जबलपुर में गड्ढों की मरम्मत का नया फॉर्मूला, कोल्ड मिक्स एस्फाल्ट से गोहलपुर की सड़कें हुईं समतल

New formula for pothole repair in Jabalpur: Gohalpur roads leveled using cold mix asphalt. विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव जबलपुर । नगर निगम ने जोन क्रमांक 14 गोहलपुर क्षेत्र में सड़कों के गड्ढों की मरम्मत का काम पूरा कर लिया है। प्रमुख मार्गों और पहुंच मार्गों पर बने गड्ढों को भरने के लिए आधुनिक कोल्ड मिक्स एस्फाल्ट तकनीक का उपयोग किया गया है। इससे सड़कें समतल होने के साथ वाहन चालकों को आवागमन में राहत मिली है। नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू और निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार के मार्गदर्शन में क्षेत्र में सड़कों के संधारण और रिपेयरिंग का कार्य कराया गया। कोल्ड मिक्स तकनीक से बिना यातायात को अधिक प्रभावित किए कम समय में मरम्मत कार्य पूरा किया गया। तेजी से भरे जा सके गड्ढेनिगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने बताया कि हॉट मिक्स पद्धति की तुलना में कोल्ड मिक्स एस्फाल्ट तकनीक के उपयोग से सड़क मरम्मत का काम तेजी से किया जा सका। सड़क के गड्ढे भरने और समतलीकरण से दोपहिया व चारपहिया वाहन चालकों को सुविधा मिली है। इससे गड्ढों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका भी कम होगी।उन्होंने बताया कि इस तकनीक में कम तापमान पर सामग्री का उपयोग किया जाता है, जिससे मरम्मत के दौरान धूल और प्रदूषण की समस्या भी अपेक्षाकृत कम रहती है। इससे स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों को राहत मिली है। जोनल अधिकारी और निर्माण शाखा की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्य का निरीक्षण किया तथा गुणवत्ता मानकों की जांच की। क्षेत्रवासियों और व्यापारियों ने सड़क मरम्मत कार्य पर संतोष जताते हुए नगर निगम के प्रति आभार व्यक्त किया।नगर निगम अधिकारियों के अनुसार शहर में नागरिकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने और सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए इसी तरह के कार्य आगे भी जारी रहेंगे। recent visitors 24

ग्राम घटेरा में आदिवासी चालक पर हमला: संदीप यादव और उसके भाइयों पर SC/ST एक्ट में FIR, पीड़ित ने SP से सुरक्षा मांगी

Attack on tribal driver in Ghatera village: FIR registered against Sandeep Yadav and his brothers under SC/ST Act, victim seeks protection from SP विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर। थाना कटंगी क्षेत्र के ग्राम घटेरा में संदीप यादव और उसके दो भाइयों मधुसूदन यादव एवं उपेन्द्र यादव के विरुद्ध एक आदिवासी वाहन चालक पर जानलेवा हमला करने और जातिगत उत्पीड़न का मामला दर्ज हुआ है। पीड़ित बहादुर गोंड के अनुसार- 25 सितंबर को रास्ता मांगने की बात को लेकर संदीप यादव अपने भाइयों के साथ उसके घर आया। जातिसूचक गालियां देते हुए गाली-गलौज की। मना करने पर संदीप यादव ने लकड़ी के डंडे से और उसके भाइयों मधुसूदन एवं उपेन्द्र ने हाथ-मुक्कों से मारपीट की, जिससे उसे गंभीर मूंदी चोटें आईं। बीच-बचाव पत्नी रमा बाई, रोहित यादव और गोकुल गौड़ ने किया। आरोपियों ने जाते-जाते जान से मारने की धमकी भी दी। पुलिस के अनुसार – इस मामले में थाना कटंगी में पीड़ित की रिपोर्ट पर FIR क्र. 0584/2026 दिनांक 25.09.2026 धारा 3(1)(घ), 3(1)(ध), 3(2)(va) SC/ST एक्ट एवं BNS की धारा 115(2), 296(a), 3(5), 351(3) के तहत दर्ज कर विवेचना में लिया गया है। इधर, पीड़ित का आरोप है कि संदीप यादव और उसके भाइयों के राजनीतिक दबाव के कारण थाने में ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है और समझौते के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इसी कारण पीड़ित ने आज SP जबलपुर को आवेदन देकर वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष जांच, MLC, गवाहों के कथन और परिवार की सुरक्षा की मांग की है। recent visitors 30

गजानन परिवार के महागणपति का भव्य विसर्जन, उखरी रोड से हनुमानताल तक निकली शोभायात्रा

Grand immersion of Mahaganpati of Gajanan family, procession started from Ukhri Road to Hanumantal. विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव जबलपुर। गजानन परिवार द्वारा भगवान श्री गणेश की भक्ति और श्रद्धा के साथ महागणपति विसर्जन समारोह का आयोजन रविवार, 27 सितंबर को किया गया। इस दौरान उखरी रोड से भगवान श्री गणेश की प्रतिमा को भव्य शोभायात्रा के रूप में हनुमानताल तक ले जाया गया, जहां विधि-विधान एवं भक्तिभाव के साथ विसर्जन किया गया। विसर्जन यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मार्ग में भक्तों ने गणपति बप्पा मोरया के जयकारों के साथ भगवान गणेश की आराधना की। शोभायात्रा के दौरान भक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिला। कार्यक्रम आगा चौक, गली नंबर-2 से हनुमानताल तक आयोजित किया गया। गजानन परिवार के सदस्यों एवं श्रद्धालुओं ने गणपति बप्पा को भावपूर्ण विदाई दी। आयोजक : रोहित सेन एवं समस्त गजानन परिवार recent visitors 22

जबलपुर के गणेश पंडाल का कथित अश्लील डांस वीडियो वायरल, हिंदू धर्म सेना ने उठाए सवाल

Video of alleged obscene dance at a Jabalpur Ganesh pandal goes viral; Hindu Dharma Sena raises questions. विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तवजबलपुर। जबलपुर में सोशल मीडिया पर गणेश पांडाल में कुछ युवकों द्वारा अश्लील डांस किए जाने का एक वीडियो वायरल हो रहा है। यह वीडियो शुभम बैरागी ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इस कथित पोस्ट और वीडियो को लेकर हिंदू धर्म सेना ने पुलिस से जांच और कार्रवाई की मांग की है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष नीरज राजपूत ने जबलपुर पुलिस अधीक्षक के नाम ज्ञापन सौंपा है। जिसमें बताया गया कि शुभम बैरागी नामक व्यक्ति की सोशल मीडिया आईडी से संबंधित यह वीडियो शेयर करने की जानकारी सामने आई है। मामला गौर चौकी के पास गणेश प्रतिमा पंडाल में कथित अश्लील डांस का वीडियो वायरल होने का है। पंडाल में फिल्मी गानों पर आपत्तिजनक डांस और कथित अश्लील गानों के वीडियो ने हिंदू संगठनों में आक्रोश पैदा कर दिया। एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाएसंगठन ने पुलिस से सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो की सत्यता, संदर्भ तथा डिजिटल साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि जांच में यदि धार्मिक भावनाओं को आहत करने या किसी कानून के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाए। साथ ही संबंधित डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की गई। संगठन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि मामले में तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। recent visitors 80

जबलपुर हाईकोर्ट की चिंता: POCSO की 14 हजार से अधिक अपीलें लंबित, कम उम्र के आरोपियों की बढ़ती संख्या पर हैरानी

Jabalpur High Court’s concern: Over 14,000 POCSO appeals pending; surprise expressed over the rising number of underage accused. विशेष संवाददाता : जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तवजबलपुर। हाईकोर्ट की तीनों पीठ में पॉक्सो एक्ट के तहत साढ़े 14 हजार से अधिक अपील लंबित होने पर चीफ जस्टिस अल्पेश वाई. कोगजे तथा जस्टिस विवेक रूसिया की युगलपीठ ने चिंता जाहिर की है। युगलपीठ ने पॉक्सो कानून के प्रावधानों के प्रति व्यापक जन-जागरूकता की आवश्यकता पर जोर देते हुए हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार डीई को निगरानी का दायित्व सौंपा है। गौरतलब है कि अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं होने के कारण पॉक्सो एक्ट के प्रकरणों में बढ़ोतरी हो रही है। एक्ट के तहत केंद्र व राज्य सरकार को एक्ट के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार करना है, जिससे किशोर और नवयुवकों तक एक्ट के संबंध में जानकारी पहुंच सके। इसके अलावा हाईकोर्ट संज्ञान याचिका के रूप में भी मामले की सुनवाई कर रहा था। इसके अलावा एक अन्य याचिका भी दायर की गई थी।विज्ञापन पॉक्सो और किशोर न्याय कानून को लेकर चलाए गए जागरूकता अभियान याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से बताया गया कि पॉक्सो और किशोर न्याय कानून के संबंध में विभिन्न स्तरों पर प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए हैं। राज्य स्तरीय कार्यक्रम में लगभग 52 हजार लोग शामिल हुए, जबकि विभिन्न जिला स्तरीय कार्यक्रमों में 2,73,701 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया। इनमें पुलिसकर्मी, स्कूली विद्यार्थी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, जिला बाल संरक्षण इकाई के स्वयंसेवक और ग्राम एवं ब्लॉक स्तर के प्रतिभागी शामिल थे। गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। एक संगठन द्वारा छह जिलों में बाल अधिकार अभियान के माध्यम से लगभग 4.50 लाख लोगों को जागरूक किया गया है। याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि हाईकोर्ट की तीनों पीठों के समक्ष पॉक्सो एक्ट की 14,531 आपराधिक अपीलें लंबित हैं। इनमें से अधिकांश मामलों में पीड़ित की उम्र 16 से 18 वर्ष और आरोपी की उम्र 19 से 22 वर्ष के बीच है। कई आरोपी कम उम्र के हैं और पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराध के आरोप में जेल में हैं। प्रावधानों के बारे में जागरूकता की कमी पॉक्सो मामलों में वृद्धि का प्रमुख कारण कानून के प्रावधानों के बारे में जागरूकता की कमी है। कई मामलों में आरोपी और पीड़ित दोनों इस बात से अनजान होते हैं कि दोस्ती या प्रेम संबंध के कारण घर से चले जाने जैसी परिस्थितियां भी पॉक्सो कानून के तहत कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती हैं। युगलपीठ ने अपने आदेश में पॉक्सो अधिनियम की धारा 43 का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों का दायित्व है कि कानून के प्रावधानों का टेलीविजन, रेडियो और प्रिंट मीडिया सहित विभिन्न माध्यमों से नियमित रूप से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। जागरूकता के लिए किए गए उपायों के बावजूद पॉक्सो अधिनियम के तहत मामले लगातार दर्ज हो रहे हैं। लंबित आपराधिक मामलों और अपीलों का शीघ्र निपटारा तभी प्रभावी ढंग से हो सकेगा, जब नए मामलों की संख्या को कानून के प्रभावी उपायों के जरिए नियंत्रित किया जा सके। याचिका पर सुनवाई की जाएगी युगलपीठ ने हाईकोर्ट रजिस्ट्रार डीई को पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट से संबंधित मामलों की प्रगति तथा अधिनियम के प्रावधानों के क्रियान्वयन की निगरानी का दायित्व सौंपा है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि कमेटी पॉक्सो मामलों की प्रगति की निगरानी करेगी और मामलों के समयबद्ध निपटारे के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर सकेगी। कमेटी को मध्य प्रदेश सरकार के संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने का अधिकार भी होगा। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि दो याचिकाओं का निराकरण करते हुए सिर्फ संज्ञान याचिका पर सुनवाई की जाएगी। युगलपीठ ने अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता को न्यायालय मित्र नियुक्त किया है। recent visitors 23

क्या मध्य प्रदेश में फिर से भारतीय किसान संघ सड़कों पर ट्रैक्टर लेकर उतरा नजर आएगा ,धान की MSP 3100 रुपये करने की मांग

Will the Bharatiya Kisan Sangh (BKS) once again take to the streets with tractors in Madhya Pradesh, demanding an MSP of Rs 3,100 for paddy? विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर। मध्य प्रदेश में मोहन सरकार के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी का ही एक अनुसांगिक संगठन भारतीय किसान संघ (BKS) सड़कों पर उतरा है. दरअसल, मध्य प्रदेश सरकार ने अनाज खरीदी के लिए भावांतर योजना शुरू की है. किसान संगठन का कहना है कि इस योजना से किसानों को नुकसान है और वह चाहते हैं की पूरी खरीदी समर्थन मूल्य पर हो इसके साथ ही किसानों ने धान का समर्थन मूल्य को ₹3100 किए जाने की मांग की है. जबलपुर में किसान संगठन ने ट्रैक्टर रैली निकालकर अपना विरोध प्रदर्शन किया. धान का समर्थन मूल्य 3,100 रुपये किये जाने की मांग मध्य प्रदेश में भाजपा से जुड़े किसानों के संगठन ने जबलपुर में मंगलवार एक ट्रैक्टर रैली निकाली. इस ट्रैक्टर रैली में सैकड़ों की तादाद में किसान ट्रैक्टरों पर सवार होकर जबलपुर कृषि उपज मंडी से रैली के रूप में निकले और शहर की मुख्य सड़कों से होते हुए जबलपुर के घंटाघर चौक पर पहुंचे. भारतीय किसान संघ के पदाधिकारी राघवेंद्र पटेल ने बताया कि “दरअसल राज्य सरकार ने चुनाव के वक्त कहा था कि मध्य प्रदेश में धान का समर्थन मूल्य ₹3100 किया जाएगा, लेकिन राज्य सरकार ने धान के समर्थन मूल्य को मात्र 2,461 रुपए तक ही बढ़ाया है. हमारी मांग है कि धान का समर्थन मूल्य ₹3100 किया जाना चाहिए.” भावांतर योजना फ्लॉप योजना: राघवेंद्र पटेल वहीं, राज्य सरकार ने बीते दिनों भावांतर योजना शुरू की है जिसके तहत यदि कृषि उपज की खरीदी समर्थन मूल्य पर नहीं हो पाती है तो भाव का अंतर सरकार किसान के खाते में डालेगी. राघवेंद्र पटेल का कहना है कि यह एक फ्लॉप योजना है और इससे किसान का फायदा नहीं होता. इसलिए उन्हें भावांतर नहीं चाहिए बल्कि उनका धान, गेहूं, चना समेत सभी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी जानी चाहिए. भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य प्रमोद चौधरी ने बताया कि “आज यह हमारा शक्ति प्रदर्शन था और यह शक्ति प्रदर्शन पूरे प्रदेश में तहसील स्तर से लेकर देश की राजधानी तक में किया जाता है ताकि सरकार के सामने किसान अपनी एकजुटता पेश कर सकें. हमारे कई मुद्दे राज्य सरकार के सामने रखे हुए हैं और कुछ मुद्दों पर किसानों का केंद्र सरकार के सामने मतभेद है इसलिए आज के दिन हर साल हम शक्ति प्रदर्शन के माध्यम से अपनी बात सरकार तक पहुंचाते हैं.” मध्य प्रदेश में किसानों की परेशानियां भारतीय किसान संघ के नेताओं का कहना है कि मध्य प्रदेश का किसान राज्य सरकार से बिजली को लेकर परेशान है. वहीं, खाद की पूरी उपलब्धता और खाद वितरण में नए-नए प्रयोग भी किसान को परेशान कर रहे हैं. इन सब मुद्दों पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए, लेकिन भावांतर और समर्थन मूल्य पर किसान संगठन के तेवर गर्म नजर आ रहे हैं. भारत के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का हिस्सा लगभग 18% है और पीरियोडिक लेबर फोर्स (PLFS) सर्वे की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार आज भी भारत के 46% लोग कृषि के जरिए रोजगार प्राप्त करते हैं. हालांकि पहले की अपेक्षा यह निर्भरता घटी है. आज भी आधी आबादी कृषि पर आधारित है. ऐसी स्थिति में सरकार को ग्रामीण विकास और कृषि को फायदे का धंधा बनाने के लिए अपनी वर्तमान योजनाओं में परिवर्तन करना ही पड़ेगा. recent visitors 21

जबलपुर: बिल्डर्स से लेकर किसानों तक की टेंशन बढ़ी, 62 गांवों के भविष्य का फैसला करेगा नया मास्टर प्लान

Jabalpur: Tensions rise for everyone from builders to farmers, as a new master plan will determine the future of 62 villages. विशेष संवाददाता : जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर। जबलपुर के प्रस्तावित मास्टर प्लान 2041 को लेकर एक बार फिर जमीन के उपयोग को लेकर हलचल तेज हो गई है। वर्ष 2022 में नियोजन क्षेत्र का दायरा बढ़ाकर 62 गांवों को शामिल किए जाने के बाद अब इन क्षेत्रों के संभावित लैंड यूज को लेकर चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। पाटन, जबलपुर और पनागर तहसील के कुछ गांवों में बड़े हिस्से को अंतिम योजना में कृषि या ग्रीन बेल्ट के रूप में रखे जाने की संभावना चर्चा में है। इससे जमीन मालिकों और रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े लोगों की निगाहें अंतिम लैंड यूज मैप पर टिक गई हैं। हालांकि, अभी इसे अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। संबंधित गांवों का वास्तविक भू-उपयोग मास्टर प्लान की प्रक्रिया पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बाद जारी होने वाली अंतिम अधिसूचना से ही स्पष्ट होगा। इन गांवों की जमीन पर सबसे ज्यादा नजर पाटन तहसील के नुहारी, बिनेकी और टिमरी, जबलपुर तहसील के खमरिया, पिपरिया कला, नौमखेड़ा और कोसमघाट तथा पनागर तहसील के पिपरिया, मगेला, पटना और बरौदा सहित कुछ गांवों को लेकर भू-उपयोग की चर्चाएं अधिक हैं। यदि इन क्षेत्रों का बड़ा हिस्सा कृषि या ग्रीन बेल्ट में निर्धारित होता है तो वहां आवासीय कॉलोनी, टाउनशिप अथवा अन्य गैर-कृषि विकास भू-उपयोग नियमों और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के अधीन होगा। इसके विपरीत आवासीय या मिश्रित उपयोग वाले क्षेत्रों में नियोजित विकास की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। 2022 में बढ़ा था नियोजन क्षेत्र शहर के अनियोजित विस्तार को नियंत्रित करने और भविष्य के विकास को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से वर्ष 2022 में जबलपुर के नियोजन क्षेत्र का विस्तार किया गया था। इसमें 62 गांवों को शामिल किया गया। इसके साथ इन क्षेत्रों में आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, परिवहन और हरित क्षेत्र के नियोजन की प्रक्रिया नगर तथा ग्राम निवेश व्यवस्था के दायरे में आ गई। अब जमीन मालिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि अंतिम योजना में उनकी भूमि किस श्रेणी में आती है। यही स्थिति भविष्य में जमीन के विकास और उपयोग की दिशा तय करेगी धारा 16 के तहत विकास योजना अहम मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 के तहत विकास योजना के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के नियोजित भू-उपयोग का निर्धारण किया जाता है। ऐसे में 62 गांवों के लिए तैयार किए जा रहे अंतिम लैंड यूज मैप को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जमीन मालिकों और डेवलपर्स की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि प्रस्तावित उपयोग के आधार पर भूमि पर भविष्य की विकास गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। खासकर जिन क्षेत्रों को शहरी विस्तार की संभावनाओं के आधार पर निवेश योग्य माना जा रहा है, वहां अंतिम भू-उपयोग का निर्धारण महत्वपूर्ण होगा। डेवलपर्स को भी अंतिम नक्शे का इंतजार 62 गांवों के नियोजन क्षेत्र में आने के बाद रियल एस्टेट क्षेत्र की गतिविधियां भी इस बात पर निर्भर करेंगी कि किन इलाकों को आवासीय, मिश्रित, कृषि या हरित क्षेत्र में रखा जाता है। क्रेडाई सहित रियल উভয় एस्टेट क्षेत्र से जुड़े संगठन भी मास्टर प्लान को स्पष्ट रूप से लागू करने और भू-उपयोग की स्थिति जल्द सामने लाने की मांग करते रहे हैं। देरी ने बढ़ाया असमंजस मास्टर प्लान 2041 की प्रक्रिया लंबे समय से चर्चा में है। सितंबर 2025 में प्रकाशित रिपोर्ट में भी 62 गांवों को नियोजन क्षेत्र में शामिल किए जाने, योजना के मसौदा स्तर पर होने तथा आपत्तियों और सुझावों की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया था। अंतिम स्वरूप सामने नहीं आने से जमीन मालिकों के लिए यह तय करना मुश्किल बना हुआ है कि भविष्य में उनकी भूमि का नियोजित उपयोग क्या होगा।जबलपुर के विस्तार की दृष्टि से 62 गांवों का नियोजन क्षेत्र में शामिल होना महत्वपूर्ण है। लेकिन इसका वास्तविक असर तभी स्पष्ट होगा, जब अंतिम मास्टर प्लान और लैंड यूज मैप सामने आएगा। फिलहाल कृषि या ग्रीन बेल्ट से संबंधित चर्चाओं को संभावित प्रस्ताव से अधिक नहीं माना जा सकता। इस संबंध में असिस्टेंट डायरेक्टर टीएनसीपी विपुल माहुले ने कहा कि फिलहाल मास्टर प्लान से जुड़ी जानकारी उनके पास है यह कार्य शासन स्तर पर होना है। recent visitors 29