क्या मध्य प्रदेश में फिर से भारतीय किसान संघ सड़कों पर ट्रैक्टर लेकर उतरा नजर आएगा ,धान की MSP 3100 रुपये करने की मांग

Will the Bharatiya Kisan Sangh (BKS) once again take to the streets with tractors in Madhya Pradesh, demanding an MSP of Rs 3,100 for paddy? विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर। मध्य प्रदेश में मोहन सरकार के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी का ही एक अनुसांगिक संगठन भारतीय किसान संघ (BKS) सड़कों पर उतरा है. दरअसल, मध्य प्रदेश सरकार ने अनाज खरीदी के लिए भावांतर योजना शुरू की है. किसान संगठन का कहना है कि इस योजना से किसानों को नुकसान है और वह चाहते हैं की पूरी खरीदी समर्थन मूल्य पर हो इसके साथ ही किसानों ने धान का समर्थन मूल्य को ₹3100 किए जाने की मांग की है. जबलपुर में किसान संगठन ने ट्रैक्टर रैली निकालकर अपना विरोध प्रदर्शन किया. धान का समर्थन मूल्य 3,100 रुपये किये जाने की मांग मध्य प्रदेश में भाजपा से जुड़े किसानों के संगठन ने जबलपुर में मंगलवार एक ट्रैक्टर रैली निकाली. इस ट्रैक्टर रैली में सैकड़ों की तादाद में किसान ट्रैक्टरों पर सवार होकर जबलपुर कृषि उपज मंडी से रैली के रूप में निकले और शहर की मुख्य सड़कों से होते हुए जबलपुर के घंटाघर चौक पर पहुंचे. भारतीय किसान संघ के पदाधिकारी राघवेंद्र पटेल ने बताया कि “दरअसल राज्य सरकार ने चुनाव के वक्त कहा था कि मध्य प्रदेश में धान का समर्थन मूल्य ₹3100 किया जाएगा, लेकिन राज्य सरकार ने धान के समर्थन मूल्य को मात्र 2,461 रुपए तक ही बढ़ाया है. हमारी मांग है कि धान का समर्थन मूल्य ₹3100 किया जाना चाहिए.” भावांतर योजना फ्लॉप योजना: राघवेंद्र पटेल वहीं, राज्य सरकार ने बीते दिनों भावांतर योजना शुरू की है जिसके तहत यदि कृषि उपज की खरीदी समर्थन मूल्य पर नहीं हो पाती है तो भाव का अंतर सरकार किसान के खाते में डालेगी. राघवेंद्र पटेल का कहना है कि यह एक फ्लॉप योजना है और इससे किसान का फायदा नहीं होता. इसलिए उन्हें भावांतर नहीं चाहिए बल्कि उनका धान, गेहूं, चना समेत सभी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी जानी चाहिए. भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य प्रमोद चौधरी ने बताया कि “आज यह हमारा शक्ति प्रदर्शन था और यह शक्ति प्रदर्शन पूरे प्रदेश में तहसील स्तर से लेकर देश की राजधानी तक में किया जाता है ताकि सरकार के सामने किसान अपनी एकजुटता पेश कर सकें. हमारे कई मुद्दे राज्य सरकार के सामने रखे हुए हैं और कुछ मुद्दों पर किसानों का केंद्र सरकार के सामने मतभेद है इसलिए आज के दिन हर साल हम शक्ति प्रदर्शन के माध्यम से अपनी बात सरकार तक पहुंचाते हैं.” मध्य प्रदेश में किसानों की परेशानियां भारतीय किसान संघ के नेताओं का कहना है कि मध्य प्रदेश का किसान राज्य सरकार से बिजली को लेकर परेशान है. वहीं, खाद की पूरी उपलब्धता और खाद वितरण में नए-नए प्रयोग भी किसान को परेशान कर रहे हैं. इन सब मुद्दों पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए, लेकिन भावांतर और समर्थन मूल्य पर किसान संगठन के तेवर गर्म नजर आ रहे हैं. भारत के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का हिस्सा लगभग 18% है और पीरियोडिक लेबर फोर्स (PLFS) सर्वे की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार आज भी भारत के 46% लोग कृषि के जरिए रोजगार प्राप्त करते हैं. हालांकि पहले की अपेक्षा यह निर्भरता घटी है. आज भी आधी आबादी कृषि पर आधारित है. ऐसी स्थिति में सरकार को ग्रामीण विकास और कृषि को फायदे का धंधा बनाने के लिए अपनी वर्तमान योजनाओं में परिवर्तन करना ही पड़ेगा. recent visitors 6

जबलपुर: बिल्डर्स से लेकर किसानों तक की टेंशन बढ़ी, 62 गांवों के भविष्य का फैसला करेगा नया मास्टर प्लान

Jabalpur: Tensions rise for everyone from builders to farmers, as a new master plan will determine the future of 62 villages. विशेष संवाददाता : जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर। जबलपुर के प्रस्तावित मास्टर प्लान 2041 को लेकर एक बार फिर जमीन के उपयोग को लेकर हलचल तेज हो गई है। वर्ष 2022 में नियोजन क्षेत्र का दायरा बढ़ाकर 62 गांवों को शामिल किए जाने के बाद अब इन क्षेत्रों के संभावित लैंड यूज को लेकर चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। पाटन, जबलपुर और पनागर तहसील के कुछ गांवों में बड़े हिस्से को अंतिम योजना में कृषि या ग्रीन बेल्ट के रूप में रखे जाने की संभावना चर्चा में है। इससे जमीन मालिकों और रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े लोगों की निगाहें अंतिम लैंड यूज मैप पर टिक गई हैं। हालांकि, अभी इसे अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। संबंधित गांवों का वास्तविक भू-उपयोग मास्टर प्लान की प्रक्रिया पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बाद जारी होने वाली अंतिम अधिसूचना से ही स्पष्ट होगा। इन गांवों की जमीन पर सबसे ज्यादा नजर पाटन तहसील के नुहारी, बिनेकी और टिमरी, जबलपुर तहसील के खमरिया, पिपरिया कला, नौमखेड़ा और कोसमघाट तथा पनागर तहसील के पिपरिया, मगेला, पटना और बरौदा सहित कुछ गांवों को लेकर भू-उपयोग की चर्चाएं अधिक हैं। यदि इन क्षेत्रों का बड़ा हिस्सा कृषि या ग्रीन बेल्ट में निर्धारित होता है तो वहां आवासीय कॉलोनी, टाउनशिप अथवा अन्य गैर-कृषि विकास भू-उपयोग नियमों और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के अधीन होगा। इसके विपरीत आवासीय या मिश्रित उपयोग वाले क्षेत्रों में नियोजित विकास की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। 2022 में बढ़ा था नियोजन क्षेत्र शहर के अनियोजित विस्तार को नियंत्रित करने और भविष्य के विकास को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से वर्ष 2022 में जबलपुर के नियोजन क्षेत्र का विस्तार किया गया था। इसमें 62 गांवों को शामिल किया गया। इसके साथ इन क्षेत्रों में आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, परिवहन और हरित क्षेत्र के नियोजन की प्रक्रिया नगर तथा ग्राम निवेश व्यवस्था के दायरे में आ गई। अब जमीन मालिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि अंतिम योजना में उनकी भूमि किस श्रेणी में आती है। यही स्थिति भविष्य में जमीन के विकास और उपयोग की दिशा तय करेगी धारा 16 के तहत विकास योजना अहम मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 के तहत विकास योजना के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के नियोजित भू-उपयोग का निर्धारण किया जाता है। ऐसे में 62 गांवों के लिए तैयार किए जा रहे अंतिम लैंड यूज मैप को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जमीन मालिकों और डेवलपर्स की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि प्रस्तावित उपयोग के आधार पर भूमि पर भविष्य की विकास गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। खासकर जिन क्षेत्रों को शहरी विस्तार की संभावनाओं के आधार पर निवेश योग्य माना जा रहा है, वहां अंतिम भू-उपयोग का निर्धारण महत्वपूर्ण होगा। डेवलपर्स को भी अंतिम नक्शे का इंतजार 62 गांवों के नियोजन क्षेत्र में आने के बाद रियल एस्टेट क्षेत्र की गतिविधियां भी इस बात पर निर्भर करेंगी कि किन इलाकों को आवासीय, मिश्रित, कृषि या हरित क्षेत्र में रखा जाता है। क्रेडाई सहित रियल উভয় एस्टेट क्षेत्र से जुड़े संगठन भी मास्टर प्लान को स्पष्ट रूप से लागू करने और भू-उपयोग की स्थिति जल्द सामने लाने की मांग करते रहे हैं। देरी ने बढ़ाया असमंजस मास्टर प्लान 2041 की प्रक्रिया लंबे समय से चर्चा में है। सितंबर 2025 में प्रकाशित रिपोर्ट में भी 62 गांवों को नियोजन क्षेत्र में शामिल किए जाने, योजना के मसौदा स्तर पर होने तथा आपत्तियों और सुझावों की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया था। अंतिम स्वरूप सामने नहीं आने से जमीन मालिकों के लिए यह तय करना मुश्किल बना हुआ है कि भविष्य में उनकी भूमि का नियोजित उपयोग क्या होगा।जबलपुर के विस्तार की दृष्टि से 62 गांवों का नियोजन क्षेत्र में शामिल होना महत्वपूर्ण है। लेकिन इसका वास्तविक असर तभी स्पष्ट होगा, जब अंतिम मास्टर प्लान और लैंड यूज मैप सामने आएगा। फिलहाल कृषि या ग्रीन बेल्ट से संबंधित चर्चाओं को संभावित प्रस्ताव से अधिक नहीं माना जा सकता। इस संबंध में असिस्टेंट डायरेक्टर टीएनसीपी विपुल माहुले ने कहा कि फिलहाल मास्टर प्लान से जुड़ी जानकारी उनके पास है यह कार्य शासन स्तर पर होना है। recent visitors 17

लाइव सर्जरी से डॉक्टरों ने सीखे घुटनाप्रत्यारोपण के तरीके: जबलपुर में यूनिकॉम्पार्टमेंटल नी रिप्लेसमेंट डे पर हुई मास्टर क्लास, इंदौर के विशेषज्ञ भी हुए शामिल

Doctors learned knee replacement techniques through live surgery: A master class was held in Jabalpur on Unicompartmental Knee Replacement Day, with experts from Indore also attending. विशेष संवाददाता : जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर । मध्य प्रदेश इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन (MPIOA), एनएससीबी (NSCB) मेडिकल कॉलेज के अस्थि रोग विभाग और जबलपुर ऑर्थोपेडिक्स सोसाइटी ने मिलकर “यूनिकॉम्पार्टमेंटल नी रिप्लेसमेंट (UKR) डे” मनाया। इस मौके पर एक अकादमिक और क्लिनिकल मास्टरक्लास का आयोजन किया गया। इसका मकसद डॉक्टरों को घुटने के सीमित हिस्से के गठिया, सही मरीज चुनने और आधुनिक सर्जरी की नई जानकारी देना था। इसका विषय “Together for Better Mobility” रखा था। मेडिकल कॉलेज से लाइव प्रसारण कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण एनएससीबी मेडिकल कॉलेज से लाइव प्रसारित यूकेआर सर्जरी थी। होटल में मौजूद डॉक्टरों ने रिमोट लाइव वीडियो के जरिए ऑपरेशन, बोन प्रिपरेशन, इंस्ट्रूमेंटेशन और इम्प्लांट पोजिशनिंग के अलग-अलग चरणों को ध्यान से देखा। साथ ही, सम्मेलन में घुटने की बायोमैकेनिक्स, यूकेआर के सिद्धांत और सर्जरी की प्रक्रियाओं पर विशेषज्ञों ने विस्तार से बताया। क्लिनिकल केस प्रेजेंटेशन डॉक्टरों के प्रैक्टिकल स्किल को बेहतर बनाने के लिए क्लिनिकल केस प्रेजेंटेशन के साथ ‘हैंड्स ऑन सॉबोन मॉडल वर्कशॉप’ भी हुई। इसमें शामिल लोगों ने इम्प्लांट लगाने का सीधा अभ्यास किया। इस मास्टरक्लास में इंदौर से आए विशेषज्ञ डॉ. हेमंत मांडोवरा और डॉ. अनुराग पंवेल के साथ इलाके के कई सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन भी शामिल हुए। आधुनिक तकनीक की जानकारी मिली आयोजन अध्यक्ष डॉ. केके पांडे और आयोजन सचिव डॉ. उत्सव कटाकवार ने बताया कि ऐसे प्रैक्टिकल ट्रेनिंग से डॉक्टरों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी मिलती है इसका सीधा फायदा मरीजों को सुरक्षित इलाज और जल्दी ठीक होने के रूप में मिलता है। यह आयोजन जबलपुर में ऑर्थोपेडिक शिक्षा और घुटना प्रत्यारोपण सेवाओं को बढ़ाने में एक अहम कदम रहा। recent visitors 22

यात्री बसों पर RTO की बड़ी कार्रवाई, 28 बसों की जांच में 14 पर चालान

RTO takes major action against passenger buses, issues challans to 14 out of 28 buses inspected विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर । यात्री बसों में सुरक्षा मानकों और परिवहन नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए जबलपुर परिवहन विभाग ने शनिवार को सघन बस चेकिंग अभियान चलाया। पाटन रोड स्थित RTO कार्यालय के पास हुई कार्रवाई में विभागीय टीम ने कुल 28 यात्री बसों की जांच की, जिसमें नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर 14 वाहनों के खिलाफ चालानी कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई परिवहन आयुक्त उमेश जोगा के निर्देश एवं कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के आदेश के पालन में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय जबलपुर द्वारा की गई। 14 बसों पर कार्रवाई, ₹52 हजार राजस्व प्राप्त अभियान के दौरान जांच में कई बसों में यात्री सुरक्षा से जुड़े नियमों का उल्लंघन सामने आया। विभाग ने 14 वाहनों पर चालानी कार्रवाई करते हुए ₹52,000 का राजस्व प्राप्त किया। जांच के दौरान एक बस में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों का परिवहन पाया गया। वहीं 6 यात्री बसों के आपातकालीन निकास (Emergency Exit) गेट बाधित मिले। इसके अलावा कुछ वाहनों में HSRP नंबर प्लेट नहीं होना, सर्च लाइट और प्रेशर हॉर्न जैसे नियम विरुद्ध उपकरण पाए गए। मौके पर हटवाए गए नियम विरुद्ध उपकरण परिवहन विभाग की टीम ने कार्रवाई को केवल चालान तक सीमित नहीं रखा। जांच के दौरान बसों में लगे सर्च लाइट, प्रेशर हॉर्न तथा इमरजेंसी एग्जिट गेट के सामने लगी सीट को मौके पर ही हटवाया गया, ताकि आपात स्थिति में यात्रियों को बाहर निकलने में किसी तरह की बाधा न हो। परिवहन विभाग की टीम रही मौजूद अभियान में RTO श्रीमती रिंकू शर्मा, RTI श्री विक्रम सिंह ठाकुर सहित परिवहन विभाग की टीम ने यात्री बसों की जांच की। अधिकारियों ने बस संचालकों को सभी आवश्यक दस्तावेज साथ रखने तथा निर्धारित परिवहन एवं यात्री सुरक्षा नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करने के निर्देश दिए। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया कि यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। सड़क परिवहन नियमों के पालन और यात्री बसों की स्थिति की निगरानी के लिए इस प्रकार की सघन चेकिंग आगे भी लगातार जारी रहेगी। recent visitors 27

हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी: पोषण माह में आहार विविधता और प्रोटीन पर जागरूकता

Our Anganwadi, Our Responsibility: Raising Awareness About Dietary Diversity and Protein During Nutrition Month विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव जबलपुर। 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के अंतर्गत “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” थीम पर विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में 11 सितंबर 2026 को परियोजना शहरी क्रमांक-4 के परियोजना अधिकारी श्री रीतेश दुबे के निर्देशन में सेक्टर स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन हनुमानताल वार्ड स्थित आंगनवाड़ी केंद्र क्रमांक-32 में किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “आहार विविधता एवं पर्याप्त प्रोटीन” रहा। इस दौरान महिलाओं के लिए पोषण प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें THR रेसिपी, HCM मेनू, स्थानीय एवं क्षेत्रीय खाद्य पदार्थ, प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ तथा संतुलित थाली का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में वार्ड पार्षद श्रीमती कविता रैकवार ने महिलाओं को स्थानीय एवं घरेलू खाद्य पदार्थों के बेहतर उपयोग के माध्यम से बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बच्चों का समय पर टीकाकरण कराने, गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच करवाने तथा मातृ वंदना योजना का लाभ लेने की अपील की। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य पदार्थों के विविध प्रयोग से भोजन की पौष्टिकता बढ़ाने का लाइव डेमॉन्स्ट्रेशन मातृ सहयोगिनी समिति की अध्यक्ष श्रीमती अर्चना खरे द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि उपलब्ध घरेलू खाद्य सामग्री का संतुलित और विविध उपयोग बच्चों एवं परिवार के बेहतर पोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कार्यक्रम में आयुष विभाग ने भी सहभागिता की। बच्चों एवं महिलाओं की स्वास्थ्य जांच कर उन्हें आवश्यक सलाह दी गई तथा निःशुल्क दवाओं का वितरण किया गया। डॉ. श्रद्धा कार्तिकेय ने महिलाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा पौष्टिक एवं संतुलित आहार को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर पर्यवेक्षक श्रीमती खुशबू ठाकुर एवं श्रीमती पूजा चौरसिया, सेक्टर की समस्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं, शासकीय प्राथमिक कन्या शाला फूटाताल की शिक्षिकाएं श्रीमती दीप्ति तिवारी एवं श्रीमती नीरा कोरा सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र की महिलाएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं और परिवारों को संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, स्थानीय खाद्य पदार्थों के उपयोग तथा बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना रहा। — सेक्टर-2, परियोजना शहरी क्रमांक-4 recent visitors 33

जबलपुर में टोल प्लाजा का बैरियर तोड़कर भाग रही एसयूवी में मिली ब्रांडेड शराब

Branded liquor found in SUV that broke through toll plaza barrier in Jabalpur विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर। सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद जिले में पुलिस लगातार शराब के अवैध व्यापार में लिपत आरोपितों पर कार्रवाई कर रही है। मामला दर्ज कर जांच कर रही है पुलिस पुलिस ने शराब परिवहन में प्रयुक्त एसयूवी और मोटरसाइकिल भी जब्त की है। दोनों मामलों में आरोपितों के खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच की जा रही है। ग्राम निगरी कैनाल के पास रोकने का प्रयास किया बरगी पुलिस को शुक्रवार को सूचना मिली कि धूमा की ओर से एक एसयूवी में भारी मात्रा में शराब जबलपुर लायी जा रही है। सूचना पर ग्राम निगरी कैनाल के पास एसयूवी एमपी 20 जेडडब्ल्यू 5181 को रोकने का प्रयास किया गया। पुलिस को देखकर वाहन तेज गति से भगाने लगा ड्राइवर पुलिस को देखकर वाहन तेज गति से भगाने लगा और राष्ट्रीय राजमार्ग पर टोल प्लाजा का बूम बैरियर तोड़कर आगे निकल गया। 48 पाव और 359 बोतल अंग्रेजी शराब मिली पुलिस ने घेराबंदी कर बेलखाड़ू निवासी ड्राइवर आशुतोष शिवहरे (30) को पकड़ लिया। तलाशी में एसयूवी के अंदर 48 पाव और 359 बोतल अंग्रेजी शराब मिली। recent visitors 32

जबलपुर में 1.37 करोड़ का अनाज घोटाला बेनकाब, पोर्टल पर फर्जी एंट्री, 5167 क्विंटल गेहूं गायब मिला

Jabalpur: 1.37 crore grain scam uncovered, 5167 quintals of wheat missing after fake entry on portal जबलपुर में वेयरहाउस पर भौतिक सत्यापन के दौरान प्रशासनिक टीम को मिली गड़बड़ी, 10 लोगों के खिलाफ FIR, विशेष संवाददाता : जितेन्द्र श्रीवास्तव /अर्पिता श्रीवास्तव जबलपुर : मझौली थाना क्षेत्र स्थित मां अन्नपूर्णा वेयरहाउस पिपरिया में गेहूं उपार्जन से जुड़े एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है. जब प्रशासनिक टीम भौतिक सत्यापन के लिए वेयरहाउस पहुंची, तो वहां 5,167 क्विंटल गेहूं कम पाया गया. इस गेहूं की अनुमानित कीमत 1 करोड़ 37 लाख 67 हजार 800 रुपये बताई जा रही है. इसी तरह का एक मामला सिहोरा में भी सामने आया जिसमें सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. पोर्टल पर गलत मात्रा अपलोड की जानकारी के अनुसार, संबंधित उपार्जन केंद्र को मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन द्वारा 92,250 बारदाने उपलब्ध कराए गए थे. जबकि केंद्र पर मात्र 48,347 क्विंटल गेहूं की खरीदी हुई थी. इसके बावजूद खरीदी केंद्र द्वारा पोर्टल पर 96,694 बारदानों के उपयोग की जानकारी अपलोड कर दी गई. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों की योजना पोर्टल पर दर्ज मात्रा के बराबर गेहूं बाहर से खरीदकर वेयरहाउस में रखने और उसके बाद समर्थन मूल्य पर भुगतान प्राप्त करने की थी. हालांकि, इससे पहले ही प्रशासन द्वारा भौतिक सत्यापन कर लिया गया, जिसमें पोर्टल पर दर्ज जानकारी की तुलना में गेहूं कम पाया गया. घाटाले के आरोप में 10 पर FIR मामले की जानकारी मिलते ही जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि, ”जांच के बाद पुलिस ने उपार्जन समिति भूमि ग्राम संगठन की अध्यक्ष रीना लोधी, शुभम बर्मन, मयूरी लोधी, प्रमोद कुमार मिश्र, प्रकाश पांडे, आनंद पांडे, अमन पांडे, आकाश पांडे, अनीता पटेल और रिंकू साहू के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है.” इस मामले की जांच एसडीएम सिहोरा, जिला परियोजना प्रबंधक, जिला आपूर्ति अधिकारी तथा तहसीलदार द्वारा की गई थी. अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा घोटाला एक संगठित समूह द्वारा किसी बड़े सरगना के नेतृत्व में अंजाम दिया गया प्रतीत होता है. इसलिए सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. सिहोरा में भी सामने आई गड़बड़ी लगभग इसी तरह का मामला जबलपुर के सिहोरा में भी सामने आया है. यहां पर भी पोर्टल में गलत जानकारी दी गई. किसानों से ज्यादा पैसा वसूला गया और बाहर जाने की गड़बड़ी की गई. इस मामले में एडिशनल एसपी सूर्यकांत शर्मा का कहना है कि, ”सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और मामले की जांच की जा रही है.” पहले भी हो चुके हैं गेहूं खरीदे में घोटाले जबलपुर में गेहूं खरीदी घोटाले का यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी इस प्रकार की अनियमितताएं सामने आती रही हैं. कई मामलों में बड़े अधिकारियों के तबादले हुए हैं और जिला आपूर्ति अधिकारी तक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है. हालांकि, जानकारों का मानना है कि, गेहूं और धान खरीदी घोटालों में कई प्रभावशाली लोग भी शामिल रहते हैं, लेकिन अक्सर कार्रवाई निचले स्तर के कर्मचारियों तक ही सीमित रह जाती है. recent visitors 72