Friday, July 10, 2026 10:01 am

गोधरा दंगों का कारण बने साबरमती एक्सप्रेस अग्निकांड को लेकर टिप्पणी की, राजा भैया बोले- जुड़ेंगे तभी बचेंगे

नई दिल्ली यूपी की कुंडा सीट के विधायक राजा भैया अकसर सामाजिक मुद्दों पर भी बेबाकी से राय रखते हैं। अब उन्होंने गोधरा दंगों का कारण बने साबरमती एक्सप्रेस अग्निकांड को लेकर टिप्पणी की है। उन्होंने 27 फरवरी को एक्स पर पोस्ट किया कि आज ही के दिन साबरमती एक्सप्रेस में राम भक्तों को जिंदा जला दिया गया था। यह नहीं उन्होंने लिखा कि इन लोगों को जिंदा जलाने से पहले किसी ने यह नहीं पूछा था कि वे अगड़े हैं या फिर पिछड़े हैं। रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने एक नारा भी दिया और लिखा- जुड़ेंगे तभी बचेंगे। यह नारा सीएम योगी आदित्यनाथ जैसा ही है, जिसमें उन्होंने कहा था- बंटोगे तो कटोगे। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में इस नारे का काफी असर हुआ था। ऐसा ही एक नारा पीएम नरेंद्र मोदी भी दिया था- एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे। अब राजा भैया ने भी उसी तर्ज पर अपनी बात कही है। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘गोधरा शब्द सभी को याद होगा लेकिन ‘साबरमती एक्सप्रेस’ की चर्चा कम ही होती है। आज वही दुखद दिन है, जिस दिन सन 2002 में साबरमती एक्सप्रेस में राम भक्तों को ज़िंदा जला दिया गया था, उनका अपराध ये था कि वे अयोध्या से अपने आराध्य श्री राम लला सरकार के दर्शन करके लौट रहे थे। नारी, पुरुष, बच्चे बच्चियां किसी को नहीं छोड़ा गया। पेट्रोल डालकर उन्हें जीवित जला दिया गया, विश्व के इतिहास में किसी भी राष्ट्र में अल्पसंख्यकों द्वारा बहुसंख्यक समाज का इस प्रकार निर्मम, क्रूर नरसंहार का कोई दूसरा उदाहरण हो तो बताएं अवश्य। और हां कृपया विचार करें कि उन्हें ज़िंदा जलाने के पहले क्या उनसे पूछा गया था कि वे अगड़ा, पिछड़ा या दलित हैं? याद रहे जुड़ेंगे तभी बचेंगे।’ राजा भैया ने कुंभ में हिंदू समाज की एकता को लेकर टिप्पणी की थी, जो वायरल हो गई थी। उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी के भाई अकबरुद्दीन की एक टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा था कि जैसे हालात हैं, उसमें यदि 15 मिनट के लिए पुलिस हटा दी जाए तो आधे हिंदू ही बचेंगे। उनका कहना था कि हिंदू समाज में शस्त्र रखने की परंपरा खत्म हो रही है और लोग अपनी रक्षा के लिए भी तैयार नहीं हैं। उनका कहना था कि हमें अपनी सामाजिक एकता की रक्षा करनी है और आध्यात्मिक साधना के साथ राष्ट्र का विकास भी करना है। राजा भैया अकसर विधानसभा में भी सामाजिक एकता के विषय पर बोलते रहे हैं। recent visitors 35

भारत ने विज्ञान के क्षेत्र में गढ़े हैं नए कीर्तिमान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विज्ञान के आधार पर व्यवस्थित कार्यप्रणाली, जिज्ञासु प्रवृत्ति को प्रोत्साहन और नवीनतम तकनीकों के उपयोग ने देश को विश्व के शीर्ष राष्ट्रों में गिने जाने का मार्ग प्रशस्त किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन से ही यह उपलब्धि संभव हो पाई है। राज्य सरकार शिक्षा सहित शासकीय कार्य प्रणाली और सामान्य व्यवस्थाओं के संचालन में विज्ञान का अधिक से अधिक उपयोग कर आम आदमी के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर "विकसित भारत के लिए विज्ञान और नवाचार में वैश्विक नेतृत्व में भारतीय युवाओं को सशक्त बनाने" की थीम पर भोपाल में विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों और युवाओं को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके पूर्व उन्होंने नोबल पुरूस्कार से सम्मानित महान वैज्ञानिक श्री सीवी रमन की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर "सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्टेम एजुकेशन" का विज्ञान भवन में शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सेंटर में प्रस्तुत मॉडल तथा विद्यार्थियों को विज्ञान के विभिन्न सिद्धांत, सरलता से समझाने में सहायक उपकरणों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए मॉडल और नवाचारों के संबंध में उनसे चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एक पेड़ माँ के नाम के अंतर्गत वृक्षारोपण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टीकमगढ़ से आए प्रगतिशील कृषक श्री पूरनलाल कुशवाहा से भेंट कर उनके द्वारा सिंचाई के लिए विकसित किए गए पवन और पानी से चलने वाले पंप का अवलोकन कर जानकारी भी प्राप्त की। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक श्री अशोक कड़ेल, निदेशक विक्रमादित्य शोधपीठ तथा मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्री श्रीराम तिवारी, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फसल बीमा के लिए क्षमता विकास कार्यक्रम, 13वें मध्यप्रदेश कारीगर विज्ञान सम्मेलन, विज्ञान मंथन यात्रा, उद्यमिता विकास कार्यक्रम, विक्रमोत्सव-2025 के अंतर्गत राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन और विज्ञान उत्सव तथा पेटेंट और प्रौद्योगिकी आधारित प्रशिक्षण व केंद्र स्थापना पर विकसित पोस्टरों का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद तथा वीआईटी भोपाल के मध्य अकादमिक और वैज्ञानिक क्षेत्र में परस्पर सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी की पत्रिका "रचना" का भी विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत का स्वर्णिम काल चल रहा है। भारत ने विज्ञान के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नए कीर्तिमान गढ़े हैं, जिसमें कोविड के दौर में टीकाकरण और डिजिटल पेमेंट्स जैसे अनेकों नवाचार और व्यवस्थाएं शामिल हैं। कोविड काल में अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देशों में व्यवस्थाएं प्रभावित हुई, लेकिन भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश में यही कार्य बड़ी ही निपुणता और प्रतिबद्धता से पूर्ण किया गया। भारत में जिज्ञासा और विज्ञान के आधार पर व्यवस्थाओं के विकास की प्राचीन परंपरा रही है। पश्चिम में दूरबीन के अविष्कार के पहले से भारत में नवग्रह की पूजा की जाती रही है। भारत ने विश्व में सबसे पहले खगोल विज्ञान के अनेकों सिद्धांतों को प्रतिपादित किया। भगवान श्रीकृष्ण ने 'यत पिंडे-तत् ब्रह्माण्डे' के माध्यम से सृष्टि और मानव शरीर की एकरूपता का संदेश दिया। इसी प्रकार चरैवेति-चरैवेति में समय की निरंतरता का बोध होता है। गुरुत्वाकर्षण का नियम भी प्राचीन भारतीय शास्त्रों में निहित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ब्रह्माण्ड में कई रहस्य बिखरे हुए है, इन्हें खोजना और समस्याओं का हल करना ही विज्ञान है। महान भारतीय वैज्ञानिक श्री चंद्रशेखर वेंकट (सीवी) रमन ने 28 फरवरी 1928 को रमन प्रभाव की खोज की थी। इसीलिए इस दिन को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय ज्ञान परंपरा और भारत में विकसित खगोल शास्त्र के विभिन्न सिद्धांतों पर विद्यार्थियों से संवाद किया।   recent visitors 33

महतारी वंदन योजनाः आर्थिक तंगी से आत्मनिर्भरता तक का सफर

 रायपुर  सुशासन का मूल उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुँचाना होता है। जब कोई नीति या योजना समाज के वंचित वर्गों तक प्रभावी ढंग से पहुँचती है, तो उसका असर न केवल एक व्यक्ति बल्कि पूरे समुदाय पर पड़ता है। ऐसी ही एक पहल “महतारी वंदन योजना“ ने महासमुंद जिले के सिरपुर क्षेत्र की कमार जनजातीय महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता और सशक्तिकरण की नई राह दिखाई है।          सिरपुर की रहने वाली  केंवरा कमार पहले परंपरागत बांस शिल्प कारीगरी पर निर्भर थीं। यह उनकी आजीविका का मुख्य साधन था, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उनका व्यवसाय ठप पड़ गया था। सीमित संसाधनों और बाजार में प्रतिस्पर्धा के कारण उनके लिए गुजारा करना मुश्किल हो रहा था। मगर महिला एवं बाल विकास विभाग से 1000 रुपये प्रतिमाह की सहायता राशि मिलने के बाद उनकी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया। इस आर्थिक सहयोग से उन्होंने बांस, रस्सी और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदनी शुरू की, इससे उनका व्यवसाय फिर से अच्छा चल रहा है, और अब वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने में सक्षम हो रही हैं। इसी तरह सिरपुर की ही रहने वाली भामिनी गोस्वामी इस योजना का लाभ उठाकर अपनी बेटी टांसी गोस्वामी के भविष्य को संवार रही हैं। हर माह मिलने वाली 1000 रुपये की सहायता राशि को वे सुकन्या समृद्धि योजना में जमा कर रही हैं। यह छोटी-सी बचत उनकी बेटी के लिए एक मजबूत आर्थिक संबल बन रही है, जो आगे चलकर उसकी उच्च शिक्षा और विवाह में सहायक सिद्ध होगी। भामिनी कहती हैं, “पहले हमारे पास इतनी बचत नहीं होती थी कि हम अपनी बेटी के भविष्य के बारे में सोच सकें, लेकिन महतारी वंदन योजना ने हमें यह अवसर दिया है कि हम अपने बच्चों को एक सुरक्षित और उज्जवल भविष्य दे सकें।“ महतारी वंदन योजना केवल एक आर्थिक सहायता योजना भर नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण का आधार भी बन रही है। खासकर दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों की महिलाओं के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं। recent visitors 45

मछली पकड़ने वाली अब करेंगी देश की सेवा, इंडियन नेवी में हुआ चयन

खंडवा कहते हैं समय से बड़ा कोई बलवान नहीं होता। अगर मेहनत और लगन सच्ची हो तो वक्त बदलते देर नहीं लगती। कुछ ऐसा ही मध्य प्रदेश के खंडवा में देखने को मिला। जहां पुनासा तहसील में रहने वाली एक बेटी, जो नर्मदा नदी पर बने इंदिरा सागर बांध के बैकवाटर में पिता का कर्ज उतारने के लिए मछली पकड़ने का काम करती थी अब वो देश की सेवा करेगी। उनका चयन खिलाड़ी कोटे से इंडियन नेवी में हो गया है। चयन के बाद अपने माता-पिता से मिलने अपने गांव पहुंची, जहां उसका ग्रामीणों ने स्वागत किया। यह है कामयाबी की कहानी खंडवा जिले के सिंगाजी गांव में नाव चला कर पिता के साथ मछली पकड़ने वाली कावेरी डिमर की कहानी 2016 में शुरू हुई। खंडवा जिले के तत्कालीन स्पोर्ट्स ऑफिसर जोसेफ बक्सला ने उसे नाव चलाते हुए पहली बार देखा तो कावेरी और उसकी दो अन्य बहनों को वाटर स्पोर्ट्स अकादमी भोपाल में भेज दिया। भोपाल अकादमी में विदेशी खेल कैनोइंग में कावेरी ने महारत हासिल की। कावेरी ने मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। कावेरी ने एशियन चैंपियनशीप थाइलैंड में ब्रांज मेडल, एशियन गेम चाइना, वर्ल्ड चैंपियनशीप जर्मनी, एशियन चैंपियनशीप एंड ओलंपिक क्वालिफायर जापन, एशियन चैंपियनशीप उजबिकीस्तान, यू-23 एशियन चैंपियनशीप थाईलेंड में भी हिस्सा लिया। नेशनल चैंपियनशीप में 45 गोल्ड, 6 सिल्वर व 3 ब्रांज मेडल जीते। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उसे 11 लख रुपए का इनाम दिया था।   गरीबी में बचपन बीता कावेरी का बचपन गरीबी में बीता। यही नहीं पिता के बिछाए जाल से मछलियां भी बिनती थी। पिता का 40 हजार रुपए का कर्ज उतारने के लिए कावेरी बैकवाटर में नाव चलाने लगी। पिता रात में जाल बिछाते तीनों बहनें सुबह जाकर जाल से मछली निकालती और ठेकेदार को दें आती। ऐसा रोजाना कर उन्होंने पिता का कर्ज उतारने में मदद की। छोटी सी उम्र में न सिर्फ अपने पिता के कर्ज को दूर किया, बल्कि परिवार का पालन पोषण भी किया। नाव चलाने में महारत हासिल होने के कारण ही वॉटर स्पोर्ट्स अकादमी भोपाल में उसका चयन हो गया। इंडियन नेवी ज्वाइन करने के बाद पहली बार जब बेटी घर लौटी तो माता-पिता को यकीन नहीं हो रहा था कि उनकी बेटी इस मुकाम पर पहुंच गई। माता-पिता ने बेटी को तिलक लगाकर सम्मान किया ग्रामीणों ने भी कावेरी की कामयाबी पर बधाई दी और सम्मान भी किया। मां ने कहा बेटी ने हमारा कर्ज उतार दिया तो पिता ने कहा वह पढ़ाई के साथ-साथ मेरा सहयोग भी करती थी। recent visitors 30

National Science Day :बच्चों व युवाओं को विज्ञान-तकनीकी शिक्षा से जोड़ना होगा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर सभी को बधाई दी। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि विज्ञान के प्रति उत्साहपूर्ण भाव रखने वाले लोगों, विशेषकर हमारे युवा अन्वेषकों को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की बधाई। आइए विज्ञान और नवाचार को लोकप्रिय बनाते की दिशा में कार्य करते रहे और एक विकसित भारत के निर्माण के लिए विज्ञान का लाभ उठाते रहें। इस महीने के मन की बात के दौरान, 'एक वैज्ञानिक के रूप में एक दिन' कार्य करने के बारे में बात की थी जहां युवा किसी न किसी वैज्ञानिक गतिविधि में भाग लेते हैं। इससे पहले 23 फरवरी को मन की बात के अपने 119वें एपिसोड में पीएम मोदी ने कहा था कि वह बच्चों और युवाओं में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा पैदा करेंगे। आने वाले दिनों में हम राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाएंगे। हमारे बच्चों और युवाओं की विज्ञान में रुचि और जुनून बहुत मायने रखता है। इसके लिए मेरे पास एक विचार है, जिसे आप 'वन डे एज ए साइंटिस्ट' कह सकते हैं।  यानी आपको एक दिन वैज्ञानिक के तौर पर बिताने की कोशिश करनी चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि आप अपनी सुविधा और पसंद के हिसाब से कोई भी दिन चुन सकते हैं। उस दिन आपको किसी रिसर्च लैब, प्लेनेटेरियम या स्पेस सेंटर में जाना चाहिए। इससे विज्ञान के प्रति आपकी जिज्ञासा बढ़ेगी। बता दें कि 1986 में भारत सरकार ने 'रमन प्रभाव' की खोज की घोषणा के उपलक्ष्य में 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में नामित किया। यह पदार्थ द्वारा प्रकाश के अप्रत्यास्थ प्रकीर्णन को संदर्भित करता है, जिसके परिणामस्वरूप प्रकीर्णित प्रकाश की आवृत्ति में बदलाव होता है। सरल शब्दों में, यह प्रकाश की तरंगदैर्घ्य में परिवर्तन है जो तब होता है जब प्रकाश किरण अणुओं द्वारा विक्षेपित होती है। रमन प्रभाव रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी का आधार बनता है, जिसका उपयोग रसायनज्ञों और भौतिकविदों द्वारा पदार्थों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जाता है। स्पेक्ट्रोस्कोपी पदार्थ और विद्युत चुम्बकीय विकिरण के बीच परस्पर क्रिया का अध्ययन है। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस रोजमर्रा की जिंदगी में विज्ञान के महत्व को बढ़ावा देने और मानवता की बेहतरी के लिए वैज्ञानिक क्षेत्र में विभिन्न गतिविधियों, प्रयासों और उपलब्धियों को उजागर करने के लिए मनाया जाता है। इस उत्सव का उद्देश्य मुद्दों को संबोधित करना, नवीन तकनीकों को पेश करना और विज्ञान में विकास को बढ़ावा देना है। यह भारत में वैज्ञानिक सोच वाले व्यक्तियों के लिए एक मंच प्रदान करता है,जो जनता के बीच विज्ञान और प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहित और लोकप्रिय बनाता है। बच्चों व युवाओं को विज्ञान-तकनीकी शिक्षा से जोड़ना होगा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक सर चंद्रशेखर वेंकटरामन की खोज रामन प्रभाव को समर्पित है. वर्ष 1928 में उन्होंने प्रकाश किरण के फैलने की एक घटना ‘रामन प्रभाव’ की खोज की थी. दो वर्ष बाद 1930 में इस खोज के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर युवाओं को विज्ञान में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता है. इस वर्ष का राष्ट्रीय विज्ञान दिवस इसलिए भी खास है, क्योंकि एआइ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के प्रोत्साहन और विजन से विकसित भारत, 2047 के अंतर्गत युवाओं को विज्ञान शिक्षा के लिए प्रेरित किया जा रहा है. इस बार विज्ञान दिवस का विषय है- विकसित भारत के लिए विज्ञान और नवाचार में वैश्विक नेतृत्व के लिए भारतीय युवाओं को सशक्त बनाना. इसके तहत बच्चों और युवाओं को विज्ञान व तकनीकी शिक्षा की ओर उन्मुख करना जरूरी होगा. वर्ष 2023 में अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की गयी, जिसका उद्देश्य वैश्विक वैज्ञानिक और तकनीकी उत्कृष्टता हासिल करने के लिए युवाओं को अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रेरित करना है. इसके तहत युवा शोधकर्ताओं को विज्ञान व प्रौद्योगिकी संस्थान में शोध करियर प्रारंभ करने में मदद के लिए प्रधानमंत्री प्रारंभिक करियर अनुसंधान अनुदान (पीएम इसीआरजी) कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है. वैश्विक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सूचकांक में भारत की रैंकिंग लगातार सुधर रही है. ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स, 2024 में शीर्ष नवोन्मेषी अर्थव्यवस्थाओं में भारत ने 39वां स्थान हासिल किया है. डब्ल्यूआइपीओ रिपोर्ट 2023 के अनुसार, भारत बौद्धिक संपदा फाइलिंग के मामले में छठे स्थान पर है. नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स, 2024 में भारत 49 वें स्थान पर पहुंच गया, जबकि 2019 में वह 79वें स्थान पर था. यह इंडेक्स विश्व की 133 अर्थव्यवस्थाओं में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग और प्रभाव पर अग्रणी वैश्विक सूचकांकों में एक है. देश में ‘इंस्पायर कार्यक्रम’ नाम से योजना चलायी जा रही है, जिसका उद्देश्य बुनियादी व प्राकृतिक विज्ञान का अध्ययन करने के लिए मेधावी युवाओं को आकर्षित करना है. वर्ष 2024 में करीब 38,000 इंस्पायर स्कॉलर्स, फेलो और फैकल्टी फेलो को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में चुना गया. विदेश में रह रहे भारतीय वैज्ञानिकों के लिए वैश्विक भारतीय वैज्ञानिक (वैभव) फेलोशिप कार्यक्रम शुरू किया गया है. विज्ञान और अभियांत्रिकी में महिलाओं की भागीदारी के लिए किरण योजना और अंतरराष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में अनुसंधान प्रशिक्षण के लिए महिला अंतरराष्ट्रीय अनुदान सहायता जैसे कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं. अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत विश्व के शीर्ष देशों में है. चंद्रयान और आदित्य-एल1 मिशन के बाद इस साल व्योममित्र नामक महिला रोबोट गगनयान मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्री जैसे कार्य करेगी. वर्ष 2026 में पहला मानवयुक्त गगनयान मिशन शुरू होगा, जबकि 2035 में भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन भारत अंतरिक्ष केंद्र स्थापित करने और 2047 में चंद्रमा पर पहला भारतीय अंतरिक्ष यात्री उतारने का लक्ष्य है. इसरो एक बार में 104 उपग्रह प्रक्षेपित करने का रिकॉर्ड बना चुका है और पिछले 10 साल में 460 उपग्रह प्रक्षेपित किये गये हैं. भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र महत्वपूर्ण विदेशी मुद्रा अर्जक के रूप में उभरा है. विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण से अर्जित 22 करोड़ यूरो में से 18.7 करोड़ यूरो पिछले आठ वर्षों में अर्जित किये गये हैं. आज अंतरिक्ष क्षेत्र के स्टार्टअप 300 से अधिक हैं, जो चार वर्ष पूर्व तीन-चार ही हुआ करते थे. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के साथ एआइ एक्शन शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करते हुए कहा कि ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और बहुत-सी चीजों को बेहतर बना कर लाखों लोगों का जीवन बदलने में मदद … Read more

फराह ने मिस्टर फैजू के रिश्ते पर लगाई मुहर?

मुंबई टीवी एक्ट्रेस जन्नत जुबैर और फेमस यूट्यूबर फैजल शेख उर्फ मिस्टर फैजू के रिश्ते को लेकर खूब चर्चा होती है, लेकिन दोनों ने अपनी तरफ से इस रिश्ते की कभी पुष्टि नहीं की, बल्कि हमेशा खंडन ही किया है। मिस्टर फैजू इन दिनों 'सेलिब्रिटी मास्टरशेफ' शो में नजर आ रहे हैं, जहां पर होस्ट और जज फराह खान ने उनकी शादी और जन्नत को लेकर कुछ ऐसा कह दिया कि पास खड़ी दीपिका कक्कड़ भी ब्लश करने लगीं। अब फैंस भी पूछ रहे हैं कि क्या उन्होंने फैजू और जन्नत की डेटिंग पर मुहर लगाई है! इस वीडियो में मिस्टर फैजू कहते हैं, 'हां, इस शो के बाद पक्का मेरी शादी हो जाएगी।' इस पर फराह जवाब देती हैं, 'ये शो के बाद मैं तो कराकर रहूंगी तेरी शादी, जन्नत की सैर तो कराऊंगी तुझे मैं।' फराह के मुंह से जन्नत का नाम सुनते ही फैजू शर्म से लाल होने लगते हैं। पास खड़ी दीपिका भी अपना गला ऐसे खखारने लगती हैं, मानों उनको भी सब पता है। उनकी आंखें काफी कुछ कह रही हैं। फराह पर प्यार लुटाने लगे फैंस इस वीडियो पर फैंस भी खूब रिएक्शन दे रहे हैं। एक ने लिखा, 'दीपिका उर्फ फैजा मैडम की खांसी ने जन्नत और फैजू का रिलेशनशिप कंफर्म कर दिया।' एक ने लिखा, 'लव यू फराह मैम।' दूसरे यूजर ने कॉमेंट किया, 'फैजू जन्नत बेस्ट कपल।' कई प्रोजेक्ट्स में साथ किया है काम मिस्टर फैजू और जन्नत जुबैर ने कई प्रोजेक्ट्स में एकसाथ काम किया है। वो सोशल मीडिया पर भी एक-दूसरे के साथ फोटोज शेयर करते हैं। फैंस का अनुमान है कि वे डेटिंग कर रहे हैं। पर उन्होंने बार-बार इसका खंडन किया है। वे दावा करते हैं कि उनके बीच सिर्फ दोस्ती है। recent visitors 54

दिल्ली के स्वास्थ्य ढांचे पर आई सीएजी की रिपोर्ट में फंड का कम इस्तेमाल और कोरोना कुप्रबंधन को उजागर किया

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा में शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट पेश की, जिसमें कई तरह की खामियों को उजागर किया है। दिल्ली के स्वास्थ्य ढांचे पर आई सीएजी की रिपोर्ट में फंड का कम इस्तेमाल और कोरोना महामारी के कुप्रबंधन को उजागर किया गया है। 255 पन्नों की इस रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं में कई गंभीर खामियां हैं, जिनमें स्टाफ की कमी, दवाओं की अनुपलब्धता, अधूरी स्वास्थ्य परियोजनाएं और वित्तीय कुप्रबंधन शामिल हैं। 31 मार्च 2022 को समाप्त हुए वित्त वर्ष के लिए इस ऑडिट रिपोर्ट में कोरोना महामारी से निपटने के इंतजाम और मोहल्ला क्लीनिक को लेकर कई अहम बातें हैं। recent visitors 64