रिलायंस के ब्रांड कैंपा कोला की धमक कोका-कोला को कीमत घटाने पर मजबूर होना पड़ा

नई दिल्ली भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी ने कोला मार्केट में उतरते ही तहलका मचा दिया है। रिलायंस के कैंपा ब्रांड ने अपने प्रॉडक्ट्स की कीमत कोका-कोला और पेप्सी की तुलना में काफी कम रखी है। इससे इन कंपनियों को कड़ी चुनौती की सामना करना पड़ा है। कई मार्केट्स में उनका हिस्सेदारी प्रभावित होने लगी है। कोका-कोला अब अपनी 400 मिली की बोतल की कीमत 25 रुपये से घटाकर 20 रुपये करने की योजना बना रही है। डिस्ट्रीब्यूटर्स से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी है। संशोधित कीमतें अगले एक हफ्ते में तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल के बाजारों में लागू होने की संभावना है। इस बारे में कोका-कोला ने सवालों का जवाब नहीं दिया। सूत्रों ने कहा कि कोका-कोला 400 मिली की बोतल अभी 25 रुपये में बेच रही है। तत्काल उन्हीं बोतलों की पैकेजिंग बदलकर 20 रुपये नहीं की जा सकती है। कंपनी आने वाले दिनों में एक नई पैकेजिंग लॉन्च करेगी। इसमें बोतल पर 250 मिली और 150 मिली फ्री लिखा होगा। इसकी कीमत 20 रुपये होगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज के ब्रांड कैंपा कोला ने अपने पैक्स की कीमत कोका-कोला की तुलना में 5-20 रुपये कम है। इससे कोका-कोला जैसी वैश्विक कंपनियों को अपनी कीमतों में बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। कैसे निपटेगा पुराना स्टॉक? कैंपा कोला अपनी 500 मिली की बोतले 20 रुपये में बेचती है जबकि कोका-कोला की 400 मिली बोतल की कीमत 25 रुपये है। इसी तरह कैंपा की 600 मिली की बोतल की कीमत 30 रुपये है, जबकि कोका-कोला उसे 40 रुपये में बेचती है। कैंपा की 2 लीटर की बोतल और कोका-कोला के 2.25 लीटर की बोतल की कीमत में 20 रुपये का अंतर है। कोका-कोला जनरल ट्रेड चैनल से 250 मिली, 400 मिली, 600 मिली, 1 लीटर और 2.25 लीटर पैक आकार की कोल्ड ड्रिंक बोतलें बेचती है। कंपनी मॉडर्न ट्रेड चैनल के जरिए ज्यादातर 750 मिली और 1.25 लीटर की बोतलें बेचती है जबकि जनरल ट्रेड चैनल से 600 मिली और 1 लीटर की बोतलें अधिक बिकती हैं। हालांकि कोका-कोला के डिस्ट्रीब्यूटर्स को इस बात की चिंता है क्योंकि उनके पास 250 मिली की बोतलों का काफी स्टॉक है। इनकी कीमत 20 रुपये है। कम कीमत वाली 400 मिली की बोतलों के बाजार में आने से पहले उन्हें इस स्टॉक को खत्म करना होगा। अभी यह साफ नहीं है कि 250 मिली की बोतलों के लिए कोका-कोला की कीमत और मार्केटिंग स्ट्रैटजी क्या होगी? डिस्ट्रीब्यूटर्स ने कहा कि 250 मिली के स्टॉक को खत्म करना होगा। recent visitors 120

दुनिया के सबसे बड़े सामूहिक आयोजन महाकुंभ 2025 की तैयारियों को लेकर पूरा सरकारी अमला दिन रात काम में जुटा

प्रयागराज दुनिया के सबसे बड़े सामूहिक आयोजन महाकुंभ 2025 की तैयारियों को लेकर प्रयागराज में पूरा सरकारी अमला दिन रात काम में जुटा हुआ है। अधिकारी दिन भर जहां कार्यालयों में महाकुंभ की तैयारियों से संबंधित अपने जरूरी काम निपटा रहे हैं तो वहीं देर रात तक विकास और निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर प्रगति का जायजा भी ले रहे हैं। यही नहीं, कहीं पर भी कोई अव्यवस्था होने पर तुरंत अधीनस्थ कर्मचारियों को व्यवस्था सही करने के लिए निर्देशित किया जा रहा है। गतिविधियों में आई इस तेजी से स्पष्ट है कि सीएम योगी की मंशा के अनुरूप मेला प्रशासन और जिला प्रशासन समस्त कार्यों को डेडलाइन से पहले ही पूर्ण कर महाकुंभ को श्रद्धालुओं के लिए एक यादगार और शानदार अनुभव बनाने के प्रति तत्परता से कार्य कर रहा है। विकास कार्यों में दिखाई दे रही तेजी महाकुंभ 2025 की शुरुआत को अभी दो महीने से भी ज्यादा का समय बचा हुआ है। पूरे प्रयागराज में महाकुंभ की तैयारियां पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रही हैं। श्रद्धालुओं के लिए तमाम तरह की व्यवस्थाओं को अमली जामा पहनाया जा रहा है। रेलवे ओवरब्रिज से लेकर सड़कों का चौड़ीकरण का कार्य जारी है। थीमेटिक गेट्स से लेकर वॉल पेंटिंग की जा रही है। पार्कों का सौंदर्यीकरण चल रहा है। मंदिरों के जीर्णोद्धार से लेकर घाटों पर भी निर्माण कार्य समेत महाकुंभ क्षेत्र में तमाम विकास कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं। मेला प्राधिकरण, पीडब्ल्यूडी, प्रयागराज डेवलपमेंट अथॉरिटी, नगर निगम, पर्यटन विभाग, सिंचाई विभाग, सेतु निगम समेत तमाम विभाग आपसी समन्वय के साथ इन परियोजनाओं को पूर्ण करने में लगे हुए हैं। विकास कार्यों की भौतिक प्रगति को देखने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारी देर रात निरीक्षण में जुट गए हैं। आधी रात को अधिकारियों के औचक निरीक्षण से काम की रफ्तार में भी तेजी आई है। स्थायी कार्यों पर है जोर बीते कुछ दिनों में पीडीए के वीसी और सचिव ने हाई कोर्ट रोड, छोटा बघाड़ा रोड, अरैल, कीडगंज, हटिया, नूरुल्लाह, झूंसी बस स्टैंड और लेटे हनुमान मंदिर में चल रहे विकास कार्यों का देर रात निरीक्षण किया और कार्यदायी संस्थाओं को आवश्यक सुधार निर्देश दिए गए हैं। इसी तरह मेला प्रशासन से जुड़े अधिकारी भी विभिन्न स्थानों पर चल रहे विकास और निर्माण कार्यों का आधी रात निरीक्षण करने पहुंच गए और पानी से लेकर बिजली सप्लाई को लेकर विभागीय कर्मचारियों को निर्देशित किया। देर रात अधिकारियों की सक्रियता से विभागीय कार्यों में तेजी देखने को मिल रही है। फोकस उन कार्यों पर है, जो विगत काफी दिनों से पेंडिंग चल रहे हैं। इसके साथ ही गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि लंबे समय तक प्रयागवासी महाकुंभ के दौरान हुए विकास कार्यों का लाभ उठा सकें। ज्यादातर कार्य टेंपरेरी की बजाए पर्मानेंट बेसिस पर किए जा रहे हैं।   recent visitors 81

डॉ आंबेडकर मेधावी छात्र योजना के लिए आवेदन शुरू, स्कूल और कॉलेज स्टूडेंट्स के लिए सरकारी स्कॉलरशिप स्कीम

आप चाहे स्कूल में पढ़ते हों या कॉलेज में, ग्रेजुएशन कर रहे हों या पोस्ट ग्रेजुएशन… आपके पास मौका है बढ़िया स्कॉलरशिप पाने का। इस सरकारी छात्रवृत्ति योजना के तहत आपको हर साल 12 हजार रुपये तक दिए जाएंगे। हरियाणा सरकार राज्य के विद्यार्थियों को ये सुविधा दे रही है। जिस स्कॉलरशिप स्कीम के तहत आपको ये फायदा मिलेगा, उसका नाम है- डॉ आंबेडकर मेधावी छात्रवृति योजना। सत्र 2024-25 के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। Dr Ambedkar Medhavi Chhatra Yojana: किसे मिलेगा लाभ? हरियाणा गवर्नमेंट द्वारा वंचित वर्ग के मेधावी छात्रों के लिए ये योजना चलाई जा रही है। प्रदेश सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी मेधावी छात्र की आर्थिक कारणों से पढ़ाई प्रभावित न हो। खंड शिक्षा अधिकारी सगीर अहमद ने बताया कि 2024-25 की अवधि के लिए डॉ. आंबेडकर मेधावी छात्र संशोधित योजना के तहत सरल पोर्टल (https://saralharyana.gov.in/) पर ऑनलाइन आवेदन शुरू हो चुके हैं। डॉ आंबेडकर मेधावी छात्र योजना के लिए योग्यता की शर्तें इस प्रकार हैं-     अनुसूचित वर्ग (एससी कैटेगरी) के जिन शहरी छात्रों के 10वीं में 70, 12वीं में 75 व स्नातक में 65 प्रतिशत अंक हैं, वे इस छात्रवृत्ति के लिए आवेदन कर सकते हैं।     इसी प्रकार गांवों में अनुसूचित वर्ग (SC) के छात्र के 10वीं में 60, 12वीं में 70 व स्नातक में 60 प्रतिशत अंक होने चाहिए।     इसी प्रकार पिछड़ा वर्ग-ए (बीसी) के शहर में रहने वाले छात्र ने 10वीं में 70 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में 60 प्रतिशत अंक मिले हों।     पिछड़ा वर्ग-बी के शहरी छात्र या छात्रा के 10वीं में 80 व ग्रामीण छात्र के 75 प्रतिशत अंक होने चाहिए, तभी वह योजना के पात्र होंगे।     डॉ आंबेडकर मेधावी छात्र संशोधित योजना के लिए छात्र के परिवार की वार्षिक आय चार लाख रुपये से कम होनी चाहिए। डॉ आंबेडकर स्कॉलरशिप में कितने पैसे मिलेंगे? आवेदन करने वाले योग्य उम्मीदवारों को 10वीं पास होने पर आठ हजार रुपये सालाना, एससी आवेदक को 12वीं पास करने पर 8 से 10 हजार रुपये और स्नातक पास होने के बाद 9 से 12 हजार रुपये प्रति वर्ष आगे की पढ़ाई के लिए दिए जाएंगे। ये दस्तावेज जरूरी पारिवारिक आय का प्रमाण-पत्र, रिहायशी प्रमाण पत्र, बैंक पास बुक, वर्तमान अध्ययनरत कक्षा का आईडी कार्ड या प्रमाण, मार्कशीट, फैमिली आईडी आदि दस्तावेज आवेदन के साथ लगाने होंगे। recent visitors 190

दिवाली के दूसरे दिन मानाने वाला पर्व भाई दूज, जानें तारीख और महत्व

भाई दूज का पर्व हर साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन रखा जाता है। इस दिन बहने अपने भाई की लंबी उम्र की कामना के लिए इस व्रत को रखती है। इस बार 2 या 3 नवंबर को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि किस दिन भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा। यहां जानें भाई दूज की तारीख और धार्मिक महत्व। भाई दूज 2024 तिथि : भाई दूज का पर्व बहन और भाई के प्रति विश्वास और प्रेम का पर्व है। भाई दूज के साथ ही पांच दिवसीय दिवाली उत्सव का भी समापन हो जाता है। भाई दूज के पर्व हर साल की कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन रखा जाता है। देशभर में भाई दूज के पर्व को अलग अलग नामों से जाना जाता है। यह पर्व भाई बहन के रिश्तों को मजबूत करता है। आइए जानते हैं इस बार भाई दूज कब मनाई जाएगी। कब है भाई दूज 2024 ? कार्तिक मास द्वितीया तिथि का आरंभ 2 नवंबर को रात में 8 बजकर 22 मिनट पर हो जाएगा और कार्तिक द्वितीया तिथि 3 नवंबर को रात में 10 बजकर 6 मिनट तर रहेगी। उदया तिथि में द्वितीया तिथि 3 नवंबर को होने के कारण भाई दूज का पर्व 3 तारीख को मनाया जाएगा। दरअसल, 3 तारीख को सुबह में 11 बजकर 39 मिनट तक सौभाग्य योग रहेगा। इसके बाद शोभन योग लग जाएगा। इसलिए भाई दूज के दिन पूजा के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त 11 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। भाई दूज का महत्व भाई दूज का पर्व हिंदुओं में प्रमुख और प्रसिद्ध त्यौहार है। भाई दूज भाई बहन के बीच मान सम्मान और प्रेम प्रकट करने का शानदार अवसर है। भाई दूज का धार्मिक महत्व भी है। भाई दूज का धार्मिक महत्व भी है। शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि पर यम अपनी बहन के घर गए थे। वहां अपनी बहन द्वारा किए गए आदर सत्कार से प्रसन्न होकर वरदान दिया कि जो भाई बहन इस दिन यमुना में स्नान करके यम पूजा करेंगे। उसे मृत्यु के बाद यमलोक नहीं जाना पड़ेगा। भाई दूज को लेकर एक अन्य मान्यता यह भी है कि एक बाद भगवान कृष्ण जब नरकासुर राक्षस का वध करके द्वारका नगरी लौटे थे। इस अवसर पर भगवान कृष्ण की बहन सुभद्रा ने फूल, मिठाई और अनेकों दीपक जलाकर उनका स्वागत किया था। देवी सुभद्रा ने भगवान कृष्ण के मस्तक पर टीका लगाकर उनकी लंबी आयु की कामना की थी। तभी से भाई दूज का पर्व मनाया जाने लगा। recent visitors 112

रोहित शर्मा के बल्ले पर कप्तानी के बोझ में लगी जंग, इस लिस्ट में विराट कोहली नंबर-1

नई दिल्ली वनडे और टी20 में तो बतौर कप्तान रोहित शर्मा अपने बल्ले से धूम मचा रहे हैं, मगर जब बात टेस्ट क्रिकेट की आती है तो मानों उनके बल्ले पर जंग लग जाती है। जी हां, यह हम नहीं बल्कि रोहित शर्मा के आंकड़े कह रहे हैं। रोहित शर्मा ने बतौर कप्तान टेस्ट क्रिकेट में अपने 20 मैच खेल लिए हैं। अगर पिछले 50 सालों में भारत के लिए कप्तानी करने वाले खिलाड़ियों के पहले 20 मैचों की तुलना की जाए तो रोहित शर्मा टॉप-5 में भी नहीं है। वहीं इस दौरान सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में विराट कोहली टॉप पर हैं। जी हां, आईए एक नजर डालते हैं इस लिस्ट पर- रोहित शर्मा ने टेस्ट क्रिकेट में बतौर कप्तान अपने पहले 20 मैचों में 35.11 की औसत से 1194 रन बनाए हैं। वह रन और औसत के मामले में इस लिस्ट में 7वें नंबर पर हैं। हालांकि बिना कप्तानी के रोहित शर्मा का टेस्ट में परफॉर्मेंस इससे अच्छा रहा है। रोहित शर्मा ने टेस्ट क्रिकेटर में बतौर बल्लेबाज 43 मैच खेले हैं, जिसमें 46.87 की औसत से उनके बल्ले से 3047 रन निकले हैं। इन आंकड़ों को देखकर साफ समझ आ रहा है कि हिटमैन टेस्ट में कप्तानी का बोझ नहीं झेल पा रहे हैं। वहीं पहले 20 टेस्ट मैचों में बतौर कप्तान सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाजों की करें तो इस लिस्ट में विराट कोहली का नाम पहले नंबर पर है। कोहली ने अपने पहले 20 मैचों में 60 से अधिक की औसत के साथ 1861 रन बनाए थे। वहीं अगर पहले 20 टेस्ट मैचों में बेस्ट एवरेज की बात करें तो इस लिस्ट में सुनील गावस्कर विराट कोहली से आगे हैं। गावस्कर ने बतौर कप्तान अपने पहले 20 टेस्ट मैचों में 62.62 की औसत से 1816 रन बनाए थे। बतौर कप्तान पहले 20 टेस्ट में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन (पिछले 50 सालों में) खिलाड़ी मैच रन  औसत विराट कोहली 20 1861 60.03 सुनील गावस्कर 20 1816 62.62 सचिन तेंदुलकर 20 1630 54.33 एमएस धोनी 20 1226 51.08 राहुल द्रविड़ 20 1418 45.74 मोहम्मद अजहरुद्दीन 20 1287 44.37 रोहित शर्मा 20 1194 35.11 सौरव गांगुली 20 949 33.89 कपिल देव 20 747 24.09 बिशन सिंह बेदी 20 285 15 recent visitors 87

दीपावली के साथ बुंदेलखंड में मौनिया नृत्य की बहार ,कलाकार दे रहे अदभुत प्रस्तुति 

With Diwali, Bundelkhand is celebrating Mouniya dance, artists are giving amazing performance  टीकमगढ़ । दीपावली के दूसरे दिन शुक्रवार को निवाड़ी जिले के ओरछा में राम राजा सरकार के दरबार में बुंदेलखंड से मौनिया की टोलियां पहुंचीं। यहां सबसे पहले बेतवा में स्नान किया। दरबार में हाजिरी दी। इसके बाद शुरू हुआ मंदिर के बाहर मौनिया नृत्य। कमर में घुंघरू बांध, हाथ में मोरपंख लेकर ढोल-नगड़िया की थाप, मजीरा की ताल पर मौनिया थिरक रहे हैं। सुबह 5 बजे से लोगों का आना शुरू हो गया। दिनभर यहां लोक कला और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। इस दिन यहां 15 से 20 हजार लोग आते हैं। माइ सीक्रेट न्यूज़ कि टीम ने लोगों से बात की। जाना कि मौनिया नृत्य का इतिहास, मान्यता और कैसे किया जाता है। मौनिया नृत्य करने राम राजा के दरबार में कई टोलियां पहुंची हैं। खरीफ की अच्छी फसल की खुशी, रबी के लिए कामना बुंदेलखंड के ग्रामीण खरीफ की अच्छी फसल होने की खुशी और रबी की अच्छी फसल की कामना करते हैं। इसके लिए दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के बाद मौनिया बुंदेलखंड के 12 देव स्थानों के दर्शन के लिए निकल पड़ते हैं। 12 धार्मिक स्थलों पर जाकर नृत्य करते हैं। इनमें ओरछा के रामराजा सबसे प्रमुख हैं। टोली के सभी ग्रामीण मौन व्रत रखते हैं। इसके बाद घर पहुंचकर मौन व्रत खोलते हैं। ओरछा के रामराजा दरबार में खुशहाली के लिए नृत्य की यह अनूठी परंपरा सैकड़ों वर्षों से जीवंत है। गोवर्धन पूजा तक चलता है कार्यक्रम लोंग बताते हैं कि बुंदेलखंड में दीपावली पर मौनिया नृत्य की प्रस्तुति के लिए एक महीने पहले से कलाकार तैयारी करते हैं। दीपावली की सुबह तीर्थ स्थानों पर पहुंचकर नृत्य करते हैं। लक्ष्मी पूजन के बाद घर से निकल जाते हैं। यह उत्सव गोवर्धन पूजा तक चलता है। यहां छतरपुर, पन्ना, दमोह, उत्तर प्रदेश के झांसी, महोबा, हमीरपुर, बांदा, दतिया से लोग आते हैं। लाठी और डंडों से किया जाता है नृत्य  लोगों ने बताया कि मौनिया नृत्य बुंदेलखंड में खासतौर से सागर, झांसी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना जिले के लोगों द्वारा किया जाता है। इसका स्वरूप सांस्कृतिक के साथ युद्ध कौशल से भी जुड़ा है। इसमें मात्र पुरुष ही हिस्सा लेते हैं। इसका केंद्र वीर रस प्रधान होता है। इसमें ग्रामीण रावला को मनौती के रूप में मानते हैं। इसी वजह से इसे मौनिया नृत्य कहते हैं। इसमें 12 से ज्यादा कलाकार गोला बनाते हैं। बीच में एक नर्तक होता है। सभी के हाथ में लाठियां होती हैं। वे साथ गीत और ढोल नगड़िया की थाप पर लाठियों से वार करते हैं। कलाकार दो डंडे हाथ में लेकर नाच-नाचकर इन डंडों से खेलते हैं। इसमें ढोलक, मंजीरा, रमतूला, झीका, नगारा आदि प्रमुख वाद्य यंत्र हैं। recent visitors 342

फ्लू या हर्पीस इंफेक्शन का शिकार हुए हैं तो सालों बाद आप डिमेंशिया के रिस्क की गिरफ्त में आ सकते हैं: शोध

फ्लू (flu)ऐसा सीजनल इंफेक्शन है जो ज्यादातर लोगों को हो जाता है. लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि फ्लू, हर्पीस (herpes) संक्रमण या रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट जैसे संक्रमण डिमेंशिया (dementia)के रिस्क को बढ़ा सकते हैं. जी हां, हाल ही में पब्लिश एक स्टडी में कहा गया है कि फ्लू और हर्पीस जैसे संक्रमण ब्रेन अट्रॉफी और डिमेंशिया से जुड़े हैं और अगर संक्रमण लगातार बने रहें तो डिमेंशिया के रिस्क बढ़ जाते हैं. इस स्टडी में उन जैविक कारकों का भी संकेत दिए गया जो न्यूरोडीजेनेरेटिव डिजीज में योगदान करते हैं. नेचर एजिंग में छपी इस स्टडी में अल्जाइमर बीमारी और डिमेंशिया के बारे में एक उपयोगी डेटा प्रदान किया गया है. फ्लू और हर्पीस इन्फेक्शन से बढ़ सकता है डिमेंशिया अन्य स्टडी में पता चला है कि फ्लू के शॉट्स और शिंगल्स वैक्सीन के जरिए डिमेंशिया के रिस्क को कम किया जा सकता है. फ्लू और हर्पीस जैसे संक्रमण आगे जाकर स्ट्रोक और दिल के दौरे के भी कारण बन सकते हैं. स्टडी में कहा गया है कि कुछ गंभीर संक्रमण जैसे फ्लू, हर्पीस और सांस की नली का इन्फेक्शन मेंटल हेल्थ को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है. यहां तक कि छोटे मोटे इंफेक्शन भी दिमाग की सोचने और समझने की प्रोसेस को इफेक्ट कर सकते हैं. इससे दिमाग के व्यवहार करने का तरीका भी बदल सकता है. जबकि गंभीर संक्रमण दिमाग की क्षमता और इम्यून रिस्पांस के लिए कतई अच्छा नहीं है. स्टडी में कहा गया है कि ये सोचा जाना कि कोई संक्रमण न्यूरोडीजेनेरेटिव डिजीज में बड़ी भूमिका निभा सकता है, फिलहाल संभव नहीं है लेकिन कोरोना महामारी के बाद इस बारे में सोचा जाने लगा है. वैस्कुलर डिमेंशिया का रिस्क बढ़ता है इस स्टडी में जिन संक्रमणों की जांच की गई, इनमें फ्लू, हर्पीस, रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन और स्किन इंफेक्शन शामिल हैं. ये सभी ब्रेन लॉस यानी ब्रेन अट्रॉफी से जुड़े पाए गए हैं. स्टडी में कहा गया है कि ये संक्रमण तुरंत डिमेंशिया के खतरे को नहीं बढ़ाते हैं. इनके होने के सालों बाद डिमेंशिया और अल्जाइमर के जोखिम बढ़ जाते हैं. ये बढ़ा हुआ रिस्क वैस्कुलर डिमेंशिया से जुड़ा है. वैस्कुलर डिमेंशिया अल्जाइमर के बाद दूसरे सबसे बड़े मनोभ्रंश के रूप में पहचाना जाता है क्योंकि ये दिमाग में खून के रुकने से होता है.  recent visitors 87