Wednesday, July 8, 2026 6:15 am

राजस्थान के दौसा जिले से तिरंगे का खास जुड़ाव माना जाता है, यहु से बना हुआ तिरंगा लालकिले पर फहराया गया था

नई दिल्ली पूरा देश कल गुरुवार को आजादी की 78वें स्वाधीनता दिवस का जश्न मनायेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल क़िले की प्राचीर से तिरंगा फहराने के बाद राष्ट्र को सम्बोधित करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने आजादी की 75वीं वर्षगाँठ को अमृत महोत्सव का नाम दिया है। उन्होंने ग़ुलामी की निशानियों से ऊपर आत्म निर्भर भारत के प्रतीक के रूप में नई दिल्ली में महत्वाकांक्षी सेण्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को भी हाथ में लेकर नए कर्तव्य पथ और संसद भवन का शुभारम्भ कराया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2922 से हर घर तिरंगा अभियान चलाया है । यह अभियान 22 जुलाई, 2022 को भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनाने के साथ शुरू किया गया था । इस अभियान से करोड़ों लोग जुड़ें हैं। वर्ष 2022 में 23 करोड़ से अधिक घरों में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था और 6 करोड़ लोगों ने ध्वज के साथ अपनी सेल्फी harghartiranga.com पर अपलोड की थी । वर्ष 2023 में, हर घर तिरंगा अभियान के अन्तर्गत वर्ष 2023 में, 10 करोड़ से अधिक लोगों द्वारा अपनी सेल्फी अपलोड की गईं थी। देश में ही नहीं विदेशों में भी इस अभियान को ज़बरदस्त समर्थन मिला और दुनिया ने विश्व की प्रसिद्ध इमारतों को भी तिरंगे की आकर्षक रोशनी में नहाते हुए देखा हैं। प्रवासी भारतीयों में भी हर घर तिरंगा अभियान के प्रति बड़ा उत्साह देखा गया हैं। आजादी के 77 वर्षों के बाद भी बहुत कम लोगों को यह मालूम है कि वर्ष 1947 में आजादी की पहली सुबह पर दिल्‍ली के ऐतिहासिक लालकिले पर देश के प्रथम प्रधानमन्त्री पण्डित जवाहर लाल नेहरू द्वारा फहराया गया तिरंगा झंडा राजस्‍थान के दौसा जिला के आलूदा गाँव से बन कर आया था। हालाँकि भारत सरकार की ओर से इसकी अधिकृत पुष्टि नहीं की गई हैं। स्वाधीनता दिवस पर देश के हर ज़िले में तिरंगा फहराया जाता है। इस मौके पर देशवासी खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं और देश की आन,बान और शान के प्रतीक तिरगें को नमन कर आजादी के अमर शहीदों का स्मरण करते हैं। राजस्थान के दौसा जिले के हर नागरिक को भी इस दिन एक अलग ही प्रकार की अनूभुति होती हैं, क्योंकि तिरंगे का दौसा जिले से खास जुड़ाव माना जाता है। बताते है कि लाल किले पर जो झंडा पहली बार लहराया गया था वो दौसा के आलूदा कस्बे के बुनकर चौथमल ने बनाया था।यह भी बताया जाता है कि आजादी के पहले तिरंगे को लहराने की तैयारी के लिए चरखा संघ के देशपाण्डे एवं जनरल टाड को जिम्मेदारी सौंपी गई थी।इस दौरान देश के विभिन्न भागों से तीन झंडे लाए गये।एक दौसा के आलूदा गाँव से,दूसरा राजस्थान के ही अलवर जिले के गोविन्दगढ़ से और तीसरा एक अन्य स्थान से लाया गया था।बताया जाता है कि दौसा के आलूदा कस्बे के बुनकर चौथमल द्वारा बनाया गया झंडा पहली बार राष्ट्रीय ध्वज के रुप में लाल किले पर लहराया गया था हालांकि इसका कोई लिखित प्रमाण उपलब्ध नहीं है। दौसा के बुनकरों की झण्डा बनाने की यह कारीगरी आज भी बदस्तूर जारी है।खादी समिति दौसा का भी कहना है कि हालांकि आज़ादी की पहली सुबह पर दिल्ली में फहराया जाने वाला तिरंगा देश के अन्य स्थानों से भी गया था लेकिन दौसा में बने तिरंगे को ही पहली बार ऐतिहासिक लाल क़िले से आजाद हवा में लहराने का मौका मिला था। तिरंगे को लेकर राजस्थान के दौसा जिले का नाम तभी से इतिहास और चर्चा में जुड़ा हुआ हैं। हमारे देश में तीन प्रमुख जगह ऐसी हैं जहां तिरंगे के कपड़े का निर्माण होता आया हैं,इसमें महाराष्ट्र में नांदेड़, कर्नाटका में हुबली एवं राजस्थान में दौसा का नाम प्रमुखता से लिया जाता हैं। दौसा खादी समिति तिरंगे में लगने वाले कपड़े का निर्माण करती थी और यहां से मुंबई जाने के बाद खादी डायर्स एण्ड प्रिटिंग प्रेस में इस कपड़े पर तिरंगा उकेरा जाता था। बताते है कि आजादी से ठीक पहले कांग्रेस अधिवेशन में पं.जवाहरलाल नेहरू द्वारा फहराया गया तिरंगा ध्वज भी राजस्थान के अलवर जिले के नीमराना से ताल्लुक़ रखने वाली अंजु नागर के घर मेरठ (हस्तिनापुर) में सुरक्षित रखा हुआ है। नागर के मौसेरे भाई तरुण रावल के अनुसार यह झण्डा 1946 में कांग्रेस के आखिरी अधिवेशन में मेरठ में फहराया गया था। इस तिरंगे को नागर परिवार ने आज भी बहुत ही सलीके के साथ सहेज का रखा हुआ है। यह ऐतिहासिक तिरंगा 14 फिट चौड़ा और 9 फिट लंबा है। भारतीय तिरंगे की शान निराली है।दुनिया में इसने अपनी एक अलग ही पहचान बनाई है। ओलम्पिक खेलों सहित हर क्षेत्र में अर्जित उपलब्धियों पर हमारे राष्ट्रगान की मधुर धुन के साथ शान से तिरंगा क्षितिज में फहराता है। चन्द्र मिशन के अन्तर्गत चन्द्रयान-3 की सफलता के साथ ही चन्द्रमा पर भी भारत को अपना तिरंगा शान से फहराने का गौरव मिला हैं। recent visitors 116

तहसीलदार बिसन सिंह ठाकुर ने अपने कार्यकाल में अपात्र लोगों को दिए किसान सम्मान निधि का लाभ

डिंडोरी  पीएम किसान सम्मान निधि में गड़बड़ी को लेकर जबलपुर कमिश्नर अभय वर्मा ने डिंडोरी जिले के तत्कालीन तहसीलदार बिसन सिंह ठाकुर को निलंबित कर दिया है। तत्कालीन तहसीलदार पर लगे आरोप सही पाए गए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत सुशीला बाई और कीरत सिंह को पात्र माना गया। दोनों को 05 सितंबर 2019 से 20 अक्टूबर 2019 तक और 25 नवंबर 2019 से 07 अगस्त 2021 तक पीएम किसान योजना की किस्त प्रदान की गई। बाद में इन लाभुकों को मृत बताकर योजना के लाभ से वंचित कर दिया गया। हालांकि बाद में जांच के दौरान पता चला कि दोनों जीवित हैं। तहसीलदार की आईडी से मृत घोषित किया गया इसके साथ ही जांच में यह पाया गया कि दोनों लाभुक जीवित हैं। सुशीला बाई और कीरत सिंह को तहसीलदार की आईडी से मृत अंकित किया गया है। जबलपुर कमिश्नर ने पाया कि तहसीलदार का यह कार्य गंभीर लापरवाही का द्योतक है। बिना जमीन के ही किसान सम्मान निधि का लाभ वहीं, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के सत्यापन के दौरान तहसील डिंडोरी के अंतर्गत लगभग 2700 ऐसे किसान पाए गए, जिनके नाम पर भूमि नहीं है। तहसीलदार द्वारा सत्यापित कर इन्हें पीएम किसान योजना का लाभ दिया जा रहा था। सेल्फ रजिस्ट्रेशन के माध्यम से किसान सिर्फ अपना पंजीयन कर सकते है, लेकिन पात्रता की जांच कर अनुमोदन तहसीलदार की आईडी से किया जाता है। तहसीलदार ठाकुर द्वारा हितग्राहियों की पात्रता संबंधी जांच परीक्षण नहीं किया गया है। 2.83 करोड़ रुपए की राशि का नुकसान इस कारण से अपात्र लोगों को योजना का लाभ प्राप्त हुआ। साथ ही शासन को 2.83 करोड़ रुपए की क्षति हुई है। क्षति की राशि में से मात्र राशि 6.85 लाख रुपए की वसूली की गई, जो मात्र 2.42 प्रतिशत है। तहसीलदार की करतूत वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। सत्यापन के दौरान लगभग 300 ऐसे हितग्राही पाए गए, जिनके परिवार के मुखिया के साथ-साथ अन्य सदस्यों को भी लाभ दिया जा रहा था। इनमें से कुछ तो नाबालिग और स्कूल में अध्ययनरत सदस्यों को लाभ दिया गया है। पात्रता की जांच नहीं की इससे साफ पता चलता है कि तत्कालीन तहसीलदार ठाकुर द्वारा अनुमोदन करने से पूर्व संबंधित हितग्राहियों के पात्र होने का परीक्षण नहीं किया गया है। इसके साथ ही न ही अधीनस्थ अमले से जांच कराई गई है। यह कार्य के प्रति गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। 3916 अपात्रों को दिए लाभ तत्कालीन तहसीलदार ठाकुर ने पीएम किसान सम्मान की शासन के निर्देशों के विपरीत निधि योजनांतर्गत लगभग 3916 अपात्र कृषकों पात्र करते हुए योजना से लाभांवित किया जाता रहा। इससे शासन को लगभग राशि रूपये 2.83 करोड़ की क्षति हुई है। ठाकुर द्वारा ऐसे व्यक्तियों को लाभ दिया गया है, जिनके नाम पर जमीन नहीं है। श्री ठाकुर का उक्त कृत्य वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। जांच के दौरान पीएम किसान पोर्टल पर योजना का लाभ ले चुके अपात्र किसानों से वसूल की जाने वाली राशि 3,68,70,000/- के विरूद्ध 15,17,000/- रुपए की वसूली की जा चुकी है। वित्तीय अनियमितता सामने आई जबलपुर कमिश्नर अभय वर्मा ने कहा कि तहसीलदार बिसन सिंह ठाकुर द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत राशि वितरण लापरवाही बरती गई। उनका यह कृत्य मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-3 के विपरीत है और कदाचार की श्रेणी में आता है। उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में तहसीलदार का मुख्यालय कार्यालय कलेक्टर, सिवनी नियत किया गया है। recent visitors 158

भारत में तीन रामसर साइट्स की हुई घोषणा, इस उपलब्धि से देश में रामसर साइट्स की कुल संख्या 85 हुई: भूपेंद्र यादव

नई दिल्ली 78वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भारत में तीन नए रामसर स्थलों (साइट्स) की घोषणा की है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि से देश में रामसर साइट्स की कुल संख्या 85 हो गई है। ये तीन नए स्थल हैं तमिलनाडु के नांजारायन पक्षी अभयारण्य और काझुवेली पक्षी अभयारण्य तथा मध्य प्रदेश का तवा जलाशय। इन स्थलों को जोड़ने से भारत की समृद्ध जैवविविधता और आर्द्रभूमि संरक्षण के प्रयासों को एक और नई ऊंचाई मिलेगी। आइए जानते हैं आर्द्रभूमि संरक्षण और रामसर साइट्स क्यों जरूरी हैं। रामसर साइट्स का ऐलान रामसर कन्वेंशन के तहत किया जाता है। यह कन्वेंशन एक अंतर-सरकारी संधि है जिसका उद्देश्य आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) का संरक्षण और सतत उपयोग सुनिश्चित करना है। इसके तहत सदस्य देशों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी महत्वपूर्ण वेटलैंड्स की पहचान करें और उन्हें रामसर लिस्ट में शामिल करें। यह संधि वेटलैंड्स की जैवविविधता को बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर जोर देती है। रामसर साइट्स को उनकी अंतर्राष्ट्रीय महत्व की वेटलैंड्स के रूप में पहचाना जाता है और यह साइट्स उन वेटलैंड्स की महत्वपूर्ण जैवविविधताओं को संरक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने तीन नए रामसर साइट्स की इस घोषणा के बारे में जानकारी देते हुए कहा, "जैसे ही देश स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है, यह बताते हुए रोमांचित हूं कि हमने अपने नेटवर्क में तीन रामसर साइट्स को जोड़ा है। अब हमारे देश में रामसर साइट्स की संख्या को 85 हो गई है। यह क्षेत्र 13,58,068 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करता है। यह उपलब्धि पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने पर दिए गए जोर को दर्शाती है। उन्होंने हमारे आर्द्रभूमियों को 'अमृत धरोहर' कहा है और उनकी संरक्षण के लिए निरंतर कार्य किया है।" तमिलनाडु का नांजारायन पक्षी अभयारण्य और काझुवेली पक्षी अभयारण्य जैविक विविधता के अद्वितीय स्थलों में से हैं। नांजारायन पक्षी अभयारण्य प्रवासी पक्षियों के लिए शीतकालीन और प्रजनन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है, यह लगभग 130 पक्षी प्रजातियों का घर है। इसके अलावा यहां सरीसृप, मछली और पौधों की कई प्रजातियां भी पाई जाती हैं। वहीं काझुवेली पक्षी अभयारण्य भी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है और इसमें कई प्रवासी पक्षी और अन्य वन्यजीव निवास करते हैं। मध्य प्रदेश का तवा जलाशय, नर्मदापुरम जिले में स्थित है। यह तवा नदी पर निर्मित तवा बांध से बना है। इस जलाशय का निर्माण 1958 में शुरू हुआ और 1978 में पूरा हुआ। तवा जलाशय सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के पास स्थित है, जो भारत के महत्वपूर्ण बाघ संरक्षण क्षेत्रों में से एक है। यह क्षेत्र न केवल जल संसाधनों का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, बल्कि स्थानीय जैवविविधता के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत में इन तीन नए रामसर स्थलों की घोषणा न केवल देश की प्राकृतिक धरोहरों की सुरक्षा को बल देती है, देश में चल रहे पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी रेखांकित करती है। यह देश की समृद्ध जैवविविधता को संरक्षित करने और प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इन नई रामसर साइट्स के जुड़ने से भारत के आर्द्रभूमि संरक्षण के प्रयासों को नई गति मिली है और यह देश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। recent visitors 186

कृषि विभाग के पर्यवेक्षकों ने पेश की रिपोर्ट, राजस्थान-टोंक में जलभराव से 50 हजार हेक्टेयर फसल खराब

टोंक/जयपुर. टोंक जिले में बारिश से हुए जलभराव के कारण 50 हजार हैक्टेयर फसलों को नुकसान हुआ है, जिसमें लगभग 30 प्रतिशत खराबा सामने आया है। सबसे ज्यादा खराबा मालपुरा, निवाई और पीपलू क्षेत्र में हुआ। फसल खराबे का जायजा लेने कल जयपुर से कृषि विभाग के अधिकारी खेतों में गए और खराबे की जानकारी ली। साथ ही अधिकारियों ने फसलों में कीट के प्रकोप को लेकर भी कृषि पर्यवेक्षक की सलाह से दवाई छिड़कने के लिए कहा। गौरतलब है कि पिछले दिनों जिले में हुई अतिवृष्टि के कारण फसलों को काफी नुकसान हुआ है। अभी भी खेतों में पानी भरा हुआ है। इसी को लेकर कृषि विभाग ने कृषि पर्यवेक्षकों को सर्वे करने का निर्देश दिया था। पर्यवेक्षकों की टीम ने यह सर्वे पूरा कर रिपोर्ट कृषि विभाग के जॉइंट डायरेक्टर वीरेंद्र सिंह सोलंकी को सौंप दी। रिपोर्ट में 50 हजार हैक्टेयर में फसल खराबा सामने आया है। कृषि अधिकारी कजोड़मल गुर्जर ने बताया कि कृषि विभाग टोंक एवं कृषि विज्ञान केंद्र वनस्थली के वैज्ञानिकों की टीम ने मंगलवार को दूनी क्षेत्र में दूनी, संथली, बंधली, गांधी ग्राम आदि गांवों का दौरा कर फसलों का निरीक्षण किया एवं अतिवृष्टि से हुए जलभराव की निकासी करने का सुझाव दिया। कृषि विज्ञान केंद्र वनस्थली के इंचार्ज एवं कृषि वैज्ञानिक बंशीधर चौधरी ने बताया कि उड़द की फसल में पीत शिरा मोजेक रोग का प्रकोप दिखा है, जिसके लिए डायमिथोएट 30 ई सी का एक लीटर प्रति हैक्टैयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी है। recent visitors 95

समस्याओं का नहीं हो पा रहा निदान, छत्तीसगढ़-रायगढ़ पहुंचे पहाड़ी कोरवा का आरोप

रायगढ़. छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा जहां गांव-गांव में कैंप लगाकर हर गांव तक सरकारी सुविधाओं का पहुंचाने की बात कही जाती है, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरवा आज भी मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सुबह उस वक्त देखने को मिला। आधे दर्जन से अधिक पहाड़ी कोरवा अपनी समस्याओं के निदान के लिये जिला मुख्यालय पहुंचे। मिली जानकारी के मुताबिक, सरकार के द्वारा दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में रहने वाले ग्रामीणों और खास करके पहाड़ी कोरवाओं को आत्मनिर्भर बनाने को गांव-गांव में शिविर लगाकर उन्हें प्रोत्साहित करते हुए लाभ पहुंचाने की बात कही जाती है, लेकिन सरकार की यह योजना उस समय महज कागजों में सिमट कर रह जाती है जब सैकड़ों किलोमीटर सफर तय करके कापू थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सलका के पहाड़ी कोरवा जिला मुख्यालय पहुंचकर अपनी मूलभूत समस्याओं को दूर करने के लिए कलेक्टर से गुहार लगाते हैं। recent visitors 90

दलीप ट्रॉफी 2024 : बीसीसीआई टीमों का किया ऐलान, रेयस अय्यर, शुभमन गिल और ऋतुराज गायकवाड़ को मिली कप्तानी

नई दिल्ली दलीप ट्रॉफी 2024 के पहले दौर के मैचों के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई टीमों का ऐलान कर दिया है। शुभमन गिल, अभिमन्यु ईश्वरन, ऋतुराज गायकवाड़ और श्रेयस अय्यर कप्तानी करते हुए नजर आएंगे। गिल टीम ए, ईश्वरन टीम बी, गायकवाड़ टीम सी और अय्यर टीम डी के कप्तान होंगे। भारत के डोमेस्टिक सीजन की शुरुआत दलीप ट्रॉफी के साथ होगी, जो कि एक रेड बॉल टूर्नामेंट है। इस बार दर्जनों इंटरनेशनल प्लेयर इस टूर्नामेंट में खेलने वाले हैं, क्योंकि आने वाले समय में भारत को 10 टेस्ट मैच खेलने हैं। 5 सितंबर से टूर्नामेंट की शुरुआत हो रही है। आंध्र प्रदेश के अनंतपुर और बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में मुकाबले खेले जाएंगे। इसी टूर्नामेंट की शुरुआत के बीच में बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए टीम का ऐलान होगा, जो खिलाड़ी टीम में चुने जाएंगे, उनको दलीप ट्रॉफी से बाहर रखा जाएगा और कुछ युवा खिलाड़ियों को मौका दिया जाएगा। टूर्नामेंट के पहले दौर के लिए चार टीमें इस प्रकार हैं: टीम ए: शुभमन गिल (कप्तान), मयंक अग्रवाल, रियान पराग, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), केएल राहुल (विकेटकीपर), तिलक वर्मा, शिवम दुबे, तनुश कोटियान, कुलदीप यादव, आकाश दीप , प्रसिद्ध कृष्णा, खलील अहमद, अवेश खान, विदवथ कवरप्पा, कुमार कुशाग्र और शास्वत रावत। टीम बी: अभिमन्यु ईश्वरन (कप्तान), यशस्वी जयसवाल, सरफराज खान, ऋषभ पंत(विकेटकीपर), मुशीर खान, नितीश कुमार रेड्डी (फिटनेस के अधीन), वॉशिंगटन सुंदर, रविंद्र जड़ेजा, मोहम्मद सिराज, यश दयाल, मुकेश कुमार, राहुल चाहर, आर साई किशोर, मोहित अवस्थी और एन जगदीशन (विकेटकीपर)। टीम सी: रुतुराज गायकवाड़ (कप्तान), साई सुदर्शन, रजत पाटीदार, अभिषेक पोरेल (विकेटकीपर), सूर्यकुमार यादव, बी इंद्रजीत, रितिक शौकीन, मानव सुथार, उमरान मलिक, विशाक विजयकुमार, अंशुल खंबोज, हिमांशु चौहान, मयंक मारकंडे, आर्यन जुयाल (विकेटकीपर) और संदीप वॉरियर। टीम डी: श्रेयस अय्यर (कप्तान), अथर्व तायडे, यश दुबे, देवदत्त पडिक्कल, ईशान किशन (विकेटकीपर), रिकी भुई, सारांश जैन, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, आदित्य ठाकरे, हर्षित राणा, तुषार देशपांडे, आकाश सेनगुप्ता, केएस भरत (विकेटकीपर) और सौरभ कुमार। recent visitors 155

राहुल गांधी ने कहा- डॉक्टर के साथ हुई रेप और मर्डर की वीभत्स घटना से पूरा देश स्तब्ध है, हो रहा आरोपी को बचाने का प्रयास

नई दिल्ली कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कोलकाता के एक अस्पताल में डॉक्टर के रेप और कत्ल के मामले में चुप्पी तोड़ दी है। बीते सप्ताह हुई इस घटना पर अब तक राहुल गांधी की प्रतिक्रिया नहीं आई थी। उन्होंने बुधवार को एक्स पर लिखे एक पोस्ट में कहा कि आरोपी को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने हाथरस, उन्नाव और कठुआ में हुईं यौन उत्पीड़न की घटनाओं का भी जिक्र कर दिया। इस तरह इशारे में ही उन्होंने ममता बनर्जी के अलावा भाजपा शासित राज्यों की सरकारों को भी कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की। राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, 'कोलकाता में जूनियर डॉक्टर के साथ हुई रेप और मर्डर की वीभत्स घटना से पूरा देश स्तब्ध है। उसके साथ हुए क्रूर और अमानवीय कृत्य की परत दर परत जिस तरह खुल कर सामने आ रही है, उससे डॉक्टर्स कम्युनिटी और महिलाओं के बीच असुरक्षा का माहौल है। पीड़िता को न्याय दिलाने की जगह आरोपियों को बचाने की कोशिश अस्पताल और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।' राहुल गांधी ने आगे लिखते हैं कि इस घटना ने सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अगर मेडिकल कॉलेज जैसी जगह पर डॉक्टर्स सेफ नहीं हैं तो किस भरोसे अभिभावक अपनी बेटियों को पढ़ने बाहर भेजें? उन्होंने सवाल उठाया कि निर्भया केस के बाद बने कठोर क़ानून भी ऐसे अपराधों को रोक पाने में असफल क्यों हैं? हाथरस से उन्नाव, और कठुआ से लेकर कोलकाता तक महिलाओं के खिलाफ लगातार बढ़ती घटनाओं पर हर दल, हर वर्ग को मिलकर गंभीर विचार-विमर्श कर ठोस उपाय करने होंगे। मैं इस असहनीय कष्ट में पीड़िता के परिवार के साथ खड़ा हूँ। उन्हें हर हाल में न्याय मिले और दोषियों को ऐसी सज़ा मिले जो समाज में एक नजीर की तरह प्रस्तुत की जाए। बता दें कि इस मामले में राहुल गांधी की चुप्पी को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। अब उन्होंने ममता बनर्जी से सवाल दागकर विपक्षियों को शांत कर दिया है। recent visitors 96