Monday, July 6, 2026 7:51 pm

क्या बोतल बंद पानी सेफ? वैज्ञानिकों की यह रिसर्च उड़ा देगी आपकी नींद

कुछ साल में हुए रिसर्च में पाया गया कि औसतन एक लीटर पानी की बोतल में 240,000 प्लास्टिक कण पाए जाते हैं.यह एक बहुत ही चिंताजनक आंकड़ा है, क्योंकि नल के पानी के एक लीटर में औसतन 5.5 प्लास्टिक कण होते हैं. नैनोप्लास्टिक के कारण कैंसर, जन्म दोष और प्रजनन जैसी समस्याओं से जोड़ा जाता है. नैनोप्लास्टिक अपने छोटे आकार के कारण खतरनाक होते हैं – जिससे वे सीधे रक्त कोशिकाओं और मस्तिष्क में प्रवेश कर सकते हैं. बोतलों को बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्लास्टिक में आमतौर पर थैलेट्स होते हैं, जिन्हें विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा गया है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायर्नमेंटल हेल्थ साइंसेज के अनुसार, थैलेट्स ‘विकासात्मक, प्रजनन, मस्तिष्क, प्रतिरक्षा और अन्य समस्याओं से जुड़े हैं’. पॉलियामाइड नामक एक प्रकार का नायलॉन पानी की बोतलों में पाया जाने वाला एक और प्लास्टिक कण था. हाल ही में हुए एक स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. एक लीटर के पानी की बोतल में लगभग 2, 40,000 प्लास्टिक के टुकड़े होते हैं. नॉर्मल एक लीटर के पानी की बोतल में पानी पी रहे हैं तो हो सकता है आप प्लास्टिक के टुकड़े पी रहे होंगे. हो सकता है आप प्लास्टिक के कण भी पी रहे होंगे. हमारी खराब लाइफस्टाइल के कारण अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में प्लास्टिक का खूब इस्तेमाल करते हैं. घर हो या ऑफिस प्लास्टिक बंद बोतल में पानी पीना हम खूब पसंद करते हैं. अगर आप भी ऐसा कर रहे हैं तो संभल जाएं क्योंकि आपके शरीर में धीमा जहर पहुंच रहा है. प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज नाम की संस्थान ने एक स्टडी में डराने वाला खुलासा किया है. जिसमें बताया गया है कि एक लीटर बोतलबंद पानी में करीब 2.40 लाख प्लास्टिक के महीन टुकड़े मौजूद होते हैं.जिसकी वजह से सेहत को गंभीर और जानलेवा खतरे (Bottled Water Harmful Effects) हो सकते हैं.प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज नाम की ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक प्लास्टिक के बोतल में पानी पीने के कारण कई गंभीर जानलेवा बीमारी हो सकती है. हाल ही में कुछ रिसर्च के मुताबिक बोतल में मौजूद बोतल बंद पानी में 100,000 से ज्यादा नैनोप्लास्टिक मिले हैं. यह इतने छोटे कण होते हैं कि ब्लड सर्कुलेशन तक को खराब कर सकते हैं. यह दिमाग और सेल्स को भी नुकसान पहुंचाते हैं. डायबिटीज और दिल की बीमारी हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की रिसर्च के अनुसार, पॉली कार्बोनेट की बोतलों के पानी में बिस्फेनॉल ए केमिकल होता है, जो जब शरीर में जाता है तो दिल की बीमारियों और डायबिटीज का खतरा कई गुना तक बढ़ा सकता है. कैंसर का खतरा एक्सपर्ट्स के मुताबिक प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ता है. इससे ब्रेस्ट और ब्रेन कैंसर का जोखिम बढ़ता है. प्लास्टिक बर्तन में रखी गर्म चीजों को खाने से बचना चाहिए. Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. recent visitors 225

कोरबा में ट्रक और कार में आमने-सामने की भिड़ंत, दोनों वाहनों में लगी आग

कोरबा छत्तीसगढ़ के कोरबा में अभी-अभी एक बड़ा सड़क हादसा हो गया. अंबिकापुर- बिलासपुर नेशनल हाईवे सड़क पर ट्रक और कार की आपस में भिड़ंत हो गई जिससे दोनो वाहनों में आग लग गई. ट्रक कार के ऊपर पलट गई. वहीं नीचे फंसी कार में दो लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है. राहगिरों ने फायर ब्रिगेड और पुलिस में सूचना दी, जिसके बाद मौके पर पहुंची बांगो पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम आग पर काबू पाने की कोशिश कर रही है. वहीं इस हादसे की चपेट में कौन आए, इसका भी पता भी पता लगाया जा रहा है. पूरी घटना कोरबा के बांगो थाना क्षेत्र के लमना गांव का है. recent visitors 45

ब्रिटेन छोड़कर भारत लौट रहे भारतीय डॉक्टर ने बताया कि मत जाना UK, ओवरवर्क और अंडरपेड बताया

लंदन हाल के समय में बड़ी संख्या में भारतीय डॉक्टर ब्रिटेन छोड़कर अपने वतन भारत वापस लौट रहे हैं। इन डॉक्टरों ने ब्रिटेन में अपने अनुभव को "ओवरवर्क (अत्यधिक काम का बोझ) और अंडरपेड (कम वेतन)" बताया है। काम के अत्यधिक दबाव और अपेक्षाकृत कम वेतन ने डॉक्टरों को यह कठोर फैसला लेने पर मजबूर कर दिया है।  पहले भारतीय डॉक्टर ब्रिटेन को बेहतर वेतन और अवसरों के लिए एक आदर्श जगह मानते थे। लेकिन अब इस ट्रेंड में बदलाव देखा जा रहा है। भारत में चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ते निवेश और निजी स्वास्थ्य सेवाओं के उभरने के कारण डॉक्टर अपने देश में बेहतर भविष्य देख रहे हैं।   हाल ही में एक भारतीय डॉक्टर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने यूके की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली (NHS) में काम करने के दौरान कठिनाइयों का सामना किया और क्यों उन्होंने वहां से लौटने का फैसला किया।  इस डॉक्टर ने 'रेडिट' पर अपनी कहानी साझा करते हुए कहा, "मैंने PLAB परीक्षा पास की और यूके में एक बेहतर जीवन और करियर बनाने की उम्मीद के साथ गया था। लेकिन वहां कुछ समय बिताने और स्वास्थ्य सेवा व आर्थिक स्थिति का अनुभव करने के बाद, मुझे सच्चाई का सामना करना पड़ा।"  डॉक्टर ने NHS में काम करने की चुनौतियों पर बात करते हुए कहा कि काम के घंटे बहुत ज्यादा होते हैं और वेतन जीवन-यापन के लिए पर्याप्त नहीं होता। उन्होंने लिखा, "NHS में जूनियर डॉक्टर थकाने वाले घंटों तक काम करते हैं, लेकिन उनकी सैलरी मुश्किल से खर्चों को पूरा कर पाती है। जरूरी संसाधनों की कमी और भारी काम के दबाव के कारण डॉक्टर अक्सर तनावग्रस्त रहते हैं।" डॉक्टर ने बताया कि यूके में उनकी मासिक सैलरी 2,300 पाउंड थी। हालांकि, ये सैलरी कागज पर अच्छी लगती थी, लेकिन ऊंची महंगाई के कारण इसमें से किराया, बिजली और खाने-पीने का खर्च निकालने के बाद कुछ खास बचत नहीं हो पाती थी।  इन परिस्थितियों के कारण डॉक्टर ने भारत लौटने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि भारत में रहने की लागत कम है, जैसे कि घर का किराया और निजी स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती हैं। इसके अलावा, यहां उन्हें प्रोफेशनल ग्रोथ और व्यक्तिगत संतुष्टि के ज्यादा अवसर मिल रहे हैं। डॉक्टर ने लिखा, "भारत लौटना सिर्फ पैसे की बात नहीं थी, बल्कि जीवन की गुणवत्ता की बात थी। भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में भी चुनौतियां हैं, लेकिन मुझे यहां ज्यादा संतुलन और अवसर मिलते हैं।"  उन्होंने आगे कहा, "यूके में आर्थिक ठहराव, स्वास्थ्य प्रणाली पर अत्यधिक दबाव और बढ़ती महंगाई के बीच, भारत में काम करना ज्यादा संतोषजनक है। मेरे जैसे कई भारतीय डॉक्टरों के लिए यूके में बेहतर जीवन का सपना इन कठिन हकीकतों से टकरा जाता है।" डॉक्टर ने कहा कि भारत लौटने के बाद उन्होंने काम और जीवन के बीच एक बेहतर संतुलन पाया है। उन्होंने लिखा, "भारत लौटकर मैं प्रोफेशनल और पर्सनल दोनों स्तरों पर ग्रोथ कर रहा हूं। अगर आप अपने विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, तो सिर्फ अवसरों को नहीं, उनकी सीमाओं को भी ध्यान में रखें। मेरे लिए सही जगह भारत ही निकली।"  इस डॉक्टर का अनुभव उन भारतीयों के लिए एक सीख हो सकता है जो विदेश जाने की योजना बना रहे हैं। यह बताता है कि विदेश में बेहतर जीवन का सपना हमेशा हकीकत से मेल नहीं खाता और कभी-कभी अपने देश में ही बेहतर अवसर मिल सकते हैं। recent visitors 48

एक बार फिर से गूगल मैप ने दिखाया गलत रास्ता, कार सवार लोगों को निर्माणाधीन हाइवे पर भेज दिया, टला हादसा

हाथरस उत्तर प्रदेश में पिछले एक महीने में गूगल मैप की वजह से कई दर्दनाक हादसे हो चुके हैं। गूगल मैप लोगों गलत रास्ता दिखा कर भटका देता है। जिसके चसते बीते दिनों कई लोगों की जान भी जा चुकी है। अब हाथरस में गूगल मैप की वजह से एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। एक बार फिर से गूगल मैप ने गलत रास्ता दिखाया और कार सवार लोगों को निर्माणाधीन हाइवे पर भेज दिया। जिस वजह से कार मिट्टी के टीले से टकरा गई और कार चालक बुरी तरह चोटिल हो गए। मिट्टी के टीले से टकरा कर क्षतिग्रस्त हुई कार हादसा निर्माणाधीन मथुरा-बरेली हाईवे पर हुआ है। जहां एक परिवार एक परिवार कार में सवार होकर बदायूं से मथुरा जा रहा था। इसी दौरान गूगल मैप ने निर्माणाधीन हाइवे पर बंद पड़े रास्ते को दिखाया। जिस वजह से राहगीरों ने कार को उस ओर मोड़ लिया। कार वहां मौजूद मिट्टी के टीले से टकरा कर क्षतिग्रस्त हो गई। गनीमत रही कि इस हादसे में जान का कोई नुकसान नहीं हुआ। कार का एयरबैग खुलने की वजह से परिवार की जान बच गई। जानें कैसे हुआ हादसा शुक्रवार रात एक कार मैप के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इसमें सवार दो लोग घायल हो गए। बरेली के विमलेश श्रीवास्तव और कुशल कुमार कार से मथुरा जा रहे थे। इसके लिए उन्होंने गूगल मैप का सहारा लिया। कार सवार लोगों को सर्विस रोड से हाथरस की तरफ जाना था, लेकिन मैप ने उन्हें हाईवे पर चढ़ा दिया। हाथरस जंक्शन क्षेत्र में रोड ब्लाक के रिफ्लेक्टिंग बोर्ड न होने के कारण उनकी कार मिट्टी के ढेर से टकरा गई।  इससे कार सवार दोनों लोग घायल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस आनन-फानन में मौके पर पहुंची। जिसके बाद पुलिस ने कार सवार लोगों को सकुशल बाहर निकल लिया। पूरा मामला कोतवाली हाथरस जंक्शन क्षेत्र का है। निर्माणाधीन हाईवे हैं राहगीरों के लिए मुसीबत बता दें कि निर्माणाधीन हाईवे राहगीरों के लिए मुसीबत बन गए हैं। एनएचएआई की लापरवाही लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। उसपर गूगल मैप अलग राहगीरों को रास्ता भटका कर उनपर कहर बरपा रहा है। गूगल मैप राहगीरों को गुमराह कर देता है। जिसके चलते वाहन अधबने हाईवे पर दौड़ते हैं। recent visitors 129

खेत में मिला जिंदा नवजात, दफन करने की कोशिश, रोने की आवाज सुन ग्रामीणों ने बचाई जान

सरगुजा छत्तीसगढ़ में लगातार मानवता को शर्मसार करने का मामला सामने आ रहा है. धमतरी के बाद अब सरगुजा जिले में जिंदा नवजात खेत में मिला है. नवजात को दफन करने की कोशिश की गई थी. बच्चे के रोने की आवाज सुनकर ग्रामीणों ने नवजात की जान बचाई है. बताया जा रहा कि यह बच्चा कुछ ही घंटे पहले पैदा हुआ है. पूरा मामला सीतापुर थाना क्षेत्र के ग्राम पेटला कोयलापानी का है. ग्रामीणों ने नवजात को सीतापुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया है, जहां उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है. सीतापुर मेडिकल ऑफियर ड्रॉ. एम निकुंज ने बताया, बच्चा डॉक्टरों की निगरानी में है. उनकी हालत खतरे से बाहर है. इस मामले की सूचना मिलते ही पुलिस जांच में जुट गई है. धमतरी में भी नाले के पास मिला था जिंदा नवजात इसी हफ्ते धमतरी जिले के चरोटा गांव में नाले के पास जीवित नवजात मिला था. बच्चे को यूरिया खाद वाली प्लास्टिक की बोरी में भरकर नाले में फेंक दिया गया था. कुछ लोगों ने सुबह की सैर के दौरान रोने की आवाज सुनी, तब नवजात का पता चला. इसके बाद तुरंत ही गांव की मितानिन को बुलाया गया, फिर मितानिन ने बच्चे को धमतरी जिला अस्पताल पहुंचाया, जिससे नवजात की जान बच गई. recent visitors 52

मूंग का खरीद लक्ष्य और अवधि बढ़ाएं, राजस्थान-मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय कृषि मंत्री को लिखा पत्र

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य के किसानों के हित में मूंग के खरीद लक्ष्य को बढ़ाने सहित खरीद अवधि को भी 5 फरवरी तक बढ़ाने के संबंध में केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर अनुरोध किया है। शर्मा ने राज्य में असमय हुई वर्षा एवं भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मूंग खरीद के लिए गुणवत्ता मापदण्डों में शिथिलता प्रदान करने के लिए भी केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री को पत्र लिखा है। इससे अधिकाधिक किसानों से मूंग की खरीद सुनिश्चित होने के साथ ही उन्हें आर्थिक राहत मिलेगी। recent visitors 62

रेलवे सुरक्षाकर्मियों ने यात्री को लौटाया, राजस्थान-सिरोही के एसी वेटिंग रूम में मिले दो मोबाइल और नकदी व सामान

सिरोही। सिरोही में आबूरोड रेलवे सुरक्षा बल कर्मियों द्वारा शुक्रवार को गत 25 दिसंबर 2024 को प्लेटफॉर्म नंबर एक पर स्थित एसी वेटिंग रूम में लावारिस हालत में मिले दो मोबाइल, नकदी और अन्य सामान को संबंधित यात्री को लौटा दिया। खोया सामान पाकर यात्री ने रेलवे सुरक्षा बल कर्मियों की प्रशंसा की। इस मामले में गत 25 दिसंबर 2024 को रेलवे सुरक्षाबल को प्लेटफॉर्म नंबर एक पर स्थित एसी वेटिंग रूम में लावारिस हालत में लेडीज पर्स पड़े होने की सूचना मिली। इस पर प्लेटफॉर्म पर तैनात हेड कांस्टेबल अशरफ अली और कांस्टेबल हजारीलाल वहां पहुंचे तथा पर्स को खोलकर देखा तो उसमें सैमसंग कंपनी के दो मोबाइल व 11,245 रुपये की नकदी मिली। रेलवे सुरक्षा बल कर्मियों द्वारा वहां मौजूद यात्रियों से इस बारे में पूछताछ की गई तो किसी ने भी अपना नहीं होना बताया। इसके बाद संबंधित यात्री से संपर्क किया गया तो उसके सवारी गाड़ी आला अलहजरत एक्सप्रेस में सफर करने एवं एसी वेटिंग रूम में प्रतीक्षा करने के दौरान ये सामान भूलवश छूटने की जानकारी दी गई। शुक्रवार को गांव मवा कहोलन, तहसील अम्ब बस स्टाॅप मावा कहोलन के पास जिला उना मावा काहोला उप्पेरली (126) उना, हिमाचल प्रदेश निवासी रवि कुमार शर्मा पुत्र अशोक कुमार शर्मा रेलवे सुरक्षा बल पोस्ट पर उपस्थित हुआ। तस्दीक के बाद रेलवे सुरक्षा बल के उपनिरीक्षक सुरेन्द्र सिहं एवं सहायक उपनिरीक्षक सोहन सिंह द्वारा सामान को संबंधित यात्री को सुपर्द कर दिया गया। यात्री के सामान की कीमत 72 हजार रुपये बताई गई है। रक्तदान कर मनाया जन्मदिन भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष मनीष परसाई ने बताया कि युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष एवं आबूरोड नगर मंडल महामंत्री दीपेश अग्रवाल के जन्मदिन पर रक्तदान करके मनाया। भाजपा हमेशा से ही सेवा वाली राजनीति करती है और रक्तदान से बड़ा सेवा कार्य कोई हो ही नहीं सकता। रक्तवीर एवं महामंत्री दीपेश अग्रवाल ने बताया कि वो हर शुभ प्रसंग पर रक्तदान देने का प्रयत्न करते हैं। इसी क्रम में आज अपने 40वें जन्मदिन और 32वीं बार रक्तदान किया और कहा कि रक्तदान जीवन में बहुत जरूरी है। इससे व्यक्ति स्वस्थ रहता है और रक्तदान देने से लोग प्रेरित भी होते हैं। इस दौरान मंडल अध्यक्ष मनीष परसाई, पूर्व अध्यक्ष भूपेंद्र सम्बरीया, ब्लड बैंक प्रभारी धर्मेंद्र सिंह, महामंत्री राधेश्याम शाक्य, हरेंद्र सिंह एवं मीडिया प्रभारी पुलिन छंगाणी मौजूद रहे। recent visitors 75