Monday, July 6, 2026 9:09 am

मध्यप्रदेश की नई कौशल विकास नीति पर आम जनता के सुझाव आमंत्रित

भोपाल प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश में कौशल विकास को बढ़ावा देने और युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए नई "कौशल विकास नीति" का प्रारूप तैयार किया है। अब इस नीति को और प्रभावी बनाने के लिए आम नागरिकों, शिक्षाविदों, उद्योग प्रतिनिधियों और नीति विशेषज्ञों से सुझाव मांगे गए हैं। इस नीति का प्रारूप (वर्ज़न-1 और 2) विभाग की वेबसाइट www.mpskills.gov.in पर उपलब्ध है। महत्वपूर्ण सुझाव ई-मेल director.dsd@mp.gov.in पर आमंत्रित किये गये है। आम जनता के सुझावों से इस नीति को प्रदेश के युवाओं और उद्योगों के लिए अधिक उपयोगी और प्रगतिशील बनाया जाएगा।   recent visitors 59

वन मण्डल उमरिया में बाघ के हमले में मृत महिला के परिजन को दी जायेगी आर्थिक सहायता

भोपाल वन मण्डल उमरिया के अंतर्गत वन परिक्षेत्र घुनघुटी की बीट अरहरियादादर कक्ष क्रमांक आर.-239 में वन्य-प्राणी बाघ द्वारा लकड़ी बीनने गयी महिला बचनी बाई पर हमला किया गया, जिससे उसकी मृत्यु हो गयी। वन विभाग द्वारा शासन के नियमानुसार महिला के परिजन को आर्थिक सहायता दी जाने की कार्यवाही की जा रही है। वन मण्डलाधिकारी उमरिया ने बताया कि पीड़ित परिवार को वन विभाग द्वारा हर संभव तात्कालिक सहायता प्रदान की जा रही है। वन मण्डलाधिकारी वन मण्डल उमरिया ने बताया कि 25 दिसम्बर को दूरभाष पर सूचना प्राप्त हुई कि वन परिक्षेत्र घुनघुटी के बीट अरहरियादादर कक्ष क्रमांक आर.-239 के बडका डोडबहार में महिला का शव झाड़ियों में मिला है। महिला के शव के आसपास निरीक्षण करने पर बाघ के पदचिन्ह मिले, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बाघ द्वारा महिला पर हमला किया गया। घटना स्थल पर तहसीलदार पाली, हलका पटवारी, चौकी घुनघुटी का पुलिस स्टॉफ, सरपंच अमीलिहा और मृतका के परिजन की मौजूदगी में पंचनामा तैयार कराया गया। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पाली में पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम के बाद पीड़िता का शव अंतिम संस्कार के लिये उनके परिजनों को सौंप दिया गया। कार्यवाही के दौरान वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि वन्य-प्राणी विचरण क्षेत्र में मुनादी कर ग्रामीणों को वन्य-प्राणियों से सुरक्षित रहने की समझाइश दी जा रही है।   recent visitors 57

बच्चों से यौन अपराध पर मृत्यु दंड तक का प्रावधान है पॉक्सो एक्ट में

भोपाल यौन अपराधों से बच्चों को संरक्षण देने के उद्देश्य से पॉक्सो प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट (POCSO) अधिनियम बनाया गया है। केन्द्रीय महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा बनाये गये इस कानून के अर्न्तगत नाबालिग बच्चों के प्रति यौन उत्पीडन, यौन शोषण और पोर्नोग्राफी जैसे यौन अपराध और छेड़-छाड़ के मामलों में कार्रवाई की जाती है। इसमें अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा भी निर्धारित है। यह अधिनियम पूरे देश में लागू है। पॉक्सो के तहत सभी अपराधों की सुनवाई एक विशेष न्यायालय द्वारा कैमरे के सामने बच्चों के माता-पिता या जिन लोगों पर बच्चा भरोसा करता है, उनकी उपस्थित में होती है। पॉक्सो अधिनियम-2012 के लागू होने के बाद वर्ष 2020 में पॉक्सो अधिनियम में कई अन्य संशोधन के साथ सजा का दायरा बढ़ाकर आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक के दंड का प्रावधान किया गया है। अधिनियम की धारा-3 में प्रवेशन लैंगिक हमला होने पर कम से कम 10 वर्ष का कारावास, जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है एवं धारा-4 में जुर्माने का प्रावधान किया गया है। गुरूत्तर प्रवेशन लैंगिक हमले पर धारा-5 में कम से कम 20 वर्ष का कारावास, जिसे आजीवन कारावास/मृत्यु दण्ड तक बढ़ाया जा सकता है। इसमें धारा-6 में जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है। लैंगिक हमला होने पर धारा 7 में कम से कम 3 वर्ष का कारावास, जिसे 5 वर्ष तक के कारावास तक बढ़ाया जा सकता है एवं धारा-8 में जुर्माना भी प्रावधानित है। गुरूत्तर लैंगिक हमले के मामले में धारा-9 में कम से कम 5 वर्ष का कारावास, जिसे 7 वर्ष तक के कारावास तक बढ़ाया जा सकता है। साथ ही धारा-10 में जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। अधिनियम में लैंगिक उत्पीडन पर धारा-11 में 3 वर्ष का कारावास की सजा धारा-12 में जुर्माने का प्रावधान किया गया है। बच्चों के अश्लील उपयोग पर आजीवन सश्रम कारावास और दंड का प्रावधान पॅाक्सो अधिनियम में बच्चों का अश्लील उद्देश्यों की पूर्ति के लिए इस्तेमाल करने पर कठोर प्रावधान किए गए हैं। बच्चों का अश्लील उद्देश्यों/पोर्नोग्राफी के लिए इस्तेमाल करने पर धारा-13 में 5 वर्ष का कारावास तथा धारा-14(1) में उत्तरवर्ती अपराध के मामले में 7 वर्ष का कारावास तथा जुर्माने का प्रावधान है। अधिनियम में बच्चों का अश्लील उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करते समय यौन प्रताड़ना के गंभीर मामले में धारा-14(2) में कम से कम 10 वर्ष का कारावास जिसे आजीवन कारावास/मुत्यु दंड तक बढ़ाया जा सकता है। साथ ही जुर्माना भी होगा। अधिनियम में यह भी प्रावधानित किया गया है कि बच्चे का अश्लील उद्देश्यों हेतु इस्तेमाल करते समय गुरूत्तर प्रवेशन लैंगिक हमले के अति गंभीर मामले में धारा-14(3) अंतर्गत सश्रम आजीवन कारावास व जुर्माने की सजा होगी। बच्चे का अश्लील उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करते समय यौन प्रताड़ना के मामले में धारा-14(4) में न्यूनतम 6 वर्ष का कारावास को जुर्माने के साथ 8 वर्ष तक के लिए बढ़ाया जा सकता है। पॅाक्सो अधिनियम में बच्चे का अश्लील उद्देश्यों हेतु इस्तेमाल करते समय गुरूत्तर लैंगिक हमले के अति गंभीर मामले में धारा-14(5) में कम से कम 8 वर्ष का कारावास का प्रावधान किया गया है। कारावास को 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। अधिनियम की धारा-15 में प्रावधान है कि बच्चें से संबंधित किसी भी अश्लील सामग्री को व्यापारिक उद्देश्यों के लिए रखने पर 3 वर्ष कारावास अथवा जुर्माना अथवा दोनों हो सकता है। अपराध के लिए उकसाने पर भी दंड का प्रावधान पॅाक्सो अधिनियम में अपराध के लिए उकसाने पर भी दंड का प्रावधान किया गया है। उकसाने को भी अपराध करने के समान ही माना गया है। इसमें धारा-16 में बच्चों के यौन उत्पीड़न हेतु अवैध खरीद-फरोख्त भी शामिल है अपराध की रिपोर्ट दर्ज न करने पर भी कार्रवाई का प्रावधान पॅाक्सो अधिनियम में सभी को पाबंद किया गया है। इसमें किसी घटित अपराध की रिपोर्ट दर्ज नहीं करने पर धारा-21(1) में 6 माह तक का कारावास अथवा जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है। recent visitors 142

कलेक्टर ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ दर्शन व्यवस्था का मुआयना कर आवश्यक निर्देश दिए

उज्जैन वर्ष 2024 की समाप्ति एवं अंग्रेजी नववर्ष 2025 के अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर में दूरदराज से आने वाले दर्शनार्थियों की संख्या में वृद्धि होने के कारण उन्हें दर्शन की सुव्यवस्थित व्यवस्था कर सुगमतापूर्वक दर्शन कराने के लिए तैयारियां की जा रही है। कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने शुक्रवार 27 दिसंबर को प्रात: प्रशासनिक अधिकारियों के साथ व्यवस्थाओं का मुआयना कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। कलेक्टर ने लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री को निर्देश दिए कि शीघ्रता से बेरिकेडिंग की व्यवस्था की जाए।       कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने सर्वप्रथम कर्कराज पार्किंग स्थल का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारी को निर्देश दिए कि पार्किंग स्थल पर समतलीकरण, साफ-सफाई, चलित शौचालय, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल व्यवस्था आदि व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके बाद कलोता समाज एवं भील समाज की धर्मशाला पर पार्किंग व्यवस्था का अवलोकन किया। उक्त स्थलों पर भी सुव्यवस्थित व्यवस्था करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने प्रशासनिक अमले के साथ कर्कराज पार्किंग स्थल से पैदल मार्ग का मुआयना करते हुए गंगा गार्डन से गोंड बस्ती, चारधाम पार्किंग, शक्तिपथ, महाकाल महालोक, मानसरोवर होते हुए भगवान महाकाल मंदिर की रैलिंग तक की व्यवस्थाओं का जायजा लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। कलेक्टर ने दर्शनार्थियों की सुलभ दर्शन व्यवस्था के दौरान दर्शनार्थियों के लिए जगह-जगह पेयजल की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। शक्तिपथ के साईड रोड़ तरफ कहीं कहीं अतिक्रमण है उसे हटाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। शक्तिपथ की साफ-सफाई, प्रकाश आदि की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।       कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने महाकाल मंदिर के निर्गम की ओर बने नवीन शौचालय को प्रारंभ कराए जाए और आस-पास की गंदगी को साफ कराने के निर्देश दिए। तत्पश्चात कलेक्टर ने पैदल चलकर हरसिद्धी होते हुए रामघाट की व्यवस्था का मुआयना किया और संबंधित अधिकारियों को बेरिकेडिंग और महिलाओं के लिए स्नान करने के बाद कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रूम बनाए जाए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर नीरज कुमार सिंह के अलावा जिला पंचायत सीईओ श्रीमती जयति सिंह, एडीएम अनुकूल जैन, नगर निगम आयुक्त आशीष पाठक, एसडीएम एलएन गर्ग, स्मार्ट सीईओ संदीप शिवा, विकास प्राधिकरण सीईओ संदीप सोनी, सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल, मंदिर समिति सदस्य राजेन्द्र शर्मा तथा संबंधित विभाग के अधिकारीगण आदि उपस्थित थे।     recent visitors 75

संभल में शाही जामा मस्जिद के सामने खाली पड़ी जगह पर पुलिस चौकी बनाई जाएगी, इसकी तैयारी भी शुरू

संभल उत्तर प्रदेश के संभल में बीते 24 नवंबर को शाही जामा मस्जिद में सर्वे के दौरान भड़की हिंसा को लेकर प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है. अब शाही जामा मस्जिद के सामने खाली पड़े हुए मैदान में नई पुलिस चौकी बनाई जाएगी. इसको लेकर जगह को चिह्नित कर लिया गया है. इतना ही नहीं एडिशनल एसपी और सीओ श्रीचंद्र ने इस जगह का नपाई भी कर ली है. संभल के एडिशनल एसपी श्रीचंद्र ने  बात करते हुए बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से इस जगह पर पुलिस चौकी बनाने का फैसला किया गया है. पुलिस चौकी का निर्माण कार्य जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा.   जहां बनेगी चौकी, उस जगह को किया गया चिह्नित जब पुलिस फोर्स के साथ एएसपी जामा मस्जिद के बाहर पहुंचे तो मस्जिद कमेटी और आसपास के लोग अपने जमीनों के कागजात लेकर उनके पास पहुंचे. उन्होंने बताया कि ये लोग इसलिए कागज लेकर आए क्योंकि उनका कहना है कि ये जगह उनकी है. हम इसकी जांच करेंगे. पुलिस टीम ने उस जगह की नपाई भी कर ली है, जहां पुलिस चौकी बननी है. जिस जगह पर चौकी का निर्माण किया जाएगा, उस जगह पर चूना डालकर चिह्नित किया गया है. 24 नवंबर को मस्जिद में सर्वे के दौरान भड़की थी हिंसा बता दें कि संभल की शाही जामा मस्जिद में एक याचिका पर अदालत के आदेश के बाद सर्वेक्षण किया गया था, जिसमें दावा किया गया कि वहां हरिहर मंदिर था. जब 24 नवंबर को सर्वे की टीम मस्जिद के अंदर थी तभी मस्जिद के बाहर हिंसा भड़क गई. इस दौरान भीड़ ने पुलिस टीम पर पथराव किया, फायरिंग की और गाड़ियों को भी जला दिया. इस पर काबू पाने के लिए पुलिस आंसू गैंस से लेकर फायरिंग तक की. इस हिंसा में चार युवकों की मौत हो गई. इस मामले में पुलिस ने अबतक करीब 50 उपद्रवियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि 90 की तलाश कर रही है.   recent visitors 83

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पंडित सुंदरलाल शर्मा की पुण्यतिथि पर उन्हें किया नमन

रायपुर, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, समाज सुधारक और प्रसिद्ध साहित्यकार स्वर्गीय पंडित सुंदरलाल शर्मा की 28 दिसम्बर को पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंडित सुंदरलाल शर्मा  छत्तीसगढ़ में जनजागरण और सामाजिक क्रांति के अग्रदूत थे। पंडित सुंदरलाल शर्मा नेे किसानों के अधिकारों की लड़ाई लड़ी और प्रसिद्ध कंडेल सत्याग्रह के प्रमुख सूत्रधार रहेे। उन्होंने ग्रामीण इलाकों में फैले अंधविश्वास, छुआ-छूत, रूढ़िवाद जैसी कुरीतियों को दूर करने के लिए अथक प्रयास किया। उनके अमूल्य विचार हमें सदैव मातृभूमि की निस्वार्थ सेवा करने के लिए प्रेरित करते रहेंगे। recent visitors 140

एयरस्ट्राइक का बदला लेने के लिए तैयार अफगानिस्तान, 15000 तालिबान लड़ाके कर रहे कूच, पाकिस्तान की आएगी शामत!

 पेशावर  भारत के पड़ोस में खूनी जंग छिड़ती नजर आ रही है। पाकिस्तान और तालिबान की दोस्ती अब दुश्मनी में बदलने लगी है और दोनों देश एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए। पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक के बाद अब अफगानिस्तान ने भी बदला लेने की ठान ली है। 15 हजार तालिबानी लड़ाकों पाकिस्तान की ओर तेजी से बढ़ रहे है। पाकिस्तान ने मंगलवार (24 दिसंबर) को देर रात अफगानिस्तान में एयर स्ट्राइक कर पाकिस्तानी तालिबान के संदिग्ध ठिकानों को निशाना बनाया था। एयरस्ट्राइक में कम से कम 46 लोग मारे गए हैं। पाकिस्तान की ओर बढ़े तालिबानी लड़ाके पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक के बाद ही दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। जानकारी के अनुसार तालिबान के 15000 लड़ाके काबुल, कंधार और हेरात से पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से लगती मीर अली सीमा की ओर बढ़ रहे हैं। तालिबान के यह लड़ाके पाकिस्तान से एयरस्ट्राइक का बदला लेने के लिए तैयार हैं। तालिबान प्रवक्ता का कहना है कि पाकिस्तान को उसकी कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब मिलेगा। 'कायरतापूर्ण हमले का जवाब जरूर देंगे…' वहीं, अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया। उसका आरोप है कि एयरस्ट्राइक में महिलाओं और बच्चों समेत आम लोगों को भी निशाना बनाया गया। रक्षा मंत्रालय ने इस पर कहा, 'अपनी मातृभूमि की रक्षा करना हमारा अधिकार है। हम इस कायरतापूर्ण हमले का जवाब जरूर देंगे।' क्यों बढ़ा तनाव? टीटीपी एक अलग आतंकवादी संगठन है, लेकिन इसे अफगान तालिबान का करीबी सहयोगी माना जाता है, जो अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज हुआ था। पाकिस्तान में पिछले दो दशक में बड़ी संख्या में आतंकवादी हमले हुए हैं, लेकिन हाल के महीनों में इनमें वृद्धि हुई है। TTP ने हाल ही में उत्तर-पश्चिम में एक जांच चौकी पर हमला किया था, जिसमें कम से कम 16 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे। पाकिस्तानी अधिकारियों ने तालिबान पर साझा सीमा पर आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया है। हालांकि, तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के आरोप खारिज करते हुए कहा है कि वह किसी भी संगठन को किसी भी देश के खिलाफ हमले करने की इजाजत नहीं देती है। क्या है तालिबान की रणनीति? अफगान तालिबान लंबे समय से यह दिखाता आया है कि वह किसी भी बड़े सैन्य शक्ति के सामने झुकने वाला नहीं है. अमेरिका और रूस जैसी महाशक्तियों को उसने वर्षों तक चुनौती दी और आखिरकार उन्हें अफगानिस्तान से लौटने पर मजबूर कर दिया. पाकिस्तान के पास न तो वैसी सैन्य ताकत है और न ही आर्थिक क्षमता, जिससे वह तालिबान का सामना कर सके. मीर अली बॉर्डर पर बढ़ती गतिविधियों के चलते पाकिस्तान ने भी अपनी सेना को अलर्ट पर रखा है. सीमाई इलाकों में सैनिकों की तैनाती तेज कर दी गई है. स्थानीय लोगों में डर का माहौल है और स्थिति किसी बड़े संघर्ष का संकेत दे रही है. तनाव बढ़ने के साथ ही यह देखना होगा कि पाकिस्तान और तालिबान के बीच यह टकराव किस ओर बढ़ता है. तालिबान का उभार अफगानिस्तान से रूसी सैनिकों की वापसी के बाद 1990 के दशक की शुरुआत में उत्तरी पाकिस्तान में हुआ था. पश्तो भाषा में तालिबान का मतलब होता है छात्र खासकर ऐसे छात्र जो कट्टर इस्लामी धार्मिक शिक्षा से प्रेरित हों. कहा जाता है कि कट्टर सुन्नी इस्लामी विद्वानों ने धार्मिक संस्थाओं के सहयोग से पाकिस्तान में इनकी बुनियाद खड़ी की थी. तालिबान पर देववंदी विचारधारा का पूरा प्रभाव है. तालिबान को खड़ा करने के पीछे सऊदी अरब से आ रही आर्थिक मदद को जिम्मेदार माना गया. शुरुआती तौर पर तालिबान ने ऐलान किया कि इस्लामी इलाकों से विदेशी शासन खत्म करना, वहां शरिया कानून और इस्लामी राज्य स्थापित करना उनका मकसद है. शुरू-शुरू में सामंतों के अत्याचार, अधिकारियों के करप्शन से आजीज जनता ने तालिबान में मसीहा देखा और कई इलाकों में कबाइली लोगों ने इनका स्वागत किया लेकिन बाद में कट्टरता ने तालिबान की ये लोकप्रियता भी खत्म कर दी लेकिन तब तक तालिबान इतना पावरफुल हो चुका था कि उससे निजात पाने की लोगों की उम्मीद खत्म हो गई. अफगान और तालिबान की सैन्य ताकत कितनी? तालिबान की ताकत कितनी है कि वह अफगानिस्तान की सेना पर भारी पड़ रहा? अफगानिस्तान के फर्स्ट वाइस प्रेसिडेंट कहते हैं- 'तालिबान का जल्द खात्मा होगा. उनके पास 80 हजार के करीब लड़ाके हैं और अफगानिस्तान की सेना के पास 5 से 6 लाख के बीच सैनिक. इसके अलावा अफगानिस्तान के पास वायु सेना है जो तालिबान पर भारी पड़ेगी.' हालांकि, इस दावे के बावजूद कई ऐसे फैक्ट हैं जो जमीनी स्तर पर तालिबान को मजबूत साबित कर रहे हैं. तालिबान का मैनपावर सोर्स कबाइली इलाकों में बसे कबीले और उनके लड़ाके हैं. इसके अलावा कट्टर धार्मिक संस्थाएं, मदरसे भी उनके विचार को सपोर्ट कर रहे हैं. लेकिन इन सबसे ज्यादा पाकिस्तानी सेना और आईएसआई की सीक्रेट मदद तालिबान के लिए मददगार साबित हो रही है. अमेरिकी खुफिया आकलन भी जमीनी हालात को साफ करते हैं जिसमें कहा गया है कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी के 6 महीने के भीतर अफगानिस्तान सरकार का प्रभुत्व खत्म हो जाएगा और तालिबान का शासन आ सकता है.   recent visitors 54