Sunday, July 5, 2026 1:34 am

IRGMA द्वारा बड़े पैमाने पर आयात घोटाले के पर्दाफाश के बाद, भारत ने प्रतिबंधित मेडिकल ग्लव्स के अवैध आयात पर कार्रवाई की तैयारी की

नई दिल्ली, देश के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन, फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने भारत के हेल्थ-केयर इकोसिस्टम और घरेलू विनिर्माण उद्योग के हितों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए विश्व व्यापार संगठन (WTO) को मेडिकल एवं सर्जिकल ग्लव्स (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश, 2024 (QCO) प्रस्तुत किया है। QCO के लागू होने के बाद सभी प्रकार के मेडिकल एवं सर्जिकल ग्लव्स के लिए BIS प्रमाणन अनिवार्य हो जाएगा। इस तरह मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम एवं चीन से गैर-कानूनी तरीके से आयात किए जाने वाले घटिया ग्लव्स से भरे बाजार में गुणवत्ता आश्वासन और विनियामक निरीक्षण आसान हो जाएगा, जिसकी बहुत जरूरत है। यह घोषणा ऐसे महत्वपूर्ण समय पर की गई है, जब इंडियन रबर ग्लव्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IRGMA) ने ग्लव्स के आयात में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है। गौरतलब है कि अनैतिक तरीके से काम करने वाले आयातक QCO के लागू होने से पहले ही घटिया गुणवत्ता वाले नॉन-मेडिकल ग्लव्स की जमाखोरी कर रहे हैं, उन्हें मेडिकल ग्लव्स के रूप में दोबारा पैक कर रहे हैं, तथा अस्पतालों और क्लीनिकों तक पहुँचा रहे हैं। मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाली ऐसी गतिविधियाँ बेहद खतरनाक हैं, जो भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल को कमजोर करने के साथ-साथ घरेलू उद्योग को अस्थिर बना रही है। QCO से पहले जमाखोरी और ट्रेड डंपिंग के लिए चीन की चालबाज़ी •    आयात से भरपूर लाभ उठाने की होड़: आयातक QCO के लागू होने की संभावना को देखते हुए बड़ी मात्रा में नॉन-मेडिकल ग्लव्स की जमाखोरी कर रहे हैं। इसका कारण यह है कि, उन्होंने BIS प्रमाणन के सख्त नियम के अनिवार्य होने के बाद ऐसे घटिया ग्लव्स पर गलत लेबल लगाकर उन्हें मेडिकल ग्लव्स के रूप में दोबारा पैक करने की योजना बनाई है। •    मलेशिया और थाईलैंड के रास्ते डंपिंग: अमेरिकी टैरिफ के कारण चीन से ग्लव्स के निर्यात पर प्रतिबंध लग गया है, इसलिए चीनी निर्माता अपने अतिरिक्त स्टॉक को मलेशिया एवं थाईलैंड के रास्ते भेज रहे हैं। इन ग्लव्स को यहाँ फिर से पैक किया जाता है और कृत्रिम रूप से कम कीमतों पर भारत भेजा जाता है। इस रास्ते से आने वाले शिपमेंट विनियामक जाँच से बच निकलते हैं, जिससे घटिया गुणवत्ता वाले ग्लव्स भारत के हेल्थ-केयर सप्लाई चेन में प्रवेश कर जाते हैं। •    मरीजों और स्वास्थ्य-कर्मियों के लिए गंभीर खतरा: इस तरह के घटिया ग्लव्स आवश्यक AQL (स्वीकार्य गुणवत्ता स्तर) सुरक्षा परीक्षणों में विफल हो जाते हैं, जिससे संक्रमण तथा संपर्क से दूषित होने का जोखिम बढ़ जाता है और अस्पतालों में स्वच्छता के साथ खिलवाड़ होता है। •    बाज़ार में अनुचित तरीके से हेर-फेर: भारतीय निर्माता BIS और QCO के सख्त मानकों का पालन करते हैं, जबकि दूसरी ओर अवैध तरीके से आयात किए गए ऐसे ग्लव्स को कृत्रिम रूप से कम कीमतों पर बेचा जा रहा है। इस वजह से घरेलू निर्माता बाज़ार में मुकाबले से बाहर हो रहे हैं और मेडिकल मैन्युफैक्चरिंग में भारत की आत्मनिर्भरता खतरे में पड़ गई है। QCO: भारत के हेल्थकेयर और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने वाला आदेश अनुमानों के अनुसार, ग्लव्स के लिए QCO से सालाना ₹600-700 करोड़ मूल्य के ग्लव्स के आयात को विनियमित किया जाएगा। साथ ही इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि, भारत में चिकित्सा उपयोग के लिए केवल BIS-प्रमाणित ग्लव्स — चाहे वे आयातित हों या घरेलू रूप से निर्मित हों— ही बेचे जा सकें। यह आदेश डिस्पोजेबल सर्जिकल ग्लव्स, चिकित्सा जाँच में एक बार उपयोग में आने वाले ग्लव्स और पोस्ट-मॉर्टम रबर ग्लव्स पर लागू होगा, जिससे घटिया ग्लव्स के थोक आयात पर रोक लगेगी और अस्पताल में केवल ISI मार्क वाले ग्लव्स का उपयोग सुनिश्चित होगा। नियंत्रण के लिए इस प्रकार का कदम उठाना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि वर्तमान में आयात किए जाने वाले ग्लव्स में से 70% से ज़्यादा BIS के मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं। CDSCO की ओर से जारी की गई कई अधिसूचनाओं और विनियामक चेतावनियों के बावजूद, अमेरिका और दूसरे विकसित देशों द्वारा अस्वीकार किए गए ग्लव्स अभी भी गुणवत्ता जाँच को दरकिनार करके भारत में आ रहे हैं। QCO को लागू किए जाने के बारे में अपनी राय जाहिर करते हुए, कोंडा अनिंदिथ रेड्डी, मैनेजिंग डायरेक्टर, एनलिवा-वाडी सर्जिकल्स, ने कहा: "गुणवत्ता नियंत्रण का यह आदेश भारत के स्वास्थ्य-सेवा कर्मियों और मरीजों की सुरक्षा के लिए काफी मायने रखता है। घटिया ग्लव्स के उपयोग से परस्पर संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है, जिससे जान को खतरा हो सकता है। स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को आगे बढ़कर BIS-प्रमाणित ग्लव्स की मांग करनी चाहिए, साथ ही नियामक एजेंसियों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि करना चाहिए कि अवैध आयात पर तुरंत रोक लगाई जाए।" IRGMA द्वारा सरकार की ओर से तुरंत कार्रवाई की मांग हालाँकि QCO इस दिशा में उठाया गया एक मजबूत कदम है, इसके बावजूद IRGMA ने अलग-अलग मंत्रालयों से यह अनुरोध किया है कि इन नए नियमों के प्रभावी होने से पहले ग्लव्स की जमाखोरी और अवैध आयात से जुड़ी गतिविधियों की रोकथाम के लिए तुरंत कदम उठाए जाएँ। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) और CDSCO •    "मेडिकल ग्लव्स" की परिभाषा के दायरे को बढ़ाया जाए, ताकि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उपयोग किए जाने वाले हर तरह के ग्लव्स को सख्त प्रमाणन संबंधी दिशा-निर्देशों के अंतर्गत लाया जा सके। •    घटिया ग्लव्स को दोबारा पैक करके स्वास्थ्य सेवा केंद्रों को आपूर्ति किए जाने की रोकथाम के लिए अस्पतालों में अनिवार्य ऑडिट का नियम लागू किया जाए। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (DGFT एवं सीमा शुल्क) •    BIS प्रमाणीकरण से बचने के लिए ग्लव्स को गलत तरीके से “नॉन-मेडिकल” के रूप में वर्गीकृत करने पर पाबंदी लगाई जाए। •    इनके आवागमन पर शुरू से अंत तक नज़र रखने की जाँच व्यवस्था को लागू किया जाए, ताकि नॉन-मेडिकल श्रेणियों के तहत आयात किए गए ग्लव्स को दोबारा पैक करके अस्पतालों को बेचना संभव न हो सके। •    चीनी ग्लव्स को मलेशिया और थाईलैंड के रास्ते दोबारा भेजे जाने से रोकने के लिए मूल देश का सत्यापन लागू किया जाए। उपभोक्ता मामले मंत्रालय एवं BIS •    सभी डिस्पोजेबल ग्लव्स पर BIS प्रमाणन की आवश्यकताओं को लागू किया जाए, ताकि चिकित्सा उपयोग के लिए बिना प्रमाणन वाले ग्लव्स का आयात, बिक्री या उनकी दोबारा … Read more

पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में ट्रेनी सब इंस्पेक्टर की ट्रेनिंग के दौरान मौत

 रायपुर  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। चंद्रखुरी पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में ट्रेनी सब इंस्पेक्टर राजेश कोसरिया की ट्रेनिंग के दौरान मौत हो गई। जानकारी के अनुसार राजेश कोसरिया दौड़ रहे थे, इसी दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई। अस्पताल ले जाते वक्त उन्होंने दम तोड़ दिया। जानकारी के मुताबिक ट्रेनी सब इंस्पेक्टर राजेश कोसरिया की ट्रेनिंग सिर्फ एक सप्ताह पहले ही शुरू हुई थी। वह सात साल के लंबे इंतजार के बाद सब इंस्पेक्टर भर्ती के लिए चयनित हुए थे। आज सुबह जैसे ही अभ्यर्थियों को दौड़ने के लिए कहा गया, कुछ दूर दौड़ने के बाद राजेश की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। राजेश कोसरिया का नाम 10 मार्च को सीएम साय द्वारा सभी चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने की सूची में शामिल था। इस घटना के बाद मृतक के परिवार वालों ने जांच की मांग की है। परिवार का कहना है कि इस दुखद घटना की सही वजह का पता लगाया जाए।   recent visitors 37

मैंने 46 हजार औरतों की मदद की और… बेटे ने पत्नी पर आरोप लगाकर दी जान, मां का पोस्ट रुला देगा

मुंबई बेंगलुरु के अतुल सुभाष की तरह पत्नी पर उत्पीड़न का आरोप लगाकर जान देने वाले निशांत त्रिपाठी की मां ने इमोशनल पोस्ट लिखा है। मुंबई के विले पारले स्थित सहारा होटल में जाकर निशांत त्रिपाठी ने जान दे दी थी। ऐसा करने से पहले निशांत ने होटल के कमरे के गेट पर 'Do Not Disturb' लिख दिया था ताकि कोई आ न सके। कमरे की बुकिंग का समय समाप्त होने पर होटल स्टाफ ने खटखटाया तो कोई जवाब नहीं मिला। मास्टर की से भी जब लॉक नहीं खुल सका तो फिर दरवाजा तोड़ा गया और अंदर निशांत का शव बरामद हुआ। निशांत ने मौत से पहले एक सुसाइड नोट भी लिखा था, जिसमें पत्नी और उसकी मां को अपनी मौत की वजह बताया था। निशांत त्रिपाठी पेशे से एक अभिनेता थे। अब निशांत की मां नीलम चतुर्वेदी ने एक लंबा और इमोशनल पोस्ट लिखा है, जो सोशल मीडिया पर वायरल है। उन्होंने फेसबुक पर लिखे लंबे नोट में कहा कि मैंने सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर 46 हजार महिलाओं की मदद की। उनमें से 37 हजार महिलाओं को न्याय दिलाने में सफलता पाई। मैंने हजारों महिलाओं को ट्रेनिंग दी ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। लेकिन आज मैं खुद टूट चुकी हैं और एक जिंदा लाश जैसी मेरी स्थिति है। नीलम ने लिखा कि मैंने सोचा था कि बेटा मेरा अंतिम संस्कार करेगा, लेकिन क्या हुआ। मेरी बेटी प्राची को अपने बड़े भाई का अंतिम संस्कार करना पड़ा। उन्होंने लिखा कि मैंने जिंदगी में बहुत संघर्ष किए, लेकिन आज टूट गई हूं। 'आप मुझे जिंदा देख रहे हैं, पर मैं तो मर चुकी हूं' नीलम चतुर्वेदी लिखती हैं, ‘आप मुझे एक ज़िंदा इंसान के रूप में देख रहे हैं, लेकिन सच यह है कि मैं मर चुकी हूं। आज मैं खुद को एक जिंदा लाश की तरह महसूस कर रही हूं। मैंने 16 साल की उम्र से लेकर 45 सालों तक पूरी शिद्दत और ईमानदारी के साथ महिलाओं के अधिकारों, समाज में लैंगिक समानता लाने और भेदभाव मिटाने के लिए अपना हर एक लम्हा समर्पित किया। 18 साल की उम्र में पहली बार आंदोलन के दौरान गिरफ्तार हुई और फिर यह सिलसिला जारी रहा—अनगिनत संघर्ष, आंदोलन, न्याय के लिए लड़ाई। मैंने सखी केंद्र और अन्य माध्यमों से 46,000 से अधिक पीड़ित महिलाओं की समस्याओं को दूर करने में उनकी मदद की, 37,000 से अधिक महिलाओं को न्याय दिलाया, और हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें रोजगार और प्रशिक्षण दिलवाया। मैंने कभी कोई लालच नहीं किया। ना बैंक बैलेंस बनाया, ना संपत्ति जुटाई।’ भावुक मां ने लिखा- उसे मेरा अंतिम संस्कार करना था और… इसके आगे वह लिखती हैं, 'मेरी संपत्ति बस लोगों का प्यार और सम्मान था, जो मुझे देश-विदेश तक मिला। अपने दो बच्चों को अकेले पाला, और इस पर हमेशा गर्व किया। लेकिन मैंने कभी शिकायत नहीं की, बल्कि ईश्वर का भी शुक्रिया अदा करती रही। मैंने कभी भी प्रभु से शिकायत नहीं की मेरा बेटा, निशांत – मेरा सब कुछ मेरे दोनों बच्चे मुझे बहुत प्यार करते थे, लेकिन मेरा बेटा निशांत मेरा दोस्त, हमसफ़र और हमदर्द था। वह मेरी ताकत था, जिसने मुझे जीने और काम करने की ऊर्जा दी। मेरी जिंदगी अब खत्म हो गई है। मेरा बेटा, निशांत मुझे छोड़ कर चला गया। मैं अब एक जिंदा लाश बन गई हूं। उसे मेरा मृत्यु का संस्कार करना था, लेकिन मैंने आज अपने बेटे का दाह संस्कार "ECO-MOKSHA" मुंबई में कर दिया है। मेरी बेटी प्राची ने अपने बड़े भाई का अंतिम संस्कार किया। मुझे व मेरी बेटी प्राची को हिम्मत दो ताकि मैं इतना बड़ा वज्रपात सहन कर सकूं।' recent visitors 54

उद्योग मंत्री के प्रयासों से चार अंडरब्रिज, बरसाती नालों, पुल पुलियों, गौरव पथ का होगा निर्माण

रायपुर, कोरबा शहर समेत जिले को विकसित बनाने के क्रम में वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री  लखन लाल देवांगन के सशक्त प्रयासों से 150 से अधिक सड़क परियोजना, सिंचाई परियोजना, गौरव पथ, अंडरब्रिज, बायपास सड़क, नालों के साथ–साथ कई महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए बजट में स्वीकृति मिली है। प्रदेश की विष्णुदेव की सरकार में बीते सवा साल में कोरबा शहर के साथ–साथ जिले के सभी उपनगरीय व अन्य ग्रामीण इलाकों में विकास कार्य को रफ़्तार मिली है। 3 मार्च को वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा जारी किए गए राज्य के बजट में कोरबा जिले  में मुख्य तौर पर गोपालपुर से कटघोरा फोरलेन सड़क, कटघोरा से दीपका फोरलेन सड़क, गोपालपुर से कटघोरा तक मार्ग मजबूती करण कार्य, चोटिया से चिरमिरी तक फोरलेन सड़क, ध्यानचंद चौक कोरबा से बजरंग चौक तक 2 लेन. सड़क निर्माण, बजरंग चौक से परसाभाठा चौक बालको रिंग रोड, कोरबा 4 लेन निर्माण कार्य, रेल्वे स्टेशन कोरबा से गौमाता चौक तक बायपास मार्ग का निर्माण, एसपी ऑफिस से रजगामार बीटी रोड निर्माण कार्य, नॉनबिर्रा रामपुर बेहरचवा 27 किलोमीटर का उन्नयन के कार्य की स्वीकृति मिली है। इन स्थानों पर अंडरब्रिज की स्वीकृति     बजट में जिले के कई मार्गो पर रेल्वे क्रासिंग में अंडर ब्रिज के निर्माण की स्वीकृति मिली है। गौरतलब है की शहर के संजय नगर रेल्वे क्रासिंग पर अंडरब्रिज का निर्माण अब प्रारम्भ हो चुका है। कोरबा–गेवरा रेल लाइन के बालपुर रेल्वे क्रासिंग पर आरयूबी का निर्माण, कोरबा–गेवरा रेल लाइन के मड़वारानी रेल्वे क्रासिंग पर आरयूबी का निर्माण, कोरबा–गेवरा रेल लाइन के पताडी पर आरयूबी के निर्माण की स्वीकृति मिली है। शहर के इन बड़े नालों की मिली स्वीकृति    शहर के चार प्रमुख नालों के निर्माण के लिए नगरीय निकाय अधोसंरचना विकास के तहत स्वीकृति मिली है। इसमें पोड़ीबहार चर्च से हनुमान मंदिर तक आरसीसी नाला 2 करोड़, वार्ड क्रमांक 30 दादर रोड कलवर्ट से मानिकपुर मुक्तिधाम तक कलवर्ट व नाला निर्माण 2 करोड़, मेनन शॉप से जिला अस्पताल के सामने आरसीसी नाला 2 करोड़, दर्री जोन पीएमवाय साइट से लाटा तालाब आरसीसी नाला निर्माण 2 करोड़ की स्वीकृति मिली है। इन पुल–पुलियों के निर्माण की मिली स्वीकृति कोरबा–रानीरोड–सर्वमंगला मंदिर के मध्य हसदेव नदी पर रपटा कम लो लेवल पुल व पहुंच मार्ग का निर्माण, बालको उरगा रिंगरोड पर ढेगूरनाला पर उच्च स्तरीय पुल व पहुंच मार्ग का निर्माण, बेलाकछर से रोगबहरी मार्ग पर सारबहरा नाला पर उच्चस्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग, बड़गाँव नवापारा मार्ग पर चोरनई नदी में उच्च स्तरीय पुल समेत कुल 17 पुल निर्माण कार्य की स्वीकृति मिली है। कोरबा शहर में बनेगा 2.8 किलोमीटर लम्बा गौरव पथ का निर्माण     कोरबा शहर में 2.8 किलोमीटर लम्बा गौरव पथ के निर्माण की स्वीकृति मिली है। सीएसईबी चौक से जैन चौक–तानसेन चौक से कोसाबाड़ी चौक तक गौरव पथ का निर्माण होगा। वीआईपी मार्ग पर वाहनों के दबाव को देखते हुए इस मार्ग का कायाकल्प किया जायगा। बांकीमोंगरा के जल आवर्धन के लिए 8.20 करोड़ की मिली स्वीकृति    कोरबा जिला के दूसरे सबसे बड़े नगरीय निकाय बांकीमोंगरा नगर पालिका में पेयजल की समस्या लंबे समय से है। बांकीमोंगरा के जल आवर्धन के लिए 8.20 करोड़ की स्वीकृति मिली है। इन शासकीय दफ़्तरो का होगा कायाकल्प   रजगामार चौकी, दर्री सीएसपी कार्यलय का उन्नयन, राजपत्रित ट्रांजिट ओर अराजपत्रित ट्रांजिट हॉस्टल का निर्माण, कोरबा तहसील को मॉडल तहसील भवन का निर्माण होगा। उद्योग मंत्री का प्रयास रंग लाया, शहर से लेकर गांव की रफ़्तार होगी तेज     उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन द्वारा बजट में स्वीकृति के लिए सभी विभाग नगर निगम, पीडब्लूडी, सेतु निगम, जल संसाधन विभाग के अलग अलग विकास कार्यों का प्रस्ताव राज्य शासन को दिया गया था। मंत्री श्री देवांगन के प्रयासों से कार्यों को बजट में स्वीकृति मिली है। मंत्री श्री देवांगन के प्रयासों से कोरबा शहर में बीते एक साल में 400 करोड़ के कार्यों की स्वीकृति मिली थी, जिसके बहुत से कार्य पूर्ण हो चुके है, कुछ निर्माणाधीन है, कुछ कार्य टेंडर प्रक्रिया में है। recent visitors 47

अमिताभ बच्चन ने फिल्म बी हैप्पी के लिये अभिषेक बच्चन की तारीफ की

मुंबई, बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने बेटे अभिषेक बच्चन की आने वाली फिल्म बी हैप्पी के लिये तारीफ की। प्राइम वीडियो की ओरिजिनल फिल्म बी हैप्पी का ट्रेलर हाल ही में रिलीज़ हुआ है, जिसने दर्शकों के दिल को छू लिया है। इस फिल्म की कहानी शिव (अभिषेक बच्चन) की है, जो एक सिंगल फादर है और अपनी बेटी धारा (इनायत वर्मा) के साथ ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव से जूझ रहा है। अब इस फिल्म की तारीफ करने वालो में अमिताभ बच्चन का नाम भी जुड़ गया है। उन्होंने अभिषेक की परफॉर्मेंस पर गर्व जताते हुए अपनी खुशी जाहिर की है। अमिताभ बच्चन ने सोशल मीडिया लिखा, अभिषेक, एक पिता का गर्व, कितनी आसानी से एक किरदार से दूसरे किरदार में बदल जाते हो। बधाई हो बधाई, स्नेह। एक दूसरी पोस्ट में, अमिताभ बच्चन ने फिल्म की कहानी और अभिषेक की परफॉर्मेंस की तारीफ करते हुए लिखा, बेहद खूबसूरत कहानी… और अभिषेक, तुमने जिस तरह एक फिल्म से दूसरी फिल्म तक अपने किरदार को परिभाषित किया है, वो कमाल है। ढेर सारा आशीर्वाद और प्यार। बी हैप्पी को रेमो डिसूजा एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले लिजेल रेमो डिसूजा ने प्रोड्यूस किया है और इसे रेमो डिसूजा ने निर्देशित किया है। यह दिल छू लेने वाली डांस ड्रामा फिल्म है, जिसमें अभिषेक बच्चन के साथ नोरा फतेही, नासर, जॉनी लीवर और हरलीन सेठी जैसे दमदार कलाकार नज़र आएंगे। बी हैप्पी भारत समेत 240 से ज्यादा देशों और टेरिटरीज में 14 मार्च को प्राइम वीडियो पर एक्सक्लूसिव रिलीज़ होने जा रही है। फिल्म तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ में भी डब होकर रिलीज होगी।   recent visitors 57

SBI ने किया बड़ा कारनामा, बैंककर्मियों ने कैंटीन व्वॉय के साथ मिलकर 13 ‘मुर्दों’ के नाम से लोन पास कराकर निकाला पैसा

गोरखपुर गोरखपुर में जंगल कौड़िया स्थित एसबीआई की शाखा से 70.20 लाख रुपये का फर्जी तरीके से लोन कर गबन किया गया है। बैंककर्मियों ने कैंटीन व्वॉय के साथ मिलकर 13 ‘मुर्दों’ के नाम से लोन पास कराकर पैसा निकाल लिया। यह मुर्दे रिटायर्ड कर्मचारी थे जिनका बैंक में पेंशन खाता था और उनकी मौत हो चुकी थी। गबन के मामले में गुरुवार को लखनऊ से आए एसबीआई के सहायक महाप्रबंधक ने जंगल कौड़िया चौकी पर पहुंच कर अपनी जांच रिपोर्ट विवेचक को सौंप दी। अब इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस इस मामले में आगे की कार्रवाई करेगी। दरअसल, जंगल कौड़ियां स्थित भारतीय स्टेट बैंक से कूटरचित दस्तावेज का प्रयोग कर पेंशनर्स व मुर्दों के खातों के साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड के खातों से लोन स्वीकृत कर जालसाजी की गई है। पीपीगंज पुलिस ने इस मामले में बैंक प्रबंधक, कैशियर और कैंटीन व्वॉय के खिलाफ केस दर्ज किया था। जिसमें कैशियर अमरेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजवाया तो वहीं कैंटीन व्वॉय पंकज ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। जंगल कौड़िया शाखा के खाताधारक राजू ने तारामंडल स्तिथ भारतीय स्टेट बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय पर 4 जनवरी 2024 को शिकायत कर बताया था कि उनके खाते से फर्जी तरीके से 3 लाख रुपए बैंककर्मी ने कैंटीन व्वॉय पंकज मणि त्रिपाठी के खाते में ट्रांसफर कर रुपए को हड़प लिए हैं। जिसके बाद इस तरीके की शिकायतों की तादात अचानक बढ़ गई। क्षेत्रीय कार्यालय ने एक अधिकारी के नेतृत्व में टीम नियुक्त कर मामले की जांच कराई। जिसमे पाया गया कि बैंक के शाखा प्रबंधक कुमार भास्कर भूषण, अकाउंटेंट अमरेंद्र कुमार सिंह व कैंटीन व्वॉय पंकज मणि त्रिपाठी ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर पेंशन खाताधारकों, किसान क्रेडिट कार्ड खाताधारकों तथा अन्य प्रकार के खाताधारकों के खातों से रुपए की जालसाजी की है। पीपीगंज पुलिस ने तीनों आरोपियों पर केस दर्ज कर जांच में जुटी रही। उधर, बैंक की जांच के बाद प्रबंधक कुमार भास्कर भूषण व अकाउंटेंट अमरेंद्र को निलम्बित कर कर विभागीय जांच बैठाई गई। जांच के दौरान कैंटीन व्वॉय पंकज मणि त्रिपाठी मुख्य आरोपी पाया गया। करोड़पति बन गया कैंटीन ब्वाय: जंगल कौड़िया क्षेत्र के बलुवा गांव निवासी 20 वर्षीय पंकज मणि त्रिपाठी बैंक में कैंटीन ब्वॉय बन गया। पंकज की बैंक के अंदर काफी अच्छी पकड़ बन गई थी। इलाके के सेवानिवृत्ति लोगों को निशाना बना कर पंकज ने मिली भगत करते हुए मरे हुए व्यक्तियों का लोन करवाना शुरू किया। जालसाजी से वह करोड़पति बन गया। केसीसी के भी तीन फर्जी लोन स्वीकृत जांच अधिकारी सहायक महा प्रबंधक सुरेश कुमार ने गुरुवार को जंगल कौड़िया चौकी पर पहुंच कर 78 पेज की अपनी जांच रिपोर्ट चौकी इंचार्ज को सौंप दी। रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि 71 लाख 20 हजार गबन जांच में पाया गया। इसमें पेंशन लोन से संबंधित,/ पशु लोन के संबंधित लोगों का नाम सामने आया है। बैंक कर्मियों ने जिन लोगों को लोन स्वीकृत कर जालसाजी की है उनकी संख्या 18 है जबकि इसमें मृत पेंशन धारक की संख्य 13 है। जांच में सामने आया है कि केकेसी के तीन फर्जी लोन स्वीकृत किए गए हैं। recent visitors 47

केंद्रीय मंत्री और सांसद ने बदल दिया सड़क का नाम, यह तुगलक लेन नहीं, स्वामी विवेकानंद मार्ग है

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर को सरकारी आवास दिल्ली के तुगलक लेन में मिला है, लेकिन उन्होंने घर पर लगी नेमप्लेट में स्वामी विवेकानंद मार्ग लिखवा लिया है। शुक्रवार को यह बदलाव किया गया, जिसमें उनके घर का पता तुगलक लेन नहीं बल्कि स्वामी विवेकानंद मार्ग बताया गया है। उनके अलावा भाजपा के एक अन्य सांसद दिनेश शर्मा ने भी ऐसा ही किया है। उन्होंने इसकी जानकारी गुरुवार को एक्स पर दी थी। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'आज नई दिल्ली स्थित नए आवास स्वामी विवेकानंद मार्ग (तुगलक लेन) में सपरिवार विधि विधानपूर्वक, पूजन-अर्चन कर गृह प्रवेश किया।' इसके साथ ही उन्होंने तस्वीरें भी शेयर की हैं, जिसमें से एक में पते के तौर पर स्वामी विवेकानंद मार्ग लिखा दिखता है। यह फैसला भाजपा की दिल्ली में बनी नई सरकार की लाइन पर ही दिखता है। नई सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि नजफगढ़ का नाम बदलकर नाहरगढ़ कर दिया जाए। इसके अलावा मोहम्मदपुर गांव का नाम माधवपुरम किया जाए और मुस्तफाबाद का नाम बदलकर शिवपुरी कर दिया जाए। इस बीच लुटियन दिल्ली में भी केंद्रीय मंत्री और सांसद ने खुद ही अपने नेम प्लेट में नया नाम लिख दिया है। हालांकि तुगलक लेन नाम भी हटाया नहीं गया है। बताया कैसे बोर्ड पर लिखा गया स्वामी विवेकानंद मार्ग इस पर दिनेश शर्मा की सफाई भी आ गई है और उन्होंने नेम प्लेट पर विवेकानंद मार्ग लिखे जाने की अलग ही वजह बताई है। उन्होंने कहा, यह सामान्य प्रक्रिया है कि जब कोई किसी घर में जाता है तो नाम पट्टिका लगा दी जाती है। मैं वहां नहीं गया था, मैंने नहीं देखा था, जब मुझसे उससे संबंधित लोगों ने पूछा कि किस तरह की नाम पट्टिका होनी चाहिए तो मैंने कहा कि आसपास के हिसाब से होनी चाहिए। आस-पास के घरों पर विवेकानंद मार्ग लिखा था और नीचे तुगलक लेन लिखा था, दोनों एक साथ लिखे थे।' सांसद बोले- आज भी नेमप्लेट पर तुगलक लेन लिखा है उन्होंने कहा कि नेमप्लेट पर आज भी तुगलक लेन लिखा है और सुविधा के लिए विवेकानंद मार्ग लिख दिया है। मैंने कर्मचारियों से पूछा तो उन्होंने कहा कि गूगल पर वह स्थान विवेकानंद रोड आता है, ऐसा इसलिए लिखा है ताकि लोगों को विवेकानंद रोड और तुगलक लेन में भ्रम न हो… मैं जानता हूं कि सांसद को सड़क का नाम बदलने का अधिकार नहीं है। ये राज्य सरकार और नगर निकाय का काम है, इसके लिए एक प्रक्रिया होती है… मुझे इसे बदलने का न अधिकार था, न है, न मैंने किया है। सामान्य प्रक्रिया में पेंटर ने वही नाम लिखा होगा जो आस-पास के घरों पर लिखा था, इसका मतलब यह नहीं है कि मैंने कोई स्थान(का नाम) बदला है…। recent visitors 49