पक्षी अवलोकन एवं नेचर कैम्प का आयोजन

भोपाल वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड भोपाल के सहयोग से पक्षी अवलोकन एवं नेचर कैम्प का आयोजन किया गया। कैम्प में वन, वन्य-प्राणियों एवं पर्यावरण के प्रति जागरूकता और संरक्षण की जानकारी साझा की गयी। कैम्प में शासकीय हाई स्कूल, नेहरू नगर, भोपाल के 29 छात्र-छात्राओं एवं एक शिक्षिका ने भाग लिया। नेचर कैम्प में छात्र-छात्राओं को पक्षी दर्शन, तितली, वन्य-जीव दर्शन स्थल पर विद्यमान गतिविधियों की जानकारी दी गयी। कैम्प में वन, वन्य-जीव और पर्यावरण से संबंधित रोचक गतिविधियाँ करायी गयीं। शिविर के दौरान छात्र-छात्राओं को बाघ, तेंदुआ, भालू, मगर, घड़ियाल, चीतल, सांभर, नीलगाय और सर्प इत्यादि वन्य-जीवों का अवलोकन भी कराया गया। छात्र-छात्राओं को पक्षी दर्शन में किंगफिशर, ओपन बिल स्टॉर्क, बुलीनेक स्टॉर्क कॉर्पोरेट, जकाना और कूट इत्यादि पक्षियों तथा नीडम क्षेत्र में कृत्रिम घोंसले और पक्षियों के पुतले भी दिखाये गये। कैम्प में स्रोत व्यक्ति के रूप में सेवानिवृत्त उप वन संरक्षक ए.के. खरे, वन विहार संचालक मीना अवधेश कुमार शिव कुमार, सहायक संचालक वन विहार, संदेश माहेश्वरी और अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।   recent visitors 25

शैक्षणिक भर्मण में बच्चों को आईटीआई कॉलेज, पुलिस थाना व ईंट भट्ठों का कराया भर्मण

पाटी नई शिक्षा नीति-2020 व्यावसायिक शिक्षा अंतर्गत माध्यमिक विद्यालय के बच्चों को एक्सपोजर विजिट के क्रियान्वयन के लिए कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों को व्यवसायिक शिक्षा के तहत कौशल बढ़ाने के लिए स्थानीय लघु उद्योगों का शैक्षणिक भ्रमण व हितग्राहियों से रोजगार मूलको पर चर्चा के उद्देश्य से जनशिक्षा केंद्र स्तरीय एक्सपोजर विजिट का आयोजन किया गया। जिसमें जन शिक्षा केंद्र कन्या उमावि व बालक उमावि पाटी की 12 शालाओं के बालक बालिकाएं शामिल थी। शैक्षणिक भर्मण के दौरान सबसे पहले बच्चों को आईटीआई कॉलेज का भर्मण कराया गया। यहां पर संचालित अलग-अलग ट्रेड के शिक्षकों ने ट्रेड के बारे में जानकारी दी गई। जिसमे कोपा ट्रेड, डीजल मैकेनिक व इलेक्ट्रिशियन ट्रेड समेत अन्य ट्रेड की जानकारी शिक्षकों के द्वारा दी गई। इसके बाद रोसर फाटा पर संचालित ईंट भट्ठे पर पहुँचे यहां पर ईंट भट्ठा संचालक गजु प्रजापत ने ईंट बनाने की विस्तृत जानकारी दी। और कहा कि मिट्टी को ईंट बनाने के लिए जो संघर्ष कुम्हार द्वारा किया जाता हैं इसी प्रकार शिक्षक भी बच्चों को कई संघर्षों के बाद शिक्षित करता है और उसके मंजिल तक पहुँचाता है। यहां पर बच्चों को पुलिस थाना लेकर पहुँचे। यहां पर बच्चों ने शस्त्रागर,रिकॉर्ड रूम,थाना प्रभारी कक्ष, बंदीगृह,हेड मुहर्रिर का भम्रण कर आवश्यक जानकारी प्राप्त की। जिसमें अलग-अलग कक्षों की जानकारी पुलिसकर्मियों ने दी। इसके साथ ही थाना प्रभारी रोहित पाटीदार ने बच्चों को सायबर ठंगी,गुड़ टच बेड टच,यातायात नियम समेत अन्य अपराधों की विस्तृत जानकारी देकर जागरूक किया। ततपश्चात नदी किनारे पर मटके बनाने का कार्य कर परमानंद गोले के यहां पहुँचकर मटके बनाने की विधि जानी। साथ ही उससे होने वाली आय प्राप्ति की भी जानकारी दी गई। आखिरी में कन्या उमावि स्कूल परिसर पहुँचे यहां पर व्यवसायिक पाठ्यक्रम की शिक्षिका सुमन मालवीया ने ब्यूटी एंड हेल्थ वैलनेस की जानकारी दी। और शैक्षणिक भर्मण का समापन किया गया। कार्यक्रम में जनशिक्षा केंद्र प्रभारी मालसिंग चौहान ने आभार प्रकट किया। इस दौरान जनशिक्षा केंद्र के कलस्टर प्रभारी रविकांत त्रिपाठी, फिरोज खान, सहयोगी संतोष देशमुख, शिक्षक महेंद्र, सुनील,मांगीलाल, कमल,वृंदावन,लक्षमी,आशीष समेत अन्य मौजूद थे। recent visitors 25

आज मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों के 7,900 छात्रों को मिलेगी स्कूटी, eBike के लिए मिलेंगे एक लाख 10 हजार

भोपाल प्रदेश के सरकारी स्कूलों के 7,900 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आज स्कूटर प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव सुबह 11 बजे से राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को स्कूटर प्रदान निश्शुल्क प्रदान करेंगे। 12वीं के टॉपर को मिलेंगे स्कूटर कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह एवं जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह भी उपस्थित रहेंगे। शासन की ओर से शैक्षणिक सत्र 2023-24 में सरकारी स्कूलों में 12वीं कक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान पाने वाले छात्र और छात्रा को स्कूटर निश्शुल्क प्रदान किया जाता है। स्कूटर नहीं लेने पर मिलेंगे 95 हजार रुपये इसके लिए विद्यार्थियों को विकल्प भी दिया गया है। अगर कोई विद्यार्थी स्कूटर नहीं लेना चाहता है तो उसे 95 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। अगर कोई ई-स्कूटर लेना चाहता है तो उसे एक लाख 10 हजार रुपये प्रदान किए जाएंगे।   recent visitors 26

कल से भारत और इंग्लैंड के बीच वनडे सीरीज, सीरीज का पहला मैच नागपुर में, कई भारतीय खिलाड़ी वनडे की फॉर्म तलाशेंगे

नई दिल्ली भारत और इंग्लैंड के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज की शुरुआत गुरुवार छह फरवरी से हो रही है। ये सीरीज भारत के लिए चैंपियंस ट्रॉफी के लिहाज से काफी अहम है। इस सीरीज से कई भारतीय खिलाड़ी वनडे की फॉर्म तलाशेंगे क्योंकि टीम इंडिया ने लंबे समय से 50 ओवरों का फॉर्मेट नहीं खेला है। ऐसे में स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा की नजरें एक बड़े रिकॉर्ड पर होंगी। सीरीज का पहला मैच नागपुर में खेला जाना है। मैच में रवींद्र जडेजा खेलेंगे या नहीं इस बात पर संशय है। हालांकि, अगर जडेजा इस मैच में मैदान पर उतरते हैं तो उनके पास इंग्लैंड के महान तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन को पीछे छोड़ने का मौका होगा। बड़े रिकॉर्ड पर नजरें इस सीरीज में जडेजा कुछ रिकॉर्ड अपने नाम कर सकते हैं। जडेजा अगर दो विकेट ले लेते हैं तो वह एंडरसन को पीछे छोड़ देंगे और भारत-इंग्लैंड के बीच खेले गए वनडे मैचों में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन जाएंगे। एंडरसन ने भारत के खिलाफ 31 मैचों में 40 विकेट अपने नाम किए हैं। वहीं जडेजा ने इंग्लैंड के खिलाफ 26 मैचों में 39 विकेट लिए हैं। अगर जडेजा एक विकेट लेते हैं तो एंडरसन की बराबरी कर लेंगे और दो विकेट लेते हैं तो उनसे आगे निकल जाएंगे। तीसरे नंबर पर इस मामले में इंग्लैंड के पूर्व ऑलराउंडर एंड्रयू फ्लिंटॉफ हैं। इस दिग्गज ने भारत के खिलाफ 30 वनडे मैचों में कुल 37 विकेट अपने नाम किए हैं। चौथे नंबर पर भारत के पूर्व ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह का नाम है जिन्होंने 23 मैचों में 36 विकेट झटके हैं। पूर्व तेज गेंदबाज जवागाल श्रीनाथ ने 31 मैचों में 35 विकेट लिए हैं। 600 विकेट के करीब वहीं जडेजा इस सीरीज में भारत के लिए 600 इंटरनेशनल विकेट लेने वाले गेंदबाज भी बन सकते हैं। ऐसा करने से बाएं हाथ का ये स्पिनर सिर्फ तीन विकेट दूर है। जडेजा के अभी 351 मैचों में 597 इंटरनेशनल विकेट हैं। इस मामले में नंबर-1 पर अनिल कुंबले हैं। इस लेग स्पिनर ने 401 मैचों में 953 विकेट लिए हैं। रविचंद्रन अश्विन दूसरे नंबर पर हैं। उनके नाम 287 मैचों में 765 विकेट हैं। हरभजन सिंह के नाम 365 मैचों में 707 इंटरनेशनल विकेट हैं। कपिल देव 356 मैचों में 687 विकेटों के साथ चौथे नंबर पर हैं। उनके बाद फिर जडेजा का नंबर आता है। recent visitors 48

प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिये समाज के सभी वर्गों के बीच कौशल उन्नयन को बढ़ावा देने की जरूरत: मंत्री उदय प्रताप सिंह

भोपाल स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिये समाज के सभी वर्गों के बीच कौशल उन्नयन को बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने आज की जरूरत के मुताबिक ट्रेडों पर कौशल उन्नयन का प्रशिक्षण दिये जाने पर जोर दिया। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री सिंह ने मंत्रालय में अधिकारियों से चर्चा के दौरान यह बात कही। मध्यप्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान के मध्य एमओयू किया गया। एमओयू के बाद प्रदेश में राष्ट्रीय मुक्त शिक्षा संस्थान से 93 प्रकार के कौशल उन्नयन के कोर्स किये जा सकेंगे। एमओयू पर संचालक श्री प्रभात राज तिवारी और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) के सचिव श्री शकील अहमद द्वारा हस्ताक्षर किये गये। कौशल विकास के पाठ्यक्रम शुरू होने से जन-सामान्य और लाड़ली बहना लाभान्वित होंगी। नई शिक्षा नीति-2020 में व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास को मुख्य-धारा में लाने पर जोर दिया गया है। दोनों संस्थान प्रदेश के इच्छुक युवाओं को कम्प्यूटर और इंटरनेट प्लेटफार्म से भी व्यावसायिक शिक्षा का अवसर प्रदान करेंगे। प्रदेश में शैक्षिक पाठ्यक्रम में व्यावसायिक शिक्षा को कक्षा-6वीं से ही शामिल किया जायेगा। इसके बाद इन्हें उच्च शिक्षा से भी जोड़ा जायेगा। महिलाओं के प्रशिक्षण पर जोर दिया जायेगा संस्थान के अधिकारियों द्वारा बताया गया कि लाड़ली बहना से लाभान्वित महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिये उनकी रुचि के अनुसार प्रशिक्षण दिये जाने की व्यवस्था की जायेगी। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान के देशभर में 23 क्षेत्रीय केन्द्र और 7 हजार से अधिक अध्ययन केन्द्र संचालित हो रहे हैं। शिक्षार्थियों को नामांकन करने, परीक्षा लेने और उत्तीर्ण शिक्षार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किये जायेगे। यह प्रमाण-पत्र उन्हें रोजगार दिलाने और स्वयं का रोजगार शुरू करने में मददगार साबित होगा।   recent visitors 25

डिजिटल होगी प्रदेश की आठवीं आर्थिक गणना, योगी सरकार का फैसला

लखनऊ योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पिछले साढ़े सात वर्षों में न केवल कानून व्यवस्था और बुनियादी ढांचे के विकास में बढ़ा है, बल्कि आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में भी अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। सीएम योगी द्वारा प्रदेश को 'वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी' बनाने का लक्ष्य सशक्त उदाहरण है। इसी क्रम में योगी सरकार ने प्रदेश में आठवीं आर्थिक गणना 2025-26 के जरिए प्रदेश के हर तबके तक विकास की रोशनी पहुंचाने का निर्णय लिया है। इसके सटीक आंकड़ों के माध्यम से लोगों का सामाजिक स्तर सुधारने के लिए विभिन्न योजनाएं बनाई जाएंगी, जिसका लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को आठवीं आर्थिक गणना 2025-26 की विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सके। योगी सरकार आर्थिक गणना को केवल डाटा संग्रहण के रूप में नहीं देख रही है, बल्कि इसे ट्रांसफॉर्मेटिव टूल के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है। सीएम योगी के निर्देश पर यह गणना डिजिटल माध्यमों से की जाएगी, जिससे सटीक आंकड़े जुटाए जा सकें। इसके लिए एक वेब-बेस्ड मोबाइल एप्लिकेशन विकसित किया जा रहा है, जो वास्तविक समय में डेटा सत्यापन, निगरानी और विश्लेषण की सुविधा प्रदान करेगा। इससे योगी सरकार को प्रदेश के उद्यमों, स्वरोजगार से जुड़े व्यक्तियों, श्रमिकों और छोटे व्यापारियों की सही स्थिति का आंकलन करने में मदद मिलेगी, जिससे नीति निर्माण और योजनाओं में पारदर्शिता आएगी। आठवीं आर्थिक गणना के लिए लगभग 17,000 गणनाकारों और 6,000 पर्यवेक्षकों को तैनात किया जाएगा। इसके लिए सरकार स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें इस अभियान का हिस्सा बनाएगी। इससे जहां योगी सरकार को सटीक आर्थिक डेटा मिलेगा, वहीं, दूसरी ओर युवाओं को रोजगार और कौशल विकास का अवसर भी प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आर्थिक गणना में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए महिला गणनाकारों की नियुक्ति का भी फैसला लिया है। योगी सरकार महिलाओं को डाटा संग्रहण, तकनीकी प्रशिक्षण और डिजिटल प्लेटफार्म पर काम करने की सुविधा प्रदान कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। योगी सरकार की आर्थिक गणना से उत्तर प्रदेश के छोटे उद्यमियों और व्यापारियों को भी आर्थिक पहचान मिलेगी। यह गणना प्रदेश के सूक्ष्म, लघु, मध्यम-उद्यम (एसएसएमई) को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण प्रयास है। योगी सरकार गणना से प्राप्त डेटा का उपयोग कर सही नीति निर्माण करेगी, जिससे छोटे उद्यमों को वित्तीय सहायता, नए बाजारों तक पहुंच, व्यापार प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग मिल सके। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के छोटे व्यापारियों को समान रूप से लाभ मिलेगा। यह गणना पूरी तरह से डिजिटल होगी, जिससे न केवल कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि डेटा संग्रहण की गति भी तेज होगी। योगी सरकार द्वारा गणना के लिए मल्टी-लेयर मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया जा रहा है। इसमें जिलाधिकारी, जिला सांख्यिकी अधिकारी और आईटी एक्सपर्ट टीम शामिल होंगे। आईटी एक्सपर्ट सिस्टम के जरिए डाटा की गुणवत्ता और सत्यता सुनिश्चित करेंगे। इससे गांव और शहर के बीच का आर्थिक अंतर कम होगा। गांवों में छोटे उद्यमों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिलेगा। शहरी क्षेत्रों में स्टार्टअप और एमएसएमई को सशक्त किया जाएगा, जिससे स्थानीय उत्पादन को बल मिलेगा। आर्थिक नीतियों को समावेशी दृष्टिकोण से तैयार किया जाएगा, जिससे हर नागरिक को लाभ मिल सके। recent visitors 46

अवैध रेत उत्खनन कर नदियों को चीरते हुए रोजाना हजारों ट्रिप खुलेआम निकाली जा रही रेत, कभी भी गिर सकता है करोड़ों की लागत से बना पुल

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में अवैध रेत उत्खनन कर नदियों को चीरते हुए रोजाना हजारों ट्रिप खुलेआम रेत निकाली जा रही है, जिससे शासन को लाखों और करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है. इसके साथ ही लगातार रेत उत्खनन होने के कारण करोड़ों की लागत से बने पुल के गिरने का खतरा भी मंडरा रहा है, जिससे बड़ी जान-माल की हानि हो सकती है. बता दें कि जिले के कोलेबिरा से सिलपहरी मार्ग पर सोन नदी और खुज्जी नदी पर रात-दिन सैंकड़ों की संख्या में ट्रैक्टरों में रेत भर भरकर इन नदियों को रेत माफियाओं ने छलनी तो कर ही दिया है. साथ ही इस मार्ग पर लगभग 5 करोड़ की लागत से बना पुल (ब्रिज), जिसे आवागमन के लिए साल भर पहले ही चालू किया गया था, इसका पिलर क्षतिग्रस्त होने की संभावना है. पुल के आसपास यदि रेत उत्खनन नहीं रोका गया तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं. रेत माफियाओं ने पुल के पिलर के चारों तरफ रेत और मिट्टी निकाल लेने के कारण पुल के फाउंडेशन को कमजोर होने से गिर भी सकता है. यहां के स्थानीय निवासियों द्वारा इस मामले की शिकायत जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी को भी की गई है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि ग्राम कोलबिरा में 2 पुल हैं, जिसमें प्रतिदिन कई व्यक्तियों द्वारा रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है, जिससे पुल गिरने की कगार में है. रेत के उत्खनन से पुल के आसपास बहुत गहराई हो चुकी है, जिसमें गिरकर किसी की भी जान जा सकती है. कलेक्टर से शिकायत कर कार्रवाई करने की शिकायत की गई है. शिकायत पहले भी की जा चुकी है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है और खनिज विभाग चैन की नींद सोया हुआ है. कार्यालय लोक निर्माण विभाग सेतु निर्माण संभाग ने भी कलेक्टर को पत्र लिखकर बताया है कि कोलबिरा सिलपहरी मार्ग पर सोन नदी और खुज्जी नदी पर बने ब्रिज का निरीक्षण अनुविभागीय अधिकारी इंजीनियर के द्वारा किया गया था, जिसमें पाया गया कि पुल UPSTREAM और DOWNSTREAM से 100 मीटर की दूरी पर रेत उत्खनन होना पाया गया है, जिससे पुल की नींव क्षतिग्रस्त हो रही है. पुल के 300 मीटर तक के दायरे में रेत उत्खनन को तत्काल बंद करने के लिए कलेक्टर को कार्रवाई करने की बात कही गई है. recent visitors 24