वरिष्ठ मंत्री रहे अनिल विज ने जेपी नड्डा से की मुलाकात, इस मुलाकात के हरियाणा में खूब हो रहे चर्चे

नई दिल्ली अंबाला कैंट सीट से लगातार 7वीं बार विधायक चुने गए हरियाणा के सीनियर भाजपा नेता अनिल विज ने जेपी नड्डा से मुलाकात की है। वह पार्टी चीफ से मुलाकात करने दिल्ली पहुंचे। वरिष्ठ मंत्री रहे अनिल विज की जेपी नड्डा से मुलाकात के हरियाणा में भी चर्चे हैं। फिलहाल इस बात के कयास लग रहे हैं कि उन्हें कौन सा मंत्रालय नई सरकार में मिल सकता है। वह मनोहर लाल खट्टर की सरकार में गृह मंत्री थे, लेकिन नायब सिंह सैनी को कमान मिलने के बाद उन्होंने शपथ नहीं ली थी। वह सिर्फ विधायक के तौर पर काम कर रहे थे। इस बार फिर उन्होंने अंबाला से जीत हासिल की है। इस जीत के बाद फिर से उनके कैबिनेट में आने की चर्चाएं हैं। नायब सिंह सैनी के 17 अक्टूबर को कुछ मंत्रियों के साथ शपथ होगी। अब चर्चा है कि 17 अक्टूबर को अनिल विज उनके साथ शपथ लेंगे या नहीं। दरअसल अनिल विज ने हरियाणा चुनाव के नतीजों से पहले सीएम पद पर दावा किया था। उनका कहना था कि वह वरिष्ठ नेता हैं और सीएम पद के लिए उपयुक्त हैं। ऐसे में अब वह नायब सैनी की सरकार में बतौर मंत्री शपथ लेंगे या फिर नहीं। इसको लेकर भाजपा में आंतरिक चर्चाएं तेज हैं। हालांकि अनिल विज ने दावा करने के बाद यह भी कहा था कि यह मेरी नहीं बल्कि समर्थकों की राय है। उन्होंने सफाई देते हुए कहा था कि जब मनोहर लाल खट्टर के स्थान पर नायब सिंह सैनी को सीएम बनाया गया तो मेरे समर्थकों की राय थी कि मैं भी इसके लिए सही विकल्प था। फिर मैंने जब कुछ नहीं कहा तो लोगों ने कहा शुरू किया कि अनिल विज खुद ही सीएम नहीं बनना चाहता। इसलिए मैंने इस मसले पर बात करते हुए कहा कि मैं भी मुख्यमंत्री बन सकता हूं। ऐसा इसलिए कहा था ताकि अपने समर्थकों के बीच भ्रम दूर कर सकूं। बता दें कि अनिल विज को हरियाणा भाजपा के फायर ब्रांड नेताओं में गिना जाता है। वह तब से भाजपा के विधायक हैं, जब पार्टी राज्य में कमजोर थी और तीसरे या चौथे नंबर की पार्टी हुआ करती थी। भाजपा को इस बार के चुनाव में 48 सीटें मिली हैं और वह लगातार तीसरी बार राज्य की सत्ता में लौटी है। recent visitors 67

छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा द्वारा 5 सूत्रीय मांगो के लिए मुख्यमंत्री के नाम सौपा ज्ञापन

छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले जिला रायपुर के शिक्षकों ने अपने पूर्व लंबित मांगों एवं लंबित मंहगाई भत्ते को लेकर आज दिनांक 14 अक्टूबर 2024 को माननीय मुख्यमंत्री महोदय छत्तीसगढ़ शासन ,माननीय शिक्षा मंत्री महोदय छत्तीसगढ़ शासन ,माननीय वित्त मंत्री महोदय, श्रीमान मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन ,श्रीमान सचिव स्कूल शिक्षा विभाग ,श्रीमान सचिव वित्त विभाग, श्रीमान संचालक लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ के नाम  संयुक्त कलेक्टर रजक जी व जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर विजय कुमार खंडेलवाल को सैंकड़ो की संख्या में उपस्थित होकर शिक्षकों ने संघर्ष मोर्चा के बैनर तले ज्ञापन सौंपा। मोर्चा के जिला संयोजक ओमप्रकाश सोनकला, भानुप्रताप डहरिया ने बताया की एलबी संवर्ग के शिक्षकों की बहुत पुरानी मांगे हैं जो आज दिनांक तक लंबित है जिसमें मोदी जी की गारंटी के तहत सहायक शिक्षकों के वेतन विसंगति  दूर कर समस्त एल बी संवर्ग को क्रमोन्नत वेतनमान प्रदान किया जावे, समतुल्य वेतनमान पुनरीक्षित वेतनमान में सही एलपीसी जारी कर  वेतन का निर्धारण किया जाए, पूर्व सेवा अवधि की गणना करते हुए समस्त शिक्षक एलबी संवर्ग के पुरानी पेंशनों को निर्धारित करें एवं भारत सरकार द्वारा 2 सितंबर 2008 को जारी आदेश के समान 35 वर्ष में पूर्ण पेंशन के स्थान पर 20 वर्ष में पूर्ण पेंशन का प्रावधान किया जावे ।माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा सभी पात्र एलबी संवर्ग के शिक्षकों के लिए क्रमोन्नति समयमान का विभागीय आदेश किया जावे ।शिक्षक व कर्मचारियों को केंद्र के समान 1 जनवरी 2024 से 4% महंगाई भत्ता दिया जाए तथा जुलाई 2019 से देय तिथि पर महंगाई भत्ते के एरियर्स राशि का समायोजन जीपीएफ – सीजीपीएफ खाते में किया जाए।  ज्ञापन सौपने वालो मे मोर्चा के जिला संचालक द्वय ओमप्रकाश सोनकला व भानुप्रताप डहरिया,आयुष पिल्ले,जीतेन्द्र मिश्रा,कन्हैया कंसारी, अतुल शर्मा,, गोपाल वर्मा,बुद्धेश्वर बघेल, रविंद्र सॉन्ग सुरतान,मनोज मुछावड, अब्दुल आसीफ खान, मदन वर्मा, कृष्ण कुमार जांगड़े,प्रफुल्ल मांझी, संतोष सोनवानी, रमेश साहू,ममता डहरिया,जितेंद्र निषाद, इंद्रकुमार देवांगन, वर्षा दुबे सहित पदाधिकारीगण उपस्थित थे। recent visitors 55

राष्ट्रीय विकास बैंक ने शिमला में देश का सबसे लंबा रोपवे बनाने की दी इजाजत

शिमला हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के विकास में एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। राष्ट्रीय विकास बैंक (NDB) ने 1734 करोड़ की लागत से बनने वाले शिमला ट्रांसपोर्ट रोपवे प्रोजैक्ट के निर्माण के लिए अग्रिम टैंडर लगाने की इजाजत दी है। इस ऐतिहासिक परियोजना से शिमला में यातायात का नया अध्याय शुरू होगा। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने इस महत्वपूर्ण जानकारी को अपने सोशल मीडिया अकाऊंट पर सांझा किया है। दुनिया का दूसरा और भारत का सबसे लंबा रोपवे उपमुख्यमंत्री ने बताया यह रोपवे विश्व का दूसरा सबसे लंबा और भारत का पहला सबसे लंबा रोपवे बनने जा रहा है। इसकी लंबाई 13.79 किलोमीटर होगी। इस प्रोजैक्ट के पूरा होने के बाद शिमला में यातायात का एक नया विकल्प उपलब्ध होगा, जिससे न केवल पर्यटकों बल्कि स्थानीय लोगों को भी भारी लाभ मिलेगा। पर्यटन और यातायात में होगा सुधार शिमला जो पहले से ही देश के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है, इस परियोजना से और भी अधिक आकर्षक हो जाएगा। रोपवे के निर्माण से शहर में यातायात जाम की समस्या कम होगी और पर्यटकों को सुविधाजनक यात्रा अनुभव मिलेगा। यह प्रोजैक्ट न केवल शिमला बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के पर्यटन उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा इस प्रोजैक्ट के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। पर्यटन के बढ़ने से स्थानीय व्यापारियों, होटलों, और अन्य संबंधित सेवाओं को लाभ होगा। साथ ही, निर्माण कार्यों के दौरान भी स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। recent visitors 68

अंतरिक्ष में जोड़े जाएंगे स्पेसक्राफ्ट के हिस्से, ISRO बड़े प्रयोग की तैयारी, रचेगा इतिहास

नई दिल्ली ISRO चीफ डॉ. एस. सोमनाथ ने खुलासा किया है कि दिसंबर में इसरो SPADEX (Space Docking Experiment) मिशन कर सकता है. क्योंकि चंद्रयान-4 (Chandrayaan-4) के लिए अंतरिक्ष में डॉकिंग बहुत जरूरी तकनीक है. डॉकिंग मतलब जो अलग-अलग हिस्सों को एकदूसरे की तरफ लाकर उसे जोड़ना. इस समय SPADEX के सैटेलाइट्स का इंटीग्रेशन हो रहा है. एक महीने में ये बनकर तैयार हो जाएंगे. इसके बाद इनकी टेस्टिंग वगैरह होगी. सिमुलेशन होंगे. उम्मीद है कि इसरो इसे 15 दिसंबर 2024 या उससे पहले लॉन्च करे. यह मिशन अंतरिक्ष में डॉकिंग प्रोसेस पूरा करने की पहली सीढ़ी होगी. SPADEX मिशन क्यों है जरूरी? अंतरिक्ष में दो अलग-अलग चीजों को जोड़ने की ये तकनीक ही भारत को अपना स्पेस स्टेशन बनाने में मदद करेगी. साथ ही चंद्रयान-4 प्रोजेक्ट में भी हेल्प करेगी. स्पेडेक्स यानी एक ही सैटेलाइट के दो हिस्से होंगे. इन्हें एक ही रॉकेट में रखकर लॉन्च किया जाएगा. अंतरिक्ष में ये दोनों अलग-अलग जगहों पर छोड़े जाएंगे. धरती की निचली कक्षा में प्रयोग इसके बाद इन दोनों हिस्सों को धरती से निचली कक्षा में जोड़ा जाएगा. ताकि ये फिर से एक यूनिट बन जाएं. इस पूरे प्रोसेस कई तरह के काम होंगे- जैसे दोनों अलग-अलग हिस्से एकदूसरे को खुद से अंतरिक्ष में खोजेंगे. उनके पास आएंगे. ताकि एक ही ऑर्बिट में आ सकें. इसके बाद दोनों एकदूसरे से जुड़ जाएंगे. इसरो के आगे के मिशन क्या होंगे? इसके बाद इसरो गगनयान के दो टेस्ट करेगा. पहला टेस्ट व्हीकल डिमॉन्स्ट्रेशन-2 (TVD2) और पहला मानवरहित मिशन (G1). इस दौरान इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट और पैड अबॉर्ट टेस्ट भी किए जाएंगे. G1 मिशन में ह्यूमेनॉयड व्योममित्र (Vyomitra) महिला रोबोट भी जाएगी. ताकि उसके ऊपर पड़ने वाले असर की स्टडी की जा सके. G1 में एक सीट पर व्योममित्र और दूसरे पर एनवायरमेंटल कंट्रोल एंड लाइफ सपोर्ट सिस्टम (ECLSS) होगा. इन दोनों के डेटा का एनालिसिस किया जाएगा. ताकि यह पता चल सके कि अंतरिक्ष में इंसानों पर क्या असर होगा. और इलेक्ट्रॉनिक्स, हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर आदि पर क्या फर्क पड़ेगा.   recent visitors 73

रूस के काजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले सदस्यता लेने की मची होड़, 34 देशों की सदस्यता पर नई रार

नई दिल्ली रूस के काजान में इसी महीने 22 से 24 अक्तूबर के बीच ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। उससे पहले ब्रिक्स की सदस्यता लेने की होड़ सी मच गई है। पाकिस्तान, तुर्की, म्यांमार, सीरिया, फिलिस्तीन समेत कुल 34 देशों ने ब्रिक्स की सदस्यता के लिए आवेदन दिया है। बड़ी बात यह है कि हिंसा प्रभावित सीरिया, म्यांमार और फिलिस्तीन ने भी आवेदन दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि आगामी शिखर सम्मेलन में 10 नए सदस्यों और 10 पार्टनर को इस संगठन में शामिल किया जा सकता है। बता दें कि भारत,ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका इसके संस्थापक सदस्य देश हैं। जनवरी 2024 में इस समूह का विस्तार हुआ था। अब इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भी शामिल हैं। न्‍यू इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक काजान में होने वाली बैठक में आम सहमति बनने के बाद ही नए सदस्‍यों का ऐलान किया जाएगा। कहा जा रहा है कि भारत ब्रिक्स में नए सदस्यों को शामिल करने का फिलहाल पक्षधर नहीं है, जबकि चीन क्षेत्रीय दबदबा मजबूत करने और अपने एजेंडे को साधने के लिए ब्रिक्स का विस्तार करना चाहता है। चीन इस एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए रूस को अपने साथ ला सकता है। किन-किन देशों ने किया है आवेदन रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन 34 देशों ने ब्रिक्स की सदस्यता के लिए आवेदन दिया है, उनमें अल्‍जीरिया, अजरबैजान, बहरीन, बांग्‍लादेश, बेलारूस, बोलिव‍िया, क्‍यूबा, चाड, इंडोनेशिया, कजाखस्‍तान, कुवैत, पाकिस्‍तान, कुवैत, मलेशिया, लाओस, म्‍यांमार, मोरक्‍को, नाइजीरिया, सेनेगल, दक्षिण सूडान, श्रीलंका, फिलिस्‍तीन, सीरिया, थाइलैंड, तुर्की, यूगांडा, वेनेजुएला, वियतनाम और जिंबाब्‍वे शामिल हैं। इस लिस्ट में कई ऐसे देश हैं जो चीन के करीबी हैं और उन पर चीन का बहुत ज्यादा प्रभाव है। ये देश चीन के साथ मिलकर अमेरिकी नेतृत्व वाले गठजोड़ और देशों का विरोध करते हैं। अपने फायदे के लिए विस्तार चाहता है चीन विश्लेषकों का मानना है कि चीन ब्रिक्स का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करना चाहता है। इसी कड़ी में श्रीलंका और बांगलादेश का भी नाम जुड़ा है, जो भारत के पड़ोसी देश हैं लेकिन चीन की तरफ झुकाव रखते हैं। चीन चाहता है कि जी-7 के खिलाफ ब्रिक्स को खड़ा किया जाय। वह रूस को आगे कर अपनी चाल चल रहा है। इस वक्त रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में फंसा हुआ है और पश्चिमी देशों के साथ लोहा ले रहा है, जबकि चीन उसकी मदद कर रहा है। भारत नहीं चाहता ब्रिक्स का विस्तार भारत और ब्राजील को छोड़कर ब्रिक्स के सभी सदस्य देश चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का हिस्सा हैं। भले ही ब्राजील आधिकारिक तौर पर बीआरआई का हिस्सा नहीं है, लेकिन चीन उसे लुभाने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि वह ब्राजील से निर्यात होने वाली चीजों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा खरीदता है। ऐसे में भारत का तर्क है कि अभी हाल ही में ब्रिक्स का विस्तार हुआ है, इसलिए अभी रुककर इसके विस्तार पर विचार किया जाना चाहिए। काजान में होने वाले शिखर सम्मेलन में ईरान और तुर्की के भी राष्ट्रपति शामिल होने वाले हैं। भारत की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जाने वाले हैं। तीन महीने के अंदर उनकी यह दूसरी रूस यात्रा होगी। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी इसमें शामिल होने की संभावना है। दरअसल, ब्रिक्स एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 2006 में की गई थी। रूस ने 01 जनवरी, 2024 को ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली। इस वर्ष की शुरुआत रूस, ब्राजील, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा अब इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब शामिल हो चुके हैं। रूस की ब्रिक्स अध्यक्षता निष्पक्ष वैश्विक विकास और सुरक्षा के लिए बहुपक्षवाद को मजबूत करने पर केंद्रित है। अपनी अध्यक्षता के हिस्से के रूप में रूस 200 से अधिक राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। recent visitors 58

फर्जीवाड़े का हुआ खुलासा, राजस्थान-ब्यावर में सरकारी नौकरी पाने 2 बहनें बन गईं विधवा

ब्यावर. ब्यावर जिले से एक दिलचस्प मामला सामने आया है। इस मामले में दो सगी बहनों ने सरकारी नौकरी पाने के लिए फर्जीवाड़े की सारी हदें पार कर दीं। इन दोनों ने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जमा कराकर सरकारी नौकरी हथिया ली। अब शिक्षा विभाग में इस फर्जीवाड़े के पता चलने की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। बता दें कि इन दोनों बहनों के किसी जानने वाले ने शिक्षा विभाग को इनके जरिए नौकरी पाने के लिए इस्तेमाल किए गए फर्जी प्रमाण पत्रों की शिकायत की थी। जिसके बाद जब मामला जिला शिक्षा अधिकारी के संज्ञान में आया तो दोनों बहनों के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई। अभ्यर्थियों को मिल सकता है मौका मिली जानकारी के अनुसार अगर दोनों शिक्षिकाओं रेखा और सुनीता पर लगे आरोप सिद्ध पाए जाते हैं तो राज्य सरकार की ओर से दोनों की सेवा समाप्त की जा सकती है। वहीं, 2022 और 2016-17 माध्यमिक शिक्षक भर्ती में प्रतीक्षा सूची में शामिल एक-एक अभ्यर्थी को कानून के मुताबिक नौकरी मिलने की संभावना है। नेताओं का नजदीकी है परिवार जिन दोनों बहनों ने फर्जी डेथ सर्टिफिकेट लगाकर नौकरी हासिल की। उन दोनों बहनों का परिवार राजनीतिक ताल्लुक रखता है। बताया जा रहा है कि परिवार के सदस्य खुद राजनीति में रहे हैं। दोनों के माता पिता सरपंच रहे हैं। नवंबर 2020 में जब सुनीता की शादी निर्मल सिंह के साथ हुई थी तब विधायक भी शादी समारोह में शामिल हुए थे। दोनों बहनों के पारिवारिक समारोह में नेताओं का आना जाना रहा है। recent visitors 97

दीपक बाबरिया ने पार्टी नेतृत्व से इस्तीफे की पेशकश की है और हरियाणा की हार के लिए नैतिक जिम्मेदारी ली

नई दिल्ली हरियाणा विधानसभा चुनाव की अप्रत्याशित हार ने कांग्रेस में बवाल बढ़ा दिया है। नेता एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं तो वहीं अब इस्तीफों का दौर भी शुरू हो सकता है। सबसे पहले राज्य के प्रभारी महासचिव दीपक बाबरिया ने इस्तीफे की पेशकश कर दी है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से इस्तीफे की पेशकश की है और हरियाणा की हार के लिए नैतिक जिम्मेदारी ली है। उन्होंने हाईकमान से कहा है कि उनकी जगह पर किसी नए शख्स को यह जिम्मेदारी दी जाए। इसे लेकर सीधे राहुल गांधी से ही बाबरिया ने बात की है। दीपक बाबरिया चुनाव के दौरान बीमार थे और अस्पताल में एडमिट थे। उनकी सीधे तौर पर सीनियर लीडर कैप्टन अजय सिंह यादव ने आलोचना की थी। उनका कहना था कि चुनाव के बीच में दीपक बाबरिया बीमार थे। वह अस्पताल में एडमिट थे और कामकाज ठप था। यदि ऐसी स्थिति थी तो उन्हें हाईकमान को बताना चाहिए था कि उनका कोई विकल्प देखा जाए। इस तरह उन्होंने बाबरिया पर लापरवाही का आरोप लगाया था। अब खुद बाबरिया ने नैतिक जिम्मेदारी ली है और इस्तीफा देने की बात कही है। दरअसल हरियाणा में जब टिकटों का बंटवारा हो रहा था और प्रचार जोरों पर था, तब दीपक बाबरिया दिल्ली के एम्स में एडमिट थे। उन्हें रक्तचाप से जुड़ी समस्या हो गई थी। दरअसल दीपक बाबरिया का हरियाणा में कोई जनाधार नहीं रहा है और उन्हें ज्यादातर नेता महत्व नहीं देते। इसी को लेकर बवाल होता रहा है। कैप्टन अजय यादव तो उन पर सीधे हमलावर हुए। उन्होंने कहा कि आखिर ऐसे कैसे कोई प्रभारी हो सकता है, जो चुनाव के वक्त सीन से ही गायब था। दरअसल दीपक बाबरिया को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का करीबी माना जाता है। कर्नाटक में पार्टी की जीत के बाद बाबरिया को विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए पर्यवेक्षक के तौर पर भेजा गया था। इसके बाद उन्हें दिल्ली और हरियाणा का प्रभारी बनाया गया था। बता दें कि हरियाणा में कांग्रेस ने हार के बाद फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाने का फैसला लिया है। यह कमेटी हार के कारणों की पड़ताल करेगी। कांग्रेस सूत्रों ने बताया था कि हरियाणा की हार को लेकर जो मीटिंग हुई थी, उसमें राहुल गांधी ने हैरानी जताई थी। उनका कहना था कि कुछ लोगों ने पार्टी हितों की बजाय निजी हितों को ज्यादा प्राथमिकता दी थी। कयास लग रहे हैं कि दीपक बाबरिया के बाद पार्टी के स्टेट चीफ उदयभान भी इस्तीफा दे सकते हैं। recent visitors 68