Friday, July 3, 2026 9:25 am

बेहतर चेहरे की चमक के लिए मुल्तानी मिट्टी का उपयोग और इसके फायदे

आपके साथ भी ऐसा हुआ होगा न कि महंगी-महंगी क्रीमों और ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर हजारों रुपये खर्च करने के बाद भी स्किन अभी भी उतनी ग्लोइंग नहीं है जितनी आप चाहती हैं? अगर आपका जवाब हां है, तो चिंता न करें। अब आपको ज्यादा पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि आज हम आपको इस लेख में एक ऐसी चीज के बारे में बताने वाले हैं, जिसे आप 20-25 रुपये में खरीद सकती हैं। इतनी सस्ता? जी हां और भले ही ये प्राकृतिक चीज कीमत में कम है, लेकिन चेहरे के लिए इसके फायदे हजारों में हैं। बिना किसी देरी के पास की किराने की दुकान से ये चीज ले आएं पा चेहरे पर पाएं इतना बेमिशाल निखार की हर कोई देखता रह जाए और जिसके आगे ब्यूटी प्रोडक्ट भी फीके पड़ जाएं। क्या है ये 20 रुपये में मिलने वाली चीज हम जिस चीज की बात कर रहे हैं वो मुल्तानी मिट्टी है, जो बहुत हमारी स्किन के लिए बहुत ही ज्यादा गुणकारी होती है। ये एक तरह की प्राकृतिक मिट्टी है जिसका उपयोग सदियों से त्वचा और बालों की देखभाल के लिए किया जा रहा है। ये कई त्वचा संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद करती है। आप फेस पैक और फेस मास्क के रूप में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। चेहरे के लिए मुल्तानी मिट्टी के फायदे जब हम मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल करते हैं तो ये हमारे चेहरे से एक्स्ट्रा ऑयल को सोखने का काम करती है। कील-मुहांसों से लेकर ब्लैकहेड्स और वाइटहेड्स की समस्या दूर करने में फायदेमंद होती है। मुल्तानी मिट्टी हमारी स्किन की गहराई से सफाई करती है और डेड स्किन सेल्स को हटाकर त्वचा चमकदार बनाती है। इसके अलावा मुल्तानी मिट्टी ओपन पोर्स को कम करने और स्किन टाइटनिंग का काम भी करती है। मुल्तानी मिट्टी में ब्लीचिंग गुण होते हैं जिससे चेहरे पर इस्तेमाल करने से दाग-धब्बे धीरे-धीरे कम होने लगते हैं और त्वचा की रंगत को निखारने लगती है। मुल्तानी मिट्टी फेस पैक बनाने के लिए क्या चाहिए? मुल्तानी मिट्टी- 2 चम्मच गुलाब जल- जरूरत अनुसार दही- 1 चम्मच शहद- 1 चम्मच चेहरे पर ऐसे लगाएं मुल्तानी मिट्टी फेस मास्क सबसे पहले एक कटोरी में मुल्तानी मिट्टी में जरूरत अनुसार गुलाब जल में भिगोकर पेस्ट तैयार कर लें। ध्यान रहे पेस्ट ज्यादा पतला या गाढ़ा न हो। इसके बाद कटोरी में दही और शहद मिलाकर सामग्री को अच्छे से मिक्स कर लें। अब पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं और 10-15 मिनट तक सूखने के लिए छोड़ दें। जब समय पूरा हो जाए तो ठंडे पानी से फेस वॉश कर लें। देखिए कैसे बिना कोई क्रीम लगाए आपका चेहरा कैसा चमक गया है। आप हफ्ते में 2 बार इस नुस्खे का इस्तेमाल कर सकते हैं। recent visitors 111

इन ट्रिक्स से आपका डिवाइस पूरा दिन चलेगा: बैटरी की आयु बढ़ाने के उपाय

Android स्मार्टफोन की बैटरी को लंबे समय तक चलाना काफी मुश्किल काम है. ऐसे में अगर आपके फोन की बैटरी भी जल्दी जवाब दे जाती है तो आज हम आपको इसे लंबे समय तक चलाने का तगड़ा जुगाड़ बताने जा रहे हैं.  1. ब्राइटनेस कम करें: अपने स्मार्टफोन की स्क्रीन ब्राइटनेस को कम करने से बैटरी की लाइफ बढ़ सकती है. ज़रूरत न होने पर स्क्रीन को पूरी तरह से बंद कर दें. 2. वाई-फाई और ब्लूटूथ बंद करें: जब आप इनका इस्तेमाल नहीं कर रहे हों, तो वाई-फाई और ब्लूटूथ को बंद कर दें. ये बैटरी की खपत करते हैं. 3. बैकग्राउंड ऐप्स बंद करें: कई बार कुछ ऐप्स बैकग्राउंड में चलते रहते हैं, जिससे बैटरी की खपत होती है. बैकग्राउंड ऐप्स को बंद करने के लिए आप "Settings" > "Apps" > "Running" में जाकर उन्हें बंद कर सकते हैं. 4. लोकेशन सेवा बंद करें: जब आप लोकेशन सेवा का इस्तेमाल नहीं कर रहे हों, तो उसे बंद कर दें. यह बैटरी की खपत को कम करने में मदद करेगा. 5. डेटा सेवर मोड का इस्तेमाल करें: जब आप कम डेटा का इस्तेमाल कर रहे हों, तो डेटा सेवर मोड का इस्तेमाल करें. यह बैटरी की खपत को कम करने में मदद करेगा. 6. पुराने ऐप्स को हटा दें: जिन ऐप्स का आप इस्तेमाल नहीं करते हैं, उन्हें हटा दें. पुराने ऐप्स बैटरी की खपत करते हैं. 7. बैटरी सेविंग मोड का इस्तेमाल करें: जब आपके पास कम बैटरी बची हो, तो बैटरी सेविंग मोड का इस्तेमाल करें. यह बैटरी की लाइफ को बढ़ाने में मदद करेगा. 8. स्क्रीन टाइम कम करें: जितना कम आप अपने स्मार्टफोन का इस्तेमाल करेंगे, उतनी ही कम बैटरी खर्च होगी. 9. नाइट मोड का इस्तेमाल करें: जब आप रात में अपने स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, तो नाइट मोड का इस्तेमाल करें. यह बैटरी की खपत को कम करने में मदद करेगा. 10. स्मार्टफोन को ठंडा रखें: अपने स्मार्टफोन को धूप में या गर्म जगह पर रखने से बचें. इससे बैटरी की लाइफ कम हो सकती है. इन टिप्स का पालन करके आप अपनी Android स्मार्टफोन की बैटरी को लंबे समय तक फिट रख सकते हैं. यहाँ कुछ अतिरिक्त टिप्स दिए गए हैं: अपने स्मार्टफोन को हमेशा अपडेट रखें. केवल विश्वसनीय स्रोतों से ऐप्स डाउनलोड करें. अपने स्मार्टफोन की बैटरी को नियमित रूप से चार्ज करें. अपने स्मार्टफोन की बैटरी को ओवरचार्ज या ओवरडिस्चार्ज न करें. यदि आपकी स्मार्टफोन की बैटरी खराब हो गई है, तो उसे बदलवा लें. इन टिप्स का पालन करके आप अपनी Android स्मार्टफोन की बैटरी को लंबे समय तक अच्छी स्थिति में रख सकते हैं. recent visitors 106

कर्नाटक में सरकारी बस में हनुमान जी के स्टिकर को लेकर विवाद, नेटिजंस ने कांग्रेस सरकार को निशाने पर लिया

बेंगलुरु कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में भगवान हनुमान के नाम पर घमासान हो गया था। अब एक बार फिर भगवान हनुमान को लेकर विवाद शुरू हो गया है। विवाद महज बस में लगे एक हनुमान जी के स्टिकर से शुरू हुआ, जिसके बाद यह सियासी हो गया है। एक मुस्लिम नेता ने सरकारी बस में लगे भगवान हनुमान के स्टिकर को लेकर शिकायत की। उसने इसे लेकर आपत्ति जताई कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट में इस तरह से हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीर नहीं लगाई जा सकती। युवक की शिकायत पर ट्रांसपोर्ट विभाग ने भी कार्रवाई करने को कहा है। इधर अब कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर हिंदू विरोधी होने का आरोप लगना शुरू हो गया है। यातायात विभाग ने कहा कि सरकारी बस में बजरंगबली की फोटो किसने, कब और कैसे लगाई इसकी जांच होगी। कर्नाटक की इस सरकारी बस का नंबर KA-10 F-0455 है। इसकी तस्वीर खींचकर मुस्लिम युवक ने एक्स पर पोस्ट डाला। तस्वीर में बस के रजिस्ट्रेशन का नंबर दिख रहा है और इसके पीछे शीशे पर किनारे एक छोटी सी भगवान हनुमान की तस्वीर लगी है। युवक ने की कार्रवाई की मांग युवक ने लिखा, 'मैंने इस बस को चिकमगलूर बस स्टैंड में देखा, बस के पीछे की ओर एक धार्मिक तस्वीर है। क्या सरकारी बसों में कोई धार्मिक तस्वीर लगाना ठीक है? कृपया चालक और संचालक पर कार्रवाई करें।' विभाग ने दिया यह जवाब युवक ने इस पोस्ट के साथ कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट को टैग किया। डिपार्टमेंट ने इस पर उत्तर दिया कि आपकी पोस्ट के लिए धन्यवाद, हम आगे की जांच के लिए संबंधित डिपो को भेज रहे हैं। कौन है आरिफ अरवाह इस मुस्लिम युवक का नाम आरिफ अरवाह है। उसने यह शिकायती पोस्ट 31 जुलाई को की। आरिफ चिकमगलूर का रहने वाला है। वह खुद को विधानसभा क्षेत्र में SDPI (Social Democratic Party of India) का महासचिव बताता है। हालांकि यह संगठन PFI का छात्र संगठन है, जिसे केंद्र सरकार बैन कर चुकी है। कांग्रेस सरकार निशाने पर आई इधर पोस्ट पर जवाब देना ट्रांसपोर्ट विभाग पर भारी पड़ गया। नेटिजन्स ने कांग्रेस की सरकार को निशाने पर लिया और उन्हें हिंदू विरोधी बताया। एक यूजर ने लिखा कि कार्रवाई कांग्रेस सरकार के इशारे पर हो रही है। सरकार हिंदू विरोधी है, वर्ना विभाग इस तरह की यूजर की पोस्ट पर जवाब नहीं देता। recent visitors 135

ऑर्गन डोनेशन में MP को मिला ‘बेस्ट इमर्जिंग स्टेट’ का खिताब, यह जिला अंगदान में रहा सबसे आगे

 इंदौर/ भोपाल  हमारा इंदौर शहर अब मध्य प्रदेश का भी मान देश-दुनिया में बढ़ा रहा है। अंगदान के क्षेत्र में मध्य प्रदेश को बेस्ट इमर्जिंग अवॉर्ड मिला है। जिसमें 90 प्रतिशत हिस्सेदारी इंदौर की है। केंद्रीय मंत्रालय के राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) द्वारा 14वें भारतीय अंगदान दिवस पर शनिवार को दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में यह अवॉर्ड केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने प्रदान किया। प्रदेश में 90 प्रतिशत अंगदान इंदौर में होते हैं इंदौर स्टेट आर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (सोटो) और प्रदेश की ओर से सांसद शंकर लालवानी, सोटो इंचार्ज एवं मेडिकल कॉलेज डीन डॉ. संजय दीक्षित ने यह अवॉर्ड प्राप्त किया। इंदौर में प्रदेश के 90 प्रतिशत अंगदान होते हैं। इस तरह इंदौर ने प्रदेश का मान बढ़ाया है। मध्य प्रदेश में अब तक 60 ग्रीन कॉरिडोर बने हैं, जिससे करीब 200 लोगों को जीवनरूपी उपहार ब्रेनडेड दानदाता द्वारा अंगदान के उपरांत मिला है। साथ ही लगभग 1635 व्यक्तियों को जीवित दानदाता द्वारा अंगदान उपरांत जीवनदान मिला है। देश में अंगदान के लिए शपथ लेने में भी मध्य प्रदेश देश में चौथे स्थान पर है। यह अवॉर्ड मध्य प्रदेश को आंध्र प्रदेश और जम्मू कश्मीर के साथ संयुक्त रूप से मिला है। इंदौर के इन कामों ने दिलवाया अवॉर्ड     रात में भी पोस्टमार्टम होना।     एयरपोर्ट पर अंगों की स्क्रीनिंग अब नहीं।     200 किमी दूर भोपाल तक ग्रीन कॉरिडोर बनना।     नाबालिग के लिवर दान के मामले में अच्छा काम सोटो द्वारा करना।     हर वर्ष अंगदान की संख्या बढ़ना।     प्रत्यारोपण के क्षेत्र अच्छा काम करना।   recent visitors 81

एक मजदूर को खुदाई में मिला 19.22 कैरट का हीरा, कीमत 80 लाख रुपए

पन्ना मध्य प्रदेश के पन्ना में एक मजदूर को 19.22 कैरट का हीरा मिला है। इस हीरे की कीमत 80 लाख रुपए बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक मजदूर पन्ना के कृष्णा कल्याणपुर इलाके की एक खदान में काम करता है। मजदूर की पहतान राजू गौड़ के तौर पर हुई है जिसे खदान में काम करने वक्त हीरा मिला। पन्ना जिला कलेक्टर सुरेश कुमार ने पुष्टि की कि राजू गौड़ को मिला हीरा 19.22 कैरेट का है, जिसकी कीमत कम से कम 80 लाख रुपये है। हीरे कोनीलामी में खुली बोली के लिए रखा जाएगा। गौड़ पिछले दस सालों से कृष्णा कल्याणपुर में एक पट्टे वाली खदान में काम कर रहे हैं। राजू गौड़ को हीरा उस वक्त मिला जब वह रोज की तरह खदान में मिट्टी खोद रहे थे। राजू गौड़ ने बताया कि उनको यह हीरा उस वक्त मिला जब वह रोज की तरह मिट्टी खोदकर एक तरफ कर रहे थे। हीरा मिलते ही उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने इस हीरे को सरकारी अधिकारियों के पास जमा कर दिया है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने मिट्टी खोदते वक्त हीरे को देखा तो हैरान रह गए। उन्होंने कहा, अब मेरी सारी वित्तीय परेशानी जल्द ही दूर हो जाएंगी। राजू गौड़ पार्ट टाइम ड्राइवर भी हैं। उन्होंने कहा, मैंने कई लोगों का गरीबी से अमीरी तक का सफर देखा है। मैंने खदान लीज पर ली हुई थी, इस उम्मीद में कि मेरी भी किस्मत जल्द बदलेगी।  यह खदान दो महीने पहले ही ली गई थी और सौभाग्य से मुझे हीरा मिल गया। अन्ना डायमंड एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रीनिवास रिछारिया ने कहा कि जेम क्वालिटी वाले हीरे सबसे उन्नत किस्म के होते हैं। इसका वजन लगभग 3 लाख रुपये से 6 लाख रुपये प्रति कैरेट है इसलिए, नीलामी में इसकी कीमत 80 लाख रुपये से 1.25 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है। यह इस साल का सबसे कीमती खनन हीरा है। पन्ना हीरा खनन के लिए लोकप्रिय है।   recent visitors 102

पेड़ के प्रति ग्रामीणों की गहरी आस्था, राजस्थान-अजमेर के गांव में नीम का पेड़ काटने पर जुर्माना

अजमेर. राजस्थान के अजमेर जिले के पदमपुरा गांव में पीढ़ियों से नीम का पेड़ नहीं काटने या किसी तरह का नुकसान न पहुंचाने की परंपरा चली आ रही है। मान्यताओं के मुताबिक, नीम का पेड़ भगवान विष्णु के रूप देवनारायण से जुड़ा है, गांव में अधिकतर आबादी गुर्जर समाज के लोग की है और गुर्जर समाज के लोगों के इष्ट देव भगवान देवनारायण है। यही वजह है कि गांव वाले नीम के पेड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। नीम के पेड़ों के प्रति लोगों में गहरी आस्था है। इसी वजह से नीम के पेड़ काटने या किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाने वाले पर जुर्माना लगाया जाता है। नीम की टहनियां या पत्तियों में औषधीय गुण होते हैं । इस लिहाज से उन्हें जरूरत के मुताबिक तोड़ा जा सकता है, लेकिन बकरियों को खिलाने या मनोरंजन के लिए तोड़ना पूरी तरह मना है। पीढ़ियों से नीम काटना माना जाता है अपराध अजमेर जिले के इस गांव पदमपुरा के ग्रामीण पिछले सात शताब्दियों से नीम के पेड़ों को संरक्षित कर रहे हैं, इतना कि पेड़ों को काटना उनके लिए अपराध माना जाता है। पदमपुरा गांव वृक्ष प्रेमियों और पर्यावरण के लिए काम करने वालों के लिए एक रोशनी की किरण है। अजमेर के इस गांव में नीम के पेड़ों को काटना पीढ़ियों से अपराध माना जाता रहा है। इस गांव का हर व्यक्ति नीम को पवित्र मानता है और इसकी रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। नीम वाला गांव के नाम से है पहचान अजमेर से 18 किलोमीटर दूर अरावली पहाड़ियों की गोद में बसा पदमपुरा गांव 705 साल पुराना इतिहास समेटे हुए है। पहाड़ी की तलहटी में बसे इस गांव में एक छोटा सा किला है जो इसके प्राचीन इतिहास का गवाह है। लोग इसे 'नीम वाला गांव' के नाम से भी जानते हैं जो गांव में लगे हजारों नीम के पेड़ों के प्रति स्थानीय लोगों के प्रेम को अमर करता है। पदमपुरा गांव में नीम के पेड़ को काटना तो दूर उसकी टहनी तोड़ना भी अपराध माना जाता है। करीब 1200 लोगों से अधिक की आबादी वाले पदमपुरा गांव में नीम का पेड़ सिर्फ आस्था का हिस्सा ही नहीं बल्कि पूर्वजों से मिली विरासत भी है, जिसे यहां उतनी ही शिद्दत से सहेज कर रखा गया है। ऐसा नहीं है कि यहां नीम के अलावा कोई पेड़ नहीं है, लेकिन इस गांव और यहां रहने वाले लोगों के लिए नीम का पेड़ भगवान है। जब पदम सिंह ने गांव बसाया तो ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि नीम के पेड़ को कभी नहीं काटा जाएगा और यह कानून बन गया। गांव में ज्यादातर आबादी गुर्जर समुदाय की है। गुर्जर समुदाय के देवता देवनारायण हैं, जिन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। गुर्जर ने ऐसे समय में नीम के पेड़ों के संरक्षण के लिए ग्रामीणों के प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया, जब पर्यावरण तेजी से खराब हो रहा है। चौपाल लगाकर दिया जाता है दंड गांव के रहने वाले जसराज गुर्जर बताते है कि बचपन से ही वे अपने बुजुर्गों से सुनते आए हैं कि नीम को नारायण का रूप माना जाता है। उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी किसी को पेड़ काटते नहीं देखा, इसकी टहनी तो दूर की बात है। अगर किसी के घर या रास्ते में नीम का पेड़ बाधा बनता है तो गांव के लोग चौपाल पर एकत्र होकर निर्णय लेते हैं और संबंधित व्यक्ति से मंदिर में दान करने और पक्षियों व कबूतरों को दाना डालने के लिए कहा जाता है। गांव में खेती के साथ-साथ लोग पशुपालन भी करते हैं और ज्यादातर लोग बकरी पालन करते हैं। गांव के लिए वरदान है नीम का पेड़ जसराज गुर्जर ने कहा कि नीम के पेड़ गांव के लिए वरदान हैं क्योंकि इससे गांव का वातावरण स्वच्छ रहता है और लोग स्वस्थ रहते हैं। उन्होंने कहा, कोरोना काल में भी गांव का एक भी व्यक्ति बीमारी से ग्रस्त नहीं हुआ। वहीं गांव के बुजुर्ग बताते है कि नीम के पेड़ से लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि गांव में 15 हजार से ज्यादा नीम के पेड़ हैं। गांव में नीम के पेड़ ज्यादा होने की वजह से गर्मी के दिनों में गांव का तापमान बाकी जगहों से कम रहता है। गांव में जब बिजली चली जाती है तो लोग नीम की ठंडी छांव में समय बिताते हैं। गांव के बुजुर्ग ने बताया कि 700 साल पहले बुजुर्गों ने नीम की रक्षा और संरक्षण का फैसला लिया था और पीढ़ी दर पीढ़ी वे इसका पालन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अगर कोई चुपके से नीम की एक टहनी भी तोड़ देता है और इसकी जानकारी नहीं देता है तो देवनारायण खुद उसे सजा देते हैं। recent visitors 211

दिल्ली कोचिंग हादसे के बाद जागा भोपाल प्रशासन, एक महीने का दिया अल्टीमेटम

भोपाल भोपाल में भी कोचिंग संचालकों को एक महीने का समय दिया गया है, उन्हे प्रशासन ने सख्त निर्देश दिए है कि वह एक महीने में कोचिंग में कमियों को दूर कर निर्देशों का पालन करें, दरअसल यह पूरी कवायद दिल्ली में बेसमेंट में चल रही IAS एकेडमी में पानी भरने से तीन स्टूडेंट्स की मौत के बाद शुरू हुई है। मध्यप्रदेश में कोचिंग सेंटर,अस्पताल, रेस्टोरेंट संचालकों  पर कार्रवाई मध्यप्रदेश के कई बड़े शहरों में बेसमेंट में चल रही कोचिंग कलासेस, अस्पताल, रेस्टोरेंट पर कार्रवाई की गई है। वही भोपाल में भी बेसमेंट में क्लास लगाए जाने पर 7 कोचिंग पर कार्रवाई भी हो चुकी है। शनिवार को एमपी नगर एसडीएम आशुतोष शर्मा ने सभी कोचिंग संचालकों की मीटिंग भी ली। उन्हें पार्किंग और फायर सेफ्टी को लेकर 1 महीने की मोहलत दी गई। मीटिंग में मौजूद रहें कई विभागों के अधिकारी कोचिंग संचालकों को इस बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए थे, जिसके बाद लगभग भोपाल के सभी बड़े छोटे कोचिंग संचालक इसमें शामिल हुए, मीटिंग में पुलिस और प्रशासन के अफसरों के साथ इलेक्ट्रिकल सेफ्टी, निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा के जिम्मेदार भी मौजूद रहे। एमपी नगर एसडीएम आशुतोष शर्मा ने संचालकों को निर्देश देते हुए बताया कि कोचिंग इंस्टीट्यूट में एक महीने में सभी खामियों की पूर्ति करें, एक महीने के बाद फिर से कोचिंग सेंटरों पर जाकर जांच की जाएगी। यदि खामियां दूर नहीं होती है तो सील करने की कार्रवाई होगी। दिशा निर्देश जारी कोचिंग के हर फ्लोर पर एक व्यक्ति को तैनात करना होगा, जो आपात काल स्थिति से निपटने के लिए गाइड कर सकेगा। हर कोचिंग में ऑडिट का डिस्प्ले बोर्ड लगेगा। ताकि, पेरेंट्स को पता चले कि उनका बच्चा यहां कितना सुरक्षित रहेगा। जोन-1 स्थित मल्टी लेवल पार्किंग में टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर्स खड़े करने होंगे। यहां से पैदल जोन-2 स्थित कोचिंग पर आएंगे। फायर ऑडिट जरूरी होगा। बेसमेंट में भी पार्किंग व्यवस्था कराई जाएगी। यहां पर किसी भी हाल में क्लास नहीं लगेगी। recent visitors 85