Sunday, July 12, 2026 5:54 am

रेलवे की भर्ती परीक्षा के लिए कोटा से ग्वालियर के बीच स्पेशल ट्रेन, यहां पर देखें समय सारणी

कोटा  रेलवे की भर्ती परीक्षाएं कोटा में आयोजित होने वाली हैं. इसी की तैयारी को लेकर रेलवे ने अब विशेष ट्रेन चलाई है. यह ट्रेन कोटा से ग्वालियर के बीच आने और जाने का एक-एक फेरा करेगी. कोटा रेल मंडल के वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक रोहित मालवीय ने बताया कि 25 नवंबर को कोटा से 09801 कोटा ग्वालियर ट्रेन रवाना होगी. वहीं वापसी में यह ट्रेन 09802 ग्वालियर से कोटा के बीच 26 नवंबर मंगलवार को रवाना होगी. इसी तरह से कोटा से 27 नवम्बर को 09803 ग्वालियर जाएगी, जबकि वापसी में 28 नवम्बर को 0904 आएगी. इस ट्रेन में 6 स्लीपर, चार सामान्य, एक एसएलआर और एक जनरेटर कोच होगा. यह ट्रेन कोटा से बीना होते हुए झांसी और ग्वालियर जाएगी. कोटा और ग्वालियर को मिलकर 9 स्टेशनों पर इसका ठहराव होगा. कोटा से ग्वालियर ट्रेन की समय सारणी:     कोटा से रवानगी – रात 9:25     बारां – रात 10:13     छबड़ा गुगोर – रात 23:00     रुठियाई – रात 12:05     गुना – रात12:30     अशोकनगर – रात 1:30     बीना – रात 3:40     वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई झांसी- सुबह 07:05     ग्वालियर – सुबह 9:25 ग्वालियर से कोटा ट्रेन की समय सारणी     ग्वालियर से रवानगी – सुबह 10:25     वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई (झांसी) – दोपहर 13.20     बीना – शाम 6:00     अशोक नगर – शाम 7:45     गुना – रात 09:05     रूठियाई – रात 09:50     छबड़ा गुगोर – रात 10:31     बारां – रात 11:43     कोटा – रात 02:00 रेलवे भर्ती परीक्षार्थियों के लिए उक्त ट्रेनें कोटा-ग्वालियर के बीच बारां, छबरा गुगोर, रूठियाई, गुना, अशोकनगर, बीना एवं वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई (झांसी) स्टेशनों पर रुकेंगी। दोनों परीक्षा स्पेशल ट्रेनें कोटा से रात 21.25 बजे प्रस्थान कर बारां 22.13 बजे आगमन, छबरा गुगोर 23.00 बजे आगमन, रूठियाई 00.05 बजे आगमन, गुना 00.30 बजे आगमन, अशोकनगर 01.30 बजे आगमन, बीना 03.40 बजे आगमन एवं वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई(झांसी) 07.05 बजे आगमन कर अगले दिन सुबह 09.25 बजे ग्वालियर पहुंचेंगी। वापसी में ग्वालियर से सुबह 10.25 बजे प्रस्थान कर वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई (झांसी) दोपहर 13.20 बजे, बीना 18.00 बजे, अशोकनगर 19.45 बजे, गुना 21.05 बजे, रूठियाई 21.50 बजे, छबरा गुगोर 22.31 बजे बारां 22.43 बजे आगमन कर रात 02.00 बजे कोटा पहुंचेंगी। कोटा से ग्वालियर के बीच चलने वाली परीक्षा स्पेशल ट्रेनों के एसी कोच पूरी तरह से लॉक रहेंगे। इस बारे में संबधित स्टेशनों को जानकारी दे दी गई है। यात्रियों से अनुरोध है कि ट्रेन की सटीक जानकारी स्टेशन, एनटीईएस अथवा रेल मदद 139 से प्राप्त करें। recent visitors 158

पर्थ टेस्ट मैच के बाद रवि शास्त्री समेत 9 दिग्गजों की भविष्यवाणी फेल

नई दिल्ली बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 2024-25 से पहले कई दिग्गजो ने इस पांच मैचों की टेस्ट सीरीज को लेकर भविष्यवाणी की थी। उन्होंने बताया था कि इंडिया और ऑस्ट्रेलिया में से कौन सी टीम कहां पर मुकाबला जीतने वाली है। हालांकि, पर्थ टेस्ट मैच के बाद रवि शास्त्री समेत 9 दिग्गजों की भविष्यवाणी फेल हो गई। बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के सिर्फ दो ही ऐसे कमेंटेटर थे, जिन्होंने पर्थ टेस्ट मैच को लेकर सबसे सटीक भविष्यवाणी की। हालांकि, किसी ने भी ये नहीं कहा था कि ये मैच ड्रॉ होगा। दो कमेंटेटर्स ने भारत की जीत और 9 कमेंटेटर्स ने ऑस्ट्रेलिया की जीत की भविष्यवाणी पर्थ टेस्ट को लेकर की थी। ऑस्ट्रेलिया में खेली जा रही बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के आधिकारिक ब्रॉडकास्टर्स के कमेंटेटर्स इसमें शामिल हुए थे कि कौन सी कब और कहां मुकाबला जीत सकती है। इसमें फॉक्स क्रिकेट, 7 क्रिकेट, एबीसी स्पोर्ट और स्टार स्पोर्ट्स के 11 कमेंटेटर्स ने भाग लिया। यहां तक कि फोक्स क्रिकेट के लिए कमेंट्री कर रहे रवि शास्त्री ने भी पर्थ टेस्ट मैच में मेजबान ऑस्ट्रेलिया की जीत की भविष्यवाणी की थी, लेकिन उनका ये प्रिडिक्शन फेल रहा। उनके अलावा ग्रेग बेलवेट, ट्रेंट कोपलैंड, एरोन फिंच, डैमियन फ्लेमिंग, माइक हसी, ब्रेंडन जूलियन, साइमन कैटिच और ग्लेन मैकग्रा की भविष्यवाणी फेल रही। वहीं, चैनल 7 की कमेंटेटर कैटी मार्टिन और स्टार स्पोर्ट्स इंडिया के कमेंटेटर जतिन सप्रू ने ही पर्थ में भारतीय टीम के जीतने की भविष्यवाणी की थी। इन्हीं दो कमेंटेटर्स का प्रिडिक्शन सटीक रहा। भारत ने पर्थ में 295 रनों से विशाल जीत दर्ज की। आपको बता दें, इन सभी कमेंटेटर्स ने एडिलेड में पिंक बॉल टेस्ट मैच के लिए भी भविष्यवाणी की है और कहा कि ये मुकाबला सिर्फ और सिर्फ ऑस्ट्रेलिया की टीम जीतने वाली है। अगर भारत इस मुकाबले को जीतने में सफल हो जाता है तो इस बार 11 के 11 कमेंटेटर्स का प्रिडिक्शन फेल हो जाएगा। ड्रॉ होने पर भी इनकी भविष्यवाणी धरी की धरी रह जाएगी। recent visitors 62

मुंबई को हिलाकर रख देने वाले हमले को आज हुए 16 साल, एक हमलावर अजमल कसाब को पड़ा गया था जिंदा

मुंबई  आज से ठीक 16 साल पहले, साल 2008 को मुंबई में एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। यह दिन भारत में आतंकवाद के सबसे बड़े हमलों में से एक के रूप में याद किया जाता है, इसे 26/11 के नाम से जानते हैं। इन हमलों ने मुंबई को 59 घंटे तक आतंकित किया और इन 59 घंटे में हुई घटनाओं ने पूरे देश को दहला दिया था। दरअसल, 26 नवंबर 2008 को पाकिस्तान के 10 आतंकवादी समुद्र मार्ग से मुंबई में प्रवेश किये। इन आतंकवादियों ने समुद्र के रास्ते मुंबई के प्रमुख स्थलों पर हमला करने की योजना बनाई थी। उन्होंने भीड़-भाड़ वाले इलाकों को अपने निशाने पर रखा था। रात के अंधेरे में यह आतंकवादी नौका के जरिए मुंबई के कोलाबा क्षेत्र के पास ताज होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट होटल, सीएसटी रेलवे स्टेशन और नरीमन हाउस में घुस गए थे। आतंकवादियों ने मुंबई में पहले ताज होटल और ओबेरॉय ट्राइडेंट होटल पर कब्जा किया, जहां उन्होंने होटल के कर्मचारियों और मेहमानों को बंधक बना लिया। इसके बाद, उन्होंने कोलाबा इलाके के सीएसटी रेलवे स्टेशन पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें कई निर्दोष मारे गए। इसी दौरान, नरीमन हाउस में भी आतंकवादियों ने घुसकर कई लोगों को बंधक बना लिया। आतंकवादियों के इन हमलों का उद्देश्य भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर आतंक फैलाना था, आतंकवादी पूरी तरह से प्रशिक्षित थे। वह आम नागरिकों को निशाना बनाने के साथ-साथ विदेशी नागरिकों को भी अपना शिकार बना रहे थे। इसी बीच, मुंबई पुलिस, एनएसजी (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड), एनसीटीसी और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने एक साथ आकर आतंकवादियों से लोहा लेना शुरू किया। हेमंत करकरे, विजय सालस्कर और अशोक कामटे जैसे मुंबई पुलिस के बहादुर जवान इस हमले में शहीद हो गए। एनएसजी की विशेष कमांडो टीम ने होटल्स और अन्य ठिकानों पर हमलावरों के खिलाफ ऑपरेशन शुरू किया। इस ऑपरेशन में कुल 9 आतंकवादी मारे गए और एक आतंकवादी अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा गया। कसाब को मुंबई पुलिस ने पकड़ने के बाद अदालत में पेश किया और 2012 में उसे फांसी दी गई। आंकड़ों के अनुसार इस हमले में 164 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 300 से अधिक लोग घायल हो गए थे। मारे गए लोगों में भारतीय नागरिकों के अलावा कई विदेशी नागरिक भी थे। इस हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति को और कड़ा किया। मुंबई हमलों ने देश को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की आवश्यकता का एहसास दिलाया। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाने की कोशिश की और कई आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। तब से हर साल 26 नवंबर को मुंबई हमलों के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। इस दिन को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की याद में मनाया जाता है और उन बहादुर लोगों की शहादत को सलाम किया जाता है जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर इस हमले को रोकने की कोशिश की।  भारत ने मुंबई आतंकी हमले के बाद पाकिस्‍तान पर क्‍यों नहीं किया था अटैक  मुंबई में साल 2008 में 26 नवंबर को पाकिस्तान के आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा के लोगों ने हमला किया था। ये लोग समुद्र के रास्ते से आए थे और ताज होटल और छत्रपति शिवाजी रेलवे टर्मिनल जैसे स्थानों पर हमला किया था। आतंकियों ने मुंबई को दहलाते हुए 175 लोगों को मार डाला था और कम से कम 300 को घायल किया था। सुरक्षाबलों ने अजमल आमिर कसाब को जिंदा पकड़ा था और बाकी आतंकियों को मार गिराया था। कसाब को 2012 में फांसी दे दी गई थी। कसाब की गवाही और खुफिया जानकारी से साफ हो गया था कि हमलों के पीछे पाकिस्तान का हाथ था। कसाब के अलावा जकीउर्रहमान लखवी और हाफिज सईद के इसके पीछे होने की बात सामने आई थी। उस समय काफी बहस के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान पर जवाबी सैन्य कार्रवाई नहीं करने का फैसला लिया था। इस फैसले पर विवाद रहा है और फैसले के विरोधी लोगों ने इसे कमजोरी की तरह देखा है। भारत ने क्यों नहीं किया पाक पर हमला! पूर्व विदेश सचिव शिवशंकर मेनन लश्कर तैयबा या पाकिस्तान पर हमला ना करने के भारत सरकार के उस समय के फैसले के तीन प्रमुख कारण मानते हैं। इसमें सबसे पहला है- अंतरराष्ट्रीय सहानुभूति। मेनन का कहना है कि हमलों के बाद भारत को वैश्विक सहानुभूति मिली। भारत ने लश्कर-ए-तैयबा खिलाफ सैन्य हमले किए होते तो फिर दुनिया इसे भारत-पाक संघर्ष की एक और कड़ी के रूप में देखती। लश्कर-ए-तैयबा के शिविरों पर हमलों में नागरिक भी हताहत होते और भारत की छवि धूमिल होती। मेनन इसकी दूसरी वजह पाकिस्तानी राजनीति को कहते हैं। मेनन के मुताबिक, उस समय पाकिस्तान ने नई नागरिक सरकार चुनी गई थी। आसिफ अली जरदारी के नेतृत्व वाली नई सरकार भारत के साथ बेहतर संबंध चाहती थी। भारत का हमला पाक सेना के पीछे देश को एकजुट करता और नागरिक सरकार कमजोर पड़ जाती। इससे भारत और पाकिस्तान के संबंधों को नुकसान होता। अर्थव्यवस्था पर भी होता असर मेनन का यह भी तर्क है कि लश्कर-ए-तैयबा के शिविरों पर सीमित सैन्य हमले का बहुत कम प्रभाव पड़ता। लश्कर के कैंप कोई विशाल इमारते नहीं बल्कि टिन शेड की झोपड़ियां थीं। वह इन्हें आसानी से दोबारा बना लेते लेकिन पाकिस्तान के साथ युद्ध भारतीय अर्थव्यवस्था को पीछे धकेल देता। यही वजह रही कि भारत ने 26/11 के बाद पाकिस्तान पर हमला नहीं किया। मेनन ने ये भी कहा कि कोई भी भारतीय सरकार दोबारा वही विकल्प नहीं चुन सकेगी मुंबई हमले के लिए उस वक्त की विपक्षी पार्टी भाजपा ने सत्तारूढ़ कांग्रेस पर सवाल उठाए थे। विपक्ष ही नहीं कांग्रेस नेता मंत्री मनीष तिवारी ने भी उस फैसले की आलोचना की। तिवारी ने भारत से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में लश्कर के शिविरों पर हमले को विचार जाहिर किया। उन्होंने इस बात को भी खारिज किया कि इससे भारत को विश्व स्तर पर सहानुभूति नहीं मिलती। पाकिस्तान को संदेश देना जरूरी था मनीष तिवारी का तर्क है कि भारत के हमले से पाकिस्तान और दुनिया दोनों को एक संदेश जाता। वहीं देश में भी हमले से इनकार करके सरकार का आतंक पर नरम रुख … Read more

एस्सार ग्रुप के को-फाउंडर शशिकांत रुइया का निधन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया शोक

नईदिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एस्सार समूह के सह-संस्थापक शशिकांत रुइया (शशि रुइया) के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि श्री रुइया के दूरदर्शी नेतृत्व और उत्कृष्टता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने भारत के व्यापार परिदृश्य को बदल दिया। श्री मोदी ने मंगलवार को सोशल नेटवर्किंग साइट ‘एक्स’ पर अपने पोस्ट में कहा, “श्री शशिकांत रुइया जी उद्योग जगत में एक महान हस्ती थे। उनके दूरदर्शी नेतृत्व और उत्कृष्टता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने भारत के व्यापार परिदृश्य को बदल दिया। उन्होंने नवाचार और विकास के लिए उच्च मानक भी स्थापित किए। वे हमेशा विचारों से भरे रहते थे, हमेशा इस बात पर चर्चा करते थे कि हम अपने देश को कैसे बेहतर बना सकते हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा, “शशि जी का निधन बेहद दुखद है। इस दुख की घड़ी में उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। ओम शांति।” एस्सार ग्रुप की स्थापना शशि रुइया ने अपने भाई रवि रुइया के साथ 1969 में एस्सार ग्रुप की स्थापना की थी। उसे मद्रास पोर्ट ट्रस्ट से बंदरगाह में बाहरी ब्रेकवाटर के निर्माण के लिए 2.5 करोड़ रुपये का ऑर्डर प्राप्त हुआ था। शुरुआती वर्षों में एस्सार ग्रुप ने कंस्ट्रक्शन और इंजीनियरिंग पर फोकस किया। उसने देश में कई पुलों, बांधों और बिजली संयंत्रों सहित कई प्रमुख इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स का निर्माण किया। 1980 के दशक में ग्रुप ने एस्सार ने कई तेल और गैस सेक्टर में विस्तार किया और 1990 के दशक में स्टील और टेलिकॉम में भी कदम रखा। एस्सार ने हचिसन के साथ मिलकर भारत की दूसरा सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी बनाई। लेकिन अब यह ग्रुप टेलिकॉम बिजनस से निकल चुका है। साथ ही उसने अपनी तेल रिफाइनरी रूस की रोजनेफ्ट के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को बेच दी। ग्रुप का स्टील प्लांट भी इनसॉल्वेंसी प्रॉसीडिंग में आर्सेलर मित्तल के पास चला गया। रुइया कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय निकायों और उद्योग संघों में शामिल थे। वह फिक्की की प्रबंध समिति में थे। साथ ही वह प्रतिष्ठित इंडो-यूएस जॉइंट बिजनस काउंसिल और इंडियन नेशनल शिपऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे। रुइया प्रधानमंत्री के इंडो-यूएस सीईओ फोरम और भारत-जापान बिजनेस काउंसिल के सदस्य भी थे। प्रधानमंत्री ने जताया शोक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शशि रुइया ने निधन पर शोक जताया है। मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'श्री शशिकांत रुइया जी उद्योग जगत की एक महान हस्ती थे। उनके दूरदर्शी नेतृत्व और उत्कृष्टता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने भारत के कारोबारी परिदृश्य को बदल दिया। उन्होंने इनोवेशन और विकास के लिए उच्च मानक भी स्थापित किए। वे हमेशा विचारों से ओतप्रोत रहते थे। हमेशा इस बात पर चर्चा करते थे कि हम अपने देश को कैसे बेहतर बना सकते हैं। शशि जी का निधन बेहद दुखद है। इस दुख की घड़ी में उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। ओम शांति।' recent visitors 81

मैहर में दर्दनाक सड़क हादसा, डिवाइडर से टकराई कार, 4 लोगों की दर्दनाक मौत

मैहर मध्यप्रदेश में रफ्तार का कहर थम नहीं रहा है। तेज रफ्तार वाहनों के अनियंत्रित होने से लोगों की जान जा रही है। ताजा मामला मैहर जिले का है जहां एक सड़क हादसे में चार लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई है। सभी मृतक एक ही परिवार के बताए जा रहे हैं। सड़क हादसे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और कार में फंसे शवों को किसी तरह बाहर निकाला। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। दरअसल मैहर के NH 30 घुंसडू नदी के पास तेज रफ़्तार बलेनो कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। डिवाइडर से टकरा कर कार सड़क के नीचे गिर गई। हादसे में कार सवार चार लोगों की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हादसे की सूचना पर मैहर पुलिस मौके पर पहुंची और मृतकों को कार का शीशा तोड़ बाहर निकाला गया। घटना सुबह 3 बजे के आसपास की है। कार सवार सभी लोग कटनी में परिवार की शादी से मैहर आ रहे थे, सभी मृतक देवेन्द्रनगर सेमरी गांव के निवासी है। कटनी में शादी के बाद सभी लोग रात एक बजे निकले थे। मृतकों में 1- सुखविधान सिंह 2- दामोदर सिंह 3- शिवराज सिंह 4- अरविंद सिंह सिमरी शामिल है। मैहर में भीषण सड़क हादसा, काल बनकर आई रफ्तार इसी वर्ष सितंबर में भी इसी तरह का यात्रियों से भरी तेज रफ्तार बस हाईवा से टकरा गई थी। हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 23 से ज्यादा यात्री घायल हो गए थे। तेज रफ्तार बस एक हाईवा से टकरा गई। शव रेस्क्यू ऑपरेशन कर बाहर निकाला बस के अंदर फंसे मृतकों का शव रेस्क्यू ऑपरेशन कर बाहर निकाला था। घायलों और मृतकों में ज्यादातर लोग उत्तर प्रदेश के बताए जा रहे हैं। बता दें बस प्रयागराज से नागपुर जा रही थी। recent visitors 95

कलेक्टर ने अधिकारियों को दिये सख्त निर्देश, राजस्थान-जयपुर में पुनर्वास कर बनेगा भिक्षावृत्ति मुक्त

जयपुर। जयपुर जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने जिले को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के लिए विभागीय अधिकारियों को आपसी सहयोग एवं समन्वय से हर संभव प्रयास करने के निर्देश दिये हैं।  उन्होंने भिक्षावृत्ति में लिप्त लोगों का प्रभावी पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया ताकि ऐसे व्यक्ति भिक्षावृत्ति को छोड़कर अपने कौशल और मेहनत के दम पर सम्मानजनक जीवन शुरू करें। जिला कलेक्टर ने सोमवार को कलक्ट्रेट सभागार में भिक्षावृत्ति में लिप्त व्यक्तियों के पुनर्वास को लेकर बैठक ली। जयपुर में आगामी 9 दिसंबर से 11 दिसंबर तक राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इंवेस्टमेंट समिट का आयोजन होगा। इस विश्व स्तरीय आयोजन में जयपुर की गौरवशाली परंपरा एवं छवि धूमिल न हो, इसके लिए भिक्षावृत्ति में लिप्त व्यक्तियों का जल्द से जल्द पुनर्वास सुनिश्चित किया जाएगा। बैठक में पुलिस एवं यातायात पुलिस के अधिकारियों को भिक्षावृत्ति में लिप्त व्यक्तियों की सूचना जिला प्रशासन एवं मानव सेवा संस्थान जयपुर द्वारा संचालित हेल्पलाइन नम्बर 9929902320 को देकर रेस्क्यू में सहयोग प्रदान करने साथ ही आपराधिक गतिविधियों में लिप्त भिखारियों  के विरूद्ध निरोधात्मक एवं कठोर कानूनी कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया गया। जिला कलेक्टर ने  नगर निगम के अधिकारियों को चिन्हित पुनर्वास गृहों की साफ-सफाई, शौचालयों की मरम्मत, पुनर्वास गृहों में भिखारियों के लिए आधारभूत सेवाओं की व्यवस्था करने, चिन्हित पुनर्वास गृहों को श्नी अन्नपूर्णा रसोई योजना से लिंक करते हुए योजना के माध्यम से भिखारियों के लिए पर्याप्त मात्रा में भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के साथ-साथ मुख्यमंत्री शहरी रोजगार गारंटी योजना में पंजीकृत कर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को भिक्षावृत्ति में लिप्त व्यक्तियों का नि:शुल्क उपचार, टी.बी., एच.आई.वी एवं अन्य जांच कर उपचार करने, चिन्हित पुनर्वास गृहों में चिकित्सा एवं जांच सुविधा उपलब्ध करने प्रत्येक पुनर्वास गृह को निकटतम राजकीय चिकित्सालय से जोड़ते हुए भिखारियों की जांच एवं उपचार व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। बैठक में जिला बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों को भिक्षावृति में लिप्त बच्चों सूची बनाकर शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराने, विभाग द्वारा संचालित बाल गृहों, निराश्रित गृहों में प्रवेश दिलाकर शिक्षा के अधिकार के तहत शिक्षा से जोड़ने के लिए स्थानीय वि़द्यालयों में प्रवेश दिलाने, बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश कर विभागीय गृहों में प्रवेश दिलवाने के  निर्देश दिये गए। जिला कलेक्टर ने  सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारियों को पुलिस एवं स्वयं सेवी संस्थाओं एवं अन्य विभागों से समन्वय एवं सामंजस्य स्थापित करने, स्वयं सेवी संस्थाओं के माध्यम से भिक्षावृति में लिप्त व्यक्तियों को सर्वे उपरान्त चिन्हित कर पात्रता अनुसार बाल गृह, महिला गृह, मानसिक विमंदित गृह, वृद्धाश्रम अथवा पुनर्वास गृह आदि में प्रवेश दिलाकर देखभाल करवाने, स्वयं सेवी संस्थाओं के माध्यम से भिक्षावृति में लिप्त चिन्हित व्यक्तियों के आधार कार्ड/जनाधार कार्ड आदि तैयार कर प्राथमिकता से सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने के लिए  निर्देश दिये गए। जिला कलक्टर ने राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम के अधिकारियों को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा चिन्हित भिक्षावृत्ति में लिप्त व्यक्तियों की सूची के अनुसार 25 व्यक्तियों का एक बैच बनाकर आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने, प्रशिक्षित व्यक्तियों को विभागों द्वारा संचालित एवं बैंकों द्वारा उपलब्ध ऋण अथवा अनुदान एवं अन्य योजनाओं से जोडकर नियोजित करने के साथ-साथ फॉलो अप कार्यक्रम के द्वारा उनके पुनर्वास को सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गए। बैठक में मानव सेवा संस्थान, मेरी पहल संस्था, सक्षम सामाजिक उत्थान एवं विकास संस्थान, सुजस सांस्कृतिक सेवा संस्थान के पदाधिकारियों को चयनित आश्रय स्थल पर विभागीय निर्देशों के अनुसार आवश्यक व्यवस्था तथा परामर्शी सेवाएँ सुनिश्चित कराने के लिए निर्देशित किया गया। बैठक में अतिरिक्त जिला कलक्टर श्री मुकेश मूंड सहित नगर निगम, जयपुर विकास प्राधिकरण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति के पदाधिकारियों सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं मानव सेवा संस्थान, मेरी पहल संस्था, सक्षम सामाजिक उत्थान एवं विकास संस्थान, सुजस सांस्कृतिक सेवा संस्थान के पदाधिकारी उपस्थित रहे। recent visitors 68

मंदिर की 100 करोड की सरकारी जमीन कराई मुक्त, ग्वालियर में अवैध अतिक्रमण पर चला बुलडोजर

ग्वालियर ग्वालियर शहर के मध्य स्थित तारागंज कोटा लश्कर में श्री रामजानकी मंदिर ट्रस्ट की लगभग पौने नौ बीघा सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की। इस जमीन की कीमत करीब 100 करोड़ रुपये बताई जा रही है। जमीन पर बनी बाउंड्रीवॉल और अन्य अतिक्रमण को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। 18 नवंबर को कलेक्टर रुचिका चौहान ने इस जमीन का निरीक्षण किया था। उन्होंने ट्रस्ट की जमीन पर पाई गई बाउंड्रीवॉल के मामले में प्रकरण दर्ज कर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। एसडीएम लश्कर, नरेंद्र बाबू यादव के नेतृत्व में श्री रामजानकी मंदिर ट्रस्ट की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। उन्होंने बताया कि इस जमीन पर मनोहरलाल भल्ला ने अवैध रूप से बाउंड्रीवॉल बना ली थी और प्लॉट बेचने की तैयारी कर रहा था। जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई कर न केवल इस बेशकीमती सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया, बल्कि लोगों को प्लॉट की जालसाजी में फंसने से भी बचा लिया। भू-माफियाओं ने मंदिर की इस जमीन पर बाउंड्री वॉल खड़ी कर दी थी. इसी के साथ बड़े गेट लगाकर अपने कब्जे में ले लिया था. प्रशासन को जानकारी मिली थी कि माफिया इस जमीन पर प्लॉट काटकर बेचने की तैयार कर रहे हैं. जानकारी मिलते ही प्रशासन ने मामले की जांच की. इसके बाद ग्वालियर कलेक्टर ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए. इसको लेकर एसडीएम नरेंद्र यादव के नेतृत्व में नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर बुलडोजर से बाउंड्री वॉल और गेट को ध्वस्त कर दिया. जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए पूरी भूमि को माफिया के कब्जे से मुक्त कराया. आरोप है कि भू-माफिया ने यहां कॉलोनी बसाने की तैयारी कर रखी थी. इस कार्रवाई के दौरान जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम मौजूद थी. कार्रवाई के दौरान जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के साथ ही भू-माफिया के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी भी की जा रही है. प्रशासन ने इस भूमि को फिर से मंदिर ट्रस्ट को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. पूरे मामले को लेकर क्या बोले एडीएम? एसडीएम नरेंद्र यादव ने कहा कि 'तारागंज में राम जानकी मंदिर की 9 बीघा जमीन पर भू-माफियाओं ने कब्जा कर लिया था. यहां कॉलोनी काटने की योजना बनाई जा रही थी. कलेक्टर के निर्देश पर कार्रवाई कर अतिक्रमण हटाया गया है.' प्रशासन द्वारा मुक्त कराई गई यह जमीन 100 करोड़ रुपये की बताई जा रही है. जिला प्रशासन का यह भू-माफियाओं के खिलाफ बड़ा एक्शन है. सरकारी संपत्तियों पर कब्जे को लेकर प्रशासन सख्त नजर आ रहा है. recent visitors 132