Tuesday, July 7, 2026 7:16 pm

घर लें आएं ये होली से पहले 5 चीजें, मां लक्ष्मी की बरसेगी कृपा, होगा धन लाभ

 इस साल होलिका दहन 13 मार्च 2025 को है और इसके अगले दिन होली खेली जाएगी. रंगों का ये त्योहार होली परिवार में सुख और अपार प्रेम लेकर आता है. होली पर या होलिक दहन से पहले कई लोग वास्तु अनुसार उपाय करते हैं. मान्यता है इससे रोग, दोष, मानसिक और आर्थिक परेशानी से छुटकारा मिलता है. होली से पहले कुछ चीजों को घर लाने से व्यक्ति की सोई किस्मत जाग उठती है, सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह घर में बढ़ता है, साथ ही धन लक्ष्मी घर में वास करती हैं. होली से पहले घर में लाएं ये चीजें चांदी का सिक्का – होलिका दहन के दिन फाल्गुन पूर्णिमा होती है, इस दिन घर में चांदी का सिक्का, चांदी का हाथी लाना शुभ होता है. चांदी का सिक्का घर लाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है. इस दिन चांदी के सिक्के की पूजा कर इसे लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रख लें मान्यता है इससे घर में बरकत आती है. मां लक्ष्मी घर में वास करती हैं. इस दिन चांदी की बिछिया या पायल भी खरीद सकते हैं. बंदनवार – वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार पर बंदनवार यानी तोरण लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. इसलिए होली पर्व से पहले अपने घर पर मुख्य द्वार पर तोरण लगाएं. इससे से सकारात्मकता ऊर्जा का संचार बढ़ता है. बांस का पौधा – वास्तु में बांस का पौधा यानी बैम्बू ट्री को लकी प्लांट माना जाता है. होली पर आप अपने घर में बैम्बू ट्री भी ला सकते हैं. घर या ऑफिस में बांस का पौधा लगाने से अच्छे भाग्य की शुरुआत होती है एवं सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है. कछुआ – कछुए को भगवत स्वरुप माना जाता है. माना जाता है कि अगर आप होली पर्व पर धातु से बना कछुआ घर में लाते हैं तो इससे मां लक्ष्मी की कृपा घर पर बनी रहती है. लेकिन ध्यान रखें कि कछुए की पीठ पर श्रीयंत्र या कुबेर यंत्र बना होना चाहिए. होलिका की राख – होली से पहले होलिका दहन की पूजा होती है. अगले दिन होली पर होलिका की राख घर लाकर लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखे लें. कहते हैं इससे दरिद्रता दूर होती है. recent visitors 51

सुप्रीम कोर्ट ने दिया अहम फैसला- ‘मियां-तियां’ या ‘पाकिस्तानी’ कहना अपराध नहीं, भावनाएं आहत करने का केस गलत

नई दिल्ली किसी को 'मियां-तियां' या 'पाकिस्तानी' कहना गलत और आपत्तिजनक हो सकता है, लेकिन यह अपराध नहीं माना जा सकता। ऐसा कहे जाने पर धार्मिक भावनाएं आहत किए जाने के मामले में भी केस दर्ज नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट ने यह अहम फैसला दिया है। अदालत ने यह बात 80 साल के एक शख्स के खिलाफ दर्ज केस को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। बुजुर्ग पर आरोप था कि उन्होंने एक व्यक्ति को मियां-तियां और पाकिस्तानी कहा था। इससे उसकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई थीं और इसी मामले में उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया था। लेकिन उस केस को जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने खारिज कर दिया। बेंच ने कहा, 'बुजुर्ग पर आरोप है कि उन्होंने मियां-तियां और पाकिस्तानी कहकर धार्मिक भावनाओं को आहत किया है। निसंदेह उनकी टिप्पणी खराब है और गलत तरीके से की गई। लेकिन इससे उस व्यक्ति की धार्मिक भावनाएं आहत नहीं होतीं, जिससे यह बात कही गई।' यह मामला झारखंड के बोकारो का है, जहां के एक उर्दू अनुवादक मोहम्मद शमीमुद्दीन ने आरोप लगाया था कि बुजुर्ग ने उन पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्हें मियां-तियां और पाकिस्तानी कहा। शमीमुद्दीन ने 80 साल के हरि नारायण सिंह पर यह आरोप लगाते हुए कहा था कि उनकी बातों से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। इस शिकायत के आधार पर बुजुर्ग के खिलाफ सेक्शन 298 (धार्मिक भावनाएं आहत करना), सेक्शन 504 (जानबूझकर किसी को अपमानित करना और शांति भंग), 506 (आपराधिक साजिश), 353 (सरकारी कर्मचारी से बदसलूकी) जैसी धाराओं में केस दर्ज हो गया। बुजुर्ग के खिलाफ जांच के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। जुलाई 2021 में मजिस्ट्रेट ने इस मामले का संज्ञान लिया और बुजुर्ग को समन जारी किया। इसके बाद बुजुर्ग ने अडिशनल सेशन जज का रुख किया, लेकिन राहत नहीं मिली। फिर उन्होंने हाई कोर्ट में अपील दायर की। वहां से भी राहत न मिलने के बाद वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। शीर्ष अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद बुजुर्ग को राहत दी है। कोर्ट ने साफ किया कि उनकी टिप्पणी गलत तो है, लेकिन आपराधिक केस नहीं बना सकते। यह मामला अब ऐसे अन्य केसों के लिए भी नजीर बन सकता है। recent visitors 28

पाकिस्तान की टी20 टीम से ड्रॉप बाबर आजम-मोहम्मद रिजवान, सलमान अली आगा बने नए कप्तान

इस्लामाबाद कप्तान मोहम्मद रिजवान और बाबर आजम को न्यूजीलैंड में होने वाली पांच मैचों की टी20 सीरीज के लिए मंगलवार को घोषित पाकिस्तान की टीम से बाहर कर दिया गया। रिजवान की जगह सलमान अली आगा को टी20 टीम का कप्तान बनाया गया जबकि हरफनमौला शादाब खान की टीम में वापसी हुई है। शादाब को उप-कप्तान बनाया गया। रिजवान को हालांकि चैंपियंस ट्रॉफी में टीम के निराशाजनक प्रदर्शन बावजूद वनडे टीम का कप्तान बनाए रखा गया है। चयनकर्ताओं ने वनडे टीम में ज्यादा बदलाव नहीं किए हैं। और चैंपियंस ट्रॉफी में नाकाम रहे खिलाड़ियों को टीम में बरकरार रखा है। बाबर को भी वनडे टीम में बरकरार रखा गया है, लेकिन बल्लेबाज सऊद शकील और कामरान गुलाम को बाहर कर दिया। चयनकर्ताओं ने तेज गेंदबाज शाहीन शाह अफरीदी और हारिस राउफ को भी वनडे टीम से बाहर का रास्ता दिखाया है। पाकिस्तान 16 मार्च से न्यूजीलैंड में पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय और तीन वनडे मैच खेलेगा। पाकिस्तान की टीम अभी भी अपने सलामी बल्लेबाज सैम अयूब के बिना खेलेगी, जो टखने की चोट से अभी तक उबर नहीं पाए हैं। सलामी बल्लेबाज फखर जमां भी चैंपियंस ट्रॉफी के पहले मैच में लगी चोट के कारण दौरे से बाहर हो गए हैं। पाकिस्तान टीम: वनडे टीम: मोहम्मद रिजवान (कप्तान), सलमान अली आगा (उपकप्तान), अब्दुल्ला शफीक, अबरार अहमद, आकिफ जावेद, बाबर आजम, फहीम अशरफ, इमाम उल हक, खुशदिल शाह, मोहम्मद अली, मोहम्मद वसीम जूनियर, मोहम्मद इरफान खान, नसीम शाह सुफयान मुकीम, तय्यब ताहिर। टी20 टीम: सलमान अली आगा (कप्तान), शादाब खान (उप कप्तान), अब्दुल समद, अबरार अहमद, हारिस रऊफ, हसन नवाज, जहांदाद खान, खुशदिल शाह, मोहम्मद अब्बास अफरीदी, मोहम्मद अली, मोहम्मद हारिस, मोहम्मद इरफान खान, ओमैर बिन यूसुफ, शाहीन शाह अफरीदी, सुफियान मुकीम, उस्मान खान। recent visitors 64

आहोर में भवरानी से रोजियों की ढाणी तक सड़क निर्माण के लिए परीक्षण कर निर्णय लिया जाएगा – सार्वजनिक निर्माण मंत्री

जयपुर सार्वजनिक निर्माण मंत्री दिया कुमारी ने मंगलवार को विधानसभा में आश्वस्त किया कि आहोर विधानसभा क्षेत्र में भवरानी से रोजियों की ढाणी तक सड़क निर्माण के लिए परीक्षण उपरान्त उचित निर्णय लिया जाएगा। सार्वजनिक निर्माण मंत्री प्रश्नकाल के दौरान सदस्य द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रही थीं। इससे पहले विधायक श्री छगन सिंह राजपुरोहित के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में सार्वजनिक निर्माण मंत्री ने कहा कि बजट घोषणा वर्ष 2024-25 में हरजी-पचानवा नदी पर पुल, पादरली-तखतगढ़ पुल, कवराड़ा नदी पर पुल के लिए राशि रुपये 19.00 करोड़ की घोषणा 10 जुलाई 2024 को की गई। उन्होंने बताया कि उक्त कार्य की कन्सलटेन्ट द्वारा डीपीआर राशि 34.65 करोड़ रुपये प्रस्तुत की गई है। जिसकी संशोधित राशि. 34.65 करोड़ रुपये की सैद्धान्तिक सहमति 10 फरवरी 2025 को जारी की जाकर निविदा प्रक्रियाधीन है। उन्होंने कहा कि निविदा कार्य पूर्ण होने के पश्चात कार्य को 15 माह में पूर्ण किया जाना संभावित है। सार्वजनिक निर्माण मंत्री ने कहा कि उक्त कार्यों के लिए राशि 34.65 करोड़ रुपये की संशोधित सैद्धांतिक सहमति 10 फरवरी 2025 को जारी कर दी गई। recent visitors 36

बड़ौदा आरसेटी में दी जाएगी इलेक्ट्रिक मोटर रिवाइंडिंग और महिला सिलाई प्रशिक्षण आवेदन 17 मार्च तक आमंत्रित

धमतरी बड़ौदा स्वरोजगार विकास संस्थान धमतरी द्वारा इलेक्ट्रिक मोटर रिवाइंडिंग और मरम्मत तथा महिला सिलाई का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। आवासीय सुविधायुक्त इन प्रशिक्षणों के लिए 18 से 45 वर्ष तक आयु के ग्रामीण बेरोजगार आगामी 17 मार्च तक आवेदन कर सकते हैं। महिला सिलाई प्रशिक्षण के लिए ग्रामीण बेरोजगार महिलाएं आवेदन कर सकतीं हैं। प्रशिक्षण के लिए 35 सीटें आरक्षित हैं। निदेशक, बड़ौदा आरसेटी सुश्री अनिता टुडू ने बताया कि इलेक्ट्रिक मोटर रिवाइंडिंग प्रशिक्षण के दौरान बिजली के उपकरणों, बिजली की बुनियादी बातों, उनकी मरम्मत में सुरक्षा, सावधानियां, प्रतिरोध कंडक्टर इन्सुलेटर और सेमी कंडक्टर सहित सभी प्रकार के मोटर रिवाइंडिंग एवं मोटर मरम्मत के साथ ही उद्यमिता एवं बैंकिंग संबंधी जानकारी भी दी जाएगी। इसी तरह महिला सिलाई प्रशिक्षण के बाद बैंक से ऋण के लिए परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। प्रशिक्षण के लिए शैक्षणिक प्रमाण पत्र, राशनकार्ड, आधार कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड की फोटोकॉपी और चार पासपोर्ट फोटो के साथ कंपोजिट भवन के पीछे स्थित बड़ौदा स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्था में आवेदन जमा किया जा सकता है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए मोबाईल नंबर 73899-43193 और 88394-68509 पर सम्पर्क किया जा सकता है। recent visitors 41

‘किसी को मियां-टियां या पाकिस्तानी कहना गलत, पर अपराध नहीं’, आरोपी को दोषमुक्त करते हुए कोर्ट की टिप्पणी: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम समुदाय से जुड़ी टिप्पणी को लेकर अहम बात कही। शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को 'मियां-तियां' और 'पाकिस्तानी' कहना गलत होगा, लेकिन इससे उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का अपराध नहीं माना जाएगा। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 298 (जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के इरादे से शब्द आदि बोलना) के तहत आरोप से एक व्यक्ति को मुक्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता पर उसे 'मियां-तियां' और 'पाकिस्तानी' कहकर उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप है। अदालत ने कहा कि निस्संदेह, दिए गए कथन गलत है। हालाँकि, इससे याचिकाकर्ता की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुचती है। झारखंड हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती जस्टिस बी वी नागरत्ना और सतीश चंद्र शर्मा की बेंच झारखंड उच्च न्यायालय के उस फैसले के खिलाफ दायर अपील पर विचार कर रही थी, जिसमें अपीलकर्ता को आरोप मुक्त करने से इनकार कर दिया गया था। मामला उप-विभागीय कार्यालय, चास में एक उर्दू अनुवादक और कार्यवाहक क्लर्क (सूचना का अधिकार) की तरफ से दर्ज एफआईआर से जुड़ा था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जब वह आरटीआई आवेदन के संबंध में जानकारी देने के लिए अपीलकर्ता से मिलने गया, तो आरोपी ने उसके धर्म का हवाला देकर उसके साथ दुर्व्यवहार किया। साथ ही आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन को रोकने के लिए आपराधिक बल का इस्तेमाल किया। अदालत ने 11 फरवरी को दिए अपने फैसले में कहा, "निस्संदेह, दिए गए बयान सुनने में ठीक नहीं लगते हैं। लेकिन, इससे सूचना देने वाले की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचती। इसलिए, हमारा मानना है कि अपीलकर्ता को आईपीसी की धारा 298 के तहत आरोपमुक्त किया जाना चाहिए।" शिकायतकर्ता, जो एक उर्दू अनुवादक और सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत कार्यवाहक क्लर्क है, ने अपीलीय प्राधिकारी के आदेश के बाद आरोपी सिंह को व्यक्तिगत रूप से कुछ जानकारी दी थी। सिंह ने शुरू में दस्तावेज स्वीकार करने में अनिच्छा दिखाई, लेकिन अंततः उन्होंने दस्तावेज स्वीकार कर लिए, लेकिन कथित तौर पर उन्होंने शिकायतकर्ता के धर्म का हवाला देते हुए उसे अपशब्द कहे। यह भी आरोप लगाया गया कि सिंह ने शिकायतकर्ता को डराने और लोक सेवक के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन करने से रोकने के इरादे से उसके खिलाफ आपराधिक बल का प्रयोग किया। इसके परिणामस्वरूप सिंह के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई, जिनमें धारा 298 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना), 504 (शांति भंग करने के लिए जानबूझकर अपमान करना), 506 (आपराधिक धमकी), 353 (लोक सेवक को कर्तव्य से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) और 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) शामिल हैं। मजिस्ट्रेट ने मामले की समीक्षा करते हुए धारा 353, 298 और 504 के तहत आरोप तय किए, जबकि साक्ष्य के अभाव में धारा 323 और 506 के तहत आरोपों को खारिज कर दिया। सिंह की आरोपमुक्ति की याचिका को पहले सत्र न्यायालय और बाद में राजस्थान उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया, जिसके बाद उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 353 के तहत आरोप को कायम रखने के लिए हमले या बल प्रयोग का कोई सबूत नहीं है। अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय ने इस प्रावधान के तहत आरोपी को आरोपमुक्त न करके गलती की है। शीर्ष अदालत ने आगे कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 504 भी लागू नहीं होती, क्योंकि सिंह की ओर से ऐसा कोई कार्य नहीं किया गया, जिससे शांति भंग हो सकती हो। धारा 298 के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि सिंह की टिप्पणी अनुचित थी, लेकिन आईपीसी के तहत धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए कानूनी तौर पर पर्याप्त नहीं थी। नतीजतन, सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। आईपीसी 504 के तहत आरोप नहीं लगा सकते आखिरकार, अपीलकर्ता के खिलाफ आईपीसी की धारा 353, 298 और 504 के तहत आरोप तय किए गए। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि शिकायत में अपराध के तत्व नहीं बताए गए थे। कोर्ट ने कहा कि जाहिर है, अपीलकर्ता ने धारा 353 आईपीसी को आकर्षित करने के लिए कोई हमला या बल का प्रयोग नहीं किया था। कोर्ट ने आगे कहा कि अपीलकर्ता पर धारा 504 आईपीसी के तहत आरोप नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि उसकी ओर से ऐसा कोई कार्य नहीं किया गया जिससे शांति भंग हो सकती हो। recent visitors 42

सूरत के टेक्सटाइल मार्केट में अग्निकांड से राजस्थानी व्यापारियों के नुकसान पर राज्य सरकार संवेदनशील: संसदीय कार्य मंत्री

जयपुर संसदीय कार्य मंत्री श्री जोगाराम पटेल ने मंगलवार को विधान सभा में कहा कि गुजरात प्रदेश के सूरत में शिवशक्ति टेक्सटाइल मार्केट में लगी आग से राजस्थान राज्य के व्यापारियों को हुए नुकसान के लिए राज्य सरकार सहयोग के लिए तत्पर है। संसदीय कार्य मंत्री ने शून्यकाल के दौरान सदन के सदस्य श्री रफीक खान द्वारा ध्यान आकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से उठाए गए प्रश्न पर जवाब देते हुए कहा कि प्रदेश के अनेक व्यापारी गुजरात के इस विशेष बाजार में व्यापार करते है। यहां हुए अग्निकांड से इनका भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि मानवता से जुड़े इस गंभीर मामले पर सरकार संवेदनशील हैं। उन्होंने कहा कि इस घटना की सूचना मिलते ही प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा ने गुजरात प्रदेश के मुख्यमंत्री से बात कर इस मामले में त्वरित सहायता देने को कहा। recent visitors 44