Sunday, July 5, 2026 1:09 pm

आसपास खून के धब्बे और जेब में मिले डेढ़ लाख रुपये, छत्तीसगढ़-बलौदा बाजार के तालाब में उतराता मिला महिला का शव

बलौदा बाजार. बलौदा बाजार जिले के ढाबाडीह गांव में एक संदेहास्पद स्थिति में महिला की लाश मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया है। पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि बंद पड़े पत्थर खदान के तालाब में महिला का शव तैरता पाया गया है। महिला का शव खदान के तालाब के अंदर पाया गया, लेकिन इसके आसपास खून के धब्बे और घसीटने के निशान पाए गए हैं, जिससे मामला संदेहास्पद बन गया है। बलौदाबाजार पुलिस और फोरेंसिक टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई और शव को बाहर निकाला। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि महिला के कुर्ते से तीन गड्डियां बरामद की गईं, जिनमें हर गड्डी में 500-500 रुपये के नोट थे। पुलिस के अनुसार, डेढ़ लाख रुपये बताया जा रहे हैं। यह बरामदगी पूरे मामले को और अधिक जटिल बना रही है, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं है कि महिला की मौत एक हादसा था या फिर किसी साजिश का हिस्सा। फोरेंसिक टीम और पुलिस की जांच जारी पुलिस ने महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। एफएसएल (Forensic Science Laboratory) टीम ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य एकत्रित किए। बलौदाबाजार सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के एसडीओपी निधि नाग ने पुष्टि करते हुए बताया कि महिला के शव के पास खून के धब्बे भी मिले हैं, जो घटना की गंभीरता को दर्शाते हैं। उन्होंने बताया कि मामले की विवेचना जारी है और पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। क्या हो सकती है घटना की वजह महिला की लाश के पास से मिले नोटों की गड्डियों ने पुलिस को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि मामला केवल हत्या का नहीं हो सकता। महिला का शव खदान के पानी में मिलने से यह भी अंदेशा जताया जा रहा है कि उसे जानबूझकर इस स्थान पर डाला गया हो सकता है। फिलहाल, पुलिस इस पहलू पर भी जांच कर रही है कि ये नोट किसके थे और क्या महिला के साथ किसी प्रकार का अपराध हुआ है। इस रहस्यमय घटना ने इलाके के लोगों में भय और चिंता का माहौल बना दिया है। पुलिस ने आम जनता से किसी भी प्रकार की जानकारी मिलने पर तत्काल अधिकारियों से संपर्क करने की अपील की है। recent visitors 82

‘एसडीएम को तीन-चार थप्पड़ और धरने चाहिए थे’, राजस्थान-नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल उतरे नरेश के समर्थन में

जोधपुर. आरएलपी सुप्रीमो व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल देवली-उनियारा से निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा के समर्थन में उतर आए हैं। समरावता एसडीएम थप्पड़ कांड को लेकर बेनीवाल ने नरेश मीणा का समर्थन करते हुए कहा- नरेश ने सही किया, उसे तो तीन-चार थप्पड़ मारने चाहिए थे। सोमवार को बेनीवाल जोधपुर में अनीता चौधरी हत्याकांड के विरोध सभा में बोल रहे थे। इस दौरान बेनीवाल ने अपने समर्थकों से कहा- ये अमित (एसडीएम) मेरे नागौर में रहा हुआ है। इसने मेरे लोगों को कितना तंग किया, तुम्हें पता है? किस तरह माइनिंग पर रेड पड़ी थी, बंद किया था। बेनीवाल बोले कि इस घटना को जाट वर्सेज मीणा बनाने की क्या आवश्यकता है? अच्छा हुआ इसके एक झापड़ (थप्पड़) मारा, उसके तीन-चार झापड़ धरने चाहिए थे। अच्छा रहा। मैं मार नहीं पाया। मेरे वाला काम नरेश ने कर दिया। ठीक किया। अब हर जगह मैं ही थोड़े मारता घूमूंगा। बोले जबरदस्ती जाट-मीणा क्यों बना रहे हो बेनीवाल ने कहा- आप सोशल मीडिया पर क्यों समाज की बात कर रहे हो? आप जानते हो, उसके बारे में कौन है? कहां का रहने वाला है? उसकी क्या हिस्ट्री है? जबरदस्ती जाट मीणा बना रहे हो। जिसने थप्पड़ खाया और जिसने थप्पड़ मारा, वो कैसा है। उन दोनों के बारे में पता तो होना चाहिए। जोधपुर में हनुमान बेनीवाल की सभा में पहुंचे लोग। अनीता चौधरी हत्याकांड को कमजोर करने की कोशिश हो रही बेनीवाल ने कहा अनीता चौधरी हत्याकांड में समाज के धरने को खत्म करवाने के लिए सरकार समाज के ही थानेदार, सीआई को भेजकर टास्क दे रही है। उन्हें भी अच्छी पोस्टिंग की चाहत है। हमारे ही समाज के अफसर अच्छी पोस्टिंग के प्रलोभन में इसे कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। हमारे समाज के ही अफसरों को भेजकर धरना समाप्त कराया जा रहा है। यह बहुत बड़ी कमी है। यही दुर्भाग्य है। अफसर सस्पेंड होते हैं, तब समाज याद आता है सांसद बेनीवाल ने कहा- आज जो अफसर सरकार को खुश करने के लिए धरना समाप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। इन्हें नंबर बढ़ाने हैं। अच्छी पोस्टिंग का लालच है। ये ही अफसर जब फंसते हैं तो लाखों देते हैं। जब ये सस्पेंड होते हैं, तब इन्हें समाज याद आता है। यही तो दुर्गति है। recent visitors 185

आश्रम अधीक्षक की मौत, छत्तीसगढ़-बलरामपुर में कार-पिकअप की जोरदार टक्कर

बलरामपुर रामानुजगंज. बलरामपुर रामानुजगंज बीती रात आठ बजे के करीब पहाड़ी कोरवा आवासीय विद्यालय के प्रभारी अधीक्षक अजीत कुमार नेताम की कार की टक्कर लाइवलीहुड कॉलेज के समीप विपरीत दिशा से आ रही पिकअप से हो गई। जिससे मौके पर ही अजीत कुमार नेताम की मौत हो गई। वहीं पिकअप ड्राइवर के पैर में गंभीर चोट लगी है। घटना की सूचना पर तत्काल मौके पर हाईवे पेट्रोलिंग टीम और कोतवाली पुलिस पहुंची। घायल ड्राइवर को तत्काल जिला अस्पताल इलाज के लिए ले जाया गया। मिली जानकारी के मुताबिक, पहाड़ी कोरवा आवासीय विद्यालय के प्रभारी अधीक्षक अजीत कुमार नेताम बलरामपुर बाजार करके वापस रात्रि आठ बजे के करीब वापस अपने कार से जा रहे थे। इसी दौरान पूर्व जिला पंचायत सदस्य धीरज सिंह देव के घर के सामने खड़ी पल्सर में कार ने टक्कर मार दी। जिसके बाद कार  तेजी से चांदो रोड की ओर जाने लगी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि अजीत कुमार नेताम की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं पिकअप ड्राइवर के पैर में गंभीर चोट लगी। घटना की सूचना मिलने पर हाईवे पेट्रोलिंग की टीम पहुंची। घायल को तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया। मिलनसार, व्यवहारिक एवं सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले अजीत कुमार नेताम की आकस्मिक मृत्यु से ग्राम देवगई एवं ग्राम सिंदूर में शोक की लहर है। अजीत के माता-पिता सिंदूर गांव में रहते हैं। वहीं अजीत ने अपना घर देवगई में बनाए था। जहां वह अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहता था। recent visitors 34

मुख्यमंत्री साय ने मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज दंतेवाड़ा में बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की  पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय और परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित थे। इस अवसर पर विधायक श्री चैतराम अटामी, राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती ओजस्वी मण्डावी तथा अन्य जनप्रतिनिधियों सहित मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, कमिश्नर बस्तर श्री डोमन सिंह सहित अन्य अधिकारीगण भी उपस्थित थे। recent visitors 33

पिता के ढाबे में ग्राहक बनकर पहुंची पुलिस, राजस्थान-जोधपुर से रीट पेपर लीक की आरोपी इमरती गिरफ्तार

जोधपुर. जोधपुर रेंज की स्पेशल साइक्लोनर टीम ने 2021 के बहुचर्चित रीट पेपर लीक घोटाले में तीन साल से फरार चल रही इमरती बिश्नोई को गिरफ्तार कर लिया है। इमरती अपने पिता के ढाबे पर छिपकर रह रही थी। पुलिस के लिए ये एक बड़ी गिरफ्तारी है, क्योंकि इमरती तीन बार पुलिस को चकमा देकर भाग चुकी है। उस पर 25 हजार का इनाम भी घोषित किया जा चुका है। इमरती को पकड़ने के लिए पुलिस ने इस बार बड़ी चालाकी से काम लिया। इस बार पुलिस ने दो-दो सदस्यीय टीमों को ग्राहक बनाकर ढाबे पर भेजा। ढाबे के पीछे रहने के लिए इमरती ने एक छिपा हुआ ठिकाना बना रखा था। टीम ने योजनाबद्ध तरीके से मौके पर पहुंचकर इमरती को दबोच लिया। जोधपुर रेंज आईजी विकास कुमार ने बताया कि उमरलाई निवासी इमरती बिश्नोई के खिलाफ 2021 की रीट परीक्षा के दौरान फर्जीवाड़े का मामला दर्ज हुआ था। मौके से पुलिस ने उसके दस्तावेज और परीक्षा प्रवेश पत्र बरामद किए थे, जिसमें कंप्यूटर की मदद से छेड़छाड़ की गई थी। जांच में सामने आया कि इमरती से पहले परीक्षा में फर्जी अभ्यर्थी बैठाने का ठेका छमी बिश्नोई ने लिया था। छमी को पुलिस ने तीन महीने पहले वृंदावन से गिरफ्तार किया था। इस मामले में पूर्व में संगीता, किरण और भंवरी सहित कई अन्य आरोपियों को भी पुलिस ने पकड़ा था। पुलिस इमरती बिश्नोई से पूछताछ कर रही है। उम्मीद है कि इससे रीट पेपर लीक घोटाले के अन्य पहलुओं पर प्रकाश पड़ेगा और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य दोषियों को भी गिरफ्तार किया जा सकेगा। recent visitors 67

मोहन सरकार के प्लान से झूम उठेंगे बेरोजगार युवा, पांच साल में मिलेंगी ढाई लाख नौकरियां,कैडर वार भरे जाएंगे पद

भोपाल  मध्य प्रदेश की मोहन सरकार युवाओं को सौगात देने जा रही है। नौकरी के इंतजार में बैठे युवाओं के लिए सरकारी खुशखबरी है। अगले पांच सालों में सरकार ने सभी विभागों में रिक्त पड़े ढाई लाख पदों पर भर्ती का फैसला किया है। ये भर्तियां सरकार सीधी भर्ती प्रक्रिया से करेगी। अपने संकल्प को दोहराते हुए मोहन सरकार ने यह घोषणा की है। इसके लिए सरकार हर साल भर्ती कैलेंडर जारी करेगी, जिसमें अलग-अलग पदों पर भर्ती की समय-सीमा तय होगी। बेरोजगारी की समस्या से निपटने में मदद मिली वहीं, सरकार के इस फैसले से उन युवाओं को फायदा होगा जो सरकारी नौकरी की तलाश में हैं। इससे बेरोजगारी की समस्या से निपटने में भी मदद मिलेगी। यह फैसला 22 नवंबर 2022 को सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी किए गए उस आदेश को वित्त विभाग द्वारा 31 अक्टूबर 2024 से रद्द करने के बाद लिया गया है, जिसमें विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। चल रहीं नियुक्तियां प्रभावित नहीं हालांकि, वित्त विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि जिन पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है या नियुक्तियां हो चुकी हैं, वे इस आदेश से प्रभावित नहीं होंगी। जहां भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है उन पदों की भर्ती को निरस्त नहीं किया गया है। वित्त विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि 16 और 22 नवंबर 2022 को जारी किए गए सर्कुलर में जिन पदों पर 30 अक्टूबर 2024 तक नियुक्तियां हो चुकी हैं, उन्हें भी रद्द नहीं माना जाएगा। आने वाले सालों में होने वाली भर्ती को लेकर वित्त विभाग ने सामान्य प्रशासन विभाग के 22 नवंबर 2022 को जारी आदेश में 31 अक्टूबर 2024 से प्रभाव शून्य घोषित कर दिया है। जिसमें पदों की भर्ती के लिए आदेश जारी किए गए थे। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जहां भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है उन पदों की भर्ती को निरस्त नहीं किया गया है। ये भर्तियां नहीं होंगी निरस्त वित्त विभाग ने सर्कुलर में स्पष्ट किया है कि, 16 नवंबर 2022 और 22 नवंबर 2022 को जारी किए गए सर्कुलर में निकाली गई भर्तियों में से ऐसे रिक्त पदों पर जिन विभागों ने 30 अक्टूबर 2024 तक नियुक्तियां कर दी हैं, वह निरस्त नहीं मानी जाएंगी। इसके साथ ही सीधी भर्ती के जिन रिक्त पदों पर भर्ती के लिए कार्यवाही संबंधी पत्र कर्मचारी चयन मंडल और एमपी पीएससी या अन्य भर्ती संस्था को भेजे गए हैं या नियुक्ति की जा चुकी है पर कार्यभार ग्रहण करना शेष है तथा परीक्षा परिणाम के आधार पर नियुक्ति पत्र जारी किया जाना शेष है। ऐसी भर्ती भी निरस्त नहीं मानी जाएगी। 5 प्रतिशत पद ही सीधी भर्ती से भरने का आदेश स्थगित वित्त विभाग के निर्देशों में कहा है कि 3 जनवरी 2013 और 13 अगस्त 2021 को जारी निर्देशों में संवर्ग में स्वीकृत पदों के आधार पर 5 प्रतिशत पदों को ही सीधी भर्ती से भरने के लिए निर्णय लिया है। 18 नवंबर को जारी सर्कुलर में पूर्व में तय लिमिट की प्रभावशीलता को वर्ष 2028-29 तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। MPPSC के भर्ती के लिए भेजे पत्र इसके अलावा, जिन पदों पर कर्मचारी चयन मंडल या MPPSC को भर्ती के लिए पत्र भेजे जा चुके हैं या नियुक्ति पत्र जारी किए जा चुके हैं, पर उम्मीदवारों ने अभी तक जॉइन नहीं किया है, उन पदों पर भी भर्ती प्रक्रिया जारी रहेगी। '50 पद रिक्त तो यह फॉर्मूला लागू होगा' वहीं, जिन संवर्गों में 51 से 200 पद रिक्त हैं, वहां रिक्त पदों की संख्या के आधार पर भर्ती की जाएगी। अगर 33% से कम पद रिक्त हैं, तो उन्हें एक ही बार में भरा जाएगा। अगर 33% से ज्यादा लेकिन 66% से कम पद रिक्त हैं, तो 8% पदों को 2024-25 में, 46% पदों को 2025-26 में और 46% पदों को 2026-27 में भरा जाएगा। ऐसे भरे जाएंगे पद ऐसे संवर्ग जिनमें रिक्त पदों की संख्या 51 से 200 तक है, उनमें पदों की पूर्ति तीन चरणों में की जाएगी। यानी सीधी भर्ती के यदि कुल पदों में से रिक्त पद 33 प्रतिशत से कम है तो एक बार में भरे जाएंगे। यदि 33 प्रतिशत से अधिक अथवा 66 प्रतिशत से कम हैं तो वर्षवार प्रथम वर्ष 2024-25 में 8 प्रतिशत, द्वितीय वर्ष 2025-26 में 46 प्रतिशत और तृतीय वर्ष 2026-27 में 46 प्रतिशत भरे जाएंगे। 66 प्रतिशत से अधिक रिक्त पद रिक्त पद 66 प्रतिशत से अधिक हैं तो वर्षवार चार वर्ष में प्रथम वर्ष आठ प्रतिशत, द्वितीय वर्ष 31 प्रतिशत, तृतीय वर्ष 31 प्रतिशत और चतुर्थ वर्ष 30 प्रतिशत भरे जाएंगे। ऐसे संवर्ग जिनमें रिक्त पदों की संख्या 200 से अधिक है, वहां गणना के अनुसार रिक्त पद 25 प्रतिशत से कम होने पर एक बार में भरे जाएंगे। 25 प्रतिशत से अधिक व 50 प्रतिशत से कम है तो वर्षवार प्रथम वर्ष 2024-25 में 8 प्रतिशत, द्वितीय वर्ष 2025-26 में 46 प्रतिशत और तृतीय वर्ष 2026-27 में 46 प्रतिशत भरे जाएंगे। 50 प्रतिशत से अधिक व 75 प्रतिशत से कम होने पर प्रथम वर्ष 2024-25 में 8 प्रतिशत, द्वितीय वर्ष 2025-26 में 31 प्रतिशत, तृतीय वर्ष 2026-27 में 31 प्रतिशत और चतुर्थ वर्ष 2027-28 में 30 प्रतिशत पद भरे जाएंगे। 75 प्रतिशत से अधिक रिक्त पद होने पर वर्षवार पांच वर्ष में 2024-25 में 8 प्रतिशत, 2025-26 में 23 प्रतिशत, 2026-27 में 23 प्रतिशत, 2027-28 में 23 प्रतिशत और पांचवें वर्ष 2028-29 में 23 प्रतिशत पद भरे जाएंगे। – वाहन चालकों की नहीं होगी सीधी भर्ती, आउटसोर्स पर रखे जाएंगे मप्र में वाहनों चालकों की सीधी भर्ती नहीं की जाएगी। इसकी जगह वाहन चालक आउटसोर्स पर रखे जाएंगे। विशिष्ट विभाग जहां वाहन चालकों के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती अति आवश्यक है, वे वित्त विभाग को तथ्यों के साथ प्रस्ताव प्रस्तुत कर भर्ती की स्वीकृति ले सकेंगे। इसी तरह चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर भी सीधी भर्ती नहीं की जाएगी। इनकी जगह आउटसोर्स पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रखें जाएंगे। recent visitors 56

राजनीतिक रूप से हैं अहम, राजस्थान-सरकार लेगी उपचुनाव नतीजों के बाद चार बडे़ फैसले

जयपुर. राजस्थान की भाजपा सरकार विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद कुछ बड़े फैसले ले सकती है। इनमें सबसे संवेदनशील निर्णय एसआई भर्ती परीक्षा को लेकर लेना होगा। हालांकि हाईकोर्ट ने एक दिन पहले ही भर्ती परीक्षा को लेकर बड़ा निर्णय दिया है। जिसमें कोर्ट ने इस भर्ती परीक्षा में ट्रेनीज की पॉसिंग आउट परेड और फील्ड पोस्टिंग पर स्टे लगा दिया है। दूसरा, पिछली सरकार के समय बने नए जिले और तीसरा पिछली सरकार के कार्यकाल के अंतिम समय में हुए फैसले। इनके साथ ही प्रदेश में वन स्टेट वन इलेक्शन के मामले में भी तस्वीर साफ होने की उम्मीद की जा रही है। राज्य सरकार ने उपरोक्त तीनों फैसलों के लिए मंत्रियों की कमेटियां गठित की हुई है। ये कमेटियां अपना काम लगभग पूरा भी कर चुकी हैं। एसआई भर्ती परीक्षा को लेकर को कमेटी की रिपोर्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा तक पहुंच भी चुकी है। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में इन तीनों ही मामलों पर सरकार का फैसला सामने आ जाएगा। इस बीच सरकार के गठन के एक वर्ष के कार्यक्रम भी शुरू होने हैं और राइजिंग राजस्थान इन्वेस्टमेंट समिट भी होनी है। ऐसे में कुछ फैसले इन दो बडे़ आयोजनों से पहले और कुछ बाद में आ सकते हैं। एसआई भर्ती परीक्षा एसआई भर्ती परीक्षा रद्द की जानी या नहीं, इस मामले में विधि मंत्री जोगाराम पटेल की अध्यक्षता में गठित मंत्रियों की कमेटी का काम पूरा हो चुका है और सूत्रों की मानें तो कमेटी अपनी रिपोर्ट सीएम भजनलाल शर्मा को सौंप भी चुकी है। फैसला सीएम के स्तर पर ही होना है। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट पर कैबिनेट की आगामी बैठक में चर्चा हो सकती है और यह फैसला कभी भी सामने आ सकता है। इस मामले में सरकर की दुविधा यही है कि परीक्षा रद्द की जाती है तो चयनित अभ्यर्थी कोर्ट का रूख करेंगे। वहीं रद्द नहीं किए जाने की स्थिति में बड़ी संख्या में युवाओं और सरकार के मंत्री किरोड़ीलाल मीणा की नाराजगी सामने आ सकती है। नए जिलों पर फैसला पिछली सरकार के समय बनाए गए 17 नये जिलों के भविष्य को लेकर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की अध्यक्षता में गठित मंत्रियों की समिति भी अपना काम लगभग पूरा कर चुकी है। बताया जा रहा है कि पांच छोटे जिलों को फिर से पुराने जिलों में मर्ज किया जा सकता है। इस बारे में सरकार को 31 दिसंबर तक हर हाल में अपना फैसला करना है, क्योंकि इस के बाद जनगणना कार्य के लिए जिलों की सीमाएं सील कर दी जाएंगी। माना जा रहा है कि चूंकि इस फैसले का कुछ विरोध सामने आ सकता है, इसलिए सरकार की पहली वर्षगांठ के आयोजन पूरे होने के बाद इस बारे में फैसला सार्वजनिक किया जा सकता है। पिछली सरकार के फैसलों को निरस्त करना पिछली सरकार के कार्यकाल के अंतिम समय में किए गए फैसलों की समीक्षा के लिए चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिह खींवसर की अध्यक्षता में गठित समिति का काम भी लगभग पूरा हो चुका है। समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। समिति ने पिछली सरकार के समय हुए भूमि आवंटनों सहित कई फैसलों को देखा है। सामाजिक संस्थाओं को छोड़ कर भूमि आवंटन से ज्यादातर मामलों पर सरकार की गाज गिर सकती है। वन स्टेट वन इलेक्शन निकाय चुनावों से पहले वन स्टेट वन इलेक्शन को लेकर भी राज्य सरकार को फैसला करना है, हालांकि इस फैसले के लिए अभी सरकार के पास कुछ समय रहेगा। प्रदेश की जिन 49 निकायों का कार्यकाल इस माह पूरा हो रहा है उनमें प्रशासक लगना लगभग तय है, क्योंकि अब चुनाव का समय ही नहीं बचा है। वहीं, जनवरी में छह हजार से ज्यादा पंचायतों का कार्यकाल भी समाप्त हो जाएगा। माना जा रहा है कि इनमें भी सरकार प्रशासक लगा कर इसके बाद इस वन स्टेट वन इलेक्शन पर फैसला कर सकती है। recent visitors 79