13 करोड़ भारतीय बेहद गरीब, तमाम दावों के बीच आई विश्व बैंक रिपोर्ट

मुंबई करीब 12.9 करोड़ भारतीय वर्ष 2024 में अत्यधिक गरीबी में जीवन बसर कर रहे हैं। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, इन भारतीयों की प्रतिदिन की आमदनी 181 रुपये (2.15 डॉलर) से भी कम है। वर्ष 1990 में यह संख्या 43.1 करोड़ थी। रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा रफ्तार से दुनिया में गरीबी खत्म करने में एक सदी से भी अधिक समय लग सकता है। विश्व बैंक की मंगलवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च गरीबी मानक के साथ मध्य आय वाले देशों के लिए गरीबी की तय सीमा प्रतिदिन 576 रुपये (6.85 डॉलर) है, लेकिन जनसंख्या वृद्धि के चलते 1990 की तुलना में 2024 में अधिक भारतीय गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं। इससे पहले विश्व बैंक ने कहा था कि भारत में अत्यधिक गरीबी पिछले दो वर्षों में बढ़ने के बाद 2021 में 3.8 करोड़ घटकर 16.74 करोड़ रह गई। भारत का योगदान वैश्विक चरम गरीबी में घटेगा विश्व बैंक के मुताबिक, अगले दशक में वैश्विक अत्यधिक गरीबी में भारत का योगदान काफी कम होने का अनुमान है। यह अनुमान अगले दशक में प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि के साथ-साथ ऐतिहासिक विकास दरों पर आधारित है। भारत में 2030 में चरम गरीबी दर शून्य करने पर भी इस अवधि में दुनियाभर में अत्यधिक गरीबी दर 7.31 फीसदी से गिरकर 6.72 फीसदी ही रहेगी जो अभी भी तीन फीसदी के लक्ष्य से काफी ऊपर है। दुनिया में 70 करोड़ लोग अत्यधिक गरीब गरीबी, समृद्धि और पृथ्वी : बहुसंकट से बाहर निकलने के रास्ते नामक रिपोर्ट में कहा गया है कि आज भी दुनिया की 44 फीसदी आबादी प्रतिदिन 576 रुपये से कम पर जीवनयापन करती है। जनसंख्या वृद्धि के कारण 1990 के बाद से इस गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों की संख्या में कोई खास बदलाव नहीं आया है। 2020-2030 एक खोया हुआ दशक होने वाला है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रगति की मौजूदा रफ्तार के हिसाब से अत्यधिक गरीबी को मिटाने में दशकों लगेंगे और लोगों की प्रतिदिन की कमाई 576 रुपये से ऊपर लाने में एक सदी से अधिक समय लगेगा। वैश्विक आबादी का 8.5 फीसदी या 70 करोड़ लोग आज भी 181 रुपये से कम पर जीवनयापन कर रहे हैं। अनुमान है कि 2030 में 7.3 फीसदी आबादी अत्यधिक गरीबी में रह रही होगी। अफ्रीका में बढ़ेगी गरीबी: रिपोर्ट में कहा गया है कि इन नए डाटासेट को हाल ही में जारी 2022-23 के घरेलू उपभोग और व्यय सर्वेक्षण (एचसीईएस) में शामिल नहीं किया गया था, क्योंकि आवश्यक विश्लेषण समय पर पूरे नहीं किए जा सके। रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष मजबूत हैं जैसे उप-सहारा अफ्रीका और विकासशील देशों में अत्यधिक गरीबी का बढ़ना और 2030 तक अत्यधिक गरीबी के खात्मे का पहुंच से बाहर होना। recent visitors 111

केंटकी : अस्पताल में ब्रेन डेड घोषित व्यक्ति की दिल निकालने से पहले ही शरीर में जान आ गई

केंटकी  अमेरिका के एक हॉस्पिटल में चौंकाने वाली घटना घटी है। ब्रेन डेड घोषित किए गए व्यक्ति का दिल निकाला जाना था। डॉक्टर इसकी तैयारी कर रहे थे तभी दिमागी रूप से मृत मरीज के शरीर में जान आ गई। डॉक्टर उसके दिल को निकालकर दूसरे मरीज के शरीर में लगाने वाले थे। घटना केंटकी के बैपटिस्ट हेल्थ रिचमंड हॉस्पिटल की है। मरीज का नाम थॉमस 'टीजे' हूवर द्वितीय है। उम्र 36 साल है। थॉमस को 2021 में अस्पताल में ड्रग ओवरडोज के चलते भर्ती कराया गया था। बाद में उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। बता दें कि ब्रेन डेड का मतलब मरीज की ऐसी स्थिति से है जब उसका दिमाग मर जाता है। ब्रेन को काफी नुकसान पहुंचता है और उसका ठीक होना लगभग असंभव होता है। ऐसी स्थिति में भी मृत व्यक्ति में जीवन के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। उसकी त्वचा गर्म रहती है, दिल धड़कता है और वेंटिलेशन के साथ छाती ऊपर-नीचे होती है। अंग दान के लिए दिल ऐसे ही मरीज का लिया जाता है। पूरी तरह मरने के बाद दिल निकालकर किसी और के शरीर में नहीं लगाया जा सकता। इधर-उधर हाथ-पैर मार रहा था मरीज केंटकी ऑर्गन डोनर एफिलिएट्स (KODA) के पूर्व कर्मचारी निकोलेटा मार्टिन ने कहा, "वह मरीज मेज पर इधर-उधर हाथ-पैर मार रहा था। यह हर किसी का सबसे बुरा सपना होता है। सर्जरी के दौरान जिंदा रहना और यह जानना कि कोई आपको चीरकर आपके शरीर के अंग निकाल लेगा। यह भयानक है।" KODA की एक अन्य कार्यकर्ता नताशा मिलर ने बताया कि थॉमस को ICU से ऑपरेटिंग रूम में ले जाते समय भी उसमें जीवन के लक्षण दिखाई दे रहे थे। वह इधर-उधर घूम रहा था। कुछ हद तक लड़खड़ा रहा था। जब हम वहां गए तो उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे। वह रो रहा था। थॉमस अब अपनी बहन डोना रोहरर के साथ रह रहा है। उसे याददाश्त, चलने और बात करने में कठिनाई का सामना करना पड़ा है। recent visitors 72

BJP का राज ठाकरे के बेटे को समर्थन, असमंजस में शिंदे की शिवसेना

मुंबई. महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव में अब केवल 20 दिन बचे हैं। माहिम विधानसभा सीट पर उम्मीदवारों को लेकर महायुति गठबंधन में असमंजस की स्थिति बन गई है। इस सीट पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे, शिवसेना के मौजूदा विधायक सदा सर्वणकर और शिवसेना (यूबीटी) के महेश सावंत के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने वाला है। यहां लड़ाई दिलचस्प तब हो गई जब भाजपा ने अमित ठाकरे को अपना समर्थन देने का वादा कर दिया। वहीं, सीएम एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना ने अपने मौजूदा विधायक को मैदान में उतारने का फैसला किया है और दोनों ही दल अपने फैसले पर अड़े हुए हैं। भाजपा को इस बात उम्मीद थी कि एकनाथ शिंदे की शिवसेना विधायक सर्वणकर को सीट से हटाकर अमित ठाकरे का समर्थन करेगी। हालांकि भाजपा नेताओं का दावा है कि इस मामले पर शिंदे के साथ समझौता हो गया है। वहीं, शिवसेना नेताओं का तर्क है कि अगर वे उम्मीदवार नहीं उतारते हैं तो उनके वोट उद्धव गुट को जा सकते हैं। सर्वणकर ने बुधवार को राज ठाकरे से अनुरोध किया कि वे अपने बेटे की माहिम सीट से उम्मीदवारी वापस लें और शिवसेना का समर्थन करें। विधायक ने ट्वीट कर शिवसेना के वफादार के रूप में अपने 40 साल के कार्यकाल और कड़ी मेहनत के दम पर तीन बार विधायक चुने जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि अगर दिवंगत शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे जीवित होते तो वे उनसे अपने रिश्तेदारों के लिए सीट छोड़ने के लिए नहीं कहते। शिवसेना एमएलए ने कहा, "दादर-माहिम में बाल ठाकरे के 50 रिश्तेदार रहते हैं, लेकिन उन्होंने मुझ जैसे आम कार्यकर्ता को उम्मीदवार बनाया। वे कार्यकर्ता की भावना को संजोने वाले नेता थे। एकनाथ शिंदे साहब को देखिए। भले ही उनका बेटा तीन बार सांसद रहा हो, लेकिन उन्होंने अपने बेटे को केंद्र में मंत्री नहीं बनाया, बल्कि एक वफादार शिवसैनिक को यह मौका दिया।" उन्होंने आगे कहा, "मैं राज साहब से अनुरोध करता हूं कि वे मेरे जैसे कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय न करें। मुझे अपना समर्थन दें।" वहीं, इस पूरे मामले पर देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "हम अमित ठाकरे का समर्थन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का भी यही विचार है। अगर शिवसेना का उम्मीदवार नहीं होता है, तो उनके वोट शिवसेना (यूबीटी) को जाएंगे, इसलिए उम्मीदवार दिया गया है।" उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति का समाधान खोजने के प्रयास किए जाएंगे। फडणवीस ने कहा कि शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के नेताओं ने तर्क दिया कि अगर पार्टी चुनाव नहीं लड़ती है तो उसके समर्पित मतदाता उद्धव सेना में चले जाएंगे। उन्होंने कहा, "भाजपा अमित का समर्थन करने के लिए तैयार थी और अभी भी अपने रुख पर कायम है।" इस बीच सरवणकर ने एकनाथ शिंदे से मुलाकात की और दावा किया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वे माहिम से चुनाव लड़ेंगे। इस बीच, राज ठाकरे ने जोर देकर कहा कि महाराष्ट्र में अगली सरकार महायुति गठबंधन के नेतृत्व में होगी, जिसमें मुख्यमंत्री का पद भाजपा को मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह सरकार मनसे के समर्थन से बनेगी। recent visitors 78

10 फ्री एंड्रॉएड एप्प जो बच्चों के साथ बड़ों को भी आएंगी पसंद

वो कहते हैं न बड़े मियां तो बड़े मियां तो बड़े मियां छोटे मियां सुभान अल्ला आजकल के बच्चों को देखकर कभी-कभी हैरानी होती है। बड़ों की देखा देखी अब बच्चे खिलौनों की जगह गैजेटों से खेलना ज्यादा पसंद करते हैं। फिर वो भले ही आपका स्मार्टफोन हो या फिर टैबलेट, ज्यादातर लोग अब एंड्रॉएड स्मार्टफोन की ओर अपना रुख कर रहंे है, अगर आप अपने बच्चों को ज्यादा समय नहीं दे पाते हैं या फिर खुद कभी बच्चा बनने का मन करता है तो अपने फोन में कुछ मजेदार एप्प डाउनलोड कर सकते हैं, वैसे तो ये एप्लीकेशन खासकर बच्चों के लिए हैं लेकिन आप भी इन एंड्रॉएड एप्लीकेशन को फुल इंज्वाय कर सकते हैं। पंचतंत्र: बचपन में हम सभी ने पंचतंत्र की कहानियां सुनी होंगी। पंचतंत्र की कहानियों में कुछ न कुछ सीख जरूर दी जाती है जो आपके बच्चों के लिए काफी जरूरी है गूगल प्ले स्टोर में पंचतंत्र कई वॉल्यूूम में फ्री डाउनलोडिंग के लिए उपलब्ध है जैसे द विनिंग ऑफ फ्रेंड क्रोज एंड आउल लॉस ऑफ गेन। किड्स नंबर और मैथ लाइट: ये एक फ्री एप्लीकेशन है जो प्री स्कूल में जाने वाले बच्चों की मैक स्किल को डेवल करने में काफी मदद करती है। एप्लीकेशन में कई नंबर और इंग्लिश के शब्द दिए गए हैं इसके साथ स्पेनिश, रशियन जर्मन जैसी भाषाओं की जानकारी भी एप्लीकेशन में मौजूद है। मैथ विद भीम: छोटा भीम भारत में बच्चों के सबसे पॉपुलर शो में से एक है, मैथ विद भीम एप्लीकेशन में छोटा भीम अपने दोस्तों के साथ कई तरह की चीजें बताता है तो 1 साल से लेकर 5 साल तक के बच्चों को पसंद आएंगी। एप्लीकेशन में हिन्दी और इंग्लिश दोनों तरह के लेंग्वेज ऑप्शन मौजूद है। हिन्दी फ्लैश कार्ड: हिन्दी वॉल फ्लैशकार्ड में आपका बच्चा कई तरह के शेप और साउंड के साथ साथ नई वॉक्यूबलरी सीख सकता है। एप्प में कई तरह के एनिमेशन भी दिए गए हैं तो बच्चों के ज्ञान को बढ़ाने में मदद करते हैं। नर्सरी राइम: नर्सरी राइमस एप्प में कई तरह की रिंगटोन दी गईं है जो बच्चों को पसंद आएगी। इसके अलावा कई शब्दों की रिकार्डिंग भी मौजूद है जो बच्चों के विकास में काफी मदद करेंगे। नर्सरी राइमंस (हिन्दी): पिछली एप्लीकेशन की तरह इसमें में आप कई तरह की राइमस डाउनलोड कर सकते हैं लेकिन पिछली एप्पलीकेशन में अंग्रेजी भाषा का ऑप्शन था जबकि इसमें आप हिन्दी में राइमस डाउनलोड कर सकते हैं। किड्स स्टोरी थ्रस्टी क्रो: बचपन में क्रो की स्टोरी तो आप सबने सुनी होगी जिसमें कोवा पानी पीने के लिए घड़े में कंकड़ डालता है और पानी ऊपर आ जाता है। इसी तरह कई और स्टोर को आप किड्स स्टोरी थ्रस्टी क्रो एप्प की मदद से अपने फोन में डाउनलोड कर सकते हैं वो भी बिल्कुल फ्री। अर्थमेटिक फॉर किड: अर्थमेटिक का नाम का सुनकर भले ही हम सब के पसीने छूट जाते हो लेकिन अगर आप अपने बच्चों को अर्थमेटिक के कुछ तरीके फन के साथ सिखाना चाहते हैं तो अर्थमेटिक फॉर किड आपके बच्चों को पसंद आएगी, एप्प में कई तरह की बेसिक मैथ स्किसल दी गईं हैं। किड्स शेप प्री स्कूल: किड्स शेप प्री स्कूमल एप्लीकेशन में आपके बच्चे कई तरह के अलग-अलग शेप डिजाइन कर सकते हैं। फ्रूट शेप कलर वेज फॉर किड: फ्रूट शेप कलर वेज फॉर किड एक एजुकेशनल एप्लीकेशन है जिसमें फलों के रंग उनके आकार से जुड़ी सारी जानकारियां दी गई हैं एप्लीकेशन में कई सीरीज भी दी गई हैं।   recent visitors 141

पैदल चलने पर दुबई में कई लोगों पर लगा हजारों का जुर्माना, पढ़िए आखिर गलती क्या थी?

दुबई दुबई एक ऐसा शहर है जो अपनी चकाचौंध, लग्जरी लाइफस्टाइल, ऊंची-ऊंची इमारतों और बेशुमार दौलत के लिए दुनिया भर में मशहूर है. लेकिन इन सबके अलावा, यह शहर अपने सख्त कानूनों के लिए भी जाना जाता है. कई बार इसके कानून इतने सख्त होते हैं कि जब दूसरे देशों के लोग इसके बारे में सुनते हैं, तो वे हैरान रह जाते हैं. ऐसा ही एक मामला दुबई में ट्रैफिक कानून की सख्ती को लेकर सामने आया है. हैरानी की बात यह है कि जहां आमतौर पर लोग गलत ड्राइविंग या ट्रैफिक नियमों की अनदेखी पर चालान और जुर्माने का सामना करते हैं, वहीं दुबई में पैदल चलने वालों पर भी ट्रैफिक नियमों का सख्त पालन करने का दबाव होता है. गल्फ न्यूज के मुताबिक, दुबई पुलिस स्टेशन ने 37 लोगों को खतरनाक तरीके से सड़क पार करने और ट्रैफिक सिग्नल की अनदेखी करने पर जुर्माना लगाया है. उनके ऊपर 400 यूएई दिरहम का जुर्माना लगाया गया है. ध्यान रखें, नहीं तो लगेगा भारी जुर्माना! इस साल की शुरुआत से अब तक, दुबई के ट्रैफिक कानून के तहत, बिना अनुमति वाली जगह से सड़क पार करने या ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने पर 400 यूएई दिरहम का जुर्माना लगता है. दुबई का कानून जे-वॉकिंगपर सख्त है. जयवॉकिंग यानी बिना अनुमति या निर्धारित स्थान के सड़क पार करना. जब कोई शख्स ट्रैफिक सिग्नल या जेबरा क्रॉसिंग की अनदेखी करके सड़क के बीच से या ऐसी जगह से सड़क पार करता है जहां से क्रॉसिंग की अनुमति नहीं है, तो इसे जयवॉकिंग कहा जाता है. पिछले साल के आंकड़े डराने वाले! दुबई पुलिस ने बार-बार चेतावनी दी है कि जयवॉकिंग के घातक नतीजे हो सकते हैं. पिछले साल, जे-वॉकिंग की वजह से आठ लोगों की मौत हो गई और 339 लोग घायल हुए. गल्फ न्यूज के मुताबिक, 2023 में 44,000 से ज्यादा लोगों पर जे-वॉकिंग का जुर्माना लगा है. दुबई पुलिस ने साफ कहा है कि सड़क पार करते समय यातायात नियमों का पालन करना जरूरी है.उन्होंने लोगों से अपील की है कि वो क्रॉसिंग का सही तरीका अपनाएं और सड़क पर गाड़ियां न होने पर ही सड़क पार करें. बता दें, दुबई ट्रैफिक कोर्ट ने अरब ड्राइवर को ट्रैफिक नियम न मानने पर 2000 यूएई दिरहम का जुर्माना लगाया, जबकि एशियाई पैदल चलने वालों पर बिना अनुमति वाली जगह से सड़क पार करने के लिए 400 यूएई दिरहम  का जुर्माना लगाया है.     recent visitors 88

BJP प्रत्याशी: मेरे जीतने पर पुलिस को ड्राइविंग लाइसेंस दिखाने की जरूरत नहीं, मेरा नाम ही लाइसेंस होगा 

BJP candidate: If I win, there is no need to show driving license to the police, my name will be on the license  लखनऊ । उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले की कुंदरकी विधानसभा सीट पर आगामी उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने रामवीर सिंह ठाकुर को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। रामवीर सिंह ठाकुर ने एक हालिया कार्यक्रम में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए एक खास घोषणा की, जिसमें उन्होंने BJP के पन्ना प्रमुखों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस की आवश्यकता खत्म करने का दावा किया।  रामवीर सिंह ठाकुर ने मंच से अपने समर्थकों से कहा कि उपचुनाव में जीत हासिल करने के बाद BJP के पन्ना प्रमुखों को किसी भी प्रकार का ड्राइविंग लाइसेंस रखने की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने कहा, “BJP के पन्ना प्रमुख की डायरी ही उनका लाइसेंस होगी, और किसी पुलिस अधिकारी की हिम्मत नहीं होगी कि वह उन्हें रोक सके। चुनाव प्रचार में चर्चित बयानबाजी रामवीर सिंह ठाकुर के इस बयान ने चुनाव प्रचार के दौरान हलचल मचा दी है। बीजेपी कार्यकर्ताओं में इस बयान के बाद खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। हालांकि, यह बयान सोशल मीडिया और आम जनता के बीच चर्चाओं का विषय बना हुआ है।  पन्ना प्रमुख की भूमिका BJP के संगठनात्मक ढांचे में पन्ना प्रमुख की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। पन्ना प्रमुख पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर कार्य करते हैं, मतदाताओं से संपर्क बनाए रखते हैं और पार्टी की नीतियों को उन तक पहुंचाते हैं। ठाकुर के इस बयान को पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने के उद्देश्य से देखा जा सकता है। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और चर्चा रामवीर सिंह ठाकुर का यह बयान विपक्षी दलों के निशाने पर भी आ गया है। विपक्षी नेताओं ने इसे कानून के प्रति गैर-जिम्मेदाराना करार दिया है। वहीं, कुछ लोगों ने इसे चुनावी जोश में दिया गया बयान कहा है।  रामवीर सिंह ठाकुर के इस बयान का कुंदरकी उपचुनाव पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा। recent visitors 130

राज्य वन्यजीव विभाग ने बरखेड़ा – बुधनी रेलवे लाइन के निर्माण को पर कई तरह की चिंता जताई

भोपाल मध्य प्रदेश में 2015 से अब तक 14 तेंदुए, सात बाघ और एक भालू की मौत हो चुकी है। अब राज्य वन्यजीव विभाग ने बरखेड़ा और बुधनी के बीच रेलवे लाइन परियोजना के निर्माण को लेकर कई तरह की चिंता जताई है। जिससे पता चलता है कि वन्यजीवों को दुर्घटनाओं से बचाने के लिए किए गए उपायों को ठीक से लागू नहीं किया गया है। 2011-12 में स्वीकृत बरखेड़ा-बुदनी खंड 26.50 किलोमीटर लंबा ट्रैक है जिसे 991.60 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। यह रातापानी वन्यजीव अभयारण्य और टाइगर रिजर्व में आता है। यह रेलवे लाइन तब जांच के घेरे में आई जब 14-15 जुलाई की रात को भोपाल से करीब 70 किलोमीटर दूर मिडघाट के एक फॉरेस्टेड एरिया में ट्रेन की चपेट में आने से तीन बाघ शावक घायल हो गए। चोट लगने की वजह से आखिरकार उनकी मौत हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, रिकॉर्ड से पता चलता है कि वन्यजीव विभाग ने इस साल 6 सितंबर को एक समीक्षा बैठक में रेलवे लाइन के निर्माण के संबंध में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड द्वारा लगाई गई कुछ शर्तों के अनुपालन में खामियों को उजागर किया था। विभाग ने कहा कि 'भारत सरकार से प्राप्त सशर्त अनुमति के तहत लगाई गई शर्तों का एजेंसी (भारतीय रेलवे) द्वारा पूरी तरह से पालन नहीं किया गया।' बैठक के दौरान उठाया गया एक मुख्य मुद्दा अंडरपास का अनुचित निर्माण था, जिसका मकसद वन्यजीवों के लिए सुरक्षित मार्ग प्रदान करना था। विभाग ने कहा कि यह 'अंडरपास लोकल ड्रेनेज सिसटम्स के ऊपर बना हुआ है जो मॉनसून के दौरान पानी से भर जाते हैं, जिससे जानवरों को वैकल्पिक रास्ते तलाशने पड़ते हैं, जो अक्सर उन्हें रेलवे पटरियों पर ले जाते हैं।' रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 'खराब जल निकासी के कारण पटरियों के पास जलभराव वाले क्षेत्र पानी की तलाश में जानवरों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं', जिससे रेल से उनके टकराव का खतरा और बढ़ गया है। बैठक में रेलवे पटरियों से दूर वैकल्पिक जल स्रोतों को विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। बैठक में गति सीमा विवाद भी एक मुद्दा था। विभाग ने कहा कि वन क्षेत्रों से गुजरने वाली ट्रेनों के लिए स्वीकृत गति सीमा '60 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई थी, वहीं रेलवे अधिकारियों द्वारा लगाए गए बोर्ड 75 और 65 किमी प्रति घंटे की गति सीमा दर्शाते हैं', जो निर्धारित सुरक्षा उपायों का स्पष्ट उल्लंघन है। ट्रैक के रखरखाव के मुद्दे पर भी चर्चा की गई। फील्ड स्टाफ, वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों द्वारा संयुक्त निरीक्षण से पता चला कि 'ट्रैक के बीच की घास विजिबिलिटी में बाधा डालती है, जिससे ट्रेन के पायलटों के लिए वन्यजीवों को देखना और जानवरों के लिए आने वाली ट्रेनों से बचना मुश्किल हो जाता है।' recent visitors 95