भीषण ठंड से राजस्थान वासियों को थोड़ी राहत मिली, लेकिन कुछ जिलों में बारिश के साथ ओलावृष्टि की आशंका, अलर्ट जारी

जयपुर पिछले कुछ दिनों से पड़ रही भीषण ठंड से राजस्थान वासियों को थोड़ी राहत मिली है। यहां कई क्षेत्रों के न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी हुई है। अगले कुछ दिनों में कई जगह आने वाले दिनों में बारिश के साथ ओलावृष्टि की संभावना है। छह जिलों में इसे लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया गया है। बुधवार को फतेहपुर में 1.1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था, जो गुरुवार को बढ़कर 3.3 डिग्री सेल्सियस हो गया, जिससे लोगों को ठंड से थोड़ी राहत मिली। मौसम विभाग के अनुसार, बाड़मेर में राज्य का सबसे अधिकतम तापमान 27.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि फतेहपुर में सबसे कम तापमान 3.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं अब मौसम विभाग ने शुक्रवार और शनिवार को बीकानेर, जयपुर, भरतपुर और अजमेर में हल्कीअ बारिश की संभावना जताई है। इसके साथ ही 11 जनवरी को सीकर, चूरू, झुंझुनू और अलवर के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और ओलावृष्टि की आशंका है। वहीं मौसम में थोड़े बदलाव के बावजूद जयपुर, धौलपुर, बाड़मेर और जैसलमेर सहित कई इलाकों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। जयपुर, अजमेर और बीकानेर जैसे शहरों में आसमान साफ रहा और धूप खिली रही, जिससे ठंड से कुछ समय के लिए राहत मिली। हालांकि, 12 जनवरी से घना कोहरा छाने की उम्मीद है, जिससे मौसम की स्थिति और जटिल हो जाएगी। राजस्थाौन में सुबह और शाम मौसम बेहद ठंडा रहता है। सीकर के फतेहपुर में सबसे कम 1.1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जबकि सिरोही के माउंट आबू में 1.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। इसके साथ ही छह जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। पिछले 24 घंटों की बात करें तो जैसलमेर, बाड़मेर, जयपुर और अजमेर सहित कई शहरों में दिन के अधिकतम तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस से 4 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि हुई। बाड़मेर में दिन का सबसे अधिक तापमान 27.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, इसके बाद जैसलमेर में 27 डिग्री सेल्सियस, बीकानेर में 25.6 डिग्री सेल्सियस, चित्तौड़गढ़ में 25.2 डिग्री सेल्सियस, जालौर में 25.7 डिग्री सेल्सियस, अजमेर में 23.4 डिग्री सेल्सियस, पिलानी में 23.9 डिग्री सेल्सियस, उदयपुर में 23.4 डिग्री सेल्सियस, जोधपुर में 24.5 डिग्री सेल्सियस, गंगानगर में 23.9 डिग्री सेल्सियस और चूरू में 23.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार 10 से 12 जनवरी तक बीकानेर, जयपुर और भरतपुर संभाग में बारिश और आंधी-तूफान आएगा, जिससे ठंड बढ़ जाएगी।   recent visitors 102

शीतकाल में मकर संक्रांति पर्व से पहले तिल की गजक व लड्डू से बाजार महकने लगे, बाजार में बिक रही 15 से अधिक प्रकार की गजक

जबलपुर शीतकाल में मकर संक्रांति पर्व से पहले तिल की गजक व लड्डू से बाजार महकने लगे हैं। गजक, लड्डू, काजू पट्टी, काजू रोल, तिल की वर्फी के साथ विभिन्न प्रकार की गजक रोजाना तैयार की जा रही है। एक दुकान पर पचास से साठ किलो माल रोज तैयार हो रहा है। सर्दी के चलते बाजारों में गजक व तिल के मिष्ठानों की दुकानें सज चुकी हैं, जिनसे लोग जमकर खरीद कर रहे हैं। हालांकि बीते कुछ वर्षों के दौरान तिल, गुड़ की मिठाईयां, गजक महंगी हुई है। इसके बावजूद गजक और तिल-गुड़ के लड्डुओं की महक लोगों को पूर्ववत दुकानों की ओर आकर्षित कर रही है। इस मकर संक्रांति पर बाजार में 15 से अधिक तरह की गजक लोगों के लिए उपलब्ध हैं। सादा गजक, तिल के लड्डू की डिमांड-मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ से बनी मिठाई का विशेष महत्व होता है।   सादा गजक और तिल के लड्डू की डिमांड सबसे ज्यादा यही वजह है कि बाजारों में बड़ी तादाद में गुड़ और तिल से बनी मिठाई लोगों के लिए उपलब्ध है। मकर संक्रांति पर पूजा में इस्तेमाल के अलावा लोग इसका उपयोग दान-पुण्य में भी करते हैं। इस बार सबसे ज्यादा सादा गजक और तिल के लड्डू की डिमांड है। गजक व्यवसायी बताते हैं कि सर्दी ज्यादा पड़ने के कारण इस साल बाजार में रौनक अच्छी है। इस मकर संक्रांति पर अच्छी ग्राहकी की उम्मीद है। शुक्ला नगर निवासी वृद्धा चंद्रकला देवी कहती हैं, ‘एक समय था जब पौष शुरू होते ही बाजार से सफेद व काला तिल खरीदकर ले आते थे। तिल को धोकर उसे सुखाया जाता था फिर उसे चुना जाता था।’ ‘इसके बाद कड़ाही में सेंककर उसमें गुड़ की चाशनी मिलाकर लड्डू बनाए जाते थे। भगवान को भोग लगाकर पूरे माह लड्डू खाते थे, खासकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से डिब्बा भरकर लड्डू बनते थे।’ ‘अब इतनी मेहनत करने की हमारी उम्र नहीं रही और वर्तमान पीढ़ी की बहूओं को लड्डू बनाने में कोई रुचि नहीं रह गई है। इसलिए बाजार से लड्डू खरीदकर लाते हैं और पूजन की परंपरा निभाते हैं।’ मकर संक्रांति पर तिल का है विशेष महत्व मकर संक्रांति पर तिल खाने और दान करने का विशेष महत्व है। इस दिन लोग स्नान इत्यादि करने के बाद काले और सफेद तिल से बनीं वस्तुओं का दान करते हैं। recent visitors 75

आखिर संतों के आश्रमों को अखाड़ा क्यों कहा जाने लगा, इस बारे में जानकार मानते हैं कि यहां अखाड़ा का भाव अखंड से है

प्रयागराज अखाड़ा शब्द सुनते ही हमारे जेहन में पहलवानों और उनके मल्ल युद्ध करने की तस्वीरें उभरने लगती हैं। लेकिन आध्यात्मिक क्षेत्र में अखाड़े संतों के होते हैं। निर्मोही अखाड़ा, जूना अखाड़ा, शंभू पंच दशनाम अखाड़ा समेत संतों के कई अखाड़े हैं, जो चर्चा में रहते हैं। फिलहाल सभी अखाड़ों के संत महाकुंभ 2025 में पहुंचे हुए हैं और उनके अस्थायी आश्रम ही बन गए हैं। करोड़ों की संख्या में महाकुंभ पहुंचने वाले लोग भी अलग-अलग अखाड़ों में जाकर संतों का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते। लेकिन यह सवाल भी बनता है कि आखिर संतों के आश्रमों को अखाड़ा क्यों कहा जाने लगा। इस बारे में जानकार मानते हैं कि यहां अखाड़ा का भाव अखंड से है। दरअसल अखण्ड शब्द ही अपभ्रंश होते-होते अखाड़ा बन गया। यहां अखंड से आध्यात्मिक भाव यह है कि जिसका विभाजन न हो सकता हो। आदि गुरु शंकराचार्य ने सनातन धर्म की रक्षा हेतु साधुओं के संघों को मिलाने का प्रयास किया था। उसी प्रयास के तहत सनातन धर्म की रक्षा एवं मजबूती बनाए रखने एवं विभिन्न परम्पराओं व विश्वासों का अभ्यास करने वालों को एकजुट करने तथा धार्मिक परम्पराओं को अक्षुण्ण रखने के लिए विभिन्न अखाड़ों की स्थापना हुई। अखाड़ों से सम्बन्धित साधु-सन्तों की विशेषता यह होती है कि इनके सदस्य शास्त्र और शस्त्र दोनों में पारंगत होते हैं। अखाड़ा सामाजिक-व्यवस्था, एकता, संस्कृति तथा नैतिकता का प्रतीक है। समाज में आध्यात्मिक मूल्यों की स्थापना करना ही अखाड़ों का मुख्य उद्देश्य है। अखाड़ा मठों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सामाजिक जीवन में नैतिक मूल्यों की स्थापना करना है। इसीलिए धर्म गुरुओं के चयन के समय यह ध्यान रखा जाता है कि उनका जीवन सदाचार, संयम, परोपकार, कर्मठता, दूरदर्शिता तथा धर्ममय हो। भारतीय संस्कृति एवं एकता इन अखाड़ों की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। अलग-अलग संगठनों में विभक्त होते हुए भी अखाडे़ एकता के प्रतीक हैं। नागा संन्यासी अखाड़ा मठों का एक विशिष्ट प्रकार है। प्रत्येक नागा संन्यासी किसी न किसी अखाड़े से सम्बन्धित रहते हैं। ये संन्यासी जहाँ एक ओर शास्त्र पारंगत होते हैं वहीं दूसरी ओर शस्त्र चलाने का भी इन्हें अनुभव होता है। वर्तमान में अखाड़ों को उनके इष्ट-देव के आधार पर निम्नलिखित तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। तीन प्रकार के होते हैं अखाड़े- शैव अखाड़े: इस श्रेणी के इष्ट भगवान शिव हैं। ये शिव के विभिन्न स्वरूपों की आराधना अपनी-अपनी मान्यताओं के आधार पर करते हैं। वैष्णव अखाड़े: इनके इष्ट भगवान विष्णु हैं। ये विष्णु के विभिन्न स्वरूपों की आराधना अपनी-अपनी मान्यताओं के आधार पर करते हैं। उदासीन अखाड़ा: सिक्ख सम्प्रदाय के आदि गुरु श्री नानकदेव के पुत्र श्री चंद्रदेव जी को उदासीन मत का प्रवर्तक माना जाता है। इस पन्थ के अनुयाई मुख्यतः प्रणव अथवा ‘ॐ’ की उपासना करते हैं। recent visitors 73

टीम स्मृति मंधाना की कप्तानी में आयरलैंड के खिलाफ आज शुरू हो रही वनडे श्रृंखला में इस लय को कायम रखना चाहेगी भारत

राजकोट वेस्टइंडीज के खिलाफ शानदार प्रदर्शन के बाद आत्मविश्वास से ओतप्रोत भारतीय टीम स्मृति मंधाना की कप्तानी में आयरलैंड के खिलाफ आज शुरू हो रही पहली महिला द्विपक्षीय वनडे श्रृंखला में इस लय को कायम रखना चाहेगी। भारत ने वेस्टइंडीज को वनडे श्रृंखला में 3.0 से और टी20 में 2.1 से हराया। मंधाना ने दोनों प्रारूपों में सर्वाधिक रन बनाये जिसमें वनडे श्रृंखला में 148 और टी20 में 193 रन शामिल है। मंधाना उसी फॉर्म को आयरलैंड के खिलाफ श्रृंखला में जारी रखना चाहेंगी। नियमित कप्तान हरमनप्रीत कौर की गैर मौजूदगी में वह कप्तानी की भी जिम्मेदारी संभालेंगी। हरमनप्रीत और तेज गेंदबाज रेणुका सिंह को आराम दिया गया है। हरमनप्रीत और रेणुका की गैर मौजूदगी में हरलीन देयोल, प्रतीका रावल और जेमिमा रौड्रिग्स पर रन बनाने की जिम्मेदारी होगी। देयोल ने वनडे श्रृंखला में 160 रन बनाये जबकि रावल ने 134 और जेमिमा ने 112 रन का योगदान दिया। गेंदबाजी में रेणुका की कमी खलेगी जिन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ दस विकेट लिये थे। अब नई गेंदबाज टिटास साधू और साइमा ठाकोर पर बड़ी जिम्मेदारी होगी। वनडे में तीन और टी20 में 13 विकेट ले चुकी साधू पर शुरूआती विकेट लेने की जिम्मेदारी होगी। उन्होंने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी रफ्तार और स्विंग से प्रभावित किया है। वहीं साइमा ने अब तक आठ वनडे में सात विकेट लिये हैं। आफ स्पिनर और उपकप्तान दीप्ति शर्मा की भूमिका भी अहम होगी जिसने वेस्टइंडीज के खिलाफ तीसरे वनडे में 31 रन देकर छह विकेट लिये। उनका साथ देने के लिये प्रिया मिश्रा और तनुजा कंवर होंगी। हरफनमौला राघवी बिष्ट और सयाली सतघारे को भी टीम में जगह दी गई है जो इस मौके को भुनाना चाहेंगी। दूसरी ओर गैरी लुईस की कप्तानी वाली आयरलैंड टीम के लिये भारत की चुनौती कठिन होगी। आयरलैंड टीम ने अब तक 12 वनडे में एक भी बार भारत को नहीं हराया है। आखिरी बार दोनों टीमों का सामना 2023 टी20 विश्व कप में हुआ था जब भारत ने पांच रन से जीत दर्ज की थी। टीमें : भारत : स्मृति मंधाना (कप्तान), दीप्ति शर्मा, प्रतीका रावल, हरलीन देयोल, जेमिमा रौड्रिग्स, उमा छेत्री, रिचा घोष, तेजल हसंबिस, राघवी बिष्ट, मिन्नू मनी, प्रिया मिश्रा, तनुजा कंवर, टिटास साधू, साइमा ठाकोर, सयाली सतघारे। आयरलैंड : गैबी लुईस (कप्तान), एवा केनिंग, क्रिस्टिना रीली, अलाना डालजेल, लौरा डेलानी, जॉर्जिना डेंपसे, सारा फोर्ब्स, अर्लेने केली, जोआना लोगरान, एमी मागिरे, लीह पॉल, ओर्ला प्रेंडेरगास्ट, उना रेमंड होए, फ्रेया सार्जंट, रेबेका स्टोकेल।   recent visitors 70

आज वानिकी सम्मेलन एवं आईएफएस मीट का शुभारंभ करेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में पं. खुशीलाल आयुर्वेद महाविद्यालय सभागृह नेहरू नगर भोपाल में 10 जनवरी को प्रात: 11 बजे वानिकी सम्मेलन एवं आईएफएस मीट का शुभारंभ होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री श्री दिलीप अहिरवार करेंगे1 कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव वन श्री अशोक वर्णवाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री असीम श्रीवास्तव और आईएफएस अधिकारी उपस्थित रहेंगे।   recent visitors 72

मौसम विभाग ने बताया है कि अगले दो दिनों तक घने से बहुत घना कोहरा जारी रहने वाला है, इस दिन होगी बारिश

लखनऊ यूपी समेत उत्तर भारत में सर्दी का सितम जारी है। मौसम विभाग ने बताया है कि अगले दो दिनों तक घने से बहुत घना कोहरा जारी रहने वाला है। साथ ही, तेज हवाओं की जवह से उत्तर पश्चिम भारत में 10-12 जनवरी के बीच वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर देखा जाएगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में 11 जनवरी को बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पिछले 24 घंटे के मौसम की बात करें तो अंडमान और निकोबार द्वीप में भारी से बहुत भारी बरसात हुई। पूर्वी उत्तर प्रदेश में कोल्ड से लेकर गंभीर कोल्ड डे की स्थिति रही। पंजाब में शीतलहर चली। पंजाब, पूर्वी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मेघालय में बहुत घना कोहरा रहा, जिससे विजिबिलिटी कम होकर 50 मीटर से भी कम हो गई। मौसम विभाग ने बताया है कि वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की वजह से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में 11 और 12 जनवरी को हल्की से मध्यम बारिश होगी। साथ ही, उत्तर पश्चिम भारत और मध्य भारत में 10-12 जनवरी के बीच बरसात होने जा रही है। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश में 11 जनवरी को बारिश होगी। आंधी तूफान का भी अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, दक्षिणी हरियाणा और राजस्थान में 11 जनवरी को ओले गिरने की चेतावनी जारी की गई है। उत्तर भारत के तापमान की बात करें तो जम्मू कश्मीर, लद्दाख में इस समय शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे मिनिमम टेम्प्रेचर चल रहा है। हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा में एक से चार डिग्री के बीच चल रहा है। वहीं, उत्तर पश्चिम भारत और मध्य भारत में न्यूनतम तापमान 5-10 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड किया जा रहा है। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि अगले चार दिनों में उत्तर पश्चिम भारत का न्यूनतम तापमान दो से चार डिग्री सेल्सियस बढ़ने वाला है। हालांकि, उसके बाद फिर से दो से तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी। मध्य भारत में अगले तीन दिनों में न्यूनतम तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होगी और फिर दो डिग्री तक तापमान कम हो जाएगा। पूर्वी भारत में अगले दो दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। महाराष्ट्र और गुजरात में अगले दो दिनों में न्यूनतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होने वाली है। यूपी में घने कोहरे का अलर्ट यूपी के लिए मौसम विभाग का अलर्ट है कि दस जनवरी तक सुबह और शाम के समय घना कोहरा देखने को मिलेगा। साथ ही, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ में 10 जनवरी तक घना कोहरा रहेगा। राजस्थान में 12 जनवरी तक बहुत घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। recent visitors 76

साय मंत्रिमंडल का विस्तार 15 जनवरी तक, छत्तीसगढ़ विधानसभा में भी 14 मंत्री बनाए जा सकते हैं, प्रदेश में तीन नए मंत्री शपथ ले सकते

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार 15 जनवरी तक हो सकता है। चर्चा है कि कैबिनेट विस्तार की घोषणा 12 या 13 जनवरी को हो सकती है। इसके बाद शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है। हरियाणा की तर्ज पर 90 सीट वाली छत्तीसगढ़ विधानसभा में भी 14 मंत्री बनाए जा सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो प्रदेश में तीन नए मंत्री शपथ ले सकते हैं। मंत्रियों के शपथ ग्रहण के बाद प्रदेश भाजपा का समीकरण भी बदलेगा। चर्चा है कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव भी मंत्री बनाए जा सकते हैं। ऐसे में भाजपा संगठन में भी बदलाव देखन को मिल सकता है। मीडिया से चर्चा करते हुए विष्णु देव साय ने कहा कि बहुत जल्द मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। रायपुर पहुंचे भाजपा प्रभारी ने कहा- जल्द होगा विस्तार वहीं रायपुर पहुंचे भाजपा के प्रदेश प्रभारी नितिन नबीन से मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण की तैयारी को लेकर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि जब भी तैयारी होगी, इसकी सूचना आपको पहले होगी और जल्द होगी। 10 जनवरी तक होना है भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव प्रदेश भाजपा ने मंडल अध्यक्ष और जिलाध्यक्षों की नियुक्ति कर ली है। अब 10 जनवरी तक प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त होना है। राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि अगर प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव को मंत्री बनाया गया तो उनकी जगह भाजपा को नया अध्यक्ष मिलेगा। महाराष्ट्र भाजपा के वरिष्ठ नेता विनोद तावडे को छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रदेश अध्यक्ष बनने की दौड़ में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता हैं। इसमें विधायक धरमलाल कौशिक, पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल, दुर्ग के पूर्व सांसद विजय बघेल का नाम चर्चा में है। इसके अलावा पूर्व मंत्री विक्रम उसेंडी और पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा के नाम की भी चर्चा है। पार्टी नेताओं के अनुसार सिंहदेव यदि मंत्री बनाए जाते हैं तो उन्हें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का पद छोड़ना होगा। छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज को साय सरकार ने राज्य मंत्री का दर्जा दिया है। यह दर्जा उन्हें शिष्टाचार के लिए प्रदान किया गया है। इसको लेकर सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश भी जारी किया है। ये प्रमुख मंत्री पद के दावेदार अमर अग्रवाल: बिलासपुर विधानसभा से विधायक हैं। सामान्य वर्ग से आने वाले अग्रवाल पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह सरकार में मंत्री रह चुके हैं। विभाग को संभालने का उनके पास बखूबी अनुभव है। किरण सिंह देव: जगदलपुर के विधायक किरण सिंह देव प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हैं। इनके कार्यकाल में लोकसभा चुनाव में पार्टी को प्रदेश की 11 में से 10 सीटों पर जीत मिली है। बस्तर से बड़ा चेहरा हैं इसलिए उन्हें मौका मिल सकता है। गजेंद्र यादव: दुर्ग शहर के विधायक गजेंद्र यादव की पृष्ठभूमि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से है। वह छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत संघ चालक रहे बिसराराम यादव के बेटे हैं। रायपुर में कई दावेदार: रायपुर में पूर्व मंत्री राजेश मूणत, पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर, विधायक सुनील सोनी, विधायक पुरंदर मिश्रा और विधायक गुरु खुशवंत साहेब का नाम भी मंत्री पद के लिए चर्चा में है। recent visitors 83