शंकराचार्य ने कहा- आज हमारे प्राचीन स्थल अगर हमको वापस मिल रहे हैं, इसमें कोई गलत नहीं है यह हमारा अधिकार है.

प्रयागराज उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित हो रहे महाकुंभ में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर द्वारका शारदापीठ के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती महाराज ने बड़ा बयान दिया है. सदानंद सरस्वती का कहना है कि महाकुंभ में हम गंगा स्नान करते हैं, हनुमान जी की पूजा करते हैं, देवताओं का आह्वान करते हैं तो ऐसी जगह पर गैर-हिंदुओं का जाने का कोई अर्थ नहीं है क्योंकि वह तो न गंगा स्नान करते हैं न हमारे देवी देवताओं का सम्मान करते हैं. ऐसे में महाकुंभ में गैर-हिंदुओं के जाने से कोई मतलब का नहीं है. इसके साथ-साथ शंकराचार्य सदानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि मुगलों ने देश में राज किया और केवल हिंदू देवी-देवताओं के मंदिरों पर ही अपनी मस्जिद बनाई, जबकि उस जमाने में तो मंदिरों के अलावा भी बहुत सारी भूमि उनके कब्जे में थी, लेकिन उन्होंने जानबूझकर मंदिरों को ही तोड़कर मस्जिद बनाई है. उन्होंने कहा कि अगर आज खुदाई हो रही है तो कोई गलत बात नहीं है क्योंकि हमारी परंपरा और संस्कृति उन्होंने मिटाने का काम किया. द्वारका शारदापीठ के शंकराचार्य ने कहा कि आज हमारे प्राचीन स्थल अगर हमको वापस मिल रहे हैं, इसमें कोई गलत नहीं है यह हमारा अधिकार है. मुसलमानों के दुकान लगाने को लेकर क्या बोले महंत रवींद्र पुरी? इससे पहले महाकुंभ में मुसलमानों के दुकान लगाने को लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रमुख महंत रवींद्र पुरी ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि मुसलमानों से कोई दुश्मनी नहीं है, लेकिन वे प्रयागराज में महाकुंभ मेले के दौरान दुकानें नहीं लगानी चाहिए क्योंकि वे हमारे धर्म को भ्रष्ट कर देंगे. वे किराने, जूस की दुकानें, खाने के स्टॉल और चाय की दुकानें नहीं लगा सकते हैं क्योंकि वे जानबूझकर भोजन पर थूकते हैं. recent visitors 67

हिंदू धर्म में बहुत अधिक मान्यता रखने वाली रामायण का मंचन राजधानी बीजिंग में कराया जाएगा, भगवान राम से मर्यादा सीखेगा चीन!

नई दिल्ली, बीजिंग भारत और चीन भले ही पड़ोसी मुल्क हैं, लेकिन दोनों के बीच सांस्कृतिक अंतर काफी गहरे हैं। इस बीच चीन ने एक बड़ी पहल की है। इसके तहत हिंदू धर्म में बहुत अधिक मान्यता रखने वाली रामायण का मंचन राजधानी बीजिंग में कराया जाएगा। यह कार्यक्रम 25 जनवरी को बीजिंग के शुनयी ग्रैंड थिएटर में शाम को 7 बजे होगा। भारत में स्थित चीनी दूतावास की प्रवक्ता यु जिंग ने इस बारे में जानकारी दी है। यु जिंग ने एक्स अकाउंट पर इसके बारे में जानकारी दी है, जिस पर लोगों ने खुशी जताते हुए कहा कि यह चीन की रिश्तों को सुधारने के लिए एक अच्छी पहल है, जिसका स्वागत होना चाहिए। यही नहीं कई यूजर्स ने लिखा है कि सनातन धर्म के मूल्य ही ऐसे हैं कि 21वीं सदी में पूरी दुनिया को उनसे सीख मिलती है। चीन में रामायण पर होने वाली यह प्रस्तुति प्रोफेसर जि शियानलिन के संस्कृत से मंदारिन में किए गए अनुवाद पर आधारित होगी। इस नाट्य प्रस्तुति का निर्देशन भारतनाट्यम एक्सपोनेंट से जुड़े जिन शानशान करने वाले हैं। यह कार्यक्रम बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के सहयोग से किया जा रहा है। चीन में रामायण के मंचन को लेकर शीर्ष सरकारी सूत्रों की ओर से कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन साफ है कि भारत के साथ शी जिनपिंग सरकार रिश्ते सुधारना चाहती है। 2020 में लद्दाख में सीमा पर दोनों सैनिकों के बीच खूनी झड़प हो गई थी। इसके बाद कई सालों तक दोनों देशों के रिश्तों में बर्फ जमी रही, लेकिन बीते कुछ महीनों में रिश्ते सहज होते दिखे हैं।एक तरफ सीमा विवादों को निपटाने के लिए दोनों देश आगे आए हैं तो वहीं लद्दाख में सैनिकों को भी थोड़ा पीछे हटाया गया है। इस तरह सीमा पर रिश्तों में पिघली बर्फ का असर अब सांस्कृतिक और राजनयिक रिश्तों में भी दिख रहा है। recent visitors 178

जहां पिछले साल 20 अक्टूबर को आतंकी हमला हुआ था, वही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2,400 करोड़ रुपये की लागत से सुरंग का उद्घाटन करेंगे

गांदरबल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 जनवरी को श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित 2,400 करोड़ रुपये की लागत से बनी रणनीतिक जेड-मोड़ सुरंग (Z-Morh tunnel) का उद्घाटन कर सकते हैं। यह 6.5 किलोमीटर लंबी सुरंग लद्दाख क्षेत्र को पूरे साल सड़क मार्ग से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। यह वही सुरंग है जहां पिछले साल 20 अक्टूबर को आतंकी हमला हुआ था। यह सुरंग गांदरबल जिले के गगनगीर इलाके में आती है। गगनगीर में हुए हमले में एक स्थानीय डॉक्टर और बिहार के दो मजदूरों सहित सात लोगों की जान चली गई थी। जेड-मोड़ सुरंग निर्माण स्थल पर हुए इस हमले में दो आतंकवादी शामिल थे। रक्षा जरूरतों और लद्दाख को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने के लिहाज से यह सुरंग अत्यंत महत्वपूर्ण है। परियोजना से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि अगर मौसम अनुकूल रहा, तो प्रधानमंत्री खुद वहां मौजूद रहकर सुरंग का उद्घाटन करेंगे। लेकिन अगर खराब मौसम रहा तो इस स्थिति में सुरंग का उद्घाटन वर्चुअल माध्यम से किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस सुरंग परियोजना का नाम लिए बिना सोशल मीडिया पर इसे पर्यटन के विस्तार के लिए एक "गेम चेंजर" बताया। उन्होंने कहा, "जम्मू-कश्मीर, विशेष रूप से मध्य कश्मीर, आने वाले दिनों में एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के उद्घाटन की प्रतीक्षा कर रहा है। यह परियोजना घाटी में सर्दी के पर्यटन के विस्तार के लिए एक क्रांतिकारी कदम होगी।" गौरतलब है कि कंगन के गंड क्षेत्र में भारी बर्फबारी के कारण श्रीनगर-सोनमर्ग सड़क सर्दियों के महीनों में बंद रहती है। जेड-मोड़ सुरंग के खुलने से यह सड़क सालभर खुली रहेगी, जिससे सोनमर्ग क्षेत्र में सर्दी के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। श्रीनगर-लेह सड़क को सालभर चालू रखने के लिए जोजिला सुरंग पर भी काम जारी है। जेड-मोड़ सुरंग परियोजना का काम मई 2015 में शुरू हुआ था और इसे पिछले साल पूरा कर लिया गया। फरवरी 2024 में सुरंग का सॉफ्ट ओपनिंग किया गया था। सुरंग के शुरू होने से न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि यह बर्फीले इलाकों में खतरनाक और हिमस्खलन-प्रवण मार्ग का विकल्प भी प्रदान करेगी। recent visitors 71

World Hindi Day 2025 : वैश्विक पटल पर हिन्दी की बढ़ती प्रतिष्ठा

World Hindi Day 2025 हर साल 10 जनवरी को *विश्व हिन्दी दिवस* के रूप में मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य हिन्दी भाषा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहित करना और इसकी महत्ता को उजागर करना है। World Hindi Day 2025  की थीम **”हिन्दी: वैश्विक संवाद का सेतु“** है, जो हिन्दी को एक अंतरराष्ट्रीय संवाद की भाषा के रूप में पहचान दिलाने की दिशा में एक और कदम है।   इतिहास और महत्व: World Hindi Day 2025  की शुरुआत 10 जनवरी 2006 में हुई थी। यह दिन 1975 में नागपुर में आयोजित पहले विश्व हिन्दी सम्मेलन की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन, दुनिया भर में हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार और इसके महत्व को लेकर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।   हिन्दी दुनिया की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। 50 से अधिक देशों में इसे पढ़ाया जाता है और लगभग 60 करोड़ लोग इसे अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं। संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी को आधिकारिक भाषा बनाने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।   2025 में हिन्दी की भूमिका: इस वर्ष विश्व हिन्दी दिवस पर तकनीक, शिक्षा, और सांस्कृतिक संवाद के क्षेत्र में हिन्दी की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। डिजिटल युग में हिन्दी की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है। सोशल मीडिया, ब्लॉगिंग, और कंटेंट क्रिएशन में हिन्दी की प्रमुखता ने इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।   वैश्विक मंच पर हिन्दी:   भारत सरकार और हिन्दी का प्रचार-प्रसार: भारत सरकार ने हिन्दी के प्रचार के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें *ई-हिन्दी पोर्टल*, *विश्व हिन्दी सम्मेलन*, और विदेशी विश्वविद्यालयों में हिन्दी के शिक्षण को बढ़ावा देना शामिल है।   Read More: ‘जीतू और जय’ की जोड़ी के पीछे है दिग्विजय सिंह का माइंडगेम! कमलनाथ होते जा रहे हैं साइड विश्व हिन्दी दिवस के कार्यक्रम: 2025 में इस दिन को विशेष बनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं:   1. हिन्दी साहित्य प्रतियोगिताएं   2. अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियां   3. कवि सम्मेलन   4. डिजिटल माध्यम से हिन्दी का प्रचार   विश्व हिन्दी दिवस हमें हमारी मातृभाषा की शक्ति और महत्ता का एहसास कराता है। यह केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, पहचान और विश्व से जुड़ने का माध्यम है। 2025 में, हमें हिन्दी को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। आइए, इस दिन संकल्प लें कि हिन्दी को हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएंगे।   “हिन्दी है हमारी पहचान, इसे बनाएं विश्व की शान!” recent visitors 317

मध्यप्रदेश वासियों सावधान: 13 जनवरी से कड़ाके की ठंड तापमान 3 डिग्री तक बढ़ेगा: जबलपुर-चंबल समेत 5 संभागों में बूंदाबांदी के आसार

भोपाल । मध्यप्रदेश में कड़ाके की सर्दी पर 2-3 दिन के लिए ब्रेक लगेगा। 11 और 12 जनवरी को ग्वालियर, चंबल, रीवा, सागर और जबलपुर संभाग के जिलों में बूंदाबांदी होने के आसार है। वहीं, कोहरा भी रहेगा। 13 जनवरी से कड़ाके की ठंड का दौर फिर शुरू होगा। मौसम विभाग ने 10, 11 और 12 जनवरी को दिन-रात के तापमान में 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी होने का अनुमान जताया है। इसके बाद तापमान में फिर गिरावट होगी। वहीं, वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) की एक्टिविटी से बूंदाबांदी और बादल वाला मौसम रहेगा। बर्फीली हवाओं से ठिठुर गया पूरा एमपी बर्फीली हवा चलने से प्रदेश के शहरों में दिन-रात कड़ाके की ठंड पड़ रही है। पिछली 3 रात से पारा काफी नीचे लुढ़का है। यह दौर तीन दिन के लिए थम जाएगा। मौसम विभाग के अनुसार, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, लद्दाख में बर्फ पिघल रही है, जिससे हवा की रफ्तार भी तेज हो गई है। गुरुवार को जेट स्ट्रीम हवाओं की रफ्तार 250 किमी प्रतिघंटा रही। जनवरी में 20 से 22 दिन शीतलहर मौसम विभाग के अनुसार, जनवरी में प्रदेश का मौसम ठंडा ही रहेगा। 20 से 22 दिन तक शीतलहर चलने का अनुमान है। जनवरी के पहले सप्ताह में कड़ाके की ठंड पड़ी। दूसरा दौर भी ऐसा ही रहा। 3 दिन ऐसा रहेगा मौसम 10 जनवरी: ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडौरी, कटनी, टीकमगढ़, निवाड़ी और मैहर में कोहरा रहेगा। 11 जनवरी: विदिशा, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी में बादल और बूंदाबांदी हो सकती है। इन जगहों पर सुबह कोहरा भी रहेगा। 13 जनवरी: विदिशा, बैतूल, ग्वालियर, दतिया, भिंड, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, कटनी, नरसिंहपुर, पन्ना, दमोह, सागर में बूंदाबांदी हो सकती है। recent visitors 190