UK के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला गुजरात दूसरा राज्य बनेगा

अहमदाबाद  उत्तराखंड के बाद गुजरात समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन जाएगा। राज्य के कानून मंत्री ऋषिकेश पटेल ने कल राज्य विधानसभा में यह बात कही। राज्य के कानून मंत्री ऋषिकेश पटेल ने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्णय राज्य के सभी लोगों के लिए समान न्याय सुनिश्चित करने और एक भारत श्रेष्ठ भारत की अवधारणा को साकार करने की दिशा में एक कदम है। इस दिशा में राज्य सरकार ने राज्य के लिए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का मूल्यांकन और मसौदा तैयार करने के लिए न्यायमूर्ति रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति ने निवासियों, सामाजिक राजनीतिक संगठनों से सुझाव आमंत्रित किए हैं, कानून बनाने में अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सुझाव प्रस्तुत करने की समय सीमा 15 अप्रैल, 2025 तक बढ़ा दी गई है। निचली अदालतों में डिजिटलीकरण ई-कोर्ट प्रोजेट के बारे में पटेल ने कहा कि हाईकोर्ट और निचली अदालतों में डिजिटलीकरण के लिए 27.84 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इससे अदालतों में कागजी काम कम होगा और सब कुछ कंप्यूटर पर होगा। फास्ट ट्रैक कोर्ट के बारे में बताते हुए पटेल ने कहा कि पिछले साल जिला अदालतों ने 18,41,016 मामलों को सुलझाया। मतलब, अदालतों ने बहुत तेजी से काम किया। पटेल ने यह भी बताया कि अलग-अलग कानूनों के लिए राज्य में कई अदालतें बनाई गई हैं। 595 विशेष अदालतें बनाई गई उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट की मंजूरी से, 595 विशेष अदालतें बनाई गई हैं। इनमें अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत आने वाले मामले भी शामिल हैं। गुजरात पीड़ित मुआवजा योजना-2019 के बारे में मंत्री जी ने बताया कि अपराधों के शिकार लोगों को मुआवजा दिया गया। जैसे कि अत्याचार, एसिट अटैक (तेजाब हमला), और पॉक्सों एक्ट (Pocso Act) के तहत आने वाले मामलों में पिछले तीन सालों में 39 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार पीड़ितों की मदद कर रही है। क्या होती है समान नागरिक संहिता(UCC), जानें समान नागरिक संहिता: समान नागरिक संहिता धर्म की परवाह किए बिना सभी नागरिकों के व्यक्तिगत मामलों को नियंत्रित करने के लिए कानूनों का एक सेट रखती है, जो यह सुनिश्चित करती है कि उनके मौलिक और संवैधानिक अधिकार सुरक्षित हैं। यूसीसी फुल फॉर्म यूसीसी का मतलब समान नागरिक संहिता है। समान नागरिक संहिता का अर्थ समान नागरिक संहिता कानूनों के एक सामान्य समूह को संदर्भित करती है, जो भारत के सभी नागरिकों पर विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने और उत्तराधिकार के संबंध में लागू होती है। ये कानून भारत के नागरिकों पर धर्म और लिंग रुझान के बावजूद लागू होते हैं। क्या आप जानते हैं: गोवा में एक समान पारिवारिक कानून है, इस प्रकार यह एकमात्र भारतीय राज्य है, जहां समान नागरिक संहिता है और 1954 का विशेष विवाह अधिनियम किसी भी नागरिक को किसी विशेष धार्मिक व्यक्तिगत कानून के दायरे से बाहर शादी करने की अनुमति देता है। समान कानूनों की उत्पत्ति ब्रिटिश सरकार ने 1840 में लेक्स लोकी की रिपोर्ट के आधार पर अपराधों, सबूतों और अनुबंधों के लिए एक समान कानून बनाए थे, लेकिन हिंदुओं और मुसलमानों के व्यक्तिगत कानूनों को उन्होंने जानबूझकर कहीं छोड़ दिया था। दूसरी ओर ब्रिटिश भारत न्यायपालिका ने ब्रिटिश न्यायाधीशों द्वारा हिंदू, मुस्लिम और अंग्रेजी कानून को लागू करने का प्रावधान किया। साथ ही उन दिनों सुधारक महिलाओं द्वारा मूलतः धार्मिक रीति-रिवाजों जैसे सती आदि के तहत किये जाने वाले भेदभाव के विरुद्ध कानून बनाने के लिए आवाज उठा रहे थे। संविधान सभा की स्थापना की गई थी, जिसमें दोनों प्रकार के सदस्य शामिल थे: वे जो समान नागरिक संहिता को अपनाकर समाज में सुधार चाहते थे जैसे डॉ. बी. आर अम्बेडकर और अन्य मुस्लिम प्रतिनिधि थे, जिन्होंने व्यक्तिगत कानूनों को कायम रखा। साथ ही समान नागरिक संहिता के समर्थकों का संविधान सभा में अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा विरोध किया गया था। परिणामस्वरूप, डीपीएसपी (राज्य नीति के निदेशक सिद्धांत) के भाग IV में अनुच्छेद 44 के तहत संविधान में केवल एक पंक्ति जोड़ी गई है। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 35

यूसीसी पर सवालिया निशान खड़े, हाईकोर्ट ने शादी, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप पर सरकार से मांगा जबाब

नैनीताल आजाद भारत में पहली बार किसी राज्य में (उत्तराखंड) समान नागरिक संहिता लागू हुई, लेकिन इस पर कई सवालिया निशान खड़े हो गए। इसके चलते वकीलों ने यूसीसी के कुछ प्रावधानों को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी। अब नैनीताल हाईकोर्ट की खंडपीठ ने यूसीसी में शादी, तलाक और लिव इन रिलेशनशिप के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर उत्तराखंड सरकार से 6 हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि राज्य में लागू समान नागरिक संहिता मुसलमानों, पारसियों आदि की विवाह प्रणाली की अनदेखी करती है। लिव-इन, शादी और तलाक के प्रावधानों पर उठे सवाल समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड 2024 को जनहित याचिका (पीआईएल) के जरिए चुनौती दी गई है। इसमें दावा किया गया है कि लिव इन रिलेशनशिप, शादी और तलाक से संबंधित प्रावधान नागरिकों के मूल अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। आपको बता दें कि प्रैक्टिस कर रहे एक वकील ने यूसीसी के कुछ हिस्सों को चुनौती दी है। लाइव लॉ की बेवसाइट के अनुसार इनमें पार्ट-1 में दिए गए शादी और तलाक के प्रावधान और पार्ट-3 में दिए गए लिव इन रिलेशनशिप से जुड़े खंडों के साथ-साथ समान नागरिक संहिता नियम उत्तराखंड 2025 शामिल है। शादी के लिए साथी चुनने की स्वतंत्रता छिनने की दलील याचिका में कहा गया है कि यूसीसी उत्तारखंड 2024 ने महिलाओं से जुड़े असमानता वाले व्यक्तिगत नागरिक मामलों से जुड़ी चिंताओं पर अंकुश लगाया है। जबकि इसमें कई ऐसे प्रावधान और नियम हैं, जो राज्य में नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन करते हैं। इसमें निजता का अधिकार, जीवन जीने का अधिकार और बड़े अर्थों में विवाह में अपने साथी को चुनने में निर्णय लेने की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के छिनने की बात है। शादी और तलाक से जुड़े रीति-रिवाजों को नजरअंदाज किया याचिका में कहा गया है कि ये प्रावधान मुस्लिम समुदाय के लिए भेदभावपूर्ण हैं। याचिका में दावा किया गया है कि ये प्रावधान मुस्लिमों की शादी और तलाक से जुड़े रीति-रिवाजों को नजरअंदाज करते हैं। दलीलों में इन लोगों पर हिन्दू मैरिज एक्ट के प्रावधानों को थोपते का भी आरोप लगाया गया है। लाइव लॉ बेवसाइट के अनुसार इसके लिए हिन्दू मैरिज एक्ट के सेक्शन 3(1) (जी) में लिखी बात का हवाला दिया गया है। शादी के प्रतिबंधित रिश्तों का दिया हवाला हिन्दू मैरिज एक्ट के सेक्शन 3(1) (जी) में शादी करने के लिए कुछ प्रतिबंधित रिश्तों के बारे में बताया गया है। इन्हीं प्रावधानों को मुस्लिम और पारसी समुदाय के लिए भी लागू किया गया है। याचिका में इसका उदाहरण रखते हुए दलील दी गई है कि इस बात को नजरअंदाज कर दिया गया है कि पारसी और मुस्लिम समुदाय में इन रिश्तों में शादी करना प्रतिबंधित नहीं है। इन रिश्तों में एक आदमी और उसके पिता की बहन की बेटी, एक आदमी और उसके पिता के भाई की बेटी, एक आदमी और उसके मामा की बेटी तथा एक आदमी और उसकी मामा की बेटी के जैसे रिश्ते शामिल हैं। LGBTQ समुदाय और रिलेशनशिप से जुड़े अधिकार लिव-इन रिलेशनशिप पर सेक्शन 4(बी) में कहा गया है कि केवल एक पुरुष और महिला जो "विवाह की प्रकृति" में रिश्ते के माध्यम से एक ही घर में रिलेशनशिप में रहते हैं। उनका रिश्ता निषिद्ध(बैन) संबंधों की डिग्री के तहत न आए। ऐसे रिश्तों को लिव-इन रिलेशनशिप में होना बताया गया है। याचिका में दावा किया गया है कि यदि प्रावधान के शब्दों के मायने निकाले जाएं तो यह केवल "जैविक पुरुष या महिला" से संबंधित होगा। ऐसा होने पर LGBTQ समुदाय से जुड़े व्यक्ति अगर अपने लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण के लिए जाएंगे तो वो इस अधिकार से बाहर हो जाएंगे। ऐसा LGBTQ समुदाय के साथ अनुचित व्यवहार होगा। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 57

‘ पूरे देश को UCC की जरूरत है, हर कोई चाहता है…’, TMC सांसद शत्रुघ्न सिन्हा बोले- नॉनवेज पर भी पूरे देश में लगे बैन

नई दिल्ली तृणमूल कांग्रेस सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने एक बयान से जनता को चौंकाया है. उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) की पैरवी की है और कहा है कि इसे देश भर में लागू किया जाना चाहिए. शत्रुघ्न सिन्हा ने उत्तराखंड में लागू हुए समान नागरिक संहिता की भी तारीफ की है. शत्रुघ्न सिन्हा का ये बयान तब आया है जब गुजरात में भी समान नागरिक संहिता लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. गुजरात में यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए एक कमेटी बनाई गई हैं. इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत जज रंजना देसाई करेंगीं. रंजना देसाई ने ही उत्तराखंड में लागू यूसीसी का मसौदा तैयार किया है. टीएमसी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने संसद के बाहर एएनआई से बातचीत करते हुए कहा, "उत्तराखंड में जो हुआ है, प्रथम दृष्टतया हम सब कहें तो सराहनीय है… यूनिफॉर्म सिविल कोड तो होना ही चाहिए, किसी भी देश में होना चाहिए और तमाम देशवासी इस बात को मानेंगे." हालांकि टीएमसी सांसद ने कहा कि यूसीसी के अंदर बहुत सारे पेंच हैं जिन्हें दूर किये जाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि यूसीसी में बहुत सारे लोगों का, बहुत सारे वर्गों का ध्यान रखा जाना जरूरी है. ऐसा नहीं लगना चाहिए कि आप वोट के लिए अथवा चुनाव के लिए इसे लागू कर रहे हैं. बीफ बैन का मुद्दा उठाते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि कई जगह इसे बैन किया गया है और ये सही भी है. उन्होंने कहा, "मुझे पूछोगो तो बीफ बैन सही है और बीफ बैन ही क्यों पूरे देश में नॉनवेज ही बैन किया जाना चाहिए. ये मेरी राय है." उन्होंने केंद्र पर नाराजगी जताते हुए कहा कि आपने कई जगह बीफ बैन किया हुआ है और कई जगह इसे बैन नहीं किया है. नॉर्थ ईस्ट में क्या है? उन्होंने कहा कि बीफ को लेकर नॉर्थ इंडिया में 'मम्मी'और नॉर्थ ईस्ट में 'यम्मी' वाली नीति नहीं चलेगी. यूनिफॉर्म सिविल कोड की चर्चा करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि यूसीसी में बहुत पेंच है. इस पर विचार विमर्श के लिए सर्वदलीय बैठक होनी चाहिए.सबकी राय ली जानी चाहिए. और इसे चुनाव अथवा वोट के दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए. इसे समझबूझ कर सावधानी के साथ किया जाना चाहिए. टीएमसी सांसद ने कहा कि अगर इसे सावधानी के साथ, चर्चा के बाद लागू किया जाएगा तो इसके सकारात्मक परिणाम होंगे. गौरतलब है कि शत्रुघ्न सिन्हा पहले बीजेपी के ही नेता थे. लेकिन लंबे समय तक बीजेपी नेतृत्व से दूरी के बाद अप्रैल 2019 में वे कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए थे. मार्च 2022 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस ज्वाइन कर ली थी. अप्रैल 2022 में आसनसोल लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में उन्होंने बीजेपी को शिकस्त दी थी. फिर 2024 लोकसभा चुनाव में उन्होंने आसनसोल सीट से टीएमसी के टिकट पर जीत हासिल की थी.   Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 38

गुजरात में जल्द लागू होगा UCC,सीएम भूपेन्द्र पटेल ने किया कमेटी का ऐलान

अहमदाबाद  उत्तराखंड के बाद अब एक और बीजेपी शासित राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, गुजरात सरकार समान नागरिक संहिता को लागू करने को लेकर मंगलवार को घोषणा कर सकती है। सूत्रों ने बताया कि गुजरात सरकार आज प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से यूसीसी समिति के बारे में घोषणा कर सकती है। इस समिति में तीन से पांच लोग हो सकते हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी दोपहर प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूसीसी को लेकर ऐलान करेंगे। गुजरात में वर्तमान में भाजपा की सरकार है, इसे भाजपा का गढ़ भी माना जाता है। पिछले 30 सालों से यहां की सत्ता पर भाजपा काबिज है। उत्तराखंड में यूसीसी लागू गुजरात में 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने यूसीसी को लेकर अपने इरादों को जाहिर किया था। बता दें कि उत्तराखंड में 27 जनवरी को यूसीसी लागू किया गया था। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यूसीसी (समान नागरिक संहिता) पोर्टल और नियम को लॉन्च किया। उन्होंने बताया था कि उत्तराखंड में यूसीसी लागू करके हम संविधान निर्माता बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। उत्तराखंड सरकार ने यूसीसी के लिए काफी बातों पर विचार-विमर्श किया। यूसीसी में अनुसूचित जनजातियों को छूट दी गई है। इसके अनुसार, यूसीसी उत्तराखंड और उससे बाहर रहने वाले राज्यों के निवासियों पर लागू होगा। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों को छूट दी गई है। UCC के प्रावधान – विवाह और तलाक के लिए कानून एक समान होगा। एक पुरुष और महिला के बीच विवाह तभी हो सकता है जब वे विवाह के लिए योग्य आयु प्राप्त कर चुके हों और विवाह के समय दोनों पक्षों में से किसी का भी कोई जीवित जीवनसाथी न हो। – कपल को मानसिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए और विवाह के लिए सहमति देने में सक्षम होना चाहिए। – UCC के अनुसार, पुरुष की कानूनी विवाह आयु 21 वर्ष और महिला की 18 वर्ष होनी चाहिए, और दोनों पक्ष निषिद्ध संबंधों के दायरे में नहीं होने चाहिए। – UCC 60 दिनों के भीतर विवाह पंजीकरण को भी अनिवार्य बनाता है। हालांकि, यूसीसी का कहना है कि केवल पंजीकरण न होने के कारण विवाह को अमान्य नहीं माना जाएगा। – जिन व्यक्तियों ने पहले ही नियमों के अनुसार अपना विवाह पंजीकृत करा लिया है, उन्हें फिर से पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उन्हें पावती देनी होगी। – विवाह पंजीकरण ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से कराया जा सकता है। पंजीकरण के लिए आवेदन प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर उप-पंजीयक को निर्णय लेना अनिवार्य है। यदि 15 दिनों के भीतर कोई निर्णय नहीं होता है, तो अधिनियम के अनुसार आवेदन स्वचालित रूप से रजिस्ट्रार को भेज दिया जाएगा। – आवेदन खारिज होने पर पारदर्शी अपील प्रक्रिया उपलब्ध है। साथ ही, गलत जानकारी देने पर दंड का प्रावधान है। – राज्य सरकार विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया की निगरानी और क्रियान्वयन के लिए रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्रार और उप-रजिस्ट्रार नियुक्त करेगी। – यह वसीयत और कोडिसिल (वसीयतनामा उत्तराधिकार) के निर्माण और निरस्तीकरण के लिए एक सुव्यवस्थित ढांचा प्रदान करती है। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 50

UCC: ‘नियमावली और क्रियान्वयन समिति’ ने आज सचिवालय में मुख्यमंत्री को ड्राफ्ट सौंपा

देहरादून समान नागरिक संहिता, उत्तराखण्ड 2024 अधिनियम के राज्य में क्रियान्वयन के लिए सेवानिवृत्त आई.ए.एस. शत्रुघ्न सिंह की अध्यक्षता में बनाई गई ‘नियमावली और क्रियान्वयन समिति’ ने आज सचिवालय में मुख्यमंत्री @pushkardhami  को नियमावली का ड्राफ्ट सौंपा। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष सेवानिवृत्त आई.ए.एस.शत्रुघ्न सिंह, सदस्य सामाजिक कार्यकर्ता मनु गौड़, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, अपर पुलिस महानिदेशक अमित सिन्हा और स्थानिक आयुक्त अजय मिश्रा मौजूद रहे। समिति द्वारा समान नागरिक संहिता, उत्तराखण्ड 2024 अधिनियम की नियमावली का ड्राफ्ट सौंपे जाने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि 2022 में प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद हमने मंत्री मण्डल की पहली बैठक में निर्णय लिया कि प्रदेश में समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देशाई की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति बनाई गई। कमेटी के रिपोर्ट सौंपने के बाद 07 फरवरी, 2024 को राज्य विधान सभा में पारित किया गया। उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता विधेयक 2024 पर महामहिम राष्ट्रपति की सहमति के बाद 12 मार्च, 2024 को समान नागरिक संहिता उत्तराखण्ड, 2024 अधिनियम पारित हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आज समान नागरिक संहिता अधिनियम की नियमावली सौंपी गई है। इस नियमावली में मुख्य रूप से चार भाग है। जिसमें विवाह एवं विवाह-विच्छेद लिव-इन रिलेशनशिप, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण तथा उत्तराधिकार सम्बन्धी नियमों के पंजीकरण सम्बन्धी प्रक्रियाएं उल्लिखित है। उन्होंने कहा कि जल्द ही मंत्रीमण्डल की बैठक में इस अधिनियम को राज्य में प्रभावी रूप से लागू करने की तिथि तय की जायेगी। इसके लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जन सामान्य की सुलभता के दृष्टिगत इस समान नागरिक संहिता के लिए एक पोर्टल तथा मोबाइल एप भी तैयार किया गया है, जिससे कि पंजीकरण, अपील आदि की समस्त सुविधाएं जन सामान्य को ऑनलाइन माध्यम से सुलभ हो सके। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विधेयक बना है। जल्द इस अधिनियम को धरातल पर उतारा जायेगा। आजादी के बाद उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बन जायेगा जिसे समान नागरिक संहिता लागू करने का गौरव प्राप्त होगा। इस अवसर पर उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद विश्वास डाबर, अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु, सचिव शैलेश बगौली, विनय शंकर पाण्डेय, विशेष सचिव श्रीमती रिद्धिम अग्रवाल, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी उपस्थित रहे। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 54