राजा भैया ने बाबा बागेश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का समर्थन किया, शंकराचार्यों को दी नसीहत…

प्रतापगढ़  उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेताओं में से एक जनसत्ता पार्टी लोकतांत्रिक के अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का एक पॉडकास्ट चर्चा का विषय बना हुआ है। इस पॉडकास्ट में राजा भैया हिंदुओं के सबसे बड़े धर्मगुरु शंकराचार्य के बयानों पर सवाल उठाते दिखे हैं। उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हिंदुओं का नेता बनने वाले बयान पर आयोजित क्युमिटी पॉडकास्ट स्पेस में कई मुद्दों को गंभीरता से उठाया। स्पेस में उन्होंने हिंदू जन जागरण के लिए बाबा बागेश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की यात्रा की सराहना की। साथ ही, उन्होंने शंकराचार्यों के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को भला-बुरा कहने के मसले पर नाराजगी जताई। कुंडा विधायक राजा भैया ने शंकराचार्यों के बयान पर ऐतराज जताते हुए कहा कि यह सनातन एकता के लिए ठीक नहीं है। पॉडकास्ट में राजा भैया ने चारों शंकराचार्यों को नसीहत दे दी कि उन्हें केरल और पश्चिम बंगाल में जाकर धरना देना चाहिए। दरअसल, पश्चिम बंगाल और केरल से हिंदुओं पर अत्याचार की खबरें सामने आती रही हैं। इस मामले में किसी भी हिंदू धर्म के सर्वोच्च नेता की ओर से सवाल न उठाए जाने की बात कही जाती रही है। कई राजनीतिक दल भी इन मामलों पर चुप्पी साध लेते हैं। पॉडकास्ट में राजा भैया ने क्या कहा? राजा भैया ने पॉडकास्ट में साफ तौर पर कहा कि हमें अपनी बात आम लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है। हमें एकजुट होने के लिए कार्य करना है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति बुद्धिजीवी या परास्नातक नहीं है। इस बात का ध्यान रखने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि जो हमारा है, उसका हम दावा करेंगे। हम भी स्वयंसेवक रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह इतिहास के सत्य पुनर्लेखन का दौर है। जिन मुद्दों को दबाया गया है, उसे उजागर किया जा रहा है। संभल मुद्दे पर जताया आश्चर्य कुंडा विधायक ने संभल का मुद्दा उठाते हुए वहां की ताजा स्थिति पर आश्चर्य जताया। उन्होंने कहा कि आज संभल में अगर बिजली का मीटर बदला जाना है तो अर्द्धसैनिक बलों को लेकर जाना पड़ रहा है। ऐसे लग रहा है कि सीमा पर हमला करने जाना पड़ रहा है। आपलोगों ने भी टीवी पर स्थिति को देखा होगा। राजा भैया ने कहा कि विद्युत मीटर तो बिजली विभाग का कर्मचारी बदलता है। हमने यह बात विधानसभा में भी कही। जनसत्ता पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि यूपी में योगी जी के रहने के बाद भी बिजली का मीटर बदलने और कटिया चेक करने की सामान्य प्रक्रिया में भी प्रशासनिक अधिकारी पर है। यह आप सबने देखा है। इससे स्थिति की गंभीरता को समझा जा सकता है। हिंदू लीडर की बताई जरूरत राजा भैया ने पॉडकास्ट में एक वक्ता के हिंदू लीडर की जरूरत को सही करार देते हुए कहा कि हां, हमें हिंदू नेता की जरूरत है। साथ ही, उन्होंने कहा कि आपने देखा होगा, एक युवा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी सनातन एकता यात्रा निकालते हैं और उनके समर्थन में जितने लोग आए, उससे अधिक विरोध में उतर गए। यहां तक कि पूज्य शंकराचार्य भी उन्हें ढोंगी और पाखंडी बताने लगे। राजा भैया ने कहा कि हमें परायों से दिक्कत नहीं है। हमारे अपने ही हम पर प्रहार करने लगते हैं, यह दिक्कत वाली बात है। इससे हम कमजोर होते हैं। इससे हम हतोत्साहित होते हैं। हमें केवल इतना करना होगा कि अगर कोई सनातनी धर्म के लिए अपने स्तर पर कुछ काम कर रहा है तो उसे हतोत्साहित न करें। उस पर सवाल न उठाएं। राजा भैया ने आगे कहा कि मुस्लिमों में आप देखिए। चाहे दाउद हो, चाहे मुख्तार हो या अतीक हो, कभी भी मुस्लिम धर्मगुरुओं की ओर से उनकी बुराई नहीं सुनी होगी। इन लोगों के कृत्यों के बारे में हर किसी ने सुन रखा है। लेकिन, कभी कोई आवाज उनकी तरफ से उठती सुनी है आपने? शंकराचार्यों से किया अनुरोध राजा भैया ने कहा कि हिंदू धर्म के सर्वोच्च धार्मिक नेता चारों शंकराचार्य अगर केरल और बंगाल की सड़कों पर बैठकर धरना देते हैं तो सोचिए कितना बड़ा समाचार बनेगा। हिंदुओं का कितना उत्साह बढ़ेगा? आखिर वे हैं क्यों? दरअसल, राजा भैया ने इन राज्यों में हिंदुओं पर अत्याचार के मसले पर यह बात कही। उन्होंने आगे कहा कि महाकुंभ का आयोजन हो रहा है। इसमें सभी लोग आमंत्रित हैं। कुंडा विधायक ने कहा कि महाकुंभ में हिंदुओं के मुद्दों पर काम करने वालों को अपने विचार रखने का मंच तैयार किया गया है। पूरे भारत के सनातनी हिंदू वहां रहेंगे। हर जाति, बिरादरी के लोग वहां मौजूद रहेंगे। महाकुंभ से हिंदुत्व की आवाज, महाध्वनि गुंजायमान हो, इस प्रकार का हमारा प्रयास होना चाहिए। recent visitors 169

श्रीनगर में शून्य से 8.5 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज हुआ तापमान, दिसंबर महीने का तीसरा सबसे कम तापमान

श्रीनगर श्रीनगर में न्यूनतम तापमान इस मौसम में शून्य से 8.5 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया, जो 1974 के बाद से अब तक सबसे ठंडा रहा। उस समय तापमान शून्य से 10.3 डिग्री सेल्सियस नीचे पहुंच गया था। वैसे, श्रीनगर में अब तक का सबसे कम तापमान शून्य से 12.8 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा है, जो 13 दिसंबर 1934 को दर्ज किया गया था। इस बार का तापमान 1891 के बाद से श्रीनगर में दिसंबर महीने का तीसरा सबसे कम तापमान है। कुपवाड़ा में भी माइनस 7.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जो 1998 के बाद से दिसंबर में सबसे कम तापमान है। कुपवाड़ा का अब तक का रिकॉर्ड माइनस 9.4 डिग्री सेल्सियस है, जो 31 दिसंबर 1986 को दर्ज किया गया था। इस तरह से आज का तापमान कुपवाड़ा जिले में दिसंबर महीने में दर्ज किए गए 9वें सबसे कम तापमान के रूप में रिकॉर्ड किया गया है। इसके अलावा, इस मौसम में अन्य मैदानी इलाकों में भी सबसे ठंडी रात दर्ज की गई। बर्फ के आवरण के अभाव के कारण कई पहाड़ियां कश्मीर के मैदानों की तुलना में अधिक गर्म रही। इससे पहले 21 दिसंबर को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कोहरे को लेकर येलो अलर्ट जारी किया था। आईएमडी ने उत्तर-पश्चिम भारत के प्रमुख स्थानों में अगले 5-7 दिनों तक शीत लहर की स्थिति की आशंका जताई थी। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने बताया था, अगले छह दिनों तक जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में शीत लहर की स्थिति बनी रहेगी। राजस्थान और पंजाब में भी दो दिनों तक सर्दी का सितम जारी रहने की संभावना जताई गई थी। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने शीतलहर के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश में अगले छह दिनों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया था, जबकि पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में 21 दिसंबर को काफी ठंडा होने की बात कही गई थी।   recent visitors 64

मुलेर मार्ग के पास सर्चिंग के दौरान आईईडी बम ब्लास्ट करने वाले 3 नक्सली गिरफ्तार, डेटोनेटर, पावर बैटरी भी बरामद

दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में मुलेर मार्ग के पास सर्चिंग के दौरान शनिवार को पुलिस ने आईईडी बम ब्लास्ट के एक ईनामी माओवादी समेत तीन आरोपी नक्सली को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार नक्सलियों से इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर व पावर बैटरी भी बरामद की गई है। गिरफ्तार नक्सलियों में कोवासी देवा (डी के एम एस अध्यक्ष) एक लाख का ईनामी, पांडू मुचाकी और जोगा कवासी को डीआरजी, बस्तर फाइटर्स, सीएएफ और अरनपुर थाना की पुलिस ने गिरफ्तार किया। recent visitors 46

दिल्ली के मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान में विश्व ध्यान दिवस पर सैकड़ों लोगों ने ध्यान लगाया

नई दिल्ली संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 दिसंबर को विश्व ध्यान दिवस के रूप में घोषित किया है। इस अवसर पर दिल्ली के मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान में विश्व ध्यान दिवस पर सैकड़ों लोगों ने ध्यान लगाया। योग अनुसंधान अधिकारी ए. दौरेन सिंह ने बताया, “मैं इस केंद्र में लगभग 25 सालों से काम कर रहा हूं। 21 जून को विश्व योग दिवस मनाया जाता है। साथ ही 21 दिसंबर को अब से विश्व ध्यान दिवस मनाया जाएगा। यह दोनों ही विशेष दिवस हैं। एक साल का सबसे बड़ा दिन है, तो दूसरा साल की सबसे बड़ी रात है। बिना ध्यान के योग अधूरा है। इसलिए हर व्यक्ति को योग करना चाहिए। अभी तक लोगों को लगता था कि योग अलग है, ध्यान अलग है। लेकिन, ध्यान एक योग की ही प्रक्रिया है। जिसको योग करना है, उसके लिए ध्यान जरूरी है। बिना ध्यान के मन शांत नहीं होता है। आजकल की भागम भाग भरी जिंदगी में हर किसी को तनाव और एनजाइटी है। इसलिए मन शांत रखना चाहिए।” एक अन्य प्रतिभागी सेजल ने बताया, “मैं यहां फाउंडेशन कोर्स की छात्र हूं। मुझे योग सीखते दो महीने हो गए है। हम इसके माध्यम से दुनिया को दिखा रहे हैं कि हमारी जड़ें कहां हैं। आजकल के लोग मानसिक रूप से स्वस्थ महसूस नहीं कर रहे हैं। इसी वजह से योग की भूमिका अहम हो जाती है।” पीतमपुरा की रहने वाली रजनी अग्रवाल ने कहा, “मैंने यहां से फाउंडेशन कोर्स किया है। इसके बाद मैंने यहां से कई कोर्सेज किए। हम सब योग को बहुत मानते हैं। योग हमारे शरीर को ठीक रखता है। लेकिन, ध्यान हमारे मानसिक तनाव को दूर करता है। इस समय की कार्यशैली की वजह से लगभग हर व्यक्ति तनाव में रहता है। इससे लोगों को कई मानसिक बीमारियां हो जाती हैं। इससे हमारी शारीरिक स्थिति भी खराब हो जाती है। जब तक हम अंदर से शांत नहीं होंगे तब तक हमारा योग करने से कोई मतलब नहीं है। इसमें ध्यान बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।”   recent visitors 84

क्या है न्यायसंगत गुजारा भत्ता? सुप्रीम कोर्ट ने तय किए नए पैमाने, पति-पत्नी दोनों के लिए राहत

नई दिल्ली ! यह बेहद दुखद है कि बेंगलुरू में 34 साल के अतुल सुभाष ने अपनी पत्नी के साथ तलाक, गुजारा भत्ता और अन्य मामलों को लेकर चल रहे कानूनी विवाद के चलते अपनी जान दे दी. उन्होंने मरने से पहले अपनी पत्नी पर झूठे मुकदमे दर्ज कराने, पैसे ऐंठने और प्रताड़ित करने के आरोप लगाए. अतुल सुभाष ने अपने 24 पेज के सुसाइड नोट और 81 मिनट के वीडियो में आरोप लगाया कि वह पत्नी निकिता सिंघानिया को 40 हजार रुपये महीना गुजारा भत्ता के तौर पर दे रहे थे. फिर भी, पत्नी और उसके परिवार वाले सभी केस खत्म करने के लिए 3 करोड़ रुपये की रकम मांग रहे थे. इतना ही नहीं, बच्चे से मिलने के लिए 30 लाख रुपये की डिमांड की जा रही थी. अतुल सुभाष की आत्महत्या ने यह दिखाया है कि तलाक-गुजारा भत्ता के मामलों में कानूनी प्रक्रिया कितनी मुश्किल और तनावपूर्ण हो सकती है. इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक मामले में गुजारा भत्ता को लेकर अहम फैसला सुनाया है. यह मामला दुबई के एक बैंकर, उनकी पत्नी और बच्चे के बीच कानूनी विवाद से जुड़ा था. इस मामले में कोर्ट ने गुजारा भत्ता तय करते समय 8 बातों का ध्यान रखने के लिए कहा है. अब भारत की अदालतें गुजारा भत्ता के मामलों में इसी फैसले को आधार मानकर काम करेंगी. यह मामला दुबई के एक बैंक के सीईओ का है जिनकी साल 1998 में शादी हुई और 2004 में उनका पत्नी से विवाद हो गया. इसके बाद शुरू हुई कानूनी लड़ाई, जिसमें 20 साल तक यह बैंकर पारिवारिक अदालत से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक घूमता रहा. 2004 में बैंकर ने क्रूरता के आधार पर पत्नी से तलाक की अर्जी दायर की. इसके बाद पत्नी ने भी गुजारा भत्ता पाने के लिए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत याचिका दायर कर दी. यह केस 20 साल से अदालतों में घूम रहा है. परिवारिक अदालत से शुरू हुआ ये मामला पहले हाईकोर्ट में पहुंचा और फिर सुप्रीम कोर्ट. मुख्य सवाल यही है कि पत्नी को कितना गुजारा भत्ता मिलना चाहिए. 2015 में बैंकर ने सभी अदालती फैसलों का पालन करते हुए खुद से गुजारा भत्ता बढ़ा दिया. हालांकि, जब उनकी पत्नी ने और भी ज्यादा गुजारा भत्ता मांगना शुरू किया, तो उन्होंने विरोध किया. पति को यह मंजूर नहीं था कि यह रकम बार-बार बढ़ती रहे, खासकर जब उसकी अपनी भी आर्थिक स्थिति ठीक न हो और उसे अपने बच्चों की जिम्मेदारी भी निभानी हो. बैंकर के वकीलों के अनुसार, हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 26 एक वयस्क बच्चे को गुजारा भत्ता देने की अनुमति नहीं देती है. मगर, पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 26 को चुनौती दी और अदालत से अपने और अपने वयस्क बेटे को स्थायी गुजारा भत्ता देने का समाधान मांगा. पत्नी का कहना था कि इस कानून के हिसाब से बच्चों के बड़े होने पर ज्यादा पैसे मिलने चाहिए. उनके बेटा हाल ही में ग्रेजुएट हुआ है और अभी भी उन पर निर्भर है, इसलिए और उन्हें भी ज्यादा पैसे चाहिए. बैंकर को इस बात पर सबसे ज्यादा एतराज था कि उसकी पत्नी हिन्दू मैरिज एक्ट के सेक्शन 26 का गलत इस्तेमाल करके ज्यादा पैसे मांग रही है. हालांकि वो पहले के फैसलों को मानता रहा था और गुजारा भत्ता बढ़ाने को भी तैयार था. यह पारिवारिक विवाद जब कानून का सवाल बन गया, तो माननीय सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले ने केस के सभी तथ्यों को ध्यान से समझा. उन्होंने मौजूदा कानून को भी ध्यान में रखा. सुप्रीम कोर्ट ने रजनेश बनाम नेहा (2021) और उसके बाद के फैसलों में दिए गए सिद्धांतों को दोहराया है. फिर कोर्ट ने कुछ बातें बताईं जिनके आधार पर यह तय किया जा सकता है कि गुजारा भत्ता देना जरूरी है या नहीं और अगर जरूरी है तो कितना. सुप्रीम कोर्ट के नए दिशानिर्देश के अनुसार, गुजारा भत्ता तय करते समय पहले ये देखा जाना चाहिए कि पति-पत्नी दोनों का समाज में क्या स्थान है, उनकी पृष्ठभूमि क्या है, उनके परिवार का क्या रुतबा है, ये सारी बातें शामिल हैं. कई बार सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण भी गुजारा भत्ता की राशि प्रभावित हो सकती है. साथ ही दोनों कितना कमाते हैं और उनकी कितनी संपत्ति है. अगर पति आर्थिक रूप से मजबूत होता है, तो उसे ज्यादा गुजारा भत्ता देने के लिए कहा जा सकता है. अगर पति-पत्नी दोनों कामकाजी हैं और उनकी आय लगभग बराबर है, तो गुजारा भत्ता की राशि कम हो सकती है या फिर शायद किसी को गुजारा भत्ता देने की जरूरत ही नहीं पड़े. लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह सिर्फ एक कारक है. गुजारा भत्ता तय करते समय अदालत बाकी 7 कारकों पर भी विचार करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने गुजारा भत्ता तय करते समय पति-पत्नी के जीवन स्तर को भी एक अहम कारक बताया है. गुजारा भत्ता तय करते समय अदालत यह भी देखेगी कि पति-पत्नी का समाज में क्या रुतबा है और वे कैसा जीवन जीते थे. उनके पास कितने मकान और गाड़ियां हैं, उनकी कीमत क्या है? उनका घर कितना बड़ा है, उसमें कितने एसी और स्विमिंग पूल जैसी सुविधाएं हैं? उनके घर में कितने नौकर-चाकर काम करते हैं? वे कितनी बार छुट्टियां मनाने जाते थे, भारत में या विदेश में? अगर पति-पत्नी अमीर थे और ऐशो-आराम की जिंदगी जीते थे, तो पत्नी को ज्यादा गुजारा भत्ता मिल सकता है ताकि वो भी वैसी ही जिंदगी जी सके. अदालत यह भी देखेगी कि पत्नी की उम्र क्या है, उसने कितनी पढ़ाई की है और क्या वो खुद कमा सकती है. अगर वह बेरोजगार है, तो उसे ज्यादा गुजारा भत्ता मिल सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गुजारा भत्ता तय करते समय पत्नी और बच्चों की जरूरतों का ध्यान रखना जरूरी है. पत्नी को शादी के दौरान जैसा जीवन जी रही थी, वैसा ही जीवन जीने का हक है, लेकिन उसकी मांगें वाजिब होनी चाहिए. पत्नी और बच्चों की बुनियादी जरूरतें पूरी होनी चाहिए, इसमें कोई शक नहीं है. लेकिन अदालत यह भी देखेगी कि पत्नी की मांगें … Read more

दिल्ली चुनाव में इस बार पूर्व बस मार्शल भी ‘जनहित दल’ पार्टी के बैनर तले दिल्ली के सियासी समर में कूद गए

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव बेहद दिलचस्प होने जा रहा है। कांग्रेस-भाजपा और आम आदमी पार्टी के अलावा इस बार पूर्व बस मार्शल भी 'जनहित दल' पार्टी के बैनर तले दिल्ली के सियासी समर में कूद गए हैं। दिल्ली डेमोक्रेटिक एलायंस की तरफ से शुक्रवार शाम दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए छह प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की गई। दिल्ली डेमोक्रेटिक एलायंस में जनता पार्टी के साथ जनहित दल और दिल्ली जनता पार्टी शामिल हैं। नई दिल्ली विधानसभा सीट से आदित्य राय, बुराड़ी विधानसभा सीट से अनिल कुमार, तिमारपुर विधानसभा सीट से राकेश रंजन श्रीवास्तव, मुस्तफाबाद विधानसभा सीट से ललित भाटी, मुंडका विधानसभा सीट से प्रवीण कुमार लकड़ा और नरेला विधानसभा सीट से श्रीमती श्यामो देवी को उम्मीदवार बनाया है। तिमारपुर विधानसभा को छोड़कर इन सभी छह प्रत्याशियों में से शेष सभी 5 सिविल डिफेंस वॉलंटियर हैं। यह पांचों प्रत्याशी उन दस हजार सिविल डिफेंस कर्मियों में से चुने गए हैं जो आज पिछले चौदह महीनों से अपनी नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पार्टी की तरफ से कहा गया है कि हमने इन सिविल डिफेंस कर्मियों के संघर्ष को सदा सहयोग किया है और कोर्ट में इनके हक के लिए लड़ रहे हैं। हमारे साथी अंशुमन जोशी (अध्यक्ष-जनहित दल) वाले काफी समय से इस संघर्ष के साक्षी और सहयोगी हैं। 'आप' और कांग्रेस ने उतारे उम्मीदवार, भाजपा का इंतजार दिल्ली विधानसभा के लिए फरवरी 2025 में चुनाव होने हैं। मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 23 फरवरी 2025 तक है। दिल्ली में अभी तक दिल्ली में चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन सियासी दलों की चुनावी तैयारियां चरम पर हैं। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) ने सबसे पहले दिल्ली की सभी 70 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। वहीं कांग्रेस ने 21 उम्मीदवारों की अपनी लिस्ट जारी कर दी है। माना जा रहा है कि भाजपा भी अगले हफ्ते अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर सकती है। recent visitors 101

थेन्नारसु ने केंद्र से राष्ट्रीय आपदा राहत कोष से राज्य के लिए 6,675 करोड़ रुपये जारी करने का आग्रह किया

चेन्नई तमिलनाडु के वित्त मंत्री थंगम थेन्नारसु ने राजस्थान के जैसलमेर में केंद्रीय बजट से पहले हुयी बैठक में केंद्र सरकार से चक्रवात फेंगल के बाद अस्थायी और स्थायी राहत एवं पुनर्वास आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ) से राज्य के लिए 6,675 करोड़ रुपये जारी करने का आग्रह किया है। श्री थेन्नारसु ने शुक्रवार को जैसलमेर में आयोजित बैठक में कहा कि लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए चेन्नई मेट्रो रेल, सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए), रेलवे और अन्य परियोजनाओं के लिए केंद्र से लंबित धन आवंटित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु को चक्रवात, मूसलाधार बारिश और अभूतपूर्व बाढ़ सहित प्राकृतिक आपदाओं से बार-बार चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हाल ही में चक्रवात फेंगल से राज्य तबाह हुआ है। इसने राज्य के 14 जिलों को प्रभावित किया और जीवन, आजीविका और बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कहा कि इन मौसमी घटनाओं की तीव्रता और आवृत्ति में काफी वृद्धि हुई है। कुछ क्षेत्रों में 24 घंटे के भीतर पूरे वर्ष की संचयी वर्षा हो जाती है। उन्होंने कहा कि योजना और तैयारी में राज्य के सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद ये जलवायु विसंगतियाँ काफी आर्थिक तनाव पैदा कर रही हैं और राज्य के खजाने को खाली कर रही हैं। उन्होंने कहा, "राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) के तहत धनराशि तत्काल राहत और दीर्घकालिक बहाली की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त साबित हुई है। इसलिए, मैं केंद्र सरकार से चक्रवात फेंगल के बाद अस्थायी और स्थायी राहत और पुनर्वास आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एनडीआरएफ के तहत 6,675 करोड़ रुपये की राशि जारी करने का आग्रह करता हूं।"   recent visitors 62