यासीन मलिक की पत्नी का राहुल गांधी को पत्र – ‘उसे जेल से निकालिए, वो जम्‍मू में शांति..

नई दिल्ली  जेल में बंद जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख यासीन मलिक की पत्नी मुशाल हुसैन मुलिक ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को एक चिट्टी लिखी है। उन्होंने पत्र लिखकर कांग्रेस नेता से संसद में उनके पति के लिए बहस शुरू कराने की अपील की। मुशैल हुसैन के मुताबिक केवल उनके पति ही जम्मू एवं कश्मीर में शांति ला सकते हैं। मुशैल हुसैन का मानना है कि जम्मू-कश्मीर में चल रही शांति प्रक्रिया में यासीन मलिक की भूमिका महत्वपूर्ण है और उसकी दुर्दशा का तत्काल समाधान किया जाना चाहिए। मानवाधिकार और महिला सशक्तिकरण पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के पूर्व सहायक मुशैल ने लिखा, “राहुल जी, यासीन मलिक जम्मू-कश्मीर में शांति के लिए एक ताकत बन सकते हैं, बशर्ते उन्हें उचित मौका दिया जाए।” मुशैल ने पत्र में कहा, “मेरे पति के साथ चल रहा व्यवहार किसी यातना से कम नहीं है और मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि उन्हें न्याय दिलाने में हमारी मदद करें।” राहुल गांधी को लिखे पत्र में मुशैल ने अपने पति के खिलाफ चल रही कानूनी लड़ाई का जिक्र किया, विशेष रूप से दशकों पुराने राजद्रोह के मामले का, जिसमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अब मृत्युदंड की मांग की है। कश्मीर के अलगाववादी नेता यासिन मलिक ने टेटर फंडिंग के एक केस में मृत्युदंड की एनआईए की अपील को चुनौती दी है। एनआईए के आरोप 2017 में टेरर फाइनेंसिंग इन्वेस्टिगेशन से जुड़े हैं, जिसमें मलिक के साथ कई अन्य लोग शामिल थे। 2022 में मलिक को दोषी पाए जाने के बाद ट्रायल कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हालांकि, मुशैल के अनुसार, मलिक की नजरबंदी और उसकी मौत की सजा की मांग ‘एक व्यापक राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है।’ मुशैल ने दावा किया कि 2019 से भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार मलिक के साथ ‘अमानवीय’ व्यवहार कर रही है और उनके खिलाफ मुकदमे ‘राजनीति से प्रेरित’ हैं। मुशैल ने पत्र में आरोप लगाया कि ‘मलिक पर 35 साल पुराने मामले में भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने का मुकदमा चल रहा है और अब, उन्हें फांसी की सजा देने के लिए मनगढ़ंत आरोप लगाए जा रहे हैं।’ मुशैल ने आगे कहा कि उनके पति, जो कभी सशस्त्र संघर्ष की वकालत करते थे, ने सालों पहले हिंसा का त्याग कर दिया था फिर अहिंसा और शांति का मार्ग अपनाया। उन्होंने कहा, ‘यासीन मलिक जम्मू-कश्मीर में वास्तविक शांति का साधन बन सकते हैं, न कि दिखावटी शांति जिसका वादा किया गया है।’ मुशैल ने यह भी बताया कि 2 नवंबर से मलिक जेल में अपने साथ हुए कठोर व्यवहार के विरोध में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। मुशैल ने मलिक के स्वास्थ्य के प्रति गहरी चिंता व्यक्त की और चेतावनी दी कि लंबे समय तक भूख हड़ताल करने से उनकी जान को खतरा हो सकता है। कांग्रेस क्यों निशाने पर आ सकती है? ताज्जुब होता है न कि मिशाल मलिक ने अपने पति के लिए रहन की भीख भी किससे मांग रही है, कांग्रेस से। कांग्रेस पहले ही उसके पति की मनमोहन सिंह से 2006 वाली मुलाकात के बाद से बैकफुट पर रहती है, ऊपर से यह पत्र उसके लिए और मुसीबात बढ़ाने का काम करेगा। हालांकि न तो कांग्रेस और न ही राहुल गांधी ने इसका जवाब दिया है,लेकिन यह लेटर पार्टी का बीपी हाई करने वाला है। यासीन मलिक को किस मामले में सजा हुई है? यासीन मलिक इस समय दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद है। कश्मीरी अलगाववादी नेता और पूर्व उग्रवादी यासीन मलिक कश्मीर को भारत से काटने की बात करता था। 1990 के कश्मीर नरसंहार में उसका भी बड़ा हाथ है। यासीन मलिक को 25 मई 2022 को एनआईए कोर्ट ने टेरर फंडिंग के केस में उम्रकैद की सजा सनाई थी। एनआईए ने 2017 के आतंकवाद के वित्तपोषण के मामले में कई व्यक्तियों के खिलाफ आरोप दायर किए थे, जिनमें मलिक भी शामिल था। जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के अध्यक्ष रहे यासीन मलिक पर 25 जनवरी 1990 को श्रीनगर के रावलपोरा में भारतीय वायु सेना के 40 कर्मियों पर हमले का बी आरोप है। उस हमले में 4 वायुसेना कर्मियों की जान चली गई थी। यासीन मलिक पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती की बहन रुबैया सईद के अपहरण और उसके बाद पांच आतंकवादियों को छोड़ने की घटना में भी आरोपी है। इसके अलावा तीन दशक पुराने राजद्रोह मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उसके लिए मौत की सजा की मांग की है।   2006 की वो फोटो जो नहीं छोड़ती पीछा अब बात उस तस्वीर की जो 18 साल बाद भी कांग्रेस का पीछा नहीं छोड़ रही है। यह मुलाकात पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और आतंकी यासीन मलिक के बीच हुई थी। यासीन की पत्नी मिशाल ने अपने पत्र में इस मुलाकात का भी जिक्र किया है। मिशाल मलिक ने लिखा कि यासीन मलिक विविधता में एकता के सच्चे शिष्य हैं, कश्मीरियत की आत्मा हैं। यह उनकी निर्मल अहिंसक विचारधारा थी, जिसने तत्कालीन भारत के प्रधान मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी को 17 फरवरी, 2006 को भारत सरकार और जम्मू-कश्मीर के लोगों के बीच संवाद शुरू करने के लिए आमंत्रित किया था। यासीन ने शांति प्रक्रिया में अपना पूर्ण समर्थन देने का वादा किया था। 17 फरवरी 2006 को तब के पीएम मनमोहन सिंह ने यासीन मलिक को आमंत्रित किया था। दोनों की मुलाकात नई दिल्‍ली स्थित प्रधानमंत्री आवास में हुई थी। यह मुलाकात जम्‍मू-कश्‍मीर के नेताओं, अलगाववादियों और अन्‍य संगठनों के साथ जनसंपर्क कार्यक्रम के तहत हुई थी। इस मुलाकात के दौरान कहीं से भी यासीन मलिक के चेहरे पर अपराधबोध नहीं था। उसने बड़ी गर्मजोशी से मनमोहन सिंह से मुसाकात की थी। हाथ मिलाया और फोटो भी खिंचवाई थी। जिस ठाठ बाट के साथ उसने यह मुलाकात की, उसी तरह वह मुलाकात के बाद भी था, बिल्कुल नवाबों की तरह अपनी कार में बैठा और चला गया। तब का दिन था और आज का दिन है, बीजेपी सहित कई पार्टियां इस फोटो को लेकर हमेशा कांग्रेस पर सवाल खड़ी करती आई हैं।     Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन … Read more

यासीन मलिक ने UAPA ट्रिब्यूनल में हलफनामा पेश किया, 1994 में हिंसा और हथियार छोड़कर गांधीवादी बनने की बात की

नई दिल्ली  जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट-यासीन (जेकेएलएफ-वाई) के अध्यक्ष यासीन मलिक ने UAPA ट्रिब्यूनल को एक हलफनामा सौंपा है। इस हलफनामे में मलिक ने बताया कि उसने 30 साल पहले ही हथियार छोड़ दिया है और अब वह गांधीवादी हो गया है। उसने ऐसा 1994 में "एकजुट स्वतंत्र कश्मीर" स्थापित करने के लिए किया है। बता दें कि यासीन मलिक इस समय टेरर फंडिंग मामले में दिल्ली के तिहाड़ जेल में सजा काट रहा है। उसने अपने हलफनामे में कहा कि मैंने 1994 से ही हिंसा और हथियार छोड़ दिया है। गांधीवादी हो गया यासीन मलिक यासीन मलिक ने यूएपीए ट्रिब्यूनल में एक हलफनामा पेश किया। मलिक ने लिखा कि उसने 30 साल पहले यानी 1994 में ही हिंसा और हथियार छोड़ दिया था। अब वह गांधीवादी हो गया है। मलिक ने आगे लिखा कि उन्होंने 1994 में "एकजुट स्वतंत्र कश्मीर" स्थापित करने के जेकेएलएफ-वाई के उद्देश्य को प्राप्त करने के साधन के रूप में हिंसा के रास्ते को छोड़ गांधीवादी हो गया है। यासीन के हलफनामे को पिछले महीने जारी किया गया था और गुरुवार को राजपत्र में प्रकाशित किए गए यूएपीए ट्रिब्यूनल के आदेश में उद्धृत किया गया था। 1967 के गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम(UAPA) के तहत जेकेएलएफ-वाई को 'अवैध संघ' घोषित करने के निर्णय को आगे के लिए बरकरार रखा गया था। वायुसैनिकों के खून से रंगे हैं यासीन के हाथ यासीन मलिक ने 1988 में जेकेएलएफ-वाई की स्थापना की थी। वह 1990 में श्रीनगर के रवालपुरा में चार भारतीय वायु सेना कर्मियों की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी है। मलिक की पहचान इस साल की शुरुआत में मुख्य शूटर के रूप में की गई थी। उसे मई 2022 में एनआईए की ओर से जांच किए गए एक आतंकवाद वित्तपोषण मामले में आजीवन कठोर कारावास भी दिया गया था। यासीन ने ट्रिब्यूनल को अपने हलफनामे में दावा किया कि उसे नब्बे के दशक की शुरुआत में "विभिन्न राज्य अधिकारियों" द्वारा आश्वासन दिया गया था कि वे कश्मीर विवाद को एक सार्थक बातचीत के माध्यम से हल करेंगे और एक बार जब उन्होंने एकतरफा युद्धविराम शुरू किया, तो उनके खिलाफ और जेकेएलएफ-वाई के सभी मामलों को वापस ले लिया जाएगा। ट्रिब्यूनल के आदेश में दर्ज है कि इसके बाद, 1994 में उसके और उनके संगठन द्वारा एकतरफा युद्धविराम घोषित किया गया था और इसके परिणामस्वरूप, उसे TADA के तहत 32 लंबित मिलिटेंसी से संबंधित मामलों में जमानत प्रदान की गई थी और उसके बाद, 1994 से 2018 तक युद्धविराम समझौते के अनुसार उसके खिलाफ कोई भी मामला आगे नहीं बढ़ाया गया था। एनआईए का आरोप है कि वह 2016 में हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी की हत्या के बाद 89 से अधिक पत्थरबाजी के मामलों में फंसा है, यासीन ने कहा कि वह हिंसा के दौरान पुलिस हिरासत में था। हालांकि यासीन ने दावा किया कि कश्मीर में जेकेएलएफ-वाई अधिकारी बंद थे क्योंकि इसे पहली बार 2019 में प्रतिबंधित किया गया था। उसने स्वीकार किया कि इसके 50 से अधिक देशों में अंतर्राष्ट्रीय शाखाएं कार्यात्मक हैं और संगठन के कारण का समर्थन कर रही हैं। यह उनके प्रस्तुतिकरण को झुठलाता है कि 2019 के प्रतिबंध के बाद से जेकेएलएफ-वाई और उसके कैडरों द्वारा कोई गैरकानूनी गतिविधि नहीं है। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 96