Wednesday, July 8, 2026 5:00 am

इंदौर में मंदिरों के बाहर फिर दिखने लगा भिक्षुकों का जमावड़ा, अब भिक्षा मांगने और देने वाले पर आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं होगा

इंदौर  इंदौर। इंदौर जिले में अब भिक्षा मांगने और देने वाले पर आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं होगा। इसे लेकर दो जनवरी को जारी किया गया कलेक्टर का आदेश 28 फरवरी का समाप्त हो गया है। इसके बाद एक बार फिर भिक्षावृत्ति नजर आने लगी है। शनिवार, मंगलवार आदि विशेष दिनों में मंदिरों के बाहर भिक्षुकों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया है। भिक्षा मुक्त इंदौर अभियान के तीसरे चरण में भिक्षा मांगने और देने वाले आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के लिए कलेक्टर आशीष सिंह ने आदेश जारी किया था। दो जनवरी से 28 फरवरी तक हुई सख्ती में तीन लोगों के खिलाफ भिक्षा देने और लेने पर प्रकरण दर्ज हो चुका है। देश-विदेश तक हुई सराहना भिक्षा मुक्त अभियान की सराहना देश-विदेश तक हो चुकी है। महिला व बाल विकास विभाग द्वारा भिक्षा मुक्त इंदौर अभियान की शुरुआत गत वर्ष की गई थी। पहले चरण में जागरूकता अभियान चलाकर भिक्षुकों को समझाइश दी गई। इसके बाद भिक्षावृत्ति में लिप्त लोगों का रेस्क्यू किया गया। इसमें 700 वयस्कों को सेवाधाम आश्रम भेजा गया है। वहीं भिक्षावृत्ति से जुड़े 60 से अधिक बच्चों को स्कूल में दाखिला दिलवाया गया। अभियान में सख्ती बरतने के लिए कलेक्टर ने दो जनवरी से 28 फरवरी तक प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किया था। इसमें भिक्षुकों को भिक्षा के रूप में कुछ भी देने पर और उनसे किसी तरह की सामग्री क्रय करने पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत प्रकरण दर्ज की बात कही गई थी। इसका असर यह हुआ कि इंदौर में भिक्षावृत्ति तकरीबन पूरी तरह से बंद हो गई थी। 28 लोग हो चुके सम्मानित इसी अभियान में प्रशासन ने नवाचार किया था। भिक्षावृत्ति से जुड़े लोगों की सूचना देने पर एक हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा भी हुई। इसके बाद प्रशासन को हर दिन काल आना शुरू हो गए। अब तक प्रशासन 28 लोगों को एक हजार रुपये देकर सम्मानित कर चुका है। भिक्षुकों की जानकारी देने वालों को मिले एक हजार रुपए इस अभियान में प्रशासन ने एक नवाचार भी किया। भिक्षावृत्ति से जुड़ी सूचना देने वालों को 1 हजार रुपये के इनाम की घोषणा की गई, जिसके बाद प्रशासन को हर दिन इस तरह की सूचनाएं मिलने लगीं। अब तक 28 लोगों को प्रशासन ने इनाम देकर सम्मानित किया है। जिला कार्यक्रम अधिकारी राम निवास बुधौलिया के अनुसार, इस अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। हालांकि, कुछ स्थानों पर अब भी भिक्षावृत्ति की सूचना मिल रही है, जिन्हें तुरंत रेस्क्यू किया जा रहा है। भिक्षा मुक्त इंदौर अभियान की सराहना न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी हो चुकी है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पिछले वर्ष इस अभियान की शुरुआत की गई थी। पहले चरण में भिक्षुकों को समझाइश दी गई और उसके बाद उनके पुनर्वास के प्रयास किए गए। इस दौरान 700 वयस्क भिक्षुकों को सेवाधाम आश्रम भेजा गया, जबकि भिक्षावृत्ति से जुड़े 60 से अधिक बच्चों का स्कूल में दाखिला करवाया गया।  28 फरवरी से खत्म हुई सख्ती इस अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कलेक्टर आशीष सिंह ने 2 जनवरी से 28 फरवरी तक प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किया था। इसके तहत भीख मांगने और देने दोनों को अपराध माना गया और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत प्रकरण दर्ज करने का प्रावधान किया गया। इस सख्ती के चलते इंदौर में भिक्षावृत्ति लगभग पूरी तरह समाप्त हो गई थी। इस अवधि में तीन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की गई।  हालांकि, 28 फरवरी को आदेश समाप्त होने के बाद भी भिक्षुकों का रेस्क्यू जारी रहेगा। मंदिरों, सार्वजनिक स्थलों और व्यस्त बाजारों में भिक्षुकों की उपस्थिति दिख रही है। प्रशासन लगातार अभियान की निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर फिर से सख्ती बरतने की संभावना जताई जा रही है। अभियान से जुड़ी बड़ी बातें     सूचना देने वाले 28 लोग हो चुके सम्मानित     60 से अधिक बच्चे भिक्षावृत्ति छोड़ शिक्षा से जुड़े     700 से अधिक भिक्षुकों का हो चुका है रेस्क्यू     400 से ज्यादा काल आ चुके भिक्षुकों की सूचना वाले   recent visitors 29

पीएम मोदी ने मां गंगा के शीतकालीन निवास स्थल मुखवा में पूजा-अर्चना की, कहा- 60-70 साल रहे खाली

देहरादून प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को उत्तराखंड के उत्तरकाशी पहुंचे। यहां पीएम ने मां गंगा के शीतकालीन निवास स्थल मुखवा में पूजा-अर्चना की। इसके बाद पीएम ने हर्षिल में एक जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने इस दौरान अत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई ऐलान किए। पीएम ने चीन सीमा के उन दो गांवों को भी बसाने और वहां पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयासों की चर्चा की। पीएम ने कहा कि 1962 में चीन के हमले के बाद खाली कराए गए दोनों गांव 60-70 साल तक खाली रहे। पीएम मोदी ने कहा, 'देशवासियों को पता होगा, शायद नहीं पता होगा। 1962 में जब चाइना ने भारत पर आक्रमण किया तब दो गांव खाली करा दिए गए थे। 60-70 साल हो गए। लोग भूल गए, हम नहीं भूल सकते। हमने उन दो गांवों को फिर से बसाने का अभियान चलाया है। बहुत बड़ा पर्यटन स्थल बनाने की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं।' पीएम मोदी ने कहा कि उत्तराखंड में पर्यटकों की संख्या एक दशक में तेजी से बढ़ी है।' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आर्थिक सुस्ती को दूर करने के लिए बारहमासी पर्यटन पर जोर दिया जिससे हर सीजन 'ऑन सीजन' रहे । प्रधानमंत्री ने कहा, 'अपने पर्यटन क्षेत्र को विविधतापूर्ण बनाना और उसे बारहमासी बनाना उत्तराखंड के लिए बहुत जरूरी है।' उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि उत्तराखंड में पर्यटन के लिहाज से कोई भी सीजन 'ऑफ सीजन' न हो और हर सीजन 'ऑन सीजन' रहे। प्रधानमंत्री ने कहा कि अभी पहाड़ों में मार्च, अप्रैल और जून में बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं लेकिन उसके बाद इनकी संख्या कम हो जाती है। उन्होंने कहा, 'सर्दियों में होमस्टे और होटल खाली पड़े रहते हैं । यह असंतुलन उत्तराखंड में साल के एक बड़े हिस्से में आर्थिक सुस्ती ला देता है।' मोदी ने कहा कि अगर सर्दियों में देश-विदेश के लोग प्रदेश में आएं तो उन्हें उत्तराखंड की वास्तविक आभा मिलेगी और ट्रेकिंग और स्कींइंग उन्हें रोमांचित कर देगा। उन्होंने कहा कि सर्दियों में उत्तराखंड की धूप खास होती है जब मैदानी इलाकों में कोहरा होता है। उन्होंने कॉर्पोरेट जगत से भी अपील की कि सर्दियों में अपनी मीटिंग-कॉन्फ्रेंस उत्तराखंड में करें। recent visitors 44

जाम्बिया के प्रतिनिधिमंडल ने ली राज्य के सहकारी आन्दोलन और कार्यप्रणाली की जानकारी- ‘सहकार से समृद्धि’ के अंतर्गत किये जा रहे कार्यों की सराहना की

जयपुर, सहकारिता विभाग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष-2025 के अंतर्गत प्रदेश भर में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में दि जयपुर सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लि. द्वारा बुधवार को बैंक के प्रधान कार्यालय में जाम्बिया से आये प्रतिनिधिमंडल को बैंक की कार्यप्रणाली एवं राज्य में संचालित की जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध करवाई गई।       अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के अंतर्गत विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडल अन्य देशों का दौरा कर वहां के सहकारी आन्दोलन तथा कार्यप्रणाली का अध्ययन कर रहे हैं। इसी के तहत जाम्बिया का चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भारत के दौरे पर है। प्रतिनिधिमंडल ने दि जयपुर सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लि. के साथ ही अपेक्स बैंक, बीलवा ग्राम सेवा सहकारी समिति एवं बड़ का बालाजी प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति का भी दौरा कर कार्यप्रणाली को बारीकी से समझा।       दि जयपुर सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के प्रधान कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को राज्य में सहकारी आन्दोलन को प्रभावी और सार्थक बनाने तथा विभिन्न सहकारी योजनाओं की आमजन तक पहुंच सुलभ कराने के उद्देश्य से किये जा रहे कार्यों की जानकारी दी। साथ ही, योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रचार-प्रसार एवं प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा की गई। जाम्बिया से आये प्रतिनिधिमंडल ने भी इस दौरान अपने देश के सहकारी आन्दोलन से सम्बन्धित जानकारी प्रदान की। प्रतिनिधिमंडल ने भारत में ‘सहकार से समृद्धि’ के अंतर्गत किये जा रहे कार्यों की प्रशंसा की।       इस अवसर पर अपेक्स बैंक के प्रबंध निदेशक श्री संजय पाठक, महाप्रबंधक श्री पी.के. नाग, दि जयपुर सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के प्रबंध निदेशक श्री दिनेश कुमार शर्मा एवं अधिशाषी अधिकारी श्री राजेन्द्र कुमार मीणा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। recent visitors 37

राज्यपाल ने जोधपुर में ली जिलास्तरीय अधिकारियों की बैठक, सामुदायिक उत्थान एवं क्षेत्रीय विकास पर दिया जोर

जयपुर, राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने क्षेत्रीय विकास एवं सामुदायिक उत्थान की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार के कल्याणकारी कार्यक्रमों को जरूरतमन्दों तक पहुंचाकर खुशहाली लाने के लिए समर्पित होकर प्रयास करने का आह्वान किया है। राज्यपाल बागडे ने गुरुवार को जोधपुर में मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर में जिलास्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह आह्वान किया। बैठक में पीपीटी के माध्यम से जिले में संचालित केंद्र एवं राज्य प्रायोजित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति की जानकारी दी गई। राज्यपाल ने इस अवसर पर केन्द्र और राज्य प्रायोजित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की अद्यतन प्रगति एवं प्राप्त उपलब्धियों, भौगोलिक परिस्थितियों एवं संसाधनों की कमी से प्रभावित क्षेत्र में सामाजिक आर्थिक स्तर में सुधार हेतु योजना एवं कार्यक्रम, स्थानीय नागारिकों के पलायन को रोके जाने के लिए किये जा रहे प्रयास तथा हिन्दू विस्थापितों की स्थिति एवं सुरक्षा पर्यवेक्षण सहित विभिन्न गतिविधियों की समीक्षा की और सम सामयिक हालातों पर जानकारी ली। राज्यपाल ने इस दौरान वि​भिन्न योजनाओं विशेषकर महात्मा गांधी नरेगा योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम, प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना, स्वामित्व योजना ग्रामीण, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (जल ग्रहण घटक), पुनरुत्थान वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) आदि की समीक्षा करते इनसे अधिकाधिक लोगों को लाभांवित किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने सॉयल हैल्थ कार्ड योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, उद्यान विभाग की योजनाओं नेशनल हैल्थ मिशन, यूनिसर्वल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (यूआईपी), बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री खनन क्षेत्र कल्याण योजना, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना/जीवन ज्योति बीमा योजना, ई-नाम परियोजना, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना सहित विभिन्न केन्द्र व राज्य प्रायोजित योजनाओं की बिन्दुवार विस्तार से समीक्षा की और इनमें लक्ष्यों की समय पर प्राप्ति के निर्देश दिए। recent visitors 53

भारत के 5 में से 2 बच्चों का बीएमआई दयनीय, स्पोर्ट्ज़ विलेज के 13वें वार्षिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण से हुआ खुलासा

नई दिल्ली स्पोर्ट्ज़ विलेज के 13वें वार्षिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एएचएस) ने पूरे भारत में स्कूल जाने वाले बच्चों की फिटनेस और सेहत में चिंताजनक अंतर का खुलासा किया है। वर्ष 2010 से हर साल संचालित हो रहे इस सर्वेक्षण का उद्देश्य यह है कि समूचे भारत के स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य व फिटनेस के स्तर का विश्लेषण और मूल्यांकन किया जाए। एडुस्पोर्ट्स द्वारा समर्थित इस सर्वेक्षण के 13वें संस्करण में, देश के 85 स्थानों पर 7 से 17 वर्ष की आयु के 1,16,650 बच्चों का मूल्यांकन किया गया, जिसके तहत स्कूलों में सुगठित शारीरिक शिक्षा कार्यक्रमों की तत्काल जरूरत को हाईलाइट किया गया है। देश का पूर्वी क्षेत्र अपने कुल 56.40% बच्चों की समग्र फिटनेस प्रदर्शित करते हुए, सेकेंड-बेस्ट बन कर उभरा है, जिसमें शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत (54%), शरीर के निचले हिस्से की ताकत (46%), और लचीलेपन (77%) के मामले में उल्लेखनीय मजबूती नजर आई है। सर्वेक्षण से उजागर हुआ है कि उत्तरी क्षेत्र में बच्चों के एक बड़े प्रतिशत का प्रदर्शन बेहद दयनीय रहा, जिसमें फिटनेस के सात में से तीन मापदंडों का प्रतिशत सबसे कम दर्ज किया गया। इस क्षेत्र ने शरीर के निचले हिस्से की ताकत (35%), पेट की ताकत (81%), और एनारोबिक क्षमता (58%) के मामले में सबसे लचर प्रदर्शन किया, जो फिटनेस के प्रमुख संकेतकों में सुधार के जरूरी क्षेत्रों को रेखांकित करता है। दक्षिण क्षेत्र के बच्चों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। बीएमआई (60.12%), एरोबिक क्षमता (31%), एनारोबिक क्षमता (62%), और पेट की ताकत (87%) के मापदंडों में, दक्षिण के बच्चों ने बड़ी संख्या में बढ़िया प्रदर्शन किया है, मगर शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत और लचीलेपन के मापदंडों में सुधार की बड़ी गुंजाइश दिखाई दी। अन्य सभी क्षेत्रों के मुकाबले पश्चिम क्षेत्र ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है, जहाँ शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत (58%) शरीर के निचले हिस्से की ताकत (60%), एनारोबिक क्षमता (81%), पेट की ताकत (93%), एरोबिक क्षमता (52%) और लचीलेपन (81%) के मापदंडों में असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन करने वाले बच्चों का प्रतिशत अधिक है। सर्वेक्षण के मुख्य निष्कर्ष बताते हैं: ●    5 में से 2 बच्चों का बीएमआई खराब है। ●    5 में से 3 बच्चों के शरीर में निचले हिस्से की ताकत पर्याप्त नहीं है। ●    3 में से 1 बच्चे में पर्याप्त लचीलापन नहीं है। ●    5 में से 3 बच्चे जरूरी एरोबिक क्षमता पूरी नहीं करते। ●    5 में से 1 बच्चा पेट या कोर की पर्याप्त ताकत नहीं रखता। ●    5 में से 2 बच्चों के पास पर्याप्त एनारोबिक क्षमता नहीं है। ●    5 में से 3 बच्चों के ऊपरी शरीर में पर्याप्त ताकत नहीं है। ●    लड़कों (57.09%) की तुलना में लड़कियों (62.23%) का बीएमआई अच्छा है। ●    लड़कियों ने लचीलेपन, पेट की ताकत, एनारोबिक क्षमता और शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत के मामले में लड़कों को पछाड़ दिया है, जबकि लड़कों ने एरोबिक क्षमता और शरीर के निचले हिस्से की ताकत के मापदंडों में अच्छा प्रदर्शन किया। एएचएस 2025 के मुख्य निष्कर्ष इसके अलावा, शरीर के ऊपरी हिस्से की शक्ति के मापदंड पर, सरकारी स्कूलों के बच्चों की (37%) तुलना में निजी स्कूलों के बच्चों का प्रतिशत बेहतर (47%) है, और पेट की शक्ति के मापदंड पर सरकारी स्कूलों के बच्चों का प्रतिशत 84% है, जबकि निजी स्कूलों के बच्चों का प्रतिशत इससे अधिक 87% रहा। तुलनात्मक रूप से, सरकारी स्कूलों के बच्चों ने बड़ी संख्या में- बीएमआई (61.64%), शरीर के निचले हिस्से की ताकत (48%), एरोबिक क्षमता (37%), एनारोबिक क्षमता (75%) और लचीलेपन (75%) के मापदंडों में बेहतर प्रदर्शन किया, जो निजी स्कूल के बच्चों की तुलना में बेहतर समग्र फिटनेस दिखाता है। इस सर्वेक्षण ने पी.ई. कक्षाओं की बारंबारता और समग्र फिटनेस स्तरों के सकारात्मक सहसंबंध पर भी प्रकाश डाला है। इसमें पाया गया कि जो बच्चे प्रति सप्ताह पी.ई. की दो से अधिक कक्षाओं में भाग लेते हैं, उनके बीएमआई का स्तर, शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत और लचीलापन, पी.ई. की कम कक्षाओं में भाग लेने वाले बच्चों के मुकाबले बेहतर होता है, जिससे स्कूलों में सुगठित खेल कार्यक्रमों की अहमियत को बल मिलता है। पी.ई. कक्षाओं की बारंबारता का समग्र फिटनेस पर असर स्पोर्ट्ज़ विलेज के को-फाउंडर, सीईओ एवं मैनेजिंग डाइरेक्टर सौमिल मजमुदार ने शिक्षा व खेल के बीच संतुलन बनाने के महत्व पर जोर देते हुए कहा: "बच्चों को स्वाभाविक रूप से खेलना पसंद होता है, फिर भी खेल अक्सर शिक्षा से पीछे रह जाते हैं। 13वें एएचएस से निकले निष्कर्ष इस तात्कालिक आवश्यकता पर प्रकाश डालते हैं कि दोनों के बीच संतुलन बनाने की सख्त जरूरत है। स्कूल के लीडरों को चाहिए कि वे शारीरिक शिक्षा और खेल पाठ्यक्रम में निवेश को प्राथमिकता दें- न केवल बच्चों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य एवं कल्याण की दृष्टि से, बल्कि एक ऐसी मजबूत खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए जो भारत को वैश्विक मंच पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की दिशा में ले जाए।" स्पोर्ट्ज़ विलेज के को-फाउंडरऔर फाउंडेशन के मुखिया परमिंदर गिल ने नीतिगत समर्थन और सीएसआर-समर्थित उपायों की जरूरत को हाईलाइट करते हुए अपनी बात आगे बढ़ाई: "सरकारी स्कूल के बच्चों का बेहतर फिटनेस स्तर उत्साहजनक है, जिसके दूरगामी लाभ होंगे। खेल न केवल अकादमिक प्रदर्शन को बेहतर बनाते हैं बल्कि सामाजिक-भावनात्मक कौशल को भी मजबूत करते हैं, समावेश को बढ़ावा देते हैं और लैंगिक समानता को प्रोत्साहन देते हैं। इस प्रगति का लाभ उठाने के लिए, मजबूत नीतियाँ लागू करना और ऐसे संसाधन आबंटित करना जरूरी हो जाता है, जो कॉर्पोरेट्स, सीएसआर पहलों, परोपकारियों और सरकार द्वारा समर्थित उच्च गुणवत्ता वाले खेल कार्यक्रमों तक पहुंच सुनिश्चित करते हैं।" 13वें वार्षिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण की विस्तृत रिपोर्ट यहां डाउनलोड की जा सकती है। स्पोर्ट्ज़ विलेज के बारे में स्पोर्ट्ज़ विलेज भारत का सबसे बड़ा स्कूल खेल संगठन है, जो खेल को बच्चों की शिक्षा एवं विकास का अभिन्न अंग बनाने के लिए समर्पित है। वर्ष 2003 में स्थापित, स्पोर्ट्ज़ विलेज का उद्देश्य यह है कि खेलों को स्कूली पाठ्यक्रमों के साथ एकीकृत करके बच्चों के स्वास्थ्य एवं कल्याण में सुधार किया जाए। चाहे अपने अग्रणी सुसंगठित शारीरिक शिक्षा (पी.ई.) कार्यक्रम एडुस्पोर्ट्स के माध्यम से हो, या सरकारी स्कूलों में अपनी #स्पोर्ट्सफॉरचेंज विकास पहलों के माध्यम से, या पाथवेज़ स्पोर्ट्स एक्सीलेंस … Read more

भैयाजी जोशी बोले मुंबई में मराठी सीखने की जरूरत नहीं, गुजराती से भी काम चल जाएगा

 मुंबई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता सुरेश भैयाजी जोशी के हालिया बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है. भैयाजी जोशी ने कहा कि "मुंबई की कोई एक भाषा नहीं है, इसलिए यहां आने के लिए मराठी सीखने की जरूरत नहीं है. यहां गुजराती से भी काम चल जाएगा." इस बयान पर शिवसेना (UBT) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. गुजराती को बताया घाटकोपर की भाषा आरएसएस नेता के इस बयान का शिवसेना (UBT) नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने विरोध किया है. ठाकरे ने कहा,'मुंबई हो या महाराष्ट्र, हमारी जमीन की पहली भाषा मराठी है. तमिलनाडु या किसी दूसरे राज्य में तमिल की तरह मराठी भी हमारा गौरव है. भैयाजी जोशी ने गुजराती को घाटकोपर की भाषा बताया है. लेकिन यह अस्वीकार्य है. मराठी हमारी मुंबई की भाषा है.' मुंबई को तोड़ने की कोशिश: आव्हाड आरएसएस नेता के बयान पर एनसीपी विधायक जीतेंद्र आव्हाड की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा,'केम छो, केम छो' ऐसा लगता है कि अब मुंबई में सिर्फ यही सुनने को मिलेगा. भैयाजी जोशी भाषा के मुद्दे पर मुंबई को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.' मराठी संस्कृति-पहचान का हिस्सा: फडणवीस मराठी भाषा को लेकर छिड़ी बहस के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का भी इस मुद्दे पर बयान आ गया है. उन्होंने विधानसभा में कहा,'मुंबई, महाराष्ट्र और राज्य सरकार की भाषा मराठी है. यहां रहने वालों को इसे सीखना चाहिए. मराठी भाषा राज्य की संस्कृति और पहचान का हिस्सा है और इसे सीखना हर नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए.' विधानसभा में भिड़े बीजेपी और शिवसेना हालांकि, मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद सदन में शिवसेना (UBT) और बीजेपी के सदस्यों के बीच तीखी बहस हुई. यह बहस इस कदर बढ़ गई कि कामकाज 5 मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया. भैयाजी जोशी का बयान भैयाजी जोशी ने अपने बयान में कहा, "मुंबई में एक नहीं, कई भाषाएं बोली जाती हैं. मुंबई के हर हिस्से की अपनी अलग भाषा है. घाटकोपर इलाके में गुजराती भाषा प्रमुख रूप से बोली जाती है. इसलिए यदि कोई व्यक्ति मुंबई में रहना चाहता है या यहां आना चाहता है, तो उसे मराठी सीखने की अनिवार्यता नहीं है." शिवसेना (UBT) का विरोध शिवसेना (UBT) नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने इस बयान का कड़ा विरोध किया है. उन्होंने कहा, "मुंबई हो या महाराष्ट्र, हमारी जमीन की पहली भाषा मराठी है. जिस तरह तमिलनाडु में तमिल को प्राथमिकता दी जाती है, वैसे ही महाराष्ट्र में मराठी हमारी पहचान और गौरव है. भैयाजी जोशी ने गुजराती को घाटकोपर की भाषा बताया है, लेकिन यह पूरी तरह अस्वीकार्य है. मुंबई की भाषा मराठी है." NCP की प्रतिक्रिया राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने भी इस बयान की निंदा की है. पार्टी नेताओं ने कहा कि मुंबई महाराष्ट्र की राजधानी है और मराठी यहां की मूल भाषा है. किसी भी भाषा को महत्व देना गलत नहीं है, लेकिन मराठी को दरकिनार करना मराठियों के स्वाभिमान के खिलाफ है. मराठी अस्मिता का मुद्दा महाराष्ट्र में मराठी अस्मिता (पहचान) हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है. शिवसेना और एनसीपी जैसे दलों ने हमेशा से मराठी भाषा और संस्कृति की रक्षा को अपने एजेंडे में रखा है. इस बयान के बाद राज्य में मराठी भाषा को लेकर नई बहस छिड़ गई है. भैयाजी जोशी के बयान ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है और मराठी अस्मिता के मुद्दे को फिर से केंद्र में ला दिया है. शिवसेना और एनसीपी जैसे दल इसे मराठी संस्कृति पर हमला मान रहे हैं, जबकि आरएसएस नेता का कहना है कि मुंबई बहुभाषी शहर है और हर भाषा का सम्मान किया जाना चाहिए. यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद आगे क्या मोड़ लेता है. recent visitors 71

मार्क्वार्ट ने भारत में अपनी उपस्थिति को मजबूत किया

•    लगातार विकसित हो रहे इस महत्वपूर्ण बाज़ार में निवेश •    मेकाट्रॉनिक सिस्टम्स की क्षमताओं को बढ़ावा •    साल 2030 तक लगभग 300 नई नौकरियों के अवसर रीथेइम-वेइलहेम/ तलेगांव, मेकाट्रॉनिक्स क्षेत्र की विशेषज्ञ कंपनी, मार्क्वार्ड ने भारत में अपनी मौजूदगी के दायरे को बढ़ाते हुए, आज पुणे के निकट तलेगांव में आधिकारिक तौर पर एक नए प्लांट का शुभारंभ किया है। परिवार के स्वामित्व वाली इस कंपनी ने मुंबई में स्थित अपने प्रोडक्शन साइट की जगह इस नई प्रोडक्शन फैसिलिटी की शुरुआत की है, जिससे इसकी क्षमताओं का काफी विस्तार होगा और तेजी से आगे बढ़ रहे बाज़ार में मुकाबला करने के इसके सामर्थ्य को भी मजबूती मिलेगी। इसकी इमारत, मशीनरी और उपकरणों में 180 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। आने वाले समय में, मार्क्वार्ड अत्याधुनिक सुविधाओं वाले अपने इस प्लांट में मुख्य रूप से भारतीय मोटर-वाहन उद्योग के ग्राहकों के लिए मेकाट्रॉनिक सिस्टम सॉल्यूशंस का निर्माण करेगा। मार्क्वार्ट ग्रुप के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, ब्योर्न ट्विहौस (Björn Twiehaus) इस बारे में बात करते हुए कहते हैं: "मार्क्वार्ट के लिए भारत विकास की असीमित संभावनाओं वाला एक महत्वपूर्ण बाज़ार है। यहाँ हम मोटर वाहन बनाने वाली प्रमुख कंपनियों के साथ मिलकर काम करते हैं और अपनी भारतीय टीम की इनोवेशन करने की काबिलियत और विशेषज्ञता का उपयोग करते हैं। भारत में अपनी सफलता की कहानी को आगे बढ़ाते हुए हमने तलेगांव में इस प्लांट का उद्घाटन किया है। इस तरह, हम भविष्य की आवागमन सुविधाओं के लिए मेकाट्रॉनिक सिस्टम्स उपलब्ध कराने वाली अग्रणी कंपनी के तौर पर अपनी स्थिति को मजबूत कर रहे हैं।" “मेक इन इंडिया” पहल में योगदान मार्क्वार्ट इंडिया के जनरल मैनेजर, विशाल नार्वेकर ने आगे कहा: "तलेगांव में हमारी नई फैसिलिटी का शुभारंभ भारत में मार्क्वार्ट के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। भारत के मोटर-वाहन उद्योग में ग्राहकों के साथ हमारे मजबूत और लंबे समय से कायम रिश्तों ने हमारी प्रगति में अहम भूमिका निभाई है। इस विस्तार से यह जाहिर होता है कि, हम अपने स्थानीय भागीदारों की ज़रूरतों के अनुरूप विश्व स्तरीय मेकट्रॉनिक सॉल्यूशंस उपलब्ध कराने के अपने संकल्प पर कायम हैं। इसके अलावा, यह फैसिलिटी स्थानीय उत्पादन को बढ़ाकर, इनोवेशन को बढ़ावा देकर और नए रोजगार के अवसर पैदा करके 'मेक इन इंडिया' पहल में हमारे योगदान को भी उजागर करती है।" लगभग 300 नई नौकरियों के अवसर मार्क्वार्ड अपनी अत्याधुनिक सुविधाओं वाली असेंबली लाइनों के अलावा, इन-हाउस इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन एवं लॉजिस्टिक्स के साथ तलेगांव के अपने ग्राहकों को संपूर्ण मेक्ट्रोनिक सॉल्यूशंस उपलब्ध कराता है, जिसमें ड्राइव ऑथराइजेशन सिस्टम, गियर सिलेक्टर स्विच और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम शामिल हैं। साथ ही, इस निवेश से सप्लाई चेन का आकार छोटा होगा, प्रतिक्रिया का समय तेज़ होगा और लचीलापन बढ़ेगा। आने वाले पाँच सालों में, मार्क्वार्ड की इस नई साइट पर लगभग 300 अतिरिक्त नौकरियों के अवसर सामने आएंगे। भारत के लिए दीर्घकालिक समर्पण                                                                                              मार्क्वार्ड पिछले कुछ दशकों से भारत में सक्रिय है और पुणे में 450 से ज़्यादा कर्मचारियों के साथ एक डेवलपमेंट सेंटर का संचालन कर रहा है। हमारे विशेषज्ञ पूरी दुनिया में मौजूद मार्क्वार्ड इनोवेशन नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो देश और विदेश की परियोजनाओं पर काम करते हैं। मार्क्वार्ट के शेयरधारक एवं बोर्ड के सदस्य, डॉ. हेराल्ड मार्क्वार्ट ने जोर देकर कहा, "भारत में हमारी टीम पूरी दुनिया में हमारी कामयाबी की बुनियाद है। हमारे भारतीय विशेषज्ञों के इनोवेशन, उनकी काबिलियत और सच्ची लगन की कोई मिसाल नहीं है। इस नए प्लांट के शुभारंभ से देश और दुनिया भर में अपने ग्राहकों के लिए हमारा दीर्घकालिक समर्पण उजागर होता है।" ऊँचे पदों पर मौजूद अतिथियों की उपस्थिति में उद्घाटन समारोह उद्घाटन समारोह में कार बनाने वाली अग्रणी कंपनियों, साझेदार कंपनियों के प्रतिनिधियों और कारोबार एवं राजनीतिक जगत के ऊँचे पदों पर मौजूद प्रतिनिधियों ने भाग लिया। डॉ. हेराल्ड मार्क्वार्ट ने साइट पर मौजूद टीम की उपलब्धियों की तारीफ करते हुए कहा: "आज हम इस प्लांट के उद्घाटन में सक्षम हुए हैं, जो अनेक समर्पित लोगों की सच्ची लगन और उनके अटल इरादे का परिणाम है। मैं इस सफलता में योगदान देने वाले सभी लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूँ।" recent visitors 54