करने को असंकित करता है। आज देश में लेट्रिंग से लेकर कैटरिंग तक सभी जगह निजीकरण ठेकेदारी हावी है। देश में विशेष वर्ग आज भी संपन्न है और ये वर्ग पिछड़े है। आज अमीर और गरीब मै जमीन आसमान का अन्तर हो गया है। देश में एनजीओ, सहकारिता, निजीकरण, और पूंजीवाद हावी है। जिस से इन वर्गों के अधिकारों का निरंतर हनन हो रहा है। निर्वाचन -भारत में निर्वाचन को लोकतंत्र की प्रमुख हिस्सा माना गया है। जिस नागरिक ने भारत में जन्म लिया है वो 18 वर्ष पूर्ण करने पर देश का ज़िम्मेदार नागरिक के तौर पर मतदाता होता है। और 25 वर्ष में प्रत्याशी के रुप में देश में  लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक को विशेष अधिकारो को दिए गए हैं जिसमें मतदान भी है। आज देश के लिए एक चिंतनीय विषय बहुत बड़ा है वो है निर्वाचन आयोग के कार्यों पर विश्वयनीयता । महंगे चुनाव, धन आधारित चुनाव मैदान, लोक सभा, विधान सभा में आपराधिक गतिविधियों में लिप्त और धनवान लोगों का जाना कहीं ना कहीं निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगाती हैं। EVM जब देश में निर्वाचन के लिए उपयोग में लाई गई थी तब देश में तकनीकी ज्ञान और तकनीक का इतना विकास नहीं हुआ था। आज हर एक दल निर्वाचन आयोग को ईवीएम मशीनों को लेकर लागतार शिकायत दर्ज करता रहता है। इसी प्रकार से वीपीपीटी पर्ची के ईवीएम से मतदान के साथ 100% मिलान की मांग होती रही है। साथ ही पुनः ईवीएम मशीन के मतगणना में लगने वाली 47000 रु प्रति ईवीएम मशीन की राशि कम करने की मांग होती रही है। वैलेट पेपर से चुनावों को कराने की मांग आज के समय में सम्भव भी है क्योंकि आज हमारे पास परिवहन के संसाधन है पोलिंग बूथों पर सीसीटीवी कैमरों जिसे व्यवस्था है जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम है। पारदर्शिता के लिए सभी संसाधन मौजूद है। अब इन निर्वाचन मुद्दों के साथ एक देश एक चुनाव पर भी विचार हो रहा है।  एक देश एक चुनाव क्या ये सही है एक बार वोट दो और जनता 5 साल को फुर्सत। मतलब चुनाव के बाद आप सरकार से सवाल जवाब करे पर वोट रूपी वरदान को नजरंदाज कर। एक देश एक चुनाव के बाद कही एक चरण में मतदान भी लागू ना हो जाए। फिर क्या जब जनता को समझाने में वर्षो लग जाते है फिर एक दिन में चुनाव संपन्न करना कही ना कहीं संदेह के परे है। आज देश में ब्लू टुथ, AI , GPS, ड्रोन जिसे उपकरण चलने लगे हैं आज इलेक्ट्रोल बॉन्ड भी निर्वाचन मै एक रिश्वत भ्रष्टाचार का आधार बनता दिख रहा है। समय रहते हमें लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभों की रक्षा करना ज़रूरी है एवं आधुनिकता के साथ जनता में विश्वास बनाएं रखना सरकार का कर्तव्य है।      हेमन्त आजाद स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार        मध्य प्रदेश recent visitors 61

मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल ने एजुकेशन वर्ल्ड की जारी रैंकिंग में लगातार तीसरे साल उत्कृष्ट जगह बनाई

"एजुकेशन वर्ल्ड" स्कूल रैंकिंग में मॉडल स्कूल लगातार तीसरी बार टॉप 10 में "एजुकेशन वर्ल्ड" स्कूल रैंकिंग में शासकीय मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल लगातार तीसरी बार टॉप 10 में मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल ने एजुकेशन वर्ल्ड की जारी रैंकिंग में लगातार तीसरे साल उत्कृष्ट जगह बनाई श्रेष्ठ शिक्षण और अन्य गतिविधियों से मिला स्थान भोपाल "एजुकेशन वर्ल्ड" स्कूल रैंकिंग में भोपाल का शासकीय मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल टीटी नगर लगातार तीसरी बार टॉप 10 में जगह बनाकर हैट्रिक लगाने वाला मध्यप्रदेश का पहला एवं एकमात्र स्कूल बना है। मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल ने एजुकेशन वर्ल्ड की ओर से जारी सरकारी स्कूलों की रैंकिंग में लगातार तीसरे साल उत्कृष्ट जगह बनाई है। इस वर्ष एजुकेशन वर्ल्ड द्वारा जारी रैंकिंग में मॉडल स्कूल को सातवां स्थान मिला है। "एजुकेशन वर्ल्ड" शिक्षकों एवं अभिभावकों के लिए एक पोर्टल है, जो हर साल स्कूलों की रैंकिंग जारी करता है। यह रैंकिंग विद्यालय के पिछले परीक्षा परिणाम, सांस्कृतिक गतिविधियों, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षकों की उपलब्धता एवं उनका आउटपुट, मेंटल-इमोशनल सेवाओं, खेल, अकादमिक गतिविधियों और अन्य आधारों पर की जाती है। इन सभी क्षेत्रों में उपलब्धि के आधार पर पूरे भारत से स्कूल चयनित कर उसके आधार पर निर्धारित मानकों से अंक दिए जाते हैं। स्कूल में उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर मार्किंग की जाती है। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा संचालित मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल टीटी नगर, भोपाल लगातार 3 वर्ष से शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार करने में सफल रहा है। स्कूल शिक्षा मंत्री ने दी बधाई स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने मॉडल स्कूल को श्रेष्ठ प्रदर्शन के आधार पर वर्ल्ड रैकिंग में स्थान मिलने पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता में लगातार सुधार के लिये प्रतिबद्ध है। उन्होंने मॉडल स्कूल की प्राचार्य श्रीमती रेखा शर्मा, समस्त स्टाफ, शिक्षक, माध्यमिक शिक्षा मंडल और विद्यार्थियों को भी बधाई दी है। "एजुकेशन वर्ल्ड" द्वारा नई दिल्ली में पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन 17 से 19 अक्टूबर 2024 तक किया गया। समारोह में विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती रेखा शर्मा को शासकीय क्षेत्र में देश में सातवीं पायदान हासिल करने के लिए पुरस्कृत किया गया।   recent visitors 58