रिपोर्ट: AI के चलते नौकरियां जाएंगी और अब ऐसा ही देखने को मिल रहा है, अब होने लगे है AI से काम, झटका

नई दिल्ली आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रभाव जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है और इसके चलते ढेरों काम अब आसान हो गए हैं। एक्सपर्ट्स ने पहले ही चिंता जताई थी कि AI के चलते नौकरियां जाएंगी और अब ऐसा ही देखने को मिल रहा है। Bloomberg Intelligence की नई रिपोर्ट में सामने आया है कि अगले तीन से पांच साल के अंदर ग्लोबल बैंक्स के कर्मचारियों की दो लाख से ज्यादा नौकरियां जाने वाली हैं। BI में चीफ इन्फॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी ऑफिसर्स के सर्वे में संकेत मिले हैं कि कुल नौकरियाों में से 3 प्रतिशत की कटौती होने वाली है और लाखों नौकरियां जाएंगी। BI के सीनियर एनालिस्ट Tomasz Noetzel ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ऐसी जो भी नौकरियां, जिनमें एक जैसा काम बार-बार करना पड़ता है, उनके जाने का रिस्क है। हालांकि कई नौकरियां पूरी तरह खत्म नहीं होंगी और उनके लिए काम करने का तरीका बदल जाएगा। इन वजहों से जाने वाली हैं नौकरियां ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस ने जो पीयर ग्रुप कवर किया, उसमें Citigroup Inc., JPMorgan Chase & Co. और Goldman Sachs Group Inc. वगैरह शामिल हैं। 93 लोगों में से करीब एक चौथाई ने कहा है कि कुल कर्मचारियों में से 5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत के बीच AI के इस्तेमाल के बाद प्रभावित होंगे। दरअसल, AI टूल्स के साथ ना सिर्फ कंपनियों की प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी, बल्कि वे अपना खर्च भी कम कर पाएंगे। मौजूदा काम की स्पीड भी AI टूल्स के चलते बढ़ जाएगी। सामने आया है कि सबसे ज्यादा नौकरियां बैंकिंग सेक्टर से जाने वाली हैं और किसी अन्य सेक्टर के मुकाबले बैंकिंग के क्षेत्र की तो 54 प्रतिशत नौकरियों का ऑटोमेशन किया जा सकता है। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि नौकरियां पूरी तरह खत्म होने के बजाय नए अवसर पैदा होंगे और मौजूदा काम करने का तरीका AI के आने के बाद बदलेगा। recent visitors 76

योगी ने कहा- कुंभ में ऐसे लोगों का स्वागत है जो अपने गोत्र को भारत के ऋषियों के नाम से जोड़कर देखते हैं

प्रयागराज उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में भव्य महाकुंभ का आयोजन किया जा रहा है। इसकी तैयारी बड़े ही जोर-शोर से की जा रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री खुद इसकी निगरानी कर रहे हैं। वह बार-बार प्रयागराज का दौरा कर रहे हैं। इस सबके बीच इस बात की चर्चा थी कि कुंभ के दौरान यहां मुसलमानों की एंट्री बैन कर दी गई है। हालांकि, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री खुद इस मुद्दे पर खुलकर बात की है। जब योगी आदित्यनाथ से इस विषय पर पूछा गया तो उन्होंने साफ-साफ कहा कि जिस किसी को भी भारत की सनातन परंपरा में आस्था है वह यहां आएं। हालांकि उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में यह भी कह दिया कि गलत मानसिकता से लोग यहां नहीं आएं। कुछ भी गलत करते हुए पकड़े जाने पर उनके साथ दूसरे तरीके से व्यवहार हो सकता है। योगी आदित्यनाथ ने कुंभनगरी में मुसलमानों का स्वागत करते हुए शर्तें भी लगा दी हैं। उन्होंने कहा कि कुंभ के दौरान ऐसे ही लोगों का स्वागत है जो अपने को भारतीय मानते हों। सनातन परंपरा में श्रद्धा रखते हैं। जिन्हें ऐसा लगता है कि भूतकाल में किसी दबाव में आकर उनके पूर्वजों ने उपासना विधि के रूप में इस्लाम स्वीकार किया था, लेकिन वे सनातनी हैं तो उनका कुंभ में स्वागत हैं। योगी ने कहा कि कुंभ में ऐसे लोगों का स्वागत है जो अपने गोत्र को भारत के ऋषियों के नाम से जोड़कर देखते हैं। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ऐसे लोग प्रयागराज आएं और परंपरागत तरीके से संगम में स्नान करें। ऐसे लोगों के आने में कोई समस्या नहीं हैं। योगी आदित्यनाथ वक्फ बोर्ड के दावों का जवाब देते हुए कहा कि अगर कोई आएगा और कहेगा कुंभ की यह भूमि हमारी है और हम लोग इस पर कब्जा करेंगे तो मुझे लगता है कि उनको 'डेंटिंग-पेंटिंग' का सामना करना पड़ सकता है। अखाड़ों के संतों के साथ योगी का डिनर वहीं, योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को प्रयागराज दौरे के पहले दिन साधु संतों के साथ रात्रि भोज किया और उन्हें उपहार भी भेंट किया। रात्रि भोज में सभी अखाड़ों, खाकचौक, दंडीबाड़ा और आचार्यबाड़ा के संत उपस्थित रहे। इस रात्रि भोज कार्यक्रम में जूना, निरंजनी, उदासीन बड़ा, निर्मल, तीनों वैष्णव अखाड़े (निर्मोही, दिगंबर, निर्वाणी), अग्नि, आवाहन, अटल एवं आनंद अखाड़े के संत भी शामिल रहे। साथ ही खाकचौक से संतोष दास (सतुआ बाबा) भी इस दौरान उपस्थित रहे। साधु संतों ने मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुष्प वर्षा कर स्वागत और अभिनंदन किया। recent visitors 91

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भगवान झूलेलाल की पूजा-अर्चना कर राज्य की खुशहाली और समृद्धि की कामना की

  चकरभाठा में सिंधु अमर धाम के चालिहा उत्सव में हुए शामिल रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बिलासपुर के चकरभाठा में पूज्य सिंधु समाज द्वारा आयोजित चालिहा महोत्सव में शामिल हुए। उन्होंने भगवान झूलेलाल की पूजा-अर्चना कर छत्तीसगढ़ राज्य की सुख समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने इस अवसर पर पूज्य सिंधु अमरनाथ आश्रम के संत श्री सांई लाल दास साहेब को नमन करते हुए उनका अभिनंदन किया। श्री साय ने कहा कि पूज्य संत लाल दास जी ने 40 दिन का उपवास रखा है,उससे प्रदेश में खुशहाली आएगी। तप, पूजा पाठ यही हम सबकी ताकत है। श्री साय ने कहा कि वरुण अवतार भगवान झूलेलाल जी का अवतरण भी 40 दिन के सामूहिक तप के बाद हुआ। साईं लाल दास साहेब उसी परम्परा को आगे बढ़ा रहे है। सिंधी समाज धर्म प्रेमी सेवा भावी समाज है। इस अवसर पर विधायक धरम लाल कौशिक, अमर अग्रवाल सहित श्रद्धालु और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सिंधी समाज के लोग शिक्षित, समृद्ध एवं सेवाभावी होते है। अधिकांश समय वे समाज सेवा के काम में लगे रहते हैं। अपने पुरूषार्थ के बल पर उन्होंने देश में अच्छा मुकाम हासिल किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंधी समाज ने देश के विभाजन की विभीषिका को झेला है। अनेक कष्ट उठाने के बावजूद सिंधी समाज के लोगों ने हार नहीं मानी और अपनी जीवटता एवं आपसी सहयोग की बदौलत तरक्की के रास्ते पर आज भी निरंतर अग्रसर हैं। विधायक धरमलाल कौशिक ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि चकरभाठा स्थित पूज्य सिंधु अमर धाम के चालिहा उत्सव में देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। उनका सेवा भाव देखने योग्य होता है। यहां आयोजित चिकित्सा शिविर में नामी-गिरामी चिकित्सक स्व-स्फूर्त रूप से अपनी सेवाएं देते हैं। अमित चिमनानी ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि पूज्य संत लाल दास साहेब का तप छत्तीसगढ़ के लोगो के जीवन में खुशहाली लाएगा। इस अवसर पर संभागायुक्त महादेव कावरे, कलेक्टर अवनीश शरण, एसपी रजनेश सिंह, रामू रोहरा सहित बड़ी संख्या में सिंधी समाज के श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उत्सव में शामिल हुए।   recent visitors 66

भारत के उत्थान की प्रेरणा है राष्ट्र मंदिर

श्रीराम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा की प्रथम वर्षगांठ पर विशेष भोपाल अद्भुत, अकल्पनीय और अविस्मरणीय वह अभिजीत मुहूर्त, जब प्राण-प्रतिष्ठा कर रामलला के नेत्रों से पट्टि‍का हटाई गई तब पूरे विश्व में सनातन संस्कृति के उपासकों के नेत्रों में श्रद्धा, आस्था, आनंद और प्रतीक्षा के आँसू थे। पौष शुक्ल द्वादशी, 22 जनवरी 2024 केवल अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के उत्सव का दिवस नहीं, बल्कि संपूर्ण हिंदू समाज की दृष्टि और विचारों के परिवर्तन की उपलब्धि का दिन है। पीढ़ियों की तपस्या, त्याग, बलिदान और प्रतीक्षा के बाद अयोध्या ने इस शुभ घड़ी का स्वागत किया था। भगवान श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठा से आनंदित, उत्साहित यह वही अयोध्या है जिसके परिचय में अथर्व वेद में उल्लेख आता है कि –   अष्ट चक्रा नव द्वारा देवाना पू: अयोध्या। तस्या हिरण्यमय: कोश स्वर्गो ज्योतिषावृत:।। अयोध्या, जिसका अर्थ ही है जो अजेय, अपराजित है। सहस्त्रों वर्षो तक अयोध्या अपने स्वर्णिम इतिहास के लिए जानी जाती रही। वही अयोध्या जहाँ हिन्दू समाज के आराध्य श्रीराम जी का जन्म सकल लोक के मंगल हेतु हुआ। इसीलिए गोस्वामी तुलसीदास जी अयोध्या का वर्णन कुछ इस प्रकार करते हैं-   विप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार। निज इच्छा निर्मित प्रभु माया गुन गो पार।। हिन्दू समाज की आस्था के केंद्र, समरसता, नैतिकता व कर्तव्यपालन का बोध कराने वाले श्रीराममंदिर का कालांतर में विध्वंस कर मुगल आक्रांताओं द्वारा गुलामी के प्रतीक के रूप में बाबरी मस्जिद बना दी गई। इसके बाद 1528 से ही आरंभ हुए श्रीराममंदिर आंदोलन का 9 नवम्बर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय पर विराम हुआ। 5 अगस्त 2020 को भूमिपूजन के साथ करोड़ों लोगों ने अपनी भावनाओं ने विविध प्रकार से अभिव्‍यक्त्ति की। यह एक ऐसा आंदोलन रहा जिसमें साधु-संतों ने युद्ध भी किया और वे आध्यात्मिक जागरण के केंद्र भी बने। बैरागी अभिराम दास (योद्धा साधु), राममंदिर आंदोलन के शलाका पुरुष महंत रामचन्द्र परमहंस, महंत अवैद्यनाथ व देवरहा बाबा ने संपूर्ण आंदोलन को एक दिशा प्रदान की। कोठारी बन्धुओं के बलिदान को हिन्दू समाज भला कैसे विस्मृत कर सकता है? विष्णु डालमिया, अशोक सिंहल वे तेजपुंज हैं, जिन्होंने सनातन ऊर्जा को संग्रहीत कर इस पवित्र कार्य से जोड़ा। मंदिर आंदोलन के मूल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका से सभी भलीभांति परिचित ही हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने पूरे आंदोलन में जनजागरण करते हुए आस्था के उच्चतम प्रतिमानों को विश्वव्यापी स्वरूप दिया। विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद सहित विचार परिवार के सभी संगठनों ने अपनी पूर्ण सामर्थ्य के साथ तत्कालीन सरसंघचालक बालासाहब देवरस की मंशा के अनुरूप धैर्यपूर्वक योजनाबद्ध आंदोलन किए। भारतीय जनता पार्टी द्वारा लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में देशव्यापी रथयात्रा ने पूरे भारत में वातावरण का निर्माण किया तो असंख्य कारसेवकों के बलिदान ने राम राष्ट्र के इस यज्ञ में समिधा का कार्य किया। मंदिर आंदोलन के इतिहास में अनेक बलिदानियों के रक्त व उनके परिजनों के त्याग का बिंदु समाहित है। राममंदिर के प्रति समाज की आस्था इतनी प्रबल रही है कि जब श्रमदान आवश्यक था तब श्रमदान किया। वहीं  राष्ट्रमंदिर को भव्यता और दिव्यता देने के लिए निधि समर्पण अभियान में जाति, वर्ग, दल, समूह के सभी बंधनों को ध्वस्त करते हुए जिससे जो बन पड़ा उसने भगवान श्रीराम के चरणों में समर्पण किया। भारतीय पंचांग के अनुसार पौष शुक्ल द्वादशी को आज ही के दिन जो पिछले वर्ष 22 जनवरी 2024 को थी, भगवान के विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी। संपूर्ण भारत की आस्था के केंद्र श्रीराम मन्दिर के माध्यम से आध्यात्मिक चेतना को बल मिला और देशवासियों में स्वाभिमान का जागरण हुआ। वहीं जो लोग मन्दिर निर्माण का विरोध कर रहे थे उनके सारे अवरोधों का प्रति उत्तर भी इस एक वर्ष में मिला। प्राण-प्रतिष्ठा से आज प्रथम वर्षगांठ तक असंख्य दर्शनार्थियों ने न केवल रामलला के दर्शन किए बल्कि अयोध्या सहित आस-पास के क्षेत्र के आर्थिक तंत्र को मजबूत करने में महत्व पूर्ण भूमिका निभाई है। नागर शैली में निर्मित अलौकिक सुंदरता से परिपूर्ण श्रीराम मंदिर की लंबाई पूर्व से पश्चिम 380 फीट, चौड़ाई 250 फीट व ऊंचाई 161 फीट है। भव्य तीन मंजिला मंदिर में 392 स्तंभ और 44 द्वार हैं। भूतल में प्रभु श्रीराम का मोहक बाल रूप तो प्रथम तल में श्रीराम दरबार का गर्भगृह है। नृत्य मंडप, रंग मंडप, सभा मंडप, प्रार्थना व कीर्तन मंडप है। उत्तरी भुजा में मां अन्नपूर्णा व दक्षिणी भुजा में हनुमान जी विराजित हैं। मंदिर के समीप ही पौराणिक काल का सीताकूप रहेगा। 732 मीटर लंबे व 14 मीटर चौड़े चहुंमुखी आयताकार परकोटे के चार कोनों पर भगवान सूर्य, मां भगवती, गणपति व भगवान शिव का मंदिर बनेगा। मंदिर परिसर में ही महर्षि वाल्मिकी, महर्षि वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य, निषादराज, माता शबरी व देवी अहिल्या के मंदिर प्रस्तावित हैं। यह मात्र एक मंदिर नहीं बल्कि भारत की संस्कृति और अस्मिता का प्रतीक है। एक स्वाभिमानी राष्ट्र अपने ऐसे ही प्रतीकों से ऊर्जा प्राप्त करता है। राम मंदिर भारत की चेतना का पर्याय है और इसका भी कि राम जन-जन की स्मृति में कितने गहरे रचे-बसे हैं। यह आधुनिक विश्वऔ के इतिहास में पहली बार है, जब किसी समाज ने अपने प्रेरणा पुरुष के जन्मस्थान एवं उनके उपासना स्थल को अतिक्रमण और अवैध कब्जे से न्यायपूर्वक छुड़ाने में सफलता प्राप्त की। प्राण-प्रतिष्‍ठा उत्‍सव में उमड़ा भावनाओं का ज्वार ऐसे अनेक प्रश्नों का उत्तर दे रहा था कि राम मंदिर का निर्माण क्यों आवश्यक था और हिंदू समाज उसके लिए इतनी व्यग्रता से क्यों प्रतीक्षा कर रहा था? अच्छा होता कि यह प्रतीक्षा स्वतंत्रता के बाद ही पूरी हो जाती, किंतु संकीर्ण राजनीतिक कारणों और कथ‍ि‍त सेक्युलरिज्म की विजातीय-विकृत अवधारणा के चलते ऐसा नहीं हो सका। यह विडंबना ही रही कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की हिंदू समाज की सदियों पुरानी स्वाभाविक अभिलाषा की अनदेखी की गई। जिस अयोध्या को अवनी की अमरावती और धरती का बैकुंठ कहा गया, वह सदियों तक अभिशप्त थी, उपेक्षित रही, सुनियोजित तिरस्कार झेलती रही। अपनी ही भूमि पर सनातन आस्था पद दलित होती रही, किंतु राम का जीवन हमें संयम की शिक्षा देता है और भारतीय समाज ने संयम बनाए रखा। समय के साथ समाज का संकल्प भी दृढ़ होता गया और आज समस्त सृष्टि अयोध्या के वैभव को निहार रही … Read more

अगर आपका आधार कार्ड 10 साल पुराना है, तो उसे अपडेट कराना जरूरी हो गया है, नहीं तो पुराने आधार कार्ड होंगे रद्द

नई दिल्ली यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने आधार कार्ड धारकों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना जारी की है। सरकार ने 10 साल से अधिक पुराने आधार कार्ड को अपडेट कराने की आवश्यकता पर जोर दिया है। अगर आपका आधार कार्ड 10 साल पुराना है, तो उसे अपडेट कराना जरूरी हो गया है, क्योंकि पुराने आधार कार्ड को रद्द किया जा सकता है। सरकार ने फ्री आधार अपडेट की समयसीमा को फिर से बढ़ाते हुए अब अंतिम तारीख 14 जून 2025 कर दी है। इससे पहले डेडलाइन 14 दिसंबर 2024 थी। 10 साल से अधिक पुराने आधार कार्ड धारकों को अपनी जानकारी अपडेट करने की सलाह दी जा रही है ताकि उनकी पहचान प्रमाणित और अद्यतन बनी रहे। यह सुविधा केवल ऑनलाइन myAadhaar पोर्टल पर मुफ्त में उपलब्ध होगी। हालांकि, ऑफलाइन मोड के जरिए अपडेट कराने पर शुल्क देना होगा। क्यों जरूरी है आधार कार्ड अपडेट? आधार कार्ड, जिसे देश में पहचान का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है, हर व्यक्ति की बायोमेट्रिक और व्यक्तिगत जानकारी से जुड़ा होता है। समय के साथ, पते या अन्य जानकारी में बदलाव हो सकता है, जिसे अपडेट कराना आवश्यक है। इसके अलावा, फेक आधार कार्ड के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार ने 10 साल पुराने आधार कार्ड धारकों को जानकारी अपडेट कराने की सिफारिश की है। कैसे करें आधार कार्ड अपडेट? आधार कार्ड अपडेट प्रक्रिया को ऑनलाइन करना बेहद आसान है। UIDAI ने इसे सरल और सुलभ बनाने के लिए विशेष कदम उठाए हैं। इसके लिए, https://myaadhaar.uidai.gov.in/ पर लॉगिन करें और अपनी जानकारी को सत्यापित कर अपडेट करें। सरकार के इस कदम से लाखों आधार कार्ड धारकों को लाभ मिलेगा, खासकर वे लोग जिनकी जानकारी अब तक अपडेट नहीं हुई है। डेडलाइन खत्म होने के बाद आधार अपडेट के लिए शुल्क देना होगा। ऐसे में यह सलाह दी जाती है कि 14 जून 2025 से पहले अपनी जानकारी को अपडेट कराना सुनिश्चित करें।   recent visitors 101

परीक्षाएं करीब, नगरपालिका करा रही खेल आयोजन: बच्चों के अभिभावकों में चिंताएं

मण्डला  नगरपालिका परिषद नैनपुर द्वारा शालेय खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है, जिसका समय बच्चों की बोर्ड परीक्षाओं के ठीक पहले रखा गया है। अभिभावकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस समय बच्चों के लिए परीक्षा की तैयारी करना संभव होगा, जब एक ओर खेलकूद प्रतियोगिता के आयोजन का दबाव होगा। यह प्रतियोगिता 11 जनवरी 2025 से 12 जनवरी 2025 तक जेआरसी मैदान में आयोजित की जाएगी, लेकिन इस समय तक बच्चों के प्री-बोर्ड और बोर्ड परीक्षा के लिए तैयारी करनी होगी। नैनपुर विकास खंड में आयोजित होने वाली यह शालेय खेलकूद प्रतियोगिता बच्चों के शारीरिक विकास और खेल कौशल को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से है। इसमें विभिन्न स्कूलों के छात्र अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करेंगे और शारीरिक दक्षता के स्तर पर अपनी काबिलियत साबित करेंगे। इस तरह के आयोजनों से बच्चों को खेलकूद में आगे बढ़ने का अच्छा मौका मिलता है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह समय सही है, जब बच्चों के परीक्षा की तैयारी को लेकर अभिभावक चिंतित हैं।        अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में बच्चों के अध्ययन के साथ-साथ समय-समय पर खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन होना चाहिए, लेकिन जब परीक्षा इतनी करीब हो, तो इस प्रकार के आयोजनों का आयोजन बच्चों की पढ़ाई के साथ मेल नहीं खाता। विशेषकर कक्षा 10वीं और 12वीं के बच्चों के लिए यह एक अहम समय होता है, क्योंकि उनकी बोर्ड परीक्षाएं फरवरी में शुरू होनी हैं। प्री-बोर्ड परीक्षा 16 जनवरी 2025 से शुरू हो रही है, और कक्षा 9वीं और 11वीं की वार्षिक परीक्षाएं 3 फरवरी 2025 से शुरू होने वाली हैं। ऐसे में बच्चों को 7-8 दिन तक खेलकूद प्रतियोगिता में व्यस्त रखने से उनकी परीक्षा की तैयारी पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसके अलावा, यह भी चिंता का विषय है कि इस प्रतियोगिता के आयोजन के लिए अतिरिक्त विषय शिक्षकों को भी इस कार्य में शामिल किया गया है, जो कि बच्चों के पाठ्यक्रम पर ध्यान देने के बजाय खेलकूद गतिविधियों में व्यस्त होंगे। यह समस्या खासकर तब बढ़ जाती है जब शिक्षकों के लिए समय की कमी हो और परीक्षा के पूर्व बच्चों को पूरा ध्यान देने की आवश्यकता हो।        अभिभावकों का मानना है कि इस आयोजन को अक्टूबर-नवंबर में आयोजित किया जाना चाहिए था, जब बच्चों की परीक्षाएं दूर थीं और वे आराम से अपनी पढ़ाई और खेलकूद में समय बिता सकते थे। अब जब परीक्षाएं नजदीक हैं, तो यह आयोजन बच्चों के लिए परीक्षा की तैयारी में रुकावट डाल सकता है। अभिभावक यह भी कहते हैं कि अगर आयोजन के समय को लेकर उचित विचार किया जाता, तो बच्चों की पढ़ाई और खेल दोनों में संतुलन बना रहता। इस आयोजन के पक्ष में यह तर्क दिया जा सकता है कि खेलकूद से बच्चों का मानसिक तनाव कम होता है और उनकी शारीरिक सेहत में सुधार होता है, जिससे वे अपनी पढ़ाई में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। हालांकि, यह समय बच्चों के लिए परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है और शायद इस आयोजन का समय पुनः निर्धारित किया जा सकता था।     कुल मिलाकर, नगरपालिका परिषद नैनपुर के अधिकारियों से यह उम्मीद की जा रही है कि वे बच्चों की शिक्षा और खेलकूद के बीच संतुलन बनाए रखें। बच्चों की परीक्षाओं से पहले खेलकूद की गतिविधियों को प्राथमिकता देने से पहले, बच्चों की शिक्षा के महत्व को समझते हुए इसे एक उपयुक्त समय पर आयोजित करना चाहिए। recent visitors 54

बलौदाबाजार-भाटापारा मार्ग के बडे़-बडे़ गढ्ढों से जनता परेशान

बलौदाबाजार जिले में विकास की गाथा बडे़ ही उत्साह के साथ मंत्री, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी प्रमुखता से कहते रहते हैं, लेकिन तस्वीर इसके ठीक उलट है. जिले में खराब और खस्ताहाल सड़कों से आम जनता त्रस्त है. आए दिन गाड़ियों का एक्सीडेंट हो रहा है. वाहन चालक भी बेपरवाह हैं. जनता अधिकारियों को आवेदन दे-देकर परेशान है, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं. सबसे ज्यादा खराब स्थिति बलौदाबाजार-भाटापारा मार्ग, बलौदाबाजार से सुहेला पड़कीडीह, हथबंद, सिमगा, बलौदाबाजार विकासखंड के ही ग्राम करमदा, गैतरा, भरसेला मार्ग है, जिस पर लोगों का चलना दूभर हो चुका है. उड़ती धुल और बडे़-बडे़ गढ्ढों से जनता परेशान है. बलौदाबाजार-भाटापारा मार्ग ऐसा कि सामान्य आदमी भी मोटर साइकिल चलाये तो लगता है, कि नशा कर गाड़ी चला रहा है, पर मजबूर है. जनता और खासकर ग्रामीण जो कि सीमेंट संयंत्र के आसपास रहते हैं, उनका कहना है कि सड़क से उड़ती धूल से नहीं घर में बनने वाले खाद्य पदार्थ बड़ी, बिजौरी और अन्य सामान बना पा रहे हैं, और न ही कपड़े सूखा पा रहे हैं. घर का सदस्य जब बाहर जाता है, वह सही-सलामत आ पाएगा या नहीं इसका डर हमेशा बना रहता है, लेकिन आम लोगों की चिंता न तो प्रशासन को है और नहीं सीमेंट संयंत्रों को. वाहन चालक कहते हैं कि जान जोखिम में डालकर वाहन चलाने को मजबूर हैं. कब गाड़ी खराब हो जाएगी या कब एक्सीडेंट हो जाएगा, हम नहीं जानते हैं. वहीं ग्रामीण महिला ने कहा कि न तो वह घरेलू सामान बना पाती है और न ही कपड़े सुखा पा रही है. इस कदर धूल है. जनसुनवाई के दौरान यह मामला लगभग हर किसी ने उठाया है. वहीं सीमेंट संयंत्र में सामान लेकर आने वाले वाहनों पर न ही जिला प्रशासन और नहीं आरटीओ और पुलिस विभाग कार्रवाई करता है. हां, यह जरूर है कि पुलिस मोटरसाइकिल सवारों को शिक्षा जरूर देती है कि हेलमेट पहन कर वाहन चलाये और जुर्माना भी इन्हीं से वसूल रही है, पर ओव्हरलोड वाहनों पर जिले में कोई कार्रवाई नहीं हुई. यह एक बड़ा सवाल आम जनता का है कि आखिर क्यों. recent visitors 58