उद्योगों के विकास की सभी बाधाओं को किया जाएगा दूर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

All obstacles to the development of industries will be removed: Chief Minister Dr. Yadav भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विन्ध्य में औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं हैं। इन्हें गति देने के लिए 23 अक्टूबर को रीवा में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है। उद्योगों के विकास की सभी बाधाएं दूर की जाएंगी। सभी उद्योगपति अपनी कठिनाइयों को उद्योग विभाग अवगत कराएं। हर जिले में निवेश संवर्धन केन्द्र खोल दिये गये है। इसके माध्यम से भी सरकार तक अपनी बात पहुंचाएं। उद्योगपतियों की स्थानीय कठिनाइयों को दूर करने की जिम्मेदारी कमिश्नर और कलेक्टर की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विन्ध्य के उद्योगपतियों को उत्पादों के निर्यात के लिए कंटेनर की सुविधा मिलेगी। अब रेल के साथ मालवाहक हवाई जहाजों से भी परिवहन होगा। उद्योगपति केवल अपने लिए उद्योग नहीं चलाते हैं। उनके द्वारा संचालित उद्योग से प्रदेश और देश का विकास भी होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रीवा में 23 अक्टूबर को होने वाली रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के संदर्भ में स्थानीय उद्योगपतियों के साथ चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के औद्योगिक विकास को गति देने के लिए हर माह संभागीय मुख्यालयों में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है। जब कुँआ खुद प्यासे के पास जा रहा है तब उद्योगों को भला कौन सी कठिनाई होगी। उद्योगपतियों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि धान की मिलिंग के संबंध में जो कठिनाईयाँ हैं उन्हें दूर करने के लिए शीघ्र निर्णय लिया जाएगा। मिलिंग नीति में राइस मिलर्स के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। उद्योगों के लिये वर्ष 2022-23 के अनुदान की राशि जारी कर दी गई है। अब अनुदान की राशि सीधे उद्योगपति के खाते में जारी की जाएगी। विन्ध्य क्षेत्र के विकास की हर बाधा दूर की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मैं रीवा का दामाद हूँ, रीवा के विकास में कोई कोर कसर नहीं रखूंगा।  उद्योगों पर नहीं होगा दोहरा कराधान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में उपस्थित रीवा तथा मऊगंज के उद्योगपतियों से चर्चा की और सिंगरौली, सीधी, मैहर तथा सतना के उद्योगपतियों से वर्चुअल संवाद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगों पर दोहरा कराधान नहीं होगा। आगामी 23 अक्टूबर को रीवा में पूरे विन्ध्य के औद्योगिक विकास के लिए विचार-मंथन के लिए कॉन्क्लेव होगा। इसमें शामिल होने के लिए 50 बड़े उद्योगपतियों के साथ 3 हजार से अधिक उद्योगपतियों ने पंजीयन किया है। इसी दिन औद्योगिक केन्द्र चोरहटा में विद्युत सब-स्टेशन के निर्माण तथा रीवा में आईटी पार्क के निर्माण का भूमि-पूजन भी किया जायेगा। विन्ध्य में कई बड़े उद्योगों की स्थापना के प्रस्ताव रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव में मिलेंगे। बैठक में उद्योगपतियों ने औद्योगिक विकास के अनुसार जिलों के श्रेणीकरण, रीवा को विशेष औद्योगिक जोन का दर्जा देने, धान मिलिंग तथा बारदाने की राशि के भुगतान, छोटे शहरों के औद्योगीकरण को प्राथमिकता देने, सिंगरौली में उद्योगों के लिए पर्याप्त पानी की उपलब्धता, पॉवर, एल्युमिनियम और सीमेंट प्लांट सहित विभिन्न सुझाव दिए। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  राघवेन्द्र कुमार सिंह ने रीजनल इंडस्ट्री कान्क्लेव की रूपरेखा प्रस्तुत की। उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा, उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल, सांसद रीवा  जनार्दन मिश्र, सांसद सीधी डॉ. राजेश मिश्रा, विधायक त्योंथर  सिद्धार्थ तिवारी, विधायक मनगवाँ  नरेन्द्र प्रजापति, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. नीता कोल, प्रबंध संचालक औद्योगिक विकास निगम  चन्द्रमोली शुक्ला, कमिश्नर रीवा  बी.एस. जामोद और कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल उपस्थित रहीं। बैठक में उद्योग संघ रीवा के अध्यक्ष  राजीव खन्ना, जी.एस. साहनी,   दिलीप सिंह, आर.के. रोघटा, आदित्य प्रताप सिंह, श्रीमती विभा व्रिकांत द्विवेदी सहित अन्य उद्योगपति शामिल हुए। recent visitors 105

CM भजनलाल का एक और तोहफा, कम किया रोडवेज बसों का किराया

जयपुर  राजस्थान रोडवेज प्रशासन ने हाल ही में दिल्ली रूट पर संचालित होने वाली एसी बसों के किराए में कमी की है। इस आदेश से प्राइवेट बस ऑपरेटर्स में काफी हलचल हो रही है। इसको लेकर कई ऑपरेटर्स रोडवेज अधिकारियों के चक्कर काटते भी दिखाई दे रहे हैं। वहीं रोडवेज चेयरमैन शुभ्रा सिंह व एमडी पुरुषोत्तम शर्मा की ओर से की गई सख्ती से रोडवेज की इनकम 74 प्रतिशत से बढ़कर 102 प्रतिशत हो गई है। जानकारी के अनुसार पहले दिल्ली रूट पर हर तीन से चार घंटे में एसी बसें उपलब्ध थी लेकिन अब हर डेढ़ घंटे में वाया कोटपूतली व एक्सप्रेस-वे (दौसा होते हुए) बसों का संचालन किया जा रहा है। इससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल रही है। जयपुर से वाया कोटपूतली होते हुए प्रतिदिन सात बसें संचालित हो रही है। इनमें एसी बस का 540 रुपए और स्कैनिया (वोल्वो) का 750 रुपए प्रति यात्री किराया है। इसी प्रकार एक्सप्रेव-वे वाया दौसा होते हुए प्रतिदिन 9 बसें उपलब्ध है। स्कैनिया वोल्वो का 790 व एसी बस में 640 रुपए प्रति यात्री किराया है। सबसे फायदेमंद वाला था दिल्ली रूट राजस्थान रोडवेज के लिए दिल्ली रूट सबसे फायदेमंद वाला रूट था। यहां सबसे अधिक यात्रीभार के साथ राजस्व भी ठीक मिलता था लेकिन पिछले कुछ सालों में रोडवेज अधिकारियों की अनदेखी के कारण यह रूट घाटे का सौदा होने लगा। यदि रोडवेज प्रशासन यह सुविधा पिछले छह साल पहले ही कर देता तो आज ऐसी हालत नहीं होती। आखिर रोडवेज प्रबंधन को रोस्टर करने में कौन रोक रखा था। झालावाड़ रूट पर सख्ती से मिलने लगा फायदा रोडवेज का सबसे अधिक घाटा झालावाड़ व हाड़ौती रूट पर था। चेयरमैन व एमडी की ओर से मुख्य प्रबंधकों पर सख्ती करने व 4200 पे ग्रेड वाले अधिकारियों को बसों की चैकिंग करने के पॉवर देने और फ्लाइंग टीम को प्रतिदिन रूट पर चैकिंग करने के निर्देश के बाद अचानक यात्रीभार के साथ राजस्व बढ़ने लगा। इससे हाड़ौती क्षेत्र की प्रतिदिन की इनकम 74 प्रतिशत से बढ़कर 102 प्रतिशत हो गई है। रोडवेज प्रबंधन का कहना है कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा। इसके साथ ही काम नहीं करने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी।   recent visitors 97

इंदौर एयरपोर्ट पर छह दिन बाद विंटर शेड्यूल होगा लागू , आधा दर्जन उड़ानों का समय बदल जाएगा

इंदौर देशभर के एयरपोर्ट पर 27 अक्टूबर से विंटर शेड्यूल लागू होगा। इंदौर एयरपोर्ट पर भी छह दिन बाद विंटर शेड्यूल लागू होने के साथ ही आधा दर्जन उड़ानों का समय बदल जाएगा। शारजाह, पुणे, बेंगलुरु, मुंबई, जयपुर और जबलपुर उड़ानें बदले समय पर संचालित होंगी। नए शेड्यूल के बाद शारजाह उड़ान इंदौर से 15 मिनट पहले 11.55 बजे रवाना होगी, जबकि शारजाह वर्तमान समय 2.05 बजे ही पहुंचेगी। अभी यह उड़ान इंदौर से 12.10 बजे रवाना होती है। देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर छह दिन बाद विंटर शेड्यूल लागू होने वाला है। इसके साथ ही देर रात्रि संचालित होने वाली पुणे और बेंगलुरु की उड़ान का समय बदल जाएगा। इंडिगो की 6ई 284 उड़ान पुणे से रात्रि 1.40 बजे रवाना होकर रात्रि 2.50 बजे इंदौर आती है। यह छह दिन बाद सुबह संचालित होगी। पुणे से सुबह पांच बजे रवाना होकर 6.10 बजे इंदौर पहुंचेगी। वहीं 6ई 748 उड़ान बेंगलुरु से रात्रि 10.40 बजे रवाना होकर 12.25 बजे इंदौर आती थी। 27 अक्टूबर से यह एक घंटा पहले रात्रि 11.20 बजे इंदौर पहुंच जाएगी। जबलपुर उड़ान एक घंटा देरी से होगी रवाना इंदौर से अभी सुबह पांच बजे उड़ानों का सिलसिला शुरू हो जाता है। विंटर सीजन में सुबह 6.10 बजे जाने वाली इंदौर-जबलपुर उड़ान एक घंटा देरी से सुबह 7.10 बजे रवाना होगी। इसके अलावा इंदौर से बेंगलुरु जाने वाली सुबह पांच बजे वाली उड़ान विंटर सीजन में सुबह 6.10 बजे रवाना होगी। मुंबई उड़ान सुबह 5.30 बजे के स्थान पर 6.40 बजे और जयपुर उड़ान सुबह छह बजे के स्थान पर 6.20 बजे रवाना होगी।   recent visitors 83

हरियाणा में पराली जलाने वाले किसानों पर ताबड़तोड़ ऐक्शन, 14 गिरफ्तार, 336 की मंडियों में एंट्री भी बैन

 चंडीगढ़ हरियाणा के कैथल जिले में पराली जलाने के मामले में 14 किसानों को अरेस्ट किया गया है। एक पुलिस अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में बीते कुछ दिनों में पलूशन बढ़ गया है। इस बीच यह ऐक्शन लिया गया है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि पराली जलाने पर रोक के बाद भी किसान नहीं माने तो यह कार्रवाई की गई है। हरियाणा के हिसार समेत कुछ और जिलों में भी ऐसा ऐक्शन हुआ है। दिल्ली में पलूशन बढ़ने के लिए हरियाणा और पंजाब में किसानों द्वारा फसल के अवशेष जलाने को जिम्मेदार ठहराया जाता है। कैथल में कुल 123 किसानों पर केस दर्ज हुए हैं। कहा जाता है कि हर साल धान की फसल काटे जाने के बाद किसान पराली जलाते हैं। उससे निकलने वाले धुएं के चलते ही वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। आमतौर पर हर साल अक्टूबर और नवंबर के महीने में दिल्ली में पलूशन बढ़ने की शिकायतें आने लगती हैं। इस बार भी सुप्रीम कोर्ट तक में यह मामला पहुंचा है और अदालत ने हरियाणा, पंजाब एवं दिल्ली सरकारों को पलूशन पर लगाम कसने का आदेश दिया है। कैथल के डीएसपी बीरभान ने कहा कि बीते कुछ दिनों में 14 किसानों को पराली जलाने पर अरेस्ट किया गया है। हालांकि इन लोगों को बेल पर रिहा कर दिया गया। लगातार बढ़ रही घटनाएं प्रदेश में पराली जलाने के कारण स्मॉग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। राज्य में 15 सितंबर को पराली का सीजन शुरू होने से लेकर शनिवार की रात तक प्रदेश के 16 जिलों में पराली जलाने के 642 केस सामने आ चुके हैं। राज्य में कैथल ऐसा जिला है जहां पिछले छह दिनों से AQI में कोई सुधार नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस संबंध में हरियाणा सरकार को फटकार लगाए जाने के बाद दो दिन पहले कृषि निदेशक द्वारा पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए गए थे। जिसके बाद कृषि विभाग की टीमें और पुलिस बल पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। सभी जिलों से स्टेटस रिपोर्ट ली प्रदेश में पराली से फैल रहे प्रदूषण और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद रविवार को मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद ने जिला उपायुक्तों की आपात बैठक बुलाकर सभी जिलों से स्टेटस रिपोर्ट ली। इस बैठक को लेकर आधिकारिक रूप से जानकारी तो जारी नहीं की गई लेकिन जिला स्तर पर कई उपायुक्तों ने इस बारे जानकारी जारी की। इस बैठक में अधिकारियों द्वारा बताया गया कि अब तक प्रदेश में 336 किसानों की रिकार्ड पर रेड पेन एंट्री करके मंडियों में प्रवेश बैन कर दिया गया है। अब यह किसान अगले दो सीजन मंडी में अपनी फसल नहीं बेच पाएंगे। किस जिले में कितने मामले सामने आए जिला पराली जलाने के मामले कैथल 123 कुरुक्षेत्र 90 अंबाला 73 करनाल 68 जींद 49 सोनीपत 40 फतेहाबाद 36 फरीदाबाद 30 कैथल में 1.57 लाख का जुर्माना लगाया गया: डीसी कैथल के जिला उपायुक्त डॉ. विवेक भारती ने कहा कि अब तक जिले में धान की फसल के अवशेष जलाने के 123 मामले सामने आए हैं। इनमें 40 फायर लोकेशन नहीं मिली, जबकि 63 में धान की फसल के अवशेष जलाए जाने की बात सही निकली है और उन पर 1 लाख 57 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा 11 एफआईआर दर्ज हुई है। कैथल में पराली जलाने वाले 43 किसानों की मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर रेड एंट्री कर दी गई है। चार सालों का 15 सितंबर से लेकर अब तक ब्योरा साल पराली जलाने के मामले 2021 1082 2022 586 2023 570 2024 642   इन लोगों के खिलाफ प्रदूषण रोकथाम अधिनियम के तहत केस दर्ज हुआ है। पानीपत और यमुनानगर जिलों में भी कई किसानों के खिलाफ केस फाइल हुए हैं। हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी टीवीएसएन ने रविवार को ही डिप्टी कमिश्नरों को आदेश दिया था कि पराली जलाने के मामलों को कंट्रोल किया जाए। बता दें कि बीते सप्ताह हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा एवं पंजाब की सरकारों को फटकार लगाते हुए कहा था कि आपको पराली जलाने से रोकना होगा। इसके अलावा यदि किसान नहीं मानते हैं तो फिर उनके खिलाफ ऐक्शन लिया जाए। अदालत ने दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को समन भी जारी किया था और 23 अक्टूबर को स्पष्टीकरण के लिए बुलाया है। जस्टिस अभय एस. ओका, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और ए. जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा था कि दोनों राज्य पूरी तरह असंवेदनशील हैं। पलूशन को लेकर उन्हें जो आदेश दिया है, उस पर काम नहीं कर रहे हैं। यह गलत है और उल्लंघन करने वालों पर उन्हें ऐक्शन लेना ही होगा। अदालत के इस सख्त आदेश के बाद ही कार्रवाई की गई है। वहीं किसानों का कहना है कि धान की फसल कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच बहुत कम अंतर रहता है। ऐसे में खेत को जल्दी खाली करने के लिए वे पराली को कई बार जला देते हैं। यह आसान और सस्ता पड़ता है। recent visitors 60

ई-संजीवनी हेल्थ केयर सुविधाओं की डिजिटल रूप से पहुंच बढ़ाने में सहायक रही

इंडिया स्टैक लोकल पोर्टल: सुशासन में डिजिटल समाधानों के प्रयोग की महत्वपूर्ण पहल डिजिटल समाधानों के माध्यम से सुशासन और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता ई-संजीवनी हेल्थ केयर सुविधाओं की डिजिटल रूप से पहुंच बढ़ाने में सहायक रही भोपाल भारत को विश्व स्तर पर सॉफ्टवेयर और डिजिटल समाधान के क्षेत्र में अग्रणी देश के रूप में मान्यता प्राप्त है। डिजिटल इंडिया के अंतर्गत आधार, यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI), डिजी-लॉकर, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM), एपीआई सेतु, और उमंग जैसे महत्वपूर्ण प्लेटफार्मों ने न केवल नागरिकों के जीवन को सरल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, बल्कि व्यापार और शासन की प्रक्रियाओं को भी आसान किया है। ई-संजीवनी हेल्थ केयर सुविधाओं की डिजिटल रूप से पहुंच बढ़ाने में सहायक रही है। इन नवाचारों ने यह साबित किया है कि कैसे डिजिटल समाधानों के माध्यम से सुशासन और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है। पोर्टल पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के डिजिटल समाधानों की विस्तृत जानकारी होगी उपलब्ध देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी कई अग्रणी डिजिटल समाधान अपनाए गए हैं, जो राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर गहरा प्रभाव डाल रहे हैं। ये समाधान सुशासन और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ तकनीकी नवाचार में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इन प्रयासों को समेकित मंच पर लाने और देशभर में मौजूद डिजिटल समाधानों की जानकारी को व्यापक रूप से साझा करने के उद्देश्य से https://indiastacklocal.in पोर्टल का निर्माण किया गया है। इस पोर्टल पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के डिजिटल समाधानों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें प्रशासनिक, परियोजना, प्रौद्योगिकी, मॉड्यूल और उपयोगकर्ता के संदर्भ में विवरण शामिल होंगे। सफल डिजिटल योजनाओं को रेप्लीकेट करने में होगा सहयोगी इंडिया स्टैक लोकल पोर्टल का उद्देश्य इन नवाचारी समाधानों के उपयोग को बढ़ावा देना है, ताकि विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच विचारों का आदान-प्रदान हो सके और सफल डिजिटल योजनाओं को रेप्लीकेट किया जा सके। यह पोर्टल राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल समाधानों को बढ़ावा देकर सुशासन में एक नया मील का पत्थर साबित होगा। विभिन्न क्षेत्रों में डिजिटल क्रांति का विस्तार होगा। यह पहल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बेहतर प्रशासन और नागरिक सेवाएं प्रदान करने के प्रयासों को गति देगी।   recent visitors 107

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल की एक महत्वपूर्ण बैठक होगी आज शाम को

कोलकाता कोलकाता के आर.जी.कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद गुस्साए जूनियर डॉक्टरों का आमरण अनशन सोमवार को 17वें दिन भी जारी रहा। बतान दें कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल की एक महत्वपूर्ण बैठक राज्य सचिवालय नबन्ना में आज शाम को होने वाली है। हालांकि राज्य सरकार ने पहले कहा था कि बैठक में भाग लेने के लिए भूख हड़ताल वापस लेनी होगी। मगर इस मुद्दे पर आंदोलन की अगुवाई करने वाले पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट (डब्ल्यूबीजेडीएफ) ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे इस शर्त को स्वीकार नहीं कर रहे हैं और उनका प्रतिनिधिमंडल भूख हड़ताल वापस लिए बिना ही बैठक में भाग लेगा। बैठक के लिए कुल 45 मिनट का समय निर्धारित किया गया है। पहले दिन से भूख हड़ताल में भाग लेने वाले जूनियर डॉक्टरों में से एक सायंतनी घोष हाजरा ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल सकारात्मक सोच के साथ मुख्यमंत्री के साथ बैठक में भाग लेने जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘मैं बस इतना कहना चाहती हूं कि भूख हड़ताल पर बैठे लोगों को छोड़कर बाकी सभी अपनी चिकित्सा सेवा ड्यूटी पर वापस आ गए हैं। इसलिए कोई यह नहीं कह सकता कि चिकित्सा सेवाएं बाधित हो रही हैं। इसलिए हमें उम्मीद है कि इस मुद्दे पर हमारी मांगें आखिरकार पूरी होंगी।” फिलहाल कुल सात जूनियर डॉक्टर भूख हड़ताल पर हैं। इनमें से सात सेंट्रल कोलकाता के एस्प्लेनेड स्थित मंच पर हैं और एक दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी स्थित नॉर्थ बंगाल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के परिसर में है। अब तक, 5 अक्टूबर की शाम से शुरू हुई भूख हड़ताल में हिस्सा ले रहे छह जूनियर डॉक्टरों की तबीयत बहुत खराब हो गई है, इसलिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों की 10 सूत्री मांगों में सबसे विवादास्पद मांग राज्य के स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम को हटाना है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने जूनियर डॉक्टरों से फोन पर बातचीत के दौरान साफ कहा कि उनकी ओर से इस मांग को पूरा करना संभव नहीं होगा।   recent visitors 47

भोपाल: हमीदिया रोड पर ध्वनि प्रदूषण की बाढ़: पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की नई रिपोर्ट

Bhopal: Flood of noise pollution on Hamidia Road: New report of Pollution Control Board भोपाल: मध्य प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट में राजधानी भोपाल के हमीदिया रोड को सबसे अधिक ध्वनि प्रदूषण वाला क्षेत्र घोषित किया गया है। बीते 6 महीनों (1 अप्रैल से 30 सितंबर) के आंकड़ों के अनुसार, हमीदिया रोड पर 68 डेसिबल तक का नॉइस पॉल्यूशन दर्ज किया गया है, जो शहर के अन्य क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक है। इस रिपोर्ट में गोविंदापुरा और बैरागढ़ में ध्वनि प्रदूषण 50 डेसिबल से कम दर्ज हुआ है, जबकि हमीदिया रोड पर इंडस्ट्रियल एरिया से भी ज्यादा शोर है। ट्रैफिक और डीजे-बैंड हैं ध्वनि प्रदूषण के मुख्य कारण विशेषज्ञों का मानना है कि हमीदिया रोड पर भारी ट्रैफिक और डीजे-बैंड जैसी गतिविधियों के कारण नॉइस पॉल्यूशन की समस्या अधिक गंभीर है। इस सड़क पर प्रतिदिन प्रति घंटा 8 से 10 हजार वाहनों का आवागमन होता है, जिससे ध्वनि प्रदूषण लगातार उच्च स्तर पर बना रहता है। इसके अलावा, धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के दौरान डीजे और बैंड की आवाजें इस समस्या को और बढ़ा देती हैं। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट मध्य प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, हमीदिया रोड पर अप्रैल से सितंबर तक का औसत ध्वनि स्तर निम्न प्रकार रहा: इसके मुकाबले, गोविंदापुरा और बैरागढ़ में ध्वनि प्रदूषण का स्तर कम पाया गया। गोविंदापुरा में अगस्त में 49 डेसिबल और बैरागढ़ में अगस्त और सितंबर में 49 से 52 डेसिबल तक का ध्वनि स्तर दर्ज किया गया। साइलेंट जोन में भी प्रदूषण रिपोर्ट के मुताबिक, भोपाल के पर्यावरण परिसर, जो साइलेंट जोन के रूप में जाना जाता है, में भी ध्वनि प्रदूषण चिंता का विषय है। यहां भी अप्रैल से सितंबर के बीच ध्वनि स्तर 53 से 58 डेसिबल के बीच रहा, जो साइलेंट जोन के लिए निर्धारित मानकों से अधिक है। तेज शोर ने ली बच्चे की जान तेज ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभाव हाल ही में तब सामने आए जब 14 अक्टूबर को 13 वर्षीय समर बिल्लौरे की मौत हो गई। समर डीजे की तेज आवाज में मां दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान डांस कर रहा था, जब उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार ने आरोप लगाया कि डीजे की अत्यधिक आवाज उसकी मौत का कारण बनी। ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण की आवश्यकता हमीदिया रोड और अन्य क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण के बढ़ते स्तर के मद्देनजर, शहर के नागरिकों और पर्यावरणविदों ने प्रशासन से इस समस्या पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। यह आवश्यक है कि प्रशासन नॉइस पॉल्यूशन को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाए, ताकि इस प्रकार की दुर्घटनाओं को रोका जा सके और नागरिकों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को कम किया जा सके। recent visitors 153