Tuesday, July 7, 2026 1:53 pm

मुंबई आतंकी हमले का आरोपी तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण संभव: कोर्ट

 कैलिफोर्निया अमेरिका की एक अदालत ने मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों में संलिप्तता के आरोपी एवं पाकिस्तानी मूल के कनाडाई व्यवसायी तहव्वुर राणा को बड़ा झटका देते हुए फैसला सुनाया है कि उसे प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत को प्रत्यर्पित किया जा सकता है। ‘यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर नाइंथ सर्किट’ ने 15 अगस्त को सुनाए अपने फैसले में कहा, ‘भारत अमेरिका प्रत्यर्पण संधि राणा के प्रत्यर्पण की अनुमति देती है।’ राणा ने कैलिफोर्निया में अमेरिकी ‘डिस्ट्रिक्ट कोर्ट’ के आदेश के खिलाफ ‘यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर नाइंथ सर्किट’ में याचिका दायर की थी। कैलिफोर्निया की अदालत ने उसकी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को अस्वीकार कर दिया था। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में मुंबई में आतंकवादी हमलों में राणा की कथित संलिप्तता के लिए उसे भारत प्रत्यर्पित किए जाने के मजिस्ट्रेट न्यायाधीश के आदेश को चुनौती दी गई थी। ‘यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर नाइंथ सर्किट’ के न्यायाधीशों के पैनल ने ‘डिस्ट्रिक्ट कोर्ट’ के फैसले की पुष्टि की। प्रत्यर्पण आदेश की बंदी प्रत्यक्षीकरण समीक्षा के सीमित दायरे के तहत, पैनल ने माना कि राणा पर लगाए गए आरोप अमेरिका और भारत के बीच प्रत्यर्पण संधि की शर्तों के अंतर्गत आते हैं। इस संधि में प्रत्यर्पण के लिए ‘नॉन बिस इन आइडेम’ (किसी व्यक्ति को एक अपराध के लिए दो बार दंडित नहीं किए जाने का सिद्धांत) अपवाद शामिल है। जिस देश से प्रत्यर्पण का अनुरोध किया गया हो, यदि ‘‘वांछित व्यक्ति को उस देश में उन अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया हो या दोषमुक्त कर दिया गया हो, जिनके लिए प्रत्यर्पण का अनुरोध किया गया है’’, तो ऐसी स्थिति में यह अपवाद लागू होता है। पैनल ने संधि की विषय वस्तु, विदेश मंत्रालय के तकनीकी विश्लेषण और अन्य सर्किट अदालतों में इस प्रकार के मामलों पर गौर करते हुए माना कि ‘‘अपराध’’ शब्द अंतर्निहित कृत्यों के बजाय आरोपों को संदर्भित करता है तथा इसके लिए प्रत्येक अपराध के तत्वों का विश्लेषण आवश्यक है। तीन न्यायाधीशों के पैनल ने निष्कर्ष निकाला कि सह-साजिशकर्ता की दलीलों के आधार पर किया गया समझौता किसी अलग नतीजे पर पहुंचने के लिए बाध्य नहीं करता। पैनल ने माना कि ‘नॉन बिस इन आइडेम’ अपवाद इस मामले पर लागू नहीं होता, क्योंकि भारतीय आरोपों में उन आरोपों से भिन्न तत्व शामिल हैं, जिनके लिए राणा को अमेरिका में बरी कर दिया गया था। पैनल ने अपने फैसले में यह भी माना कि भारत ने मजिस्ट्रेट जज के इस निष्कर्ष का समर्थन करने के लिए पर्याप्त सक्षम सबूत पेश किए हैं कि राणा ने वे अपराध किए हैं, जिनका उस पर आरोप लगाया गया है। पैनल के तीन न्यायाधीशों में मिलन डी स्मिथ, ब्रिजेट एस बेड और सिडनी ए फिट्जवाटर शामिल थे। पाकिस्तानी नागरिक राणा पर अमेरिका की एक जिला अदालत में मुंबई में बड़े पैमाने पर आतंकवादी हमले करने वाले एक आतंकवादी संगठन को समर्थन देने के आरोप में मुकदमा चलाया गया था। जूरी ने राणा को एक विदेशी आतंकवादी संगठन को सहायता प्रदान करने और डेनमार्क में आतंकवादी हमलों को अंजाम देने की नाकाम साजिश में सहायता प्रदान करने की साजिश रचने का दोषी ठहराया था। हालांकि, इस जूरी ने भारत में हमलों से संबंधित आतंकवादी कृत्यों में सहायता प्रदान करने की साजिश रचने के आरोप से राणा को बरी कर दिया था। राणा को जिन आरोपों के तहत दोषी ठहराया गया था, उसने उनके लिए सात साल जेल में काटे और उसकी रिहाई के बाद भारत ने मुंबई हमलों में उसकी संलिप्तता के मामले में उस पर मुकदमा चलाने के लिए उसके प्रत्यर्पण का अनुरोध किया था। राणा को प्रत्यर्पित किए जा सकने का सबसे पहले फैसला सुनाने वाले मजिस्ट्रेट न्यायाधीश के समक्ष उसने दलील दी थी कि भारत के साथ अमेरिका की प्रत्यर्पण संधि उसे ‘नॉन बिस इन आइडेम’ प्रावधान के कारण प्रत्यर्पण से संरक्षण प्रदान करती है। उन्होंने यह भी दलील दी थी कि भारत ने यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं दिए कि अपराध उसने ही किए हैं। अदालत ने राणा की इन दलीलों को खारिज करने के बाद उसे प्रत्यर्पित किए जा सकने का प्रमाणपत्र जारी किया था। अमेरिका की जेल में बंद राणा मुंबई हमलों में संलिप्तता के आरोपों का सामना कर रहा है। उसे पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली का साथी माना जाता है, जो 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक है। इन आतंकवादी हमलों में छह अमेरिकी नागरिकों समेत कुल 166 लोगों की मौत हो गई थी। recent visitors 91

सीवन नदी घाट से कुबेरेश्वर धाम तक शुरू हुई कांवड़ यात्रा, कुबेरेश्वर धाम तक उमड़ा आस्था का सैलाब

सीहोर  पवित्र श्रावण मास में शनिवार को सीहोर में भव्य कांवड़ यात्रा निकाली जा रही है। सीवन नदी के तट से शुरू होने वाली इस कावड़ यात्रा को लेकर शुक्रवार देर शाम से ही शहर में श्रद्धालु नजर आने लगे थे। सुबह होते-होते हजारों की सख्या में श्रद्धालु पहुंचने से पूरा सीवन तट केसरिया रंग में रंगे कावड़ियों से पट गया। सुबह नो बजे शुरू हुई कावड़ यात्रा 11 किमी का सफर कर कुबेरेश्वर धाम पहुंचेगी। जगह-जगह स्वागत के इंतजाम भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनके उपासक कई तरह के उपाय करते हैं, जिनमें से एक कांवड़ यात्रा भी शामिल है। शनिवार को शहर के सीवन तट से करीब 11 किलोमीटर तक यह कांवड यात्रा क्षेत्र वासियों ने लिए संजीवनी से कम नहीं है। यात्रा में शामिल होने के लिए कांवड यात्री शहर में आकर आस्था और उत्साह के साथ कुबेरेश्वरधाम पर पहुंच रहे हैं। इस दौरान शहर सहित आस-पास के शहरवासी, ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों के अलावा जनप्रतिनिधियों के द्वारा 200 से अधिक स्थानों पर स्वागत और पेयजल सहित अन्य की व्यवस्था की गई, वहीं करीब 450 किलोमीटर दूर अमरावती से पांच से अधिक कांवड यात्री पैदल चलते हुए सीहोर पहुंच रहे है। यह है कांवड़ यात्रा का मार्ग कावड़ यात्रा सुबह नौ बजे शहर के सीवन नदी तट से आरंभ हुई जो जगदीश मंदिर, कोतवाली चौराहा, मेन रोड, इंदौर नाके, सोया चौपाल होते हुए कुबेरेश्वर धाम पर पहुंचेगी। कांवड़ यात्रा में दो दर्जन से अधिक डीजे व बैंड पार्टियां शामिल हैं। इसके अलावा आकर्षक झांकियों के साथ डमरू दल भी शिवभक्ति में मगन होकर झूमते-नाचते चल रहा है। इस संबंध में सभी शिवभक्तों को कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने संदेश देते हुए कहा कि कांवड़ यात्रा को लेकर विठलेश सेवा समिति सहित क्षेत्रवासियों ने अपने-अपने स्तर पर तैयारियां की है। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्र के सभी समाज के लोगों ने बैठकों के द्वारा यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के पोहा, नश्ता, पेयजल, भोजन आदि की निश्शुल्क व्यवस्था की है। वहीं शहर के अनेक शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में भी हजारों श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था प्रशासन ने की है। recent visitors 173

पटरी पर रखी भारी चीज से टकराकर डिरेल हुई साबरमती Exp, अब IB कर रही जांच

कानपुर कानपुर में आज सुबह रेल हादसा (Train accident) हो गया. यहां ट्रेन के 22 डिब्बे पटरी से उतर गए. इस हादसे को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि साबरमती एक्सप्रेस (वाराणसी से अहमदाबाद) का इंजन आज सुबह 2:35 बजे कानपुर के पास ट्रैक पर रखी किसी चीज से टकरा गया. इसके बाद पटरी से उतर गया. इस घटना के बाद कुछ निशान देखे गए हैं. कुछ निशान लोको से 16वें कोच के पास मिले थे. शुरुआती जांच के अनुसार, रेलवे ट्रैक में कोई फ्रैक्चर नहीं है. रेल मंत्री ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर लिखा है कि हादसे के एविडेंस सुरक्षित कर लिए गए हैं. आईबी और यूपी पुलिस भी मामले की जांच में जुटी है. इस घटना में यात्रियों या कर्मचारियों को कोई चोट नहीं आई है. पैसेंजर्स के लिए अहमदाबाद के लिए ट्रेन की व्यवस्था की गई है. वहीं कानपुर एडीएम सिटी राकेश वर्मा ने कहा कि 22 बोगियां पटरी से उतरी हैं, गनीमत रही कि कोई घायल नहीं हुआ है. सभी यात्रियों को बस से वापस स्टेशन भेजा जा रहा है. एक मेमो ट्रेन भी यहां आ रही है. किसी तरह से कोई हताहत नहीं हुआ है. बता दें कि शुक्रवार की देर रात कानपुर में साबरमती एक्सप्रेस हादसे का शिकार हो गई. यहां ट्रेन के 22 डिब्बे बेपटरी हो गए. गनीमत रही कि हादसे में किसी भी प्रकार की जान माल की कोई क्षति नहीं हुई है. इस हादसे को लेकर ड्राइवर ने भी कहा है कि हादसा प्रथम दृष्टया बोल्डर के इंजन से टकराने की वजह से हुआ है, क्योंकि जैसे ही बोल्डर इंजन से टकराया, वैसे ही इंजन का कैटल गार्ड मुड़ गया. रेलवे ने हेल्पलाइन नंबर किए जारी रेल प्रशासन की ओर से यात्रियों की सुविधा के सभी इंतजाम किए गए हैं. यात्रियों को बस से कानपुर भेजा जा रहा है. सीनियर अधिकारी घटनास्थल और कंट्रोल रूम में मौजूद हैं. दुर्घटनाग्रस्त ट्रेन को रवाना कर दिया गया है. यात्रियों की मदद के लिए रेलवे की तरफ से हेल्पलाइन नंबर भी जारी कर दिए गए हैं. रेलवे की तरफ से जारी हेल्पलाइन नंबर प्रयागराज 0532-2408128, 0532-2407353 कानपुर 0512-2323018, 0512-2323015 मिर्जापुर 054422200097 इटावा 7525001249 टुंडला 7392959702 अहमदाबाद 07922113977 बनारस सिटी 8303994411 गोरखपुर 0551-2208088 इन ट्रेनों को किया गया है कैंसिल (1) 01823/01824 (वी झांसी-लखनऊ) JCO 17.08.24 (2) 11109 (वी झांसी-लखनऊ जंक्शन) JCO 17.08.24 (3) 01802/01801 (कानपुर-मानिकपुर) JCO 17.08.24 (4) 01814/01813 (कानपुर-वी झांसी) JCO 17.08.24 (5) 01887/01888 (ग्वालियर-इटावा) JCO 17.08.24 (6) 01889/01890 (ग्वालियर-भिंड) JCO 17.08.24 इन ट्रेनों का किया गया मार्ग परिवर्तन (1) 11110 (लखनऊ जंक्शन-वी झांसी) JCO 16.08.24 परिवर्तित मार्ग गोविंदपुरी- इटावा- भिंड- ग्वालियर-वी झांसी. (2) 22537 (गोरखपुर-लो.तिलक टर्मिनल) JCO 16.08.2024 गोविंदपुरी- इटावा- भिंड- ग्वालियर- वी झांसी. (3) 20104 (गोरखपुर-लो.तिलक टर्मिनल) JCO 16.08.24 कानपुर-इटावा-भिंड-ग्वालियर-वी झांसी. सिलीगुड़ी के रंगा पानी में मालगाड़ी पटरी से उतरी वहीं दूसरा हादसा पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी-रंगा पानी में भी हुआ है. ये एक्सीडेंट एक प्राइवेट यार्ड में हुआ, जहां ईंधन ले जा रही मालगाड़ी पटरी से उतर गई. देर रात सिलीगुड़ी -रंगा पानी इलाके में मालगाड़ी पटरी से उतर गई. मालगाड़ी ईंधन ले जा रही थी. रेलवे का कहना है कि ये हादसा एक प्राइवेट यार्ड में हुआ. ऐसे में रेल मंत्रालय से उसका कोई लेना देना नहीं है. इससे पहले भी रंगा पानी में 15 दिन पहले एक और मालगाड़ी पटरी से उतर गई थी. इसी इलाके में इस साल जून के महीने में कंचनजंघा एक्सप्रेस का एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे. यहां 2 महीने के अंदर 3 ट्रेनें दुर्घटनाग्रस्त हो चुकी हैं. recent visitors 87

कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया जमीन घोटाले में फंसे , राज्यपाल ने दी केस की मंजूरी

बेंगलुरु कर्नाटक से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जो आने वाले समय में राज्य की राजनीति में भूचाल ला सकती है। वहां के राज्यपाल ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ उनके परिवार से जुड़े MUDA मामले में मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है। राज्यपाल थावरचंद गहलोत को दो कार्यकर्ताओं की शिकायतें मिली हैं, जिनमें से एक आरटीआई कार्यकर्ता टीजे अब्राहम भी हैं। दूसरी शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा द्वारा हाल ही में की गई थी। शिकायत में कहा गया है कि सीएम सिद्धारमैया द्वारा कानून का पालन करने के बार-बार दावों के बावजूद सिद्धारमैया की पत्नी को MUDA द्वारा 14 साइटें आवंटित करने में स्पष्ट उल्लंघन हुआ है। इससे पहले कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने भी मुख्यमंत्री को कारण बताओ नोटिस जारी करके पूछा है कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति क्यों न दी जाए। जवाब में, कर्नाटक कैबिनेट ने "दृढ़ता से सिफारिश" की कि राज्यपाल मुख्यमंत्री को जारी नोटिस वापस लें। क्या है मामला? कर्नाटक में भूमि आवंटन घोटाला सुर्खियों में रहा है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री की पत्नी 2021 में भाजपा के कार्यकाल के दौरान MUDA की लाभार्थी थीं। उस समय मैसूर के प्रमुख स्थानों में 38,284 वर्ग फुट भूमि उन्हें उनकी 3.16 एकड़ जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण के मुआवजे के रूप में आवंटित की गई थी। मैसूर के केसारे गांव में उनकी 3.16 एकड़ जमीन उनके भाई मल्लिकार्जुन ने उन्हें उपहार में दी थी। मुआवजे के तौर पर दक्षिण मैसूर में एक प्रमुख इलाके में उन्हें जमीन दी गई। आरोप है कि केसर गांव की जमीन की तुलना में इसकी कीमत काफी अधिक है। इसके कारण मुआवजे की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं। सिद्धारमैया ने इस भूमि आवंटन का बचाव करते हुए कहा था कि यह पिछली भाजपा सरकार के दौरान किया गया था। recent visitors 74

स्व.अटलबिहारी वाजपेयी का पुण्यतिथि लेदरी में मनाया गया

 झगराखाण्ड छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता महान कवि भारतीय राजनीति के भीष्म पितामह भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय स्व.अटलबिहारी वाजपेयी जी की छठवी पुण्यतिथि पर हसदेव मंडल भाजपा परिवार के द्वारा श्रद्धांजलि एवं फूल माला अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया गया जिसमें हसदेव मंडल अध्यक्ष विनोद गुप्ता, संतोष द्विवेदी प्रदेश कार्यसमिति सदस्य भाजपा किसान मोर्चा, नगर पंचायत उपाध्यक्ष इंद्र पटेल, पूर्व मंडल अध्यक्ष महेंद्र सिंह चंदेल, अरुणेन्दू सेन, गुलाब यादव जी, अक्रांत पाण्डेय जी एवं कार्यकर्त्ता शामिल हुए। recent visitors 70

सरकारी सिस्टम की वादाखिलाफी का शिकार हुए बुंदेलखंड के ‘दशरथ मांझी’

छतरपुर  बुंदेलखंड के दशरथ मांझी के नाम से पहचाने जाने वाले सीता राम लोधी सरकारी सिस्टम के शिकार हो गए। जिला प्रशासन और नेताओं के द्वारा किए गए वादे पूरे नहीं होने से उनकी सरकार से उम्मीद टूटती दिख रही है। 2018 में छतरपुर जिले के प्रताप पुरा पंचायत के हडुआ गांव में रहने वाले सीताराम लोधी ने बड़ा कारनामा किया था। 70 साल की उम्र में अकेले ही उन्होंने गांव के खेत में एक कुआं खोद दिया था। सीता राम लोधी का कहना है कि गांव में पानी की कमी है। खेत में सिंचाई के लिए पानी की जरूरत थी। इसीलिए अपनी दम पर लगभग 18 माह की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने अपने खेत में एक कुआं खोद दिया था। प्रशासन ने किया था आर्थिक मदद का वादा सीताराम लोधी और उनके परिवार ने दावा किया है कि कुंआ बनने के बाद जिला प्रशासन एवं स्थानीय नेताओं ने उनकी खूब तारीफ की। इसके साथ ही कुएं के लिए आर्थिक मदद की बात कही थी। उस समय सीताराम लोधी खूब सुर्खियां में भी रहे थे। 6 साल बाद भी किसी ने नहीं ली सुध सीता राम लोधी का कहना है कि उन्होंने 2018 में यह कुआं खोदा था। स्थानीय प्रशासन एवं जन प्रतिनिधियों ने आर्थिक मदद देने की बात कही थी। तत्कालीन कलेक्टर ने भी दो लाख रुपए देने के लिए कहा था। जिससे उनका कच्चा कुआं पक्का हो सके। पर 6 साल बाद भी सीताराम लोधी की किसी ने सुध तक नहीं ली है। वर्तमान में भी वे अपने हाथों से खोदे गए कुएं को लेकर परेशान हैं। हर बरसात में कुआं खिसक जाता है और फिर वापस कुएं से मिट्टी निकालनी पड़ती है। जिसमें दुर्घटना का भी खतरा रहता है। सरकारी वादे खोखले निकले उनका कहना है कि जिला प्रशासन और उस समय के कई नेताओं ने आर्थिक मदद के तौर पर 2 लाख 10 हजार देने की बात कही थी। इससे कच्चे कुएं को बांधा जा सके। साथ ही सरकारी योजनाएं दिलाने की भी कही गई थी। पर सारे सरकारी दावे और वादे खोखले निकले। आलम यह की अब बरसात के मौसम में कुआं पूरी तरह से खिसक रहा है। पूर्व क्रिकेटर ने की थी सराहना सीताराम लोधी की मेहनत देखकर पूर्व क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण ने उनकी तारीफ करते हुए एक ट्वीट किया था। जिसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया था। उनके क्षेत्र के तहसीलदार ने उनका एक गरीबी रेखा का राशन कार्ड बना दिया। इसके अलावा आज तक उन्हे कुछ नही मिला है। सीताराम लोधी का कहना है कि न तो उनको आवास योजना का लाभ मिला है। न ही उनका सरकारी शौचालय का लाभ मिला है| उनके परिजनों का कहना है जिला प्रशासन के अधिकारियों ने वाह वाही लूटने के लिए झूठे वादे किए थे। किसी ने भी उनकी कोई सुध नहीं ली है। कई बार वह स्थानीय नेताओं के चक्कर भी काट चुके हैं। अभी भी उन्होंने हार नही मानी है। उनका कहना है कि जैसे ही बरसात कम होगी एक बार फिर किए के काम में लग जाएंगे। उन्हे अफसोस इस बात का है कि जिला प्रशासन ने जो वादे किए थे उन्हें पूरे नही किया। आर्थिक मदद मिलती तो शायद उनका कुआं नहीं गिरता। recent visitors 88

जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट बैरसिया में देंगे सौगात

भोपाल जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट बैरसिया वासियों को सम्राट अशोक सागर (हलाली डेम) का छरछरी पर गेट निर्माण होने पर क्षेत्र के किसान एवं रहवासी आत्मीय स्वागत करेंगे।उल्लेखनीय है कि बैरसिया विधायक विष्णु खत्री के अथक प्रयासों से हलाली डेम का नाम सम्राट अशोक सागर किया गया है। इससे पूर्व हलाली नदी का नाम भी बाणगंगा नदी किया गया है।साथ ही ईंटखेड़ी स्थित नदी घाट पर शौर्य स्मारक का निर्माण कर क्षेत्र वासियों को विधायक विष्णु खत्री ने सौगात दी थी। recent visitors 72