Sunday, July 5, 2026 9:51 am

क्रोध और पानी में समानता है, दोनों हमेशा नीचे की ओर बहते हैं और अपने साथ चीजों को बहाते हैं

कहावत है कि गुस्से की आग पर धैर्य का ठंडा पानी डाल दो। क्रोध और जल का बड़ा गहरा संबंध है। दोनों की तासीर एक जैसी है। दोनों नीचे की ओर बहते हैं। अगर ऊपर उठाना हो तो प्रयास करना पड़ता है। इसीलिए आदमी क्रोध के मामले में यदि विचार करे तो पाएगा कि किसी और व्यक्ति और स्थिति का परिणाम उसने अपने ऊपर ले लिया। थोड़ा-बहुत नुकसान खुद का किया और फिर इसे आगे स्थानांतरित कर दिया। पानी कभी अपने आप ऊपर नहीं चढ़ता, उसके लिए बहुत जोर लगाना होता है। वैसे ही गुस्से में इंसान के विचार गिरने लगते हैं। वो जो भी सोचता है, उसमें क्रोध समाहित होता है, लाभ और हानि का विचार नहीं रह जाता। इस कारण इंसान अपने विवेक से गिर जाता है। क्रोध के साथ बह जाता है। जैसे पानी अपने रास्ते में आने वाली चीजों को बहा ले जाता है, वैसे ही क्रोध भी इंसान को अपने साथ चलाता है। भगवान राम और कृष्ण दोनों ही क्रोध के नियंत्रण के आदर्श उदाहरण हैं। कभी अनावश्यक क्रोध नहीं किया, जब तक संभव हो सका तब तक उसको सहन किया। बाहर व्यक्त नहीं होने दिया। जब लंका पर चढ़ाई के लिए समुद्र को लांघने की योजना बन रही थी, तो भगवान राम ने सभी से सलाह ली। विभीषण ने राय दी कि समुद्र से रास्ता मांगना चाहिए। सागर, सगर के वंशजों से जुड़ा है। सगर राम के पूर्वज थे। भगवान राम को सलाह पसंद आई कि पहले विनम्रता से रास्ता मांगना ही सही रहेगा। इस पर लक्ष्मण ने आपत्ति ली और कहा कि आप अपने मन में क्रोध लाइए और अपने बाणों के प्रहार से समुद्र को सुखा दीजिए। राम ने मुस्कुराकर लक्ष्मण को समझाया कि आवश्यकता पड़ी तो ऐसा भी करेंगे, लेकिन अभी अकारण क्रोध नहीं करना चाहिए। भगवान कृष्ण ने भी अक्सर अपने जीवन में क्रोध को दूर रखने का ही प्रयास किया। कई मौके ऐसे आए जब श्रीकृष्ण का धीरज भी छूट सकता था लेकिन वे स्थिर रहे, परिस्थितियों में बहे नहीं। जरासंघ के आक्रमणों से परेशान थे, मथुरा परेशान थी लेकिन कभी क्रोध में धैर्य खोकर युद्ध में समय नहीं गंवाया। अपनी चतुरता से मथुरावासियों को द्वारिका ले गए और नया सुरक्षित नगर बसा दिया। शिशुपाल अपमान करता रहा, श्रीकृष्ण सुनते रहे। समय से पहले कभी भी उन्होंने उत्तर नहीं दिया। ना धैर्य चूका और ना कभी क्रोध में कोई निर्णय लिया।   recent visitors 90

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस पहल को पुलिस कर्मियों के लिए सुरक्षा और सहयोग का एक मजबूत आधार बताया

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 8 प्रमुख बैंकों के साथ पुलिस सैलरी पैकेज के तहत समझौता (एमओयू) किया है। इस समझौते में भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, कैनरा बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक और आईडीबीआई बैंक शामिल हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस पहल को पुलिस कर्मियों के लिए सुरक्षा और सहयोग का एक मजबूत आधार बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता पुलिस विभाग के कर्मचारियों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह समझौता न केवल पुलिस कर्मियों को आर्थिक रूप से सशक्त करेगा, बल्कि उनके परिवारों की आवश्यकताओं को भी पूरा करेगा। यह पहल छत्तीसगढ़ सरकार की सुशासन और पारदर्शिता की नीति को और मजबूत करेगी और पुलिस कर्मियों के कार्यक्षमता और मनोबल में सकारात्मक परिवर्तन लाएगी। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस पहल को पुलिस विभाग के कल्याण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों को यह स्वतंत्रता दी गई है कि वे अपनी सुविधा और आवश्यकता के अनुसार किसी भी बैंक में सैलरी खाता खोल सकते हैं। इसके लिए किसी भी प्रकार की बाध्यता या अतिरिक्त शुल्क नहीं होगा। सभी बैंकों से प्राप्त प्रस्ताव पुलिस इकाइयों को भेजे जाएंगे ताकि पुलिस कर्मी अपनी आवश्यकताओं के अनुसार सबसे उपयुक्त बैंक का चयन कर सकें। यह समझौता पुलिस कर्मियों और उनके परिवारों के लिए कई लाभ प्रदान करेगा। इसमें सामान्य मृत्यु के मामलों में ₹1 लाख से ₹10 लाख तक की जीवन बीमा राशि, दुर्घटना में मृत्यु के मामलों में  ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक की सहायता, स्थायी विकलांगता के मामलों में ₹30 लाख से ₹1 करोड़ तक और आंशिक विकलांगता के लिए ₹22.5 लाख से ₹1 करोड़ तक की बीमा राशि का प्रावधान शामिल है। बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए ₹4 लाख से ₹20 लाख तक और कन्या विवाह के लिए ₹5 लाख से ₹10 लाख तक की आर्थिक सहायता उपलब्ध होगी। नक्सल हिंसा में शहीद होने वाले पुलिस कर्मियों के परिवारों के लिए ₹10 लाख से ₹50 लाख तक की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। recent visitors 55

शिकायत पर आरोपी गिरफ्तार, छत्तीसगढ़-रायगढ़ में हथियार के दम पर दुकानदार और साथियों से मारपीट

रायगढ़. खरसिया थाना क्षेत्र में हथियार के दम पर दुकान संचालक और उसके साथियों के साथ मारपीट कर नकदी रकम लूटकर फरार हो जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित की शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के अनुसार, खरसिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम हालहुली का रहने वाला कृपालू सिदार गांव में ही किराना दुकान का संचालन करता है। पीड़ित युवक ने खरसिया थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया कि कल रात गांव में एक परिवार के यहां शादी का आयोजन हो रहा था, जिसमें शामिल होने आरोपी रामतोप सिदार निवासी पनझर उनके गांव पहुंचा था। गांव में शादी समारोह की वजह से पीड़ित देर रात 11 बजे तक दुकान खोलकर रखा हुआ था। इसी बीच चोरी की नीयत से उसकी दुकान में आरोपी युवक रामतोप सिदार पहुंचा इसकी भनक लगते ही पीड़ित ने उससे पूछताछ की तो आरोपी युवक एयर पिस्टर और खुखरी निकालकर उसे डराते धमकाते हुए मारपीट शुरू की दी। पीड़ित युवक ने बताया कि आरोपी के द्वारा मारपीट करने से वह हो हल्ला करना शुरू कर दिया। इसके बाद आसपास मौजूद उसके साथ उसे बचाने जब मौके पर पहुंचे तो आरोपी ने हथियार दिखाकर उनके साथ भी मारपीट करते हुए दुकान के गल्ले में रखे नगदी रकम 9 हजार 360 रूपये लेकर फरार हो गया। हथियार के दम पर लूट की शिकायत खरसिया थाने में दर्ज कराये जाने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी के गांव में दबिश देकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी के पास से एयर गन, खुखरी के अलावा अन्य हथियार बरामद कर लिया है। recent visitors 76

17 साल के छात्र ने दो शिक्षकों को चाकू से गोदा

धमतरी छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक छात्र ने शिक्षकों पर चाकू से हमला कर दिया है। छात्र को शिक्षकों ने पढ़ाई पर ध्यान देने की बात कही थी, जिससे वह गुस्से में था। हमला करने के बाद छात्र चाकू लेकर फरार है। पुलिस उसकी तलाश है। जुनैद अहमद नाम के 35 वर्षीय शिक्षक के सिर, गर्दन और पीठ पर कई वार किए हैं। उनकी हालत गंभीर है। शिक्षकों ने मोबाइल से दूर रहने की बात कही यह घटना एक निजी स्कूल में हुई। पुलिस के अनुसार, छात्र ने हाल ही में किसी अज्ञात कारण से दूसरे स्कूल से ट्रांसफर लिया था। उसकी पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था। शिक्षक उसे पढ़ाई पर ध्यान देने और मोबाइल फोन से दूर रहने की सलाह देते रहते थे लेकिन वह नहीं मानता था। मना करने वाला शिक्षक से नाराज था छात्र 17 साल का यह छात्र खास तौर पर अहमद सर से नाराज था। अहमद सर ने उसे स्कूल में मोबाइल फोन लाने से मना किया था और सजा देने की चेतावनी दी थी। अहमद सर उसे नियमित रूप से स्कूल आने और पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए भी कहते थे। लड़के ने अपनी नाराजगी किसी दोस्त से साझा नहीं की। लेकिन अहमद सर ने पुलिस को बताया कि उन्हें शक था कि लड़का उन पर हमला करने का मौका ढूंढ रहा था। उन्होंने लड़के को चार-पांच दिनों से अपने घर के आसपास घूमते देखा था। एक अन्य शिक्षक ने अहमद को बचाने की कोशिश की, लेकिन वह भी घायल हो गया। बैग में लेकर आया चाकू गुरुवार को लड़का अपने बैग में चाकू छिपाकर स्कूल आया था। इससे पता चलता है कि उसने हमले की योजना बनाई थी। जब क्लास खत्म हुई और शिक्षक और छात्र बस में चढ़ रहे थे, तो लड़के ने चाकू निकाला और पीछे से अहमद सर पर वार कर दिया। छात्र डर के मारे इधर-उधर भागने लगे। बचाने में दूसरे शिक्षक भी घायल पुलिस के अनुसार, कुलप्रीत सिंह नाम के एक अन्य शिक्षक ने अहमद को बचाने की कोशिश की, लेकिन लड़के ने उन पर भी हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को बताया कि सिंह लड़के को रुकने के लिए कहते रहे, लेकिन वह अहमद पर वार करता रहा। छात्र की तलाश जारी फिर खून से सने चाकू के साथ लड़का वहां से भाग गया। दोनों घायल शिक्षकों को उनके साथियों ने अस्पताल पहुंचाया। सिंह के हाथ में एक वार हुआ था और प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। लेकिन अहमद की हालत गंभीर है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी की तलाश कर रही है। जांचकर्ता उसके माता-पिता से बात कर रहे हैं ताकि यह समझ सकें कि उसने इतनी हिंसक प्रतिक्रिया क्यों दी। छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल पुलिस अभी भी आरोपी छात्र की तलाश में जुटी है। यह घटना स्कूल की सुरक्षा और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल खड़े करती है। आजकल बच्चों में बढ़ते गुस्से और हिंसा की प्रवृत्ति चिंता का विषय है। माता-पिता और शिक्षकों को मिलकर इस समस्या का समाधान ढूंढना होगा। बच्चों को गुस्सा नियंत्रित करने और समस्याओं का शांतिपूर्ण समाधान ढूंढने के तरीके सिखाने होंगे। स्कूलों में काउंसलिंग की सुविधा भी उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि बच्चे अपनी परेशानियों को किसी से साझा कर सकें। recent visitors 64

ठंड में ऐसे रखें अपने होठों का ध्यान

चेहरे में होठ एक ऐसा अंग है जो आकर्षण का केंद्र होता हैं। सभी चाहते है कि उनके होठ हमेशा ही अच्छे दिखे। अब अगर हम होठ का ध्यान रखने की बाते करे तो हमे उन्हें पॉल्यूशन और धूप से बचाना होगा। डेड स्किन को समय-समय से हटाना होगा। हमारे होठ बाकी शरीर के मुकाबले कहीं ज़्यादा मुलायम और सेंसिटिव होती है। अगर आप निचे दी गई चीज़ो पर थोड़ा भी ध्यान देंगे तो आपके होठ हमेशा अच्छे दिखेंगे। एक मुलायम टूथब्रश लें और इसकी मदद से हल्के हाथों से होंठों को रगड़ें। हो सके तो नये ब्रश का या बेबी ब्रश का इस्तेमाल करें। ब्रश को पहले हल्का सा गीला कर लें वरना होंठ कट सकते हैं। ऐसा करने से होंठों की सारी डेड स्किन लूज़ हो जाएगी और इन्हें हटाना आसान होगा। डेड स्किन को लूज़ करने के बाद इसे होंठों से हटाना बहुत ज़रूरी है। ऐसा करने के लिए 2 चम्मच चीनी में आधा चम्मच शहद मिलाएं। अब नींबू के एक टुकड़े की मदद से इसे अपने होंठों पर रगड़ें। 2-5 मिनट तक ऐसा करने के बाद होंठों को गुनगुने पानी से धो लें। चीनी के कण होंठों से डेड स्किन हटाने में मदद करेंगे, शहद होंठों को मुलायम बनाएगा और नींबू में मौजूद ब्लीचिंग एजेंट होंठों के कालेपन को कम करेगा।एक्सफॉलिएट करने के बाद होंठों को मॉइश्चराइज़ करना ना भूलें। शीया बटर और विटामिन ई वाले लिप बाम का इस्तेमाल करें। सिर्फ एक्सफॉलिएट करने के बाद ही नहीं, बल्कि पूरे दिन में अपने होंठों को हर थोड़ी देर में मॉइश्चराइज़ करते रहें। बेहतर रिज़ल्ट्स के लिए रात में सोने से पहले होंठों पर देसी घी लगा सकती हैं। टिप: होंठ बहुत ज़्यादा काले हो रहे हैं तो बाहर निकलने से पहले होंठों पर भी सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें या एसपीएफ वाले लिप बाम का इस्तेमाल करें। इसके अलावा देसी लाल गुलाब की पंखुड़ियों को थोड़े से दूध के साथ मिलाकर मैश करें। इस पेस्ट को रुई की मदद से होंठों पर लगाएं और 10-15 मिनट बाद ठंडे पानी से धो लें। ऐसा हफ्ते में दो बार करें, कुछ ही दिनों में आपको फर्क महसूस होगा।   recent visitors 95

धर्मगुरुओं ने मोहम्मद यूनुस से कहा कि हर नागरिक को जमानत का अधिकार है

ढाका  बांग्लादेश में अल्पसंख्यक धार्मिक समूहों के नेताओं ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस से कहा कि हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की जमानत याचिका पर विचार किया जाना चाहिए। राजद्रोह के आरोपों का सामना कर रहे चिन्मय कृष्ण दास की जमानत की सुनवाई 2 जनवरी को होनी है। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों से जुड़ी खबरों ने मोहम्मद यूनुस की सरकार की पोल खोल दी है। मोहम्मद युनूस की सरकार नहीं चाहती की हमलों की खबरें दुनिया के सामने आएं। इसके अलावा वह ऐसा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि जैसे देश में अल्पसंख्यकों पर हमले हो रहे हैं और उन्हें इसके बारे में पता नहीं। मोहम्मद यूनुस ने गुरुवार को अल्पसंख्यकों पर हमलों की सटीक जानकारी लेने और अपराधियों को न्याय के कटघरे में खड़ा करने के लिए धार्मिक नेताओं से सहयोग मांगा। यूनुस ने दावा किया कि वास्तविकता और विदेशी मीडिया में आने वाली खबरों में अंतर है। बांग्लादेश की सरकारी न्यूज एजेंसी BSS के मुताबिक उन्होंने कहा, 'हम सटीक जानकारी जानना चाहते हैं और इसे प्राप्त करने के लिए एक प्रक्रिया स्थापित करना चाहते हैं।' 'जमानत हर नागरिक का अधिकार' सेंट मैरी कैथेड्रल के फादर अल्बर्ट रोसारियो ने कहा, 'जमानत प्राप्त करना हर किसी का अधिकार है।' प्रसिद्ध बांग्लादेशी लेखक फरहाद मजहर ने भी दास के जमानत के अधिकार पर जोर दिया। बैठक में बांग्लादेश बौद्ध संघ के मुख्य सलाहकार सुकोमल बरुआ ने शांति और एकता के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव रखा। रमना हरिचंद मंदिर के सहायक सचिव अविनाश मित्रा ने कहा कि हिंदू समुदाय ने अपनी शिकायतें रखीं और यूनुस ने धैर्यपूर्वक इन्हें सुना। शेख हसीना के भाषणों पर लगी रोक बांग्लादेश की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के किसी भी भाषण को प्रसारित पर प्रतिबंध लगा दिया। पूर्व प्रधानमंत्री हसीना को अगस्त में बांग्लादेश में हुए भारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान सत्ता से बेदखल किया गया था और इसके बाद वह भारत चली गई थीं। हसीना के भाषणों के प्रसारण और प्रकाशन संबंधी मामलों की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधिकरण का यह फैसला पूर्व प्रधानमंत्री की ओर से न्यूयॉर्क में अपनी अवामी लीग पार्टी के समर्थकों को ‘डिजिटल’ माध्यम से पहली बार सार्वजनिक रूप से संबोधित किए जाने के एक दिन बाद आया है। अपने संबोधन में उन्होंने बांग्लादेश के अंतरिम नेता नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस पर नरसंहार करने और अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया। recent visitors 67

पुलिस के सामने किया सरेंडर, छत्तीसगढ़-बीजापुर में 11 लाख के इनामी सहित पांच नक्सलियों ने किया माओवाद से तौबा

बीजापुर. बीजापुर में शुक्रवार को एक बार फिर लाल आतंक को बड़ा झटका लगा है। 11 लाख रुपये के इनामी सहित पांच नक्सलियों ने नक्सल पंथ से तौबा करते हुए आत्मसमर्पण कर दिया है। इस वर्ष अब तक 189 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। वहीं, विभिन्न घटनाओं में शामिल 473 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है। बस्तर आईजी, डीआईजी दंतेवाड़ा, सीआरपीएफ डीआईजी ऑप्स व पुलिस अधीक्षक बीजापुर के निर्देश पर जिले में चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत डीआरजी, बस्तर फाइटर, कोबरा व सीआरपीएफ के संयुक्त प्रयासों से तथा सरकार की पुनर्वास व आत्मसमर्पण नीति तथा जिले में चलाए जा रहे नियद नेल्लानार योजना से प्रभावित होकर पश्चिम बस्तर डिवीजन के कंपनी नम्बर 2 के सेक्शन ए सदस्य, पार्टी सदस्य, जनताना सरकार अध्यक्ष सहित 5 नक्सलियों ने नक्सलवाद की खोखली विचारधारा, भेदभाव पूर्ण व्यवहार, उपेक्षा व प्रताड़ना से तंग आकर शुक्रवार को पुलिस व सीआरपीएफ के आला अफसरों के सामने नक्सल पंथ से तौबा करते हुए आत्मसमर्पण कर दिया। इन आत्मसमर्पित नक्सलियों में संतु कोडमे, पायकु पुनेम, गुड्डू हपका, सोमारू माड़वी व भीमा कश्यप शामिल हैं। आत्मसमर्पित नक्सलियों को आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति के तहत 25 – 25 हजार रुपये नकद प्रोत्साहन राशि प्रदाय की गई। इसी के साथ ही इस वर्ष अब तक 189 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। वहीं, विभिन घटनाओं में शामिल 473 नक्सलियों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया है। recent visitors 69