Wednesday, July 8, 2026 1:48 am

उत्तर प्रदेश को 31 हजार 962 हजार करोड़ टैक्स डिवोल्यूशन मिला

लखनऊ केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को  1,78,173 करोड़ रुपये का टैक्स डिवॉल्यूशन जारी किया है. इसमें सबसे ज्यादा यूपी को 31हजार 962 करोड़ रुपये मिले हैं. सभी राज्यों के संदर्भ में देखें तो इस टैक्स डिवॉल्यूशन में अक्टूबर, 2024 में देय नियमित किस्त के अलावा ₹89,086.50 करोड़ की एक अग्रिम किस्त भी शामिल है. वित्त मंत्रालय ने कहा है कि आगामी त्यौहारी सीज़न को देखते हुए और राज्यों को पूंजीगत खर्चे में तेजी लाने और उनके विकास/कल्याण संबंधी खर्चे को वित्तपोषित करने में सक्षम बनाने के लिए अग्रिम किस्त जारी की गई. केंद्र के इस फैसले पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रतिक्रिया भी दी है. उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा कर हस्तांतरण के तहत उत्तर प्रदेश को समय पर 31,962 करोड़ रुपये करने के लिए प्रधानमंत्री और वित्त मंत्रालय का हार्दिक आभार. यह अग्रिम किस्त हमारे त्यौहारी सीजन की तैयारियों को काफी बढ़ावा देगी और पूरे राज्य में विकास और कल्याणकारी पहलों को गति देगी. हम सब मिलकर एक मजबूत और अधिक समृद्ध उत्तर प्रदेश का निर्माण कर रहे हैं. बता दें इन रुपयों को राज्य सरकार उन अलग-अलग योजनाओं और स्कीम्स में खर्च करेगी जिनका ऐलान किया गया है. सरकार ने बीते दिनों कर्मचारियों को बोनस देने, बीपीएल श्रेणी वालों को त्यौहारी सीजन में दो सिलेंडर मुफ्त देने का ऐलान किया था. इन योजनाओं में राज्य सरकार का करोड़ों रुपया खर्च होता है. ऐसे में केंद्र से टैक्स डिवॉल्यूशन का रुपया मिलने पर राज्य सरकार को काफी राहत मिलेगी.   recent visitors 89

शिमला मस्जिद मामले में संजौली की दुकानों पर लगाए गए ‘सनातनी सब्जी वाला’ बोर्ड, देवभूमि संघर्ष समिति लगा रही पोस्टर

शिमला हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली इलाके में देवभूमि संघर्ष समिति ने एक नया अभियान शुरू कर दिया है. यहां देवभूमि संघर्ष समिति की ओर से हिंदू दुकानदारों की सब्जी की दुकान के बाहर एक बोर्ड लगाया जा रहा है. इस बोर्ड में 'सनातन सब्जी वाला' लिखा गया है. इसका उद्देश्य यह है कि स्थानीय लोग हिंदू दुकानदारों से खरीदारी करें और बाहरी लोगों का बॉयकॉट किया जाए. देवभूमि संघर्ष समिति के राज्य सह संयोजक विजय शर्मा ने कहा कि समिति की ओर से यह अभियान शुरू किया गया है. इस अभियान का उद्देश्य संजौली इलाके में हिंदू सब्जीवालों को बढ़ावा देना है. उन्होंने कहा कि वे लोगों से यह भी अपील कर रहे हैं कि बाहरी लोगों से वह खरीददारी न करें और स्थानीय दुकानदारों को आगे बढ़ाएं, ताकि उनका रोजगार चल सके. विजय शर्मा ने कहा, "हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली इलाके में रोहिंग्या जैसे लोगों का आना शुरू हो गया है. यह लोग यहां पर व्यापार कर रहे हैं. इस बीच देवभूमि संघर्ष समिति ने स्थानीय दुकानदारों को आगे बढ़ने का बीड़ा उठाया है." नेम प्लेट को लेकर पहले मच चुका बवाल हिमाचल में इससे पहले भी दुकानों में नेम प्लेट लगाने को लेकर विवाद हो चुका है। शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बयान पर पूरे देश में बवाल मचा था। दरअसल, पिछले महीने विक्रमादित्य सिंह ने कहा था कि सभी दुकानों में उत्तर प्रदेश की तर्ज पर नेम प्लेट लगानी होगी। इस बयान के बाद देशभर में कांग्रेस बेक फुट पर आ गई थी, क्योंकि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने जब कावड़ यात्रा के दौरान नेम प्लेट लगाना अनिवार्य किया था, उस दौरान देशभर में कांग्रेस ने विरोध किया था। विक्रमादित्य के इस बयान के बाद कांग्रेस सरकार ने भी मंत्री के बयान से किनारा कर दिया था और मंत्री का निजी बयान बताया था। बहुदलीय कमेटी स्ट्रीट वेंडर पॉलिसी के लिए रूल्स तैयार कर रही हिमाचल विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने उद्योग मंत्री हर्ष वर्धन चौहान की अध्यक्षता में रेहड़ी फड़ी वालों की समस्या के समाधान के लिए उद्योग मंत्री की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर रखी है। यह कमेटी स्ट्रीट वेंडर पॉलिसी के लिए रूल्स तैयार कर रही है। नेम प्लेट वाले मामले पर हो चुका है विवाद हिमाचल प्रदेश देवभूमि संघर्ष समिति के इस अभियान के बाद अब संजौली में सब्जी बेच रहे दुकानदारों का धर्म प्रदर्शित होगा. इससे पहले हिमाचल प्रदेश में शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह के नेम प्लेट वाले बयान को लेकर भी खासा विवाद हो चुका है. विक्रमादित्य सिंह ने उत्तर प्रदेश के तर्ज पर हिमाचल प्रदेश के रेहड़ी-फड़ी वालों के नाम प्रदर्शित करने की बात कही थी. हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया था कि इस पूरे मामले का उत्तर प्रदेश और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मॉडल से कोई लेना-देना नहीं है. विधानसभा अध्यक्ष ने की कमेटी गठित हिमाचल प्रदेश में स्ट्रीट वेंडर पॉलिसी के लिए विधानसभा अध्यक्ष की ओर से जो कमेटी गठित की गई है, वहीं इस संबंध में फैसला लेगी. गौरतलब है कि कि हिमाचल प्रदेश में स्ट्रीट वेंडर एक्ट के तहत जो भी व्यक्ति वेंडिंग करता है, उसे नगर निगम की ओर से लाइसेंस दिया जाता है. इस लाइसेंस में पहले से ही व्यक्ति की पहचान से जुड़ी जानकारी होती है. इस लाइसेंस को दुकान में लगाना पहले से ही अनिवार्य है. recent visitors 132

“उद्योग मित्र योजना से कनेक्शन जोड़ने एवं विद्युत विक्रय में वृद्धि होने से राजस्व में वृद्धि भी होगी : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि प्रदेश के उच्चदाब एवं निम्नदाब श्रेणी के औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपभोक्ताओं की सुविधा के लिये स्थायी रूप से विच्छेदित विद्युत कनेक्शनों को पुन: जोड़ने एवं बकाया राशि के भुगतान में राहत तथा नवीन औद्योगिक एवं वाणिज्यिक आवेदकों को आवश्यक अधोसंरचना निर्माण की लागत के भुगतान में राहत देने के लिये "उद्योग मित्र योजना-2024" लागू की गई है। यह योजना 2 वर्षों के लिये प्रभावशील रहेगी। मंत्री तोमर ने कहा है कि इस योजना से वितरण कंपनियों की स्थायी रूप से विच्छेदित उपभोक्ताओं से बकाया राशि की वसूली हो सकेगी। साथ ही फिर से कनेक्शन जोड़ने एवं नवीन कनेक्शनों से विद्युत विक्रय में वृद्धि होने से राजस्व में वृद्धि भी होगी। यह योजना राज्य के औद्योगिक विकास के लिये भी सहायक होगी। पात्रता योजना में सभी उच्च एवं निम्न दाब श्रेणी के स्थायी रूप से विच्छेछित औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ता, जो कि योजना अनुसार बकाया राशि जमा कर पुनर्संयोजन या नया कनेक्शन लेना चाहते हैं, पात्र होंगे। साथ ही ऐसे औद्योगिक एवं वाणिज्यिक श्रेणी के नवीन आवेदक भी पात्र होंगे, जो विद्युत कनेक्शन के लिये विद्युत अधोसंरचना का निर्माण विद्युत वितरण कंपनियों से करवाना चाहते हैं। प्रावधान योजना में उपभोक्ताओं को स्थाई विच्छेदन के दिनांक पर देय कुल बकाया राशि का न्यूनतम 20 प्रतिशत भुगतान कनेक्शन जोड़ने के पूर्व एक मुश्त देना होगा। नवीन कनेक्शनों के प्रकरणों में जरूरी अधोसंरचना लागत की राशि का न्यूनतम 20 प्रतिशत भुगतान आवेदन के साथ एक मुश्त देना होगा। शेष राशि का भुगतान मासिक बिल के साथ ब्याज सहित अधिकतम 3 वर्ष में किया जा सकेगा। योजना का लाभ लेने के लिये आवेदक को महाप्रबंधक/वृत्त कार्यालय में आवेदन देना होगा। साथ ही 500 रूपये के स्टॉम्प पेपर पर इस आशय का शपथ-पत्र देना होगा कि वह योजना के प्रावधान के अनुसार राशि का भुगतान करेंगे। नवीन कनेक्शनों के लिये आवेदकों को ऑनलाइन आवेदन देना होगा एवं विद्युत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित सर्विस कनेक्शन शुल्क, सुरक्षा निधि आदि भी देय होगा। आवश्यक अधोसंरचना का निर्माण बिजली कम्पनियों द्वारा निर्धारित एसओआर के अनुसार किया जायेगा। निर्धारित किश्तों एवं मासिक देयकों का भुगतान नहीं किये जाने पर 15 दिवस की सूचना देकर बिजली कनेक्शन काटा जा सकेगा। योजना का लाभ उपभोक्ताओं को केवल एक बार ही प्राप्त हो सकेगा। योजना अवधि में कोई उपभोक्ता अपने परिसर का हस्तांतरण किसी अन्य व्यक्ति को करता है, तो निर्धारित शर्तों के तहत सभी सुविधाएं नये उपभोक्ता को प्राप्त हो सकेंगी। योजनांतर्गत किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति में प्रकरण का निराकरण विभागीय समिति द्वारा किया जायेगा। समिति में अपर मुख्य सचिव ऊर्जा, प्रबंध संचालक एमपी पॉवर मैनेजमेंट कम्पनी और विधि विशेषज्ञ होंगे। समिति के संयोजक संबंधित विद्युत वितरण कम्पनी के प्रबंध संचालक होंगे। योजनावधि में प्राप्त होने वाले आवेदनों पर भी विचार किया जायेगा। योजनावधि समाप्ति के अंतिम दिन तक प्राप्त सभी आवेदनों के निराकरण हर स्थिति में योजना समाप्ति दिनांक से 30 दिन के अंदर कर दिया जायेगा।   recent visitors 143

मार्गदर्शिका का क्षेत्रीय परीक्षण चयनित जिलों में, एक नवीन पहल है, जो बालकों में एक नयी सोच का संचार करेगी

भोपाल प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विद्यालयों में पढ़ने वाले बालकों में सकारात्मक सोच के लिये उज्ज्वल कार्यक्रम में प्रशिक्षण मार्गदर्शिका तैयार की जा रही है। इसका प्रमुख उद्देश्य बालकों को बढ़ती उम्र के साथ विभिन्न पहलुओं और बदलाव में उनकी सकारात्मक भूमिका के प्रति सजग करना है। यह एक नवीन पहल है, जो बालकों में एक नयी सोच का संचार करेगी, जिससे वे सकारात्मक सोच के साथ विभिन्न मुद्दों को समझ पायें। किशोर अवस्था में अर्जित ज्ञान और कौशल का प्रभाव आजीवन रहता है। इसलिये आवश्यक है कि "पौरूष" की अवधारणा से बालक प्रारंभ से ही परिचित हो सकें और उनके अनुकूल जीवन में व्यवहार करने की सोच उनके अंदर विकसित हो सके। स्कूल शिक्षा विभाग ने यूनाइटेड नेशन पॉपुलेशन फण्ड एक्टिविटी (यूएनएफपीए) के सहयोग से इस नवीन आवधारणा को लेकर मार्गदर्शिका उज्ज्वल का निर्माण किया है। उज्ज्वल में शामिल मुद्दे मार्गदर्शिका "उज्ज्वल" में भेदभाव, हिंसा, टकराव, सायबर अपराध, लैंगिक अपराधों और कुप्रथाओं को रोकने में बालकों की भूमिका, घरेलू कामों में बालकों व पुरूषों की बराबरी की भागीदारी जैसे विभिन्न मुद्दे शामिल किये गये हैं। मार्गदर्शिका का क्षेत्रीय परीक्षण प्रदेश के डिंडोरी, बैतूल, गुना एवं भोपाल जिलों में कक्षा 9वीं से 12वीं के विद्यार्थियों के साथ चर्चा की गई। उनसे मिली प्रतिक्रियाओं और सुझावों को मार्गदर्शिका की विषय-वस्तु में शामिल किया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने मार्गदर्शिका का प्रथम प्रारूप तैयार कर इसकी समीक्षा शिक्षकों के साथ की है। विभाग संशोधित मार्गदर्शिका को अंतिम स्वरूप देने पर काम कर रहा है। किशोरियों के लिये भी मार्गदर्शिका कन्या छात्रावासों में अध्ययन करने वाली कक्षा 9वीं से 12वीं की किशोरियों के लिये भी सशक्त मार्गदर्शिका तैयार की जा रही है। मार्गदर्शिका के सहयोग से किशोरियां दक्षता अर्जित कर पाएंगी, जो उनके भावी जीवन को बेहतर बनाने में सहायक होगी। किशोरियां विभिन्न जीवन कौशल विकसित कर जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने में अधिक सक्षम हो पायेंगी। किशोरियां अपने अधिकारों, कर्त्तव्यों और सामाजिक जिम्मदारियों के प्रति जागरूक होकर हॉस्टल, घर और समुदाय में परिवर्तन लाने की दिशा में भी सहयोग कर पायेंगी।   recent visitors 69

बीजेपी का मातृ संगठन आरएसएस जातिगत जनगणना बात के बाद अब टीडीपी ने भी मांग दोहरा दी

नई दिल्ली देश भर में राजनीतिक दल और कई सामाजिक संगठन जातिगत जनगणना की मांग कर रहे हैं। बिहार में तो नीतीश कुमार जब आरजेडी के साथ सरकार चला रहे थे, उसी समय उन्होंने जातिगत जनगणना करा दी थी। इसके बाद से ही वह पूरे देश में ऐसा करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा गठबंधन के एक और सहयोगी चिराग पासवान भी ऐसी मांग करते रहे हैं। यूपी से अनुप्रिया पटेल, संजय निषाद और ओपी राजभर भी यह दोहरा चुके हैं। इस बीच एनडीए सरकार के सबसे बड़े गठबंधन सहयोगी टीडीपी ने भी यह मांग दोहरा दी है। भाजपा का मातृ संगठन आरएसएस भी इसके पक्ष में बात रख चुका है। संघ का कहना था कि ऐसा किया जा सकता है, बस राजनीतिक इस्तेमाल न हो। तेलुगु देशम पार्टी के मुखिया चंद्रबाबू नायडू ने दिए इंटरव्यू में जातिगत जनगणना को जरूरी बताया है। उन्होंने कहा कि कास्ट सेंसस होनी चाहिए। यह जनता की भावना है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। नायडू ने कहा, 'आप जातिगत जनगणना कराएं। फिर आर्थिक विश्लेषण करें। स्किल सेंसस करें। इससे आपको पता चलेगा कि किसकी क्या स्थिति है और फिर उसके आधार पर आर्थिक गैर-बराबरी दूर करने में मदद मिलेगी।' नायडू ने कहा कि जनभावना है कि जातिगत जनगणना होनी चाहिए। यदि ऐसा है तो फिर उसका सम्मान जरूरी है। यह बात सही है कि देश में गरीबी सबसे बड़ा मुद्दा है। यहां तक कि आप निचली जाति से हैं और पैसे वाले हैं तो लोग आपका सम्मान करेंगे। समाज में आपकी इज्जत होगी। लेकिन आप भले ही ऊंची जाति के हैं, लेकिन गरीब हैं तो फिर कोई आपको महत्व नहीं देगा। यह सच्चाई है। इसलिए आर्थिक स्थिति ही समानता का सबसे बड़ा पैमाना है। इसलिए आपको समाज में संतुलन के लिए आर्थिक गैर-बराबरी खत्म करने के लिए ही काम करना होगा। बता दें कि आरएसएस ने अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की मीटिंग के बाद जातिगत जनगणना को लेकर सधा हुआ जवाब दिया था। संघ का कहना था कि यदि समाज को ऐसा लगता है तो कराई जा सकती है, लेकिन इसका प्रयोग राजनीतिक लाभ के लिए नहीं होना चाहिए। इससे समाज में वैमनस्यता बढ़ती है। recent visitors 76

TESLA के लिए भारतीयों को करना होगा इंतज़ार! नई EV नीति की घोषणा के बाद सरकार ने पॉलिसी नहीं बदली

मुंबई एलन मस्क की टेस्ला के लिए भारतीय बाजार का रास्ता एक बार फिर मुश्किल हो गया है। दरअसल, इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई नई EV पॉलिसी में टेस्ला और अन्य ग्लोबल व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों रुचि नहीं लेने के बाद भी सरकार इसमें कोई बदलाव करने का मन नहीं है। एक सरकारी अधिकारी ने साफ कहा है कि सभी कंपनियों के लिए EV नीति के मापदंड़ समान रहेंगे। विदेशी इलेक्ट्रिक व्हीकल निर्माता कंपनियों को भारत में लाने के लिए इस साल मार्च में नई EV नीति घोषित की गई थी। हैवी इंडस्ट्री मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने मनीकंट्रोल को बताया कि मौजूदा EV नीति का लाभ उठाने का इरादा रखने वाले कार निर्माताओं के लिए पात्रता मानदंड और अन्य शर्तें समान रहेंगी। अगर टेस्ला या किसी कार निर्माता ने इस नीति के लिए आवेदन नहीं किया है तो हमें चिंता नहीं है। हम किसी विशेष कंपनी के अनुरूप EV नीति में संशोधन नहीं करेंगे। इसे बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस बयान के बाद टेस्ला की इलेक्ट्रिक कारों को भारतीय बाजार में एक्स्ट्रा छूट या दूसरे बेनिफिट्स मिलने का रास्ता भी बंद होता दिख रहा है। अधिकारी ने ये भा बताया कि हमारा रुख साफ है। आप कम टैक्स पर कारों का आयात कर सकते हैं, बशर्ते आप भारत में EV निर्माण प्लांट लिए नया निवेश करें। मार्च में सरकार ने टेस्ला जैसी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए नई EV नीति घोषित की थी, जिसमें 5 साल तक चुनिंदा इलेक्ट्रिक कारों पर आयात शुल्क 15 फीसदी तक कम करने की छूट दी थी। इसके लिए कंपनी को 3 साल में EV निर्माण प्लांट लगाने की शर्त रखी गई। हालांकि, टेस्ला की तरफ से भी प्लांट को लेकर अभी तक कोई डिटेल नहीं आई है। recent visitors 78