Tuesday, July 7, 2026 10:00 am

विवादों के बीच सुंबुल तौकीर संग दिखीं रूपाली गांगुली

मुंबई, घरेलू विवाद के सोशल प्लेटफॉर्म पर आने के बाद एक्ट्रेस रूपाली गांगुली सुंबुल तौकीर संग दिखीं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल इंस्टाग्राम से एक तस्वीर साझा कर सुंबुल को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। रूपाली ने एक सेल्फी शेयर की, सुंबुल शुक्रवार को 21 साल की हो गई। फोटो में, ‘अनुपमा’ और ‘इमली’ स्टार्स कैमरे की ओर देखते हुए मुस्कुरा रहे हैं। फोटो पर ‘हैप्पी बर्थडे’ स्टिकर लगा हुआ था। रूपाली ने पहले एक सेल्फी शेयर की थी, जिसे उन्होंने ‘रूफी और अनुफी’ बताया था। इस सप्ताह की शुरुआत में, उन्होंने सौतेली बेटी ईशा वर्मा के खिलाफ मानहानि का नोटिस दायर करने के बाद ‘मानवीय शोर को शांत करने’ के बारे में एक रहस्यमयी पोस्ट शेयर किया था। रूपाली ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर एक कोट शेयर किया, जिसमें लिखा था, “ऐसे समय होते हैं जब आपको मनुष्यों के शोर से उबरने के लिए जानवरों सी चुप्पी की आवश्यकता होती है।’ यह पोस्ट ऐसे समय में आया जब एक्ट्रेस ने अपनी सौतेली बेटी ईशा को मानहानि का नोटिस भेजा था, जिसमें उन्होंने उनके चरित्र और निजी जीवन को ‘खराब’ करने के लिए 50 करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा था। यह कानूनी नोटिस ईशा के ‘झूठे और नुकसानदेह बयानों’ के जवाब में था और यह कदम उनकी प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए उठाया गया था। नोटिस में उल्लेख किया गया है कि एक्ट्रेस 50 करोड़ रुपए का मुआवजा भी चाहती हैं। यह नोटिस गांगुली की वकील सना रईस खान ने भेजा है, जो ‘बिग बॉस 17’ में बतौर कंटेस्टेंट नजर आई थीं। कानूनी नोटिस में ईशा को संबोधित करते हुए कहा गया है, ‘हमारे क्लाइंट ने बताया कि वह ‘एक्स’, ‘इंस्टाग्राम’ और ‘फेसबुक’ समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपके द्वारा प्रकाशित पोस्ट और कमेंट को देखकर हैरान रह गई। क्लाइंट ने कहा कि वर्तमान नोटिस जारी करने के लिए सही और सटीक तथ्य पेश करना ठीक होगा …’ नोटिस में बताया गया है कि रूपाली मानसिक सदमे से गुजरी, जिसके कारण उन्हें मेडिकल सहायता लेनी पड़ी। सेट पर उनका अपमान किया गया और उन्होंने प्रोफेशनल मौके को खो दिया।   recent visitors 104

जनजातीय गौरव दिवस, सभी के लिए जनजातीय बलिदानियों को स्मरण करने का अवसर : उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार

भोपाल भगवान बिरसा मुंडा शौर्य एवं पराक्रम के प्रतीक हैं। उन्होंने न केवल अंग्रेजों की पराधीनता के विरुद्ध स्वतंत्रता के संघर्ष का शंखनाद किया बल्कि समाज को संगठित कर राष्ट्र के लिए बलिदान देने वाले स्वाधीनता सेनानी तैयार किए। भगवान बिरसा मुंडा ने समाज की बुराइयों पर नियंत्रण एवं सुधार के लिए भी अपना योगदान दिया। जिसने अपने मात्र 25 वर्ष के जीवन में देश के लिए बलिदान देकर राष्ट्र रक्षा के संकल्प लिया और उसके लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए, राष्ट्र के ऐसे क्रान्तिसूर्य के शौर्य एवं पराक्रम पर सभी को गर्व करने की आवश्यकता है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने शुक्रवार को भगवान बिरसा मुंडा जी की जन्म जयंती पर मनाए जा रहे "जनजातीय गौरव दिवस" के उपलक्ष्य पर भोपाल स्थित शासकीय महारानी लक्ष्मी बाई कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय में आयोजित "पुष्पांजलि कार्यक्रम" में कही। श्री परमार ने उलगुलान के उद्घोषक और धरती आबा कहे जाने वाले जनजातीय गौरव भगवान बिरसा मुंडा जी के छायाचित्र पर पीत अंगवस्त्र ओढ़ाकर, पुष्पांजलि अर्पित की। श्री परमार ने सभी को भगवान बिरसा मुंडा जी की जन्म जयंती की शुभकामनाएं एवं बधाई दीं। श्री परमार ने कहा भगवान बिरसा मुंडा का शौर्य एवं पराक्रम से समृद्ध अल्पायु जीवन, प्रेरणादायक एवं अनुकरणीय है। श्री परमार ने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस, यह जनजातीय समाज के गौरव का दिवस नहीं बल्कि हम सभी के लिए गौरव करने का अवसर है। श्री परमार ने भगवान बिरसा मुंडा के जीवन से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उनके दूरदर्शितापूर्ण दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार ने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस के रूप में जनजातीय बलिदानियों का स्मरण करना, भारत के इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य में लिखा जाने की ओर महत्वपूर्ण कदम है। श्री परमार ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, मधु भगत, चक्र बिसोई, राजा शंकरशाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह सहित अनेकों जनजातीय बलिदानियों ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। ऐसे जनजातीय बलिदानियों के संघर्ष और इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य में पढ़ने एवं समझने की आवश्यकता हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में, पूरे देश को भगवान बिरसा मुंडा जी के जन्म जयंती के अवसर पर जनजातीय गौरव दिवस के रूप में जनजातीय बलिदान की श्रृंखला को स्मरण करने का अवसर मिला है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने भारत के गौरवशाली इतिहास, परम्परा, ज्ञान-विज्ञान, संस्कृति एवं दर्शन सहित समस्त भारतीय दृष्टिकोण को शिक्षा में समाहित करने का अवसर दिया है। भारतीय ज्ञान परम्परा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का अभिन्न अंग है। श्री परमार ने ग्रामीण परिवेश में गृहिणियों की रसोई को भारतीय ज्ञान का कुशल एवं श्रेष्ठ प्रबंधन बताया। श्री परमार ने कहा कि 2047 में विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने सभी की सहभागिता की आवश्यकता है। हम सभी के योगदान से वर्ष 2047 तक भारत विश्वमंच पर हर क्षेत्र में सिरमौर बनेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के शहडोल में आयोजित समारोह में ऑनलाइन जुड़कर वर्चुअल संबोधन के सजीव प्रसारण किया गया। महामहिम राज्यपाल श्री मंगु भाई पटेल एवं माननीय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के संबोधन का भी सीधा प्रसारण का किया गया। कार्यक्रम में आयुक्त उच्च शिक्षा श्री निशांत बरबड़े, महाविद्यालय की जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष डॉ अजय नारंग, विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी उच्च शिक्षा डॉ धीरेंद्र शुक्ल, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अजय कुमार अग्रवाल एवं कार्यक्रम संयोजिका डॉ सविता भार्गव सहित महाविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं छात्राएं उपस्थित रहीं। उच्च शिक्षा मंत्री ने छात्रावास परिसर का निरीक्षण कर दिए आवश्यक दिशा निर्देश उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार ने भोपाल स्थित शासकीय महारानी लक्ष्मी बाई कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय में आयोजित पुष्पांजलि कार्यक्रम के उपरांत महाविद्यालय के छात्रावास परिसर का औचक अवलोकन किया। श्री परमार ने छात्राओं से संवाद कर ,उन्हें प्रदान की जा रही सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की। श्री परमार ने छात्राओं के पठन-पाठन के लिए आवश्यक सभी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। छात्राओं के लिए उत्तम एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन प्रबंधन के लिए रसोई को पुनः संचालित करने के निर्देश दिए। छात्रावास के पुस्तकालय को नवीनतम पुस्तकों एवं शिक्षण सामग्री से समृद्ध करने को कहा। छात्राओं की सुरक्षा एवं सुविधाओं के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए। छात्रावास परिसर की स्वच्छता की सुनिश्चिता एवं खेलकूद सुविधाएं उपलब्ध करने को भी कहा। छात्रावास में छात्राओं की संख्या वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक क्रियान्वयन के निर्देश भी दिए।   recent visitors 43

गरियाबंद में फिर नजर आया तेंदुआ, स्थानीय निवासियों में भय का माहौल

गरियाबंद छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में एक बार फिर तेंदुआ नजर आया है, जिससे क्षेत्र के लोग दहशत में हैं. तेंदुआ प्रमुख रूप से पैरी कॉलोनी, जेल वार्ड, जिला अस्पताल, पानी ठंकी और आसपास के मोहल्लों में देखा गया है. पिछले कुछ दिनों से यह तेंदुआ लगातार गरियाबंद के कुत्तों का शिकार कर रहा है, जिससे स्थानीय निवासियों में भय का माहौल है. विशेष जानकारी के अनुसार, तेंदुआ महाविद्यालय और खेल मैदान के पास स्थित टिकरे पर भी देखा गया है. इस घटनाक्रम के बाद, लोग अपने घरों से बाहर निकलने में डर रहे हैं और पालतू जानवरों को बाहर भेजने से भी बच रहे हैं. स्थानीय लोग वन विभाग से तेंदुए को जल्द सुरक्षित स्थान पर भेजने की अपील कर रहे हैं, ताकि इलाके में शांति बहाल हो सके. वन विभाग ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अपनी सतर्कता बढ़ा दी है. विभाग ने कर्मचारियों की ड्यूटी बढ़ाई है और मुनादी कर क्षेत्रवासियों को तेंदुआ के बारे में सचेत किया जा रहा है. वन विभाग का अनुमान है कि तेंदुआ गर्भवती हो सकती है और प्रसव के बाद वह इस क्षेत्र से बाहर निकल जाएगी. recent visitors 54

देवली-उनियारा विधानसभा सीट पर एसडीएम को नरेश मीणा ने थप्पड़ मारा था, अब हवालात से आई पहली तस्वीर सामने

जयपुर राजस्थान की देवली-उनियारा विधानसभा सीट पर उपचुनाव के दौरान एसडीएम को थप्पड़ मारने वाले नरेश मीणा की हवालात से पहली तस्वीर सामने आई है। इस तस्वीर में वह जमीन पर लेटा हुआ नजर आ रहा है। बता दें कि पुलिस ने नरेश मीणा को गुरुवार को गिरफ्तार किया था। देवली-उनियारा विधानसभा सीट पर वोटिंग के दौरान उसने एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मारा था। दरअसल, नरेश मीणा ने वोटिंग के दौरान इस पर ऐतराज जताया था कि आखिर उसका चुनाव चिन्ह इतना हल्का क्यों दिख रहा है। इसी बात को लेकर दोनों के बीच इस कदर विवाद बढ़ गया कि बात हाथापाई तक आ पहुंची। नरेश मीणा ने एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया। इसके बाद दोनों के समर्थक भी आपस में भिड़ गए। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने स्थिति को काबू में कर लिया। फिलहाल, स्थिति पूरी तरह नियंत्रित है। लेकिन, इस दौरान नरेश मीणा के समर्थकों ने जमकर उत्पात मचाया था। जहां कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया] तो वहीं सार्वजनिक संपत्तियों को भी व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचाया। उपद्रव के बाद नरेश मीणा फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में जुट गई। इतना ही नहीं, उसने अपने सोशल मीडिया एक्स हैंडल से वीडियो साझा कर पुलिस-प्रशासन को चुनौती देते हुए कहा कि अगर किसी में हिम्मत है, तो मुझे गिरफ्तार करके दिखाए। मैं किसी भी कीमत पर आत्मसमर्पण नहीं करूंगा। अगर किसी को लगता है कि मैं आत्मसमर्पण के लिए तैयार हो जाऊंगा, तो मैं एक बात स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि यह उसकी गलतफहमी है। इसके साथ ही उसने अपने समर्थकों को संदेश दिया है कि आगे की योजना के बारे में आपको जानकारी दे दी जाएगी कि आगे क्या कदम उठाना है। फिलहाल मैं ठीक हूं। कोई दिक्कत नहीं है। आखिरकार पुलिस ने काफी उठापटक के बाद नरेश मीणा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इसके अलावा, उसके 60 समर्थकों को भी गिरफ्तार किया गया है। नरेश मीणा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा-189(2), 190, 115(2), 121(2), 132, 223(a), 351(2), 109(1) और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 132, 131 के तहत केस दर्ज किया है।   recent visitors 64

पुष्पा 2: द रूल का ट्रेलर 17 नवंबर को पटना के गांधी मैदान में होगा लॉन्च

मुंबई, दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार अल्लू अर्जुन की आने वाली फ़िल्म पुष्पा 2: द रूल का ट्रेलर 17 नवंबर को पटना के गांधी मैदान में लॉन्च होगा। 17 नवंबर को पुष्पा 2: द रूल का मच अवेटेड ट्रेलर लॉन्च होगा। ये ग्रैंड इवेंट गांधी मैदान में गंगा किनारे शाम 5 बजे से शुरू होगा और इसे एक शानदार आयोजन के रूप में देखा जा रहा है। ट्रेलर में एक्शन, ड्रामा, और स्टार पावर का बेहतरीन तालमेल होगा, और यह फैंस को पुष्पा 2 की अगली कड़ी का पहला नजारा देगा। अपने सोशल मीडिया हैंडल पर घोषणा करते हुए, माइथ्री मूवी मेकर्स ने ट्रेलर लॉन्च इवेंट की तारीख और समय के साथ फिल्म का एक पोस्टर साझा किया है, “गंगा तट पर सबसे बड़े इवेंट के लिए तैयार हो जाइए 3 दिन बाकी हैं 17 नवंबर को गांधी मैदान, पटना में शाम 5 बजे से ग्रैंड #पुष्पा 2dरूल ट्रेलर लॉन्च इवेंट होगा” पुष्पा 2: द रूल, सुकुमार द्वारा निर्देशित और अल्लू अर्जुन, रश्मिका मंदाना और फहाद फासिल द्वारा स्टारर है। इस फिल्म का निर्माण माइथ्री मूवी मेकर्स और सुकुमार ने किया है और म्यूजिक टी सीरीज ने दिया है। यह फिल्म 05 दिसंबर को रिलीज होगी। recent visitors 66

उमरिया जिले का विश्व प्रसिद्ध बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व वैश्विक धरोहर है

भोपाल उमरिया जिले का विश्व प्रसिद्ध बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व वैश्विक धरोहर है। यहाँ की जैव-विविधता, दुर्लभ वन्य-जीवों की उपलब्धता, कल्चुरी कालीन किला और हिन्दू देवताओं के प्राचीन मंदिर पूरी दुनिया में दुर्लभ हैं। टाइगर रिजर्व की स्थापना के पूर्व यहाँ का जंगल एवं पहाड़ियों के बीच निर्मित किला एवं अन्य संरचनाएँ रीवा रियासत के महाराजा की निजी सम्पत्ति हुआ करती थी। किले में राजकीय कार्यों के अलावा राज परिवार का निवास भी होता था। घनघोर जंगल राजा और महाराजाओं का निजी शिकारगाह होता था, जहाँ देश-विदेश के राजा समय-समय पर आकर आखेट करते थे। कालांतर में देश की आजादी के बाद तत्कालीन रीवा महाराजा मार्तण्ड सिंह ने सन् 1967 में किला सहित पूरा जंगल मध्यप्रदेश शासन को नेशनल पार्क स्थापित करने एवं वन्य-जीव संरक्षण के लिये दान में दिया था। इसके बाद मध्यप्रदेश शासन द्वारा बाँधवगढ़ नेशनल पार्क की स्थापना की गयी। वर्ष 1981 के बाद यहाँ पर केन्द्र की टाइगर परियोजना शुरू की गयी। बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मौजूद जल-स्रोतों से यहाँ की जैव-विविधता देश-दुनिया के जंगलों की अपेक्षा उत्कृष्ट रही है। यहाँ जल-स्रोतों की मौजूदगी हमेशा से रही है, जिससे हरियाली बनी रहती है। पर्याप्त जल-स्रोत, चारागाह, सघन वन, शाकाहारी, मांसाहारी वन्य-जीवों के लिये आवश्यक आहार और रहवास की अनुकूलता होने से यहाँ दुर्लभ से दुर्लभ वन्य-प्राणी एवं पक्षी अपना आश्रय-स्थल बनाये हुए हैं। बाघों की सघन मौजूदगी पूरी दुनिया में बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व को एक अलग पहचान दिलाती है। टाइगर रिजर्व 1526 वर्ग किलोमीटर के कोर एवं बफर क्षेत्र में फैला हुआ है। इस जंगल में वर्ष 2022 की गणना अनुसार 165 से भी ज्यादा बाघों की संख्या पायी गयी थी। इसके अलावा कान्हा टाइगर रिजर्व से 49 बायसन लाकर वर्ष 2012 में बसाये गये थे, जो अनुकूल परिस्थितियों में बढ़कर वर्तमान में लगभग 200 की संख्या में स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं। टाइगर रिजर्व में दुनिया में विलुप्ति की कगार पर पहुँच चुके विशेष प्रजाति के बारहसिंघा भी कान्हा टाइगर रिजर्व से लाकर बाँधवगढ़ में बसाये गये हैं। वर्ष 2018 से जंगली हाथियों ने भी अपना रहवास यहाँ बनाया है। तकरीबन 70 से 80 जंगली हाथी टाइगर रिजर्व के अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न झुण्डों में विचरण कर रहे हैं। टाइगर रिजर्व में बाघ, बायसन, जंगली हाथी के अलावा नीलगाय, भालू, तेंदुआ, चीतल और सांभर यहाँ के मुख्य वन्य-प्राणी हैं, जो पर्यटन के साथ जैव-विविधता का केन्द्र हैं। टाइगर रिजर्व बाँस एवं साल के सघन वृक्षों से घिरा हुआ है। यहाँ वन्य-जीव दर्शन के अलावा हिन्दू मान्यताओं के कई प्राचीन धार्मिक मंदिर भी हैं। इसमें बाँधवगढ़ किले के समीप स्थित भगवान राम-जानकी मंदिर आस्था का प्रमुख केन्द्र है। यहाँ पर प्रतिवर्ष जन्माष्मी के पर्व पर मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें देशभर से हिन्दू धर्मावलम्बी पूजा-दर्शन के लिये पहुँचते हैं। बाँधवगढ़ की पहाड़ियों पर स्थित कबीर गुफा कबीरपंथियों की आस्था का केन्द्र है। प्रतिवर्ष अगहन पूर्णिमा के दिन यहाँ पर कबीरपंथियों का जमावड़ा होता है और कबीर गुफा में कबीर अनुयायी उनकी पूजा-पाठ करते हैं। संत शिरोमणि सेन की तपोस्थली भी बाँधवगढ़ में ही रही है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा संत सेन का मंदिर एवं समाधि-स्थल बनाने के लिये टाइगर रिजर्व की सीमा से लगे हुए क्षेत्र में भूमि आरक्षित की गयी है, जिसमें निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है। बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों के लिये विश्व प्रसिद्ध है। इसमें पहली बार दो दिवसीय बटरफ्लाई सर्वे कराया गया। टाइगर रिजर्व के 15 कैम्पों में 61 सदस्यों ने रिजर्व के जंगलों में पैदल सर्वे किया और सर्वे शीट पर तितलियों की जानकारी को अपडेट किया। दो दिवसीय सर्वे में तितलियों की 100 से अधिक प्रजातियाँ पायी गयीं। इनमें 5 से अधिक तितलियाँ दुर्लभ प्रजाति की हैं। कॉमन रैड आई, ब्लैक राजा, किंग क्रो और इंडियन डॉर्ट लेट जैसी तितली भी सर्वे में पायी गयी। तितलियों के सर्वे में मोबाइल एप का उपयोग नहीं किया गया। हाथ से ही सर्वे शीट में पैन से जानकारी को अपडेट किया गया।   recent visitors 71

जन मन योजना और सिकलसेल उन्मूलन मिशन जनजाति कल्याण का महाभियान : राज्यपाल पटेल

जनजातीय गौरव दिवस, इतिहास के एक बड़े अन्याय को दूर करने का है ईमानदार प्रयास : प्रधानमंत्री मोदी भगवान बिरसा मुंडा ने मातृभूमि के गौरव और सम्मान की रक्षा के लिये अपना सर्वस्व बलिदान दिया प्रधानमंत्री मोदी ने मध्यप्रदेश के दो जनजातीय संग्रहालय राष्ट्र को किये समर्पित जन मन योजना और सिकलसेल उन्मूलन मिशन जनजाति कल्याण का महाभियान : राज्यपाल पटेल भगवान बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों के अत्याचार के विरुद्ध जनजातीय समाज को किया खड़ा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनजातीय समाज आज भी हमारी संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखे है देश में चल रहा है जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास को समक्ष लाने का अभियान बाणसागर बांध से शहडोल जिले के लोगों को भी मिलेगा पानी शहडोल में बनाया जायेगा स्थाई हेलीपेड जनजातीय गौरव दिवस का राज्यस्तरीय कार्यक्रम शहडोल में हुआ आयोजित भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पूरे देश में राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनायी जा रही है। जनजातीय गौरव दिवस इतिहास के एक बहुत बड़े अन्याय को दूर करने का एक ईमानदार प्रयास है। आजादी के बाद जनजातीय वर्ग के योगदान को इतिहास में वह स्थान नहीं दिया गया, जिसके लिये वे हकदार थे। जनजातीय समाज वो है, जिसने राजकुमार राम को भगवान बनाया। भारत की संस्कृति और आजादी के रक्षा के लिये सैकड़ो वर्षों की लड़ाई का नेतृत्व दिया। आजादी के बाद के दशकों में जनजातीय वर्ग के अनमोल योगदान को मिटाने की कोशिश की गई। इसके पीछे स्वार्थ भरी राजनीति थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज के समग्र कल्याण के लिये अनेक योजनाएँ संचालित कर उनके आर्थिक और सामाजिक विकास का कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर बिहार जिले के जमुई में आयोजित राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस पर संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जन्म जयंती पर 6 हजार करोड़ रूपये से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया है। इसमें जनजातीय वर्ग के बच्चों के भविष्य को संवारने वाले स्कूल और हॉस्टल, जनजातीय वर्ग की महिलाओं के लिये स्वास्थ्य सुविधा, जनजातीय क्षेत्रों को जोड़ने वाली सैकड़ों किलोमीटर की सड़कें, जनजातीय वर्ग की संस्कृति को समर्पित संग्रहालय एवं जनजातीय वर्ग के डेढ़ लाख परिवारों को पक्के घर के स्वीकृति पत्र वितरित किये गये हैं। साथ ही आज देव दीपावली के दिन 11 हजार से अधिक जनजातीय परिवारों को अपने घर में प्रवेश कराया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने मध्यप्रदेश के छिन्दवाड़ा के बादल भोई जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय एवं जबलपुर के राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह स्वंतत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का वर्चुअली लोकापर्ण किया। मध्यप्रदेश के शहडोल जिला मुख्यालय पर आयोजित राज्यस्तरीय जनजातीय गौरव दिवस समारोह में राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उप मुख्यमंत्री एवं शहडोल जिले के प्रभारी मंत्री राजेन्द्र शुक्ल, कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल, सीधी सांसद डॉ. राजेश मिश्रा, अध्यक्ष कोल विकास प्राधिकरण रामलाल रोतेल सहित जन-प्रतिनिधि मौजूद रहे। राज्यपाल पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन कर किया। अतिथियों का स्वागत जनजातीय परंपरा अनुसार किया गया। जनजातीय कल्याण के लिये राज्य सरकार कर रही है बेहतरीन कार्य : राज्यपाल पटेल राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सम्पूर्ण देश में जनजातीय कल्याण के अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं। पीएम जन मन योजना और सिकल सैल उन्मूलन मिशन, जनजाति कल्याण का महाभियान है। इस महाभियान में राज्य सरकार द्वारा जनजाति कल्याण के बेहतरीन कार्य किए जा रहे हैं। अनेक विभागों के माध्यम से अति पिछड़ी जनजातियों को विकास की मुख्यधारा में लाने के कारगर प्रयास लगातार जारी है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि सिकल सैल उन्मूलन मिशन का संकल्प मध्यप्रदेश की धरती से लिया जाना प्रदेश के लिए सौभाग्य की बात है। केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा सिकल सैल उन्मूलन की दिशा में जाँच और जागरूकता के कार्य सघन स्तर पर किए जा रहे हैं। प्रदेश में अब तक 82 लाख लोगों की सिकलसेल स्क्रीनिंग पूर्ण हो गई है। राज्यपाल पटेल ने शहडोल ज़िले के सिकल सैल जाँच कार्यों की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को सिकल सैल कार्ड वितरण का कार्य जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। राज्यपाल पटेल ने कहा कि सिकल सैल से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय, इस रोग के प्रति जागरूकता ही है। उन्होंने कहा कि शादी के पूर्व लड़का-लड़की सिकल सैल कार्ड का मिलान ज़रूर करें। उन्होंने कहा कि गर्भधारण के दौरान और जन्म के बाद भी बच्चे के सिकल सैल की जाँच ज़रूर कराएं। राज्यपाल पटेल ने सभी से आह्वान किया कि सिकल सैल की जाँच और जागरूकता हम सभी की सामूहिक ज़िम्मेदारी है। राज्यपाल पटेल ने भगवान बिरसा मुंडा की जन्म जयंती पर उनका नमन किया और प्रदेश एवं देश के महान क्रांतिकारी, जनजातीय सपूतों का पुण्य स्मरण भी किया। उन्होंने जनजाति गौरव दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जबलपुर और छिंदवाड़ा के जनजातीय संग्रहालय के लोकार्पण के प्रति आभार ज्ञापित किया। जल, जंगल और जमीन का अधिकार जनजातीय समाज का है मूल अधिकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल, जंगल और जमीन का अधिकार जनजातीय समाज का मूल अधिकार है। इसे अंग्रेज उनसे छीनना चाहते थे। भगवान बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों के अत्याचार, अनाचार के खिलाफ जनजातीय समाज को खड़ा किया और अंग्रेजों के खिलाफ दो स्तरों पर लड़ाई लड़ी। एक ओर उन्होंने जनजातीय समाज के मूल अधिकार की रक्षा की और दूसरी ओर ईसाई मिशनरियों द्वारा हमारे धर्म के साथ छेड़छाड़ कर हमारे जनजातीय भाइयों को ईसाई बनाने के कुत्सित प्रयासों को ध्वस्त किया। आज हम भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर उन्हें हृदय से स्मरण और नमन करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास को देश के समक्ष लाने का अभियान चलाया है। उन्होंने प्रतिवर्ष देश भर में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस मनाने का निर्णय मध्यप्रदेश में ही लिया। आज पूरे देश में भगवान बिरसा मुंडा जयंती मनाई जा रही है। भगवान बिरसा मुंडा का जीवन हम सबके लिए मार्गदर्शक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा … Read more