Wednesday, July 8, 2026 6:07 am

आकाश एजुकेशनल ने एस्पायरिंग इंजीनियर्स के लिए पेश किया आकाश इनविक्ट– अल्टीमेट जेईई प्रिपरेशन प्रोग्राम

भोपाल परीक्षा की तैयारी में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी, आकाश एजुकेशनल सर्विसेज लिमिटेड (AESL) ने गर्व के साथ “आकाश इन्विक्टस” का शुभारंभ किया है। यह जेईई की तैयारी के लिए एक अनूठा और अग्रणी एडवांस्ड प्रोग्राम है, जिसे विशेष रूप से सर्वश्रेष्ठ और प्रतिभाशाली इंजीनियरिंग उम्मीदवारों के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह उच्च-स्तरीय, व्यक्तिगत, AI आधारित और परिणाम-केंद्रित कार्यक्रम IIT या विदेशों के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रवेश की तैयारी करने वाले छात्रों को सक्षम बनाने के लिए तैयार किया गया है। आकाश एजुकेशनल सर्विसेज लिमिटेड के ऍमडी एंड सीईओ दीपक मेहरोत्रा ने प्रोग्राम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, "आकाश इन्विक्टस” केवल एक कोचिंग प्रोग्राम नहीं है; यह उन छात्रों के लिए एक परिवर्तनकारी यात्रा है, जो शीर्ष आईआईटी रैंक हासिल करने का लक्ष्य रखते हैं। ये प्रोग्राम दशकों के एक्सपीरियंस, एडवांस्ड टीचिंगमेथड्स और पर्सनलाइज्ड, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन एजुकेशन को टॉप-लेवल फैकल्टी के साथ जोड़ता है। पिछले कुछ वर्षों में, हमारे शिक्षकों ने लाखों छात्रों को शीर्ष आईआईटी में प्रवेश दिलाने में सफलता प्राप्त की है। अध्ययन सामग्री को पूरी तरह से नए तरीके से तैयार किया गया है, जिसमें संपूर्ण पाठ्यक्रम शामिल है और इसे उद्योग के सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञों ने विकसित किया है। हमें पूरा विश्वास है कि यह सर्वोत्तम है – यदि आप बेहतर सामग्री तैयार कर सकते हैं, तो हम आपको पुरस्कृत करेंगे और हमारी टीम में आपका स्वागत करेंगे।"“आकाश इन्विक्टस” लगभग 500 सबसे अच्छे जेईई शिक्षक एक साथ लाता है, जो एक लाख से ज्यादा छात्रों को आईआईटी में सफलता दिलाने में मदद कर चुके हैं। ये शिक्षक छात्रों को उत्कृष्ट मार्गदर्शन देने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। इसका पाठ्यक्रम अत्याधुनिक है और इसे उन छात्रों के लिए खास तौर पर डिज़ाइन किया गया है, जो टॉप आईआईटी रैंक हासिल करने केलिए मेहनत कर रहे हैं। इस प्रोग्राम में फिजिटल लर्निंग और विशेष अध्ययन सामग्री शामिल हैं, जो जेईई एडवांस की सटीक, एआई-सक्षम और अनुकूली तैयारी को सुनिश्चित करते हैं।इस प्रोग्राम में एक कम्प्रीहेंसिव रिविजन और टेस्टिंग मॉड्यूल शामिल है, जो जेईई (Advanced) परीक्षा के फाइनल स्टेज़ से पहले टार्गेटेड प्रेपरेशन पर फोकस करता है। स्टूडेंट्स को स्पेशल कोर्स, डाउट-सॉल्विंग सेशन्स और उनके परफॉर्मेंस को मैक्सिमाइज करने के लिए ध्यान से डिज़ाइन की गई टेस्ट सीरीज़ का बेनिफिट मिलेगा। “आकाश इन्विक्टस” में छोटे बैच होंगे, जिससे छात्रों को अधिक व्यक्तिगत ध्यान मिल सके और उनकी हर जरूरत को सही तरीके से पूरा किया जा सके। "कुछ महीने पहले शुरू हुए इस कार्यक्रम ने पहले ही 2500 से ज्यादा टॉप छात्रों को अपनी ओर आकर्षित किया है। तीन प्रमुख स्तंभों – नवाचारपूर्ण शिक्षण विधि और पाठ्यक्रम, एक्सपर्ट फैकल्टी और एडवांस्ड टूल्स – पर आधारित “आकाश इन्विक्टस”जेईई की तैयारी में नए मानक स्थापित करेगा। ये सभी नए फीचर्स आकाश की विश्वसनीयता, विश्वास और तकनीकी विशेषज्ञता द्वारा पूरी तरह से समर्थित हैं।" कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण अध्ययन संसाधनों में नवाचार पर इसका विशेष ध्यान है। छात्रों को क्यूआर कोड के साथ सम्मिलित अध्याय-वार अभ्यास वर्कशीट प्रदान की जाएंगी, जो डिटेल्ड सॉल्यूशंस और स्टेप-बाय-स्टेप मार्किंग स्कीम हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि छात्र न केवल जेईई की तैयारी में बल्कि स्कूल और बोर्ड परीक्षाओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें। करें। एडिशनल फीचर्स में कम्पटीटिव ओलंपियाड के लिए वर्कशॉप्स, चैप्टर-वाइज एनालिसिस और सॉल्यूशन्स के साथ पिछले जेईई क्वेश्चन पेपर्स का एक बड़ा कलेक्शन और JEE चैलेंजर रिसोर्सेज शामिल हैं, जो स्टूडेंट्स को उनकी स्ट्रैटेजी सुधारने के लिए डीप इंफॉर्मेशन, प्रैक्टिस क्वेश्चन्स और एनालिसिस प्रोवाइड करता है। इसके अलावा, यह प्रोग्राम फिजिकल और डिजिटल रिसोर्सेज की ताकत को मिलाकर कंफ्लिकेटेड प्रॉब्लम्सको सिंपल बनाने के लिए फिजिकल स्टडी मटेरियल को इंटीग्रेट करता है, और फ्लेक्सिबल, डिमांड-आधारित लर्निंग के लिए एक्सपर्ट फैकल्टी द्वारा रिकॉर्डेड वीडियो लेक्चर्स प्रोवाइड करता है। “आकाश इन्विक्टस” में एंट्री बहुत ही सलेक्टिव है, स्टूडेंट्स को एक स्पेशल एंट्रेंस एग्जाम के जरिये चुना जाता है ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि केवल सबसे टैलेंटेड और कमिटेड माइंड्स ही प्रोग्राम में शामिल हों। 11वीं में ज्वाइन करने वाले स्टूडेंट्स के लिए दो साल का प्रोग्राम और 10वीं में ज्वाइन करने वाले स्टूडेंट्स के लिए तीन साल का प्रोग्राम डिज़ाइन किया गया है। “आकाश इन्विक्टस”  भारत के 25 शहरों में अवेलेबल होगा – दिल्ली NCR, चंडीगढ़, लखनऊ, मेरठ, प्रयागराज, कानपुर, वाराणसी, जयपुर, कोटा, पटनारांची, बोकारो, कोलकाता, दुर्गापुर, भुवनेश्वर, मुंबई, पुणे, नागपुर, अहमदाबाद, वडोदरा, इंदौर, भोपाल, हैदराबाद, चेन्नई और बेंगलुरु। एक डेडिकेटेड रिसर्च टीम ने पार्टिसिपेंट्स के लिए एक ट्रांसफॉर्मेटिव एजुकेशनल एक्सपीरियंस सुनिश्चित करने के लिए सबसे हाई-स्टैंडर्ड और विकसित एग्जाम पैटर्न के साथ कोर्स तैयार किया है। अधिक जानकारी के लिए अभिभावक और छात्र 7303759494 पर संपर्क कर सकते हैं या support.invictus@aesl.in पर ईमेल कर सकते हैं। recent visitors 47

ग्वालियर की लाल टिपारा गौशाला में लगी भीषण आग, फायर ब्रिगेड मौके पर, मची अफरा तरफी

ग्वालियर  मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी गौशाला के नाम से विख्यात ग्वालियर की लाल टिपारा गौशाला में एक बड़ा हादसा हो गया। हादसा इतना गंभीर था कि यहां रहने वाली 10000 गोवंशों की जान पर बन आई। लाल टिपारा गौशाला में आग की तेज लपटें उठते देखा सभी का जी घबरा गया। वहीं, इस घटना ने यहां मौजूद प्रबंधन के भी कान खड़े कर दिए। प्रदेश की सबसे बड़ी गौशाला में आग से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होना नगर निगम की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। गौशाला संरक्षक संत ऋषभदेव आनंद महाराज ने बताया कि घटना के पहले यहां होली को लेकर एक बैठक चल रही ही थी कि यह हादसा हुआ। शॉर्ट सर्किट की वजह से पराली के तैयार किए गए सोफों में आग लग गई। गौशाला में सुरक्षा के इंतजाम इतने बेहतर नहीं थे। जिसकी वजह से आग बढ़ती गई और तकरीबन आधे घंटे तक यह क्षेत्र आग की चपेट में रहा। लगभग 25 मिनट के बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। गनीमत रही कोई हताहत नहीं हुआ गौशाला संरक्षक ने बताया कि अच्छी बात है की घटना दिन के समय हुआ। सभी लोग उस जगह पर मीटिंग कर रहे थे। इसलिए वहां कोई गौवंश नहीं थे। अच्छी बात की कोई हताहत नहीं हुआ। ना ही कोई गाय हताहत हुई है। ना किसी व्यक्ति विशेष घायल हुआ है। यह घटना अपने आप में सीख भी है कि शॉर्ट सर्किट के चलते ऐसी घटनाएं हो सकती है। इनका हम अवलोकन करें। हो सकता था बड़ा हादसा आपको बता दें कि गौशाला परिसर में ही बायो सीएनजी प्लांट भी लगा हुआ है। इसमें गोबर के माध्यम से सीएनजी बनाने का काम भी चालू हो चुका है। यदि यह आग फैलने हुए प्लांट तक पहुंच जाती तो यह हादसा बहुत बड़ा हो सकता था। इस मामले को लेकर समिति के प्रबंधक ऋषभदेव आनंद महाराज का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में गोवंश और बड़े परिसर को देखते हुए यहां पर सुसज्जित रूप से तैयार फायर ब्रिगेड उपलब्ध रहनी चाहिए। जिससे यदि इस प्रकार का कोई हादसा होता है तो उसे पर नियंत्रण पाया जा सके। नगर निगम की सुरक्षा पर उठे सवाल आपको बता दें कि प्रदेश की सबसे बड़ी गौशाला में इस समय लगभग 10000 से अधिक गोवंश मौजूद है। साथ ही उनकी सेवा के लिए यहां सैकड़ों लोग काम करते हैं। ऐसे में गौशाला के अंदर अग्निशमन यंत्रों और तकनीकी रूप से आग को काबू नहीं कर पाने के इंतजाम ना होना एक बड़ा विषय है। इस गौशाला का संचालन नगर निगम की किया जाता है। ऐसे में यह हादसा नगर निगम की लापरवाही को भी दर्शाता है। recent visitors 50

दक्षिण कोरिया की वायुसेना के फाइटर जेट ने गलती से एक बस्ती पर ही बम गिरा दिए

 सियोल दक्षिण कोरिया की वायुसेना के फाइटर जेट ने गलती से एक बस्ती पर ही बम गिरा दिए। इसमें 8 नागरिक बुरी तरह जख्मी हो गए। गुरुवार को एक सैन्य अभ्यास के तहत वायुसेना के केएफ-16 फाइटर जेट से 8 बम गिराए गए। इसमें आम लोग जख्मी हो गए हैं। यह हादसा उत्तर कोरिया के निकट बसे शहर पोशिओन में हुआ। यह क्षेत्र दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल से 40 किलोमीटर उत्तर पूर्व में है। एक बयान में दक्षिण कोरिया की वायुसेना ने बताया कि केएफ-16 फाइटर जेट से गलती से फायरिंग रेंज के बाहर बम गिर गए। इसमें नागरिकों को नुकसान पहुंचा है। न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के अनुसार वायुसेना ने इस मामले की जांच के लिए एक कमेटी के गठन का फैसला लिया है कि आखिर यह नुकसान क्यों हुआ। सेना के साथ मिलकर वायुसेना भी अभ्यास कर रही थी। इसमें हवा से ही दुश्मन के ठिकाने को निशाना बनाने का अभ्यास चल रहा था। एयर फोर्स ने इस गलती के लिए माफी मांगी है। एयरफोर्स ने कहा कि हम इस चूक पर खेद व्यक्त करते हैं। उम्मीद है कि इस घटना में घायल लोग जल्द ही स्वस्थ हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि हम जल्दी ही पीड़ितों के लिए कदम उठाएंगे। योनहाप न्यूज एजेंसी के अनुसार इस हादसे में 6 आम नागरिकों के अलावा दो सैनिक भी जख्मी हुए हैं। राहत की बात यह रही कि सभी घायल खतरे से बाहर हैं। इस हादसे में 7 इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है। पोशिओन इलाके के लोगों ने इस घटना के खिलाफ प्रदर्शन किया है। इन लोगों का कहना है कि हम सालों से यहां पड़ोस में ट्रेनिंग ग्राउंड बनाने का विरोध करते रहे हैं। इसकी वजह यह है कि इससे लोगों की दिनचर्या बाधित होती है। इसके अलावा नुकसान का खतरा भी हमेशा बना रहता है। देश के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि गुरुवार को अमेरिकी सेना के साथ मिलकर लाइव-फायर एक्सरसाइज चल रही है। इसके बाद अगले साल से सालाना अभ्यास भी होना है। सोमवार से ही अमेरिका और साउथ कोरिया के बीच एनुअल फ्रीडम एक्सरसाइज होनी है। यह संयुक्त अभ्यास 20 मार्च तक चलना है। ऐसे में उससे पहले यह घटना होना दुर्भाग्यपूर्ण है। recent visitors 38

सेंट जान्स चर्च में संध्या कालीन प्रार्थना का आयोजन

Evening prayer held at St John’s Church भोपाल (सुशील दामले) ! राजधानी में 40 दिवसीय उपवास की शुरुआत हो गई है,प्रभु यीशु मसीह के क्रूस पर दिए बलिदान के पवित्र दिनों का आरंभ हो गए हैं,ईसाई समाज के लोग 40 दिनों तक उपवास रखकर प्रभु यीशु की आराधना करते हैं,इस दौरान जाने-अनजाने में जो भी पाप अथवा गलत कार्य किए गए हैं और किसी के दिल को ठेस पहुंचाया है,उनसे हृदय से क्षमा याचना करते हैं,अपनी क्षमता के अनुसार गरीब परिवारों की मदद करते हैं,यह 40 दिन के उपवास में लोग प्रार्थना,परहेज और उपवास के रूप में मनाते हैं,वहीं गोविंदपुरा स्थित सेंट जॉन चर्च में भी प्रतिदिन संध्या कालीन प्रार्थना हो रही है,फॉदर अनिल मार्टिन ने हमें बताया कि,प्रभु यीशु के बलिदान के गीत गाने के साथ ही प्रार्थना की जा रही हैं,प्रभु यीशु के क्रूस पर दिए गए बलिदान को पवित्र दिनों के रूप में याद किया जाता हैं,ये विशेष दिनों को दुख भोग के दिन होते हैं इन दिनों में विशेष रूप से क्षेत्र अनुसार मसीही परिवार प्रतिदिन संध्या कालीन प्रार्थना करते हैं,और साथ ही सेवा के कार्य करते हैं,जैसे वृद्ध आश्रम,अनाथ आश्रम सहित ऐसे लोग जो मोहताज एवं विकलांग हैं,ऐसे लोगों की सेवा करते हैं,वहीं 20अप्रैल को इस पवित्र महा का समापन होगा,तत्पश्चात ईस्टर के रूप में ये पर्व मनाया जाएगा recent visitors 78

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को मजबूत करने का संकल्प: नए प्रदेशाध्यक्ष का बड़ा बयान

Resolution to strengthen the Gondwana Ganatantra Party: Big statement by the new state president भोपाल (सुशील दामले)! गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तिरुमाल दादा तुलेश्वर सिंह मरकाम ने मुझे प्रदेशाध्यक्ष पद का दायित्व सौंपा हैं। मैं पार्टी का एक साधारण सा कार्यकर्ता हूं, पेनवासी दादा हीरा सिंह मरकाम के महान आंदोलन का समर्पित सिपाही हूं। जो जिम्मेदारी मुझे दी गई हैं वो आप सब के आशीर्वाद और सहयोग से पूरा करने में अपना सब कुछ समर्पित कर दूंगा। किसी भी पार्टी का कार्यकर्ता ही उसकी असल पूंजी हैं, मैं नेता नहीं पार्टी एक सिपाही हूं और मैं पार्टी को सामूहिक नेतृत्व देने का वादा करता हूं। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की रीति, नीति,विचार और सिद्धातों को आप सब के साथ मिलकर और अधिक मजबूत करने का भरकस प्रयास करूंगा। मध्यप्रदेश में रहने वाले आदिवासी समाज के साथ ही साथ इस अंचल में रहने वाले सभी वर्गों के लोगों को सरकार की उपेक्षाओं, भ्रष्टाचार और शोषण से निजाद दिलाने के लिए हम सब एक मंच पर मिलकर संघर्ष करेंगे और आदिवासी अंचल के विकास के लिए कार्य करेंगे। समाज को मजबूती से संगठित किया जाएगा आदिवासी समाज को जागरूक और एकजुट करने की दिशा में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का प्रदेश संगठन पूरी ताकत से काम करेगा। जल, जंगल और जमीन के मुद्दे पर आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई गोंडवाना गणतंत्र पार्टी पूरी ताकत से लड़ेगी। प्रदेश में दिखावे के तौर पर लागू पेसा एक्ट को पूरी तरह से लागू करने की मांग की जाएगी। मैं गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के मुखिया के तौर पर पार्टी और आदिवासी समाज के हितों की रक्षा के लिए कृत संकल्पित होकर कार्य करूंगा। आदिवासी समाज को जागरूक और एकजुट करने की दिशा में प्रदेश संगठन पूरी ताकत से काम करेगा। जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई गोंडवाना गणतंत्र पार्टी पूरी ताकत से लड़ेगी। आदिवासी क्षेत्रों में उपलब्ध खनिजों पर आदिवासियों को हक दिलाने। वनोपज पर आदिवासियों का अधिकार सुनिश्चित किए जाने हेतु प्रयास करेंगे। वर्तमान समय में प्रदेश में आदिवासी समाज की जनसंख्या कुल आबादी का 25 प्रतिशत है। विधानसभा में आदिवासी जनप्रतिनिधियों के लिए 25% स्थान आरक्षित कराए जाने का प्रयास किया जाएगा। प्रदेश के 25% आदिवासियों के बिना कोई सरकार नहीं बना सकता प्रदेश में आदिवासियों की जनसंख्या लगभग 2 करोड़ है। मध्यप्रदेश में आदिवासी मतदाता 21% से अधिक है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी पिछले 35 वर्षों से आदिवासी समाज के बीच संघर्ष कर रही है, किंतु पार्टी को राजनीतिक सफलता नहीं मिल पाई, वर्तमान में प्रदेश में एक भी विधायक नहीं है। जबकि उत्तर प्रदेश में मात्र 15% दलित मतदाता है जिनकी एकता के कारण बसपा तीन बार सरकार बनाने में सफल रही। बसपा के उत्तर प्रदेश के मतदाताओं की एकजुटता के कारण आज राष्ट्रीय दल की श्रेणी में है। वही छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश में अनुसूचित जनजाति की अच्छी खासी आबादी होने के बाद भी गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को विशेष सफलता नहीं मिल पाई है। इसके पीछे एक कारण यह भी है कि प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस आदिवासी मतदाताओं को भ्रमित करने में सफल हो जाती है। आदिवासी क्षेत्रों की आरक्षित सीटों पर राष्ट्रीय पार्टियों से जितने वाले हमारे समाज के नेता समाज की बात कभी नहीं उठाते वे अपनी पार्टी लाइन पर काम करते है। यदि कारण है कि प्रदेश में आदिवासी समाज की कोई आवाज उठाने वाला नहीं है, कोई सुनने वाला नहीं है। प्रदेश में आदिवासियों का शोषण और उत्पीड़न चरम पर है। नौकरियों की ठेका प्रथा और पलायन आदिवासियों के खिलाफ साजिश है आदिवासी समाज दिनों दिन पिछड़ता जा रहा है। सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जन जाति वर्ग के आरक्षण का लाभ समाज को नहीं मिल पा रहा है। क्योंकि अधिकांश नौकरियों ठेके और आउटसोर्सिंग के हवाले कर दी गई है। जिसका सबसे अधिक खमियाजा आदिवासी समाज के युवाओं को उठाना पड़ रहा है। आजादी के 75 साल बाद आदिवासी अंचल में लोगों अच्छे रोजगार के अवसर तो छोड़िए मजदूरी तक नहीं मिल पा रही है। मध्यप्रदेश के मजदूर अन्य प्रदेशों में जाकर मजदूरी कर रहे है। प्रदेश की सरकार मजदूरों का पलायन रोकने का प्रयास नहीं कर रही है। प्रदेश में मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है। दूसरी ओर रोजगार गारंटी योजना में हमारे श्रमिकों के नाम पर करोड़ो रूपये का भ्रष्टाचार हो रहा है। इतने बड़े स्तर पर गांव गांव में भ्रष्टाचार व्याप्त है जिसके बाद भी जिला और प्रदेश प्रशासन दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर किसी तरह की कार्यवाही नहीं कर रहा है। ये सरकारें नहीं चाहती कि आदिवासी मजदूर आर्थिक रूप से मजबूत हो इसलिए इन्हें गांवों में मजदूरी देने का प्रयास बंद कर दिया है, गांव और छोटे परिवारों के काबिल नौकरियों ठेके पर दे दी जिससे आदिवासी समाज को आरक्षण का लाभ न मिल पाए। दूसरे प्रदेशों में मजदूरों के पलायन के पीछे इनकी सोच है आदिवासी समाज को कमजोर करना, बड़ी संख्या में इनके प्रदेश से बाहर रहने से आदिवासियों का संख्या बल कम होता है। खनिजों की लूट मची है मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचल में ही सबसे अधिक खनिज भंडार है, पर इससे किसी भी तरह का लाभ आदिवासी समाज की नहीं मिलता। इसका लाभ बड़े उद्योगपति और बाहरी व्यापारियों द्वारा उठाया जाता है। इन क्षेत्रों में रहने वाले जनजाति लोगों को इन खनिज भंडारों से कोई लाभ नहीं मिलता दूसरी और इन क्षेत्रों से आदिवासियों को विस्थापित होना पड़ रहा रहा। आदिवासियों का न तो उचित ढंग से पुनर्वास हो रहा है और न ही उन्हें उचित मुआवजा मिलता है और न ही रोजगार दिया जा रहा है। इन खनिज भंडारों से होने वाली अरबों खरबों की आय से उद्योगपति, नेता और सरकार अपनी जेबें भर रही है अधिकारी जमकर भ्रष्टाचार कर रहे है। खनिजों से होने वाली आय से पूरे प्रदेश में विकास कार्य करवाए जाते है और सबसे कम राशि आदिवासी क्षेत्रों पर खर्च किया जाता है जिसके कारण ये क्षेत्र आज भी पिछड़े है।आदिवासी अंचल से खनिजों से होने वाली आय का उपयोग आदिवासीओ के विकास और हित में नहीं किया जा रहा है जो आदिवासियों के साथ खुला अन्याय है। आदिवासी अंचल में रेत खदानों पर बाहरी माफियाओं का कब्जा करवा दिया गया है गरीब, आदिवासी, किसान खुद की रेत … Read more

‘Mohammed Shami ने रोजा ना रखकर गुनाह किया, माफी मांगें’

 बरेली यूपी के बरेली के मौलाना इंडियन क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी से खफा हैं. उनका कहना है कि मोहम्मद शमी ने रमजान में रोजा नहीं रखा, वह ऑस्ट्रेलिया से मैच के दौरान ग्राउंड पर जूस/एनर्जी ड्रिंक पीते नजर आए थे. उन्होंने जानबूझकर रोजा नहीं रखा, जो की गुनाह है, शरीयत की नजर में वो मुजरिम हैं. दरअसल, दुबई में खेले गए मैच के दौरान मोहम्मद शमी का जूस पीते हुए वीडियो सामने आया था. जिसपर बरेली के मौलानाओं ने नाराजगी जताई. ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने बयान जारी करके कहा कि इस्लाम ने रोजे को फर्ज करार दिया है. अगर कोई शख्स जानबूझकर रोजा नही रखता है तो वह निहायती गुनेहगार है. मोहम्मद शमी ने रोजा नहीं रखा जबकि रोजा रखना उनका वाजिब फर्ज है. रोजा ना रखकर शमी ने बहुत बड़ा गुनाह किया है, शरीयत की नजर में वो मुजरिम हैं. तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने रमजान के माह में ऐसा करने पर उनके बचपन के कोच बदरुद्दीन स‍िद्दीकी का बयान भी सामने आया है. बदरुद्दीन ने कहा- इस मामले में मोहम्मद शम्मी की कोई गलती नहीं है, पूरा देश उनके साथ है. देश के आगे कुछ नहीं है, वह यही संदेश सभी मौलवियों को देना चाहते हैं. बदरुद्दीन स‍िद्दीकी ने कहा- पहले देश है, उसके आगे कुछ भी नहीं है. वह बाद में भी रोजा रख सकता है. हमारा इस्लाम इतना छोटा नहीं है कि कहीं सिकुड़ जाए एक जगह… इस्लाम में ये भी है कि यदि आप बीमार हैं तो बाद में रोजा रख सकते हैं. जो लोग यह सवाल उठा रहे हैं वे देश को सपोर्ट नहीं कर रहे हैं. वह (शमी) तो देश के लिए कुछ भी करने को तैयार है, रोजा भी छोड़ता है… वह सबुकछ देश के लिए कर रहा है. टीम को चैम्प‍ियंस ट्रॉफी का फाइनल खेलना है और इस तरह के बयान से खिलाड़ी का मनोबल टूटता है… और आप बेवकूफी वाले बातें कर रहे हैं. किसने आपको हक दिया इस तरह की बातें करने का. मोहम्मद शमी के भाई ने क्या कहा? वहीं इस पूरे मामले में मोहम्मद शमी के भाई हशीब शमी ने कहा- ख‍िलाड़ी होने के नाते जब मैच खेलना होता है, तो  गेंदबाजी में काफी मेहनत करनी होती हैं.  ऐसे में रमजान के माह में रोजा नहीं रख पाते हैं. अगर खेल नहीं हो रहा होता है तो वह सभी रोजे रखते हैं. अगर मैच के दौरान शमी ने रोजा नहीं रखा है, तो इसे वो आगे रख लेते हैं. बकौल मौलाना शहाबुद्दीन रजवी- मोहम्मद शमी को हरगिज ऐसा नहीं करना चाहिए. मैं उनको हिदायत और नसीहत देता हूं कि इस्लाम के जो नियम हैं उनपर वो अमल करें. क्रिकेट, खेलकूद भी करें, सारे काम अंजाम दें, मगर अल्लाह ने जो जिम्मेदारी बंदे को दी है, उनको भी निभाएं. शमी को ये सब समझना चाहिए. शमी अपने गुनाहों के लिए अल्लाह से माफी मांगें. आपको बता दें कि दुबई में खेले गए इंडिया बनाम ऑस्ट्रेलिया सेमीफइनल मैच के दौरान मोहम्मद शमी की एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसमें वह गर्मी के बीच एनर्जी ड्रिंक पीते नजर आ रहे हैं. जिसके बाद मौलाना लोगों ने इसे गलत करार दिया. उनका कहना है कि रमजान में रोजा न रखना गुनाह है. मौलानाओं ने शमी को नसीहत देना शुरू कर दिया है. इस कड़ी में बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का बयान सामने आया है.     recent visitors 56

हर घंटे भस्मक में डाला जा रहा Union Carbide का 180 किलोग्राम कचरा

पीथमपुर इंदौर के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के एक निपटान संयंत्र में भोपाल (Bhopal) के यूनियन कार्बाइड (Union Carbide) कारखाने के जहरीले कचरे को जलाने के दूसरे दौर के परीक्षण की प्रक्रिया बुधवार देर रात शुरू हो गई. इस चरण में 10 टन कचरे की एक और खेप को नष्ट किया जाएगा. इस प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों ने यह जानकारी दी. यूनियन कार्बाइड के 10 टन जहरीले कचरे को जला कर नष्ट करने की दूसरा ट्रायल रन गुरुवार सुबह 10.30 से 11 बजे शुरू होगा. दूसरे ट्रायल रन में  180 किलो कचरा प्रति घंटे की दर से जलाया जाएगा. इस दौरान इंसीनेटर का तापमान 900 डिग्री सेल्सियल से ज्यादा रहेगा. इस मौके पर केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी मौजूद रहेंगे. ट्रायल रन का दूसरा दौर 8 मार्च को ख़त्म होगा. ट्रायल के बाद 55 से 56 घंटे तक कचरा जलाया जाएगा. गौरतलब है कि हाईकोर्ट के निर्देश पर ये जहरीला कचरा इंदौर के पीथमपुरा स्थित प्लांट में नष्ट किया जा रहा है. 337 टन कचरे के निपटान की है योजना मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक इस कचरे के निपटान का परीक्षण सुरक्षा मानदंडों का पालन करते हुए तीन दौर में किया जाना है और अदालत के सामने तीनों परीक्षणों की रिपोर्ट 27 मार्च को पेश की जानी है. कचरे को ऐसे किया जाएगा नष्ट राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी श्रीनिवास द्विवेदी ने बताया कि पीथमपुर के अपशिष्ट निपटान संयंत्र में यूनियन कार्बाइड कारखाने के जहरीले कचरे को परीक्षण के तौर पर भस्म करने के दूसरे दौर की प्रक्रिया शुरू हो गई है. भस्मक में कचरा डाले जाने से पहले इसे करीब 12 घंटे तक खाली चलाकर तय तापमान तक पहुंचाया जाएगा. उन्होंने बताया कि दूसरे दौर के परीक्षण के दौरान भस्मक में हर घंटे 180 किलोग्राम कचरा डाला जाएगा और इस तरह कुल 10 टन कचरे को जलाया जाएगा. पहले दौर में सफलता पूर्वक नष्ट किए गए कचरे द्विवेदी ने बताया कि इस संयंत्र में यूनियन कार्बाइड कारखाने के 10 टन कचरे को परीक्षण के तौर पर भस्म करने का पहला दौर 28 फरवरी से शुरू होकर तीन मार्च को खत्म हुआ था. उन्होंने बताया कि पहले दौर का परीक्षण करीब 75 घंटे चला और इस दौरान संयंत्र के भस्मक में हर घंटे 135 किलोग्राम कचरा डाला गया था. खतरनाक स्तर से नीचे था उत्सर्जन कचरे में ये पदार्थ हैं शामिल प्रदेश सरकार के मुताबिक यूनियन कार्बाइड कारखाने के कचरे में इस बंद पड़ी इकाई के परिसर की मिट्टी, रिएक्टर अवशेष, सेविन (कीटनाशक) अवशेष, नेफ्थाल अवशेष और ‘अर्द्ध प्रसंस्कृत' अवशेष शामिल हैं. राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि वैज्ञानिक प्रमाणों के मुताबिक इस कचरे में सेविन और नेफ्थाल रसायनों का प्रभाव अब  खत्म हो चुका है. बोर्ड के मुताबिक फिलहाल इस कचरे में मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस का कोई अस्तित्व नहीं है और इसमें किसी तरह के रेडियोधर्मी कण भी नहीं हैं. भोपाल में 2-3 दिसंबर 1984 की रात बरपा था कहर भोपाल में दो और तीन दिसंबर 1984 की दरमियानी रात यूनियन कार्बाइड कारखाने से अत्यधिक जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस का रिसाव हुआ था.इससे कम से कम 5,479 लोग मारे गए थे और हजारों लोग अपंग हो गए थे. इसे दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदाओं में से एक माना जाता है. पीथमपुर में कचरे को जलाने का हो रहा था विरोध भोपाल गैस त्रासदी के लिए जिम्मेदार कारखाने का कचरा पीथमपुर लाए जाने के बाद इस औद्योगिक क्षेत्र में कई विरोध प्रदर्शन हुए. प्रदर्शनकारियों ने इस कचरे के निपटान से इंसानी आबादी और आबो-हवा को नुकसान की आशंका जताई जिसे प्रदेश सरकार ने सिरे से खारिज किया है. recent visitors 50