Friday, July 10, 2026 1:06 pm

राज्योत्सव – 2024 : आदिमजाति विभाग की प्रदर्शनी का मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की प्रशंसा

रायपुर अटल नगर नवा रायपुर स्थित पंडित श्यामाप्रसाद मुखर्जी व्यावसायिक परिसर में आयोजित 24 वां राज्योत्सव में आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग की स्टॉल लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र रहा है। राज्योत्सव प्रारंभ होने के साथ ही लोगों की भारी भीड़ आदिम जाति विकास विभाग की स्टॉल पर देखने को मिला। वहीं दूसरे दिन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी विभागीय स्टॉल का अवलोकन कर प्रशंसा की। इस दौरान उन्होंने स्टॉल में बनाए गए सेल्फी जोन में परिवार संग एक फोटो भी खिचवाई। प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने उनका अभिवादन करते हुए उन्हें प्रदर्शनी के थीम के बारे में विस्तार से बताया। उल्लेखनीय है कि विभागीय मंत्री रामविचार नेताम के निर्देश के अनुसार इस बार की झांकी ’’जनजातीय गौरव शौर्य और संस्कृति का बखान’’ थीम पर बनाई गई थी। प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा एवं सचिव सह आयुक्त नरेन्द्र कुमार दुग्गा स्वयं पूरे स्टॉल की मॉनीटरिंग कर रहे हैं। स्टॉल की खूबसूरती, जनजातीय शौर्य एवं जनजातीय संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन के कारण प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग इसे देखने पहुंच रहे थें। स्टॉल में स्वतंत्रता काल के दौरान छत्तीसगढ़ में हुए जनजातीय विद्रोहों की एक झलक दिखाई गई है, जो कि जनजातीय शौर्य को दर्शाती है। साथ ही जनजातीय समृद्ध संस्कृति को भी झांकी के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। इसके अलावा जनजातियों के परंपरागत आभूषणों एवं विभागीय योजनाओं को भी फ्लैक्स के माध्यम से बखूबी प्रदर्शित किया गया। साथ ही आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा जनजातीय क्षेत्र में किए गए शोध प्रकाशन को भी अवलोकन हेतु प्रदर्शित किया गया। आमजन को आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा चलाई जा रही विभागीय गतिविधियों की जानकारी देने के लिए विभागीय योजनाओं का ब्रोशर भी स्टॉल से उपलब्ध कराया गया। स्टॉल पर जनजातीय गौरव दिवस तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान को सेल्फी जोन के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। स्टॉल में आने वाले लोग उक्त सेल्फी जोन अंतर्गत लिखी हुई जानकारी से जहां उक्त अभियान की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सेल्फी जोन में जाकर फोटो खिंचवाकर इस पल को यादगार बना रहे हैं। recent visitors 53

AMUका अल्पसंख्यक दर्जा रहेगा बरकरार, नए सिरे से निर्धारण के लिए बनाई 3 जजों की बेंच

अलीगढ़ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अल्पसख्यंक दर्जे पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने कहा है कि यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक दर्जे को नए सिरे से तय करने के लिए तीन जजों की एक समिति गठित की गई है. कोर्ट ने 4-3 के बहुमत से यह फैसला सुनाया है. कोर्ट का कहना है कि अब नई बेंच एएमयू को अल्पसंख्यक दर्जा देने के मानदंड तय करेगी. इस मामले पर सीजेआई समेत चार जजों ने एकमत से फैसला दिया है जबकि तीन जजों ने डिसेंट नोट दिया है. मामले पर सीजेआई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा एकमत हैं. वहीं, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा का फैसला अलग है. कोर्ट ने 4-3 के बहुमत से अपने फैसले में 1967 के उस फैसले को खारिज कर दिया है, जो एएमयू को अल्पसंख्यक दर्जा देने से इनकार करने का आधार बना था. कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट ने AMU को अल्पसंख्यक दर्जे की हकदार माना है. कोर्ट ने इस मामले में अपना ही 1967 का फैसला बदल दिया है जिसमें कहा गया था कि AMU अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान का दर्जे का दावा नहीं कर सकती है. अन्य समुदायों को भी इस संस्थान में बराबरी का अधिकार है. यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने दिया है. इस बेंच में 7 जज शामिल थे जिसमें से 4 ने पक्ष में और 3 ने विपक्ष में फैसला सुनाया. इस फैसले को देते हुए मामले को 3 जजों की रेगुलर बेंच को भेज दिया गया है. इस बेंच को यह जांच करनी है कि एएमयू की स्थापना अल्पसंख्यकों ने की थी क्या? सीजेआई ने क्या कहा? सीजेआई ने कहा कि अनुच्छेद 30ए के तहत किसी संस्था को अल्पसंख्यक माने जाने के मानदंड क्या हैं? किसी भी नागरिक द्वारा स्थापित शैक्षणिक संस्थान को अनुच्छेद 19(6) के तहत विनियमित किया जा सकता है. अनुच्छेद 30 के तहत अधिकार निरपेक्ष नहीं है. अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान के विनियमन की अनुमति अनुच्छेद 19(6) के तहत दी गई है, बशर्ते कि यह संस्थान के अल्पसंख्यक चरित्र का उल्लंघन न करे. सीजेआई ने कहा कि धार्मिक समुदाय कोई संस्था स्थापित कर सकता है, लेकिन उसका एडमिनिस्ट्रेशन नहीं कर सकता. एक तर्क ये भी है कि विशेष कानून के तहत जिन संस्थानों की स्थापना हो उनको अनुच्छेद 31 के तहत कंवर्ट नहीं किया जा सकता. क्या है इतिहास और क्या है विवाद? अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना 1875 में सर सैयद अहमद खान द्वारा 'अलीगढ़ मुस्लिम कॉलेज' के रूप में की गई थी, जिसका उद्देश्य मुसलमानों के शैक्षिक उत्थान के लिए एक केंद्र स्थापित करना था. बाद में, 1920 में इसे विश्वविद्यालय का दर्जा मिला और इसका नाम 'अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय' रखा गया. एएमयू अधिनियम 1920 में साल 1951 और 1965 में हुए संशोधनों को मिलीं कानूनी चुनौतियों ने इस विवाद को जन्म दिया. सुप्रीम कोर्ट ने 1967 में कहा कि एएमयू एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी है. लिहाजा इसे अल्पसंख्यक संस्थान नहीं माना जा सकता. कोर्ट के फैसले का अहम बिंदू यह था कि इसकी स्थापना एक केंद्रीय अधिनियम के तहत हुई है ताकि इसकी डिग्री की सरकारी मान्यता सुनिश्चित की जा सके. अदालत ने कहा कि अधिनियम मुस्लिम अल्पसंख्यकों के प्रयासों का परिणाम तो हो सकता है लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं है कि विश्वविद्यालय की स्थापना मुस्लिम अल्पसंख्यकों ने की थी. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2005 में संशोधन को किया खारिज सर्वोच्च अदालत के इस फैसले ने एएमयू की अल्पसंख्यक चरित्र की धारणा पर सवाल उठाया. इसके बाद देशभर में मुस्लिम समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किए जिसके चलते साल 1981 में एएमयू को अल्पसंख्यक का दर्जा देने वाला संशोधन हुआ. साल 2005 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 1981 के एएमयू संशोधन अधिनियम को असंवैधानिक करार देते हुए इसे रद्द कर दिया. 2006 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी. फिर 2016 में केंद्र ने अपनी अपील में कहा कि अल्पसंख्यक संस्थान की स्थापना एक धर्मनिरपेक्ष राज्य के सिद्धांतों के विपरीत है. साल 2019 में तत्कालीन CJI रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने मामले को सात जजों की बेंच के पास भेजा था, जिस पर आज फैसला आया है.   recent visitors 59

गुना में 10 साल की मासूम से दुष्कर्म, जंगल में बेसुध मिली, भोपाल किया रेफर

गुना मध्य प्रदेश के गुना जिले के म्याना इलाके में 10 साल की बच्ची से रेप का मामला सामने आया है। बच्ची अपनी मां के साथ बाजार गई थी। इसी दौरान एक अज्ञात व्यक्ति ने उसकी मां को दुकान से कम पैसे वापस मिलने का कहकर बातों में लगाया और पैसे दिलवाने का भरोसे देकर बच्ची को अपने साथ ले गया। रात लगभग 9:30 बजे बच्ची जंगल में बेसुध हालत में मिली। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में बच्ची को गंभीर हालत में भोपाल रेफर किया गया है। पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है। सिरसी थाना प्रभारी को सूचना मिली कि एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म हुआ है। सूचना मिलते ही सिरसी थाने की टीम मौके के लिए रवाना हुई। जहां घटना हुई वहां म्याना थाना क्षेत्र में आता है, इसलिए म्याना पुलिस को भी सूचना दी गई। बच्ची को तत्काल इलाज के लिए जिला अस्पताल रवाना किया गया। डॉक्टर धीरेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि बच्ची की हालत बहुत अधिक गंभीर है, ऑपरेशन हो गया है। फिलहाल अभी इस मामले में कुछ नहीं कहा जा सकता। बच्ची के पिता ने बताया कि मां-बेटी मक्का बेचने और गेहूं पिसवाने के लिए बाजार गईं थी। फसल बेचने के बाद एक दुकान से उसने गेहूं पिसवाया। इसके बाद दोनों घर लौट रहीं थी। इसी दौरान बीच रास्ते में एक अज्ञात व्यक्ति मिला। उसने मेरी पत्नी से कहा कि दुकानदार ने तुम्हें 100 रुपए कम लौटाए हैं। इसमें 100 रुपए कम हैं। तुम चलो या बच्ची को भेज दो, मैं पैसे दिलवा देता हूं। पिता के मुताबिक अज्ञात व्यक्ति की बातों में आकर उसकी पत्नी ने बेटी को पैसे लाने उसके साथ भेज दिया। वह व्यक्ति बच्ची को बाइक में बैठाकर जंगल ले गया। वहां बच्ची के साथ रेप किया। जब वह काफी देर तक नहीं लौटा, तो पिता ने अपने कुछ परिचितों को बुलाया और बच्ची की तलाश की। लगभग दो घंटे तलाश करने के बाद बच्ची उमरी क्षेत्र में जंगल में बेसुध हालत में मिली। उसके जिस्म पर कपड़े नहीं थे। नाबालिग के प्राइवेट पार्ट से ब्लीडिंग हो रही थी। मौके से ही पुलिस को सूचना दी गई। एसडीओपी विवेक अस्थाना ने बताया कि अज्ञात व्यक्ति की तलाश में थाना प्रभारी म्याना, थाना प्रभारी सिरसी, बमोरी थाने का बल और उमरी चौकी का बल लगाया गया है। बच्ची को भोपाल रेफर कर दिया गया है। आरोपी के बारे में पता लगाया जा रहा है। recent visitors 51

CM सुक्खू का ‘समोसा’ सुरक्षाकर्मियों ने कैसे खाया , हिमाचल CID ने शुरू की जांच; क्या है पूरा मामला

शिमला हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के लिए बनाए गए समोसे और केक उनके सुरक्षा कर्मचारियों को परोस दिए गए. इसके बाद विवाद खड़ा हो गया और सीआईडी ​​जांच की जरूरत पड़ गई. इस मामले को "सरकार विरोधी" कृत्य बताया गया. सीआईडी ​​में एक उच्च पद पर काम करने वाले अधिकारी ने 21 अक्टूबर की घटना पर कहा, "जब मुख्यमंत्री CID ​​मुख्यालय का दौरा कर रहे थे, तो जिम्मेदार लोगों ने अपने एजेंडे के मुताबिक काम किया." एजेंसी के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर हमला करते हुए विपक्षी बीजेपी ने कहा कि सुक्खू सरकार को राज्य के विकास की चिंता नहीं है, बल्कि लगता है कि उसकी एकमात्र चिंता "मुख्यमंत्री का समोसा" है. यह हंगामा तब शुरू हुआ जब लक्कड़ बाजार (Lakkar Bazaar) के होटल रेडिसन ब्लू से तीन डिब्बे लाए गए, जिन्हें मुख्यमंत्री को परोसा जाना था, जो एक समारोह में भाग लेने के लिए CID ​​मुख्यालय गए थे. हालांकि, डिप्टी एसपी रैंक के अधिकारी द्वारा की गई जांच रिपोर्ट के मुताबिक, खाने की चीजें सीएम के सुरक्षा कर्मचारियों को परोसी गई थीं. अधिकारियों ने क्या बताया? रिपोर्ट में कहा गया है कि IG रैंक के एक अधिकारी ने पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर (SI) को सीएम के दौरे के लिए होटल से कुछ खाने-पीने की चीजें लाने के लिए कहा था. एसआई ने बदले में एक सहायक एसआई (ASI) और एक हेड कांस्टेबल को जलपान लाने का निर्देश दिया. ASI और हेड कांस्टेबल ने होटल से तीन सीलबंद बक्सों में जलपान लाया और SI को जानकारी दी. पुलिस अधिकारियों ने अपने बयान में कहा, "जब उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद पर्यटन विभाग के कर्मचारियों से पूछा कि क्या तीनों बक्सों में रखे नाश्ते मुख्यमंत्री को परोसे जाने थे, तो उन्होंने कहा कि ये मेन्यू में शामिल नहीं थे." जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल एसआई को ही इस बात की जानकारी थी कि तीनों डिब्बे सुक्खू के लिए थे. जिस महिला इंस्पेक्टर को फूड आइटम्स सौंपी गई थी, उसने किसी सीनियर अधिकारी से पूछे बिना ही जलपान को मैकेनिकल ट्रांसपोर्ट (MT) अनुभाग में भेज दिया, जो जलपान से संबंधित है. इस प्रोसेस में जलपान के तीन डिब्बे कई लोगों के हाथों में गए. दिलचस्प बात यह है कि CID ​​विभाग के एक हाई रैंक अधिकारी ने अपने बयान में कहा है कि जांच रिपोर्ट में नामित सभी लोगों ने सीआईडी ​​और सरकार विरोधी तरीके से काम किया है, जिसके कारण VVIP को सामान नहीं दिया जा सका. नोट में कहा गया है कि उन्होंने अपने एजेंडे के मुताबिक काम किया. इस विवाद ने बीजेपी को सुक्खू सरकार पर निशाना साधने का मौका दे दिया है. सुक्खू सरकार पर बीजेपी का तंज बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता रणधीर शर्मा ने गुरुवार को यहां जारी बयान में कहा, "राज्य सरकार को सूबे के विकास की कोई चिंता नहीं है और उसकी एकमात्र चिंता 'मुख्यमंत्री का समोसा' है." उन्होंने कहा कि सुक्खू के लिए लाए गए समोसे से जुड़ी हालिया घटना ने विवाद को जन्म दिया है. उन्होंने कहा कि जांच में इस गलती को "सरकार विरोधी" कृत्य बताया गया, जो कि बहुत बड़ा शब्द है. बीजेपी प्रवक्ता ने आगे कहा कि यह घटना हिमाचल प्रदेश के सियासी हलकों में चर्चा का मुद्दा बन गई है. वास्तव में मुख्यमंत्री जैसे VVIP से जुड़े कार्यक्रम में इस तरह की समन्वय समस्याओं के कारण सरकारी मशीनरी शर्मिंदा है. क्यों समोसे पर शुरू हुई जांच अपनी जांच रिपोर्ट में डीएसपी विक्रम चौहान ने लिखा है कि आईजी द्वारा सब-इंस्पेक्टर को खाने की चीजें लाने को कहा गया था उन्होंने अपने बजाय एक सहायक सब-इंस्पेक्टर और एक हेड कांस्टेबल को इसे लाने का निर्देश दिया। एएसआई और हेड कांस्टेबल होटल से तीन सीलबंद बॉक्स में स्नैक्स लाए और एसआई को इसके बारे में सूचित किया। जिन पांच पुलिसकर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, उनमें से कम से कम दो ने जांच अधिकारी को बताया कि जब उन्होंने ड्यूटी पर तैनात पर्यटन विभाग के कर्मचारियों (जो आमतौर पर मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में स्नैक्स परोसते हैं) से पूछा कि क्या तीनों बॉक्स में रखा नाश्ता मुख्यमंत्री को परोसा जाना हैं, तो उन्हें बताया गया कि ये उनके फूड मेन्यू में नहीं हैं। इसके बाद, जिस महिला इंस्पेक्टर को बॉक्स सौंपे गए थे, उसने वरिष्ठ अधिकारी से परामर्श किए बिना ही उसे मैकेनिकल ट्रांसपोर्ट सेक्शन को दे दिया, जिसे रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था करने का काम सौंपा गया था। एक पुलिस कर्मी ने डीएसपी चौहान को बताया कि उसे आईजी कार्यालय में बैठे 10-12 लोगों को फूड मैटेरियल परोसने को कहा गया था, इसलिए उसने उन्हें वह परोस दी। जांच रिपोर्ट में पांचों पुलिस अधिकारियों पर आरोप लगाने के अलावा उन पर 'सीआईडी ​​विरोधी' और 'सरकार विरोधी तरीके' से, 'अपने खुद के एजेंडे के अनुसार' काम करने का आरोप लगाया गया है, जिससे वीआईपी लोगों को रिफ्रेशमेंट से वंचित रखा गया। सुक्खू के एक करीबी सहयोगी ने कहा 'कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के कारण सुक्खू के खाने में समोसे, पकौड़े आदि शामिल नहीं हैं। उन्हें ऑयली चीजों से परहेज करने को कहा गया है। यह तथ्य लगभग हर सरकारी कार्यालय, विभाग को पता है जो उन्हें आमंत्रित करता है।'   recent visitors 96

नगर घुवारा में DAP खाद की कालाबाज़ारी से ग्रामीण किसान परेशान

नगर घुवारा में DAP खाद की कालाबाज़ारी से ग्रामीण किसान परेशान किसानों को लगातार कालाबाजारी का सामना करना पड़ रहा है घुवारा DAP खाद की कालाबाजारी का मामला फिर से उभरकर सामने आया है जहां 1500 रुपये में मिलने वाली DAP खाद की बोरी यहां 1800 रुपये तक में बेची जा रही है, जिससे किसानों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। किसानों के लिए DAP खाद एक आवश्यक तत्व है, जिसका उपयोग फसलों की उर्वरकता बढ़ाने के लिए किया जाता है। इस खाद की महंगी दरों पर बिक्री से किसानों को फसल लागत में बढ़ोतरी और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। आपको बता दें कि किसानों में इस काला बाजारी को लेकर काफी आक्रोश है। उनका कहना है कि फसल उत्पादन में अत्यधिक लागत लग रही है, और ऐसी कालाबाजारी के चलते उनकी मेहनत पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है। recent visitors 73

नाबालिग से छेड़छाड का आरोपी चढ़ा कोतवाली पुलिस के हत्थे

सिंगरौली  बस स्टैण्ड वैढ़न में नाबालिग बालिका के साथ छेड़छाड़ के आरोपी को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार करने में सफलता अर्जित किया है दिनांक 06.11.2024 को पीड़िता की मां द्वारा आरोपी झिट्टू प्रजापति के विरूद्ध अपनी 12 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ बस स्टैण्ड बैढ़न में छेडछाड़ करने सबंधी रिपोर्ट करने पर थाना बैढन मे आरोपी के विरूद्ध 74,78 बीएनएस, 7,8,11,12 पाक्सो एक्ट की धारा का अपराध पंजीबद्ध कर घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल पुलिस टीम रवाना कर आरोपी झिट्टू प्रजापति पिता रंगलाल प्रजापति उम्र 20 वर्ष निवासी चिटनिया थाना जियावन जिला सिंगरौली (म.प्र.) को गिरफ्तार किया जाकर माननीय न्यायालय पेश किया गया है। उक्त कार्यवाही में निरी. अशोक सिंह परिहार, उनि अभिषेक पाण्डेय, उनि रूपा अग्निहोत्री सउनि सजीत सिंह, सउनि उमेश द्विवेदी, मप्रआर 59 शकुन्तला यादव प्रआर 434 अवधलाल सोनी, प्रआर अंकित सिंह, आर. 32 संजू धुर्वे, आर 781 अखिलेश का सराहनीय योगदान रहा। recent visitors 71

बैरागढ़ के कपड़ा मार्केट में लगी आग, बैरागढ़ में 3 दुकानें खाक, फ्लैट में रखा सामन भी जला

भोपाल राजधानी भोपाल में शुक्रवार तड़के आगजनी की बड़ी घटना हो गई। भोपाल के सबसे बड़े कपड़ा मार्केट बैरागढ़ में 3 दुकानें और एक फ्लैट आग की चपेट में आ गया। आग इतनी भीषण थी कि चंद मिनटों में लाखों रुपए का सामान जलकर खाक हो गया। आग की लपटें फर्स्ट फ्लोर पर रह रहे परिवार तक पहुंच गईं। कोई जनजानि तो नहीं हुई, लेककिन गृहस्थी का सामान जलकर राख हो गया है। भोपाल के बैरागढ़ (संत हिरदाराम नगर ) आगजनी की यह घटना शुक्रवार सुबह 5 बजे हुई है। सूचना मिलते ही बैरागढ़, फतेहगढ़ और गांधीनगर फायर स्टेशनों से आधा दर्जन दमकल वाहन मौके पर पहुंचे और करीब डेढ़ घंटे मशक्कत कर आग बुझाई। फिलहाल, घटना की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। खाली था फर्स्ट फ्लोर बैरागढ़ मेन मार्केट में सुरेश इलेक्ट्रिक के पास स्थित जिस बहु मंजिला इमारत में आग लगी है। उसके ग्राउंड फ्लोर में कपड़े की रिटेल दुकानें और ऊपरी मंजिल में परिवार रहता है। सेकंड फ्लोर खाली था। आग पहले एक कपड़ा दुकान में आग लगी और बाद में आसपास की दो अन्य दुकनों को चपेट में ले लिया। फिर फर्स्ट फ्लोर तक पहुंच गई। गनीमत रही कि यह फ्लैट खाली था। जिस कारण कोई जनहानि नहीं हुई। बैरागढ़ में 400 से अधिक दुकानें सुबह 7 बजे तक आग पर काबू पाया जा सका। बैरागढ़ भोपाल का सबसे बड़ा कपड़ा मार्केट है। यहां थोक और रिटेल की 400 से अधिक दुकानें हैं। जिन दुकानों में आग लगी है, ठीक उसके पीछे कपड़ की थोक दुकानें हैं। समय रहते आग पर काबू न पाया जाता तो मुश्किल हो सकती थी।  राजधानी के संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) में मेन रोड पर स्थित एक कपड़ा दुकान में शुक्रवार तड़के अचानक आग लग गई। थोड़ी ही देर में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और आसपास स्थित दो दुकानों के अलावा बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर पर बने फ्लैट को भी अपनी चपेट में ले लिया। सूचना मिलने पर बैरागढ़, फतेहगढ़, गांधीनगर समेत अन्य फायर स्टेशनों से करीब एक दर्जन दमकलों को मौके पर रवाना किया गया, जिन्होंने करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया। आग से करीब एक करोड रुपए के नुकसान का अनुमान है। डीपी से उठी चिंगारियां जानकारी के अनुसार आग मोहिनी टेक्सटाइल की दुकान से शुरू हुई। इस दुकान के बाहर बिजली कंपनी की डीपी लगी हुई है। बताया जा रहा है कि वहीं से पहले चिंगारियां उठीं और आग लग गई। कपड़ा व्यापारी संघ के अध्यक्ष कन्हैया इसरानी ने बताया कि आग लगने के बाद बिजली कंपनी के अधिकारियों को सूचना दी गई, लेकिन कोई भी तत्काल मौके पर नहीं पहुंचा। इस कारण आग फैल गई और आसपास की दो दुकानों में भी पहुंच गई। रिद्धि-सिद्धि टेक्सटाइल एवं वाहेगुरु टेक्सटाइल की दुकान में रखा कपड़ा भी आग से जल गया। कपड़ों का थोक बाजार आग इतनी भीषण थी कि नगर निगम की दमकलों को आग बुझाने में काफी मशक्कत का सामना करना पड़ा। नेहरू क्लॉथ मार्केट स्थित इस बाजार में 100 से अधिक कपड़े की दुकानें है। यदि तत्काल आप पर काबू नहीं पाया जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था। दुकान के ऊपर रहवासी फ्लैट भी बने हैं। एक फ्लैट में भी आग पहुंची, हालांकि कोई जनहानि की सूचना नहीं है। कपड़ा बाजार के निकट सुरेश इलेक्ट्रिकल की दुकान भी है। समय पर आग बुझाने के कारण इस लाइन में आग नहीं पहुंच सकी।   recent visitors 162