बीईएमएल के हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट संयंत्र को मंजूरी, स्थानीय रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य को औद्योगिक और आर्थिक विकास के नए शिखर पर ले जाने की दिशा में आज एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में महानदी मंत्रालय भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) को राज्य में हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग संयंत्र के स्थापना की सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। इस संयंत्र के लिए बिलासपुर, चांपा के समीप नेशनल हाईवे से लगी 100 एकड़ भूमि को टोकन दर पर आबंटित करने का निर्णय लिया गया है, जिसका उद्देश्य स्थानीय रोजगार सृजन और सूक्ष्म-लघु उद्योगों को प्रोत्साहन देना है। छत्तीसगढ़ सरकार की नई औद्योगिक नीति 2024-30, जो एक नवंबर 2024 से लागू हुई, ने राज्य को निवेशकों के लिए अनुकुल बना दिया है। इस नीति का मूल मंत्र न्यूनतम शासन, अधिकतम प्रोत्साहन है, जिसके तहत उद्योगों को स्थापित करने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। सिंगल विंडो सिस्टम 2.0, ऑनलाइन आवेदन, और त्वरित प्रोसेसिंग जैसी सुविधाओं ने उद्यमियों के लिए छत्तीसगढ़ में कारोबारी माहौल को आसान किया है। नीति में फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर, और पर्यटन जैसे क्षेत्रों को विशेष प्रोत्साहन दिया गया है। इस नीति के तहत उद्योगों को 30-50 प्रतिशत सब्सिडी, 5 से 12 वर्ष तक की कर छूट और ब्याज अनुदान जैसे आकर्षक प्रावधान किए गए हैं। इसके अलावा, 1000 से अधिक रोजगार प्रदान करने वाली इकाइयों के लिए बी-स्पोक पॉलिसी और प्रति व्यक्ति 15,000 रुपये तक का प्रशिक्षण अनुदान भी शामिल है। सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 5 लाख नए रोजगार सृजित करना है, जो स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। बीईएमएल के हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट मैन्यूफैक्चरिंग संयंत्र की स्थापना से न केवल छत्तीसगढ़ में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। इस संयंत्र के लिए 100 एकड़ भूमि को टोकन दर पर आवंटित करने का निर्णय निवेशकों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह कदम सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेगा। इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा, जो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि लाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए कई सुधार किए हैं। सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से उद्योगों को सभी स्वीकृतियां एक ही मंच पर प्रदान की जा रही हैं, जिससे समय और लागत की बचत हो रही है। ऑनलाइन सुविधाओं के विस्तार ने भी उद्योगों की स्थापना को गति दी है। उद्यमी अब घर बैठे विभिन्न स्वीकृतियों के लिए आवेदन कर सकते हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने निवेश को आकर्षित करने के लिए सार्थक पहल की है। दिल्ली, मुंबई, और बेंगलुरु में आयोजित इन्वेस्टर्स कनेक्ट मीट में देश-विदेश के उद्योगपतियों ने हिस्सा लिया, जिसके परिणामस्वरूप 4 लाख 40 हजार  करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। मुंबई समिट में 6,000 करोड़ रुपये, दिल्ली में 15,184 करोड़ रुपये, और बेंगलुरु में ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की सहमति ने छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता को रेखांकित किया है। प्रोजेक्ट टूडे सर्वे के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025 में छत्तीसगढ़ में 218 नई परियोजनाओं में 1,63,749 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो देश के कुल निवेश का 3.71 प्रतिशत है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को देश के टॉप टेन निवेश वाले राज्यों में शामिल कर दिया है। मुख्यमंत्री साय ने उद्योगपतियों को आश्वस्त किया कि छत्तीसगढ़ सरकार पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल नीतियों के साथ हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति न केवल उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देती है, बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक समृद्धि पर भी जोर देती है। हमारा लक्ष्य अमृतकाल-छत्तीसगढ़ विजन 2047 नवा अंजोर के तहत विकसित भारत के निर्माण में योगदान देना है। उन्होंने कहा कि राज्य अब नक्सल प्रभावित छवि से बाहर निकलकर एक औद्योगिक और तकनीकी हब के रूप में उभर रहा है। recent visitors 34

मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष पर्यटन मंडल तथा साहित्य अकादमी के नवनियुक्त अध्यक्षों के पदभार ग्रहण समारोह में हुए शामिल

रायपुर : अबूझ नहीं रहेगा अबूझमाड़, नक्सलवाद के खात्मे के बाद बस्तर में पर्यटन के नए द्वार खुलेंगे – विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ के जंगल बेहद मोहक, यहां की जैव विविधता और ऐतिहासिक धरोहर बेमिसाल – डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष पर्यटन मंडल तथा साहित्य अकादमी के नवनियुक्त अध्यक्षों के पदभार ग्रहण समारोह में हुए शामिल मुख्यमंत्री ने राजकीय गमछा, पुष्प गुच्छ और स्मृति चिन्ह भेंटकर दोनों अध्यक्षों का किया अभिनंदन रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के नवनियुक्त अध्यक्ष नीलू शर्मा एवं छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के नवनियुक्त अध्यक्ष शशांक शर्मा के पदभार ग्रहण और अभिनंदन समारोह में शामिल हुए। छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने समारोह की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री साय ने राजकीय गमछा, पुष्प गुच्छ और स्मृति चिन्ह भेंटकर दोनों अध्यक्षों का अभिनंदन किया। विशिष्ट अतिथियों और गणमान्य नागरिकों से भरे खचाखच ऑडिटोरियम में पदभार ग्रहण करने के बाद दोनों नवनियुक्त अध्यक्षों को सभी लोगों ने बधाई और शुभकामनाएं दीं। उप मुख्यमंत्री अरुण साव, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वन मंत्री केदार कश्यप तथा खाद्य मंत्री दयालदास बघेल भी समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पदभार ग्रहण और अभिनंदन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में सरगुजा से लेकर बस्तर तक पर्यटन की अपार संभावना है। राज्य में डबल इंजन की सरकार के प्रभावी कदमों से बस्तर में नक्सलवाद अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है। नक्सलवाद के खात्मे के बाद वहां पर्यटन के नए द्वार खुलेंगे। अबूझमाड़ भी अबूझ नहीं रहेगा। वहां भी विकास की रोशनी पहुंचेगी। पर्यटन के क्षेत्र में राज्य का भविष्य उज्जवल है। इसमें रोजगार की भी बहुत संभावना है। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि दोनों नवनियुक्त अध्यक्षों के नेतृत्व में राज्य में पर्यटन और साहित्य का विकास नए शिखरों को छुएगा। छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने समारोह में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ की जैव विविधता और ऐतिहासिक धरोहर बेमिसाल हैं। पर्यटन की दृष्टि से यहां की ये दोनों खासियतें अभी तक ‘अनएक्सप्लोर्ड’ (Unexplored) हैं। नक्सलवाद की समाप्ति के बाद अब बस्तर भी जल्दी ही पर्यटन के लिए पूरी तरह खुल जाएगा। यह हिंदुस्तान का सबसे बड़ा टूरिस्ट डेस्टिनेशन (Tourist Destination) बन सकता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के जंगल बेहद मोहक हैं। यहां से बेहतर जंगल और कहीं नहीं हैं। राज्य में हर तरह की कनेक्टिविटी (Connectivity) बढ़ रही है। पर्यटन के विकास में इसका बहुत लाभ मिलेगा। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य में पर्यटन का क्षेत्र काफी संभावनाओं से भरा हुआ है। सरकार ने यहां पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया है। इससे इस क्षेत्र के विकास को और गति मिल रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के दो ऊर्जावान युवाओं को महती जिम्मेदारी मिली है। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के नवनियुक्त अध्यक्ष नीलू शर्मा की अगुवाई में यहां पर्यटन का तेजी से विकास होगा। छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के नवनियुक्त अध्यक्ष शशांक शर्मा साहित्य के जानकार हैं और वे लगातार इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। उनके अनुभवों का लाभ राज्य और अकादमी को मिलेगा। भरोसा है कि दोनों के सक्षम नेतृत्व में इन दोनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम होंगे। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के नवनियुक्त अध्यक्ष नीलू शर्मा ने खुद को दी गई बड़ी जिम्मेदारी के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह मेरे लिए नई चुनौती और नया अवसर है। छत्तीसगढ़ को देश-दुनिया में पहचान दिलाने का सौभाग्य मिल रहा है। यहां के पर्यटन स्थलों को सजाने-संवारने का काम करेंगे। पर्यटन के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाली गतिविधियों को धरातल पर उतारेंगे। छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के नवनियुक्त अध्यक्ष शशांक शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य का क्षेत्र बहुत विराट क्षेत्र है। साहित्य भी विकास की एक धारा है। अन्य क्षेत्रों की तरह कला, संस्कृति और साहित्य का विकास भी जरूरी है। छत्तीसगढ़ साहित्य के क्षेत्र में पूरे देश में जाना जाता रहा है। यहां के साहित्यकारों ने देशभर में नाम कमाया है। राजनांदगांव का इसमें बहुत योगदान है। उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विश्वास पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करेंगे। यहां के साहित्य और साहित्यकारों का संरक्षण-संवर्धन करेंगे। संस्कृति विभाग के संचालक और छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य ने समारोह की शुरूआत में स्वागत भाषण और प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। सासंद सर्वबृजमोहन अग्रवाल, संतोष पाण्डेय एवं विजय बघेल सहित अनेक विधायक और विभिन्न निगमों, मंडलों तथा आयोगों के अध्यक्ष भी पदभार ग्रहण एवं अभिनंदन समारोह में शामिल हुए। recent visitors 32

सर्वाधिक निवेश वाले टॉप टेन राज्यों में शामिल है छत्तीसगढ़, राज्य में अब तक 4.4 लाख करोड़ रूपए का हुआ है औद्योगिक निवेश

रायपुर छत्तीसगढ़ ने वित्तीय वर्ष 2025 में औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रोजेक्ट टूडे सर्वे द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 218 नई परियोजनाओं में 1,63,749 करोड़ रूपए का निवेश आया है, जो देश के कुल निवेश का 3.71 प्रतिशत है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को, देश के टॉप टेन निवेश वाले राज्यों में शामिल करती है। इस सफलता के पीछे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और छत्तीसगढ़ सरकार की नई औद्योगिक नीति 2024-30 का महत्वपूर्ण योगदान है। यहां यह उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में हुए निवेश को मिलाकर राज्य में अब तक 4.4 लाख करोड़ रूपए का औद्योगिक निवेश हुआ है। एक नवंबर 2024 से लागू नई औद्योगिक नीति 2024-30 ने छत्तीसगढ़ को निवेशकों के लिए एक आकर्षक राज्य बना दिया है। इस नीति में न्यूनतम शासन, अधिकतम प्रोत्साहन के सूत्र को अपनाया गया है, जिसके तहत सिंगल विंडो सिस्टम 2.0, ऑनलाइन आवेदन, और त्वरित प्रोसेसिंग जैसी सुविधाएं शुरू की गई हैं। नीति में फार्मास्यूटिकल्स, आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर, और पर्यटन जैसे क्षेत्रों को विशेष प्रोत्साहन दिया गया है। उद्योगों को 30-50 प्रतिशत सब्सिडी, 5 से 12 साल तक कर छूट, और ब्याज अनुदान जैसे प्रावधानों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। नीति में 1000 से अधिक रोजगार देने वाली इकाइयों के लिए बी-स्पोक पॉलिसी और प्रति व्यक्ति 15,000 तक प्रशिक्षण अनुदान जैसे प्रावधान भी शामिल हैं, जिसका लक्ष्य अगले 5 वर्षों में 5 लाख नए रोजगार सृजित करना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर निवेश को आकर्षित करने के लिए देश के प्रमुख शहरों दिल्ली, मुंबई, और बेंगलुरु में इन्वेस्टर्स कनेक्ट मीट का आयोजन किया गया। इन समिट्स में देश-विदेश के प्रमुख उद्योगपतियों ने हिस्सा लिया, जिसके परिणामस्वरूप 4.4 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। मुंबई में आयोजित समिट में 6000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव और अमेरिका व रूस के कॉन्सल जनरल से विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की सहमति मिली। दिल्ली में 15,184 करोड़ और बेंगलुरु में ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की सहमति ने छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता को रेखांकित किया है। मुख्यमंत्री साय ने उद्योगपतियों को आश्वस्त किया कि छत्तीसगढ़ सरकार पारदर्शी और निवेशक अनुकूल नीतियों के साथ हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले एक साल में 300 से अधिक सुधार लागू किए, जिसने कागजी प्रक्रियाओं को कम कर कारोबारी माहौल को पारदर्शी और तेज बनाया। सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 के जरिए सभी स्वीकृतियां और लाइसेंस आसानी से उपलब्ध हैं, और सब्सिडी जारी करने की प्रक्रिया को 7 दिनों के भीतर सीमित किया गया है। इन सुधारों ने छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े उद्योगपतियों तक के लिए छत्तीसगढ़ को एक पसंदीदा गंतव्य बनाया है। छत्तीसगढ़ ने पहली बार सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, और एआई आधारित उद्योगों के लिए निवेश प्रस्ताव प्राप्त किए हैं। नवा रायपुर में हाल ही में राज्य के पहले सेमीकंडक्टर प्लांट का भूमिपूजन हुआ, जो तकनीकी नवाचार की दिशा में एक बड़ा कदम है। नया रायपुर को बेंगलुरु और हैदराबाद की तर्ज पर आईटी हब के रूप में विकसित करने की योजना है, जिसमें नैसकॉम के साथ समझौता एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति न केवल उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देती है, बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक समृद्धि पर भी जोर देती है। हमारा लक्ष्य अमृतकाल-छत्तीसगढ़ विजन 2047 नवा अंजोर के तहत विकसित भारत के निर्माण में योगदान देना है। इन निवेशों से न केवल आर्थिक प्रगति को गति मिलेगी, बल्कि हजारों युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे। छत्तीसगढ़ अब नक्सल प्रभावित छवि से बाहर निकलकर एक औद्योगिक और तकनीकी हब के रूप में उभर रहा है। राज्य नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है, जो देश के आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण योगदान देगा। recent visitors 30

स्टेट इण्डस्ट्रियल डेव्हलेपमेंट कार्पाेरेशन लिमिटेड के नवनियुक्त अध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने उद्योग भवन में अपना कार्यभार ग्रहण किया

रायपुर छत्तीसगढ़ स्टेट इण्डस्ट्रियल डेव्हलेपमेंट कार्पाेरेशन लिमिटेड के नवनियुक्त अध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने तेलीबांधा स्थित उद्योग भवन में अपना कार्यभार ग्रहण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उन्हें अपनी बधाई एवं शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में सीएसआईडीसी प्रदेश में औद्योगिक वातावरण के निर्माण में बेहतर कार्य करेगा। राजीव अग्रवाल अनेक पदों पर किये हैं। उनके अनुभवों से उद्योग जगत को एक नई ऊंचाई मिलेगी। राज्य में नई औद्योगिक नीति से प्रदेश का विकास होगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्तमान में 4.50 लाख करोड़ रूपए का निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। राज्य में खनिज, बिजली और पानी की पर्याप्त उपलब्धता से उद्योगों को फलने-फूलने का अवसर मिलेगा। वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य में सेक्टर आधारित उद्योगों को एक ही परिसर में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने के दृष्टिकोण से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजनांदगांव जिला के ग्राम पटेवा में 322 एकड़ में इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग क्लस्टर की  स्थापना के लिए 350 करोड़ रूपए, राजनांदगांव जिला के ग्राम बिजेतला में 50 एकड़ में स्पेश मैन्यूफैक्चरिंग क्लस्टर की स्थापना के लिए 25 करोड़ रूपए, नवा रायपुर के 20 एकड़ में रेडिमेट गारमेंट पार्क के लिए 30 करोड़ रूपए तथा नवा रायपुर में ही 30 एकड़ में फर्नीचर क्लस्टर की स्थापना के लिए 40 करोड़ रूपए की घोषणा की। इस तरह कुल 445 करोड़ रूपए की लागत से 4 स्मार्ट औद्योगिक पार्क की स्थापना की जाएगी। छत्तीसगढ़ राज्य में उद्योगों के विकास के लिए एक अनुकुल एवं सकारात्मक वातावरण बनेगा।   इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने नवनियुक्त अध्यक्ष को बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूर्ण होने पर रजत जयंती वर्ष मनाया जा रहा है। राज्य के नई औद्योगिक नीति से उद्योग बेहतर तरीके से विकसित होंगे और राज्य तेजी से विकास करेगा। सीएसआईडीसी के नवनियुक्त अध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने कहा कि राज्य के औद्योगिक नीति विकसित राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पिछले दिनों मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा नवा रायपुर में सेमीकंडक्टर उत्पादों के निर्माण के लिए भूमिपूजन किया गया है। अध्यक्ष के रूप में राजीव अग्रवाल ने अपने कर्तव्यों को निष्ठापूर्वक निर्वहन करने की बात कही। इस मौके पर उप मुख्य मंत्री अरुण साव, उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन,  केबिनेट मंत्री केदार कश्यप, राम विचार नेताम, सांसद बृजमोहन अग्रवाल एवं विजय बघेल, विधायक धरम लाल कौशिक, किरण सिंह देव, मोतीलाल साहू, राजेश मूणत, पुरंदर मिश्रा, अनुज शर्मा, डोमन लाल कोर्सेवाड़ा, महापौर रायपुर श्रीमती मीनल चौबे, जिला पंचायत रायपुर के अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, सीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक विश्वेश कुमार, छत्तीसगढ़ स्टील रि-रोलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय त्रिपाठी सचिव बांके बिहारी अग्रवाल, छत्तीसगढ़ मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार अग्रवाल, छत्तीसगढ़ स्पंज आयरन मैन्युफेक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. मनीष कुमार मंडल सहित निगम, मंडल बोर्ड के अध्यक्ष सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। recent visitors 35

कृषि, कौशल विकास, पर्यटन और उद्योग के विकास की नई रणनीति पर काम प्रारंभ: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर : बस्तर संभावनाओं की धरती : सब मिलकर लिखेंगे बस्तर के विकास की नई ईबारत: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय किसान, महिला समूह, युवा उद्यमी और आदिवासी समुदाय मिलकर बनाएंगे बस्तर को आत्मनिर्भर और समृद्ध कृषि, कौशल विकास, पर्यटन और उद्योग के विकास की नई रणनीति पर काम प्रारंभ रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की विशेष मौजूदगी में आज जगदलपुर में आयोजित “विकसित बस्तर की ओर” परिचर्चा में बस्तर के समग्र विकास के लिए एक व्यापक कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में कृषि, कौशल विकास, पर्यटन और उद्योग जैसे क्षेत्रों में बस्तर की संभावनाओं को उजागर करने और विकास की नई दिशा तय करने पर गहन और सार्थक चर्चा हुई। संबंधित विभागों के अधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और स्टेकहोल्डर्स के साथ विचार-विमर्श कर मुख्यमंत्री ने बस्तर को नक्सलवाद के अंधेरे से निकालकर विकास के प्रकाश की ओर ले जाने का संकल्प दोहराया। यहां यह उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय दो दिवसीय प्रवास पर जगदलपुर गए हुए हैं। अपने प्रवास के पहले दिन विकसित बस्तर की ओर परिचर्चा में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर ने दशकों तक नक्सलवाद का दंश झेला है, लेकिन अब यह क्षेत्र अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, नैसर्गिक सुन्दरता, कृषि विकास, कौशल उन्नयन, उद्योग और खनिज संसाधनों के साथ विकास की नई राह पर अग्रसर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “विकसित छत्तीसगढ़ @2047” का संकल्प “नवा अंजोर” विजन के माध्यम से साकार होगा, और इसकी शुरुआत बस्तर से हो रही है। बस्तर के किसान, महिला समूह, युवा उद्यमी, और आदिवासी समुदाय छत्तीसगढ़ की प्रगति की नई इबारत लिखने को तैयार हैं। परिचर्चा के पहले सत्र में बस्तर के किसानों की आय को दोगुना करने के लिए कृषि, उद्यानिकी, मछली पालन, पशुपालन, और जैविक खेती पर विस्तार चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के स्वदेशी और जैविक उत्पादों को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाने के लिए प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, और मार्केटिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग इकाइयों की स्थापना और उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा, “बस्तर के उत्पाद न केवल छत्तीसगढ़ की पहचान बनेंगे, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी जगह बनाएंगे। बस्तर संभाग में लगभग 9 लाख हेक्टेयर में खरीफ तथा पौने तीन लाख हेक्टेयर में रबी फसलों की खेती होती है। खरीफ की मुख्य फसल धान एवं मक्का है। बस्तर संभाग में 1.85 हेक्टेयर में मक्का की खेती होती है, जिसे आगमी तीन वर्षों में बढ़ाकर 3 लाख हेक्टेयर किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। मक्का उत्पादक कृषकों के साथ जैव ईंधन, बायोफार्मास्युटिकल, स्टार्च एवं पोल्ट्री फीड उद्योगों के साथ मार्केट लिंकेज कराने पर जोर दिया गया, ताकि कृषकों को उनकी उपज का ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके। इसी तरह आगामी तीन वर्ष में मिलेट्स की खेती को 52 हजार हेक्टेयर से बढ़ाकर 75 हजार हेक्टेयर करने तथा स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण इकाई की स्थापना और स्कूलों, आंगनबाड़ियों तथा छात्रावास के बच्चों के खाद्यान्न में मिलेट्स को शामिल करने पर जोर दिया गया है। बस्तर में जैविक खेती को प्रोत्साहन देने तथा प्राइवेट कंपनियों की सहभागिता से बाजार एकीकरण, सिंचाई क्षेत्र में विस्तार के लिए तीन वर्षों में 27 हजार 600 सोलर पंप तथा नदी-नालों के किनारे सोलर लिफ्ट सिंचाई पंप की स्थापना की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। कृषि यांत्रिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिवर्ष 30 से 40 नए कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना का लक्ष्य निर्धारित किया गया। बस्तर में वर्तमान में 1010 कृषि यंत्र केन्द्र संचालित है। बस्तर में काजू, कोंडागांव में आचार, मसाला एवं कोकोनट आयल, कांकेर में सीताफल पल्प, दंतेवाड़ा में शहद एवं हल्दी पाउडर, सुकमा, नारायणपुर एवं बीजापुर में मसाला प्रसंस्करण की स्थापना को लेकर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने की बात कही। परिचर्चा के दौरान यह जानकारी दी गई कि मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना, प्रधानमंत्री कौशल योजना, और नियद नेल्ला नार योजनाओं के तहत अब तक 90 हजार युवाओं को प्रशिक्षित और 40 हजार युवाओं को नियोजित किया गया है। इसके अलावा, बस्तर में 32 नए कौशल विकास केंद्र और सातों जिलों में आवासीय प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाने की योजना है। इन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को बाजार और उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा जाएगा। नक्सल पीड़ित परिवारों, आत्मसमर्पित नक्सलियों और महिलाओं को इन योजनाओं में विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। कौशल प्रशिक्षण के लिए महिन्द्रा एंड महिन्द्रा, नंदी, एनएसडीसी एवं नीति आयोग से अनुबंध किया गया है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत बस्तर संभाग के सातों जिलों में 6123 लोगों को विभिन्न ट्रेड का प्रशिक्षण दिया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री ने बस्तर दशहरा, जो 75 दिनों तक चलता है, को देशभर में और विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करने पर बल दिया। मुख्यमंत्री आगामी पर्यटन सीजन के बीच आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को लेकर भी योजनाओं की रूपरेखा बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि निजी क्षेत्र को पर्यटन में भागीदार बनाना जरूरी है। उन्होंने पर्यटन सर्किट विकसित करने गाइड प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाए, ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान और प्राचीन गुफाओं जैसे आकर्षणों के लिए प्रसिद्ध यह क्षेत्र अद्भुत परिदृश्य और समृद्ध जैव विविधता प्रदान करता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर दशहरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करने के लिए अभी से तैयारी के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि पर्यटक जीवंत जनजातीय गांवों का भ्रमण कर बस्तर दशहरा जैसे पारंपरिक त्योहारों का अनुभव कर सकते हैं और स्थानीय शिल्प तथा व्यंजनों का आनंद ले सकते हैं। पर्यटन स्थलों की दृश्यता और सटीकता को बेहतर बनाने के लिए निजी एजेंसियों के सहयोग से गूगल मैपिंग सेवाओं में सुधार किया जाएगा। बैठक में जानकारी दी गई कि नई छत्तीसगढ़ पर्यटन नीति 2025, शीघ्र प्रकाशित की जाएगी। मौजूदा पर्यटन संपत्तियों को निजी होटल व्यवसायियों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत लीज पर देने की योजना बनाई जाएगी। तीरथगढ़ जलप्रपात के पास कांच के पुल के निर्माण हेतु … Read more

बस्तर अंचल के सिंचाई के कार्यों में आएगी तेजी: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बस्तर संभाग को बड़ी सौगात दी है। उन्होंने जगदलपुर में जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता कार्यालय का शुभारंभ किया। इस कार्यालय के प्रारंभ होने से बस्तर संभाग के सभी सातों जिलों के विभागीय कामकाज में काफी सुविधा होगी। जल संसाधन से संबंधित निर्माण कार्यों के सर्वेक्षण, डीपीआर निर्माण और तकनीकी स्वीकृति में तेजी आएगी। पहले इन कार्यों की स्वीकृति के लिए रायपुर जाना पड़ता था। अब ये काम संभागीय मुख्यालय बस्तर में ही हो सकेंगे। जल संसाधन मंत्री केदार कश्यप के विशेष पहल से शुरू हुए जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता नवीन कार्यालय में विभिन्न स्तरों पर अधिकारी और कर्मचारी की नियुक्ति के लिए भी बजट में स्वीकृति दी गई है। वर्तमान में यह कार्यालय जगदलपुर के अधीक्षण अभियंता कार्यालय इंद्रावती परियोजना मंडल भवन के ऊपरी तल में संचालित हो रहा है। मुख्य अभियंता जल संसाधन कार्यालय के शुभारंभ अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, जल संसाधन मंत्री केदार कश्यप, सांसद बस्तर महेश कश्यप, विधायक जगदलपुर किरण सिंह देव, विधायक चित्रकोट विनायक गोयल, नगर निगम महापौर संजय पांडेय एवं जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वेदमती कश्यप, वित्त आयोग के अध्यक्ष निवास राव मद्दी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, जल संसाधन विभाग के प्रभारी मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता के. एस. भंडारी और जल संसाधन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे। recent visitors 35

आगंतुकों को स्थानीय संस्कृति और परंपराओं की दी जाएगी जानकारी: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री ने बस्तर दशहरा, जो 75 दिनों तक चलता है, को देशभर में और विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करने पर बल दिया। उनका कहना था कि इस प्रसिद्ध सांस्कृतिक उत्सव को वैश्विक पहचान मिलनी चाहिए और आने वाले दशहरे की तैयारी इस दृष्टिकोण से की जाए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आगामी पर्यटन सीजन के बीच आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को लेकर भी योजनाओं की रूपरेखा बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि निजी क्षेत्र को पर्यटन में भागीदार बनाना जरूरी है। उन्होंने पर्यटन सर्किट विकसित करने की बात कही ताकि पर्यटकों को एक बेहतर यात्रा अनुभव मिल सके। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही, गाइड प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाएगी, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से होमस्टे के प्रचार-प्रसार के लिए नए कदम उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि विदेशी पर्यटक होमस्टे में रुचि रखते हैं और यह आदिवासी समाज के लिए आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है। मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज के सदस्यों को पर्यटन से होने वाले लाभों पर भी चर्चा की और कहा कि यह क्षेत्र विकास के नए अवसरों से लाभान्वित होगा। उन्होंने कहा कि बस्तर का पर्यटन केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक प्रमुख आकर्षण बनेगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय धरोहर और सांस्कृतिक जीवंतता का खजाना है, जो इसे पर्यटन के लिए एक अनोखा और विशिष्ट क्षेत्र बनाता है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान और प्राचीन गुफाओं जैसे आकर्षणों के लिए प्रसिद्ध यह क्षेत्र अद्भुत परिदृश्य और समृद्ध जैव विविधता प्रदान करता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  बस्तर संभाग में पर्यटन के विकास और वृहद रोडमैप बनाने हेतु गहन मंथन के दौरान यह बात कही। जगदलपुर में आयोजित विकसित बस्तर की ओर परिचर्चा में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप, विधायक किरण सिंह देव, विनायक गोयल, प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, पर्यटन विभाग के सचिव अलबनगन पी., पर्यटन विभाग के एमडी विवेक आचार्य, बस्तर संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर,  पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित थे।  इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर दशहरा को  अंतरराष्ट्रीय  स्तर पर प्रचार प्रसार किया जाएगा।  इसकी अभी से तैयारी के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि इससे बस्तर की पहचान बनेगी। सितम्बर से मार्च का मौसम बेहतर होता है।इसे पर्यटन के लिए विशेष रूप से फोकस किया जाए। उन्होंने कहा कि अब पर्यटन क्षेत्र में ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि  निजी क्षेत्र और समुदाय की भागीदारी बढ़ाए। गाइड प्रशिक्षण की व्यवस्था हो। होम स्टे को प्रचार प्रसार हो।इसका लाभ उठाएं स्थानीय लोगों  को इसका लाभ मिलता है। सभी के बेहतर सुझाव से  पर्यटन के क्षेत्र में बस्तर को आगे बढ़ाएंगे। परिचर्चा में पर्यटन स्थलों के जुड़ाव, ब्रांडिंग और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया गया। बैठक में बताया गया कि पर्यटक जीवंत जनजातीय गांवों का भ्रमण कर सकते हैं, बस्तर दशहरा जैसे पारंपरिक त्योहारों का अनुभव कर सकते हैं और स्थानीय शिल्प तथा व्यंजनों का आनंद ले सकते हैं। इको-पर्यटन, जनजातीय पर्यटन और दंतेश्वरी मंदिर जैसे आध्यात्मिक स्थलों के समन्वय के साथ बस्तर एक अनोखा और गहन यात्रा अनुभव प्रदान करता है। ब्रांडिंग और प्रचार के तहत ट्रैवल ट्रेड फेयर (TTF) के माध्यम से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के पर्यटकों को आकर्षित करने की योजना बनाई जाएगी। पर्यटन सूचना केंद्र (TIC) पश्चिम बंगाल, हैदराबाद, जगदलपुर, अरकू सिटी और भुवनेश्वर के हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर रणनीतिक स्थानों पर स्थापित किए जाएंगे ताकि पर्यटकों को आवश्यक जानकारी मिल सके। आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना जैसे पड़ोसी राज्यों के यात्रा और पर्यटन ऑपरेटरों तथा होटल व्यवसायियों के साथ साझेदारी को मजबूत किया जाएगा। पर्यटन स्थलों की दृश्यता और सटीकता को बेहतर बनाने के लिए निजी एजेंसियों के सहयोग से गूगल मैपिंग सेवाओं में सुधार किया जाएगा। साथ ही जगदलपुर के दलपत सागर में वार्षिक नाव दौड़ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें पर्यटन विशेषज्ञों और प्रमोटरों को आमंत्रित किया जाएगा ताकि दृश्यता और जुड़ाव को बढ़ाया जा सके। विश्वभर के टूर और ट्रैवल ऑपरेटरों के बीच क्षेत्र की पर्यटन समृद्धि के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इसे प्रदर्शित करने के लिए परिचयात्मक (FAM) यात्राएँ और रोड शो आयोजित किए जाएंगे। ये यात्राएँ टूर ऑपरेटरों और होटल व्यवसायियों को क्षेत्र का अन्वेषण करने के लिए आमंत्रित करेंगी, जबकि स्थानीय टूर ऑपरेटरों को भी वैश्विक रोड शो में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य इनबाउंड पर्यटन को बढ़ावा देना है। साथ ही कुटुमसर गुफाएँ और चित्रकोट जलप्रपात जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर स्वच्छ शौचालय और पीने के पानी जैसी आवश्यक सुविधाएँ सुनिश्चित की जाएंगी। पर्यटकों की सुविधा के लिए केशलूर के आगे की सड़कों के सुधार की आवश्यकता चिन्हित की गई है। बस्तर को हैदराबाद, रायपुर, भुवनेश्वर, विशाखापत्तनम और अरकू जैसे प्रमुख शहरों से जोड़ने वाली ट्रेन सेवाओं के सुधार पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। प्रमुख पर्यटक स्थलों पर इंटरनेट कनेक्टिविटी और बिजली की आपूर्ति जैसी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। चित्रकोट में पैराग्लाइडिंग, रैपेलिंग और ज़िपलाइनिंग जैसे एडवेंचर स्पोर्ट्स की गतिविधियों को और अधिक बढ़ावा दिया जाएगा ताकि रोमांच प्रेमियों को आकर्षित किया जा सके। बैठक में बताया गया कि टैक्सी ड्राइवरों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू किए जाएंगे ताकि उनकी कौशल और स्थानीय पर्यटन स्थलों की जानकारी में सुधार हो सके। साथ ही, पर्यटन गाइडों के लिए अंग्रेजी और अन्य भाषाओं में प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा ताकि बहुभाषी पर्यटन गाइड विकसित किए जा सकें। पर्यटक स्थलों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा ताकि आगंतुकों को स्थानीय संस्कृति और परंपराओं में शामिल किया जा सके। पर्यटन सूचना केंद्रों के कर्मचारियों के सॉफ्ट स्किल्स में सुधार के लिए विभाग द्वारा एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों को ग्राहक सेवा, संवाद कौशल और समस्या समाधान क्षमताओं में दक्ष बनाना है ताकि वे पर्यटकों को बेहतर सेवा प्रदान कर सकें। पर्यटकों के लिए जनजातीय संस्कृति और … Read more