हम सब मिलकर छत्तीसगढ़ को विकसित छत्तीसगढ़ बनाएंगे:विष्णु देव साय

रायपुर  भारतीय जनता पार्टी के कुशाभाऊ ठाकरे परिसर स्थित प्रदेश कार्यालय में मंगलवार को छत्तीसगढ़ में भाजपा की ऐतिहासिक और शानदार जीत के एक साल पूरे होने पर 'जनादेश दिवस' का आतिशी आयोजन रखा गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय,  उप मुख्यमंत्री अरुण साव की उपस्थिति में पार्टी पदाधिकारियों, नेताओं व कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी और ढोल-नगाड़ों की थाप पर नृत्य करते हुए पार्टी की जीत की सालगिरह मनाई और अपने उत्साह व उल्लास को व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 3 दिसम्बर, 2023 को छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित हुए थे, जिसमें भाजपा ने ऐतिहासिक जनादेश के साथ शानदार जीत अर्जित की थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर उपस्थित पार्टी नेताओं, पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज 3 दिसंबर को हम सभी लोग जनादेश दिवस के रूप में मना रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ,मा.राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा,केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह व  सभी केंद्रीय नेताओं के मार्गदर्शन में जनता ने मोदी जी की गारंटी पर मुहर लगाई।तत्कालीन प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के तौर पर  मौजूदा उप मुख्यमंत्री अरुण साव की संघर्षपूर्ण महती भूमिका का उल्लेख कर साय ने कहा कि तब साव ने नेतृत्व महिला मोर्चा, युवा मोर्चा सहित सभी मोर्चा-प्रकोष्ठों को साथ लेकर कांग्रेस के कुशासन को उखाड़ फेंकने के लिए, कांग्रेस की भूपेश सरकार के गलत कार्यों के विरुद्ध जनमत तैयार करने के लिए संघर्ष और आंदोलन किए। पूरे प्रदेश में घूम-घूमकर हमारे कार्यकर्ताओं ने उत्साह का संचार किया और इसका परिणाम हुआ कि 2023 में विधानसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ की 3 करोड़ जनता का भरपूर आशीर्वाद भारतीय जनता पार्टी को मिला। 3 दिसंबर 2023 को विधानसभा चुनाव के परिणाम आए और भाजपा को शानदार व ऐतिहासिक विजय मिली। छत्तीसगढ़ की जनता ने दिल खोलकर भाजपा को सत्ता सौंपी।  54 सीटों में भाजपा को जिताकर सरकार चलाने का जनादेश दिया। साय ने आज जनादेश दिवस की सभी लोगों को, छत्तीसगढ़ की 3 करोड़ जनता को, यहां के देव दुर्लभ मतदाताओं व पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई दी। प्रदेश के मुख्यमंत्री साय ने कहा कि तब कोई यह मानने को तैयार ही नहीं था कि भाजपा की सरकार बनेगी। तत्कालीन कांग्रेस सरकार तो इतना ओवर कॉन्फिडेंस में थी कि सरकार तो कांग्रेस की बनेगी, सबने मिलकर तत्कालीन सरकार और कांग्रेस पार्टी की मुखालफत की और चुनाव जीतने में सफल हुए। छत्तीसगढ़ की 3 करोड़ जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी पर विश्वास किया। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान छत्तीसगढ़ की जनता से जो वादा किया था, उस पर यहाँ की जनता ने विश्वास किया। सभी कार्यकर्ताओं ने खूब मेहनत की, पसीना बहाया जिसका परिणाम हुआ कि हम लोग बड़ा जनादेश लेकर सरकार में बैठे हैं। साय ने कहा कि हमारी सरकार ने पूरी ईमानदारी के साथ मोदी की गारंटी को पूरा किया है और अधिकांश वादे हमारी सरकार ने पूरे कर दिए हैं। चाहे वह प्रधानमंत्री आवास देने की बात हो या किसानों के साथ न्याय करने की बात हो, 3100 रु. प्रति एकड़ धान खरीद और अंतर की राशि एकमुश्त देने की बात हो। 70 लाख से ज्यादा माताओं-बहनों को महतारी वंदन योजना की राशि उनके खाते में हस्तांतरित कर रहे हैं और आज भी रायगढ़ से महतारी वंदन योजना की लाभार्थी के हाथों से बटन दबाकर महतारी वंदन योजना की किश्त जारी की गई है। रामलला दर्शन योजना की शुरुआत हो गई है। तेंदूपत्ता संग्रहण की दर को 4000 से बढ़ाकर 5500 रु. कर दिया गया है। मोदी की गारंटी का अधिकांश वादा हम लोगों ने पूरा किया है। पीएससी घोटाले की भी जाँच सीबीआई कर रही है। उसमें जो दोषी है, उनके लगातार जेल जाने का सिलसिला जारी है। पूरे प्रदेश में सुशासन देने का हमारा संकल्प है। साय ने कहा कि आज कई क्षेत्रों में जो भ्रष्टाचार का रास्ता था, हम उसे बंद कर रहे हैं। कोयला में 25 रुपए प्रति टन के हिसाब से अगर पैसा नहीं मिलता था तो टोकन नहीं कटता था, उसको भी हमने बंद करके ऑनलाइन कर दिया है। कांग्रेस की सरकार ने 2000 करोड़ रु. का शराब घोटाला भी किया। आज हम सुशासन स्थापित कर रहे हैं और भ्रष्ट व आपराधिक मामलों में संलिप्त लोगों पर लगातार कार्रवाई हो रही है। बस्तर क्षेत्र में भी शांति प्रदान करने का काम हमारी सरकार कर रही है। नक्सलवाद के साथ जो हमने मजबूती के साथ लड़ाई लड़ी है और डबल इंजन की सरकार का लाभ हमें मिल रहा है इसकी तारीफ पूरे देश में हो रही है। यह सब आप लोगों के आशीर्वाद का परिणाम है। हम सभी लोग मिलकर छत्तीसगढ़ को विकसित छत्तीसगढ़ के रूप में खड़ा करें, प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत की कल्पना को साकार करने में सहभागी होना है। भूपेश सरकार के डंडों और दमन से भाजपा कार्यकर्ता डरा नहीं,जनता ने जिस भावना से जनादेश दिया ,सरकार ने उसी अनुरूप काम किया:अरुण साव प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने अपने संबोधन में कहा कि एक साल पहले छत्तीसगढ़ की जनता-जनार्दन ने कांग्रेस की अत्याचारी और भ्रष्टाचारी सरकार को उखाड़ फेंका था। आज राज्य में 'विष्णु का सुशासन' है और प्रदेश विकास की ओर तेज गति से बढ़ रहा है। मोदी की हर-एक गारंटी पूरी हो रही है। आज छत्तीसगढ़ के गांव और शहरों में तेज गति से विकास हो रहा है।  छत्तीसगढ़ की जनता ने जो जनादेश दिया, उसके लिए छत्तीसगढ़ की जनता को हम प्रणाम करते हैं। आज का ऐतिहासिक दिन हमेशा छत्तीसगढ़ के इतिहास में 3 दिसंबर 2023 का दिन स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा जब एक बार फिर छत्तीसगढ़ में नई सुबह हुई थी। आज छत्तीसगढ़ नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर हो रहा है। सभी कार्यकर्ताओं ने अथक संघर्ष व प्रयास किया है, मुकदमे झेले, लाठी-डंडा खाए, लेकिन डिगे नहीं। साव ने तब कही गई अपनी बात को भी याद किया कि भारतीय जनता पार्टी का एक-एक कार्यकर्ता न डरेगा, न झुकेगा और राज्य की अन्यायी, अत्याचारी और भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंके बिना चैन की नींद नहीं सोएगा। साव ने कहा कि हर-एक कार्यकर्ता ने पूरी ताकत लगाई और जनता का आशीर्वाद मिला। छत्तीसगढ़ के हर वर्ग का आज कल्याण हो रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम से छत्तीसगढ़ नये  इतिहास की … Read more

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की नेतृत्व में दिव्यांग व्यक्तियों को मिल रहा है कई योजनाओं का लाभ: महेन्द्र सिंह मरपच्ची

विश्व दिव्यांग दिवस पर विशेष लेख मनेन्द्रगढ़/एमसीबी विश्व दिव्यांग दिवस हर वर्ष 3 दिसंबर को बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। इसका उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों को सुनिश्चित करना, उनके लिए अवसरों का विस्तार करना और उनके प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना है। इस दिव्यांग दिवस की शुरुआत 1992 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा की गई थी। दिव्यांग व्यक्तियों के लिए एक ऐसा समाज बनाना जहां वे बिना किसी भेदभाव के अपने अधिकारों का उपयोग कर सकें, इस दिव्यांग दिवस का मुख्य लक्ष्य है। सन् 1981 में संयुक्त राष्ट्र ने ’’अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग वर्ष’’ मनाया। इसके बाद 1983 से 1992 के दशक को ’’दिव्यांग व्यक्तियों का दशक’’ घोषित किया गया। इस दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में दिव्यांग व्यक्तियों को समान अवसर प्रदान करने के प्रयास किए गए। 2006 में संयुक्त राष्ट्र ने दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों पर अभिसमय (United Nations Convention on the Rights of Persons with Disabilities) लागू किया। यह अभिसमय दिव्यांग व्यक्तियों को समाज के हर क्षेत्र में अधिकार और समावेश प्रदान करने के लिए कानूनी मान्यता देता है। भारत ने इसे 2007 में अंगीकृत किया और इसे अपनी नीतियों में सम्मिलित किया। भारत में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों को लेकर 1995 में ’’दिव्यांग व्यक्तियों का अधिकार अधिनियम’’ लागू हुआ। इस अधिनियम ने शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक स्थानों पर दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों को सुनिश्चित किया। 2016 में इस कानून को संशोधित कर दिव्यांगताओं की संख्या 21 कर दी गई और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आरक्षण, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत बनाया गया है। केंद्र सरकार ने दिव्यांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें ’’सुगम्य भारत अभियान’’ प्रमुख है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक भवनों, परिवहन और डिजिटल सेवाओं को दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुलभ बनाना है। ’’दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग’’ दिव्यांग व्यक्तियों के लिए शिक्षा, रोजगार और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराता है। वहीं ’’स्किल इंडिया’’ पहल के अंतर्गत दिव्यांग युवाओं को स्वरोजगार और रोजगार के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय के नेतृत्व में दिव्यांग व्यक्तियों के उत्थान के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गई हैं। समावेशी शिक्षा के तहत विशेष स्कूल और उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।  दिव्यांगजन स्वरोजगार योजना के तहत दिव्यांग व्यक्तियों को रोजगार के अवसर देने के लिए वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ’’सुगम छत्तीसगढ़ अभियान’’ के माध्यम से सार्वजनिक भवनों और परिवहन को दिव्यांग व्यक्तियों के लिए अनुकूल बनाया गया है। सरकार ने विभिन्न प्रकार के नि:शुल्क उपकरण वितरण और दिव्यांग पेंशन योजना के माध्यम से दिव्यांग व्यक्तियों को आर्थिक और भौतिक सहायता प्रदान की है। फिर भी आज दिव्यांग व्यक्तियों के समक्ष कई चुनौतियां हैं। इनमें समाज में भेदभाव, सुविधाओं की कमी और रोजगार और शिक्षा में सीमित अवसर प्रमुख हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने, ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष स्कूल खोलने और तकनीकी नवाचार का उपयोग करने की आवश्यकता है। आज दिव्यांगता को शारीरिक, मानसिक, संवेदी और बौद्धिक श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। शारीरिक दिव्यांगता जैसे पोलियो या रीढ़ की हड्डी में चोट, दृष्टिबाधित दिव्यांगता, श्रवण बाधित दिव्यांगता, मानसिक और बौद्धिक दिव्यांगता और न्यूरोलॉजिकल दिव्यांगता मुख्य प्रकार हैं। इनके प्रमुख कारणों में जन्मजात दोष, दुर्घटनाएं, संक्रमण, कुपोषण और मानसिक आघात शामिल हैं। इन समस्याओं का उपचार फिजियोथेरेपी, सर्जरी, काउंसलिंग और सहायक उपकरणों के माध्यम से किया जा सकता है। दिव्यांग व्यक्तियों को समाज में अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आज भी उन्हें कहीं-कहीं भेदभाव का शिकार बनाया जाता है, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में उनके अवसर सीमित होते हैं, और सार्वजनिक स्थानों तक उनकी पहुंच नहीं होती। स्वास्थ्य सेवाओं और उपकरणों की कमी भी उनकी चुनौतियों को बढ़ाती है। इन समस्याओं से निपटने के लिए जागरूकता अभियान चलाने, सुलभता बढ़ाने, विशेष स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और आर्थिक सहायता देने की आवश्यकता है। केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार ने दिव्यांग व्यक्तियों के कल्याण के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। इनमें ’’सुगम्य भारत अभियान’’, ’’दिव्यांगजन स्वरोजगार योजनाएं’’ और ’’कृत्रिम अंग योजनाएं’’ प्रमुख हैं। छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय के नेतृत्व में समावेशी शिक्षा, स्वरोजगार योजना और ’’सुगम छत्तीसगढ़ अभियान’’ जैसी योजनाओं के माध्यम से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए बेहतर अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। यह विश्व दिव्यांग दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि यह दिव्यांग दिवस हमें एक ऐसा समाज बनाने की प्रेरणा देता है जो समानता, अधिकार और समावेशिता के मूल्यों पर आधारित हो। केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ की सरकार ने इस दिशा में सराहनीय प्रयास किए हैं। यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम इन प्रयासों को आगे बढ़ाएं और एक ऐसा वातावरण बनाएं जिसमें दिव्यांग व्यक्तियों को सम्मान और समान अवसर मिले। recent visitors 77

मुख्यमंत्री साय की पहल पर भारत सरकार से मिली 15,000 आवासों की स्वीकृति

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल पीड़ित परिवारों के पुनर्वास के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के अंतर्गत 15,000 आवासों की स्वीकृति प्रदान की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले आत्मसमर्पित नक्सलियों और पीड़ित परिवारों को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए यह पहल एक बड़ा कदम है। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत 15,000 आवास केवल मकान नहीं बल्कि उन परिवारों के लिए सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक हैं। हमारी सरकार इस योजना को पूरी पारदर्शिता और तत्परता के साथ लागू करेगी। उन्होंने कहा कि यह योजना प्रदेश के विकास और शांति स्थापना की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने कहा कि नक्सल पीड़ित परिवारों और आत्मसमर्पित नक्सलियों को बेहतर जीवन देने के लिए हमारी सरकार संकल्पबद्ध है। पीड़ित परिवारों को आवास मिल जाने से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। यह योजना सामाजिक समरसता और विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होगी। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि इस योजना में विशेष रूप से उन परिवारों को शामिल किया जाएगा जिनका नाम सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना 2011 और आवास प्लस 2018 की सूची में शामिल नहीं था। इन नामों को 6 दिसंबर 2024 तक आवास प्लस पोर्टल पर अपलोड करने की अनुमति केंद्र सरकार द्वारा दी गई है। उपमुख्यमंत्री शर्मा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलकर आत्मसमर्पित नक्सलियों एवं नक्सल पीड़ित परिवारों हेतु प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत आवास देने की स्वीकृति हेतु निवेदन किया था परिणामस्वरूप 15 हजार आवास की स्वीकृति भारत सरकार से दी गयी है।            उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि इस विशेष परियोजना के तहत पुलिस अधीक्षक जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जिला पंचायत को आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल पीड़ित परिवारों की सूची प्रदान करेंगे। इसके बाद जिला पंचायत द्वारा इस सूची का सर्वेक्षण और सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन उपरांत कलेक्टर के माध्यम से लाभार्थियों के लिए भूमि का चिन्हांकन किया जाएगा। इसके आधार पर प्रधानमंत्री आवास योजना के दिशानिर्देशों के अनुरूप आवास निर्माण की प्रक्रिया आरंभ होगी। recent visitors 60

सड़कों पर ब्लैक स्पॉट के सुधार कार्य में तेजी लाएं, निर्माणाधीन ट्रामा स्टेब्लाईजेशन यूनिट्स का कार्य जल्द पूर्ण करें : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में दिए निर्देश रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में प्रदेश के सड़क सुरक्षा परिदृश्य, सड़क दुर्घटना के नियंत्रण के उपायों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने बैठक में कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के नियंत्रण के लिए दुपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट और चार पहिया वाहन चालकों के लिए सीट बेल्ट के उपयोग तथा वाहन चलाते समय सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए जनजागरूकता अभियान को प्रभावी ढंग से चलाया जाए। मुख्यमंत्री साय ने सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सड़कों पर ब्लैक स्पॉट के सुधार कार्य में तेजी लाने, जिला सड़क सुरक्षा समिति की नियमित बैठकें आयोजित करने, सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों के इलाज के लिए निर्माणाधीन ट्रामा स्टेब्लाईजेशन यूनिट्स का कार्य जल्द से जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने बैठक में परिवहन विभाग द्वारा तैयार कराया गया ‘‘बस संगवारी एप’’ लांच किया और परिवहन विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा पर प्रकाशित पोस्टर का विमोचन किया।     बैठक में जानकारी दी गई कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा राज्य के स्कूलों में कक्षा पहली से लेकर दसवीं तक के राज्य शैक्षणिक अनुसंधान परिषद की पाठ्यपुस्तकों में सड़क यातायात नियमों से संबंधित अध्याय पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। बैठक में बताया गया कि यातायात व्यवस्था का इलेक्ट्रॉनिक सर्विलेंस रायपुर, बिलासपुर और नवा रायपुर में किया जा रहा है। भिलाई और दुर्ग में यह व्यवस्था आंशिक रूप से संचालित है। सितंबर 2023 से अक्टूबर 2024 तक 101 ब्लैक स्पॉट और 748 जंक्शन के सुधार कार्य पूर्ण किए गए हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग करने पर सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु की संभावना 40 प्रतिशत तक कम हो सकती है। अधिकारियों ने बताया कि यातायात नियमों के उल्लंघन पर परिवहन विभाग द्वारा 6 लाख 70 हजार से अधिक तथा पुलिस विभाग द्वारा 4 लाख 87 हजार से अधिक चालानी कार्यवाही की गई है। 01 जनवरी 2023 से 31 अक्टूबर 2024 तक 7826 वाहन चालकों का लायसेंस निलंबित किया गया है। 8 दुर्घटनाजन्य क्षेत्रों राजनांदगांव, धरसींवा अभनपुर, पाली, सिमगा, सुकमा, बेमेतरा और पत्थलगांव में ट्रामा स्टेब्लाईजेशन यूनिट निर्माण के लिए राशि स्वीकृत की गई है। 14 हजार 261 वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रेकिंग डिवाइस, 72 हजार से अधिक वाहनों में स्पीड गवर्नर तथा 2200 बसों में पेनिक बटन लगाए गए हैं। बैठक में ब्लैक स्पॉट की पहचान, सुधार की कार्यवाही, सड़कों में यातायात संकेतक, होर्डिंग्स हटाने, फुटपाथ, पार्किंग, सर्विस लेन से अतिक्रमण हटाने आदि कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, बसव राजू एस. और राहुल भगत, परिवहन विभाग के सचिव एस. प्रकाश, आबकारी सचिव श्रीमती आर. संगीता, एडीजी ट्रेफिक प्रदीप गुप्ता, अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर उपस्थित थे। सभी संभागों के आयुक्त एवं पुलिस महानिरीक्षक वर्चुअली बैठक में शामिल हुए। अंतर्विभागीय लीड एजेंसी के अध्यक्ष एवं एआईजी ट्रेफिक संजय शर्मा ने बैठक में प्रेजेंटेशन दिया। recent visitors 62

आइकोनिक टूरिज्म प्रोजेक्ट्स के द्वारा छत्तीसगढ़ को मिलेगी नई पहचान

रायपुर  मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रयासों से छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड को केंद्र सरकार से एक बड़ी उपलब्धि प्राप्त हुई है। केंद्र सरकार ने स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट 2024-25 के तहत राज्य की दो महत्वपूर्ण पर्यटन परियोजनाओं के लिए 147.66 करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत की है।  इसके अंतर्गत 95.79 करोड़ रूपए की लागत से माना तूता रायपुर में चित्रोत्पला फिल्म सिटी का निर्माण तथा 51.87 करोड़ रूपए की लागत से माना तूता रायपुर में जनजातीय और सांस्कृतिक कन्वेंशन सेंटर का निर्माण शामिल है। छत्तीसगढ़ में इन परियोजनाओं के शुरू होने से राज्य में पर्यटन ढांचे को मजबूत करने और स्थानीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने में मदद मिलेगी। ये योजनाएं रोजगार सृजन, विकास और छत्तीसगढ़ को पर्यटन के वैश्विक मानचित्र में  स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य ने केंद्रीय पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से 15 अक्टूबर 2024 को नई दिल्ली में मुलाकात कर छत्तीसगढ़ की पर्यटन गतिविधियों के बारे में जानकारी देते हुए स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट योजना के तहत राजधानी रायपुर में फिल्म सिटी, कन्वेंशन सेंटर, वेलनेस रिसॉर्ट और नेचर सिटी के लिए लगभग 300 करोड़ रुपये के प्रस्ताव प्रस्तुत किए थे जिसके परिप्रेक्ष में फिल्म सिटी और कन्वेंशन सेंटर निर्माण के लिए केंद्र सरकार से 147.66 करोड़ रूपए की स्वीकृति प्राप्त हुई है। पर्यटन मंत्रालय,भारत सरकार के इस ठोस कदम से छत्तीसगढ़ में फिल्म मेकिंग और फिल्म टूरिज्म के लिए फिल्म सिटी निर्माण के माध्यम से अपार संभावनाओं के द्वार खुल गए हैं। यह सफलता छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है और राज्य को एक वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने की दिशा में नए अवसर खोल रही है। recent visitors 64

मुख्यमंत्री ने जनजातीय अस्मिता, अस्तित्व और विकास विषय पर आयोजित संगोष्ठी को किया संबोधित

रायपुर मुख्यमंत्री ने जनजातीय अस्मिता, अस्तित्व और विकास विषय पर आयोजित संगोष्ठी को किया संबोधित जनजातीय समाज का इतिहास धरती पर मनुष्य के पहले पदचाप के साथ जुड़ा हुआ है। जनजातीय संस्कृति ने भगवान श्रीराम को अपने हृदय में बसा रखा है। भगवान राम ने छत्तीसगढ़ में ही वनवास बिताया, यहीं पर उन्होंने माता शबरी के जूठे बेर खाए। जनजातीय अस्मिता का प्रश्न भारत की सनातन परंपरा की अस्मिता से जुड़ा हुआ प्रश्न है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में जनजातीय अस्मिता, अस्तित्व और विकास विषय पर आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए गर्व की बात है कि आज हमें जनजातीय समुदायों की अस्मिता और विरासत के प्रति संवेदनशील यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का नेतृत्व मिला है। आज जनजातीय समुदाय की हमारी बहन श्रीमती द्रौपदी मुर्मु भारत के सर्वाेच्च पद पर आसीन हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनजाति समाज सांस्कृतिक रूप से समृद्ध समाज है। यह समाज कुप्रथाओं का मुखर विरोध करता है। भारत की संस्कृति और देश की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए जनजातीय जननायकों के योगदान को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर पूरे देश में 13 से 15 नवम्बर तक जनजातीय गौरव दिवस मनाया गया। मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज की परंपराओं, संस्कृति रीति-रिवाज, तीज-त्यौहार और शासन द्वारा जनजातीय उत्थान के लिए शासन द्वारा चलाई जा रही योजनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 13 नवंबर को जशपुर जिले में आयोजित पदयात्रा इतनी सफल रही कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी खुलकर तारीफ की और ऐसे आयोजनों को जनजातीय समाज के विकास और उत्थान में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर हुए राष्ट्रीय आयोजन ने अन्य प्रांतों से आए आदिवासी समुदाय को एक दूसरे की संस्कृति को जानने-समझने का सुंदर अवसर दिया। साय ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल जी ने अपने कार्यकाल के दौरान सबसे पहले पृथक जनजातीय कल्याण मंत्रालय बनाया और आदिवासियों के विकास के लिए एक मजबूत नींव रखी। उन्होंने कहा कि हम मैदानी और जनजातीय क्षेत्रों में अवसरों की समानता स्थापित करने के लिए अपनी योजनाएं और नीतियां बना रहे हैं ताकि छत्तीसगढ़ के प्रत्येक समुदाय के पास विकास के समान अवसर हों और जनजातीय समाज अपनी प्राकृतिक और भौगोलिक जटिलताओं पर जीत हासिल करते हुए समग्र भारत के विकास की मुख्य धारा में शामिल हो सकें। जब हम जनजातीय समुदायों की अस्मिता की रक्षा करेंगे, उनकी संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन करेंगे, उनके इतिहास और उनके नायकों का गौरवगान करेंगे तो निश्चित रूप से मां भारती का यश बढ़ेगा, उसका गौरव गान होगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारत के जनजातीय समुदायों के समग्र विकास के लिए मोदी जी पीएम जनमन योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी योजनाएं चला रहे हैं। ये योजनाएं जनजातीय समुदायों के जीवन में परिवर्तन लाने के लिए क्रांतिकारी योजनाएं साबित हो रही है। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना जैसी अनेक योजनाओं से जनजातीय समुदायों को बड़ा संबल मिला है। पिछले 11 महीने में छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर अंचल में शांति स्थापित करने के लिए तेजी से अपने कदम बढ़ाए हैं। नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से शासन की योजनाओं को दूरस्थ अंचलों तक पहुंचाने की अनूठी पहल की गई है। बस्तर अंचल में सुरक्षाबलों के 34 नए कैंप खोले गए हैं और लगभग 96 गांवों में शासकीय योजनाओं का लाभ ग्रामीणों को मिल रहा है। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि जनजातीय महानायकों के गौरवशाली इतिहास की जानकारी आने वाली पीढ़ी को हो इसलिए ऐसे आयोजन आवश्यक हैं। यह हमारी जिम्मेदारी है कि उनके मूल्यों को अगली पीढ़ी तक ले जाएं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज ने सदैव प्रकृति के संरक्षण की दिशा में कार्य किया है। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता अतुल जोग ने कहा कि बिना स्वार्थ के जनजातीय समाज ने मानव सेवा का काम किया है। इसका सुंदर उदाहरण पद्म पुरस्कारों की घोषणाओं में भी देखने को भी मिला, जिसमें बड़ी संख्या में जनजातीय समुदाय के लोग शामिल रहे हैं। संगोष्ठी को पवन साय और अनुराग जैन ने भी संबोधित किया। उच्च शिक्षा विभाग के सचिव प्रसन्ना आर. ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जनजातीय समुदाय के विद्यार्थियों के लिए चलाई जा रही योजनाओं के बारे में जानकारी दी। recent visitors 67

चित्रोत्पला फिल्म सिटी से छत्तीसगढ़ी फिल्मों, नाटकों के साथ पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

छत्तीसगढ़ में 147 करोड़ रूपए की लागत से बनेगी चित्रोत्पला फिल्म सिटी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस पर प्रदेशवासियों को बड़ी सौगात चित्रोत्पला फिल्म सिटी से छत्तीसगढ़ी फिल्मों, नाटकों के साथ पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा पद्मविभूतियों की सम्मान राशि प्रतिमाह 5 हजार रूपए से बढ़ाकर 10 हजार रुपए करने की घोषणा रायपुर छत्तीसगढ़ में 147 करोड़ रूपए की लागत से  चित्रोत्पला फिल्म सिटी बनेगी। इसके लिए भारत सरकार ने 147 करोड़ रूपए की स्वीकृति दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी भाषा में दिए गए अपने सम्बोधन में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के प्रस्ताव पर केन्द्र सरकार द्वारा फिल्म सिटी के निर्माण की स्वीकृति प्रदान करते हुए राशि की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने कहा कि चित्रोत्पला फिल्म सिटी के निर्माण से छत्तीसगढ़ी फिल्मों, छत्तीसगढ़ी नाटकों को प्रोत्साहन तो मिलेगा ही, साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।     मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में पद्मसम्मान से विभूषित छत्तीसगढ़ की विभूतियों को दी जाने वाली सम्मान राशि प्रतिमाह 5 हजार रूपए से बढ़ाकर 10 हजार रूपए करने की घोषणा की।     मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। छत्तीसगढ़ी गुरतुर भाषा है, जो हमें आपस में दिल से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी फिल्में काफी लोकप्रिय हैं। छत्तीसगढ़ी भाषा को बढ़ावा देने में छत्तीसगढ़ी फिल्मों का भी बड़ा योगदान है।     मुख्यमंत्री ने साहित्य परिषद में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के विलय की समाप्ति की घोषणा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग राजभाषा छत्तीसगढ़ी को बढ़ावा देने का कार्य करता रहेगा। उल्लेखनीय है कि पूर्व में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का साहित्य परिषद में विलय कर दिया गया था।     मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी भाषा को समृद्ध करने वाले छह साहित्यकारों को शॉल-श्रीफल और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा प्रकाशित छत्तीसगढ़ी भाषा में लिखित 12 पुस्तकों का विमोचन भी किया।     कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा को लोकप्रिय बनाने और राजभाषा का सम्मान देने के लिए यह जरूरी है कि हम छत्तीसगढ़ी भाषा में बातचीत करें और नई पीढ़ी को भी छत्तीसगढ़ी बोलना सिखाए। उन्होंने साहित्यकारों से छत्तीसगढ़ी भाषा में उपन्यास, कविता और इतिहास का लेखन करने का आव्हान किया। उन्होंने कहा कि विधानसभा में सदस्य छत्तीसगढ़ी में अपना सम्बोधन दे सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सांसद के रूप में वे छत्तीसगढ़ी को संविधान की आठवें अनुसूची में शामिल कराने का प्रयास करेंगे।     कार्यक्रम में पद्डॉ. सुरेन्द्र दुबे और डॉ. रमेन्द्रनाथ मिश्र विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम में संस्कृति विभाग के सचिव अन्बलगन पी., संचालक संस्कृति एवं राजभाषा विवेक आचार्य ने छत्तीसगढ़ी राजभाषा में सम्बोधन दिया। राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार ने बताया कि आयोग द्वारा छत्तीसगढ़ी में 2700 से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। आयोग द्वारा अब तक छत्तीसगढ़ी भाषा की 1400 पुस्तकों का प्रकाशन किया जा चुका है। recent visitors 64