Wednesday, July 8, 2026 7:11 am

परिजनों ने कहा- पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया है कि डॉक्टर के शरीर में बड़ी मात्रा में वीर्य पाया गया, गैंगरेप की आशंका

कोलकाता कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की डॉक्टर के साथ रेप नहीं बल्कि गैंगरेप होने की भी आशंका है। 31 वर्षीय मृतका के परिजनों ने उच्च न्यायालय में यह बात कही। परिजनों ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया है कि डॉक्टर के शरीर में बड़ी मात्रा में वीर्य पाया गया। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि उसके साथ गैंगरेप किया गया और दरिंदगी करने वालों में कई लोग शामिल थे। उन्होंने अपनी अर्जी में कहा कि उनकी बेटी को गला दबाकर मारने की पुष्टि हुई है। इसके अलावा साफ सबूत मिले हैं कि उसका यौन उत्पीड़न भी हुआ था। अर्जी में परिजनों ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट जो बता रही है, उससे तो चिंता और बढ़ गई है। उनकी बेटी के शरीर में जख्मों के निशान हैं। इससे पता चलता है कि वह बेहद क्रूर और हिंसक हमले का शिकार हुई थी। पीड़िता के सिर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए हैं। दोनों कानों पर चोट है। इससे पता चलता है कि उसने बहुत संघर्ष किया था। उसके ओठों पर चोट है। इससे ऐसा अनुमान लगता है कि उसे चुप करने की कोशिश की गई होगी। यह हमला कितना क्रूर था, इससे ऐसे भी समझ सकते हैं कि डॉक्टर की गर्दन पर भी चोट और काटे जाने के निशान हैं। इस मामले को हाई कोर्ट ने सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया है। इससे पहले पुलिस ने इस केस में आरोपी संजय रॉय को अरेस्ट कर लिया है। वह एक वॉलंटियर के तौर पर जुड़ा था और अकसर अस्पताल जाया करता था। पैरेंट्स ने हाई कोर्ट में कहा कि अब तक इस मामले में किसी अन्य अपराधी को पकड़ने की कोशिश नहीं हुई है। जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह संकेत मिलता है कि उनकी बेटी के साथ गैंगरेप हुआ था और फिर मर्डर कर दिया गया। ऐसा अपराध कोई एक व्यक्ति तो नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक कॉलेज के प्रिंसिपल और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिन्होंने लापरवाही की थी। ममता के अल्टिमेटम का भी इंतजार नहीं, सीबीआई को मिला केस बता दें कि सीएम ममता बनर्जी ने इस मामले की जांच के लिए पुलिस को रविवार तक का समय दिया था। उन्होंने कहा था कि यदि पुलिस रविवार तक मामले का पूरा खुलासा नहीं कर सकी तो फिर केस सीबीआई को टांसफर कर दिया जाएगा। वहीं मंगलवार को केस की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने पहले ही मामला सीबीआई को दे दिया। बेंच ने कहा कि इस मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती और देरी हुई तो फिर सबूत मिटाए भी जा सकते हैं। इसके अलावा बेंच ने प्रिंसिपल के इस्तीफे के बाद उसे दूसरे अस्पताल भेजे जाने पर ऐतराज जताया था और उन्हें लंबी छुट्टी पर जाने को कहा था। recent visitors 88

BCCI सेटलमेंट पर NCLAT के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से Byju’s को झटका

नई दिल्ली आर्थिक संकट से जूझ रही एडुटेक कंपनी बायजू को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने BCCI के साथ बायजू के 158.9 करोड़ रुपये के बकाया के सेटलमेंट को मंजूरी देने वाले दिवाला अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश पर रोक लगा दी है। भारत के प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ नेे बायजू के खिलाफ दिवाला कार्यवाही को रद्द करने के राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण (NCLAT) के आदेश पर भी रोक लगाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने NCLAT के फैसले के खिलाफ अमेरिकी लेंडर ग्लास ट्रस्ट कंपनी की याचिका पर बायजू को नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही कोर्ट ने BCCI को समझौते के तहत बायजू से मिले 158.9 करोड़ रुपये अलग खाते में रखने का निर्देश दिया है। NCLAT ने गत दो अगस्त को बीसीसीआई के साथ बायजू के 158.9 करोड़ रुपये के बकाया समझौते को मंजूरी दे दी थी। प्राधिकरण ने बायजू के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही को भी रद्द कर दिया था, जिससे कंपनी पर बायजू रवींद्रन का नियंत्रण एक बार फिर स्थापित होने की संभावना बढ़ गई थी। कैविएट है दायर हाल ही में बायजू रवींद्रन ने दिवाला अपीलीय न्यायाधिकरण ‘एनसीएलएटी’ द्वारा पारित आदेश के विरोध में ग्लास ट्रस्ट कंपनी एलएलसी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर किया है। यह कैविएट तीन अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष दायर किया गया। इसमें अनुरोध किया गया है कि अमेरिकी ऋणदाताओं द्वारा दायर याचिका पर न्यायालय द्वारा कोई भी आदेश पारित करने से पहले उसका पक्ष भी सुना जाए। ‘कैविएट’ आवेदन किसी वादी द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए दायर किया जाता है कि उसका पक्ष सुने बिना उसके विरुद्ध कोई आदेश पारित न किया जाए। अमेरिकी अदालत ने दिया था ये फैसला इससे पहले बायजू ने बताया था कि एक अमेरिकी अदालत ने बीसीसीआई के साथ उसके समझौते पर अस्थायी रोक लगाने के जीएलएएस ट्रस्ट कंपनी के आवेदन को खारिज कर दिया है। जीएलएएस ने एनसीएलएटी के समक्ष बीसीसीआई के साथ समझौते का भी विरोध किया था और आरोप लगाया था कि रिजू रवींद्रन ने जो राशि दी है, वह ‘राउंड-ट्रिपिंग’ का मामला है। recent visitors 75

यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा- सेना कुर्स्क में आगे बढ़ रही है, भीषण हमलों से किस दुविधा में फंसे पुतिन

यूक्रेन पिछले करीब ढाई साल से चल रहे यूक्रेन-रूस जंग में पहली बार यूक्रेन का पलड़ा भारी दिख रहा है। यूक्रेनी सेना पूर्वी सीमा से सटे रूस के कुर्स्क क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ती जा रही है। यूक्रेन की सेना के कमांडर ओलेक्सांद्र सिरस्की ने कहा है कि उनके सैनिकों ने अब तक कुर्स्क क्षेत्र में 74 बस्तियों पर कब्जा कर लिया है। इसके अलावा पिछले 24 घंटे में और 40 वर्ग किलोमीटर (15 वर्ग मील) क्षेत्र पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। यूक्रेन इससे पहले रूस के 1000 KM क्षेत्र पर कब्जा का दावा कर चुका है। अब यूक्रेन ने रूसी क्षेत्र में अपनी घुसपैठ को आगे बढ़ाने के लिए रूस के दक्षिणी क्षेत्रों पर रात भर ड्रोन और मिसाइल से हमला किया है। इस बीच, रूस ने बुधवार सुबह बताया कि उसने रात भर में 117 यूक्रेनी ड्रोन और कई मिसाइलों को नष्ट कर दिया है, जिनमें से ज़्यादातर कुर्स्क, वोरोनिश, बेलगोरोड और निज़नी नोवगोरोड क्षेत्रों में आ रहे थे। बता दें कि 6 अगस्त को स्थानीय समयानुसार सुबह 5:30 बजे, 1,000 से अधिक यूक्रेनी सैनिकों ने रूस की सीमा पार कर कुर्स्क क्षेत्र में आक्रमण शुरू कर दिया था और कई गांवों पर कब्जा कर लिया था। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने भी कहा कि उनकी सेना कुर्स्क में आगे बढ़ रही है और उन्होंने अपने सैन्य जनरलों को ऑपरेशन में अगले महत्वपूर्ण टारगेट हासिल करने का आदेश दिया है। कीव दावा कर रहा है कि रूस के कम से कम 1,000 वर्ग किलोमीटर (386 वर्ग मील) भूखंड पर उसका नियंत्रण है। उधर, मॉस्को इसका खंडन कर रहा है और जोर देकर कह रहा है कि यूक्रेनी कब्जे में वास्तविक क्षेत्र इसका लगभग आधा है। पुतिन की दुविधा क्या? हालांकि, यह भी साफ है कि कुर्स्क क्षेत्र में यूक्रेन के सैन्य प्रभुत्व ने जहां करीब 200,000 लोगों को सीमावर्ती क्षेत्रों से भागने को मजबूर कर दिया है, वहीं रूस के लिए खतरे का नया अलार्म भी बजा दिया है। बेलगोरोड क्षेत्र के गवर्नर ने बुधवार को यूक्रेन द्वारा लगातार बमबारी को दोषी ठहराते हुए आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी। उधर, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारी दुविधा में फंस गए हैं। उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा है कि वह पहले अपने क्षेत्र की रक्षा करें या यूक्रेन में आगे हमला करें। बड़ी बात यह भी है कि रूस ने हाल के महीनों में कुर्स्क क्षेत्र से ही विमान रोधी मिसाइल, तोप, मोर्टार, ड्रोन, 255 ग्लाइड बम और 100 से अधिक मिसाइलों से दो हजार से अधिक हमले यूक्रेन पर किए हैं। अगर पुतिन कुर्स्क क्षेत्र की रक्षा करने का फैसला लेते हैं तो इसके लिए उन्हें बड़े पैमाने पर सेना की तैनाती करनी होगी और इस काम के लिए यूक्रेन में तैनात सैनिकों को वापस बुलाना होगा। इससे यूक्रेन में उनकी रणनीतिक बढ़त खत्म हो जाएगी। अगर वो ऐसा नहीं करते हैं तो यूक्रेन रणनीतिक रूप से कुर्स्क में और आगे बढ़ सकता है। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की इसी रणनीति पर आगे बढ़ रहे हैं। इस बीच अमेरिका के विदेश विभाग के उप प्रवक्ता वेदांत पटेल ने साफ किया है कि अमेरिका कुर्स्क क्षेत्र में यूक्रेन के सैन्य अभियान के किसी भी पहलू में शामिल नहीं है। द्वितीय विश्व युद्ध की याद क्यों? अल जजीरा की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ जानकारों का मानना ​​है कि रूस पर यूक्रेन का हमला द्वितीय विश्व युद्ध की याद दिला रहा है क्योंकि तब से अब तक किसी भी विदेशी सेना ने रूस पर इतना बड़ा हमला नहीं किया था। जानकारों के मुताबिक, यूक्रेन का हमला इस युद्ध की दिशा और दशा के बदल सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी मंगलवार को कहा कि यूक्रेन ने व्लादिमीर पुतिन के लिए बड़ी दुविधा पैदा कर दी है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी कहा कि यूक्रेन ने बड़े पैमाने पर उकसावे की कार्रवाई की है और नागरिक ठिकानों पर अंधाधुंध गोलीबारी की है। वहीं, कुर्स्क क्षेत्र के कार्यवाहक गवर्नर एलेक्सी स्मिरनोव ने सोमवार को कहा कि हमले में 12 नागरिक मारे गए हैं और 121 अन्य घायल हुए हैं, जिनमें 10 बच्चे भी शामिल हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने भी इसकी पुष्टि की है कि कुर्स्क पर यूक्रेन का हमला यूक्रेन से सैनिकों को वापस बुलाने के लिए मजबूर करने के लिए किया गया है। बता दें कि फरवरी तक यूक्रेन-रूस जंग में सैकड़ों बच्चों समेत 10,000 से अधिक यूक्रेनी नागरिक मारे गए हैं। रूसी हमले में स्कूल, अस्पताल और अन्य प्रमुख बुनियादी ढांचे भी नष्ट हो गए हैं। recent visitors 93

राजा से पंगा लेने वाले डॉग के हिम्मत की भी दाद देनी पड़ेगा, जब जंगल के ‘राजा’ से भिड़ गए 2 डॉग, गुजरात का वीडियो वायरल

अमरेली जंगल के राजा शेर से शायद ही कोई पंगा लेने या लड़ने की हिम्मत करता होगा। अपनी एक दहाड़ से दुश्मन के हौंसले पस्त करने वाले राजा को दो डॉग ने चुनौती दी। दोनों दो शेरों से भिड़ गए। हालांकि बीच में गेट होने की वजह से शेर और डॉग को किसी तरह की नुकसान नहीं हुआ। लेकिन दोनों के बीच लड़ाई देखकर आप अपने दांतों तले अंगुली दबा लेंगे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मामला गुजरात के गिर नेशनल पार्क से कुछ 70 किलोमीटर दूर का है। हालांकि एक बात तो तय है कि आप भी वीडियो को बार-बार देखना चाहेंगे। वहीं राजा से पंगा लेने वाले डॉग के हिम्मत की भी दाद देनी पड़ेगा। क्या है मामला गुजरात में दो कुत्तों और दो शेरों के बीच लड़ाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के अमरेली में सावरकुंडला की एक गौशाला में चारों जानवरों के बीच लड़ाई हुई। यह जगह एशियाई शेरों के लिए मशहूर गिर नेशनल पार्क से करीब 70 किलोमीटर दूर है। रविवार देर रात गेट पर लगे सीसीटीवी में यह वाकया कैद हो गया। वीडियो में दिख रहा है कि दो शेर गौशाला की तरफ आते हैं, तभी अचानक उनकी मुलाकात गेट के दूसरी ओर खड़े दो कुत्तों से हो जाती है। लोहे का गेट बना 'कवच' इसके बाद चारों गेट पर पंजे मारते और एक-दूसरे पर गुर्राते दिख रहे हैं। गनीमत रही की किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचा क्योंकि उनके बीच लोहे का एक गेट था। जो किसी सुरक्षा कवच की तरह था। इसके बाद शेर पास की झाड़ियों में भाग गए। इसके कुछ सेकंड बाद एक आदमी गेट से बाहर आता हुआ दिखता है, जो यह पता लगाने की कोशिश कर रहा था कि वहां आखिर क्या हुआ था। फिर उसने टॉर्च की मदद से झाड़ियों में देखने की कोशिश की और आखिरकार गौशाला में वापस आकर गेट बंद कर दिया। भटककर पहुंचे थे शेर माना जा रहा है कि शेर रिजर्व वन क्षेत्र से भटककर वहां पहुंच गए थे। यह घटना गुजरात में वर्ल्ड लॉयन डे के एक दिन घटी है। वर्ल्ड लॉयन डे पर शेरों के संरक्षण और सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। राज्य वन विभाग ने नागरिकों को एसएमएस और ईमेल के जरिए जागरूकता फैलाकर इस दिन को मनाया और स्कूली छात्रों ने शेरों की आबादी वाले 11 जिलों में रैलियों, ड्राइंग प्रतियोगिताओं आदि में भाग लिया। 2020 की गणना के अनुसार, गुजरात में एशियाई शेरों की संख्या 674 है। recent visitors 116

बच्चे की देखभाल का जिम्मा पति और पत्नी दोनों का है, इसलिए दोनों ही चाइल्ड केयर लीव के हकदार हैं

कोलकाता कलकत्ता हाई कोर्ट ने हाल ही में निर्देश दिया है कि बाल देखभाल अवकाश यानी चाइल्ड केयर लीव का लाभ महिला और पुरुष दोनों कर्मचारियों को दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि बच्चे की देखभाल का जिम्मा सिर्फ मां पर नहीं होती है बल्कि यह जिम्मेदारी माता और पिता दोनों द्वारा साझा की जानी चाहिए, इसलिए दोनों ही चाइल्ड केयर लीव के हकदार हैं। कोर्ट ने एक ऐसे व्यक्ति की याचिका पर यह आदेश सुनाया है जिसके दो नाबालिग बच्चे हैं और कुछ महीने पहले ही उनकी पत्नी का देहांत हो चुका है। याचिकाकर्ता ने इसी आधार पर 730 दिनों के चाइल्ड केयर लीव की मांग की थी। याचिकाकर्ता अबु रेहान ने अपनी अर्जी में कहा था कि बच्चे स्कूल जाने की उम्र में हैं लेकिन उनके अलावा बच्चों की देखभाल करनेवाला कोई नहीं है। इसलिए वह अपने बच्चों की देखभाल और उनके शारीरिक, शैक्षिक और भावनात्मक विकास के लिए चाइल्ड केयर लीव का लाभ उठाना चाहता है। याचिकाकर्ता एक सरकारी सेवक है। उसने याचिका में कहा कि सरकारी ज्ञापन संख्या 1100-एफ (पी) दिनांक 25 फरवरी 2016 के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार ने पुरुष कर्मचारियों को 30 दिनों का पितृत्व-सह-बाल देखभाल अवकाश स्वीकृत किया है लेकिन यह अवधि उनके लिए पर्याप्त नहीं हैं। याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में 17 जुलाई 2015 के ज्ञापन संख्या 5560-एफ(पी) का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि नियमित महिला कर्मचारियों को अधिकतम दो वर्ष यानी 730 दिनों का चाइल्ड केयर लीव का लाभ दिया जा सकता है। अबु रेहान ने कहा कि चूंकि वह सिंगल पैरेंट है, इसलिए उसे भी 730 दिनों का चाइल्ड केयर लीव का लाभ दिया जाना चाहिए। उसने यह भी कहा कि उक्त दोनों ज्ञापन भेदभावपूर्ण हैं और संविधान प्रदत समानता के अधिकारों का उल्लंघन है। लॉ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस अमृता सिन्हा की एकल पीठ ने कहा, "ऐसा लगता है कि अब समय आ गया है, जब सरकार को अपने कर्मचारियों के साथ पुरुष और महिला कर्मचारियों के बीच किसी भी तरह का भेदभाव किए बिना एक जैसा बर्ताव करना चाहिए। परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी सिर्फ महिला या पुरुष नहीं बल्कि माता और पिता दोनों को समान रूप से निभानी चाहिए। हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट 1956 के तहत लड़के या अविवाहित लड़की के मामले में हिंदू नाबालिग का प्राकृतिक अभिभावक पिता होता है और उसके बाद माता। सरकार को पुरुष कर्मचारियों को भी वैसा ही लाभ देने का निर्णय लेना चाहिए जैसा महिलाओं के मामले में किया गया है… ताकि भेदभाव को खत्म किया जा सके।" इससे पहले राज्य सरकार के वकील ने कहा कि महिला कर्मचारियों को जो लाभ दिया गया है, वह पुरुष कर्मचारियों के लिए उपलब्ध नहीं है। हालांकि, कोर्ट को यह भी बताया गया कि याचिकाकर्ता का आवेदन अभी विचाराधीन है और उस पर कानून के मुताबिक विचार किया जाएगा। इस पर जस्टिस सिन्हा ने कहा कि अदालत महिला और पुरुष में भेदभाव किए बिना चाइल्ड केयर लीव पर 90 दिनों के अंदर फैसला लेने का आदेश देती है। recent visitors 88

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जीप में सवार होकर की तिरंगा यात्रा की अगवानी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि तिरंगा हमारी आन-बान-शान का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर घर तिरंगा अभियान के माध्यम से पूरे देश को देशभक्ति और स्वतंत्रता की भावना में ओतप्रोत होने का अवसर प्रदान किया है। तिरंगे में विद्यमान चक्र देश की गति को दर्शाता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमने देश को विश्व की पांचवीं अर्थव्यवस्था में शामिल किया है। देश की शक्ति और विशेष कर युवा सामर्थ्य के माध्यम से हम जल्द ही विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था होंगे। स्वतंत्रता दिवस का महत्व हमारे सभी प्रमुख त्योहार होली, दिवाली से अधिक है, अत: हर घर में तिरंगा लहराना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव हर घर तिरंगा अभियान के अंतर्गत कर्म संस्था द्वारा कोलार रोड स्थित मदर टेरेसा स्कूल से निकाली जा रही तिरंगा यात्रा के शुभारंभ अवसर पर तिरंगा यात्रा के सहभागियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने जन-गण-मन के राष्ट्र गान के साथ यात्रा का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जीप में सवार होकर तिरंगा लहराते हुए यात्रा की अगवानी की। इस अवसर पर विधायक एवं पूर्व प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। युवाओं के लिए सृजित किए जा रहे हैं रोजगार के अवसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारी बौद्धिक क्षमता, परिश्रम और दक्षता के आधार पर विकास के पथ पर अग्रसर हैं। प्रदेश ने खेती-किसानों में लगातार प्रगति की है। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से औद्योगिक गतिविधियों और सूचना प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। कोलार क्षेत्र का संपूर्ण वातावरण देशभक्ति की भावना से हुआ ओत-प्रोत मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मोटर साइकिलों पर सवार युवा तिरंगा लहराते हुए यात्रा में आगे बढ़ रहे थे। सड़क के दोनों ओर खड़े स्कूली बच्चे तिरंगा लहराकर वंदे-मातरम तथा भारत माता की जय के नारों के साथ तिरंगा यात्रा का अभिवादन कर रहे थे। कोलार रोड पर जगह-जगह बने सामाजिक संस्थाओं, व्यापारी संगठनों, समाजसेवियों, महिला संगठनों के मंचों से तिरंगा यात्रा का आत्मीय स्वागत किया गया। यात्रा में ड्यूटी कर रहे पुलिस कांस्टेबल भी अपनी मोटरसाइकिल पर तिरंगा लहराते हुए दायित्व निर्वहन कर रहे थे। यात्रा के मार्ग पर दुकानों, मकानों के अतिरिक्त वाहनों को भी तिरंगे से सजाया गया था। परिणामस्वरूप तिरंगा यात्रा से क्षेत्र का संपूर्ण वातावरण देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत था।   recent visitors 65

प्रधानमंत्री मोदी देश की प्रगति के लिए सक्षम नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

देश का विभाजन 20वीं शताब्दी की सबसे अधिक दु:खद और अत्यंत त्रासदीपूर्ण दुर्घटना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव देश को आगे बढ़ना है तो इतिहास के घावों और गलतियों से सबक लेना होगा प्रधानमंत्री मोदी देश की प्रगति के लिए सक्षम नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की विभाजन का दंश झेल चुके परिवारों के सदस्यों का किया सम्मान विभाजन की त्रासदी पर केन्द्रित प्रदर्शनी और लघु फिल्म का हुआ प्रदर्शन सरोजनी नायडू कन्या महाविद्यालय में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर हुआ कार्यक्रम भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मन में देश की विभाजन विभीषिका के संबंध में जो पीड़ा है, वह हम सब अनुभव करते हैं। देश का विभाजन 20वीं शताब्दी की सबसे अधिक दु:खद, दुर्दांत और अत्यंत त्रासदीपूर्ण दुर्घटना है। इसका विवरण करूण और कठिन है। यह वास्तविकता है कि इस त्रासदी से गुजरे कई लोग इस संबंध में बात भी नहीं करना चाहते, लेकिन यदि किसी देश को लंबी यात्रा करना है, उसे आगे बढ़ना है तो इतिहास के घावों और गलतियों से उसे सबक लेना होगा, अन्यथा देश का भविष्य खतरे में होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या महाविद्यालय भोपाल में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विभाजन पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में विभाजन की विभीषिका पर केन्द्रित लघु फिल्म तथा प्रधानमंत्री मोदी के इस विभीषिका पर सोच को दर्शाती फिल्म भी प्रदर्शित की गई। कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग, संस्कृति राज्य मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी, महापौर श्रीमती मालती राय, विधायक भगवानदास सबनानी उपस्थित थे। भारतीयों ने छल और चालाकी के कारण हानि उठाई मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस संबंध में कई उदाहरण प्रासंगिक हैं। इजराइल, इराक और इरान ने अपनी अस्मिता और राष्ट्रीयता के लिए जो संघर्ष किया वह हम सबके लिए प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि हम भारतीयों की यह विशेषता है कि हम अपने उदात्त भाव के परिणामस्वरूप सभी को अपना मानते हैं, परंतु अक्सर लोगों की चालाकियों और छल के कारण हानि उठानी पड़ती है। उन्होंने इस संबंध में पृथ्वीराज चौहान, गुलामवंश के शासकों, मोहम्मद गजनी, मोहम्मद बिन कासिम का उदाहरण देते हुए कहा कि कई युद्ध छल से जीते गए और देश को लंबे समय तक गुलामी का दंश झेलना पड़ा। अन्य चालाकियों और छल प्रपंचों से देश में धर्मांतरण की प्रक्रिया को भी तेज किया गया। व्यापार करने आए अंग्रेजों ने भी 1857 की क्रांति के बाद देश में अपने पैर जमाए रखने के लिए "फूट डालो राज करो" की नीति से हिन्दू-मुसलमानों को विभाजित किया, परिणामस्वरूप 1906 में अंग्रेजों के माध्यम से मुस्लिम लीग का फार्मूला लाया गया। मुस्लिम बहुलता वाले निर्वाचन क्षेत्रों को चुनकर वहां मतदान के अधिकार और चुनाव लड़ने का अधिकार भी केवल मुसलमानों को था। अंग्रेजों का षड़यंत्र नहीं समझ सके राजनैतिक दल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अंग्रेजों की इस विभाजन करने वाली सोच के बाद भी यह भारतीय समाज की ताकत थी कि 1906 में जब पहली बार मुस्लिम लीग ने अपने प्रत्याशी खड़े किए तो अंग्रेजों के षड़यंत्र को समझते हुए वर्ष 1906, 1911, 1916 और 1923 के चुनाव में देशभक्त जनता ने मुस्लिम लीग के प्रत्याशियों को विजयी नहीं होने दिया, और 1936 तक मुस्लिम लीग के प्रत्याशी लगातार हारते रहे। लेकिन तत्कालीन भारतीय राजनैतिक दल अंग्रेजों का यह षड़यंत्र नहीं समझ सके और उन्होंने तुर्की में हुए खलीफा आंदोलन को धर्म के आधार पर समर्थन प्रदान किया। परिणामस्वरूप देश के बंटवारे की भावनाओं का अंकुरण होना आरंभ हो गया और 1940 के चुनाव में विभाजनकारी ताकतों ने सभी सीटें जीत लीं। हमारी सांस्कृतिक एकता के मापदंड भूलने के कारण देश ने विभाजन की विभीषिका झेली मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल, नेताजी सुभाषचंद्र बोस जैसे नेता इस षड़यंत्र के विरूद्ध थे। इन्हें नेतृत्व का मौका नहीं मिला। गणेश उत्सव की शुरूआत करने वाले बाल गंगाधर तिलक, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना करने वाले पंडित मदन मोहन मालवीय, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह जैसे राष्ट्रभक्त हाशिए पर चले गए। देश का बंटवारा नहीं होने देने के लिए प्रतिबद्ध राजनैतिक दल अपने प्रण पर दृढ़ नहीं रह सका। रातों-रात देश के बंटवारे का सिद्धांत बना, लार्ड माउंटबेटन ने उसे स्वीकृति प्रदान की और हमारे भाई-बहनों को विभाजन की विभीषिका झेलनी पड़ी। देश में राष्ट्रवादी मुसलमानों का सम्मान नहीं किया गया। हमारी सांस्कृतिक एकता के मापदंड को भूलने के परिणामस्वरूप ही देश को विभाजन की विभीषिका झेलनी पड़ी और भीषण नरसंहार भोगना पड़ा। ऐसे कई रेलें थीं जिनके सभी यात्रियों को मार डाला गया, बहन-बेटियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। पंजाब दो भागों में बटा, सिंध हाथ से चला गया और राष्ट्र गान में सिंध का शब्द शेष रह गया। विभाजन के समय परिवारों ने धर्म और संस्कृति रक्षा के लिए अपना सब कुछ त्यागा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विभाजन की विभीषिका को इस स्वरूप में देखा जाना चाहिए कि हमारे द्वारा लिए गए गलत निर्णयों का परिणाम कई पीढ़ियां भुगतती हैं। कई परिवारों को केवल देशभक्ति और सनातन संस्कृति को बचाए रखने के लिए अपना घर, धन-दौलत, जमीन-जायदाद एक रात में छोड़कर आना पड़ा, यह कष्ट कल्पनातीत है। धर्म रक्षा के लिए किया गया यह त्याग केवल भारत में ही संभव है। भारत विश्व में अपनी अच्छाई, सच्चाई और संस्कृति के लिए जाना जाता है। भारत रसखान और रहीम को भूल नहीं सकता, वे हमारे पाठ्यक्रम का भाग हैं। ऐसे मूल्यों के अनुसरण के परिणामस्वरूप ही इंडोनेशिया की करेंसी पर आज भी भगवान गणेश का चित्र अंकित है और उनकी गरूड़ एयरलाइंस विष्णु भगवान के वाहन के नाम से जानी जाती है। प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर हुई नागरिकता देने की व्यवस्था मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी ने उस काल के कष्ट और तत्कालीन नेतृत्वकर्ताओं की गलती को समझा है। वे इनसे सबक लेते हुए देश की एकता को बनाए रखने व भविष्य में देश को प्रगति पथ पर अग्रसर करने के लिए सक्षम नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं। वर्ष 1857 के बाद भारत से अलग … Read more