Wednesday, July 8, 2026 2:32 am

महतारी वंदन योजना ने महिलाओं को न केवल आर्थिक संबल प्रदान किया

रायपुर महतारी वंदन योजना ने वनांचल क्षेत्र की महिलाओं के जीवन में आशा की एक नई किरण जगाई है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की कमी और सीमित संसाधनों के कारण जीवन यापन करना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। इस योजना ने महिलाओं को न केवल आर्थिक संबल प्रदान किया, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाने में मदद की है। कोरबा जिले के बोड़ानाला गांव की निवासी सुखमत मंझवार का जीवन कभी अभाव और संघर्ष से भरा हुआ था। उनके गांव की खेती योग्य जमीन डुबान में चली गई थी, जिससे परिवार के पास आय का कोई स्थिर स्रोत नहीं था। उनके पति मजदूरी कर परिवार का गुजारा करते थे, लेकिन दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करना मुश्किल था। महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता ने सुखमत के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लाया। इस योजना से प्राप्त राशि ने न केवल उनके घरेलू खर्चों को आसान बनाया, बल्कि उनके परिवार को भी आत्मनिर्भर बनने में मदद की। सुखमत ने साझा किया कि अब वह अपने परिवार की जरूरतों को आसानी से पूरा कर पा रही हैं और किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। बोड़ानाला की ही रहने वाली राजकुमारी मंझवार ने भी इस योजना के लाभ से अपने जीवन को सशक्त बनाया है। उन्होंने बताया कि हर माह मिलने वाली 1,000 रुपये की वित्तीय सहायता से वह अपने दैनिक खर्चों को आसानी से पूरा कर लेती हैं। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है, और अब उन्हें मुश्किल समय में किसी से मदद मांगने की आवश्यकता नहीं पड़ती। महतारी वंदन योजना ने न केवल आर्थिक रूप से, बल्कि मानसिक रूप से भी महिलाओं को मजबूत बनाया है। इस योजना ने वनांचल क्षेत्र की महिलाओं को अपनी और अपने परिवार की खुशहाली सुनिश्चित करने में सक्षम बनाया है। यह पहल उनके जीवन में एक नई दिशा और उजाला लेकर आई है, जिससे उनका भविष्य बेहतर और सशक्त हो रहा है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों की महिलाओं को वित्तीय सहारा देकर उनके जीवन स्तर को सुधारना और आत्मनिर्भर बनाना है। महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मददगार साबित हो रही है। recent visitors 48

राजनांदगांव जिले में 9.72 करोड़ से 324 केज इकाइयां स्थापित

रायपुर राजनांदगांव जिले के बंद पड़ी खदानों को आजीविका के लिए उपयोगी बनाते हुए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत केज कल्चर तकनीक से मछली पालन का कार्य तेजी से लोकप्रिय और फायदेमंद साबित हो रहा है। यह नवाचार न केवल मत्स्य पालकों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हुआ है, बल्कि 150 से अधिक स्थानीय बेरोजगार युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार का नया जरिया भी बन गया है। जिले के ग्राम जोरातराई में बंद पड़ी खदानों को जलस्रोत के रूप में उपयोग करते हुए 9.72 करोड़ रुपए की लागत से 18 इकाइयों में कुल 324 केज लगाए गए हैं। प्रत्येक केज इकाई की लागत 3 लाख रुपए है, जिसमें से 60 प्रतिशत अनुदान के रूप में 5.83 करोड़ रुपए की राशि प्रदान की गई है। केज कल्चर, जिसे नेट पेन कल्चर भी कहा जाता है, जलाशय में फ्लोटिंग केज यूनिट स्थापित करने की एक आधुनिक तकनीक है। इसमें एक केज यूनिट में चार बाड़े होते हैं, जहां उंगली के आकार की मछलियों को पाला जाता है, जो  पांच माह में लगभग एक से सवा किलो वजन की हो जाती है। इस तकनीक में तिलापिया और पंगेसियस जैसी मछलियों का पालन किया जा रहा है। प्रत्येक केज से 2.5 से 3 टन तक मछली उत्पादन होता है, जिससे 6 से 8 हजार रुपए की मासिक आमदनी होती है। ग्राम मुढ़ीपार स्टेशन पारा की श्रीमती पूर्णिमा साहू ने बताया कि जय मां संतोष महिला स्वसहायता समूह के माध्यम से केज कल्चर तकनीक से जुड़ने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। समूह की महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार प्रकट किया है। जोरातराई की खदानों में 8 लाख से अधिक मछलियां पाली जा रही हैं। यह तकनीक न केवल मछलियों की तेज वृद्धि और स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त है, बल्कि संक्रमण का खतरा भी कम रहता है। मत्स्यपालक अपनी जरूरत के अनुसार केज से मछलियां निकाल सकते हैं। राज्य सरकार की इस पहल ने बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को रोजगार के साधन उपलब्ध कराए हैं। मत्स्य पालन की इस नवीन तकनीक से अब ताजी और स्थानीय मछलियां बाजार में उपलब्ध हो रही हैं। केज कल्चर तकनीक ने जिले में मछली उत्पादन के नए आयाम स्थापित किए हैं। जलाशयों और बंद खदानों के जलस्रोतों का यह उपयोग स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। recent visitors 45

पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के व्यापक मूल्य को मापकर छत्तीसगढ़ के सतत विकास में रेखांकित किया जाएगा

रायपुर वन पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को ग्रीन जीडीपी के साथ जोड़ने की पहल शुरू करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है।  इस पहल  के द्वारा पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के व्यापक मूल्य को मापकर छत्तीसगढ़ के सतत विकास में रेखांकित किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 विज़न और सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप विज़न डॉक्यूमेंट तैयार कर रही है, जिसमें वन विभाग द्वारा संचालित पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के मूल्यांकन की अवधारणा सम्मिलित की गई है। यह समग्र दृष्टिकोण राज्य में पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक प्रगति के बीच संतुलन बनाए रखने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए सतत और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित हो सके। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का मूल्यांकन न केवल बजटीय योजना को अधिक सुव्यवस्थित बनाएगा, बल्कि भविष्य की रणनीतियों को दिशा प्रदान करेगा, धन आवंटन को अधिक प्रभावी बनाएगा और वानिकी विकास के प्रयासों को सशक्त करेगा। यह प्रक्रिया सतत विकास और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य मे संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम ने स्थानीय समुदायों को और अधिक सशक्त बनाया है। गुरु घासीदास, कांगेर घाटी और इंद्रावती जैसे राष्ट्रीय उद्यानों के साथ, छत्तीसगढ़ में प्रकृति आधारित पर्यटन के लिए असीम संभावनाएं हैं। स्थानीय निवासियों को जंगल सफारी, नेचर ट्रेल्स और इको-कैंपिंग जैसी सुविधाओं के प्रबंधन में सक्रिय रूप से शामिल किया जा रहा है, जिससे न केवल सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी सशक्त किया गया है। छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत भू-भाग वन क्षेत्र से आच्छादित है। यह राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत आधार हैं और लाखों लोगों की आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये वन विभिन्न प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ प्रदान करते हैं। वनों से प्राप्त होने वाले अन्य महत्वपूर्ण अमूर्त लाभ अक्सर उपेक्षित रहते हैं और उनका उचित मूल्यांकन नहीं हो पाता। इनमें जलवायु संतुलन बनाए रखने के लिए कार्बन अवशोषण, कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण परागण, पोषक तत्वों का चक्रण, मृदा उर्वरता में सुधार और जैव विविधता संरक्षण जैसी सेवाएं शामिल हैं। वनों का बाढ़ और रोग नियंत्रण, जल प्रवाह का प्रबंधन और वेक्टर जनित रोगों के जोखिम को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके अतिरिक्त, वनों से जल पुनर्भरण और शुद्धिकरण होता है, शुद्ध ऑक्सीजन प्रदान कर वायु गुणवत्ता में सुधार होता है, और सुंदर प्राकृतिक दृश्य तथा जैव विविधता-समृद्ध क्षेत्रों के माध्यम से मनोरंजन के साथ-साथ भावनात्मक संतुष्टि भी प्रदान होती है। इन वनों का गहरा आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व भी है, क्योंकि पवित्र स्थलों और देवगुड़ी जैसे क्षेत्रों के माध्यम से ये आदिवासी विरासत और परंपराओं को संरक्षित रखते हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के वन अनेक नदियों का उद्गम स्थल हैं, जो सतत जल प्रवाह, जलग्रहण क्षेत्र संरक्षण और कृषि तथा आजीविका के लिए आवश्यक जैविक पदार्थ से मृदा को समृद्ध करने में सहायक हैं। इन प्रत्यक्ष लाभों का राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ता है। ये सभी लाभ ग्रामीण उद्योगों और आजीविका को प्रोत्साहित करते हैं और राज्य के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं। recent visitors 49

अटल परिसरों और नालंदा परिसरों के काम में तेजी लाने और उत्कृष्ट निर्माण के निर्देश:अरुण साव

रायपुर : साफ, सुंदर और सुविधापूर्ण बनाएं छत्तीसगढ़ के शहरों को: अरुण साव साफ, सुंदर और सुविधापूर्ण बनाएं छत्तीसगढ़ के शहरों को उप मुख्यमंत्री ने नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के कार्यों की समीक्षा की अनुकम्पा नियुक्ति की प्रक्रियाएं 10 जनवरी तक पूर्ण करने के दिए निर्देश आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को रोजाना वार्डों का भ्रमण कर निर्माण कार्यों, सफाई और प्रकाश व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने कहा अटल परिसरों और नालंदा परिसरों के काम में तेजी लाने और उत्कृष्ट निर्माण के निर्देश रायपुर   उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने आज वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों के साथ नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में सभी नगरीय निकायों को अनुकम्पा नियुक्ति की प्रक्रियाएं 10 जनवरी तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा अनुकम्पा नियुक्ति के लिए प्रदेशभर के नगरीय निकायों में 353 नए पद मंजूर किए गए हैं।     उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बैठक में नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को रोजाना वार्डों का भ्रमण कर निर्माण कार्यों, साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने को कहा। उन्होंने नगरीय निकायों में बन रहे अटल परिसरों और नालंदा परिसरों के काम में तेजी लाने और इनके उत्कृष्ट निर्माण के निर्देश दिए। साव ने अधिकारियों को गंभीरता और सक्रियता से काम करते हुए राज्य के शहरों को साफ, सुंदर और सुविधापूर्ण बनाने को कहा। नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., विशेष सचिव आर. एक्का और संचालक कुंदन कुमार भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए।       उप मुख्यमंत्री साव ने समीक्षा बैठक में सभी नगरीय निकायों में अटल परिसर के निर्माण कार्यों में तेजी लाते हुए अच्छी गुणवत्ता की उत्कृष्ट मूर्ति स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अटल परिसर का इस तरह निर्माण करें कि शहर में इसकी विशेष पहचान और दर्शनीय स्थल बनें। उन्होंने प्रदेश के 12 शहरों में बनाए जा रहे नालंदा परिसर के लिए निविदा की प्रक्रिया पूरी कर शीघ्र काम प्रारंभ करने को कहा। साव ने अधिकारियों से कहा कि नालंदा परिसर का शानदार और आइकॉनिक निर्माण होना चाहिए। नालंदा परिसर और अटल परिसर का निर्माण सरकार के महत्वाकांक्षी कार्य हैं। उन्होंने आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को खुद इनकी मॉनिटरिंग करने और प्रगति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए।     उप मुख्यमंत्री साव ने बैठक में अधोसंरचना मद और 15वें वित्त आयोग के तहत स्वीकृत कार्यों के साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), अमृत मिशन 2.0, एसटीपी निर्माण और आकांक्षी शौचालयों के कार्यों में भी तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण कार्यों में सामग्री और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने सभी नगरीय निकायों के अधिकारियों को रोजाना प्रातः भ्रमण कर निर्माण कार्यों, साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने 01 जनवरी से ही इसकी शुरूआत कर शहरों में प्रकाश और सफाई की व्यवस्था दुरूस्त करने को कहा। साव ने इसमें किसी भी तरह की कोताही न बरतते हुए गंभीरता और सक्रियता से प्रतिदिन कार्यों की मॉनिटरिंग करने को कहा। इसमें किसी तरह का हीला-हवाला पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।        साव ने समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के निर्माणाधीन आवासों को आगामी मार्च महीने तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने गरीबों का आशियाना तैयार करने का काम संवेदनशीलता से करते हुए इनका निर्माण प्राथमिकता से पूर्ण करने को कहा।  उन्होंने किफायती आवास परियोजनाओं के तहत निर्मित आवासों का आबंटन हितग्राहियों को तत्काल करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री साव ने जनसमस्या निवारण पखवाड़ा के दौरान अनिराकृत प्रकरणों की नियमित समीक्षा कर इन्हें जल्द से जल्द निराकृत करने को कहा।     साव ने नगरीय निकायों में नियमित और प्लेसमेंट कर्मचारियों के समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने ऊर्जा की अनावश्यक खपत पर रोक लगाते हुए विद्युत देयकों का भुगतान समय पर करने के निर्देश दिए। लंबित भुगतान के कारण विद्युत देयकों पर सरचार्ज लगने की स्थिति नहीं बननी चाहिए। साव ने नगरीय निकायों में सेट-अप के पुनरीक्षण के लिए आवश्यक जानकारी संचालनालय को भेजने को कहा। उन्होंने आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को सभी कार्यों की साप्ताहिक समीक्षा करने के निर्देश दिए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की संयुक्त सचिव डॉ. रेणुका श्रीवास्तव, राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) के सीईओ शशांक पाण्डेय और नगरीय प्रशासन विभाग के अपर संचालक पुलक भट्टाचार्य सहित सभी क्षेत्रीय कार्यालयों के संयुक्त संचालक एवं नगरीय निकायों के अभियंता भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे। recent visitors 42

ग्रामीण और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा जिला अस्पतालों को मिले नए चिकित्सा अधिकारी व विशेषज्ञ चिकित्सक

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने व स्वास्थ्य सेवाओं की प्रदायगी हेतु पर्याप्त मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत संविदा पदों पर विशेषज्ञ चिकित्सकों व चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।       स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देश पर चिकित्सकों की पदस्थापना की गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आदेशानुसार राज्य के रायपुर संभाग के शासकीय अस्पतालों में 06 चिकित्सा अधिकारियों, बिलासपुर संभाग में 12 चिकित्सा अधिकारियों, सरगुजा संभाग में 05 चिकित्सा अधिकारियों, बस्तर संभाग में 06 चिकित्सा अधिकारियों के साथ दुर्ग संभाग में 06 चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, छत्तीसगढ़ द्वारा आज इन नवीन संविदा चिकित्सा अधिकारियों की पदस्थापना के आदेश जारी किए गए हैं। इन डॉक्टरों को संबंधित जिले के विभिन्न ग्रामीण और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा जिला चिकित्सालयों में पदस्थ किया गया है। नवीन संविदा चिकित्सा अधिकारी की पदस्थापना से त्वरित इलाज में तेजी आएगी और चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञ चिकित्सकों (संविदा) के जारी आदेश में डॉ. अमिताभ लालजी साहू, जिला अस्पताल बेमेतरा, डॉ. क्षमा चोपड़ा, जिला अस्पताल कबीरधाम, डॉ. निकिता खेस, जिला अस्पताल जांजगीर, डॉ. अनु आनी जॉन, जिला अस्पताल मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, डॉ. शोएब खान जिला अस्पताल पंडरी रायपुर, डॉ. नील माधव गवेल, जिला अस्पताल रायगढ़ व डॉ. महिमा निधि जॉर्ज शास. चिकित्सा महाविद्यालय जिला रायगढ़ में पदस्थापना की गई है। रायपुर संभाग हेतु चिकित्सा अधिकारी (संविदा) के जारी आदेश में डॉ. भारती ठाकुर, डॉ. हरिश चौधरी, डॉ. अजीत कुमार पटेल, डॉ. ओजस्वी गौतम, डॉ. अनूप कुमार मेहर, डॉ. शिवेन्द्र सिंह मरई शामिल हैं।  बिलासपुर संभाग हेतु जारी आदेश में  डॉ. ऋषा जोगी, डॉ अरशद आलम, डॉ जीनत शेख, डॉ. प्रतीक्षा सिंह, डॉ. लता गुप्ता डॉ. प्रवीण कुमार, डॉ. तेजस्विनी सोनी, डॉ. राजेश्वर प्रसाद कश्यप, डॉ. विरेन्द्र कुमार सार्वा, डॉ. राजेन्द्र कुमार साहू, डॉ. सुयश आंचल, डॉ. अनुराग यादव, सरगुजा संभाग हेतु जारी आदेश में डॉ. अभिषेक जायसवाल, डॉ. निहारिका कुशवाहा, डॉ. अंकिता बड़ा, डॉ. आकांक्षा मिंज, डॉ. अनुराग सिंह यादव का नाम है। दुर्ग संभाग हेतु चिकित्सा अधिकारी (संविदा) के जारी आदेश में डॉ. प्रखर जंघेल, डॉ. मुकेश कुमार वर्मा, डॉ. नेहा रामटेके, डॉ. अस्मिन निशा, डॉ. शेमोन सिंह ठाकुर, डॉ. सूर्य प्रताप सिंह ठाकुर हैं। बस्तर संभाग हेतु चिकित्सा अधिकारी (संविदा) के जारी आदेश में डॉ. प्रीति भवानी, डॉ. कविता नाग, डॉ. वैशाली साहू, डॉ. मेहुल पटेल, डॉ. गिरधर गोपाल यादव व डॉ. अतुल राज खटीक को पदस्थ किया गया है। recent visitors 122

CM साय ने प्रदेशवासियों को नववर्ष 2025 की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को नववर्ष 2025 की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने शुभकामना व्यक्त करते हुए कहा कि नव वर्ष 2025 हम सभी के जीवन में तरक्की के नये अवसर लेकर लाये और हम सभी के जीवन में भरपूर सुख-समृद्धि का वास हो। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नव वर्ष हम सभी के लिए शुभ संकल्प लेने का समय है। पिछले साल हमने प्रधानमंत्री मोदी जी की गारंटी को पूरा करने का संकल्प लिया था और प्रत्येक वर्ग को लाभ पहुंचाने में हमें सफलता मिली। नए वर्ष में भी हम प्रदेश की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस साल हम सभी छत्तीसगढ़ की स्थापना का रजत जयंती वर्ष मना रहे हैं, साथ ही इस वर्ष को हमने अटल निर्माण वर्ष के रूप में भी मनाने का निर्णय लिया है। आप सभी की भागीदारी से हमें छत्तीसगढ़ को एक समृद्ध और विकसित राज्य बनाना है। उन्होंने कहा कि नव वर्ष में हम सब मिलकर छत्तीसगढ़ महतारी को संवारने के लिए और अधिक संकल्पित होकर कार्य करेंगे। उन्होंने हम सभी के शुभसंकल्प और मनोरथ नव वर्ष में पूरे हों, यह आशा व्यक्त करते हुए सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। recent visitors 49

पहले नदी से लाती थीं पानी, अब सोलर पंप ने बदल दी जिंदगी

रायपुर कुछ समय पहले तक कोरबा जिले के बगदरीडांड गांव की बसंती मिंज के लिए घर के उपयोग के लिए पानी का प्रबंधन एक कठिन और जोखिम भरा काम था। उन्हें रोजाना पानी के लिए सिर पर बर्तन उठाकर जंगल की पगडंडियों से होते हुए नदी तक का सफर तय करना पड़ता था। बारिश के दिनों में कीचड़ और फिसलन के बीच उफनती नदी से पानी भरना उनके जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष था। लेकिन अब यह संघर्ष बीते दिनों की बात हो गई है। गांव में सोलर ड्यूल पंप की स्थापना और उनके घर तक नल जल कनेक्शन लगने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। बसंती बताती हैं, पहले पानी के लिए नदी जाना पड़ता था। रास्ता लंबा और खतरनाक था, खासकर बरसात के दिनों में। सिर पर भरे हुए पानी के बर्तन उठाकर घर तक लाना बहुत मुश्किल होता था। लेकिन अब सोलर ड्यूल पंप के जरिए उनके घर तक पानी पहुंचता है। नल से निरंतर पानी मिलने से न केवल उनका जीवन सरल हुआ है, बल्कि उन्हें घर के अन्य कामों के लिए भी पर्याप्त समय मिल रहा है। सोलर ड्यूल पंप की स्थापना से न केवल बसंती, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के जीवन में भी बड़ा बदलाव आया है। अब उन्हें पानी के लिए घर से बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। पानी की उपलब्धता ने उनके जीवन को सुविधाजनक और सुरक्षित बना दिया है। बसंती कहती हैं, अब चाहे गर्मी हो या बारिश, पानी की चिंता खत्म हो गई है। नल से जितना पानी चाहिए, उतना आसानी से मिल जाता है। यह सुविधा हमारे लिए वरदान की तरह है। सोलर ड्यूल पंप परियोजना का उद्देश्य जल संकट से जूझ रहे ग्रामीण क्षेत्रों को पानी की सुविधा प्रदान करना और महिलाओं की दैनिक जीवन की कठिनाइयों को दूर करना है। recent visitors 44