Friday, July 10, 2026 4:39 am

ट्रंंप 2.0 के साथ समझौतें ‘मेक इन इंडिया-मेक फॉर द वर्ल्ड’ की भावना के अनुरूप होगा

नई दिल्ली  भारत और अमेरिका के बीच बड़े समझौतों की तैयारी है। 20 जनवरी, 2025 को डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में दूसरी बार शपथ लेने के बाद, मोदी सरकार सेमीकंडक्टर, मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर जैसे क्षेत्रों में बड़े सौदे कर सकती है। यह 'मेक इन इंडिया-मेक फॉर द वर्ल्ड' की भावना के अनुरूप होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत में रोजगार पैदा होंगे, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा और अमेरिकी व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा। कोविड महामारी और अमेरिका-चीन संबंधों में खटास के बाद, कई अमेरिकी कंपनियों ने भारत में अपने कारखाने स्थापित किए हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यहां निर्माण क्षेत्र में और अधिक संभावनाएं हैं। भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के जानकार एक वरिष्ठ विशेषज्ञ ने बताया कि ट्रंप 2.0 के शुरुआती दौर में ही भारत को कुछ बड़े सौदों को अंतिम रूप देने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच अच्छी केमिस्ट्री को देखते हुए यह सही समय होगा। कंज्यूमर यूनिटी एंड ट्रस्ट सोसाइटी (CUTS) के महासचिव प्रदीप मेहता ने भारत-अमेरिका संबंधों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। मेहता ने विनिर्माण क्षेत्र में अमेरिका की ताकत का लाभ उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इससे अमेरिका भारत में उत्कृष्टता केंद्र और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर खोल सकेगा। एक्सपर्ट ने क्या सुझाव? मेहता ने सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद यह संदेश देना चाहिए कि भारत कोई संरक्षणवादी देश नहीं है जो अमेरिकी उत्पादों पर ऊंची दरें लगाता है। 2020 में, ट्रंप ने आयातित मोटरसाइकिलों, खासकर हार्ले-डेविडसन पर ऊंची दरों को लेकर भारत पर हमला किया था। तत्कालीन राष्ट्रपति ने कहा था कि भारत में शायद दुनिया में सबसे ज्यादा टैरिफ हैं और हार्ले-डेविडसन को भारत में भारी टैरिफ का भुगतान करना पड़ता है। उन्होंने मार्च 2017 में अमेरिकी कांग्रेस को अपने संबोधन में पहली बार इस मुद्दे का उल्लेख किया था। 'अमेरिका फर्स्ट' नीति से भारत को होगा नुकसान? ट्रंप के फिर से अमेरिका का राष्ट्रपति बनने से भारत के लिए मुश्किलें भी खड़ी हो रही हैं। भारत से जाने वाले सामानों पर ज्यादा टैक्स लग सकता है, खासकर गाड़ियों, कपड़ों और दवाइयों पर। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि ट्रंप 'अमेरिका फर्स्ट' नीति में यकीन रखते हैं। लेकिन, एक अच्छी खबर यह है कि ट्रंप समझौता भी कर लेते हैं। भारत, ट्रंप की टीम से बात कर रहा है ताकि उनकी आर्थिक नीतियों को समझा जा सके और कोई रास्ता निकाला जा सके। recent visitors 80

माया विश्वकर्मा संघर्ष, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की जीवन्त मिसाल बन गई

भोपाल संघर्षों से तपकर जिंदादिली से खुद का वजूद बनाने की यह कहानी सागर जिले की है। रहली ब्लॉक के एक छोटे से गांव धनगुंवा की रहने वाली श्रीमती माया विश्वकर्मा संघर्ष, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की जीवन्त मिसाल बन गई हैं। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति हमेशा कमजोर ही रही। माया और उनके पति दिहाड़ी पर मेहनत-मजदूरी से बमुश्किल अपनी रोजी-रोटी का इंतजाम करते थे। इन मुश्किल हालातों के बीच माया को सरकार की मदद मिली, जिससे उनके जीवन का पूरा परिदृश्य ही बदल गया। माया ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित समूह के बारे में सुना। उन्हें पता चला कि इस योजना से ग्रामीण क्षेत्र के गरीब परिवारों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलती है, ताकि वे खुद का रोजगार शुरू कर अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं। माया के लिए यह उम्मीद की किरण थी। उन्होंने इससे जुड़ने का निर्णय लिया और समूह में शामिल हो गईं। समूह की मदद से उन्हें बैंक से ऋण मिला। माया ने इस राशि से एक छोटी सी मनिहारी की दुकान खोल ली। शुरुआत में यह दुकान बहुत साधारण थी, लेकिन उन्होंने अपना काम बड़ी ईमानदारी और मेहनत से किया। मेहनत ने रंग लाना शुरू किया और दुकान से प्राय: 500-600 रूपये रोजाना आमदनी होने लगी। माया का आत्मविश्वास बढ़ा, और उन्होंने इस व्यवसाय को और बढ़ाने का फैसला किया। कुछ समय बाद उन्होंने अपनी दुकान में सभी प्रकार का किराना सामान और फोटो कॉपियर मशीन भी रख ली। इससे उनकी आय बढ़ने लगी। अब उनकी आमदनी लगभग दोगुनी हो चुकी थी। माया का जीवन अब पहले से कहीं बेहतर था। उन्होंने अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में दाखिल करवाया, ताकि उनका भविष्य उज्जवल हो सके। कड़ी मेहनत ने माया को आत्मनिर्भर बना दिया और अब वे अपने परिवार को पहले से बेहतर जीवन देने में समर्थ होने लगीं। माया ने अपने सपनों को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। धीरे-धीरे उन्होंने अपने घर को पक्का बनाया। मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान भी शुरू की और जब जमापूंजी बढ़ गई, तो एक स्कूल मैजिक वाहन भी खरीद लिया। अब तो माया के दिन ही बदल गये हैं। अब वो अपने गांव के आत्मनिर्भर महिला के रूप में जानी-पहचानी जाती हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने माया विश्वकर्मा जैसे लाखों परिवारों को आत्मनिर्भर बनने का मौका दिया है। माया गर्व से कहती हैं कि आजीविका मिशन की मदद से उनका परिवार अब सुरक्षित और खुशहाल है। माया का मानना है कि……. जिंदगी जब दर्द दे, तो बड़ी ही खामोशी से पी जाना चाहिए… और जब गुल दे, तो गुलशन की तरह बाअदब जी जाना चाहिए… recent visitors 84

मध्य प्रदेश में अनूठी पहल: डॉग संरक्षण को लेकर प्रदेश में लगायें जा रहें डॉग मेला 

Unique initiative in Madhya Pradesh: Dog fairs are being organised in the state for the protection of dogs  भोपाल । जबलपुर में एक राष्ट्रीय स्तर का डॉग शो हो रहा है. इसमें देश भर से 350 डॉग्स और उनके पालक हिस्सा ले रहे हैं. आयोजकों का कहना है कि इस आयोजन में कुछ डॉग्स 1000 किलोमीटर दूर से भी सफर तय करके पहुंच रहे हैं. कुत्तों की अलग-अलग प्रजातियों को जज करने के लिए भारत के दो और ऑस्ट्रेलिया से एक जज भी आए हुए हैं. यह शो जबलपुर में 9 नवंबर और 10 नवंबर को आयोजित किया जाएगा. शो में 350 डॉग्स होंगे शामिल जबलपुर में एक केनाल शो आयोजन किया जा रहा है. इस केनाल शो में भारत में पाई जाने वाली लगभग 35 देसी और विदेशी प्रजातियों के साढे़ 300 डॉग्स आ रहे हैं. इस दौरान इन्हें पालने वाले भी जबलपुर पहुंच रहे हैं. यह आयोजन जबलपुर के स्पोर्ट क्लब में हो रहा है. इन डॉग्स को दो दिनों तक जबलपुर में रखा जाएगा. जबलपुर में एक कैनल सोसाइटी है, जो इस शो का आयोजन करती है. इस समिति के सेक्रेटरी डॉ. अंकुर चौधरी ने बताया, ”इस शो में पहली बार एक ऑस्ट्रेलियन शेफर्ड डॉग शामिल हो रहा है, जो जमशेदपुर से जबलपुर आ रहा है. प्रयागराज से रामपुर हट प्रजाति के डॉग्स आ रहे हैं. इसके साथ ही एक बार फिर दक्षिण भारत की राजापलायम ब्रीड के डॉग्स भी इसमें शामिल होंगे. डॉग शो में हर कुत्ते को किया जाएगा जज इस डॉग शो में हर डॉग को जज भी किया जाएगा. यह जजमेंट बहुत बारीक होता है और इसके विशेष जज होते हैं. भारत में पंजाब के योगेश टुटेजा डॉग्स के बड़े जानकार माने जाते हैं. उन्होंने देश-विदेश के कई डॉग शो में जजमेंट दिए हैं. योगेश टुटेजा का कहना है, ”कुत्ता पालना एक साधना की तरह है, जब हम किसी ब्रीड का सिलेक्शन करते हैं तो हमें यह जानकारी होनी चाहिए कि इसके डॉग्स किस काम में आते हैं. हम उन्हें घर के अंदर पालना चाहते हैं या घर के बाहर. इसके साथ ही डॉग उसकी प्रजाति में कितना प्योर है, इसका भी जजमेंट किया जाता है. विदेशों में बढ़ रही है भारतीय कुत्तों की मांग योगेश टुटेजा ने आगे बताया, ”इसके साथ ही कुत्ते की तंदुरुस्ती और उसके अनुशासन को भी परखा जाता है. इसी के आधार पर यह तय किया जाता है कि कौन सा डॉग स्पेशल है और कौन सा डॉग नॉर्मल है.” पहले हमारे समाज में कुत्ते जरूरत के लिए पाले जाते थे, लेकिन अब यह शौक बन गया है. ऐसे डॉग शो कुत्ते पालने के शौकीन लोगों के लिए सीखने का अच्छा मौका होते हैं. अच्छी बात यह है कि विदेशी नस्ल के साथ-साथ भारतीय नस्ल के कुत्तों को भी लोग शौक से पाल रहे हैं और केवल देश ही नहीं विदेशों में भी इन कुत्तों की मांग बढ़ी है. recent visitors 160

20 नवंबर को BSE और NSE में नहीं होगा कारोबार, शेयर मार्केट का कामकाज रहेगा रहेगा बंद

मुंबई भारतीय शेयर बाजारों में आने वाली 20 नवंबर 2024 को बुधवार के दिन छुट्टी रहेगी और स्टॉक मार्केट में बीएसई और एनएसई पर कोई कामकाज नहीं होगा. शेयर बाजार में अवकाश का ऐलान महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के उपलक्ष्य में किया गया है. शेयर बाजार ने इस बात की आधिकारिक जानकारी दे दी है. करेंसी मार्केट और कमोडिटी एक्सचेंज पर भी कारोबारी अवकाश स्टॉक मार्केट के दोनों एक्सचेंज यानी बीएसई और एनएसई पर शेयर बाजार में अवकाश रहेगा और इस दिन महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के चलते एक्सचेंज पर कामकाज नहीं होगा. करेंसी मार्केट और कमोडिटी एक्सचेंज पर भी कारोबार का अवकाश रहेगा. 20 नवंबर को मुंबई में राजनीतिक हलचल के चलते व्यस्त रहेंगे मुंबईकर इसी दिन झारखंड विधानसभा चुनाव भी होंगे और उत्तर प्रदेश के 9 विधानसभा उपचुनाव का ऐलान हो चुका है. वैसे शेयर बाजार में छुट्टी इसलिए दी गई है कि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई जहां से स्टॉक एक्सचेंज संचालित होते हैं, वहां चुनावी दिन है. महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में 20 नवंबर को राजनीतिक हलचल रहेगी और इसी कारण से वित्तीय कामकाज को थोड़ा विराम देने की कोशिश की गई है जिससे सभी मुंबईकर और महाराष्ट्र के वासी अपने मतदान के अधिकार का प्रयोग कर सकें. recent visitors 84

MP में हाथियों को भी लगाया जाएगा सैटेलाइट कॉलर, जानें क्या है पूरा प्लान

भोपाल मध्य प्रदेश में चीते और बाघ की तर्ज पर अब हाथियों को भी सैटेलाइट कॉलर लगाये जायेंगे. सैटेलाइट कॉलर लगाने से हाथियों की लोकेशन का पता चल सकेगा. वन विभाग के एपीसीसीएफ एल. कृष्णमूर्ति ने बताया कि हाथी झुंड में रहते हैं. इसलिए सैटेलाइट कॉलर झुंड के किसी एक हाथी को लगाई जाएगी. इसकी मॉनिटरिंग कॉरिडोर वाले जिलों के डीएफओ और वाइल्ड लाइफ मुख्यालय स्थित कंट्रोल कमांड सेंटर से होगी. उन्होंने बताया कि हाथियों की लोकेशन पता करने के लिए नई व्यवस्था की जा रही है. यदि हाथी गांव की तरफ जाते हैं तो उन्हें मैनेज कर जंगल की तरफ हांका जाएगा. सैटेलाइट कॉलर लगाने के लिए कर्नाटक वाइल्ड लाइफ मुख्यालय ने स्वीकृति दे दी है. बताया जा रहा है कि कर्नाटक में इस तरह के प्रयोग हो रहे हैं. गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में लगभग 160 हाथी हैं. आंकड़ों के मुताबिक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 70 हाथी हैं. वहीं, संजय डुबरी नेशनल पार्क में 25 हाथियों का डेरा है. हाथियों को मैनेज करने का गुर सीखने अधिकारियों का दो दल मैसूर और कोयम्बटूर जाएगा. अब हाथियों को लगाये जायेंगे सैटेलाइट कॉलर दोनों दलों में कान्हा, संजय दुबरी, बांधवगढ़, उमरिया, मंडला, सीधी, शहडोल, अनूपपुर, मंडला सहित अन्य हाथी कॉरिडोर और प्रभावित इलाकों के डीएफओ शामिल हैं. सैटेलाइट कॉलर लगाने से जंगल के पास रहने वाली आबादी को बड़ी राहत मिलेगी. जंगली हाथी के गांव की तरफ जाने पर मैनेज कर जंगल की तरफ हांक दिया जाएगा. वन विभाग की तरफ से लोगों को भी जागरूक करने का काम किया जाएगा. बता दें कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 10 हाथियों की रहस्मयी मौत के बाद मध्य प्रदेश सरकार भी गंभीर है. हाथियों की मौत ने मध्य प्रदेश के वन्य प्राणियों की  सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के 10 हाथियों की मौत मामले फॉरेंसिक रिपोर्ट आ गयी है.  recent visitors 74

‘जिम में हो महिला ट्रेनर, पुरुष दर्जी नहीं ले सकेंगे महिलाओं का नाप’, बढ़ाई जाएगी महिलाओं की सुरक्षा

लखनऊ उत्तर प्रदेश महिला आयोग ने महिलाओं की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। आयोग ने प्रस्ताव दिया है कि कपड़ों की दुकानों पर महिला कर्मचारियों का होना अनिवार्य किया जाए ताकि महिलाएं सहज महसूस कर सकें। पुरुष दर्जी महिलाओं के कपड़े का नाप न लें। इसी तरह जिम और योगा केंद्रों में महिला प्रशिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य की जाए। ताकि महिलाएं सुरक्षित महसूस कर सकें। इसके अलावा आयोग ने सुझाव दिया है कि स्कूल बसों में भी महिला सुरक्षा कर्मियों की नियुक्ति की जाए। 28 अक्टूबर को हुई इस बैठक में यह प्रस्ताव रखा गया। जिसमें वर्तमान आयोग अध्यक्ष बबिता चौहान के साथ उपाध्यक्ष अपर्णा यादव और चारू चौधरी भी मौजूद थीं। आयोग का मानना है कि इस प्रकार के बदलाव से महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी और उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर अधिक सुरक्षा मिलेगी। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग एक वैधानिक निकाय है जिसका उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकना और उनके कल्याण को बढ़ावा देना है। आयोग समय-समय पर महिला सुरक्षा के विभिन्न मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने और महिला अधिकारों के बारे में जनता को सूचित करने के लिए सक्रिय कदम उठाता है। महिला आयोग द्वारा सुझाए गए प्रस्ताव?     महिला जिम/योगा सेन्टर में, महिला ट्रेनर होनी चाहिए। ट्रेनर एवं महिला जिम का सत्यापन अवश्य करा लिया जाए।     महिला जिम/योगा सेन्टर में प्रवेश के समय अभ्यर्थी के आधार कार्ड/निर्वाचन कार्ड जैसे पहचान पत्र से सत्यापन कर उसकी छायाप्रति सुरक्षित रखी जाए।     महिला जिम/योगा सेन्टर में डी.वी.आर. सहित सी.सी.टी.वी. सक्रिय दशा में होना अनिवार्य है।     विद्यालय के बस में महिला सुरक्षाकर्मी अथवा महिला टीचर का होना अनिवार्य है।     नाट्य कला केन्द्रों में महिला डांस टीचर एवं डी.वी.आर सहित सक्रिय दशा में सी.सी.टी.वी. का होना अनिवार्य है।     बुटीक सेन्टरों पर कपड़ों की नाप लेने हेतु महिला टेलर एवं सक्रिय सी.सी.टी.वी. का होना अनिवार्य है।     जनपद की सभी शिक्षण संस्थाओं का सत्यापन होना चाहिए।     कोचिंग सेन्टरों पर सक्रिय सी.सी.टी.वी. एवं वाशरूम आदि की व्यवस्था अनिवार्य है।     महिलाओं से संबंधित वस्त्र आदि की ब्रिकी की दुकानों पर महिला कर्मचारी का होना अनिवार्य है। पिछले महीने बबिता को मिली थी अध्यक्ष पद की कमान इस समय बबिता चौहान यूपी महिला आयोग की अध्यक्ष हैं. मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव और चारू चौधरी उपाध्यक्ष हैं. योगी सरकार ने पिछले महीने पिछले महीने राज्य महिला आयोग का गठन करते हुए एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष और 25 सदस्यों के नामों की घोषणा की थी. बबीता को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई. इससे पहले बबिता बीजेपी महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रही थीं. बबिता चौहान के अध्यक्ष बनने के बाद यह यूपी महिला आयोग का यह सुझाव महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है. इस सुझाव की खास चर्चा भी की जा रही है. उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग एक वैधानिक निकाय है. इसकी स्थापना राज्य में महिलाओं के विरुद्ध अपराध से संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए की गई है. इसका उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना है. आयोग समय-समय पर राज्य में महिला-आधारित कानून के बारे में जनता को जागरूक करता है और इसके लिए खास कदम उठाता है.   recent visitors 66

पेटीकोट -सलवार का नाड़ा टाइट बांधने से महिलाओं में हो रहा ‘साड़ी कैंसर’, डॉ. से जानें इसके लक्षण

नईदिल्ली आजकल कैंसर कई लोगों की जिंदगी बर्बाद कर रहा है। कई तरह के खतरनाक कैंसर सामने आ रहे हैं। महिलाओं में स्तन, गर्भाशय, योनि और अंडाशय के कैंसर आम हैं। लेकिन अब दो मामलों में पेटीकोट कैंसर पाया गया है! रोज़ाना साड़ी पहनने वालों के लिए यह चिंताजनक है। वर्धा के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और बिहार के मधुबनी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के हालिया शोध के अनुसार, रोज़ाना साड़ी पहनने वाली महिलाएं इससे पीड़ित हो रही हैं। इसका कारण साड़ी के साथ पहने जाने वाला पेटीकोट है। अध्ययन में बताया गया है कि इसके धागे से खतरा बढ़ता है। हालांकि अध्ययन में सिर्फ़ साड़ी का ज़िक्र है, लेकिन चूड़ीदार और कुर्ता पहनने वालों को भी कमर पर धागा बांधना पड़ता है। इसे टाइट बांधने से कैंसर हो सकता है। पेटीकोट या पैंट का धागा टाइट बांधने से यह त्वचा से चिपक जाता है। साड़ी न खिसके इसलिए इसे टाइट बांधा जाता है। रोज़ाना साड़ी पहनने वालों में ऐसा करने से त्वचा लाल हो जाती है, सूज जाती है और बाद में घाव बनकर कैंसर का रूप ले सकती है। शुरुआत में महिलाओं में पाए गए इस कैंसर के लिए साड़ी को ज़िम्मेदार माना गया था। लेकिन बाद में पता चला कि इसका कारण पेटीकोट है, इसलिए इसे पेटीकोट कैंसर कहा गया है। 70 साल की एक महिला में यह पाया गया। उनके पेट के आसपास घाव 18 महीने तक ठीक नहीं हुआ। बाद में पता चला कि यह मार्जोलिन अल्सर नाम का त्वचा कैंसर है। फिर एक और महिला में भी यह पाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, पेटीकोट टाइट बांधने से पेट और कमर पर लगातार दबाव पड़ता है। इससे घर्षण होता है और त्वचा कमज़ोर हो जाती है। इससे घाव या छाले हो जाते हैं। इलाज न कराने पर यह कैंसर में बदल सकता है। इस तरह के घाव या छाले होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। रोज़ाना साड़ी या धागे वाला पेटीकोट पहनने वालों को इलास्टिक वाला पेटीकोट पहनने की सलाह दी जाती है। या फिर ढीले स्कर्ट पहनने को कहा गया है। कमर के आसपास हफ़्तों या महीनों तक ठीक न होने वाले घाव होने पर तुरंत जांच कराएं। 70 साल की महिला में साड़ी से हुआ कैंसर पहले मामले में, एक 70 वर्षीय महिला को अपने दाहिने हिस्से में त्वचा पर एक अल्सर विकसित हो गया, जिसमें त्वचा का रंग भी फीका पड़ गया था। पेटीकोट की तंग डोरी ने त्वचा को लंबे समय तक नुकसान पहुंचाया, जिससे मार्जोलिन अल्सर हो गया। 70 वर्षीय महिला ने अपना अनुभव शेयर करते हुए बताया कि, 'मैंने दशकों तक खूब कसी साड़ी बांधी, मुझे नहीं पता था कि ये मेरी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। त्वचा में हल्का सा बदलाव हुआ जो धीरे-धीरे दर्दनाक और ठीक न होने वाले अल्सर में बदल गया, बाद में पता चला कि मुझे स्‍किन कैंसर हुआ है।' डॉ. दर्शना राणे के अनुसार, 'जब यह नाड़ा लगातार एक ही स्थान पर कमर पर बांधा जाता है, तो इससे त्वचा में जलन (डर्माटोसिस) होती है, जिससे आगे चलकर अल्सर (घाव) या 'मार्जोलिन अल्सर' बन सकते हैं, और बहुत ही दुर्लभ मामलों में, ये घाव कैंसर में बदल सकते हैं।' ऐसे पहचाने ‘साड़ी कैंसर’ का लक्षण ‘साड़ी कैंसर’ के शुरुआती लक्षण पेटीकोट का तंग नाड़ा लंबे समय तक जलन पैदा कर सकता है। इंडिया की गर्मी में, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, यह समस्या तेजी से बढ़ सकती है। कसी साड़ी से त्वचा का रंग बदलना या हल्की पपड़ी पड़ना गंभीर लक्षण हो सकते हैं। क्‍या कहते हैं डॉक्‍टर डॉ. दर्शना राणे बताती हैं, पेटीकोट का नाड़ा जब गर्म और आर्द्र मौसम में कसकर बांधा जाता है, तो यह पसीना और धूल के जमा होने से जलन और खुजली पैदा कर सकता है। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित होने के कारण, महिलाएं प्रारंभिक लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं और जब हेल्‍थ खराब हो जाती है तब डॉक्‍टर को दिखाती हैं। चूड़ीदार और धोती से भी हो सकता है कैंसर जी हां, अगर आप कस कर धोती बांधते हैं और महिलाएं अगर टाइट चूड़ीदार पहनती हैं, तो आपको भी बच कर रहना चाहिए। हालांकि यह एक दुर्लभ समस्या है, लेकिन यह जागरूकता और बचाव की आवश्यकता को दर्शाती है। जानें बचाव का तरीका     पेटीकोट को बहुत कसकर न बांधें, खासकर अगर त्वचा में रंग बदलने या पपड़ी बनने जैसे डर्माटोसिस के शुरुआती संकेत दिखें।     पेटीकोट में चौड़ा कमरबंद इस्तेमाल करने से कमर पर दबाव समान रूप से बंटता है।     पेटीकोट को बांधने की ऊंचाई समय-समय पर बदलते रहें। घर पर हों तो ढीले इलास्टिक वाले पतलून पहनें ताकि हवा का संचार बना रहे।     कभी भी टाइटप कपड़ा ना पहनें। हमेशा आरामदायक कपड़ा ही पहनें। कमर पर टाइट बेल्‍ट या नाड़ा ना बांधें। स्‍किन पर अगर इलास्‍टिक से जलन और खुजली हो तो तुरंत डॉक्‍टर को दिखाएं। recent visitors 123