Tuesday, July 7, 2026 5:42 am

भारत के ‘रतन’ की कहानी, टाटा कंपनी को बना दिया इंटरनेशनल ब्रांड

नई दिल्ली रतन टाटा नाम किसी पहचान का मोहताज नहीं है. भारत के दिग्‍गज उद्योगपति रतन टाटा का बुधवार रात को निधन हो गया. मुंबई के अस्‍पताल में उन्होंने 86 साल की उम्र में अंतिम सांस ली. रतन टाटा की शख्सियत देखें तो वो सिर्फ एक बिजनेसमैन ही नहीं, बल्कि एक सादगी से भरे नेक और दरियादिल इंसान, लोगों के लिए आदर्श और प्रेरणास्रोत भी थे. वे साल 1991 से 2012 तक टाटा ग्रुप के चेयरमैन रहे और इस दौरान उन्होंने बिजनेस सेक्टर में कई कीर्तिमान स्थापित करते हुए देश के सबसे पुराने कारोबारी घरानों में से एक टाटा समूह को बुलंदियों तक पहुंचाया. उन्होंने टाटा को इंटरनेशनल ब्रांड बना दिया. रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर, 1937 को नवल और सूनू टाटा के घर हुआ था. उन्होंने 1962 में कॉर्नेल विश्वविद्यालय से वास्तुकला में स्नातक की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद 1975 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में एडवांस मैनेजमेंट कार्यक्रम पूरा किया. उनके पिता नवल टाटा एक सफल उद्योगपति थे और उन्होंने टाटा समूह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. वहीं रतन टाटा की मां सोनी टाटा एक गृहिणी थीं. 1962 में टाटा ग्रुप में सहायक के रूप में हुआ थे शामिल रतन टाटा 1962 में टाटा इंडस्ट्रीज में सहायक के रूप में टाटा ग्रुप में शामिल हुए थे. बाद में उसी वर्ष टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी (जिसे अब टाटा मोटर्स कहा जाता है) के जमशेदपुर संयंत्र में छह महीने की ट्रेनिंग ली. विभिन्न कंपनियों में सेवा देने के बाद उन्हें 1971 में नेशनल रेडियो एंड इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी का प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया. 1981 में, उन्हें समूह की अन्य होल्डिंग कंपनी टाटा इंडस्ट्रीज का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जहां वे इसे समूह रणनीति थिंक टैंक और उच्च-प्रौद्योगिकी व्यवसायों में नए उपक्रमों के प्रवर्तक में बदलने के लिए जिम्मेदार थे. वे 1991 से 28 दिसंबर, 2012 को अपनी सेवानिवृत्ति तक टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के अध्यक्ष थे. इस दौरान वे टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा पावर, टाटा ग्लोबल बेवरेजेज, टाटा केमिकल्स, इंडियन होटल्स और टाटा टेलीसर्विसेज सहित प्रमुख टाटा कंपनियों के अध्यक्ष थे. वे भारत और विदेशों में विभिन्न संगठनों से भी जुड़े हुए थे. रतन टाटा मित्सुबिशी कॉर्पोरेशन और जेपी मॉर्गन चेस के अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड में भी थे. वे सर रतन टाटा ट्रस्ट और एलाइड ट्रस्ट्स, और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और एलाइड ट्रस्ट्स के अध्यक्ष थे. वे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च की प्रबंधन परिषद के अध्यक्ष थे. वह कॉर्नेल विश्वविद्यालय और दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के न्यासी बोर्ड में भी कार्य करते थे. रतन टाटा की उपलब्धियां 1. टाटा समूह के अध्यक्ष के रूप में 1991-2012 तक सेवा. 2. जैगुआर लैंड रोवर की खरीद (2008). 3. कोरस की खरीद (2007). 4. टाटा स्टील की वैश्विक पहुंच बढ़ाना. 5. टाटा मोटर्स की सफलता. 6. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की वैश्विक पहुंच बढ़ाना. 7. टाटा समूह की वैश्विक ब्रांड वैल्यू में वृद्धि. रतन टाटा के प्रमुख पुरस्कार और सम्मान 1. पद्म विभूषण (2008) 2. पद्म भूषण (2000) 3. ऑनररी नाइट कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर (2009) 4. इंटरनेशनल हेरिटेज फाउंडेशन का लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड (2012) परोपकार और सामाजिक कार्य रतन टाटा को उनकी परोपकार और समाज सेवा के कार्यों के लिए व्यापक रूप से सराहा जाता है. उनके नेतृत्व में टाटा ट्रस्ट और टाटा फाउंडेशन ने शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, और तकनीकी नवाचारों के क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया है. recent visitors 65

लद्दाख और अरुणाचल की मौजूदा स्थिति का जायजा लेगा सैन्य नेतृत्व

नई दिल्ली  चीन को कड़ा संदेश देने के लिए पहली बार सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी के नेतृत्व में भारतीय सेना के शीर्ष अधिकारी वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास 10-11 अक्टूबर को सिक्किम में बैठक करेंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित शीर्ष रक्षा अधिकारी संबोधित करेंगे। शीर्ष सैन्य कमांडरों की महत्वपूर्ण बैठक वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब किसी स्थान पर होगी। बैठक में एलएसी पर संवेदनशील स्थिति, विशेष रूप से लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश की स्थिति का जायजा लिया जाएगा, जहां दोनों पक्ष नियमित आधार पर गतिरोध और टकराव में लगे हुए हैं। सम्मेलन का दूसरा चरण 28-29 अक्टूबर को दिल्ली में होने की संभावना है। अधिकारियों ने कहा कि शीर्ष अधिकारी मौजूदा वैश्विक संघर्षों के सबक और सेना के विभिन्न अंगों सहित भारतीय बलों के लिए सीख पर भी चर्चा करेंगे। जनरल द्विवेदी के नेतृत्व में शीर्ष सेना कमांडरों की यह पहली बैठक होगी। उन्होंने इस साल 30 जून को सेना प्रमुख का पद संभाला था। हाल ही में जनरल द्विवेदी ने सीमा पर चीन के साथ स्थिति स्थिर लेकिन सामान्य बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि संवेदनशील क्षेत्र में चीन के साथ लंबे समय से चल रहे सैन्य गतिरोध में भारतीय सेना और चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के बीच विश्वास को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। अप्रैल, 2020 जैसी स्थिति बहाल होने तक स्थिति संवेदनशील बनी रहेगी और हम किसी भी तरह की आकस्मिकता का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।     recent visitors 90

मेनोपॉज का महिलाओं के यौन जीवन या यौन स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ता है

मुंबई मेनोपॉज महिलाओं के जीवन में होने वाला एक प्राकृतिक बदलाव है। जब एक महिला को लगातार 12 महीनों तक मासिक धर्म नहीं आता, तो इस स्थिति को मेनोपॉज के रूप में जाना जाता है। आमतौर पर महिलाओं को 45 से 50 साल की उम्र तक मेनोपॉज की अवस्था आ जाती है। जिसकी वजह से महिलाओं को कई तरह के शारीरिक और मानसिक बदलावों का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं, इस स्थिति का महिलाओं के यौन जीवन या यौन स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ता है। इस दौरान महिलाओं की यौन इच्छा में कमी आ सकती है। ऐसे में मेनोवेदा की फाउंडर और मेनोपॉज कोच तमन्ना सिंह से जानते हैं आखिर मेनोपॉज का महिलाओं के जीवन और सेक्सुअल हेल्थ पर क्या असर पड़ता है। मेनोपॉज महिलाओं के यौन स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है? मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। इन्हीं हार्मोनल बदलावों की वजह से, महिलाओं को अपने यौन जीवन में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। दरअसल, मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर गिरने लगता है। जिसकी वजह से वजाइन में ड्राइनेस की समस्या, वजाइना में दर्द और असुविधा का भी अनुभव होने लगता है। इन समस्याओं की वजह से महिला को यौन क्रियाओं में मुश्किल महसूस हो सकती है। जिससे महिलाओं में यौन इच्छा में कमी हो सकती है। मेनोपॉज के दौरान यौन स्वास्थ्य में बदलाव होने पर क्या करें? मेनोपॉज के दौरान यौन स्वास्थ्य प्रभावित होने पर महिलाओं को तनाव महसूस हो सकता है। जिसकी वजह से उनके आत्मविश्वास की कमी आ सकती है। ऐसे में महिला को अपने पार्टनर से खुलकर बातचीत करनी चाहिए, उन्हें अपनी समस्या के बारे में बताएं। -मेनोपॉज के दौरान महिला को अपनी स्थिति को लेकर डॉक्टर से भी कंसल्ट करना चाहिए। डॉक्टर कुछ दवाइयों की मदद से यौन जीवन में आने वाली समस्याओं को दूर कर सकते हैं। -यौन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी की मदद भी ली जा सकती है। -मेनोपॉज के दौरान महिला को अपनी डाइट का खास ख्याल रखना चाहिए। हेल्दी खाना खाएं और अनहेल्दी फूड्स से दूरी बनाकर रखें। -मेनोपॉज के दौरान तनाव और चिंता से बाहर निकलने के लिए मेडिटेशन जरूर करें। -फिट और हेल्दी बने रहने के लिए योग और एक्सरसाइज जरूर करें। रजोनिवृत्ति में योनि संबंधी लक्षण मासिक धर्म की अनियमितता, नए दर्द और पीड़ा, मनोदशा में बदलाव, कामेच्छा में कमी और संज्ञानात्मक क्षमता में कमी इस समय आम शिकायतें हैं जिनकी गंभीरता और दैनिक जीवन पर प्रभाव अलग-अलग डिग्री के साथ होते हैं ( बीएमएस अगस्त, 2023 )। रजोनिवृत्ति के दौरान एस्ट्रोजन के स्तर में उतार-चढ़ाव और गिरावट के कारण कुछ लोग कुछ दिनों में सामान्य कार्य करने में असमर्थ हो जाते हैं, वे उदास महसूस करते हैं, उनमें आत्मविश्वास या प्रेरणा की कमी होती है तथा वे एक सप्ताह से दूसरे सप्ताह तक दिन में लाल चकत्ते और रात में पसीने से तर-बतर हो जाते हैं। सलाह मेनोपॉज के दौरान, यौन स्वास्थ्य में आने वाले बदलाव बेहद सामान्य हैं। इसलिए आपको इनके प्रति जानकारी रखना बेहद जरूरी है। मेनोपॉज के दौरान अगर आपको कुछ असामान्य लक्षणों का अनुभव हो, तो मेनोपॉज एक्सपर्ट से जरूर संपर्क करें। recent visitors 63

केजरीवाल आज मेहराज मलिक के साथ ‘धन्यवाद रैली’ को संबोधित करेंगे

नई दिल्ली  आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक व दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आज  गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के डोडा में धन्यवाद रैली को संबोधित करेंगे। डोडा विधानसभा सीट पर आम आदमी पार्टी के मेहराज मलिक ने भाजपा के गजय सिंह राणा को चार हजार से अधिक मतों से हार का मुंह दिखाकर जीत का परचम लहराया है। केजरीवाल मेहराज मलिक के साथ इस रैली को संबोधित करेंगे। आम आदमी पार्टी द्वारा जम्मू-कश्मीर में खाता खोलना राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। ‘आप’ के लिए जम्मू-कश्मीर पांचवा ऐसा राज्य है, जहां यह पार्टी जीत का परचम लहराने में सफल हुई है। इससे पहले आम आदमी पार्टी दिल्ली के अलावा पंजाब, गुजरात और गोवा में भी अपने प्रत्याशियों को उतारकर जीत का परचम लहरा चुकी है। पार्टी अब धीरे-धीरे देशभर में अपनी सियासी जमीन को दुरूस्त करने में जुटी है। अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर मेहराज मलिक को जीत की बधाई। उन्हेंने कहा, “डोडा विधानसभा सीट से आप उम्मीदवार मेहराज मलिक को बीजेपी को हराने के लिए बधाई। आपने अच्छा चुनाव लड़ा।” मेहराज मलिक ने अपनी इस जीत को जनता की जीत बताया। उन्होंने कहा कि हमने सभी सीटों पर चुनाव न लड़कर बड़ी गलती कर दी। अगर हम सभी सीटों पर चुनाव लड़ते, तो निश्चित तौर पर और सीटों पर जीत का परचम लहराने में सफल होते। हमारी पार्टी हमेशा से ही जनता के हितों को तवज्जो देती हुई आई है और यह उसी का नतीजा है कि आज हम जम्मू-कश्मीर में भी अपना खाता खोलने में सफल हुए हैं। उन्होंने कहा, “जो लोग भ्रष्ट हैं, लूटपाट करते हैं, लोगों के हितों पर कुठाराघात करते हैं, मुझे लगता है कि अब ऐसे लोगों का समय समाप्त हो चुका है। ऐसे लोगों को रुक जाना चाहिए। ऐसे लोगों को जनता ने आईना दिखाकर लोकतंत्र की ताकत का एहसास दिला दिया है। घाटी की जनता ने इन लोगों को बता दिया है कि लोकतंत्र में कुछ भी मुमकिन है। इसके अलावा, जो लोग लोकतंत्र के सिद्धांतों पर कुठाराघात कर रहे हैं, ऐसे लोगों को ब्रेक ले लेना चाहिए।” वहीं, बात अगर जम्मू-कश्मीर के चुनावी नतीजों की करें, तो नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के गठबंधन ने मिलकर 49 सीटों पर जीत का परचम लहराया है, जबकि बीजेपी 29 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही है। उधर, पीडीपी की बात करें, तो यह महज ती तीनों सीटों पर ही जीत दर्ज करने में सफल रही है। उधर, भाजपा की बात करें, तो यह 29 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही है, लेकिन वो इस जीत को अपने लिए अहम मान रही है। भाजपा का दावा है कि जम्मू-कश्मीर में हुए सफलतापूर्वक चुनाव लोकतंत्र की जीत है।   recent visitors 70

बहुजन समाज के आत्म सम्मान की ‘सच्ची मंजिल’ है बसपा : मायावती

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) को बहुजन समाज के आत्म सम्मान और स्वाभिमान के आंदोलन की राह में बाधा करार देते हुए दावा किया कि बसपा ही उनकी ‘सच्ची मंजिल’ है जो उन्हें ‘शासक वर्ग’ का हिस्सा बनाने के लिए संघर्ष कर रही है। मायावती ने बसपा संस्थापक कांशीराम के 18वें परिनिर्वाण दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार पोस्ट किया। उन्होंने कहा, ‘‘बामसेफ, डीएस4 व बसपा के जन्मदाता एवं संस्थापक बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम जी को आज उनके परिनिर्वाण दिवस पर शत-शत नमन व अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित तथा उत्तर प्रदेश एवं देश भर में उन्हें विभिन्न रूपों में श्रद्धांजलि अर्पित करने वाले पार्टी के सभी लोगों व अनुयाइयों का तहेदिल से आभार।’’ बसपा प्रमुख ने विरोधी पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘गांधीवादी कांग्रेस व आरएसएसवादी (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) भाजपा व सपा आदि उनकी (बहुजन समाज) हितैषी नहीं बल्कि उनके आत्म-सम्मान व स्वाभिमान आंदोलन की राह में बाधा हैं, जबकि अम्बेडकरवादी बसपा उनकी सही-सच्ची मंजिल है, जो उन्हें मांगने वालों से देने वाला शासक वर्ग बनाने के लिए संघर्षरत है। यही आज के दिन का संदेश है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘देश में करोड़ों लोगों के लिए गरीबी, बेरोजगारी व जातिवादी द्वेष, अन्याय-अत्याचार का लगातार तंग व लाचार जीवन जीने को मजबूर होने से यह साबित है कि सत्ता पर अधिकतर समय काबिज रहने वाली कांग्रेस व भाजपा आदि की सरकारें न तो सही से संविधानवादी रही हैं और न ही उस नाते सच्ची देशभक्त हैं।’’  भाजपा की हार सुनिश्चित करने के लिए जाटों ने कांग्रेस को वोट दिया, लेकिन बसपा को छोड़ दिया : मायावती  बसपा नेता मायावती ने  इस बात पर अफसोस जताया कि हरियाणा में जाट समुदाय ने विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को वोट नहीं दिया। उन्हें लगता है कि दलितों के बारे में उनकी (जाटों की) मानसिकता बदलने की जरूरत है। पार्टी संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि मनाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में आईं मायावती ने इस बात पर अफसोस जताया कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के साथ गठबंधन उनकी पार्टी के लिए लाभदायक नहीं रहा। मायावती ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने और उसे सत्ता से बाहर रखने के लिए हरियाणा में जाट समुदाय ने कांग्रेस को वोट दिया, लेकिन इस प्रक्रिया में उन्होंने बसपा को छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि दलित वोट जहां इनेलो की ओर चले गए, वहीं जाटों के मत उनकी पार्टी को नहीं मिले। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “बसपा उम्मीदवारों को केवल दलित वोट मिले। अगर हमें दो से तीन प्रतिशत जाट वोट भी मिल जाते तो हम कुछ सीटें जीत सकते थे।” उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में दलितों के प्रति जाट समुदाय की मानसिकता में बदलाव आया है, लेकिन हरियाणा में ऐसा होना अभी बाकी है। इनेलो ने राज्य में दो सीटें जीतीं, जबकि बसपा को एक भी सीट नहीं मिली। सत्ता विरोधी लहर के बावजूद सत्तारूढ़ भाजपा ने हरियाणा में जीत की हैट्रिक लगाई और सत्ता बरकरार रखी तथा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की वापसी की कोशिशों को विफल कर दिया। भाजपा ने 48 सीटें जीतकर अपनी अब तक की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि हासिल की। उसकी सीटों का आंकड़ा कांग्रेस से 11 अधिक था, जबकि जननायक जनता पार्टी (जजपा) और आम आदमी पार्टी जैसे दलों का सफाया हो गया और इनेलो को सिर्फ दो सीटें ही मिल पाईं। आप ने अकेले चुनाव लड़ा था। अगले वर्ष फरवरी में दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए मायावती ने उम्मीद जताई कि उनकी पार्टी अच्छा प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ आप, भाजपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला बसपा को बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेगा। मायावती ने स्वीकार किया कि उत्तर प्रदेश से इतर अन्य राज्यों में बसपा को प्रत्यक्ष मुकाबलों में नुकसान उठाना पड़ता है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बसपा अगले महीने महाराष्ट्र और झारखंड में होने वाले चुनाव भी लड़ेगी।   recent visitors 115

रतन टाटा का 86 साल की उम्र में निधन, PM मोदी ने दी श्रद्धांजलि

मुंबई अरबपति कारोबारी और बेहद ही दरियादिल इंसान रतन टाटा का निधन हो गया है. वह 86 वर्ष के थे. उन्हें उम्र संबंधी मेडिकल कंडीशन के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा अब इस दुनिया में नहीं रहे. 86 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया. उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली. कुछ दिनों पहले उन्हें उम्र संबंधी मेडिकल कंडीशन के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनके स्वास्थ्य को लेकर खबरें चल रही थी और इस बारे में उन्होंने एक बयान जारी कर बताया भी था कि उनकी तबीयत ठीक है और सामान्य चेक-अप के लिए अस्पताल में हैं. उन्होंने अपने स्वास्थ्य को लेकर "गलत सूचना" न फैलाने की सलाह दी थी. रतन टाटा ने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली. प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है. भारतीय इतिहास में रतन टाटा का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा. भारत में जब भी उद्योगपतियों का जिक्र होगा. सबसे पहले रतन टाटा का नाम लिया जाएगा. उन्होंने अपने जीवन की सार्थक यात्रा में बहुत से ऐतिहासिक काम किए. रतन टाटा की शख्सियत देखें तो वो सिर्फ एक बिजनेसमैन ही नहीं, बल्कि एक सादगी से भरे नेक और दरियादिल इंसान, लोगों के लिए आदर्श और प्रेरणास्रोत भी थे. वे साल 1991 से 2012 तक टाटा ग्रुप के चेयरमैन रहे और इस दौरान उन्होंने बिजनेस सेक्टर में कई कीर्तिमान स्थापित करते हुए देश के सबसे पुराने कारोबारी घरानों में से एक टाटा समूह को बुलंदियों तक पहुंचाया. उन्होंने टाटा को इंटरनेशनल ब्रांड बना दिया. रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर, 1937 को नवल और सूनू टाटा के घर हुआ था. उन्होंने 1962 में कॉर्नेल विश्वविद्यालय से वास्तुकला में स्नातक की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद 1975 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में एडवांस मैनेजमेंट कार्यक्रम पूरा किया. उनके पिता नवल टाटा एक सफल उद्योगपति थे और उन्होंने टाटा समूह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. वहीं रतन टाटा की मां सोनी टाटा एक गृहिणी थीं. रतन टाटा 1962 में टाटा इंडस्ट्रीज में सहायक के रूप में टाटा ग्रुप में शामिल हुए थे. बाद में उसी वर्ष टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी (जिसे अब टाटा मोटर्स कहा जाता है) के जमशेदपुर संयंत्र में छह महीने की ट्रेनिंग ली. विभिन्न कंपनियों में सेवा देने के बाद उन्हें 1971 में नेशनल रेडियो एंड इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी का प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया. 1981 में, उन्हें समूह की अन्य होल्डिंग कंपनी टाटा इंडस्ट्रीज का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जहां वे इसे समूह रणनीति थिंक टैंक और उच्च-प्रौद्योगिकी व्यवसायों में नए उपक्रमों के प्रवर्तक में बदलने के लिए जिम्मेदार थे. वे 1991 से 28 दिसंबर, 2012 को अपनी सेवानिवृत्ति तक टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के अध्यक्ष थे. इस दौरान वे टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा पावर, टाटा ग्लोबल बेवरेजेज, टाटा केमिकल्स, इंडियन होटल्स और टाटा टेलीसर्विसेज सहित प्रमुख टाटा कंपनियों के अध्यक्ष थे. वे भारत और विदेशों में विभिन्न संगठनों से भी जुड़े हुए थे. रतन टाटा मित्सुबिशी कॉर्पोरेशन और जेपी मॉर्गन चेस के अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड में भी थे. वे सर रतन टाटा ट्रस्ट और एलाइड ट्रस्ट्स, और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और एलाइड ट्रस्ट्स के अध्यक्ष थे. वे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च की प्रबंधन परिषद के अध्यक्ष थे. वह कॉर्नेल विश्वविद्यालय और दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के न्यासी बोर्ड में भी कार्य करते थे. recent visitors 63

14 अक्टूबर से दनियावां हॉल्ट पर रुकेगी इस्लामपुर-हटिया एक्सप्रेस

पटना  यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने कई ट्रेनों के ठहराव में बदलाव किया है। रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए वंदे भारत, हटिया एक्सप्रेस और श्रमजीवी एक्सप्रेस के ठहराव में बदलाव किए हैं। वंदे भारत ट्रेन का ठहराव 13 अक्टूबर से बख्तियारपुर में और हटिया एक्सप्रेस का दनियावां में होगा। श्रमजीवी एक्सप्रेस का पावापुरी रोड स्टेशन पर ठहराव भी 14 अक्टूबर से होगा। बख्तियारपुर स्टेशन पर रुकेगी पटना-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस पूर्व मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चन्द्र ने बताया कि ये बदलाव यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं। अधिकारी ने बताया कि 13 अक्टूबर से पटना-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस (22348) बख्तियारपुर स्टेशन पर रुकेगी। यह ट्रेन सुबह 08:37 बजे बख्तियारपुर पहुंचेगी और 08:39 बजे आगे के लिए रवाना होगी। वापसी में हावड़ा-पटना वंदे भारत एक्सप्रेस (22347) रात 21:32 बजे बख्तियारपुर पहुंचेगी और 21:34 बजे आगे के लिए रवाना होगी। बख्तियारपुर में नए ठहराव के कारण 22348 पटना-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस मोकामा में 09:02/09:04 बजे और लखीसराय में 09:24/09:26 बजे रुकेगी। दनियावां हॉल्ट पर रुकेगी इस्लामपुर-हटिया एक्सप्रेस इसी तरह, 14 अक्टूबर से इस्लामपुर-हटिया एक्सप्रेस (18623) शाम 19:54 बजे दनियावां हॉल्ट पर रुकेगी और 19.56 बजे आगे के लिए रवाना होगी। वापसी में 15 अक्टूबर से 18624 हटिया-इसलामपुर एक्सप्रेस सुबह 07;38 बजे दनियावां हॉल्ट पर रुकेगी और 07:40 बजे आगे के लिए रवाना होगी। दनियावां में नए ठहराव के कारण 18623 इस्लामपुर-हटिया एक्सप्रेस के दनियावां बाजार हॉल्ट पर ठहराव समय में भी बदलाव किया गया है। यह ट्रेन अब दनियावां बाजार हॉल्ट पर 20:07/20:09 बजे रुकेगी। पावापुरी रोड स्टेशन राजगीर-नई दिल्ली श्रमजीवी एक्सप्रेस 14 अक्टूबर से राजगीर-नई दिल्ली श्रमजीवी एक्सप्रेस (12391) भी पावापुरी रोड स्टेशन पर रुकेगी। यह ट्रेन सुबह 08:20 बजे पावापुरी रोड स्टेशन पहुंचेगी और 08:22 बजे आगे के लिए रवाना होगी। वापसी में 12392 नई दिल्ली-राजगीर श्रमजीवी एक्सप्रेस सुबह 09:15 बजे पावापुरी रोड स्टेशन पहुंचेगी और 09:17 बजे आगे के लिए रवाना होगी। recent visitors 100