म.प्र. पर्यटन को मिला ‘बेस्ट टूरिज्म स्टेट ऑफ द ईयर’, ट्रेवल एंड टूरिज्म कॉन्क्लेव एंड अवार्ड्स में मिला सम्मान

भोपाल मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग को नई दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित ट्रेवल एंड टूरिज्म कॉन्क्लेव एंड अवार्ड्स में ‘बेस्ट टूरिज्म स्टेट ऑफ द ईयर’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पर्यटन क्षेत्र में प्रदेश द्वारा किए गए उल्लेखनीय कार्यों और उपलब्धियों का प्रमाण है। प्रदेश की अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, और विश्व स्तरीय पर्यटन स्थलों के प्रचार-प्रसार के लिये पर्य़टन विभाग द्वारा नवाचार किये जा रहे हैं। विभाग द्वारा पर्यटन स्थलों पर आधारभूत संचरना, कनेक्टिविटी में सुधार, स्थानीय समुदाय के लिये रोजगार के नए अवसर सृजित किये जा रहे है। इससे मध्यप्रदेश देश-विदेश के पर्यटकों का पसंदीदा गंतव्य स्थान बन गया है। प्रमुख सचिव पर्यटन व संस्कृति विभाग एवं प्रबंध संचालक म.प्र. टूरिज्म बोर्ड श्री शिव शेखर शुक्ला ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान प्रदेश में पर्यटकों को एक अद्वितीय अनुभव प्रदान करने के लिये हमारे प्रयासों को और गति प्रदान करेगा। मध्यप्रदेश को पर्यटन की दृष्टि से और अधिक समृद्ध बनाने के लिए हम निरंतर प्रयासरत रहेंगे।   recent visitors 80

सुप्रीम कोर्ट में पूजा स्थलों की सुरक्षा से संबंधित याचिका पर 4 दिसंबर को सुनवाई करेगा

नई दिल्ली देश में विभिन्न धार्मिक स्थलों, खासकर मंदिरों और मस्जिदों को लेकर विवाद बढ़ते जा रहे हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित जामा मस्जिद का सर्वेक्षण कोर्ट के आदेश पर हुआ था, जिसके बाद हिंसा की घटनाएं सामने आईं। अब इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने 1991 के पूजा स्थल कानून और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा से संबंधित याचिका पर सुनवाई करने का संकेत दिया है। आइए जानते हैं इस मामले के बारे में और कब होगी इसपर सुनवाई। सुप्रीम कोर्ट में कब होगी सुनवाई? सुप्रीम कोर्ट में पूजा स्थलों की सुरक्षा और 1991 के पूजा स्थल कानून से संबंधित याचिका पर 4 दिसंबर 2024 को सुनवाई होगी। इस सुनवाई में भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ शामिल होगी। सुनवाई करने वाले न्यायधीश इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, जस्टिस पी नरसिम्हा, और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच शामिल होगी। यह केस जमीअत उलमा-ए-हिंद और गुलजार अहमद नूर मोहम्मद आजमी की तरफ से दायर किया गया है, और इनके वकील एजाज मकबूल कोर्ट में उनका पक्ष रखेंगे। क्या है 1991 का पूजा स्थल कानून? 1991 का पूजा स्थल कानून भारत में धार्मिक स्थलों के स्वरूप को लेकर एक महत्वपूर्ण कानून है। इसके तहत, यह प्रावधान किया गया कि 15 अगस्त 1947 को जिस रूप में धार्मिक स्थल था, उसे उसी रूप में बनाए रखा जाएगा। इसका मतलब है कि स्वतंत्रता संग्राम के समय के बाद से किसी भी धार्मिक स्थल का रूप बदलने पर रोक लगा दी गई है। इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्थलों के स्वामित्व और रूप में बदलाव से होने वाले विवादों को रोकना है। खासतौर पर इसने रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर एक अपवाद रखा था, जिससे विवादित बाबरी मस्जिद को लेकर कोई बदलाव नहीं किया जा सका था। धारा 3 के तहत, यह कानून किसी व्यक्ति या समूह को किसी धार्मिक स्थल को दूसरे धर्म के स्थल में बदलने से रोकता है। क्या बदलाव होगा इस कानून में? इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्थलों के स्वरूप को स्थिर रखना था ताकि किसी भी धार्मिक स्थल में बदलाव या तोड़फोड़ से विवादों की स्थिति पैदा न हो। लेकिन, कई बार इस कानून की व्याख्या को लेकर विवाद उठते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस कानून पर सुनवाई होने से भविष्य में इस कानून के प्रभाव और इसकी व्याख्या पर कुछ नया रुख सामने आ सकता है। सुप्रीम कोर्ट की भूमिका अब जब सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई करेगा, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट पूजा स्थल कानून की परिभाषा और उसके दायरे को कैसे निर्धारित करता है। इसके अलावा, कोर्ट यह भी तय करेगा कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कौन से कदम उठाए जाएं। यह मामला धार्मिक स्थलों से जुड़ी संवेदनशीलता को लेकर है, और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई इस दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि इस कानून में कोई बदलाव किया जाता है, तो वह देशभर में धार्मिक स्थलों के विवादों को प्रभावित कर सकता है। 4 दिसंबर को होने वाली सुनवाई देश भर के लोगों और धार्मिक संगठनों के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकती है। recent visitors 67

सिंहस्थ वर्ष 2028 के लिए संभाग स्तरीय समिति का गठन

भोपाल राज्य शासन ने सिंहस्थ वर्ष-2028 अंतर्गत आवश्यक अधोसंरचना की कार्ययोजना तैयार करने, इनके क्रियान्वयन की समीक्षा करने  एवं मंत्रि-परिषद समिति द्वारा लिये गये निर्णयों का पालन सुनिश्चित करने के लिए ''संभाग स्तरीय समिति'' का गठन संभागीय आयुक्त,उज्जैन संभाग की  अध्यक्षता में किया है । समिति में कलेक्टर, जिला उज्जैन सदस्य सचिव होंगे। मेला अधिकारी उज्जैन, इंदौर कलेक्टर, खण्डवा कलेक्टर, देवास कलेक्टर, संबंधित विभागों के संभागीय अधिकारीगण, आयुक्त नगर पालिका निगम उज्जैन, संयुक्त, संचालक, कोष एवं लेखा उज्जैन संभाग, मुख्य अभियंता लोक निर्माण, उज्जैन/इंदौर, मुख्य अभियंता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, इंदौर सदस्य होंगे। समिति द्वारा सिंहस्थ-2028 के अंतर्गत आवश्यकता अनुसार नए कार्यों के प्रस्ताव नोडल विभाग को अनुशंसित करना, राज्य शासन द्वारा समिति को निर्माण एवं क्रय के कार्यों, सिंहस्थ मद के उत्तरदायित्व सौपे जाने पर उन कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति एवं क्रय प्रक्रिया पूर्ण करना, (सिंहस्थ मद अंतर्गत प्रस्तावित कार्यों की तकनीकी स्वीकृति संबंधित विभाग के सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रदान की जायेगी।) सिंहस्थ-2028 अंतर्गत कराए जा रहे सभी विभागों के कार्यों की समीक्षा तथा गुणवत्ता सुनिश्चित करना, राज्य शासन द्वारा समय-समय पर सौंपे गए अन्य उत्तरदायित्व निर्वहन समिति द्वारा किये जायेंगे।   recent visitors 77

बाघ के रेस्क्यू में जुटी टाइगर रिजर्व की टीम, 4 हाथी दल और 3 परिक्षेत्र की टीम निगरानी में जुटी

भोपाल उमरिया जिले के बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघ के गले में फंदे की जानकारी मिलने के बाद टाइगर रिजर्व टीम रेस्क्यू में जुटी हुई है। सोमवार को पर्यटन के दौरान पर्यटकों को हितौली जोन के डमडमा नाले के पास बाघ दिखायी दिया था। पर्यटकों ने बाघ के फोटो और वीडियो भी बनाये। फोटो में बाघ के गले में तार जैसा दिखायी दिया। जानकारी मिलने के बाद टाइगर रिजर्व प्रबंधन बाघ के रेस्क्यू की तैयारी में जुट गया। सोमवार की शाम से ही रेस्क्यू टीम बाघ की तलाश कर रही है। मंगलवार को बाघ की तलाश में दो हाथियों और कर्मचारियों को ड्यूटी पर लगाया गया, लेकिन बाघ लगातार अपनी मूवमेंट बदलता रहा और उसके घने जंगल में चले जाने से रेस्क्यू नहीं किया जा सका। अब बाघ की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन बुधवार से शुरू किया जायेगा। रेस्क्यू टीम ने जंगल में सर्चिंग शुरू कर दी है। बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप संचालक श्री पी.के. वर्मा ने बताया कि बाघ के रेस्क्यू के लिये खितौली जोन के कुछ एरिया में पर्यटन को बंद कर दिया गया है। गले में फंदा लगा बाघ स्वस्थ होने के कारण लगातार अपनी मूवमेंट बदल रहा है। उन्होंने बताया कि 4 हाथी दल और 3 परिक्षेत्र की टीम इसकी निगरानी में लगे हुए हैं। जल्द ही बाघ को रेस्क्यू कर लिया जायेगा।   recent visitors 155

उद्योग, पर्यटन और हरित क्रांति से खत्म होगी बेरोजगारी: उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि जहाँ उद्योग, पर्यटन और हरित क्रांति होती है, वहां बेरोजगारी का कोई स्थान नहीं रहता। इनसे विकास के नए द्वार खुलते हैं। मध्यप्रदेश में औद्योगिक विस्तार के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने और पर्यटन क्रांति को साकार करने के लिए काम कर रही है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने देवास में उज्जैन रोड औद्योगिक क्षेत्र के अंतर्गत 8 करोड़ 83 लाख रुपये के विकास कार्यों का भूमि पूजन किया। इन विकास कार्यों में सीसी रोड, आरसीसी ड्रेन, हयूम पाइप कल्वर्ट और रोड डामरीकरण शामिल हैं जिनसे औद्योगिक क्षेत्र की 156 इकाइयों को लाभ मिलेगा। इसके साथ ही उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने नियो एक्सपर्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का उद्घाटन किया। इस कंपनी में नवजात शिशुओं के लिए मेडिकल उपकरण बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह कंपनी प्रदेश में रोजगार के नए अवसर सृजित करेगी और नवाचार को प्रोत्साहित करेगी। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा 7 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 50 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाया गया है और अगले पांच वर्षों में इसे 1 करोड़ हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। हरित क्रांति से प्रदेश की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के प्रयास हो रहे हैं। उल्लेखनीय है कि देवास औद्योगिक क्षेत्र में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम स्तर की 1613 इकाइयां और वृहद स्तर की 28 इकाइयां कार्यरत हैं, ज़िनसे लगभग 50 हज़ार लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है। यहाँ इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल, फूड सेक्टर, मिल्क प्रोडक्ट्स और पंप-पार्ट्स से संबंधित इकाइयां क्रियाशील हैं। कार्यक्रम में देवास विधायक श्रीमती गायत्री राजे पवार, सतना महापौर श्री योगेश ताम्रकर, महापौर प्रतिनिधि श्री दुर्गेश अग्रवाल और अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।   recent visitors 37

सुभाष उत्कृष्ट स्कूल में हुई वेस्ट जोन इंटर स्कूल बैंड प्रतियोगिता, बालक वर्ग में राजस्थान और महाराष्ट्र बने विजेता

भोपाल भोपाल के सुभाष उत्कृष्ट स्कूल में आज पश्चिम क्षेत्रीय (वेस्ट जोन) की इंटर स्कूल बैंड प्रतियोगिता का शुभारंभ आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती शिल्पा गुप्ता ने खुले आकाश में गुब्बारे छोड़कर किया। बालक वर्ग की प्रतियोगिता में वेस्ट जोन के 6 राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र गोवा एवं केन्द्र शासित प्रदेश दमन-दीव और दादर नगर हवेली के बालक वर्ग के विजेता प्रतिभागी शामिल हुए। प्रतियोगिता में 240 बालकों ने पाइप बैंड एवं ब्रास बैंड विधा में शानदार प्रस्तुतियां दी। आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती गुप्ता ने इस मौके पर कहा कि स्कूली बच्चों की बैंड की शानदार प्रस्तुतियों से मध्यप्रदेश के अन्य बच्चों को भी प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का समग्र विकास हो। इसके लिये जरूरी है कि बच्चे पढ़ाई के साथ अन्य रचनात्मक गतिविधियों से भी जुडें। लोक शिक्षण आयुक्त ने अन्य राज्यों से आये प्रतिभागी विद्यार्थियों और अधिकारियों का राजधानी भोपाल में स्वागत किया। पुरस्कृत टीमें प्रतियोगिता में ब्रास बैंड विधा में प्रथम स्‍थान पर राजस्थान की टीम रही। वहीं द्वितीय स्‍थान महाराष्ट्र की टीम ने तथा तृतीय स्‍थान मध्यप्रदेश की टीम ने प्राप्‍त किया। पाइप बैंड विधा में महाराष्ट्र प्रथम, मध्यप्रदेश द्वितीय और गुजरात की टीम तृतीय स्थान पर रहीं। संचालक लोक शिक्षण श्री डी.एस. कुशवाह ने विजेता टीम को पुरस्कार प्रदान किये। उल्‍लेखनीय है कि पश्चिम क्षेत्रीय इस प्रतियोगिता में पाइप बैंड एवं ब्रास बैंड विधा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली बालिका और बालक वर्ग की चारों टीमें गणतंत्र दिवस-2025 के उपलक्ष्य में राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिता में 24 एवं 25 जनवरी 2025 को नई दिल्ली में सहभागिता करेगी। बालिका वर्ग की प्रतियोगिता में 25 नवम्‍बर को ब्रास बैंड विधा में मध्‍यप्रदेश की और पाइप बैंड विधा में महाराष्‍ट्र राज्‍य की टीमें प्रथम स्‍थान पर रही थीं। इनका चयन राष्‍ट्रीय प्रतियोगिता के लिए हो चुका हैं। प्रतियोगिता के निर्णायक के रूप में पचमढ़ी स्थित सैन्‍य अकादमी बैंड विंग के श्री संदीप चौहान, श्री काजल मंडल, श्री रोजित कुमार एवं सशस्त्र सीमा बल चंदुखेड़ी के श्री रवि दास, श्री समाधान देओरे और शमूएल टर्रा ने विजेता टीमों का लयबद्धता, पोशाख, टीमवर्क और अनुशासन के आधार पर मूल्यांकन किया। समापन एवं पुरूस्कार वितरण कार्यक्रम में लोक शिक्षण संचालनालय के अपर संचालकद्वय श्री संजय कुमार, श्री राजीव तोमर, संयुक्त संचालक भोपाल संभाग श्री अरविंद चौरागढे, सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य श्री सुधाकर पराशर, प्रतियोगिता की नोडल अधिकारी श्रीमती अर्चना अली एवं अन्य अधिकारी बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित थे।   recent visitors 161

राजस्थान में राजनीतिक हलचल बढ़ी, वन स्टेट-वन इलेक्शन की तर्ज पर होना संभव

जयपुर    राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है, जिससे राज्य में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। राज्य की 40 प्रतिशत पंचायतों का कार्यकाल जनवरी में खत्म हो रहा है, और इसके बाद सवाल यह उठ रहा है कि क्या पंचायत चुनाव एक साथ होंगे, या फिर सरकार इन पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करेगी? क्योंकि चुनावों पर अभी तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है। जनवरी में 6759 पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा, जबकि बाकी पंचायतों का कार्यकाल 2025 तक रहेगा। इस बीच, सरकार ने राज्य में 49 निकायों में प्रशासक नियुक्त किया है, लेकिन पंचायतों में क्या कदम उठाए जाएंगे, यह अभी तक तय नहीं हो पाया है। पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर ने एक मीडिया चैनल से बातचीत में कहा कि इस मुद्दे पर निर्णय कैबिनेट की मीटिंग में लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राजस्थान का मामला एमपी या झारखंड से अलग होगा और सरकार पंचायत चुनावों के लिए सही समय पर निर्णय लेगी। पंचायतीराज चुनावों के भविष्य को लेकर कयास राज्य के 40 प्रतिशत सरपंचों का कार्यकाल जनवरी में खत्म होने वाला है, और इस समय तक सरकार को निर्णय लेना होगा कि क्या पंचायतों में प्रशासनिक नियुक्तियां की जाएंगी, या फिर सरपंचों को ही चेयरमैन के रूप में जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। पंचायतों के चुनावों को लेकर मंत्रिमंडल की मीटिंग में जल्द ही फैसला लिया जा सकता है। हालांकि, राज्य निर्वाचन विभाग ने इस विषय में अब तक कोई तैयारियां नहीं की हैं।  पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर का कहना है कि चुनावों के बारे में सरकार जल्द ही फैसला लेगी और इस फैसले से किसी भी जनप्रतिनिधि को कंफ्यूजन में नहीं आना चाहिए। कार्यकाल समाप्त होने वाली पंचायतों की सूची: •        जनवरी 2025: 6759 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त •        मार्च 2025: 704 पंचायतों का कार्यकाल खत्म •        सितंबर 2025: 3847 पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होगा इसके बाद 2026 में भी कई पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होगा, जिसमें जिला परिषद और पंचायत समितियां शामिल हैं। पंचायतों में प्रशासक या सरपंच? राज्य सरकार ने हाल ही में 49 निकायों में प्रशासक नियुक्त किए हैं, और अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या पंचायतों में भी इसी तरह प्रशासक लगाए जाएंगे, या फिर पंचायतों की जिम्मेदारी सरपंचों को सौंपी जाएगी। पंचायत चुनावों की तारीखों को लेकर सस्पेंस बना हुआ है, और यह निर्भर करता है कि मंत्रिमंडल की मीटिंग में सरकार क्या फैसला करती है। सरपंचों ने की मुख्य सचिव से मुलाकात राज्य के सरपंचों ने भी इस मामले में अपनी राय दी है। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश और झारखंड की तर्ज पर जब तक पंचायत चुनाव नहीं होते, तब तक कमेटी बनाई जाए और इसका चेयरमैन सरपंचों को बनाया जाए। इस संबंध में उन्होंने मुख्य सचिव सुधांश पंत से भी मुलाकात की है और अपनी बात रखी है। सरकार जल्द लेगी पंचायत चुनाव पर फैसला? पंचायत चुनावों को लेकर सवालों की कोई कमी नहीं है, और यह राज्य सरकार पर निर्भर करेगा कि वह इन पंचायतों में क्या कदम उठाती है। क्या सरकार पंचायतों में प्रशासक लगाएगी, या पंचायत चुनावों की तैयारी करेगी? यह फैसला जल्द ही लिया जाएगा, जिससे राज्य की सियासत में और हलचल मच सकती है। जनवरी में पंचायतों के चुनाव होंगे या नहीं, यह सवाल फिलहाल बाकी है। वन नेशन-वन इलेक्शन का कॉन्सेप्ट: भारत में वन नेशन-वन इलेक्शन का मतलब है कि संसद के निचले सदन यानी लोकसभा चुनाव के साथ ही सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव भी कराए जाएं। इसके साथ ही स्थानीय निकायों यानी नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और ग्राम पंचायतों के चुनाव भी हों। इसके पीछे विचार है कि ये चुनाव एक ही दिन या फिर एक निश्चित समय सीमा में कराए जा सकते हैं। कई सालों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव के साथ ही राज्यों की विधानसभाओं का चुनाव कराने पर जोर देते रहे हैं। वन नेशन-वन इलेक्शन के फायदे: एक देश एक चुनाव का सबसे बड़ा फायदा यह है कि चुनाव का खर्च घट जाएगा। अलग-अलग चुनाव कराने पर हर बार भारी-भरकम राशि खर्च होती है। बार-बार चुनाव होने से प्रशासन और सुरक्षा बलों पर बोझ पड़ता है, क्योंकि उन्हें हर बार चुनाव ड्यूटी करनी पड़ती है। एक बार में चुनाव निपट जाने पर केंद्र और राज्य सरकारें कामकाज पर फोकस कर सकेंगी। बार-बार वह इलेक्शन मोड में नहीं जाएंगी और विकास के कामों पर ध्यान दे सकेंगी।   recent visitors 69