मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीर सावरकर की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीर विनायक दामोदर सावरकर की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रखर राष्ट्रभक्त वीर सावरकर का जीवन भारतीय समाज के लिए त्याग और तपस्या की अनोखी मिसाल है। भारत की आजादी के कालखंड में वीर सावरकर ने राष्ट्र चेतना के लिए अपने कालजयी विचारों से 'स्व' के भाव की ज्योत जलाई थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीर सावरकर को नमन कर करते हुए कहा कि उनके विचार सदैव देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेंगे।   recent visitors 23

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाकोट एयर स्ट्राइक की 6वीं वर्षगांठ पर भारतीय सेना के पराक्रम को किया नमन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पाकिस्तान के बालाकोट स्थित आतंकी शिविरों पर एयर स्ट्राइक की 6वीं वर्षगांठ पर भारतीय वायुसेना के साहस, शौर्य एवं पराक्रम को नमन किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बालाकोट एयर स्ट्राइक से भारतीय सैनिकों ने, न केवल आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश दिया, बल्कि वैश्विक समुदाय को देश की शक्ति से भी परिचय कराया। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में भारतीय सैनिकों के काफिले पर घातक हमले के बाद वायुसेना के बम वर्षक विमानों ने 26 फरवरी 2019 को एलओसी से सटे आतंकी शिविरों को नेस्तनाबूद किया था।   recent visitors 25

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को महाशिवरात्रि पर्व की शुभकामनाएं दीं

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देवाधिदेव महादेव की आराधना के पावन पर्व महाशिवरात्रि की सभी भक्तजनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि बाबा महाकाल सभी प्रदेशवासियों का कल्याण करें, सबको सुख, शांति और समृद्धि प्रदान कर सभी के जीवन से अंधकार को मिटाकर सद्गुणों से प्रकाशमान बनाएं, यही कामना है।   recent visitors 28

राजस्थान में शिक्षक पात्रता परीक्षा 27 और 28 फरवरी को

राजस्थान राजस्थान में शिक्षक पात्रता परीक्षा (REET) 27 और 28 फरवरी को आयोजित की जाएगी, जिसमें 14 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल होंगे। परीक्षा के लिए प्रदेशभर में 41 जिला मुख्यालयों पर 1,756 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के अनुसार, 27 फरवरी को लेवल-1 और लेवल-2 दोनों की परीक्षा होगी, जबकि 28 फरवरी को केवल लेवल-2 की परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा के लिए लेवल-1 में 3,46,625 उम्मीदवार, लेवल-2 में 9,68,501 उम्मीदवार, और दोनों स्तरों के लिए 1,14,696 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है। REET परीक्षा केवल राजस्थान में आयोजित की जाएगी, लेकिन इसमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब और गुजरात के अभ्यर्थी भी शामिल होंगे। परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी की व्यवस्था की गई है। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और प्रवेश प्रक्रिया परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, जिनमें बायोमेट्रिक उपस्थिति और फेस रिकग्निशन अनिवार्य किया गया है। परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्रों पर दो घंटे पहले पहुंचना अनिवार्य होगा। परीक्षा केंद्र का गेट परीक्षा शुरू होने से एक घंटे पहले बंद कर दिया जाएगा। सुबह 8 से 9 बजे तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिसमें कड़ी जांच की जाएगी। प्रवेश पत्र पर लगी फोटो से मिलान नहीं होने पर गहन जांच की जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो। REET प्रमाण पत्र की वैधता REET परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उम्मीदवारों को राजस्थान में शिक्षक भर्ती परीक्षा या दस्तावेज़ सत्यापन प्रक्रिया में शामिल होना होगा। अंतिम चयन मेरिट लिस्ट और दस्तावेज़ सत्यापन के आधार पर किया जाएगा। परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को आजीवन मान्य REET प्रमाण पत्र दिया जाएगा, जो भविष्य में शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में मान्य रहेगा। इससे अभ्यर्थियों को सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने का अवसर मिलेगा। विशेष परिवहन सुविधाएँ परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए राजस्थान सरकार ने विशेष इंतजाम किए हैं। रोडवेज और रेलवे की ओर से विशेष बसों और ट्रेनों का संचालन किया जाएगा, जिससे उम्मीदवारों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। परीक्षा केंद्रों तक आसानी से पहुंचने के लिए विभिन्न जिलों से अतिरिक्त बस सेवाएँ शुरू की गई हैं। रेलवे भी उम्मीदवारों के लिए परीक्षा तिथियों के अनुसार विशेष ट्रेनों का संचालन करेगा। 2021 की REET परीक्षा में पेपर लीक मामला राजस्थान में REET 2022 परीक्षा 23 और 24 जुलाई को आयोजित की गई थी, जिसमें 46,500 तृतीय श्रेणी शिक्षकों की भर्ती के लिए परीक्षा हुई थी। लेकिन इससे पहले 2021 की REET परीक्षा में बड़े स्तर पर पेपर लीक का मामला सामने आया था। 26 सितंबर 2021 को आयोजित परीक्षा के दौरान गंगापुर सिटी में एक संगठित गिरोह के बारे में सूचना मिली थी। पुलिस जांच में सवाई माधोपुर जिले के कांस्टेबल देवेंद्र सिंह के मोबाइल में 33 हल किए हुए पेपर के फोटो मिले थे। इस मामले में यदुवीर, बत्तीलाल मीना, दिलखुश मीना सहित कई आरोपियों के नाम सामने आए थे। जांच के दौरान पेपर लीक के तार जयपुर स्थित शिक्षा संकुल तक जुड़े पाए गए थे, जिसके बाद सरकार ने परीक्षा सुरक्षा के इंतजाम और अधिक कड़े कर दिए हैं।   recent visitors 56

विजयवर्गीय जी आप कहां जा रहे हैं? अमित शाह के फोन मिलाते ही दौड़े आए मंत्री; MP में सियासी पारा बढ़ा

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में दो दिनों तक चले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 के समापन समारोह में शामिल होने पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कार्यक्रम खत्म होने के बाद इंदौर के लिए रवाना हुए। सूत्रों के मुताबिक इस दौरान उन्होंने नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बारे में पूछा, तब उन्हें बताया गया कैलाश विजयवर्गीय इंदौर निकल चुके हैं। इसके बाद अमित शाह का कॉल कैलाश विजयवर्गीय के पास पहुंचा तब तक कैलाश भोपाल से काफी दूर निकल चुके थे। लेकिन अमित शाह का कॉल आने के तत्काल बाद वह वापस स्टेट हैंगर लौटे। इस दौरान उनकी अमित शाह से शॉर्ट मीटिंग भी हुई। बताया जा रहा है अमित शाह ने केंद्रीय राजनीति में उनसे मुलाकात कर नाराजगी की तमाम अटकलें को भी खारिज किया है और संदेश देने की कोशिश भी की है। कैलाश विजयवर्गीय को बुलाया अमित शाह मंगलवार शाम करीब 6 बजे स्टेट हैंगर पहुंचे। BJP के कार्यकर्ता उन्हें विदा करने के लिए इंतज़ार कर रहे थे। लेकिन गृह मंत्री अमित शाह जाने की बजाय VIP लाउंज में चले गए। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय को ढूंढा। विजयवर्गीय, जो पहले BJP के राष्ट्रीय महासचिव भी रह चुके हैं, शाह के संगठनात्मक टीम का हिस्सा थे। जब शाह BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। अगस्त 2015 में शाह ने ही विजयवर्गीय को पश्चिम बंगाल का प्रभारी राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया था। उज्जैन के रास्ते में थे कैलाश विजयवर्गीय वहीं, जब अमित शाह का संदेश कैलाश विजयवर्गीय तक पहुंचा तो वह उज्जैन के रास्ते में थे। उन्हें एक पार्टी कार्यकर्ता की शादी में शामिल होना था। और फिर महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि का उत्सव मनाना था। वह भोपाल के बाहरी इलाके में पहुंच चुके थे। लेकिन शाह के फोन के बाद, उन्होंने अपने ड्राइवर को स्टेट हैंगर जाने का निर्देश दिया। इस बीच, शाह VIP लाउंज में विजयवर्गीय का इंतजार कर रहे थे। विजयवर्गीय के पहुंचते ही दोनों नेताओं ने लगभग 20 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत की। कैलाश विजयवर्गीय की होगी संगठन में वापसी इस मुलाकात के बाद, राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि विजयवर्गीय को प्रदेश BJP अध्यक्ष पद के लिए दावेदार माना जा रहा है। एक वरिष्ठ BJP पदाधिकारी ने बताया कि एमपी के दो नेता अमित शाह के करीबी माने जाते हैं कैलाश विजयवर्गीय और नरोत्तम मिश्रा। मिश्रा 2023 के विधानसभा चुनाव हारने के बाद से सक्रिय नहीं हैं। और विजयवर्गीय, जिन्होंने बंगाल में BJP को एक विकल्प के रूप में स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई, राज्य में वापस आकर केवल कैबिनेट मंत्री बनने से असंतुष्ट हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर अटकलें कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि अगले महीने BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होना है। क्या विजयवर्गीय प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में हैं या राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की? या फिर वह सिर्फ राजनीतिक फीडबैक ले रहे थे? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। और विजयवर्गीय भी इस बारे में कुछ नहीं कह रहे हैं। जल्द होने वाले हैं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव GIS के बाद, राज्य का अगला बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम प्रदेश BJP अध्यक्ष का चुनाव है। वर्तमान अध्यक्ष वीडी शर्मा का कार्यकाल इस महीने की शुरुआत में पूरा हो गया है। एक पार्टी पदाधिकारी ने बताया कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, जिन्हें प्रदेश अध्यक्ष चुनाव का प्रभार दिया गया है, 1 मार्च को भोपाल आ सकते हैं। वे 413 पार्टी प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। ये प्रतिनिधि ही अगले प्रदेश BJP अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति मार्च के पहले हफ्ते के अंत तक होने की उम्मीद है। कई सवाल खड़े हो रहे अचानक हुई मुलाकात ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वाकई विजयवर्गीय को कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलने वाली है? क्या यह मुलाकात मध्यप्रदेश की राजनीति की दिशा बदल देगी? आने वाला समय ही इन सवालों का जवाब देगा। सरकार में शामिल होने से खुश नहीं? कथित तौर पर यह चर्चा होती है कि कैलाश विजयवर्गीय सरकार में खुद को असहज महसूस करते हैं। साथ ही कुछ चीजों को लेकर उनकी असहमति भी रहती है। यह जानकारी आलाकमान तक पहुंची थी। शायद यही वजह रही कि अमित शाह ने उन्हें मिलने के लिए बुलाया है। ऐसे में अनुमान यह भी है कि उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि कैलाश विजयवर्गीय ने इस मुलाकात पर चुप्पी साध रखी है। मुलाकात के बाद बुधवार की सुबह उन्होंने महाकाल मंदिर जाकर अपने परिवार के साथ पूजा की है। 20 मिनट तक बंद कमरे में हुई बैठक बताया जा रहा है कि जब अमित शाह ने फोन किया तो उस समय विजयवर्गीय पार्टी कार्यकर्ताओं की शादी में शामिल होने और महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि उत्सव में भाग लेने के लिए उज्जैन की तरफ जा रहे थे। वह भोपाल के आउटर इलाके में पहुंच चुके थे लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री का फोन आने पर उन्‍होंने अपने ड्राइवर को वापस स्टेट हैंगर की ओर जाने का आदेश दिया। सूत्रों के मुताबिक, यहां पहुंचने के बाद दोनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनट तक बंद कमरे में बैठक हुई। अमित शाह के फोन से राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा बता दें कि अमित शाह की एक कॉल और अचानक से हुई इस मुलाकात ने राज्‍य के राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू कर दी है। सूत्र बता रहे हैं कि शाह ने खुद विजयवर्गीय को स्‍पेशली फोन कॉल किया, जिसके बाद उन्‍होंने अपनी कार वापसी दिशा में दौड़ा दी और यह मीटिंग हुई। इसके बाद चर्चा शुरू हो गई कि जीआईएस खत्म होने के बाद मध्य प्रदेश में क्‍या कोई अगला बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम होने वाला है। recent visitors 92

सीएम अब्दुल्ला ने भी माना अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद राज्य में अलगाववादी गतिविधियों में कमी आई

श्रीनगर  जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने भी मान लिया है कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद राज्य में अलगाववादी गतिविधियों में कमी आई है। उन्होंने मीडिया चैनल से बातचीत में उमर अब्दुल्ला ने कहा कि 2019 में जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने के बाद अलगाववादी राजनीति कमजोर हुई है, इसे कोई नकार नहीं सकता। हुर्रियत चेयरमैन मीरवाइज उमर फारूक को सीआरपीएफ सुरक्षा कवर मिलना पहले असंभव था, यह इस बदलाव का एक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि अगर अलगाववादी राजनीति कमजोर हुई है, तो इसका मतलब है कि स्थिति में सुधार हुआ है। हालांकि उनके इस बयान के बाद जम्मू-कश्मीर में अलग ही विवाद शुरू हो गया है। सज्जाद लोन बोले, अब्दुल्ला के पास सबसे बड़ी सिक्युरिटी पिछले साल 16 अंक्टूबर को उमर अब्दुल्ला ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। सत्ता में बैठने के चार महीने बाद उमर अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद हुए बदलावों पर चर्चा की। अब्दुल्ला ने कहा कि 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों में कमी आई है। उन्होंने कहा कि क्या आपने कभी सोचा था कि मीरवाइज को केंद्र से सीआरपीएफ सुरक्षा मिलेगी? मैं तो नहीं सोच सकता था, लेकिन हालात बदल गए हैं। अब अब्दुल्ला के इस बयान पर खूब बवाल मचा है। पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन ने भी उमर को निशाने पर लेते हुए कहा कि मीरवाइज की सुरक्षा का जिक्र करने वाले भूल जाते हैं कि उनके पास सबसे बड़ा सुरक्षा घेरा रहा है। लोन ने अब्दुल्ला के बयान को जानलेवा तक कह दिया। मीरवाइज को ही उमर अब्दुल्ला ने क्यों बनाया निशाना हुर्रियत नेता मीरवाइज के ऑफिस ने उमर अब्दुल्ला के बयान को बेतुका और घटिया बताया है। इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान उनके अंदर की असुरक्षा को दिखाता है। पीडीपी एमएलए वहीद पारा ने भी एक्स पर लिखा कि मीरवाइज को अलग से निशाना बनाना उन्हें और खतरे में डालता है। यह जानते हुए भी कि उनके परिवार ने पहले ही भारी कीमत चुकाई है। सच्चाई यह है कि सैकड़ों अन्य लोगों की तरह, कब्रों, मंदिरों और मस्जिदों की भी जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की सुरक्षा की जाती है। तो अगर मीरवाइज की सुरक्षा हो रही है तो इसे मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है? वहीद पारा ने कहा कि कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों और एनआईए की कड़ी कार्रवाई के कारण है, न कि अलगाव वादियों के कमजोर होने के कारण। पहले भी केंद्र सरकार की तारीफ कर चुके हैं सीएम 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को रद्द करने का फैसला लिया था। सरकार ने एक राष्ट्रपति अध्यादेश जारी किया, जिसने जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा छीन लिया और अनुच्छेद 35A को निरस्त कर दिया। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक भी राज्यसभा में पारित किया गया था। इसके बाद उमर अब्दुल्ला और उनकी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस समेत जम्मू-कश्मीर के सभी क्षेत्रीय दलों ने 370 हटाने का विरोध किया था। अक्टूबर 2024 में पहली बार केंद्रशासित प्रदेश में चुनाव हुए, जिसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस को बड़ी जीत मिली थी। उमर अब्दुल्ला पिछले चार महीने से सीएम हैं। कुर्सी संभालने के बाद वह कई मुद्दों को लेकर अमित शाह से मिले थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में नए कानूनों का क्रियान्वयन की तारीफ की थी। recent visitors 67

केदारनाथ धाम के कपाट इस दिन खुलेंगे, तारीख आई सामने, तैयारी तेज

देहरादून चार धाम यात्रा (Chardham Yatra 2025) सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है. जिसमें बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम शामिल हैं. यह यात्रा न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है, बल्कि पवित्र गंगा और हिमालय की दिव्यता से भक्तों को एक अद्भुत अनुभव भी देती है. इस बीच चारधाम यात्रा 2025 (Chardham Yatra 2025) की शुरुआत 30 अप्रैल से होने जा रही है. वहीं केदारनाथ (Kedarnath Yatra 2025) धाम के कपाट खुलने की तारीख भी सामने आ गई है. 30 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे. इसके बाद, केदारनाथ धाम (Kedarnath Yatra 2025) के कपाट 2 मई (प्रात: 7 बजे) और बद्रीनाथ धाम के कपाट 4 मई को खुलेंगे. यह तीर्थयात्रा लगभग 6 महीने तक चलेगी. यात्रा की शुरुआत यमुनोत्री धाम से होती है, जो माता यमुना को समर्पित है. यहां के गर्म जलकुंड में स्नान करना शुभ माना जाता है. केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि घोषित: केदारनाथ धाम के रावल पंडित भीमशंकर लिंग ने गणना करके घोषणा की कि चारधाम यात्रा 2025 के लिए केदारनाथ धाम के कपाट 2 मई की प्रातः 7 बजे वृष लग्न में खुलेंगे. 2024 की चारधाम यात्रा संपन्न होने के बाद से बाबा केदारनाथ की उत्सव डोली उनके शीतकालीन गद्दीस्थल ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में है. इन दिनों ओंकारेश्वर मंदिर में ही बाबा केदार के दर्शन हो रहे हैं. 12 ज्योतिर्लिंगों में है केदारनाथ धाम: गौरतलब है कि केदारनाथ धाम 12 ज्योतिर्लिंगों में आता है. बाबा केदार का ये धाम उत्तराखंड के चार धामों में से एक है. केदारनाथ को पंच केदार में प्रथम पूज्य माना जाता है. शीतकाल में केदारनाथ धाम में बर्फबारी होने के कारण इसके कपाट 6 महीने के लिए बंद हो जाते हैं. शीतकालीन पूजा-अर्चना ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में होती है. आज महाशिवरात्रि पर्व पर केदारनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि घोषित की गई है. 4 मई को खुलेंगे बदरीनाथ धाम के कपाट: इससे पहले बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि घोषित हो चुकी है. बदरीनाथ धाम के कपाट 4 मई के ब्रह्ममुहूर्त में सुबर 6 बजे खुलने हैं. बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर नरेंद्रनगर (टिहरी) स्थित राजदरबार में की गई थी. वहीं 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे. गंगोत्री और यमुनोत्री धाम उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में हैं. इसके बाद गंगोत्री धाम आता है, जहां से गंगा नदी का उद्गम होता है. तीसरा पड़ाव केदारनाथ धाम है, जो भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. यहां पहुंचने के लिए कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है. अंतिम पड़ाव बद्रीनाथ धाम है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है और मोक्ष प्राप्ति का द्वार माना जाता है. recent visitors 57