प्रदेश के युवाओं के स्टार्ट-अप ने की अंतर्राष्ट्रीय आयोजन कम-अप-2024 में भागीदारी, सीएम ने दी बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सियोल, दक्षिण कोरिया में 'कम-अप-2024' आयोजन में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए एआई स्टार्ट-अप क्षेत्र में कार्यरत प्रदेश के युवा अर्पित श्रीवास्तव को बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृप्टन एआई टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए 'कम-अप-2024' में देश के युवाओं ने अपनी भागीदारी दर्ज की। निश्चित ही इससे प्रदेश की स्टार्ट-अप नीति की सफलता भी प्रमाणित हुई है। प्रदेश के अन्य युवा भी इस उपलब्धि से प्रेरित होंगे। उल्लेखनीय है कि 11 और 12 दिसंबर को दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में यह आयोजन सम्पन्न हुआ। कृप्टन एआई स्टार्ट-अप मध्यप्रदेश के युवाओं का है और प्रदेश से चयनित युवक अर्पित हैं, जो प्रदेश के लिए इस गौरवपूर्ण उपलब्धि का माध्यम बने हैं। पूरे देश से कुल 6 स्टार्टअप चयनित हुए। दक्षिण कोरिया और यूएई की स्टार्ट-अप मिनिस्टर से हुआ युवाओं का संवाद सियोल के इस प्रतिष्ठित आयोजन में एआई के क्षेत्र में भविष्य की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण हस्तियों की उपस्थिति रही, जिनमें दक्षिण कोरिया की लघु और मध्यम उद्योग मंत्री ओ यंग-जू और संयुक्त अरब अमीरात की राज्य मंत्री (उद्यमिता) एच.ई. आलिया बिंत अब्दुल्ला अल माज़रुई शामिल थीं। सुश्री आलिया ने कृप्टन एआई टेक्नोलॉजीज के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया और दक्षिण कोरिया और अन्य देशों में एआई के भविष्य और संभावनाओं पर चर्चा की। कृप्टन की ओर से अर्पित के अलावा भूमिका वल्लभदास, अभय अठया और पार्थ राठौड़ भी आयोजन में उपस्थित थे। आयोजन में कृप्टन एआई टेक्नोलॉजीज ने अपनी उन्नत एआई प्रौद्योगिकियों और उत्पादों का प्रदर्शन किया, जो 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत तैयार किए गए हैं। कंपनी के प्रतिनिधियों ने विभिन्न देशों से आए निवेशकों और अधिकारियों के साथ जुड़कर वैश्विक सहयोग के अवसरों पर चर्चा की। इस आयोजन का उद्देश्य एआई के क्षेत्र में नए विचारों और तकनीकों को प्रोत्साहित करना, स्टार्ट-अप्स को वैश्विक मंच प्रदान करना और विभिन्न देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना था। भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले युवाओं का मानना है कि सियोल के आयोजन भागीदारी से भारत की एआई क्षेत्र में न सिर्फ महत्वपूर्ण भूमिका को सराहा जा रहा है बल्कि भारत इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्वकर्ता बन कर सामने आ रहा है। दक्षिण कोरिया और अन्य देशों में व्यापार और साझेदारी की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई है।   recent visitors 41

इंदौर में भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने भाजपा सांसद प्रताप सारंगी को धक्का देने पर जताया विरोध

इंदौर भाजपा सांसद प्रताप सारंगी को राहुल गांधी द्वारा संसद के बाहर धक्का दिए जाने के विरोध में इंदौर में भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस कार्यालय का घेराव किया। BJYM के कार्यकर्ताओं ने कार्यालय में काली स्याही और चप्पलें भी फेंकी। इस प्रदर्शन को रोकने पहुंची पुलिस से कार्यकर्ताओं की झड़प भी हो गई। भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप था कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का आचरण संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह आपत्तिजनक था। पुलिस ने कार्यकर्ताओं को तितर-बितर करने की कोशिश की, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी से माफी की मांग की है।   सदने के बाहर सांसदों में धक्का-मुक्की राजधानी दिल्ली में गुरुवार को संसद के बाहर 70 वर्षीय भाजपा सांसद प्रताप सारंगी कांग्रेस सांसदों के प्रदर्शन के दौरान गिरकर घायल हो गए। सारंगी ने राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस नेता ने उन्हें धक्का दिया, जिससे वह गिर गए और उनके सिर से खून निकलने लगा।   संसद के बाहर कांग्रेस का प्रदर्शन यह घटना तब हुई, जब कांग्रेस सांसद संसद के मुख्य द्वार के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे, उस समय भाजपा सांसद प्रताप सारंगी और मुकेश राजपूत संसद में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे। धक्का-मुक्की में दोनों घायल हो गए। घायल होने के बाद प्रताप सारंगी को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस मामले में कांग्रेस नेताओं के खिलाफ एफआईआर भी करवाई गई है। recent visitors 35

पुलिस प्रशासन ने जूना अखाड़े पंहुचकर तंबू आदि उखड़वा दिए और अखाड़ा परिसर में इस संबंध में नोटिस चस्पा किया

हरिद्वार बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रहे अत्याचारों के विरूद्ध श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े में गुरुवार से प्रस्तावित विश्व धर्म संसद के आयोजन को पुलिस ने रूकवा दिया है। तीन दिवसीय आयोजन की जूना अखाड़ा परिसर में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। हालांकि, जिला प्रशासन ने विश्व धर्म संसद के आयोजन की अनुमति नहीं दी थी। पुलिस ने अखाड़ा परिसर में चस्पा कर दिया नोटिस पुलिस प्रशासन ने सुबह जूना अखाड़े पंहुचकर वहां लगे तंबू आदि उखड़वा दिए और अखाड़ा परिसर में इस संबंध में नोटिस चस्पा कर दिया। प्रशासन की कार्रवाई के बाद दबाव में आते हुए आयोजकों ने धर्म संसद को स्थगित कर दिया। इक्कीस दिसंबर तक होने वाली धर्म संसद का आयोजन जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर और गाजियाबाद के डासना मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद गिरी द्वारा किया जा रहा था। यति नरसिंहानंद करीब दो वर्ष पहले भी हरिद्वार मे आयोजित धर्म संसद में घृणा भाषण मामले में जेल जा चुके ह । बाद में यति नरसिंहानन्द ने कहा, ‘‘बांग्लादेश में जिस तरह से हिंदुओं का नरसंहार हो रहा है, पाकिस्तान में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं और कश्मीर से हिंदुओं को हटा दिया गया, उसकी भविष्य में पुनरावृत्ति न हो और भारत इस्लामी जिहाद का शिकार न बन जाए, इस पर चर्चा के लिए धर्म संसद का आयोजन किया गया था।'' उन्होंने कहा कि वह जिला प्रशासन द्वारा अनुमति न देने के कारण यह धर्म संसद स्थगित कर रहे हैं। हरिद्वार से उच्चतम न्यायालय तक करेंगे पैदल यात्रा- नरसिंहानंद यति नरसिंहानंद ने घोषणा की कि इसके विरोध में अब वह हरिद्वार से उच्चतम न्यायालय तक पैदल यात्रा करेंगे और वहां अपनी गुहार लगाएंगे। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने इस्लाम के बारे में जो बात कही है, अगर वह गलत है तो उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई कोई भी सजा मैं भुगतने को तैयार हूं। दो वर्ष पूर्व भी यति नरसिंहानंद द्वारा हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद में कथित घृणा भाषण को लेकर देश भर में उनकी आलोचना हुई थी जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। एक दिन पूर्व बुधवार को भी धर्म संसद के आयोजन की अनुमति न मिलने पर यति नरसिंहानंद गिरी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अपने खून से पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि हिंदू राष्ट्र की बात करते-करते हिन्दू इस देश में दोयम दर्जे का नागरिक बन गया है। पत्र में उन्होंने लिखा था कि वह और उनके कुछ साथी बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदुओं के नृशंस नरसंहार से व्यथित होकर उनकी पीड़ा को दुनिया भर तक पहुंचाने के लिए माया देवी मंदिर श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े में विश्व धर्म संसद का आयोजन कर रहे हैं और उनका यह आयोजन किसी सार्वजनिक स्थान पर नहीं बल्कि जूना अखाड़े के मुख्यालय पर हो रहा है। उन्होंने लिखा, ‘‘यह भीड़ एकत्रित करके शक्ति प्रदर्शन करने का कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है बल्कि सीमित संख्या में संतों और प्रबुद्ध नागरिकों का एक छोटा सा सम्मेलन है। मंदिर के अंदर होने वाले ऐसे किसी कार्यक्रम के लिए कोई अनुमति की आवश्यकता नहीं है। परन्तु हरिद्वार के प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी शायद हम हिंदुओ को दोयम दर्जे का नागरिक मानते हैं और हम पर इसके लिए अनुमति मांगने का दबाव बना रहे हैं।'' पत्र में उन्होंने कहा, ‘‘क्या अब हिंदुओ को अपने धर्म बंधुओं की नृशंस हत्याओं पर रोने के लिए भी सरकार की अनुमति की जरूरत पड़ेगी।''   recent visitors 43

डंकी रूट पर ताले की तैयारी, भारतीयों की मुश्किलें बढ़ी, अमेरिका में प्रवेश के लिए मेक्सिको सीमा का उपयोग अब होगा बंद

वाशिंगटन अमेरिकी सपने को साकार करने की चाह में हजारों भारतीय हर साल खतरनाक और गैरकानूनी 'डंकी रूट' के जरिए अमेरिका पहुंचने की कोशिश करते हैं। यह रास्ता उन्हें कनाडा के दुर्गम जंगलों और जोखिमभरी सीमा से होते हुए अमेरिका तक ले जाता है। लेकिन अब यह मुश्किल यात्रा जल्द ही असंभव हो सकती है। अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी 2025 में पद संभालने से पहले कनाडा को चेतावनी दी है कि यदि उसने गैरकानूनी प्रवास और नशीले पदार्थों की तस्करी पर सख्त कदम नहीं उठाए तो 25% आयात शुल्क लगाया जाएगा। इस चेतावनी के बाद कनाडा ने सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए $900 मिलियन की योजना का ऐलान किया है। गिर रहा है डंकी रूट का भरोसा गैरकानूनी तरीके से अमेरिका में प्रवेश के लिए दक्षिणी सीमा यानी अमेरिका-मेक्सिको सीमा का उपयोग लंबे समय से होता आ रहा है। लेकिन हाल के वर्षों में उत्तर की ओर कनाडा की सीमा पर बढ़ते दबाव के कारण वहां भी गैरकानूनी गतिविधियां बढ़ने लगी थीं। कनाडा और अमेरिका के बीच आसान रास्ता मानकर हजारों प्रवासी, जिनमें बड़ी संख्या भारतीयों की है, इस 'डंकी रूट' का उपयोग कर रहे थे। 2023 में करीब 30,000 भारतीयों ने इस रास्ते से अमेरिका में प्रवेश की कोशिश की, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 43,000 तक पहुंच गया। कनाडा की सख्ती, भारतीयों की मुश्किलें डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सीमाओं पर निगरानी बढ़ाने का ऐलान किया है। अब ड्रोन, हेलीकॉप्टर, और स्निफर डॉग्स की मदद से सीमा पर हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है। कनाडा की नई नीति न केवल 'डंकी रूट' को बंद कर देगी बल्कि प्रवासियों की जोखिमभरी यात्रा के विकल्प भी खत्म कर देगी। यह कदम उन भारतीय परिवारों के लिए बड़ा झटका है जो अपनी पूरी जमा पूंजी बेचकर अमेरिका में बेहतर जीवन की तलाश में निकलते हैं। खतरों से भरी डंकी रूट की यात्रा यह यात्रा न केवल महंगी बल्कि बेहद खतरनाक भी है। मानव तस्कर एक व्यक्ति से 40-80 लाख रुपये तक लेते हैं। प्रवासी अक्सर जंगली इलाकों, ऊबड़-खाबड़ रास्तों और कड़ी जलवायु का सामना करते हैं। 2022 में पटेल परिवार की ठंड से मौत हो जाने जैसी घटनाएं इन खतरों को उजागर करती हैं। कनाडा की नई सख्त नीतियां और अमेरिका की कड़ी निगरानी के बीच, यह स्पष्ट है कि डंकी रूट अब 'अमेरिकी सपने' को पूरा करने का आसान विकल्प नहीं रहेगा। recent visitors 167

जान बचाने के लिए 14 करोड़ की जरूरत, इलाज का खर्च उठाने की मांग, सुप्रीम कोर्ट में 11 महीने की बच्ची की गुहार

नई दिल्ली भावुक याचिका दायर की गई है, जिसमें 11 महीने की एक बच्ची के इलाज के लिए 14 करोड़ रुपये की आवश्यकता की बात की गई है। बच्ची स्पाइनल मस्क्युलर अट्रोफी (SMA) नामक एक दुर्लभ और खतरनाक बीमारी से जूझ रही है, जो अगर समय रहते इलाज न किया जाए तो 24 महीने की उम्र तक जानलेवा हो सकती है। इस बीमारी में बच्चों की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे सांस लेने में परेशानी होती है और शरीर के अन्य अंगों का कार्य प्रभावित होता है। इस गंभीर स्थिति में बच्ची को बचाने के लिए उसकी मां ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। स्पाइनल मस्क्युलर अट्रोफी (SMA) क्या है? स्पाइनल मस्क्युलर अट्रोफी (SMA) एक जीन से संबंधित बीमारी है, जिसमें मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली तंत्रिका कोशिकाओं में कमी आ जाती है। इससे मांसपेशियों की ताकत घटने लगती है और धीरे-धीरे मांसपेशियां कार्य करना बंद कर देती हैं। SMA के विभिन्न प्रकार होते हैं, जिनमें से सबसे गंभीर प्रकार में बच्चे की मौत 2 साल की उम्र से पहले हो सकती है। इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में **ज़ोलजेंस्मा** नामक एक इंजेक्शन को इस बीमारी के इलाज के लिए मंजूरी दी गई है, जो बेहद महंगा है और इसका असर बच्चे की स्थिति को स्थिर करने और मांसपेशियों को फिर से सक्रिय करने में मदद करता है। क्या है याचिका में मांग? याचिका में बच्ची की मां ने सुप्रीम कोर्ट से यह अपील की है कि उनकी बच्ची को इलाज के लिए ज़ोलजेंस्मा इंजेक्शन की तत्काल आवश्यकता है, जिसकी कीमत 14 करोड़ 20 लाख रुपये है। दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने इस इंजेक्शन के लिए यही राशि निर्धारित की है, जो एक सामान्य परिवार के लिए जुटाना नामुमकिन है। याचिका में बताया गया है कि इस इंजेक्शन के बिना बच्ची की जान को गंभीर खतरा है, और समय की कमी के कारण किसी प्रकार की देरी से उसकी जान जा सकती है। क्या कहती है बच्ची के परिवार की स्थिति? याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि बच्ची के पिता भारतीय वायुसेना में एक नॉन-कमीशंड अधिकारी हैं। वायुसेना में सैनिकों और उनके आश्रितों के इलाज के लिए एक प्रावधान है, लेकिन दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए दी जाने वाली वित्तीय सहायता में इस बीमारी का इलाज शामिल नहीं है। इस कारण से बच्ची के परिवार को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। सैनिकों के बीच क्राउड फंडिंग (आपसी चंदे से राशि जुटाने) के लिए उच्च अधिकारियों ने अनुमति देने से मना कर दिया। याचिकाकर्ता ने उदाहरण देते हुए बताया कि बीकानेर में एक अन्य बच्चे के इलाज के लिए, जो इसी बीमारी से पीड़ित था, उसके शिक्षक पिता ने विभाग से कर्मचारियों के वेतन से कुछ राशि काटने की अनुमति ली थी, ताकि इलाज के लिए आवश्यक राशि जुटाई जा सके। लेकिन वायुसेना के अधिकारियों ने इस तरह की पहल को अस्वीकार कर दिया और सैनिकों को किसी प्रकार का संदेश भेजने की अनुमति भी नहीं दी। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से क्या राहत मांगी? याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वह केंद्र सरकार को आदेश दे कि वह बच्ची के इलाज का खर्च उठाए। साथ ही, उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि कोर्ट रक्षा मंत्रालय और वायुसेना प्रमुख को निर्देश दे कि वे सैनिकों को क्राउड फंडिंग के लिए संदेश भेजने की अनुमति दें, ताकि बच्ची का इलाज संभव हो सके। याचिकाकर्ता ने यह भी अपील की है कि केंद्र सरकार ज़ोलजेंस्मा इंजेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए, ताकि इलाज में कोई देरी न हो। याचिका में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून की नज़र में समानता) और अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का हवाला भी दिया गया है, जिसमें यह कहा गया है कि अगर समय रहते इलाज नहीं किया गया, तो बच्ची की जान को खतरा हो सकता है, और उसे इस दुर्लभ बीमारी से बचाने के लिए त्वरित कदम उठाए जाने चाहिए। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह आग्रह किया है कि वह इस मामले में तुरंत दखल दे और बच्ची को जीवन बचाने का अधिकार दिलवाए। सुप्रीम कोर्ट का संभावित कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर त्वरित सुनवाई की आवश्यकता जताई और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है कि वह इस गंभीर स्थिति में बच्ची के इलाज के लिए कैसे मदद करेगा। इस मामले में अदालत का निर्णय बेहद महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह न केवल एक बच्चे की जिंदगी से जुड़ा है, बल्कि यह देश के स्वास्थ्य और अधिकारों के बुनियादी सिद्धांतों को भी चुनौती देता है। भारत में दुर्लभ बीमारियों का इलाज और उसकी लागत इस मामले से एक बार फिर यह तथ्य सामने आया है कि भारत में दुर्लभ बीमारियों का इलाज अत्यधिक महंगा है, और सरकारी योजनाओं के तहत ऐसी बीमारियों के इलाज के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान नहीं किया गया है। ज़ोलजेंस्मा इंजेक्शन की कीमत इतनी अधिक है कि इसे एक सामान्य परिवार के लिए वहन करना संभव नहीं है। यह मुद्दा यह भी उजागर करता है कि सरकारी संस्थाओं और स्वास्थ्य मंत्रालयों को इस तरह की गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए कुछ ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। साथ ही, यह भी साबित करता है कि ऐसे मामलों में क्राउड फंडिंग जैसी मदद से इलाज के खर्च को पूरा करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन सरकारी समर्थन का अभाव महसूस किया जा रहा है।  recent visitors 41

प्रदेश में जनजातीय विकास के लिये सामाजिक, आर्थिक प्रगति की लिखी जा रही नई इबारत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में जनजातीय विकास के लिये सामाजिक और आर्थिक प्रगति की नई इबारत लिखी जा रही है। प्रदेश सरकार द्वारा जनजातीय वर्ग के उत्थान के लिए चलाई जा रही योजनाओं और कार्यक्रमों से राज्य में जनजातीय समुदाय के सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और आर्थिक जीवन में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार के सतत् प्रयासों से यहाँ के जनजातीय समुदाय अब प्रगति की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह विकास न केवल राज्य के लिए बल्कि देश के लिए भी एक प्रेरणा है। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) के जरिए प्रदेश की तीन विशेष पिछड़े जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के समग्र विकास एवं कल्याण के लिए अभूतपूर्व काम हो रहा है। मध्यप्रदेश पीएम जन-मन के क्रियान्वयन में देश में अव्वल स्थान पर है। ड्रॉप-आउट में कमी और रोजगार में वृद्धि राज्य में शिक्षा संबंधी प्रोत्साहन योजनाओं के प्रभाव से जनजातीय विद्यार्थियों की साक्षरता दर 51 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। उच्च शिक्षा के लिए शत-प्रतिशत छात्रवृत्ति मिलने से छात्रों के ड्रॉप-आउट में उल्लेखनीय कमी आई है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के शिक्षण संस्थानों में जनजातीय छात्रों की भागीदारी में वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही सरकार के प्रयासों से अब युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हो रहे हैं। स्वरोजगार और ऋण योजनाओं का लाभ सरकार द्वारा चलाई जा रही स्वरोजगार और आर्थिक कल्याण योजनाओं से जनजातीय हितग्राहियों को बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराए गए हैं। इससे वे विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर बेहतर जीवन यापन कर रहे हैं, माध्यम से वे अपने रोजगार सफलतापूर्वक चला रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है। वन अधिकार अधिनियम से मिला भूमि का अधिकार वन अधिकार अधिनियम-2006 के प्रभावी क्रियान्वयन से लगभग 2 लाख 75 हजार जनजातीय परिवारों को उनकी जमीनों पर अधिकार प्रदान किया गया है। इससे उन्हें अपनी भूमि पर खेती करने और जीवन स्तर को सुधारने का मौका मिला है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सम्मान जनजातीय अनुसंधान और विकास संस्थान द्वारा स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले जनजातीय सेनानियों की वीर गाथाओं को संरक्षित करने के लिए म्यूजियम बनाए गए हैं। यह पहल न केवल उनके बलिदान को सम्मानित करती है, बल्कि युवा पीढ़ी को प्रेरित भी करती है। साहूकारों से मिली आजादी मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति साहूकार विनियम 1972 को 2021 में संशोधित कर लागू किया गया, जिससे जनजातीय समुदाय को गैरकानूनी साहूकारों के शोषण से मुक्ति मिली है। आधुनिक सुविधाओं का विस्तार जनजातीय क्षेत्रों में कृषि, सिंचाई, विद्युत, सड़क, और संचार सुविधाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, जिससे इन क्षेत्रों का विकास तीव्र गति से हो रहा है।   recent visitors 93

भारत मोबाइल बनाने के मामले में आत्मनिर्भर , चौंका देगा ये आंकड़ा; मंत्री जितिन प्रसाद ने दिया जवाब

नई दिल्ली मोबाइल फोन का इस्तेमाल वर्तमान समय में हर कोई रहा है। भारत जैसी बड़ी जनसंख्या वाले देश में ये आंकड़ा काफी अधिक है। मगर दिलचस्प बात ये है कि भारतमोबाइल यूज करने के साथ-साथ इसका उत्पादन करने में भी आगे है। जी हां, भारत ने मोबाइल हैंडसेट निर्माण में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, देश में इस्तेमाल होने वाले लगभग 99% डिवाइस घरेलू स्तर पर बनाए जा रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने संसद के साथ यह जानकारी साझा की, कि पिछले एक दशक में घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में काफी वृद्धि देखी गई है। भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स का उत्पादन मूल्य वित्त वर्ष 2014-15 में 1,90,366 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 9,52,000 करोड़ रुपये हो गया। यह 17% से अधिक की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्शाता है। देश मोबाइल फोन के प्रमुख आयातक से निर्यातक बन गया है। मोबाइल विनिर्माण और निर्यात वृद्धि वित्त वर्ष 2014-15 में, भारत में बेचे गए लगभग 74% मोबाइल फोन आयात किए गए थे। अब, भारत अपने 99.2% मोबाइल हैंडसेट घरेलू स्तर पर बनाता है। यह बदलाव इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में भारत की बढ़ती क्षमताओं और मोबाइल निर्यातक देश के रूप में इसके उभरने को दर्शाता है। प्रसाद ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 25 लाख नौकरियां पैदा की हैं। इस वृद्धि का श्रेय उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न सरकारी पहलों को जाता है। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में पैदा हुईं 25 लाख नौकरियां वित्त वर्ष 2014-15 में भारत में बिकने वाले लगभग 74% मोबाइल फोन आयात किए गए थे। वहीं, अब भारत अपने 99.2% मोबाइल हैंडसेट घरेलू स्तर पर बनाता है। यह बदलाव इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग में भारत की बढ़ती क्षमताओं के साथ ही मोबाइल एक्सपोर्टर देश के रूप में इसके उभरने को दिखाता है। जितिन प्रसाद ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 25 लाख नौकरियां पैदा की हैं। इस वृद्धि का श्रेय उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई विभिन्न सरकारी पहलों को जाता है। मोबाइल फोन के इम्पोर्टर से एक्सपोर्टर बना भारत भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स का उत्पादन मूल्य वित्त वर्ष 2014-15 में 1,90,366 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 9,52,000 करोड़ रुपये हो गया। यह 17% से अधिक की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) को दिखाता है। देश मोबाइल फोन के प्रमुख आयातक से निर्यातक बन गया है। 76 हजार करोड़ की लागत से शुरू हुआ 'सेमीकॉन इंडिया' सरकार ने 76,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य देश के भीतर सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्यूफैक्चरिंग इकोसिस्टम डेवलप करना है। इसके अलावा बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी हार्डवेयर मैन्यूफैक्चरिंग को समर्थन देने के लिए अन्य योजनाएं भी हैं। प्रोडक्शन लिंक्ड इनीशिएटिव स्कीम (PLI) और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स व सेमीकंडक्टर्स की मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की योजना (SPECS) इन्हीं कोशिशों में से एक है। इस तरह की तमाम पहलों का उद्देश्य ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट में भारत की प्रतिस्पर्धा को बढ़ाना है। हालांकि, ग्लोबल प्लेयर्स के साथ क्वालिटी और प्राइसिंग कॉम्पिटीशन कई चुनौतियां भी पेश करता है। इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को बढ़ावा देने वाली सरकारी पहल सरकार ने 76,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य देश के भीतर सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है। इसके अतिरिक्त, बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी हार्डवेयर विनिर्माण का समर्थन करने के लिए अन्य योजनाएं भी हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में भारत की प्रगति पर चर्चा करते हुए प्रसाद ने इन मुद्दों पर प्रकाश डाला। इन चुनौतियों का समाधान विकास को बनाए रखने और वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। recent visitors 73