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Monday, June 22, 2026 11:26 pm

रीवा मेडिकल कालेज के जर्जर आवासीय भवन को बगैर टेंडर गिराने का खेल

The game of demolishing the dilapidated residential building of Rewa Medical College without tender

  • चहेते ठेकेदार को अधिकारी कर रहे उपकृत

रीवा। श्यामशाह मेडिकल कालेज के आवासीय जर्जर भवन को गिराने का खेल चल रहा है। बगैर टेंडर एवं मूल्यांकन कराए चहेते ठेकेदार को भवन गिराने का काम दे दिया गया। इसके पूर्व गांधी मेमोरियल अस्पताल के पीछे जर्जर वार्ड और नर्सिंग कालेज के जर्जर भवन को गिराया गया था जिसका टेंडर नही कराया गया था। डिप्टी सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट की आड़ में चहेते ठेकेदार को अधिकारी अनुचित लाभ पहुंचाने के लिये नियमो को ताक में रखकर काम कर रहे है। जल्द ही इस मामले की शिकायत ईओडब्ल्यू में की जाएगी।

दरअसल टेंडर और मूल्यांकन न कराकर शासन के राजस्व का नुकसान किया गया है। विभागीय सूत्रो की माने तो इस्तयाक नामक ठेकेदार को मौखिक आदेश देकर भवन गिराया जा रहा है। इसमें डीजीएम की अहम भूमिका है। सवाल यह उठता है कि अगर इतनी जल्दी थी तो टेंडर की प्रक्रिया क्यो नही की गई? केवल प्रोजेक्ट के आड़ में चेहेते ठेकेदार को अधिकारी उपकृत कर रहे है। लगातार जर्जर भवन गिराए जाने का खेल जारी है। शासन को भले ही राजस्व के रूप में कुछ न मिले लेकिन बेश कीमती पत्थर-पटिया आदि से ठेकेदार को पैसा जरूर मिल रहा है।

चहेते दो ठेकेदारो पर अधिकारी मेहरबान

शहर के अंदर कही भी सरकारी जर्जर भवन अगर गिराया जाना है तो उसका काम केवल दो ही चर्चित ठेकेदारो को मिलता है। राजनीतिक संरक्षण प्राप्त इन ठेकेदारो पर अधिकारी भी मेहरबान है। मेडिकल कालेज के जर्जर आवासीय भवन गिराने का काम चल रहा है। बगैर टेंडर प्रक्रिया के चहेते ठेकेदार को काम दे दिया गया जो लगातार भवन को गिरा रहे है। विभागीय सूत्रो ने बताया कि इस्तयाक और इकबाल नामक दो ठेकेदारो को काम दिया गया है।

सवाल यह उठता है कि ऐसी आखिर क्या जल्दी थी कि बगैर टेंडर और मूल्यांकन कराए भवन गिराने का काम दे दिया गया। इन ठेकेदारो के अलावा भी कई लोग है जो भवन गिराने का काम करते है।
शासन के राजस्व का नुकसान
मेडिकल कालेज परिसर में स्थित जर्जर आवासीय भवन एवं नर्सिंग कालेज का भवन गिराने का काम किया गया। जिसका कोई टेंडर नही कराया गया है। म.प्र भवन विकास निगम के डीजीएम अजय ठाकुर द्वारा चहेते ठेकेदार को भवन गिराने की अनुमति दे दी गई। टेंडर तो दूर कोई मूल्यांकन भी नही कराया गया और न ही राशि जमा कराई गई। ऐसी क्या जल्दी थी कि बगैर मूल्यांकन के आनन-फानन भवन को गिराया गया. कही न कही यह आर्थिक अनियमितता है और शासन के राजस्व का नुकसान हुआ है।

प्रोजेक्ट के कारण गिराए गए भवन: डीजीएम
म.प्र भवन विकास निगम के डिप्टी जीएम अजय ठाकुर ने बताया कि मेडिकल कालेज परिसर में वही भवन बगैर टेंडर के गिराए गए है जो प्रोजेक्ट में बाधा बन रहे थे और टेंडर प्रक्रिया में समय लगता। ऐसे में प्रोजेक्ट को गति देने के लिये मूल्यांकन कराकर जर्जर भवन गिराया गया है और जो शेष आवासीय भवन है उनका टेंडर कराने की प्रक्रिया चल रही है, टेंडर होने के बाद ही गिराया जायेगा।

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